भारत ने दुबई में गल्फूड 2026 में पार्टनर देश के तौर पर ऐतिहासिक शुरुआत की

वैश्विक कृषि-व्यापार के क्षेत्र में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दुबई में आयोजित गुलफूड 2026 में भारत पहली बार पार्टनर कंट्री (साझेदार देश) के रूप में भाग ले रहा है। यह उपलब्धि इस प्रदर्शनी के 31 वर्षों के इतिहास में पहली बार हुई है। यह कदम वैश्विक खाद्य एवं पेय बाजार में भारत की बढ़ती उपस्थिति और खाड़ी क्षेत्र के साथ गहराते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

क्यों चर्चा में है?

भारत गुलफूड 2026—दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक खाद्य एवं पेय सोर्सिंग इवेंट—में पार्टनर कंट्री के रूप में भाग ले रहा है। यह प्रदर्शनी की शुरुआत के बाद भारत की पहली साझेदार भूमिका है।

गुलफूड 2026 में भारत की भागीदारी

भारत की भागीदारी का नेतृत्व कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) कर रहा है, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।

गुलफूड 2026 पहली बार दो स्थानों पर आयोजित हो रहा है:

  • दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर
  • दुबई एग्ज़ीबिशन सेंटर, एक्सपो सिटी दुबई

1,434 वर्ग मीटर में फैला भारतीय पवेलियन भारत की कृषि विविधता और निर्यात क्षमता को प्रदर्शित करता है।

भारतीय पवेलियन का उद्घाटन अविनाश जोशी, सचिव, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने दीपक मित्तल, भारत के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में राजदूत की उपस्थिति में किया।

यह पहल भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की मजबूत संस्थागत कोशिश को दर्शाती है।

भारतीय राज्यों और क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी

  • भारतीय पवेलियन में भारत के कृषि-खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र का व्यापक और समावेशी प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है।
  • 25 भारतीय राज्यों और क्षेत्रों से 161 प्रदर्शक इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • निर्यातक
  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs)
  • सहकारी संस्थाएँ
  • स्टार्टअप
  • राज्य सरकार की एजेंसियाँ
  • राष्ट्रीय संस्थान

यह विविधता ताज़ा कृषि उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, अनाज, मसालों और मूल्य-वर्धित उत्पादों में भारत की ताकत को दर्शाती है।

यह मंच छोटे उत्पादकों और स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं तक पहुँच प्रदान करता है।

FIEO की भूमिका और प्रमुख निर्यात पर फोकस

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) भी गुलफूड 2026 में भाग ले रहा है।

इस आयोजन में FIEO के 11 प्रदर्शक शामिल हैं।

मुख्य फोकस बासमती चावल और अन्य अनाज उत्पादों पर है, जो भारत के प्रमुख निर्यात वस्तुएँ हैं।

भारतीय कंपनियाँ इस मंच का उपयोग:

  • दीर्घकालिक निर्यात अनुबंध तलाशने,
  • ब्रांड पहचान बढ़ाने,
  • और पश्चिम एशिया, अफ्रीका एवं यूरोप में नए बाज़ार खोजने के लिए कर रही हैं।

इससे भारत की स्थिति एक प्रमुख खाद्य निर्यातक राष्ट्र के रूप में और सुदृढ़ होती है।

खाद्य प्रसंस्करण और निवेश को बढ़ावा

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल गुलफूड 2026 का दौरा कर रहा है।

मंत्रालय, इन्वेस्ट इंडिया के साथ मिलकर निम्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रहा है:

  • खाद्य प्रसंस्करण
  • कोल्ड चेन
  • लॉजिस्टिक्स
  • संबद्ध कृषि अवसंरचना

उद्देश्य भारत के तेज़ी से बढ़ते खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में वैश्विक निवेश आकर्षित करना है।

यह पहल खाद्य अपव्यय को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

UGC Act 2026: जानें क्या है नई गाइडलाइंस, नए कानून को लेकर क्यों मचा है विवाद? जानिए सबकुछ

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में बनाए गए नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कहा गया है कि ये नियम जाति आधारित भेदभाव को सही तरह से परिभाषित नहीं करते और सभी वर्गों को समान सुरक्षा नहीं देते। यूजीसी ने अपनी गाइडलाइन में दो अहम बदलाव किए हैं, सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी से आने छात्रों के साथ भेदभाव बताया जा रहा है।

नियम का देशभर में विरोध

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को नई नियमावली लागू की है। 15 जनवरी से प्रभावी हुए इन नियमों का उद्देश्य SC, ST और OBC समुदायों के छात्रों और शिक्षकों के लिए परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। नियम के अनुसार जाति-आधारित भेदभाव इससे समाप्त होगा।

हालांकि, इन नियमों ने आरक्षण जैसे एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे ‘सामान्य वर्ग विरोधी’ करार देते हुए सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विवाद का मुख्य केंद्र झूठी शिकायतों के खिलाफ दंड का प्रावधान हटाना और सवर्णों को इस सुरक्षा चक्र से बाहर रखना है।

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क्या है UGC का नया नियम

यूजीसी का कहना है कि नए नियम की जरूरत एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना और उस पर निगरानी रखना है। नए Equity Rule के तहत सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में 24×7 हेल्पलाइन, Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा। अगर कोई भी संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी उनकी मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई कर सकता है।

नियमों के मुख्य उद्देश्य

UGC के नए नियम अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी, महिलाओं, दिव्यांगों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ किसी भी तरह के भेदभाव को रोकने पर केंद्रित हैं। इसमें भेदभाव को अनुचित व्यवहार, बहिष्कार या अवसरों से वंचित करना माना गया है। अब संस्थानों के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा और इसकी जिम्मेदारी सीधे संस्थान प्रमुख पर होगी।

UGC की गाइडलाइंस असंवैधानिक क्यों कही जा रही

सबसे बुनियादी आपत्ति ये है कि UGC ने “कानून” जैसा काम कर दिया. उसने इस नियमन के जरिए ऐसा ढांचा बना दिया जो नए अधिकार, नई परिभाषाएं और दंडात्मक प्रक्रिया तय करता है. आरोप लगाया जा रहा है कि ये विधायी शक्ति का अतिक्रमण है, ऐसा नियम बनाने का काम केवल संसद कर सकती है, अनुच्छेद 245–246 के तहत कानून बनाने का अधिकार संसद या विधानसभाओं को है. यूजीसी केवल केवल अधीनस्थ नियमन कर सकता है। मौलिक अधिकारों की नई व्याख्या नहीं कर सकता।

कितनी बढ़ गई भागीदारी?

शिक्षा में आरक्षण मिलने से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग की भागीदारी में भी काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है। शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि शैक्षणिक संस्थानों में 2014-15 से 2020-21 के बीच अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी के छात्रों का रजिस्ट्रेशन काफी ज्यादा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में ऐसे छात्रों के एडमिशन का आंकड़ा 3.85 करोड़ से बढ़कर 4.13 करोड़ हो गया।

24×7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली

UGC के नए नियम के अनुसार हर कॉलेज में 24×7 हेल्पलाइन और Equal Opportunity Centre होना जरूरी है। छात्र वहां जाकर भेदभाव की शिकायत कर सकते हैं, लेकिन नियम में झूठी या बेबुनियाद शिकायत पर कोई सजा या रोक नहीं है इसलिए बिना सबूत के भी कोई भी छात्र को फंसाकर उसका करियर बर्बाद कर सकता है।

 

 

निर्मला सीतारमण का नौवां बजट ऐतिहासिक क्यों है?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवां केंद्रीय बजट प्रस्तुत करेंगी। इसके साथ ही वे स्वतंत्र भारत के इतिहास में लगातार सबसे अधिक बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री बन जाएँगी। यह अभूतपूर्व उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में उनके निरंतर कार्यकाल को दर्शाती है।

ऐतिहासिक उपलब्धि

जब निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी, तब वे लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुति देंगी। यह उल्लेखनीय सिलसिला 2019 में शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक दूसरे कार्यकाल के बाद उन्हें भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद, 2024 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद भी उन्होंने वित्त मंत्रालय का दायित्व संभाले रखा।

अब तक वे फरवरी 2024 के अंतरिम बजट सहित कुल आठ लगातार बजट प्रस्तुत कर चुकी हैं। नौवां लगातार बजट उन्हें भारतीय वित्तीय इतिहास में एक रिकॉर्ड-निर्माता वित्त मंत्री के रूप में और सुदृढ़ करेगा।

सर्वकालिक रिकॉर्ड के करीब

हालाँकि निर्मला सीतारमण की उपलब्धि ऐतिहासिक है, फिर भी वे सर्वकालिक रिकॉर्ड से एक बजट पीछे हैं।
यह रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है, जिन्होंने वित्त मंत्री के रूप में कुल 10 बजट प्रस्तुत किए थे। उन्होंने यह बजट जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल में पेश किए थे।

हालाँकि, निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड इसलिए विशिष्ट है क्योंकि उन्होंने एक ही प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के कार्यकाल में लगातार नौ बजट प्रस्तुत किए हैं, जो अन्य प्रमुख वित्त मंत्रियों की तुलना में अलग और अधिक उल्लेखनीय है:

  • मोरारजी देसाई – कुल 10 बजट, लेकिन लगातार नहीं
  • पी. चिदंबरम – 9 बजट, अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के अधीन
  • प्रणब मुखर्जी – 8 बजट, अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के अधीन
  • मनमोहन सिंह – 5 लगातार बजट (1991–1995)

आर्थिक विकास पर केंद्रित रहने की संभावना

1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक भू-राजनीतिक वातावरण अस्थिर है। इस बजट में आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने वाले सुधारात्मक उपायों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। भारत इस समय कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाया गया 50% शुल्क और व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताएँ शामिल हैं।

ऐसे में भारत की विकास दर को बनाए रखने के लिए रणनीतिक राजकोषीय और मौद्रिक उपायों की आवश्यकता होगी, जिनका प्रतिबिंब इस बजट में देखने को मिल सकता है।

स्वतंत्र भारत में बजट प्रस्तुति से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य

स्वतंत्र भारत का पहला बजट

स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस बजट ने एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत की वित्तीय व्यवस्था की नींव रखी।

बजट से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्धियाँ

सबसे लंबा बजट भाषण

निर्मला सीतारमण के नाम स्वतंत्र भारत का सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड है। उन्होंने 1 फरवरी 2020 को 2 घंटे 40 मिनट का बजट भाषण दिया था। उल्लेखनीय है कि उन्हें भाषण के दो पृष्ठ शेष रहते हुए उसे समाप्त करना पड़ा। यह भाषण आधुनिक बजट की जटिलता, व्यापक सुधारों और नीतिगत विस्तार को दर्शाता है।

सबसे छोटा बजट भाषण

इसके विपरीत, 1977 में वित्त मंत्री हिरुभाई मुलजीभाई पटेल द्वारा प्रस्तुत अंतरिम बजट का भाषण सबसे छोटा था, जिसमें केवल 800 शब्द थे। यह इस बात को दर्शाता है कि समय के साथ बजट भाषणों की लंबाई और विस्तार में कितना बदलाव आया है।

बजट प्रस्तुति के समय का विकास

पारंपरिक समय (औपनिवेशिक परंपरा)

  • स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक बजट फरवरी के अंतिम दिन शाम 5 बजे प्रस्तुत किया जाता था।
  • यह परंपरा ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही थी, क्योंकि भारत ब्रिटिश समर टाइम से 4 घंटे 30 मिनट आगे है।
  • शाम 5 बजे बजट प्रस्तुत करने से लंदन और भारत में एक साथ घोषणाएँ संभव होती थीं, जिससे ब्रिटिश वित्तीय बाज़ार प्रतिक्रिया दे सकें।

स्वतंत्रता के बाद भी यह व्यवस्था औपनिवेशिक विरासत के रूप में जारी रही।

समय में परिवर्तन (1999)

1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान बजट प्रस्तुति का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया। तब से लेकर आज तक सभी केंद्रीय बजट सुबह 11 बजे ही प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो आधुनिक भारत की मानक परंपरा बन चुकी है।

बजट प्रस्तुति की तिथि में परिवर्तन

बजट प्रस्तुति की तिथि में 2017 में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया। इसके तहत बजट को फरवरी के अंतिम दिन के बजाय 1 फरवरी को प्रस्तुत करने की परंपरा शुरू की गई।

परिवर्तन का कारण

यह बदलाव सरकार को निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक बनाने के लिए किया गया:

  • मार्च के अंत तक संसद से बजट की मंजूरी प्रक्रिया पूरी करना
  • वित्त वर्ष की शुरुआत (1 अप्रैल) से ही बजट के प्रावधानों को लागू करना

पहले, जब बजट 29 फरवरी को प्रस्तुत किया जाता था, तब संसदीय मंजूरी में 2–3 महीने लग जाते थे, जिससे बजट का क्रियान्वयन मई या जून से पहले संभव नहीं हो पाता था।
1 फरवरी को बजट प्रस्तुत करने से सरकार को संसद में चर्चा और प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त समय मिला, जिससे पूरे वित्त वर्ष की शुरुआत से ही बजट लागू करना संभव हो सका।

बजट रिकॉर्ड: सबसे अधिक बजट प्रस्तुत करने वाले वित्त मंत्री

1. मोरारजी देसाई – 10 बजट (रिकॉर्ड धारक)

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक 10 बजट प्रस्तुत करने वाले वित्त मंत्री रहे। उन्होंने यह बजट जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल में वित्त मंत्री रहते हुए पेश किए।

समय-रेखा:

  • पहला बजट: 28 फरवरी 1959
  • अगले दो वर्षों में: दो पूर्ण बजट
  • 1962: एक अंतरिम बजट
  • इसके बाद: दो पूर्ण बजट
  • 1967: एक अंतरिम बजट (चार वर्ष के अंतराल के बाद)
  • 1967, 1968 और 1969: तीन पूर्ण बजट
  • कुल बजट: 10

2. पी. चिदंबरम – 9 बजट (दूसरा स्थान)

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने विभिन्न सरकारों के दौरान कुल 9 बजट प्रस्तुत किए।

समय-रेखा:

  • पहला बजट: 19 मार्च 1996 (एच. डी. देवगौड़ा के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकार)
  • अगले वर्ष उसी सरकार में एक और बजट
  • 2004–2008: यूपीए सरकार के दौरान 5 बजट
  • 2013 और 2014: गृह मंत्री कार्यकाल के बाद पुनः वित्त मंत्री बनने पर 2 बजट
  • कुल बजट: 9

3. प्रणब मुखर्जी – 8 बजट (तीसरा स्थान)

पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यकाल में 8 बजट प्रस्तुत किए।

समय-रेखा:

  • 1982, 1983 और 1984: तीन बजट
  • फरवरी 2009 से मार्च 2012: लगातार 5 बजट (यूपीए सरकार)
  • कुल बजट: 8

4. मनमोहन सिंह – 5 लगातार बजट (लगातार प्रस्तुति का रिकॉर्ड)

  • पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 से 1995 के बीच लगातार 5 बजट प्रस्तुत किए।
  • यह बजट पी. वी. नरसिंह राव सरकार के दौरान प्रस्तुत किए गए और भारत के आर्थिक उदारीकरण काल में अत्यंत महत्वपूर्ण रहे।

निर्मला सीतारमण की उपलब्धि का महत्व

निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट कई ऐतिहासिक पहलुओं को दर्शाता है:

  • पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री: उन्होंने वित्त मंत्रालय में लैंगिक बाधाओं को तोड़ा।
  • निरंतर कार्यकाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार नौ बजट राजनीतिक स्थिरता और नीति निरंतरता को दर्शाते हैं।

आर्थिक नेतृत्व:

  • कोविड-19 महामारी
  • वैश्विक आर्थिक मंदी
  • भू-राजनीतिक तनाव

जैसे संकटों के बावजूद उन्होंने भारत की राजकोषीय नीति में निरंतरता बनाए रखी।

विविध चुनौतियों से निपटना: महामारी से उबरने, मुद्रास्फीति नियंत्रण, भू-राजनीतिक जोखिम और विकास संतुलन जैसे मुद्दों को बजट में संबोधित किया गया।

सुधारों पर फोकस: प्रत्येक बजट में संरचनात्मक और नीतिगत सुधारों को प्राथमिकता दी गई।

बजट 2026 से अपेक्षाएँ

1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत होने वाले बजट से निम्नलिखित अपेक्षाएँ हैं:

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक विकास की गति बनाए रखना
  • अमेरिकी शुल्क और भू-राजनीतिक जोखिमों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान
  • भारत की आर्थिक बुनियाद को मजबूत करने वाले सुधारात्मक उपाय
  • अवसंरचना विकास, सामाजिक कल्याण और राजकोषीय स्थिरता पर निरंतर फोकस
  • विकास लक्ष्यों और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन

DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल ने गणतंत्र दिवस पर पहली बार प्रदर्शन किया

भारत की रक्षा आधुनिकीकरण की झलक 77वें गणतंत्र दिवस परेड में उस समय स्पष्ट रूप से देखने को मिली, जब एक उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। स्वदेशी रूप से विकसित यह हथियार उच्च-गति और सटीक युद्ध क्षमताओं में भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है तथा बदलते रणनीतिक वातावरण में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर दिए जा रहे विशेष जोर को रेखांकित करता है।

क्यों चर्चा में?

77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल प्रणाली LR-AShM (लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल) को इसके लॉन्चर के साथ प्रदर्शित किया। यह इस अत्याधुनिक प्रणाली का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन था।

LR-AShM मिसाइल प्रणाली क्या है?

लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है। हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन मैक-5 से अधिक गति से उड़ान भरते हैं और निम्न ऊँचाई पर अत्यधिक maneuverable (चालाक) मार्ग का अनुसरण करते हैं, जिससे इनका पता लगाना और इन्हें रोकना बेहद कठिन हो जाता है। यह प्रणाली भूमि-आधारित तैनाती के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे भारत की तटरेखा की ओर बढ़ रहे शत्रु नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स के विरुद्ध त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सके।

हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ

LR-AShM में उच्च गति, सटीकता और जीवित रहने की क्षमता (survivability) का उत्कृष्ट संयोजन है। इसकी अत्यधिक गति शत्रु की प्रतिक्रिया समय को काफी कम कर देती है। ग्लाइड वाहन की उच्च maneuverability इसे आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों से बच निकलने में सक्षम बनाती है। यह मिसाइल विशेष रूप से एंटी-शिप भूमिका के लिए अनुकूलित है और उच्च-मूल्य वाले नौसैनिक लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ भेदने में सक्षम है। स्वदेशी विकास होने के कारण यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को और सशक्त बनाती है।

भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक महत्व

LR-AShM की तैनाती से भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा और समुद्री क्षेत्र निषेध (Sea Denial) क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह प्रणाली हिंद महासागर क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण नौसैनिक गतिविधियों को रोकने के लिए एक प्रभावी प्रतिरोधक (deterrent) सिद्ध होगी। तटीय बैटरियों के रूप में इसकी तैनाती भारत को महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना, बंदरगाहों और समुद्री मार्गों की रक्षा करने में सक्षम बनाएगी तथा तकनीकी रूप से उन्नत विरोधियों के विरुद्ध भारत की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी।

हाइपरसोनिक हथियार और आधुनिक युद्ध

हाइपरसोनिक हथियार अपनी असाधारण गति, अनिश्चित उड़ान पथ और उच्च सटीकता के कारण आधुनिक युद्ध में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्तमान में केवल कुछ ही देशों के पास परिचालन स्तर की हाइपरसोनिक क्षमताएँ हैं। इस क्षेत्र में भारत की प्रगति उसे उन्नत सैन्य शक्तियों के विशिष्ट समूह में स्थापित करती है और भविष्य-उन्मुख रक्षा प्रौद्योगिकियों के प्रति देश की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

अडानी–एम्ब्रेयर समझौता: भारत में विमान निर्माण को लेकर क्या है पूरी कहानी?

भारत ने वैश्विक विमानन निर्माण केंद्र बनने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अडानी समूह और ब्राज़ील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के बीच भारत में विमान निर्माण को लेकर एक अहम समझौता हुआ है। यह साझेदारी न केवल अडानी समूह के लिए वाणिज्यिक विमान निर्माण क्षेत्र में प्रवेश का संकेत है, बल्कि भारत के एयरोस्पेस वैल्यू चेन में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप भी है।

खबर में क्यों?

अडानी समूह और एम्ब्रेयर ने भारत में विमान निर्माण, सप्लाई चेन, प्रशिक्षण और रखरखाव सेवाओं में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

अडानी–एम्ब्रेयर समझौते का उद्देश्य क्या है?

इस समझौते का मुख्य फोकस भारत में एक क्षेत्रीय परिवहन विमान (Regional Transport Aircraft) परियोजना स्थापित करने पर है, जिसमें विमान निर्माण, कलपुर्ज़ों का उत्पादन, आफ्टरमार्केट सेवाएँ और पायलट प्रशिक्षण शामिल हैं। हालांकि वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह साझेदारी विमान उत्पादन के स्थानीयकरण की दिशा में एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।

अडानी समूह के लिए यह वाणिज्यिक विमान निर्माण में औपचारिक प्रवेश है, जो हवाई अड्डों, रक्षा और एयरोस्पेस में उसकी मौजूदा मौजूदगी को और मजबूत करेगा। वहीं एम्ब्रेयर के लिए भारत एक तेज़ी से बढ़ता विमानन बाज़ार और मज़बूत औद्योगिक आधार प्रदान करता है।

एम्ब्रेयर कौन है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

एम्ब्रेयर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनी है, जो एयरबस और बोइंग के बाद आती है। यह मुख्य रूप से 70 से 140 यात्रियों की क्षमता वाले क्षेत्रीय जेट विमानों के लिए जानी जाती है, खासकर अपनी E2 सीरीज़ के लिए।

ये विमान कम और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए उपयुक्त हैं और भारत की क्षेत्रीय संपर्क आवश्यकताओं के लिहाज़ से बेहद उपयोगी माने जाते हैं। एम्ब्रेयर के विमान एयरबस A220 से प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन बड़े वाइड-बॉडी विमानों से उनका टकराव नहीं होता।

भारत इस साझेदारी के लिए रणनीतिक क्यों है?

भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ारों में शामिल है। उड़ान (UDAN) जैसी योजनाओं के तहत क्षेत्रीय हवाई संपर्क की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार भी चाहती है कि भारत केवल विमान असेंबली तक सीमित न रहे, बल्कि कलपुर्ज़ों और प्रणालियों के पूर्ण पैमाने पर निर्माण में भी वैश्विक भूमिका निभाए। इससे पहले एम्ब्रेयर ने महिंद्रा के साथ C-390 सैन्य परिवहन विमान परियोजना में साझेदारी की थी, जो भारत के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

अडानी–एम्ब्रेयर साझेदारी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मज़बूती देती है। विमान निर्माण जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्र में निवेश से कुशल रोज़गार सृजित होंगे, तकनीकी हस्तांतरण होगा और एमएसएमई आधारित सप्लाई चेन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे नागरिक विमानन और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए भारत की आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

मशहूर पत्रकार मार्क टली का निधन

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और प्रसारक मार्क टली का 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ स्ट्रोक के बाद मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनका देहांत हुआ। भारत से रिपोर्टिंग करने वाले सबसे प्रभावशाली विदेशी संवाददाताओं में गिने जाने वाले मार्क टली ने पाँच दशकों से अधिक समय तक भारत की जटिलताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में अहम भूमिका निभाई।

क्यों चर्चा में है?

प्रसिद्ध पत्रकार, बीबीसी नई दिल्ली ब्यूरो के पूर्व प्रमुख और भारत पर लिखी गई कई चर्चित पुस्तकों के लेखक मार्क टली के निधन के साथ दक्षिण एशिया में विदेशी पत्रकारिता के एक युग का अंत हो गया।

मार्क टली कौन थे?

  • 1935 में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में ब्रिटिश शासन के दौरान जन्मे मार्क टली का पूरा नाम सर विलियम मार्क टली था।
  • वे ब्रिटिश नागरिक थे, लेकिन उन्होंने अपना अधिकांश जीवन भारत में बिताया।
  • भारतीय समाज और संस्कृति से गहरे जुड़ाव के कारण उन्हें स्नेहपूर्वक “टली साहब” कहा जाता था।
  • वे हिंदी भाषा में दक्ष थे, जिससे उन्हें भारत को बाहरी दृष्टि से नहीं, बल्कि अंदर से समझने और समझाने की दुर्लभ क्षमता मिली।

प्रारंभिक करियर और बीबीसी से जुड़ाव

  • मार्क टली ने 1960 के दशक में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) में कार्य करना शुरू किया।
  • 1965 में भारत में उनकी पोस्टिंग हुई।
  • शुरुआत में उन्होंने प्रशासनिक भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन जल्द ही वे रिपोर्टिंग में आ गए।
  • उनकी सूक्ष्म दृष्टि, संवेदनशीलता और ज़मीनी रिपोर्टिंग ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई।
  • वे 22 वर्षों तक बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे और भारत के साथ-साथ पूरे दक्षिण एशिया की रिपोर्टिंग की।
  • वे भारत में कार्य करने वाले सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विदेशी संवाददाताओं में से एक थे।

भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाओं की रिपोर्टिंग

  • अपने दीर्घ और प्रतिष्ठित पत्रकारिता करियर के दौरान मार्क टली ने स्वतंत्रता के बाद के भारत की कई निर्णायक और ऐतिहासिक घटनाओं की रिपोर्टिंग की।
  • इनमें 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, आपातकाल (1975–77), ऑपरेशन ब्लू स्टार, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और सिख विरोधी दंगे, 1991 में राजीव गांधी की हत्या, तथा 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस शामिल हैं।
  • इसके अलावा उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी, राजनीतिक परिवर्तन तथा भारत और पूरे उपमहाद्वीप में हुए सामाजिक उथल-पुथल की व्यापक कवरेज की।

भारत पर लिखीं कई मशहूर किताबें

उन्होंने भारत में लोगों के जीवन और समाज का बहुत करीब से अध्ययन किया था। मार्क टली ने भारत पर कई चर्चित पुस्तकें लिखीं, जिनमें ‘नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया’, ‘इंडिया इन स्लो मोशन’, ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’, अमृतसर: मिसेज गांधी लास्ट बैटल (1985), इंडियाज अनएंडिंग जर्नी (2008) और द रोड अहेड (2011) प्रमुख हैं। उनकी लेटेस्ट किताब, अपकंट्री टेल्स: वन्स अपॉन ए टाइम इन द हार्ट ऑफ इंडिया (2017), ग्रामीण उत्तर भारत की कहानियों का संकलन है।

बीबीसी के बाद का जीवन

  • 1990 के दशक के मध्य में संगठन के नेतृत्व से मतभेदों के कारण मार्क टली ने बीबीसी से इस्तीफा दे दिया।
  • इसके बावजूद वे बौद्धिक रूप से सक्रिय रहे और निरंतर लेखन एवं प्रसारण करते रहे।
  • उन्होंने BBC Radio 4 के कार्यक्रम “Something Understood” का प्रस्तुतीकरण किया, जो धर्म और नैतिक प्रश्नों पर केंद्रित था।
  • जीवन के उत्तरार्ध में भी वे धर्म, लोकतंत्र और भारतीय राजनीति से जुड़े विमर्शों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे और स्वयं को अक्सर भारत और ब्रिटेन—दोनों से जुड़ा हुआ बताते थे।

भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव

  • मार्क टली का भारत से जुड़ाव केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं था।
  • वे दक्षिण दिल्ली में सादगीपूर्ण जीवन जीते थे और देशभर में व्यापक यात्राएँ करते थे, अक्सर रेल यात्रा के माध्यम से।
  • उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग में केवल राजनीतिक वर्ग ही नहीं, बल्कि सामान्य भारतीयों की आवाज़ को लगातार प्रमुखता दी।
  • उनकी पत्रकारिता की शैली मैदानी रिपोर्टिंग और मानवीय कहानियों पर आधारित थी, जिसने उन्हें विभिन्न पीढ़ियों में गहरा स्नेह और विश्वसनीयता दिलाई।

सम्मान और पुरस्कार

  • पत्रकारिता में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए 2002 में ब्रिटिश सरकार द्वारा मार्क टली को नाइटहुड की उपाधि प्रदान की गई।
  • भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म श्री तथा बाद में पद्म भूषण से सम्मानित किया, जिससे वे दोनों नागरिक सम्मानों को प्राप्त करने वाले चंद विदेशी नागरिकों में शामिल हो गए।
  • ये सम्मान भारत को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ समझने और समझाने के प्रति उनके आजीवन समर्पण की भारतीय स्वीकृति को दर्शाते हैं।

सिक्किम पुलिस को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस कलर पुरस्कार मिला

पूर्वोत्तर भारत के लिए गर्व के क्षण में, सिक्किम पुलिस को उसकी उत्कृष्ट सेवा, पेशेवर दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए राष्ट्रपति पुलिस कलर सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान भारत में पुलिस बलों को दिया जाने वाला सर्वोच्च और प्रतिष्ठित अलंकरणों में से एक माना जाता है, जो दीर्घकालिक उत्कृष्ट प्रदर्शन और जनसेवा के प्रति समर्पण को मान्यता देता है।

क्यों चर्चा में है?

सिक्किम पुलिस को प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर (निशान) से सम्मानित किया गया, जिससे सिक्किम आज़ादी के बाद से यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाला भारत का 15वां राज्य और नॉर्थ-ईस्ट का तीसरा राज्य बन गया है।

राष्ट्रपति पुलिस कलर पुरस्कार क्या है?

  • राष्ट्रपति पुलिस कलर पुरस्कार, जिसे सामान्यतः निशान कहा जाता है, पुलिस बलों को दिया जाने वाला एक औपचारिक एवं प्रतीकात्मक सम्मान है।
  • यह पुरस्कार असाधारण सेवा, वीरता, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता के लिए प्रदान किया जाता है।
  • यह सम्मान एक ध्वज (फ्लैग) और प्रतीक चिन्ह के रूप में होता है, जिसे पुलिस वर्दी की बाईं आस्तीन पर गर्व के साथ धारण किया जाता है।
  • यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति के कार्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे पुलिस बल के सामूहिक प्रदर्शन, परंपरा और विरासत को मान्यता देता है।

सिक्किम पुलिस के लिए इस सम्मान का महत्व

  • राष्ट्रपति पुलिस कलर प्राप्त करना सिक्किम पुलिस के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
  • स्वतंत्रता के बाद अब तक केवल 14 राज्यों को ही यह सम्मान प्राप्त हुआ था, जो इसकी दुर्लभता और प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
  • इस सम्मान के साथ सिक्किम कुल मिलाकर 15वां राज्य बन गया है और उन चुनिंदा पुलिस बलों के समूह में शामिल हो गया है, जो ईमानदारी, दक्षता और जनविश्वास के उच्च मानकों के लिए जाने जाते हैं।
  • यह उपलब्धि संवेदनशील सीमा राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सिक्किम पुलिस की पेशेवर, संयमित और जिम्मेदार भूमिका को रेखांकित करती है।

पूर्वोत्तर भारत का प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय महत्व

  • सिक्किम अब पूर्वोत्तर क्षेत्र का तीसरा राज्य बन गया है जिसे यह सम्मान प्राप्त हुआ है।
  • यह उपलब्धि पूर्वोत्तर राज्यों में पुलिसिंग की उत्कृष्टता को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मान्यता को दर्शाती है।
  • यह क्षेत्र कठिन भौगोलिक और रणनीतिक परिस्थितियों में कार्य करता है, जिसके बावजूद पुलिस बलों की क्षमता सराहनीय रही है।
  • यह सम्मान सीमा और पर्वतीय राज्यों में संस्थागत मजबूती और मनोबल बढ़ाने पर केंद्र सरकार के फोकस को भी दर्शाता है।

कलर प्रेज़ेंटेशन परेड

  • राष्ट्रपति पुलिस कलर का ध्वज और प्रतीक चिन्ह कलर प्रेज़ेंटेशन परेड के दौरान औपचारिक रूप से सिक्किम पुलिस को प्रदान किया जाएगा।
  • यह परेड एक पारंपरिक और औपचारिक समारोह होती है, जो एकता, गौरव तथा पुलिस बल और राष्ट्र के बीच के मजबूत संबंध का प्रतीक है।

नेट साइवर ब्रंट ने रचा इतिहास, WPL में शतक लगाने वाली बनीं पहली खिलाड़ी

महिला प्रीमियर लीग (WPL) के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ, जब लंबे समय से चला आ रहा एक बल्लेबाज़ी रिकॉर्ड आखिरकार टूट गया। दबाव भरे एक लीग मुकाबले में एक शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शन ने टूर्नामेंट के रिकॉर्ड को नया आयाम दिया और भारत में महिला फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को उजागर किया।

क्यों चर्चा में है?

नेट साइवर-ब्रंट (Nat Sciver-Brunt) ने WPL 2026 में इतिहास रचते हुए महिला प्रीमियर लीग की पहली शतकीय पारी खेली। उन्होंने यह उपलब्धि मुंबई इंडियंस की ओर से खेलते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ वडोदरा में हासिल की।

WPL 2026 में ऐतिहासिक शतक

  • WPL 2026 के मैच संख्या 16 में नेट साइवर-ब्रंट ने 57 गेंदों पर नाबाद 100 रन की ऐतिहासिक पारी खेली।
  • यह मुकाबला कोटांबी स्टेडियम, वडोदरा में खेला गया।
  • वह उस समय बल्लेबाज़ी के लिए आईं जब मुंबई इंडियंस ने महज 16 रन पर पहला विकेट गंवा दिया था।
  • इसके बाद उन्होंने संयम और आत्मविश्वास के साथ पारी को संभाला।
  • उनकी पारी में 16 चौके और 1 छक्का शामिल था, जिसमें निरंतरता और नियंत्रित आक्रामकता साफ दिखाई दी।
  • इस पारी के साथ WPL में पहली बार किसी बल्लेबाज़ ने तीन अंकों का स्कोर (शतक) बनाया।

रिकॉर्ड साझेदारी

  • इस पारी की एक बड़ी खासियत हेले मैथ्यूज़ के साथ दूसरे विकेट के लिए की गई 131 रन की साझेदारी रही।
  • हेले मैथ्यूज़ ने 39 गेंदों पर 56 रन बनाए।
  • इस साझेदारी ने शुरुआती झटके के बाद मुंबई इंडियंस की पारी को मजबूती दी और बड़े स्कोर की नींव रखी।
  • तेज़ और स्पिन गेंदबाज़ों के खिलाफ दोनों बल्लेबाज़ों का तालमेल WPL 2026 में दिख रही रणनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।

लंबे समय से चला आ रहा WPL रिकॉर्ड टूटा

इस पारी से पहले WPL के इतिहास में कोई भी बल्लेबाज़ शतक नहीं लगा सकी थी।

अब तक का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर:

  • जॉर्जी वोल – 99*
  • सोफी डिवाइन – 99

विभिन्न सत्रों में 10 से अधिक खिलाड़ी 90 रन के पार पहुंचीं, लेकिन शतक का आंकड़ा छूना अब तक संभव नहीं हो पाया था।

नेट स्किवर-ब्रंट की इस पारी ने न सिर्फ यह इंतज़ार खत्म किया, बल्कि WPL के भविष्य के लिए नया मानक भी स्थापित कर दिया।

UGC बिल 2026 क्या है? इसके फायदे और नुकसान, जानिए विस्तार से

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा संस्थानों (HEI) में समता के संवर्द्धन से संबंधित विनियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य जाति-आधारित भेदभाव का उन्मूलन करना है। यूजीसी का दावा है कि ये नियम कास्ट आधारित भेदभाव रोकने, छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने और विश्वविद्यालयों को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बीच यह नियम व्यावहारिकता, निष्पक्षता और प्रशासनिक दबाव को लेकर विवाद का विषय बन गए हैं।

क्या है UGC?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। यह रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रभावी हो गया है। इस नियम का उद्देश्य कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है। हालांकि, इसके लागू होते ही देश के विभिन्न हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और समूहों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। जानिए इसके फायदे और नुकसान…

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नए कानून में क्या बदला है?

नए रेगुलेशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अब अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी स्तर पर एक समानता समिति गठित की जाएगी। इसमें ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल करना जरूरी होगा। यह समिति हर छह महीने में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे यूजीसी को भेजना अनिवार्य होगा।

अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें मुख्य रूप से एससी और एसटी समुदाय तक सीमित मानी जाती थीं। नए कानून के तहत ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे।

इन विनियमों में जाति-आधारित भेदभाव को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विरुद्ध किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है। इससे OBC को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा मिलती है और पिछले मसौदा ढाँचे में मौजूद बड़ी कमी को सुधारा गया है। प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान के लिये समान अवसर केंद्र (EOC) स्थापित करना अनिवार्य होगा, जिसका उद्देश्य समता, सामाजिक समावेशन एवं समान पहुँच को बढ़ावा देना तथा परिसरों में भेदभाव से संबंधित शिकायतों का समाधान करना है।

विरोध क्यों कर रही हैं

कानून लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसके जरिए अगड़ी जातियों के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि झूठी या निराधार शिकायतों को रोकने के लिए ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं, जिससे निर्दोष छात्रों या शिक्षकों को मानसिक दबाव और करियर से जुड़ा नुकसान हो सकता है।

महत्त्व

ये विनियम उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव के विरुद्ध कानूनी और संस्थागत ढाँचे को सुदृढ़ करते हैं तथा वर्ष 2019 के IIT दिल्ली अध्ययन में उठाई गई गंभीर चिंता को संबोधित करते हैं, जिसमें पाया गया कि ऐतिहासिक रूप से वंचित जातियों के 75% छात्र परिसर में भेदभाव का सामना करते हैं। OBC को शामिल करना सामाजिक न्याय के लिये एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। सख्त दंड यह संकेत देते हैं कि अब ये नियम केवल सलाहकारी दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि प्रवर्तनीय विनियम हैं।

जाति आधारित भेदभाव

जाति आधारित भेदभाव न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रहों को भी मज़बूत करता है; परिणामस्वरूप, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों का प्रतिनिधित्व उच्च स्तरीय स्कूलों और कॉलेजों में सीमित रह जाता है। कई विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति/जनजाति सेल प्रायः निष्क्रिय या “लीगल टीथ” (प्रभावी अधिकार) नहीं होते हैं। वे प्रायः पीड़ित को न्याय दिलाने की बजाय संस्था की प्रतिष्ठा की रक्षा को प्राथमिकता देते हैं।

24×7 शिकायत हेल्पलाइन 

नए नियमों के अनुसार, हर उच्च शिक्षा संस्थान में 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन और Equal Opportunity Centre स्थापित किया जाएगा, जहां छात्र भेदभाव से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

आलोचकों का कहना है कि झूठी या निराधार शिकायतों को रोकने के लिए ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं, जिससे निर्दोष छात्रों या शिक्षकों को मानसिक दबाव और करियर से जुड़ा नुकसान हो सकता है।

Equity Committee और Equity Squad का गठन

UGC के नए नियमों के तहत सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में Equity Committee और Equity Squad का गठन करना अनिवार्य होगा। छात्रों और शिक्षकों का मानना है कि इन समितियों में सामान्य वर्ग का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया गया है। इसके अलावा, Equity Squad को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जबकि ‘भेदभाव’ की स्पष्ट और सीमित परिभाषा तय नहीं की गई, जिससे दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका

UGC का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के खिलाफ भेदभाव रोकना है। हालांकि, कुछ सामान्य वर्ग के छात्र और फैकल्टी इसे एकतरफा नीति मानते हैं। उनका कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के लोगों को पहले से ही संदेह के दायरे में रखा जा सकता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका है।

आंकड़े क्या कहते हैं ?

UGC द्वारा संसद और सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई। 704 विश्वविद्यालयों और 1553 कॉलेजों से कुल 1160 शिकायतें सामने आईं। इन आंकड़ों को UGC नए नियमों के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क के रूप में पेश कर रहा है।

 

BRO द्वारा जम्मू-कश्मीर के चतरगला दर्रे पर उच्च-ऊँचाई बचाव अभियान और सड़क बहाली

सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation – BRO) ने एक बार फिर अपनी संचालन क्षमता और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के चतरगला दर्रे पर उच्च-ऊँचाई बचाव एवं सड़क बहाली अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अत्यधिक ठंड, खराब मौसम और भारी हिमपात के बीच किए गए इस अभियान के तहत फंसे हुए नागरिकों और सैनिकों को सुरक्षित निकाला गया तथा एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग को पुनः बहाल किया गया।

क्यों समाचार में?

23 जनवरी 2026 को भारी बर्फबारी के कारण चतरगला दर्रा (लगभग 10,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित) अवरुद्ध हो गया था। इसके बाद BRO ने सड़क संपर्क बहाल करते हुए बचाव अभियान चलाया, जिसके तहत नागरिकों और सेना के जवानों को बिना किसी हताहत के सुरक्षित निकाला गया।

व्यवधान की पृष्ठभूमि

  • चतरगला दर्रा जम्मू क्षेत्र में भद्रवाह–चतरगला मार्ग पर स्थित है
  • 23 जनवरी 2026 को यहाँ 5–6 फीट तक भारी हिमपात हुआ
  • अचानक हुए इस मौसम परिवर्तन के कारण लगभग 38 किलोमीटर सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया
  • इससे नागरिकों और सुरक्षा बलों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई

इस मार्ग का रणनीतिक और मानवीय महत्व अत्यधिक होने के कारण, त्वरित बहाली आवश्यक थी ताकि कठोर सर्दियों में किसी भी प्रकार की जनहानि या अलगाव को रोका जा सके।

बचाव एवं सड़क बहाली अभियान का क्रियान्वयन

  • बर्फ हटाने का कार्य 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी (RCC) द्वारा किया गया
  • यह इकाई 35 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स (BRTF) के अंतर्गत प्रोजेक्ट संपर्क (Project Sampark) का हिस्सा है
  • टीम ने 24 जनवरी 2026 की सुबह कार्य शुरू किया
  • शून्य से नीचे तापमान में लगभग 40 घंटे तक लगातार कार्य किया गया
  • सभी कठिन परिस्थितियों के बावजूद 25 जनवरी 2026 की शाम तक मार्ग पुनः खोल दिया गया

निकासी एवं मानवीय सहायता

सड़क फिर से खुलने के बाद, BRO ने 20 फंसे हुए नागरिकों और राष्ट्रीय राइफल्स के 40 सैनिकों को उनके हथियारों और ज़रूरी सामान के साथ सुरक्षित निकाला।
यह बचाव अभियान 26 जनवरी, 2026 को 02:30 बजे बिना किसी जानमाल के नुकसान के पूरा हुआ, जो जानलेवा हालात में काम करने वाले BRO कर्मियों के प्रोफेशनलिज़्म, तैयारी और समर्पण को दिखाता है।

भारतीय सेना के साथ समन्वय

  • यह पूरा अभियान भारतीय सेना के साथ घनिष्ठ समन्वय में संचालित किया गया
  • बेहतर संचार, सुरक्षा और त्वरित राहत सुनिश्चित की गई
  • यह संयुक्त प्रयास दर्शाता है कि आपदा प्रबंधन में नागरिक-सैन्य सहयोग कितना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से उच्च-ऊँचाई और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में

सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में

  • बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन भारत की एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली संस्था है, जो सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार है।
  • दुनिया के सबसे दुर्गम और प्रतिकूल भौगोलिक क्षेत्रों में कार्य करते हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय सहायता के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपने आदर्श वाक्य “श्रमेण सर्वं साध्यम्” (परिश्रम से सब कुछ संभव है) से प्रेरित होकर BRO कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करता है।

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