NCERT को मिला ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा: भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए इसका क्या मतलब है?

केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सलाह पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को “डीम्ड यूनिवर्सिटी” का दर्जा दे दिया है। इससे अब एनसीईआरटी को विश्वविद्यालय की तरह काम करने की आजादी मिलेगी, लेकिन इसके साथ कई जरूरी शर्तें भी लागू की गई हैं।

NCERT ने 2025 में सभी शर्तें पूरी करने की रिपोर्ट सरकार को दी। इसके बाद यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने इस रिपोर्ट की जांच की और इसे सही पाया। यूजीसी आयोग ने जनवरी 2026 में अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे अंतिम रूप दे दिया।

NCERT के 6 प्रमुख संस्थानों को शामिल किया गया

एनसीईआरटी ने यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के लिए आवेदन किया था। यह आवेदन यूजीसी पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किया गया था। यूजीसी ने इस आवेदन की जांच की और 2023 में कुछ शर्तों के साथ “लेटर ऑफ इंटेंट” (LOI) जारी किया। इसमें एनसीईआरटी को 3 साल के अंदर सभी शर्तें पूरी करने के लिए कहा गया।

इस प्रस्ताव में एनसीईआरटी के 6 प्रमुख संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें अजमेर (राजस्थान), भोपाल (मध्य प्रदेश), भुवनेश्वर (ओडिशा), मैसूर (कर्नाटक), शिलांग (मेघालय) और भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान शामिल हैं। इन सभी संस्थानों को मिलाकर एनसीईआरटी को एक विशेष श्रेणी में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।

कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा

सरकार ने एनसीईआरटी को कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा दिया है। संस्थान अपनी संपत्ति या फंड बिना सरकार और यूजीसी की अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकता। साथ ही, वह किसी भी तरह की मुनाफा कमाने वाली गतिविधि में शामिल नहीं होगा।

पढ़ाई एवं कोर्स से जुड़े नियम

एनसीईआरटी को अपने सभी कोर्स यूजीसी और अन्य शिक्षा संस्थाओं के नियमों के अनुसार ही चलाने होंगे। नए कोर्स, ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस भी तय नियमों के तहत ही शुरू किए जा सकेंगे। छात्रों के एडमिशन, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े सभी नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।

शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा

एनसीईआरटी को रिसर्च, पीएचडी और नए शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, उसे NAAC और NBA जैसी संस्थाओं से मान्यता लेनी होगी। इसके अलावा, संस्थान को हर साल NIRF रैंकिंग में भी भाग लेना अनिवार्य होगा, ताकि उसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन का आकलन किया जा सके।

E20 पेट्रोल क्या है? 2026 से पूरे देश में लागू नई व्यवस्था

1 अप्रैल से, पूरे देश में फ़्यूल स्टेशन अब ऐसा पेट्रोल सप्लाई कर रहे हैं जिसमें 20% इथेनॉल मिला हुआ है। वे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए इसे लागू कर रहे हैं। इसके साथ ही, भारत ने पूरे देश में E20 पेट्रोल की शुरुआत करके स्वच्छ और ज़्यादा टिकाऊ मोबिलिटी की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इस कदम का मकसद प्रदूषण कम करना, तेल का आयात घटाना और साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करना है।

भारत में E20 पेट्रोल अब स्टैंडर्ड: क्या बदला है?

केंद्र सरकार ने भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में E20 ईंधन को स्टैंडर्ड पेट्रोल बना दिया है।

भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे देश में ईंधन की एक जैसी क्वालिटी सुनिश्चित करें और साथ ही ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के नियमों का भी पालन करें। इसके बाद, वे पूरे देश में लगातार E20 ईंधन की सप्लाई करें। इस कदम से भारत के लंबे समय से चल रहे इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा।

E20 फ्यूल क्या है और क्यों जरूरी है?

1 अप्रैल से देशभर में E20 फ्यूल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसमें:

  • 20 प्रतिशत एथेनॉल
  • 80 प्रतिशत पेट्रोल

का मिश्रण होता है।

इसका उद्देश्य:

  • ईंधन आयात कम करना
  • प्रदूषण घटाना

एथेनॉल की मुख्य विशेषताएं

  • इसकी ऑक्टेन रेटिंग काफी ऊँची होती है, जो लगभग 95 RON के आस-पास होती है।
  • साथ ही, सामान्य पेट्रोल की तुलना में इसका दहन (combustion) अधिक स्वच्छ होता है।
  • और इससे कार्बन उत्सर्जन तथा कार्बन फुटप्रिंट भी कम होता है।
  • ये सभी बातें E20 को पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल ईंधन का विकल्प बनाती हैं।

E20 पेट्रोल आपकी कार पर कैसे असर डालता है

E20 ईंधन का असर काफी हद तक व्यक्ति के वाहन के प्रकार पर निर्भर करता है।

नए वाहनों के लिए

  • कारों जैसे ज़्यादातर आधुनिक वाहन E20-पेट्रोल के साथ कम्पैटिबल होते हैं और उन्हें अपग्रेडेड ईंधन सिस्टम के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • और ये मॉडल बिना किसी दिक्कत के ज़्यादा एथेनॉल मिश्रण को भी संभाल सकते हैं।
  • इन वाहनों को परफॉर्मेंस से जुड़ी समस्याओं का सामना करने की संभावना कम है।

पुरानी गाड़ियों के लिए

पुरानी कारों के यूज़र्स E20 का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना होगा—जैसे कि उन्हें फ्यूल एफिशिएंसी में थोड़ी कमी और इंजन की परफॉर्मेंस में मामूली बदलावों का सामना करना पड़ सकता है।

भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम

भारत कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग को धीरे-धीरे बढ़ा रहा है।

  • पिछला लक्ष्य: 10% ब्लेंडिंग (E10)
  • वर्तमान बदलाव: 20% ब्लेंडिंग (E20)

भविष्य का लक्ष्य बायोफ्यूल और ग्रीन एनर्जी को ज़्यादा से ज़्यादा अपनाना है।

कक्षा तीन से आठ के लिए CT और AI करिकुलम लॉन्च: CBSE

सीबीएसई बोर्ड के मान्यता प्राप्त स्कूलों से लेकर 22 राज्यों के सरकारी स्कूलों के कक्षा तीसरी से आठवीं कक्षा के छात्र अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और कंप्यूटेशनल थिकिंग (सीटी) के नए पाठ्यक्रम से पढ़ाई करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 01 अप्रैल 2026 को दिल्ली में कक्षा तीसरी से आठवीं कक्षा तक के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और कंप्यूटेशनल थिकिंग का नया पाठ्यक्रम जारी किया। यह व्यवस्था इसी सत्र से लागू होगी।

सीटी और एआई पाठ्यक्रम सभी को पढ़ाया जाएगा

शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि तीसरी से कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) और एआई पाठ्यक्रम सभी को पढ़ाया जाएगा। नए पाठ्यक्रम में संरचित मॉड्यूल, व्यापक शिक्षक पुस्तिकाएं और सशक्त छात्र मूल्यांकन ढांचा भी है। हमारा मकसद, आज के समय में बच्चों को डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करना है। कंप्यूटेशनल थिकिंग एआई की नींव है। शिक्षा के लिए एआई, शिक्षा में एआई की परिकल्पना के अनुरूप, यह पहल युवा दिमागों में आलोचनात्मक सोच, डिजाइन अभिविन्यास और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देकर संवर्धित शिक्षा की दिशा में एक निर्णायक बदलाव देगी।

भविष्य की जरूरतों के आधार पर तैयार

एनसीईआरटी के विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे के तहत इसे भविष्य की जरूरतों के आधार पर तैयार किया है। इसमें स्कूली शिक्षा की शुरुआत से छात्र सीटी कौशलऔर एआई से हर दिन की समस्याओं की पहचान कर उसका हल निकालना सीखेंगे। इसका मकसद, छात्रों को शुरुआती स्तर पर टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करना है, ताकि भारत एआई में सुपर हब बनाना है।

बड़े सवालों को छोटे हिस्सों में हल करना

पाठ्यक्रम को रोचक और आसान बनाया गया है। इसमें गेम, पजल और एक्टिविटी से सीखाया जाएगा। बड़े सवालों को छोटे हिस्सों में हल करना, ग्रुप डिस्कशन और टीमवर्क पर फोकस है। जबकि परीक्षा में भी बदलाव होगा, जिसमें अब सिर्फ रटने पर नहीं, बल्कि समझ और कौशल पर ध्यान दिया जाएगा। सीटी आधारित सवाल और प्रैक्टिकल गतिविधियां होगी, जिसे शिक्षकों द्वारा लगातार मूल्यांकन होगा। बच्चों की रचनात्मक सोच और समझ को प्राथमिकता रहेगी।

गणनात्मक सोच क्षमताओं का विकास

प्रौद्योगिकी आधारित कंप्यूटिंग में भारत के नेतृत्व को वैश्विक मान्यता मिलने के साथ, यह पाठ्यक्रम छात्रों को डिजिटल भविष्य से सार्थक रूप से जुड़ने और उसे आकार देने में सक्षम बनाएगा। सीटी कौशल के माध्यम से विकसित एआई तत्परता से छात्रों में तार्किक सोच, समस्या समाधान, पैटर्न पहचान आदि जैसी गणनात्मक सोच क्षमताओं का विकास करेगा।

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य

इससे वे प्रतिदिन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका और उपयोग को समझ सकेंगे। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य नवाचार, आलोचनात्मक सोच और नैतिक निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ- साथ गणनात्मक सोच, डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग में मजबूत आधार तैयार करना है।

 

सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक भारत जनगणना 2027 के ब्रांड एंबेसडर नियुक्त

भारत सरकार ने मशहूर रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक को जनगणना 2027 के लिए ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। यह घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा की गई है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को देश की पहली डिजिटल जनगणना में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। वे अपनी प्रभावशाली रेत कला के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं, और वे अपनी रचनात्मकता का उपयोग जनगणना के आंकड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए करेंगे। इसके साथ ही, यह पूरे भारत के लोगों को इस राष्ट्रव्यापी अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए भी प्रेरित करेगा।

सुदर्शन पटनायक कौन हैं?

वे ओडिशा राज्य के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित रेत कलाकार हैं। उन्हें कला को सामाजिक जागरूकता और अभियानों के साथ जोड़ने के लिए भी व्यापक रूप से पहचाना जाता है।

कला और अपनी अनूठी कलाकृतियों के माध्यम से सार्वजनिक संदेश देने में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2014 में पद्म श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

उन्होंने 2017 में पुरी समुद्र तट पर दुनिया का सबसे बड़ा रेत का किला बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था, जिसकी ऊँचाई 48 फीट 8 इंच थी।

पिछले कुछ वर्षों में, उनकी कलाकृतियों ने जलवायु परिवर्तन और COVID-19 जागरूकता जैसे प्रमुख मुद्दों को उजागर किया है, जिससे वे भारत की बड़ी जनगणना 2027 का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक आदर्श विकल्प बन गए हैं।

जनगणना 2027 के बारे में

जनगणना 2027 की शुरुआत इस बात का संकेत है कि भारत जिस तरह से जनसांख्यिकीय डेटा इकट्ठा और प्रबंधित करता है, उसमें एक बड़ा बदलाव आने वाला है।

पहली बार, गणना करने वाले पारंपरिक कागज़ी तरीकों के बजाय स्मार्टफोन-आधारित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे।

इस डिजिटल बदलाव से सटीकता और कार्यक्षमता में सुधार होने, साथ ही डेटा प्रोसेसिंग में होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करेगा।

इसके अतिरिक्त, नागरिकों के पास अब ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल’ के माध्यम से भाग लेने का विकल्प भी होगा; भारत की जनगणना के इतिहास में यह सुविधा पहले कभी शुरू नहीं की गई थी।

जनगणना 2027 के दो चरण

जनगणना दो व्यवस्थित चरणों में आयोजित की जाएगी, ताकि व्यापक डेटा संग्रह सुनिश्चित किया जा सके।

चरण I: मकानों की सूची बनाना और आवास जनगणना (HLO)

यह पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इसका मुख्य ध्यान निम्नलिखित से संबंधित डेटा एकत्र करने पर होगा:

  • आवास की स्थितियाँ
  • सुविधाओं की उपलब्धता
  • पारिवारिक संपत्तियाँ

इसके अलावा, गणना करने वालों के घर-घर जाकर दौरे शुरू करने से पहले, 15 दिनों की ‘स्व-गणना’ (self-enumeration) की सुविधा भी दी जाएगी।

चरण II: जनसंख्या गणना

यह फरवरी 2027 के लिए निर्धारित है, और इस चरण में व्यक्तिगत स्तर का विस्तृत डेटा इकट्ठा किया जाएगा, जैसे कि:

  • जनसांख्यिकी
  • शिक्षा
  • प्रवासन के पैटर्न
  • प्रजनन संबंधी विवरण

मुख्य तारीखें और क्षेत्रीय विविधताएँ जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए

भारत के अधिकांश क्षेत्रों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 (00:00 बजे) है।

इसके अलावा, लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे बर्फ़ से ढके और दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर, 2026 है।

जनगणना प्रक्रिया के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, विभिन्न राज्यों को मकानों की सूची बनाने हेतु विशेष समय-सीमाएँ निर्धारित की गई हैं।

स्व-गणना: भारत के लिए एक नई पहल

जनगणना 2027 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ‘स्व-गणना’ (Self-enumeration) की शुरुआत है।

अब नागरिक ये काम कर सकते हैं:

  • अपनी जनगणना से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।
  • साथ ही, गणना करने वालों का इंतज़ार करने से भी बच सकते हैं।
  • खुद जानकारी दर्ज करके डेटा की सटीकता सुनिश्चित कर सकते हैं।

यह पोर्टल और मोबाइल ऐप 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिससे भारत की विविध आबादी तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।

IAS चंचल कुमार ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव का पदभार संभाला

चंचल कुमार ने 1 अप्रैल, 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। श्री चंचल कुमार बिहार कैडर के 1992 बैच के IAS अधिकारी हैं और वे संजय जाजू का स्थान लेंगे। इसके साथ ही, श्री संजय जाजू को अब पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है।

चंंचल कुमार I&B सचिव नियुक्त: इसका क्या मतलब है?

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव के तौर पर चंचल कुमार की नियुक्ति एक अहम प्रशासनिक नियुक्ति है।

यह मंत्रालय देश में मीडिया, प्रसारण और डिजिटल संचार को विनियमित करने में अहम भूमिका निभाता है। यह दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सार्वजनिक प्रसारकों की देखरेख भी करता है।

इसके अलावा, यह सरकारी संचार और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के प्रबंधन के लिए भी ज़िम्मेदार है।

अपने विविध अनुभव के साथ, कुमार से नीति कार्यान्वयन और डिजिटल मीडिया प्रशासन को मज़बूत करने की उम्मीद की जाती है।

चंंचल कुमार की प्रशासनिक यात्रा

चंंचल कुमार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में सचिव के रूप में भी कार्य किया।

उन्होंने भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर भी कार्यभार संभाला।

उन्होंने नेशनल हाइवेज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के प्रबंध निदेशक के रूप में भी सेवाएँ दीं और रणनीतिक राजमार्ग तथा बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में अपना योगदान दिया।

भारत सरकार और राज्य सरकार में प्रमुख भूमिकाएँ

बिहार सरकार में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव के पद शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्हें कई जिलों में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करने का अनुभव प्राप्त है, जिसके दौरान उन्होंने शासन-व्यवस्था में सुधार किया, लोक प्रशासन को सुदृढ़ बनाया और क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान किया।

चंचल कुमार की शैक्षिक पृष्ठभूमि

उन्होंने भारत के शीर्ष संस्थानों में से एक, IIT कानपुर से B.Tech और M.Tech की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में Ph.D. भी पूरी की है।

अपनी इन शैक्षिक उपलब्धियों के माध्यम से, उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर में एक सुदृढ़ अकादमिक और नीतिगत पृष्ठभूमि का समावेश किया है।

नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ लेंगे – आगे क्या?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल, 2026 को राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेने वाले हैं। राज्यसभा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, वह जल्द ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इस कदम को ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक राज्य की सेवा की है और वह राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब राज्य को एक नया मुख्यमंत्री मिलेगा, और बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।

राज्य की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति की ओर एक रणनीतिक बदलाव

उन्होंने पहले यह इच्छा ज़ाहिर की थी कि अगर उन्हें मौका मिला, तो वे संसद के दोनों सदनों में सेवा करना चाहेंगे। राज्यसभा में जाने के इस कदम के साथ, वे अपने करियर की उस पुरानी महत्वाकांक्षा को पूरा कर रहे हैं।

दो दशकों से भी ज़्यादा समय तक बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा करने और कई चुनावी जीत हासिल करने के बाद, उनका यह बदलाव इस बात का संकेत देता है कि:

  • राज्य की सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे बाहर निकलना
  • राष्ट्रीय स्तर पर नीति-निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना
  • साथ ही, बिहार में नेतृत्व की गतिशीलता में भी बदलाव आना

बिहार में नीतीश कुमार की विरासत

नीतीश कुमार का कार्यकाल बुनियादी ढांचे और शासन-प्रशासन में सुधारों से जुड़ा रहा है। साथ ही, कानून-व्यवस्था में सुधारों और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

उन्होंने बिहार की जनता को उनके निरंतर विश्वास के लिए श्रेय दिया है। उनके शासनकाल में विभिन्न पहलों के माध्यम से राज्य का चेहरा ही बदल गया है।

नीतीश कुमार के प्रवेश के साथ ही उनका चार सदनों वाला विधायी करियर पूरा हुआ

जैसे ही वे ‘काउंसिल ऑफ़ स्टेट्स’ (राज्यसभा) के सदस्य बने, उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर लिया।

कुमार इससे पहले इन सदनों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं:

  • लोकसभा (संसद का निचला सदन)
  • बिहार विधानसभा
  • बिहार विधान परिषद

हालांकि, वे इससे पहले कभी राज्यसभा के सदस्य नहीं रहे थे; लेकिन अब इसके साथ ही वे उन गिने-चुने नेताओं के छोटे से समूह में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने इन चारों सदनों में अपनी सेवाएं दी हैं। वे लालू प्रसाद यादव और दिवंगत सुशील कुमार मोदी जैसी हस्तियों की कतार में खड़े होंगे।

गुड फ्राइडे 2026: जानें क्यों नहीं बोलते हैं ‘हैप्पी गुड फ्राइडे’?

गुड फ्राइडे ईसाई धर्म के सबसे पवित्र दिनों में से एक है। वर्ष 2026 में यह दिन 3 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन ईसा मसीह की शहादत और मानवता के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। यह दिन ‘होली वीक’ (पवित्र सप्ताह) के दौरान मनाया जाता है, और इस अवसर पर दुनिया भर में लोग प्रार्थना, उपवास और गहन चिंतन करते हैं। गुड फ्राइडे की तारीख हर साल बदलती रहती है, क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर से जुड़ी होती है।

गुड फ्राइडे क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?

  • गुड फ्राइडे एकमात्र ईसाई त्योहार है जो ईसा मसीह की तकलीफ़ और मौत को याद करता है।
  • ईसाई मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह को रोमन शासन वाले जूडिया में पोंटियस पिलातुस के आदेश पर सूली पर चढ़ाया गया था।
  • यह दिन केवल उत्सव मनाने का ही नहीं, बल्कि शोक, प्रार्थना और आध्यात्मिक चिंतन का भी है।
  • दुनिया भर के चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जाती हैं, और उनके अनेक अनुयायी यीशु के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए उपवास रखते हैं।

गुड फ्राइडे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गुड फ्राइडे की शुरुआत पहली शताब्दी से मानी जा सकती है।

सुसमाचारों के अनुसार, यीशु को गिरफ़्तार किया गया, उन पर मुक़दमा चलाया गया और उन्हें कलवारी—जिसे गोलगोथा भी कहा जाता है—में क्रूस पर चढ़ाकर मृत्युदंड दिया गया।

शुरुआती ईसाइयों के लिए, यह दिन गहरे शोक और मातम का प्रतीक है। समय के साथ, यह एक अत्यंत आध्यात्मिक अनुष्ठान बन गया है और ‘पवित्र सप्ताह’ (Holy Week) की परंपराओं का एक केंद्रीय हिस्सा है, जो रविवार को पड़ने वाले ईस्टर पर्व तक चलता है।

ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे का महत्व

दुनिया भर के ईसाइयों के लिए गुड फ्राइडे का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशाल है।

यह इन बातों का प्रतीक है:

  • बलिदान: यीशु मसीह ने मानवता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
  • मुक्ति: यह विश्वास भी है कि उनकी मृत्यु ने इंसानी पापों का प्रायश्चित किया।
  • क्षमा: यह करुणा और दया की याद भी दिलाता है।

यह दिन लोगों को विनम्रता, प्रेम और आस्था जैसे मूल्यों पर चिंतन करने के लिए भी प्रेरित करता है।

इसे ‘गुड फ्राइडे’ क्यों कहा जाता है?

गुड फ्राइडे में ‘गुड’ शब्द का इस्तेमाल शायद अजीब लग सकता है, खासकर इस बात को देखते हुए कि यह दिन दुख और शोक से जुड़ा हुआ है।

हालाँकि, ऐसा माना जाता है कि इस संदर्भ में ‘Good’ का अर्थ पवित्र या पावन है। यह नाम इस विश्वास को दर्शाता है कि यीशु के बलिदान ने मानवता के लिए आशा और मुक्ति लाई है।

गुड फ्राइडे कैसे मनाया जाता है?

गुड फ्राइडे मनाने का दिन नहीं है, बल्कि शांति और सोचने का दिन है। इस दिन लोग अपने गलत कामों को याद करते हैं और ईसा मसीह से माफी मांगते हैं। लोग ज्यादा बोलने से बचते हैं और दिन को सादगी से बिताते हैं। चर्च में खास प्रार्थना होती है, जहां लोग मिलकर प्रार्थना करते हैं और क्रॉस के सामने सिर झुकाते हैं। कई जगहों पर जुलूस भी निकाले जाते हैं, जिसमें ईसा मसीह के आखिरी समय को दिखाया जाता है। कुछ लोग इस दिन जरूरतमंदों की मदद भी करते हैं।

 

अश्विनी भिड़े बनीं पहली महिला BMC कमिश्नर

अश्विनी भिड़े को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की पहली महिला नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति की घोषणा 31 मार्च को की गई थी, और इसे मुंबई में कुशल शासन तथा नागरिक परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की दिशा में एक अच्छा निर्णय माना जा रहा है। वह भूषण गगरानी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कार्यभार संभालेंगी और 2030 तक इस पद पर रहेंगी।

अश्विनी भिड़े कौन हैं?

  • अश्विनी भिड़े महाराष्ट्र कैडर की एक वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। वे अपने मज़बूत प्रशासनिक कौशल और अपने करियर में बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को संभालने के अपने ट्रैक रिकॉर्ड के लिए जानी जाती हैं।
  • उन्होंने एक परिणाम-उन्मुख नौकरशाह के तौर पर और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा परिवहन नियोजन के क्षेत्र में एक विशेषज्ञ के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। वे उन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए भी जानी जाती हैं, जिनका नेतृत्व उन्होंने किया है।
  • उनकी नियुक्ति शीर्ष नागरिक प्रशासनिक भूमिकाओं में लैंगिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

करियर की मुख्य बातें और अहम योगदान

इन वर्षों में, अश्विनी भिडे ने महाराष्ट्र प्रशासन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।

मुंबई मेट्रो परियोजनाओं में नेतृत्व

  • वह मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) की प्रबंध निदेशक के तौर पर अपनी भूमिका के लिए व्यापक रूप से जानी जाती हैं, और मुंबई मेट्रो लाइन 3 (कोलाबा-बांद्रा-SEEPZ) परियोजना के क्रियान्वयन में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
  • उनके कार्य ने उनके सशक्त परियोजना प्रबंधन कौशल और जटिल शहरी बुनियादी ढांचा चुनौतियों से निपटने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया है।
  • उन्होंने शहरी विकास और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी विभिन्न प्रशासनिक भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दी हैं।

BMC क्या है?

बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) भारत की सबसे अमीर म्युनिसिपल संस्था है। BMC मुंबई के नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार है। BMC का नेतृत्व करना भारत में सबसे चुनौतीपूर्ण प्रशासनिक भूमिकाओं में से एक माना जाता है।

लोकसभा ने आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती के लिए प्रस्ताव पारित किया

लोकसभा ने प्रस्ताव पारित कर दिया है और अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित कर दिया गया है। यह कदम राज्य की राजधानी संरचना को लेकर वर्षों से चल रही राजनीतिक बहस और नीतिगत बदलावों के बाद उठाया गया है। यह कदम संसद में बनी मज़बूत आम सहमति को दर्शाता है और साथ ही राज्य में चल रही राजनीतिक बहसों पर भी विराम लगाता है।

अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित किया गया

लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में संशोधन किया है और आधिकारिक तौर पर अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित किया है।

यह संशोधन:

  • धारा 5 के तहत पहले के प्रावधान की जगह लेगा
  • स्पष्ट रूप से यह बताएगा कि अमरावती ही नई राजधानी होगी
  • और 2 जून, 2024 से पूर्वव्यापी रूप से (पिछली तारीख से) प्रभावी होगा

साझा राजधानी से एकल राजधानी व्यवस्था की ओर

2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, हैदराबाद ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में कार्य किया। और यह व्यवस्था 10 वर्षों तक जारी रहने वाली थी।

कानून के अनुसार, अंततः हैदराबाद केवल तेलंगाना की राजधानी बन जाएगा, और आंध्र प्रदेश को अपनी अलग राजधानी स्थापित करनी होगी। इस कदम से, एक लंबे समय से लंबित आवश्यकता पूरी हो गई है।

अमरावती का विकास: दृष्टिकोण और प्रगति

  • अमरावती शहर को राजधानी बनाने का विचार सबसे पहले N. चंद्रबाबू नायडू ने अपने पिछले कार्यकाल (2014-2019) के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में ज़ोर-शोर से आगे बढ़ाया था।
  • विभिन्न विकास कार्यों में एक आधुनिक ग्रीनफ़ील्ड राजधानी शहर की योजना शामिल है। साथ ही, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक भवनों में निवेश भी किया गया है। इसके अलावा, कृष्णा नदी के तट पर इसकी रणनीतिक स्थिति भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • सरकार ने अमरावती को पूरी तरह से कार्यरत राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए प्रशासनिक और बुनियादी ढाँचे से जुड़े उपायों में पहले ही महत्वपूर्ण बदलाव करने शुरू कर दिए हैं।

राजनीतिक बदलाव: तीन राजधानियों से एक राजधानी की ओर

राज्य की राजधानी का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा गया है।

पिछले मॉडल (तीन राजधानियों की योजना) के तहत—इस योजना को YS जगन मोहन रेड्डी ने पेश किया था, जो उस समय (2019-2024) राज्य के मुख्यमंत्री थे।

  • विशाखापत्तनम – कार्यकारी (प्रशासनिक) राजधानी
  • अमरावती – विधायी राजधानी
  • कुरनूल – न्यायिक राजधानी

इस तरह के विकेंद्रीकृत मॉडल का उद्देश्य संतुलित क्षेत्रीय विकास करना था, लेकिन इसे आलोचनाओं और कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।

दिल्ली सरकार ने ‘लखपति बिटिया योजना’ शुरू की

दिल्ली राज्य सरकार ने ‘लखपति बिटिया योजना’ शुरू की है। इस नई योजना का उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा और जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक उनकी वित्तीय सुरक्षा में सहायता करना है। इसकी घोषणा 30 मार्च, 2026 को जारी एक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से की गई थी। इसके साथ ही, यह पिछली ‘लाडली योजना’ की जगह ले लेगी। यह योजना मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की गई है, और इसके तहत चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जो ब्याज सहित बढ़कर ₹1.20 लाख तक हो सकती है।

लखपति बिटिया योजना: मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य

यह योजना बालिकाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है कि वे अपनी शिक्षा जारी रख सकें।

इसके मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना
  • बालिकाओं के कम उम्र में विवाह को रोकना
  • साथ ही, वित्तीय स्वतंत्रता और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के परिवारों को सहायता प्रदान करना

आर्थिक लाभ: यह योजना कैसे काम करती है

इस योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता मिल सकती है, जो उनकी शिक्षा के अलग-अलग पड़ावों से जुड़ी होती है।

आर्थिक सहायता का विवरण

  • जन्म के समय ₹11,000
  • कक्षा 1, 6, 9, 11 और 12 में से प्रत्येक के लिए ₹5,000
  • 1 साल के डिप्लोमा के लिए ₹10,000
  • 2-3 साल के डिप्लोमा कोर्स पूरे करने पर ₹20,000
  • 4 साल का ग्रेजुएशन कोर्स पूरा करने पर ₹25,000 तक

कुल लाभ ₹61,000 तक पहुँचेगा, और मैच्योरिटी के समय ब्याज सहित यह राशि लगभग ₹1.20 लाख हो जाएगी।

यह राशि किस्तों में जमा की जाती है, लेकिन इसे केवल 12वीं कक्षा पूरी होने के बाद, या 18 अथवा 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही निकाला जा सकता है।

पात्रता मानदंड: कौन आवेदन कर सकता है?

यह योजना आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के परिवारों को लक्षित करती है और इसके लिए स्पष्ट पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं:

  • लड़की का जन्म दिल्ली राज्य में हुआ होना चाहिए।
  • वह कम से कम 3 वर्षों से दिल्ली की निवासी होनी चाहिए।
  • परिवार की वार्षिक आय ₹1.20 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • साथ ही, यह योजना प्रति परिवार केवल दो बेटियों तक ही सीमित है।
  • वह दिल्ली के किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ रही होनी चाहिए।

आवेदन प्रक्रिया और कार्यान्वयन

आवेदन प्रक्रिया को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह डिजिटल और पारदर्शी लगे।

आवेदकों को निम्नलिखित कार्य करने होंगे:

एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करना होगा, और उन्हें ये दस्तावेज़ जमा करने होंगे, जैसे:

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • स्कूल में प्रवेश का प्रमाण

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी इस योजना के लिए आवेदनों का सत्यापन और अनुमोदन करेंगे।

विशेष प्रावधान और लचीलापन

इस योजना में कुछ लचीले प्रावधान शामिल हैं:

  • जिनमें मुख्य चरणों (जैसे स्कूल में दाखिला) पर देर से पंजीकरण की अनुमति है।
  • बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाली लड़कियों के लिए पात्रता की शर्तों में ढील दी जा सकती है।
  • इसके लाभ अहस्तांतरणीय हैं और निर्धारित समय अवधि से पहले इन्हें निकाला नहीं जा सकता।

यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो वह राशि सरकार के पास चली जाएगी।

यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

‘लखपति बिटिया योजना’ केवल वित्तीय सहायता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की गहरी सामाजिक चुनौतियों का भी समाधान करती है।

इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • यह बालिकाओं को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • इससे बाल विवाह के मामलों में कमी आएगी।
  • साथ ही, यह महिला साक्षरता और कार्यबल में उनकी भागीदारी को भी बेहतर बनाती है।

 

Recent Posts

about - Part 2_12.1
QR Code
Scan Me