भारत ने मनाई लाल बहादुर शास्त्री की 118वीं जयंती

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भारत देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 118वीं जयंती मना रहा है। शास्त्री, जो जवाहरलाल नेहरू के उत्तराधिकारी थे, उनकी स्पष्टता और ईमानदारी के लिए सम्मानित थे, और उनके निधन के बाद, उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जिससे वे इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के पहले मरणोपरांत विजेता बन गए। शास्त्री का जन्मदिन (2 अक्टूबर) महात्मा गांधी के समान ही है, भले ही उनका जन्म 1904 में, 35 साल बाद हुआ था। उन्हें “जय जवान, जय किसान” के नारे की रचना के लिए भी याद किया जाता है।

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लाल बहादुर शास्त्री के बारे में

 

  • लाल बहादुर शास्त्री का बचपन काफी कठिनाइयों में गुजरा था। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता की मृत्यू काफी जल्दी ही हो गई थी।
  • शास्त्री जी का स्कूल गंगा नदी के उस पार था। शास्त्री जी के पास में नाव का किराया देने तक का पैसा नहीं होता था। वह अपनी किताबों को सर पर बांध कर गंगा नदी पार कर पढ़ने जाते थे और फिर नदी को पार कर के वापस आते थे।
  • उन्हें काशी विद्यापीठ से स्नातक होने के बाद शास्त्री की उपाधि दी गई थी। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यू के बाद 09 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री देश के पीएम बने थे।
  • वे इससे पहले रेल मंत्री, परिवहन और संचार मंत्री, वाणिज्य और उद्योग मंत्री, गृह मंत्री भी रह चुके थे। 11 जनवरी 1966 तक वह इस पद पर रहे। इस तारीख को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में उनकी मृत्यू हो गई थी। उनकी मृत्यू को लेकर आज भी कई विवाद है।

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अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस : 2 अक्टूबर

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महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर पर अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की आमसभा के अनुसार, इस दिवस का उद्देश्य लोगों में शिक्षा और जन जागरूकता के माध्यम से “अहिंसा के संदेश” को फैलाना है। यह दिन जन जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से अहिंसा के संदेश को फैलाने के लिए मनाया जाता है।

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इस दिन की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2007 में की गई थी। अहिंसा की नीति के ज़रिए विश्व भर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गाँधी के योगदान को सराहने के लिए ही इस दिन को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाने का फ़ैसला किया गया। इस सिलसिले में ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव का भरपूर समर्थन किया गया। महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज़्यादा देशों ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया।

 

महात्मा गांधी: एक नजर में

 

  • मोहनदास करमचंद गाँधी को महात्मा गांधी के नाम से जाना जाता है, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में अहम भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को ब्रिटिश भारत की बॉम्बे प्रेसीडेंसी के पोरबंदर में हुआ था।
  • महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा की गयी थी। स्वतंत्रता आन्दोलन में उनके निस्वार्थ योगदान के लिए गांधीजी को “बापू” भी कहा जाता है।
  • उन्हें अनाधिकारिक रूप से “राष्ट्रपिता” भी कहा जाता है। गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।
  • उन्होंने स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह तथा असहयोग आन्दोलन का उपयोग किया। गांधीजी ने अपने जीवन को सरलता और सदाचार से जीया और वे पारंपरिक भारतीय परिधान धोती और शाल ही पहनते थे।

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पीएम मोदी ने लॉन्‍च की 5G सर्विस

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में 5G सर्विस लॉन्च कर दी है। देश में 5G सेवा शुरू होने के बाद संचार क्रांति के एक नए युग की शुरुआत हो गई है। दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद समेत देश के 13 शहरों में आज से 5G सर्विस की सेवा उपलब्ध हो गई है। इससे सीम लेस कवरेज (seamless coverage), हाई डाटा रेट, लो लेटेंसी और अत्यधिक विश्वसनीय संचार प्रणाली की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के प्रगति मैदान में 5G सर्विस की लॉन्चिंग कर दी है। इस दौरान पीएम मोदी के साथ दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव, रिलायंस कंपनी के मुकेश अंबानी और भारती एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष सुनील भारती मौजूद रहे।

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भारत में 5G सेवाओं पर खर्च होने वाली राशि के साल 2035 तक 450 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अल्ट्रा-हाई-स्पीड इंटरनेट का समर्थन करने में सक्षम, पांचवीं पीढ़ी या 5G सेवा से भारतीय समाज एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में नए आर्थिक अवसरों और सामाजिक लाभों को प्राप्त करेगा, ऐसी उम्मीद है। पीएम मोदी ने देश में 5जी सर्विस की लॉन्चिंग के मौके पर कहा कि डिजिटल इंडिया ने हर नागरिक को एक जगह दी है। यहां तक ​​कि छोटे से छोटे रेहड़ी वाले भी यूपीआई की सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी और दूरसंचार में विकास के साथ, भारत चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करेगा।

 

पीएम मोदी ने 5G सर्विस लॉन्चिंग कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि हमने चार पिलर्स पर चार दिशाओं में एक साथ फोकस किया है। पहला है ‘डिवाइस की कीमत’, दूसरा है ‘डिजिटल कनेक्टिविटी’, तीसरा है ‘डेटा की कीमत’, चौथा और सबसे जरूरी ‘डिजिटल फर्सट’ की की सोच है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि नया भारत, टेक्नॉलजी का सिर्फ कन्ज्यूमर बनकर नहीं रहेगा बल्कि भारत उस टेक्नॉलजी के विकास में उसके कार्यान्वयन में एक्टिव भूमिका निभाएगा। भविष्य की वायरलेस टेक्नॉलजी को डिजाइन करने में उस से जुड़ी मैन्यूफक्चरिंग में भारत की बड़ी भूमिका होगी।

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भारतीय महिला अधिकार कार्यकर्ता को मिला ‘चेंजमेकर’ अवॉर्ड

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भारत की एक महिला अधिकार कार्यकर्ता को ‘चेंजमेकर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पुरस्कारों में से एक हैं। महिला को यह पुरस्कार लिंग आधारित हिंसा और असमानता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए दिया गया है। महिला ने इसके लिए देशभर में कम से कम 3,800 किलोमीटर की यात्रा की।

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महिला अधिकार कार्यकर्ता सृष्टि बख्शी को लिंग आधारित हिंसा का सामना करने और सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित पहुंच बनाने की वकालत करने के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के लिए दुनिया के 150 देशों से तीन हजार आवेदन आए थे।

 

मुख्य बिंदु

  • बख्शी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक 12 राज्यों से गुजरते हुए 3,800 किलोमीटर की पैदल यात्रा की।
  • इस दौरान उन्होंने न केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वजहों के बारे में जागरूकता पैदा की बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता के लिए सौ से ज्यादा वर्कशॉप्स का आयोजन किया।
  • उनकी पैदल यात्रा पर ‘वीओएमबी: वूमेन ऑफ माय बिलियन’ नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनी है, जो आज भारतीय महिलाओं की वास्तविकताओं को उजागर करती है। यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म 2021 में लॉन्च की गई थी।

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डॉ अंबेडकर पर शशि थरूर की अगली जीवनी

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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अगले महीने बीआर अंबेडकर की जीवनी लिखने की घोषणा की। पुस्तक एलेफ द्वारा प्रकाशित की जाएगी और यह महान नेता के जीवन और समय के बारे में जानकारी प्रदान करेगी।

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अंबेडकर के जीवन से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • पुस्तक दिग्गज राजनेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के साथ नेता के विवादों को दिखाएगी।
  • किताब का नाम ‘अंबेडकर : ए लाइफ’ रखा जाएगा।
  • शशि थरूर इस सवाल का जवाब इस किताब के जरिए देने का दावा करते हैं कि अंबेडकर आधुनिक समय के सबसे महान भारतीय थे या नहीं।
  • पुस्तक समाज में दूर करने के लिए अंबेडकर द्वारा सामना किए गए “अपमान और बाधाओं” पर जोर देगी।

 

बी आर अंबेडकर के बारे में

 

भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। वह एक भारतीय न्यायविद, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और राजनीतिक नेता थे, जिन्होंने भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया था। साल 1990 में, उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत करते हुए उन्होंने अछूतों की शिक्षा को बढ़ावा दिया और उनके उत्थान का प्रयास किया। इसके लिए पहला कदम केंद्रीय संस्था बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना करना था। इसका उद्देश्य शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक सुधार और दलितों के कल्याण को बढ़ावा देना था।

 

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International Coffee Day: अंतरराष्ट्रीय कॉफी दिवस क्यों मनाया जाता है?

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अंतरराष्ट्रीय कॉफी दिवस प्रतिवर्ष 01 अक्टूबर को मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय कॉफी दिवस प्रत्येक साल उन सभी लोगों के प्रयासों को पहचानने हेतु मनाया जाता है, जो कॉफी व्यवसाय से जुड़े हैं। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कॉफी पेय को बढ़ावा देना है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य उन सभी लोगों को प्रति आदर सम्मान व्यक्त करना है जो खेत से दुकान तक कॉफी को पहुंचाने हेतु बहुत ही कड़ी मेहनत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय कॉफी संगठन ने साल 2015 में इटली के मिलान में पहला विश्व कॉफी दिवस आयोजित किया था।

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अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस का महत्व

 

अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस को मनाने के पीछे कॉफी की खेती करने वाले हजारों लाखों किसानों को समर्थन करना है। उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत कॉफी ही होता है और कॉफी दिवस को मनाने का उद्देश्य और महत्व यह है कि कॉफी की खेती करने वाले किसानों के आय को एक मजबूती देना, उनके बीच आने वाली मुसीबतों को दुनिया के सामने उजागर करना, और कॉफी के उद्दयोग को बढ़ावा देना है।

 

अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस का इतिहास

 

साल 1963 में लंदन स्थित अंतर्राष्ट्रीय कॉफी संगठन ने पहली बार इंटरनेशनल कॉफी डे के तौर पर 1 अक्टूबर 2015 को घोषित किया था। तब से लेकर हर साल इस दिन को पूरी दुनिया में पुरे उत्साह के साथ 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन विश्वभर में कॉफी किसानों के मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करने हेतु भी मनाया जाता है। यह संगठन कॉफी और इसके रणनीतिक दस्तावेज के डेवलपमेंट से जुड़े मामलों को देखता है। कई सारे देश अपने-अपने देश में अलग-अलग राष्ट्रीय कॉफी दिवस मनाते हैं।

 

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राष्ट्रपति पुतिन ने 4 यूक्रेनी क्षेत्रों के विलय की घोषणा की

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के कई हिस्सों को रूस में मिलाने की घोषणा की। व्लादिमीर पुतिन ने रूस द्वारा 4 यूक्रेनी क्षेत्रों के अनुबंध की घोषणा की है। इसके लिए क्रेमलिन में एक आयोजन किया गया। इस बीच पश्चिमी देश उन पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों को धता बताने का आरोप लगा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस उसका हिस्सा बने इन नए इलाकों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।

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इस बीच पुतिन ने यूक्रेन से बातचीत के लिए साथ बैठने का आग्रह भी किया। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि मॉस्को रूस में शामिल किए गए उसके हिस्सों को नहीं छोड़ेगा। जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के चार राज्यों का अपने देश में मिला लिया। इन शहरों के नाम डोनेट्स्क, लुहान्स्क, जापोरिज्जिया और खेरसॉन बताए जा रहे हैं। पुतिन ने क्रेमलिन में एक हस्ताक्षर करके इन इलाकों को अपने अधिग्रहित किया। पुतिन ने इन राज्यों में प्रमुखों की भी नियुक्ति कर दी है।

 

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

 

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस की इस हरकत के बाद हम फास्ट ट्रैक नाटो (NATO) सदस्यता के लिए कोशिशें तेज करने जा रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में जेलेंस्की ने कहा कि हम पहले ही नाटो के मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित कर चुके हैं।

 

पृष्ठभूमि

 

गौरतलब है कि यूक्रेन पर फरवरी में हमला शुरू करने से एक दिन पहले पुतिन ने डोनबास क्षेत्र के डोनेत्स्क और लुहांस्क को गणराज्य घोषित किया था। मौजूदा समय में यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के स्थल जापोरिज्जिया के आसपास समेत सभी चार क्षेत्रों में भयंकर लड़ाई जारी है। रूस ने साल 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप के विलय की प्रक्रिया को दोहराते हुए ही इन चारों प्रांतों का विलय किया है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • रूस की राजधानी: मास्को
  • यूक्रेन की राजधानी: कीव
  • रूस के राष्ट्रपति: व्लादिमीर पुतिन
  • यूक्रेन के राष्ट्रपति: वलोडिमिर ज़ेलेंस्की
  • यूक्रेन का गठन: 24 अगस्त 1991

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गुरुग्राम में बनेगा विश्व का सबसे बड़ा सफारी पार्क

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हरियाणा के गुरुग्राम और नूह जिलों की अरावली पर्वत शृंखला में पड़ने वाले लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा सफारी पार्क स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में अफ्रीका के बाहर सबसे बड़ा क्यूरेटेड सफारी पार्क शारजाह में है। फरवरी 2022 में खोले गए इस पार्क का क्षेत्रफल करीब दो हजार एकड़ है। प्रस्तावित अरावली पार्क आकार इससे पांच गुना होगा। बता दें कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इसके लिए क्षेत्र का मूल्यांकन अध्ययन किया और इस तरह के पार्क की स्थापना की तकनीकी व्यवहार्यता से सहमत हो गया है।

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अरावली पर्वत की इस परियोजना में एक बड़ा हर्पेटेरियम, एवियरी, बर्ड पार्क, बिग कैट्स के चार जोन, शाकाहारी जानवरों के लिए एक बड़ा क्षेत्र होगा। साथ ही विदेशी पशु पक्षियों के लिए एक क्षेत्र, एक अंडरवाटर वर्ल्ड, नेचर ट्रेल्स, विजिटर, टूरिज्म जोन, बॉटनिकल गार्डन, बायोमेस, इक्वाटोरियल, ट्रॉपिकल, कोस्टल, डेजर्ट होंगे। परियोजना के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ईओआई मंगाई गई थी और ऐसी सुविधाओं के डिजाइन व संचालन में अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाली दो कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है।

 

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कजाखस्तान ने राजधानी का नाम नूर-सुल्तान से वापस अस्ताना में बदला

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कजाखस्तान ने अपने देश की राजधानी नूर सुल्तान का नाम बदल दिया है। नूर सुल्तान को अब अस्ताना के नाम से जाना जाएगा। दरअसल, पहले नूर सुल्तान को अस्ताना के नाम से ही जाना जाता था। ऐसे में देश की राजधानी की नाम बदलने की बहुत पहले से मांग की जा रही थी। अब कजाखस्तान के राष्ट्रपति ने राजधानी का नाम बदलने और अपने कार्यकाल को बढ़ाकर सात साल करने के संविधान संशोधनों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

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कजाखस्तान की संसद ने राष्ट्रपति का कार्यकाल बढ़ा कर सात वर्ष करने और देश की राजधानी का नाम बदलने से संबंधित संविधान संशोधनों को शुक्रवार को आम सहमति से पारित कर दिया था। संविधान संशोधनों के तहत राष्ट्रपति का कार्यकाल मौजूदा पांच साल से बढ़ा कर सात वर्ष किया गया है, लेकिन यह राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल पर भी रोक लगाता है। संसद में देश की राजधानी का नाम नुर-सुल्तान से बदलकर फिर से अस्ताना किये जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

 

कजाखस्तान के राजधानी का नाम

अस्ताना या नूर सुल्तान कजाखस्तान की राजधानी होने के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इसे सोवियत संघ के जमाने में साल 1961 तक अकमोलिंस्क और उसके बाद साल 1990 तक त्सेलिनोग्राद के नाम से भी जाना जाता था। कजाखस्तान की आजादी के बाद इसे साल 1998 तक अकमोला के नाम से ही बुलाया गया। यह शहर चारों तरफ से अकमोला प्रांत से घिरा हुआ है, लेकिन प्रशासनिक रूप से इसे अलग संघीय शहर का दर्जा मिला हुआ है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • कजाकिस्तान के राष्ट्रपति: कसीम-जोमार्ट तोकायेव;
  • कजाकिस्तान मुद्रा: कजाकिस्तान टेन।

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विश्व शाकाहारी दिवस 2022: इतिहास और महत्व

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विश्व शाकाहार दिवस (World Vegetarian Day) प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस पर लोगों को एक दिन मांस को छोड़कर केवल शाकाहारी भोजन खाने का आह्वान किया जाता है। यह दिन मनुष्यों, गैर-मानव जानवरों और प्राकृतिक पर्यावरण के लिए शाकाहार के लाभों को फैलाने के लिए मनाया जाता है। शाकाहारी दिवस सामान्य रूप से शाकाहारी आहार और शाकाहार के लाभों को बढ़ावा देने का एक अवसर है।

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विश्व शाकाहार दिवस का उद्देश्य?

शाकाहारी आहार सब्जियों, बीज, फलियां, फल, नट्स और अनाज पर केंद्रित होता है। इसमें अंडे, डेयरी और शहद जैसे पशु उत्पाद भी शामिल होते हैं, जो किसी जानवर की मृत्यु या उसके मांस की खपत के बिना प्राप्त किए जाते हैं। विश्व शाकाहारी दिवस लोगों को पशु उत्पादों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पर्यावरणीय विचारों, पशु कल्याण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य लाभों पर जोर देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन जानवरों के जीवन को बचाने और पृथ्वी को संरक्षित करने में मदद करने के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी मनाया जाता है।

 

विश्व शाकाहारी दिवस क्यों मनाते हैं?

 

विश्व शाकाहारी दिवस शाकाहार की उपलब्धियों और लाभों का जश्न मनाता है और लोगों को शाकाहारी जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसकी स्थापना के बाद से, विश्व शाकाहारी दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता रहा है। विश्व शाकाहारी दिवस आम जनता के बीच शाकाहार को बढ़ावा देने और पशुधन उत्पादन में शामिल क्रूरता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी एक अवसर है।

 

विश्व शाकाहारी दिवस: इतिहास

 

विश्व शाकाहारी दिवस (World Vegetarian Day) 01 अक्टूबर, 1977 में पहली बार ‘यूके वेगन सोसाइटी’ ने मनाया था। साल 1944 में ‘वेगन सोसायटी’ की स्थापना हुई थी। जिसकी 50 वीं वर्षगांठ पर ‘वेगन सोसायटी’ के अध्यक्ष ने अक्टूबर की पहली तारीख को यादगार बनाने और लोगों में शाकाहारी आहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘शाकाहारी दिवस’ को हर साल मनाने की घोषणा की।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी संघ की स्थापना: 1908, ड्रेसडेन, जर्मनी;
  • अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी संघ के अध्यक्ष: मार्ली विंकलर।

 

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