भारतीय रुपया 20 मार्च 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर 93.24 पर पहुंच गया। तेल के बढ़ते इम्पोर्ट बिल और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण रुपए में यह गिरावट आई है। मिडिल ईस्ट में जंग ने दुनिया को संकट में डाल दिया है।
एनर्जी संकट पैदा होने के अशंका से कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिस कारण डॉलर के मुकाबले अन्य करेंसी दबाव में दिखाई दे रही हैं। भारतीय करेंसी पर भी डॉलर का असर हुआ है। 19 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल 119 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था, जिसके बाद रुपया 93 का लेवल क्रॉस कर चुका है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरा
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.65% गिरकर 93.24 पर आ गया, जो 18 मार्च 2026 को दर्ज किए गए रिकॉर्ड निचले स्तर 92.63 से भी नीचे है। भारतीय इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि रुपया डॉलर के मुकाबले 93 रुपये के पार पहुंचा हो। अमेरिका-ईरान वॉर शुरू होने के बाद से इंडियन करेंसी में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
रुपये में गिरावट से क्या चीजें हो जाएंगी सस्ती?
रुपये में गिरावट आने से निर्यात की जाने वाली चीजों की लागत कम हो जाती है। भारतीय IT सर्विस, दवाईंया, बासमती चावल और अन्य भारतीय सामान के दाम में कमी आ जाती है। इसके अलावा, विदेभ से भेजे जाने वाले पैसे की मूल्य भारत में बढ़ जाती है। साथ ही भारत विदेशी पर्यटकों के लिए सस्ता हो जाता है।
रुपये में गिरावट से क्या चीजें हो जाएंगी महंगी?
रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिस वजह क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त, एलपीजी, एलएनजी के लिए भी ज्यादा पैसे देने पड़ जाते हैं। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स जैसे मोबाइल, लैपटॉप भी महंगे हो जाते हैं। इम्पोर्ट की जाने वाली गाड़ियों की वैल्यू भी बढ़ जाती है। विदेश में पढ़ाई भी महंगी हो जाती है। सोने-चांदी की कीमत डॉलर पर निर्भर करती है, जिस कारण सोना-चांदी भी महंगी हो जाती है। विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट्स भी महंगे हो जाते हैं।
भारत पर रुपये के गिरने से क्या असर?
डॉलर में तेजी एवं रुपये के गिरावट होने से एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में कमी आ सकती है। देश भर में महंगाई बढ़ सकती है और लोगों के कर्ज के ब्याज में भी वृद्धि हो सकता है। रुपए की कमजोरी से भारत में आयात महंगे हो जाएंगे, खासकर तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम बढ़ सकते हैं।


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