सर्दी के मौसम में यूरोप में ‘रिकॉर्ड गर्मी’, जानें वजह

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पूरे यूरोप के कई देशों में सर्दी के मौसम में अच्छी खासी गर्मी पड़ रही है। जनवरी में तो तापमान अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है। समूचे यूरोप में कड़ाके की ठंड के दिनों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। जनवरी के पहले दो दिन जबर्दस्त गर्म रहे। नए साल के पहले दो दिन सबसे गर्म दिन के रूप में दर्ज किए गए। यूरोप के कम से कम आठ देशों में ऐसे हालात देखे गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पोलैंड, डेनमार्क, चेक गणराज्य, नीदरलैंड, बेलारूस, लिथुआनिया और लातविया में जनवरी का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। यूरोप के मौसमविदों ने ‘द गार्जियन’ को बताया कि पिछले कुछ दिनों में पूरे यूरोप में मौसम का रिकॉर्ड हैरान करने वाले ढंग से टूट रहा है।

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तापमान पर नजर रखने वाले मौसम वैज्ञानिक मैक्सिमिलियानो हेरेरा के अनुसार पोलैंड के कोरबिएलोव गांव में तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह मई में यहां रहने वाले तापमान से अधिक है। तापमान जनवरी के औसत 1 डिग्री तापमान से यह 18 डिग्री ज्यादा है। इसी तरह चेक गणराज्य के जवोर्निक में पारा 19.6 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ गया, जबकि इन दिनों में यह औसत 3 डिग्री सेल्सियस रहता है। जर्मनी, उत्तरी स्पेन और फ्रांस के दक्षिण में भी जनवरी में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है।

 

हीट डोम क्या है?

 

ये एक खास स्थिति है जो तब आती है, जब वायुमंडल गर्म समुद्री हवा को बोतल में किसी ढक्कन की तरह कैद कर लेता है और धीरे-धीरे रिलीज करता है। यूएस के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, ऐसा अक्सर तब होता है जब प्रशांत महासागर का एक छोर ठंडा हो जाए, जबकि दूसरा गर्म रहे। इसे ला-नीना स्थिति भी कहते हैं। हीट डोम लगभग हफ्ताभर रह सकता है, जिसके बाद ढक्कन जैसा स्ट्रक्चर कमजोर हो जाता है और फंसी हुई गर्म हवा पूरी तरह खत्म हो जाती है। साल 1995 की जुलाई में 4 ही दिनों के भीतर शिकागो में 739 लोगों की हीट डोम के चलते मौत हो गई।

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ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज बल्लेबाज की मूर्ति का हुआ अनावरण, जानें विस्तार से

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सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) के परिसर में ऑस्ट्रेलिया (Australia Women Cricket Team) की पूर्व महिला कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज बेलिंडा क्लार्क (Belinda Clark) ने अपनी मूर्ति का अनावरण किया है। स्टेडियम के वॉक ऑफ ऑनर में उनकी एक कांस्य की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इसके साथ बेलिंडा पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं, जिनकी प्रतिमा है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच गुरुवार को तीसरे और अंतिम टेस्ट के दूसरे दिन से पहले इस प्रतिमा का अनावरण किया गया।

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2021 की शुरुआत में क्लार्क की एक प्रतिमा बनाने की घोषणा की गई थी। बेलिंडा एक विश्व कप विजेता कप्तान हैं। उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 1997 और 2005 में खिताब जीता था। इसके अलावा वह एक शानदार बल्लेबाज रही हैं। देश में क्रिकेट को बढ़ावा देने में बेलिंडा ने अहम किरदार भी निभाया है। बेलिंडा SCG की मूर्तिकला परियोजना की 15वीं सदस्य हैं। वह चैंपियन स्प्रिंटर्स बेट्टी कथबर्ट और मार्लीन मैथ्यूज के बाद तीसरी महिला एथलीट हैं जिनकी प्रतिमा लगी है।

 

इस प्रतिमा का निर्माण

 

न्यू साउथ वेल्स के एक प्रतिष्ठित कलाकार कैथी वाइजमैन ने इस प्रतिमा का निर्माण किया। इस मौके पर वाइजमैन ने कहा कि मूर्तिकला उन चुनौतियों का सामना करने और परंपरा को तोड़ने के लिए साहसी बनने में सक्षम होने के बारे में बताती है। मुझे लगता है कि मैं बहुत भाग्यशाली रहा हूं कि मुझे बहुत समर्थन मिला है।

 

बेलिंडा क्लार्क के बारे में

 

बेलिंडा न्यूकासल में जन्मी दाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज हैं और एक विपुल संचायक हैं। उन्हें 23 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम की बागडोर सौंपी गई थी और खेल के सुनहरे दौर में 12 साल तक देश का नेतृत्व किया। 2005 में बेलिंडा रिटायर हो गईं थीं। दो विश्व कप खिताब उन्होंने जीता। ऑस्ट्रेलिया की ओर से क्लार्क वनडे क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं। उन्होंने 118 वनडे मैचों में 47.49 की औसत से 4,844 रन बनाए। इसमें पांच शतक और 30 अर्धशतक शामिल हैं।

इसके अलावा 15 टेस्ट में उन्होंने 45.95 की औसत से 919 रन बनाए, जिसमें दो शतक और छह अर्धशतक शामिल हैं। बाद में उन्हें विजडन के क्रिकेटर ऑफ द ईयर के रूप में नामित किया गया था। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया प्रशासक के रूप में अपने 15 साल के लंबे करियर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेलिंडा क्लार्क की मूर्ति क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट वर्किंग ग्रुप में महिलाओं की मान्यता के परामर्श से बनाई गई थी।

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सरकार फ्री में देगी आठ लाख DD सेट-टॉप बॉक्स, जानें सबकुछ

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 2,539.61 करोड़ रुपये की लागत से ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट (BIND) योजना के बारे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस योजना के माध्यम से, सरकार ने दूरस्थ, आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आठ लाख से अधिक डीडी फ्री सेट-टॉप बॉक्स वितरित करने का उद्देश्य रखा है।

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भारत सरकार ने प्रसार भारती के दो महत्वपूर्ण प्रसारण विभागों, यानी प्रसार भारती – ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) और दूरदर्शन (डीडी) को सुधारने और आधुनिक बनाने के लिए 2025-26 तक इस उद्देश्य के लिए 2,539.61 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। बता दें कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय की बीआईएनडी योजना प्रसार भारती को इसके प्रसारण ढांचे के विस्तार और उन्नयन, सामग्री विकास और संगठन से संबंधित नागरिक कार्य से संबंधित खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का माध्यम है।

 

दूरदर्शन एवं एआईआर की कवरेज बढ़ेगी

आपको बता दें कि वर्तमान में, दूरदर्शन 28 क्षेत्रीय चैनलों सहित 36 टीवी चैनलों का संचालन करता है। वहीं ऑल इंडिया रेडियो 500 से अधिक प्रसारण केंद्रों का संचालन करता है। यह योजना देश में एआईआर एफएम ट्रांसमीटरों की कवरेज को भौगोलिक क्षेत्र के हिसाब से 66 प्रतिशत और आबादी के हिसाब से 80 प्रतिशत तक बढ़ाएगी, जो क्रमशः 59 प्रतिशत और 68 प्रतिशत है।

 

योजना से अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा

सरकार ने योजना को मंजूरी देते हुए अपने बयान में कहा कि “भारत सरकार दूरदर्शन और आकाशवाणी (प्रसार भारती) के इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस के विकास, आधुनिकीकरण और मजबूती के लिए काम कर रही है। इन माध्यमों के सार्वजनिक ब्रॉडकास्ट के दायरे को बढ़ाने के अलावा, ब्रॉडकास्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और वृद्धि के लिए परियोजना में ब्रॉडकास्ट उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना से संबंधित सर्विस को भी बढ़ाया जाएगा।

 

भारत के सार्वजनिक प्रसारक के बारे में:

 

प्रसार भारती, देश के सार्वजनिक प्रसारक के रूप में, दूरदर्शन और आकाशवाणी (एआईआर) के माध्यम से विशेष रूप से देश के दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों के लिए सूचना, शिक्षा, मनोरंजन और जुड़ाव का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रसार भारती ने कोविड महामारी के दौरान जनता को स्वास्थ्य संदेश और जागरूकता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

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जयदेव उनादकट ने रणजी ट्रॉफी में रचा इतिहास, पहले ओवर में हैट्रिक ली

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सौराष्ट्र की टीम के कप्तान जयदेव उनादकट ने रणजी ट्रॉफी के मुकाबले में इतिहास रच दिया है। दिल्ली के खिलाफ मैदान पर गेंदबाजी करने उतरे जयदेव उनादकट ने मैच के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेकर इतिहास रच दिया है। उनादकट ने पहले ही ओवर में तीन विकेट झटक कर दिल्ली की टीम को मजबूत शुरुआत करने से रोक दिया है। वो इस डोमेस्टिक टूर्नामेंट में मैच के पहले ओवर में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। जयदेव ने दिल्ली के खिलाफ पहली पारी में 12 ओवर में 39 रन देकर 8 विकेट लिए।

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दिल्ली की पहली पारी महज 35 ओवर ही चली। उसने सभी विकेट खोकर 133 रन बनाए। ऋतिक शौकीन ने 90 गेंदों पर 68 रन बनाए। शिवांक वशिष्ठ ने 68 गेंदों पर 38 रन बनाए। सौराष्ट्र की ओर से जयदेव ने 8, चिराग जानी और प्रेरक मांकड़ ने एक-एक विकेट लिया। हाल ही में जयदेव बांग्लादेश दौरे से लौटे हैं। वहां उन्होंने 12 साल बाद टीम इंडिया में वापसी की और टेस्ट करियर का दूसरा मैच खेला। इस मैच में उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर 3 विकेट लिए थे। 31 साल के उनादकट ने 2010 में टेस्ट डेब्यू किया था।

 

इतिहास रचने वाले पहले गेंजबाज बने जयदेव

 

रणजी ट्रॉफी मुकाबले में पहले ही ओवर में हैट्रिक लेने वाले जयदेव उनादकट पहले गेंदबाज बन गए है। बता दें कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहले ओवर में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज भारतीय टीम के इरफान पठान थे। इरफान पठान ने पाकिस्तान के खिलाफ पहले ही ओवर में हैट्रिक ली थी। इरफान ने 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची में कमाल कर दिया था। उन्होंने पहले ओवर की चौथी गेंद पर सलमान बट्ट, पांचवीं गेंद पर यूनिस खान और छठी गेंद पर मोहम्मद यूसुफ पठान को आउट किया था।

 

बनाया था एक और रिकॉर्ड

 

बांग्लादेश के खिलाफ 12 साल बाद जयदेव उनादकट ने टेस्ट टीम में हिस्सा लिया था। इससे पहले उनादकट वर्ष 2010 में सेंचुरियन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना इकलौता मुकाबला खेल चुके थे। उनादकट ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारत के लिए पहले और दूसरे टेस्ट के बीच 118 टेस्ट मुकाबले ना खेलने का रिकॉर्ड बनाया है। पहला मुकाबला खेलने के बाद ये दूसरे मुकाबले के लिए सबसे बड़ा अंतराल है।

 

रणजी ट्रॉफी के बारे में

 

रणजी ट्रॉफी भारत की एक घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता है। रणजी ट्रॉफी में एक घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट चैम्पियनशिप क्षेत्रीय क्रिकेट संघों का प्रतिनिधित्व टीमों के बीच भारत में खेला जाता है। प्रतियोगिता पहली बार 1934-35 में जगह लेने के साथ जुलाई 1934 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की एक बैठक के बाद के रूप में भारत की क्रिकेट चैम्पियनशिप शुरू किया गया था। ट्रॉफी पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह द्वारा दान किया गया था। प्रतियोगिता के पहले मैच 4 नवंबर 1934 चेपक पर मद्रास और मैसूर के बीच आयोजित किया गया था।

 

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जी-20 की पहली बैठक 31 जनवरी को पुडुचेरी में होगी

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पुडुचेरी की उपराज्‍यपाल डॉक्‍टर तमिलिसाई सौंदरराजन ने कहा कि जी-20 की पहली बैठक 31 जनवरी को पुडुचेरी में होगी। उन्‍होंने एक कार्यक्रम में जी-20 बैठक का लोगो जारी किया। उन्‍होंने इस अवसर पर सभी राज्‍यों में जी-20 की बैठकें आयोजित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्‍यवाद दिया। पुदुचेरी के मुख्‍यमंत्री रेंगासामी ने इस अवसर पर बताया कि विभिन्‍न देशों के प्रतिनिधि बैठक में भाग लेंगे और इस दौरान कई महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

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मुख्य बिंदु

 

  • उपराज्यपाल ने एक कार्यक्रम में पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी की उपस्थिति में G20 लोगो के साथ स्टिकर, बैज और पोस्टर जारी किए और एक सेल्फी बूथ का भी उद्घाटन किया।
  • बैठक में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और कई अहम फैसले लिए जाएंगे।
  • यह कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग सेगमेंट में आयोजित किए जाएंगे। कोलकाता वित्तीय समावेशन के लिए वैश्विक साझेदारी पर पहली बैठक की मेजबानी करेगा।
  • तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य पर एक कार्य समूह की बैठक आयोजित की जाएगी, चेन्नई शिक्षा पर एक बैठक की मेजबानी करेगा, जबकि गुवाहाटी पहली स्थायी वित्तीय बैठक की मेजबानी करेगा और चंडीगढ़ पहली वित्तीय वास्तुकला बैठक की मेजबानी करेगा।

 

G-20 के बारे में

 

G20 का गठन वर्ष 1999 के दशक के अंत के वित्तीय संकट की पृष्ठभूमि में किया गया था, जिसने विशेष रूप से पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को प्रभावित किया था। इसका उद्देश्य मध्यम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करना है। साथ में G20 देशों में दुनिया की 60% आबादी, वैश्विक जीडीपी का 80% और वैश्विक व्यापार का 75% शामिल है। G20 समूह में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्राँस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया गणराज्य, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। भारत 30 दिसम्बर 2023 तक G20 का अध्यक्ष बना रहेगा जिसके अध्यक्ष नरेन्द्र दामोदर दास मोदी है।

 

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गाजियाबाद-पंडित दीन दयाल उपाध्याय खंड भारतीय रेलवे का सबसे लंबा पूर्ण स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग खंड बना

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गाजियाबाद-पंडित दीन दयाल उपाध्याय खंड (762 किलोमीटर) भारतीय रेलवे का सबसे लंबा पूर्ण स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग खंड बन गया है। प्रयागराज मंडल के सतनरैनी-रसूलाबाद-फैजुल्लापुर सेक्शन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने के बाद 762 किलोमीटर लंबा गाजियाबाद-पं. दीन दयाल उपाध्याय सेक्शन पूर्णतया स्वचालित हो गया है। इसके साथ ही यह भारतीय रेल का सबसे लंबा ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सेक्शन भी बन गया है।

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भारतीय रेलवे एक मिशन मोड पर स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग शुरू कर रहा है। एबीएस को 2022-23 के दौरान 268 आरकेएम पर चालू किया गया है। 31 दिसंबर 2022 तक भारतीय रेल के 3706 रूट किमी पर एबीएस प्रदान किया गया है।स्वचालित सिग्नलिंग के कार्यान्वयन के साथ, क्षमता में वृद्धि होगी जिसके परिणामस्वरूप अधिक ट्रेन सेवाएं शुरू होना संभव होगा। ट्रेन संचालन में डिजिटल तकनीकों का लाभ उठाने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग को अपनाया जा रहा है।

 

स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) क्या है?

 

यह स्वचालित होता है और ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए ट्रैक सर्किटिंग या अन्य साधनों के साथ मिलकर काम करता है। भारतीय रेलवे के मौजूदा उच्च घनत्व वाले मार्गों पर और अधिक ट्रेनें चलाने के लिए लाइन क्षमता बढ़ाने के लिए, स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) एक लागत प्रभावी समाधान है। 2022-23 के दौरान 347 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम शुरू किए गए हैं।  अभी तक 3,706 रूट किलोमीटर तक एबीएस की सुविधा है और 2,888 स्टेशनों को अभी तक मैकेनिकल इंटरलॉकिंग की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से लैस कर दिया गया है।

 

क्या होगा फायदा

 

इस सिग्नलिंग सिस्टम के तहत अब स्टेशन मास्टर ही सभी ट्रेनों के रूट को सेट कर देगा और वहीं से कंट्रोल करेगा। अब मानव संसाधन में भी कमी आएगी और गलतियां कम होंगी। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी तो ट्रैक पर ज्यादा ट्रेनें दौड़ सकेंगी।

 

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केरल में विश्व का पहला ताड़ के पत्ते का पांडुलिपि संग्रहालय शुरु

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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में हाल ही में दुनिया का ताड़ के पत्तों का पहला पांडुलिपि संग्रहालय खोला गया है, जिससे राज्य सांस्कृतिक और शैक्षणिक रूप से और अधिक समृद्ध हुआ है। यह संग्रहालय भारत की धरती पर यूरोपीय शक्तियों को हराने वाले एशिया के पहले साम्राज्य त्रावणकोर की लोकप्रिय कहानियों का खजाना समेटे हुए है। दुनिया के पहले, ताड़ के पत्तों वाले पांडुलिपि संग्रहालय की उपलब्धि पाने वाले इस संस्थान में, 19वीं सदी के आखिर तक लगभग 650 बरस राज करने वाले त्रावणकोर साम्राज्य के प्रशासनिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं के साथ-साथ राज्य के मध्य में कोच्चि की सीमाओं और आगे उत्तर में मालाबार की झलक मिलती है।

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यह संग्रहालय राज्य की सांस्कृतिक संपदा बढ़ाने के अलावा शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक विद्वानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। संग्रहालय में पांडुलिपियों के अलावा कोलाचेल के प्रसिद्ध युद्ध की भी जानकारी उपलब्ध है, जिसमें त्रावणकोर के वीर राजा अनिजाम तिरुनल मार्तंड वर्मा (1729-58) ने डच ईस्ट इंडिया कंपनी को पराजित किया था। कोलाचेल वर्तमान में तमिलनाडु के कन्याकुमारी से 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। सन् 1741 में त्रावणकोर के राजा की जीत से डच का भारत में विस्तार रुक गया और मार्तंड वर्मा के राज में त्रावणकोर एशिया का पहला ऐसा राज्य बन गया, जिसने किसी यूरोपीय ताकत की विस्तारवादी सोच को रोका हो।

 

पिछले सप्ताह खुले इस संग्रहालय में 187 पांडुलिपियां हैं, जो प्राथमिक स्रोतों पर आधारित कहानियों की खान हैं। ये दस्तावेज ताड़ के साफ और स्पष्ट पत्तों पर लिखे गए हैं, जो रिकॉर्ड कक्षों के कोनों पर सुसज्जित हैं। उस दौर में विवरण लिखने से पहले ताड़ के इन पत्तों को उपचारित किया गया था। पहले चरण में पूरे राज्य से इकट्ठे किए गए 1.5 करोड़ ताड़ के पत्तों के विशाल भंडार से छंटाई करने के बाद यह अभिलेख सामग्री चुनी गई थी। संग्रहालय में बांस की खपच्चियां और तांबे की प्लेटें भी हैं। यह संग्रहालय तीन सौ साल पुरानी इमारत में स्थित है।

 

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विश्व युद्ध अनाथ दिवस 2023: इतिहास और महत्व

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विश्व युद्ध अनाथ दिवस हर साल 6 जनवरी को मनाया जाता है। विश्व युद्ध अनाथ दिवस पर, अनाथ बच्चों द्वारा सहन किए गए आघात के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिवस का उद्देश्य जागरूकता फैलाना और युद्ध के अनाथ या संघर्ष में बच्चों द्वारा सामना किए गए संकटों को दूर करना है। अक्सर देखा गया है कि अनाथालयों में बड़े होने वाले बच्चे अक्सर भावनात्मक और सामाजिक भेदभाव का सामना करते हैं। यह दुनिया भर में मानवीय और सामाजिक संकट बन गया है।

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विश्व युद्ध अनाथ दिवस: महत्व

 

विश्व युद्ध अनाथ दिवस पर, अनाथ बच्चों द्वारा सहन किए गए आघात के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कोरोनोवायरस महामारी ने दुनिया भर में कई बच्चों के लिए खाद्य असुरक्षा और बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया है। विश्व युद्ध अनाथ दिवस को ऐसे बच्चों के सामने आने वाले मुद्दों की याद दिलाने और दुनिया को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी के रूप में चिह्नित किया जाता है कि ऐसे बच्चों को भी स्वास्थ्य और शैक्षिक अवसरों तक समान पहुंच प्राप्त हो।

 

विश्व युद्ध अनाथ दिवस: इतिहास

 

विश्व युद्ध अनाथ दिवस की शुरुआत फ्रांसीसी संगठन SOS Enfants en Detresses द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित बच्चों की मदद करना था। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, एक अनाथ को “18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसने मृत्यु के किसी भी कारण से एक या दोनों माता-पिता को खो दिया है”।

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IIT ISM ने हिंदुस्तान कापर लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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हिंदुस्तान कापर लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आइएसएम (IIT ISM) के बीच कोलकाता में विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं के लिए समझौता हुआ। यह समझौता एचसीएल के सीएमडी अरुण कुमार शुक्ला और आइआइटी आइएसएम के निदेशक प्रो. राजीव शेखर की उपस्थिति में हुआ। धनबाद के आइआइटी आइएसएम के साथ किया गया यह समझौता अपनी तरह का पहला तकनीकी सहयोग है। यह एचसीएल के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।

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हिंदुस्तान कापर लिमिटेड भारत का एकमात्र ऐसा तांबा खनिक है, जिसके पास देश में तांबा अयस्क के सभी परिचालन खनन पट्टे हैं। वर्तमान में अधिकांश अयस्क उत्पादन भूमिगत मोड के माध्यम से ही होता है और राष्ट्रीय अयस्क उत्पादन का स्तर लगभग चालीस लाख टन प्रति वर्ष है। अयस्क उत्पादन की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी एवं परिचालन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ विभिन्न भू-तकनीकी एवं भूजल संबंधी मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।

 

सुरक्षा मानकों को बनाए रखने और खनन में स्थिरता के उभरते हुए मुद्दों से निपटना भी समय की आवश्यकता है। इसमें आइएसएम का तकनीकी पक्ष कारगर साबित होगा। आइआइटी आइएसएम विशेष रूप से खनिजों के खनन और इसकी लाभकारी गतिविधियों तथा पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्याति का संस्थान होने के नाते देश में उभरते हुए भूवैज्ञानिक, तकनीकी, पर्यावरण, टिकाऊ और एचसीएल के विस्तार कार्यक्रम के साथ ही अन्य अयस्क लाभकारी मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

वर्तमान समझौता

 

वर्तमान समझौता अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग के साथ खनन विधियों को संशोधित करके तांबा अयस्क उत्पादन बढ़ाने के लिए आइआइटी आइएसएम से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा तांबा अयस्क की गहन खोज के लिए खानों में उत्पादकता और सुरक्षा में सुधार, पर्यावरणीय मंजूरी के मुद्दे, विभिन्न हाइड्रोलाजिकल तथा हाइड्रो-जियोलाजिकल अध्ययन एवं अपरंपरागत अन्वेषण विधियों मसलन भूभौतिकीय अन्वेषण, रिमोट सेंसिंग आदि के क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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सर्बिया-कोसोवो में विवाद, जानें विस्तार से

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सर्बिया और कोसोवो के बीच कई महीनों से चल रहे तनाव के युद्ध में बदलने की संभावना है। दोनों सेनाएं सीमा पर आमने सामने आ गई हैं। सर्बिया ने कोसोवो के साथ लगी सीमा पर अपनी सेना को अलर्ट रहने को कह दिया है। वहीं कोसोवो ने भी अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं वह भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। तनाव की स्थिति को देखते हुए यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने तनाव को कम करने का आग्रह किया।

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यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने कोसोवो और सर्बिया से अपने सीमा क्षेत्र में बढ़ती अशांति के बीच तनाव कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। दोनों ने संयुक्त बयान में कहा कि यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका कोसोवो के उत्तर में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बारे में चिंतित हैं।

कोसोवो ने अपने उत्तरी पड़ोसी सर्बिया के साथ अपनी सबसे बड़ी सीमा को बंद कर दिया है जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। यूएस-ईयू ने कहा कि हम सभी से अधिकतम संयम बरतने, बिना शर्त स्थिति को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने और उकसावे, धमकियों या डराने-धमकाने से बचने का आह्वान करते हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका ने कहा कि हम सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वूसिक और कोसोवो के प्रधानमंत्री अल्बिन कुर्ती के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच राजनीतिक समाधान निकल सके।

 

जानें क्यों बढ़ा तनाव?

 

साल 2008 में कोसोवो, सर्बिया से आजाद हुआ था। तभी से दोनों देशों के बीच तनाव चला आ रहा है। 25 दिसंबर को दोनों देशों ने एक दूसरे पर फायरिंग करने का आरोप लगाया। कोसोवो ने कहा कि पहली फायरिंग सर्बिया की तरफ से हुई। वहीं सर्बिया ने आरोप लगाया कि सबसे पहले फायरिंग कोसोवो में तैनात कोसोवो में नाटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय शांति सेना (केएफओआर) की तरफ से की गई।

 

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