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महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन, ग्रामीण पृष्ठभूमि से सत्ता की राजनीति तक

NCP नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा एक विमान बारामती में हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन हो गया है। वे 66 साल के थे। प्लेन में अजित पवार के साथ मौजूद उनके पर्सनल असिस्टेंट, सुरक्षाकर्मी और प्लेन स्टाफ समेत 5 लोगों की जान गई है। अपने मज़बूत प्रशासनिक अंदाज़ और महाराष्ट्र के लोगों से गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाने वाले अजीत पवार ने तीन दशकों से ज़्यादा समय तक राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई, जिससे उन्हें “अजीत दादा” का लोकप्रिय खिताब मिला। अजित पवार महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के लिए बारामती में जनसभा को संबोधित करने जा रहे थे।

क्यों चर्चा में?

महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन हो गया है। 28 जनवरी 2026 को सुबह 8.45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया। हादसे में अजित पवार के सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत 5 लोगों की जान गई। पवार महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के लिए जनसभा को संबोधित करने बारामती जा रहे थे। महाराष्ट्र एविएशन डिपार्टमेंट के मुताबिक विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए अप्रोच कर रहा था। पहली बार में पायलट को रनवे साफ दिखाई नहीं दिया तो वह विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले गया। रिपोर्ट के अनुसार उस समय विजिबिलिटी करीब 2 हजार मीटर थी।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के राहुरी तालुका स्थित देवलाली प्रवरा में हुआ था। कम उम्र से ही उन पर पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ आ गईं, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को नज़दीक से समझने का अवसर मिला। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण वे किसानों की समस्याओं और जमीनी मुद्दों से गहराई से परिचित हुए। इन शुरुआती अनुभवों ने आम लोगों, विशेष रूप से किसानों के प्रति उनकी संवेदनशीलता विकसित की और दुग्ध संघों, सहकारी चीनी मिलों और बैंकों जैसी सहकारी संस्थाओं में उनकी दीर्घकालिक भागीदारी की नींव रखी।

राजनीति में प्रवेश और राजनीतिक यात्रा

अजित पवार की राजनीतिक यात्रा की औपचारिक शुरुआत 1991 में हुई, जिस पर उनके चाचा और मार्गदर्शक शरद पवार का गहरा प्रभाव रहा। वर्षों के दौरान उन्होंने सांसद, विधायक, राज्य मंत्री, कैबिनेट मंत्री और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनका राजनीतिक उत्थान मजबूत प्रशासनिक पकड़ और निर्णायक क्षमता के लिए जाना जाता है। सत्ता में हों या विपक्ष में, वे लगातार महाराष्ट्र की राजनीति के प्रभावशाली चेहरों में बने रहे हैं।

नेतृत्व शैली और प्रशासनिक कार्य

अजित पवार अपनी समयपालन, अनुशासन और स्पष्टवादी प्रशासनिक शैली के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं। वे विशेषज्ञों से परामर्श के बाद तेज़ और व्यावहारिक निर्णय लेने में विश्वास रखते हैं और कुशल प्रशासन पर विशेष जोर देते हैं। जनता दरबारों के माध्यम से वे नागरिकों से सीधे संपर्क बनाए रखते हैं और बिना किसी भेदभाव के उनकी समस्याएँ सुनते हैं। उनका नेतृत्व दीर्घकालिक विकास योजना, बुनियादी ढांचे के विस्तार और प्रशासनिक गति में सुधार पर केंद्रित रहा है। व्यवहारिकता के आधार पर साफ़ तौर पर “हाँ” या “ना” कहने की उनकी स्पष्टता ने उन्हें अधिकारियों और आम जनता के बीच एक निर्णायक और सम्मानित नेता के रूप में स्थापित किया है।

जन छवि और विरासत

“अजित दादा” के नाम से लोकप्रिय अजित पवार को पूरे महाराष्ट्र में व्यापक जन-पहचान और प्रभाव प्राप्त है। मंत्रालय (मंत्रालय/मंत्रालय भवन) से लेकर ग्रामीण गाँवों तक क्षेत्रीय मुद्दों की उनकी गहरी समझ, उन्हें राज्य की मिट्टी और लोगों से जुड़ा नेता दर्शाती है। विधानसभा में तीखे और तथ्यात्मक सवाल पूछने के लिए पहचाने जाने वाले अजित पवार, सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए जनकल्याण को प्राथमिकता देते हैं। उनकी निरंतर कार्य-निष्ठा, सुलभता और विकास-केंद्रित दृष्टि ने उन्हें महाराष्ट्र के आधुनिक राजनीतिक इतिहास में एक स्थायी और प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।

 

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