रवि शंकर छबी सेंट्रल डेपुटेशन पर CRPF में DIG नियुक्त

केंद्र सरकार ने एक अनुभवी IPS अधिकारी को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में शामिल करके एक अहम सीनियर-लेवल पुलिस नियुक्ति की है। उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी रवि शंकर छबी को CRPF में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) नियुक्त किया गया है, जिससे बढ़ी हुई आंतरिक सुरक्षा जिम्मेदारियों के समय लीडरशिप मजबूत होगी।

क्यों चर्चा में? 

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी रवि शंकर छबी को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त करने को मंज़ूरी दी है।

नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति का विवरण

  • नियुक्ति CRPF में मौजूदा रिक्त पद के विरुद्ध की गई है।
  • MHA आदेश दिनांक: 19 जनवरी 2026।
  • पदस्थापना केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के मानक सेवा नियमों के अंतर्गत।
  • उत्तर प्रदेश सरकार को अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश।
  • इस प्रकार की प्रतिनियुक्तियाँ राज्य कैडर के अनुभवी अधिकारियों को राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा में योगदान का अवसर देती हैं।

उत्तर प्रदेश में वर्तमान/पूर्व पदस्थापना

CRPF नियुक्ति से पहले:

  • DIG (पब्लिक ग्रिवेंसेज़), DGP मुख्यालय, लखनऊ
  • जून 2023 में इस पद पर नियुक्ति

प्रमुख दायित्व:

  • जनशिकायत निवारण
  • शिकायतों की निगरानी
  • पुलिस प्रणाली में जवाबदेही और सुधार
  • इस भूमिका से उन्हें नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग का व्यापक अनुभव मिला।

अधिकारी परिचय (Officer Profile)

  • नाम: रवि शंकर छबी
  • सेवा: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) – नियमित भर्ती
  • बैच: 2007
  • कैडर: उत्तर प्रदेश
  • जन्म तिथि: 1 फरवरी 1983
  • मूल निवासी: रोहतास जिला, बिहार

शैक्षणिक योग्यता

  • बी.ए. (ऑनर्स): अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास
  • एम.ए. (Master of Arts)
  • सामाजिक विज्ञान की पृष्ठभूमि ने नीतिगत विश्लेषण और प्रशासनिक नेतृत्व में सहायता की।

प्रमुख सेवाकालीन पदस्थापनाएँ

  • SP, जौनपुर – ज़िला कानून-व्यवस्था का प्रबंधन
  • Women Powerline – 1090 (लखनऊ) – महिला सुरक्षा की प्रमुख पहल का नेतृत्व
  • ACP, नोएडा कमिश्नरेट – शहरी पुलिसिंग का अनुभव
  • DIG, कारागार प्रशासन एवं सुधार – जेल प्रबंधन और सुधारात्मक पहल
  • पुलिस पर्यवेक्षक, 2024 लोकसभा चुनाव – बारामूला संसदीय क्षेत्र

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF): संक्षिप्त परिचय

  • भारत का प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF)
  • मंत्रालय: गृह मंत्रालय (MHA)
  • देश के सबसे पुराने और बड़े अर्धसैनिक बलों में से एक

इतिहास

  • 1939 में Crown Representative Police के रूप में गठन

कारण:

  • रियासतों में राजनीतिक अशांति
  • 1936 के मद्रास प्रस्ताव के बाद आंदोलन
  • 28 दिसंबर 1949 को CRPF अधिनियम के बाद नाम बदला गया।

CRPF के प्रमुख कार्य

  • भीड़ नियंत्रण एवं दंगा नियंत्रण
  • उग्रवाद/आतंकवाद विरोधी अभियान
  • वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटना
  • संवेदनशील क्षेत्रों में चुनाव सुरक्षा
  • पर्यावरण संरक्षण (स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतुओं की सुरक्षा)
  • युद्धकाल में आंतरिक सुरक्षा सहायता
  • संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भागीदारी
  • प्राकृतिक आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्य

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया गया

पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को उस समय नई मजबूती मिली, जब राजस्थान के कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) घोषित किया गया। यह अधिसूचना अरावली पर्वत श्रृंखला की नाज़ुक पारिस्थितिकी की रक्षा पर केंद्रित है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि संरक्षण के साथ-साथ आसपास रहने वाले समुदायों का कल्याण और सतत विकास भी बना रहे।

क्यों चर्चा में?

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास क्षेत्र को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करने की अधिसूचना जारी की है। इसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण करना और अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों को सहयोग देना है।

इको-सेंसिटिव ज़ोन की घोषणा

  • कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित) के चारों ओर शून्य से एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया गया है।
  • इको-सेंसिटिव ज़ोन वे क्षेत्र होते हैं, जिन्हें पर्यावरण कानूनों के तहत संरक्षित क्षेत्रों के आसपास गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अधिसूचित किया जाता है।
  • इस घोषणा से अनियंत्रित विकास, खनन और औद्योगिक विस्तार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
  • ESZ का दर्जा यह सुनिश्चित करता है कि संरक्षण प्राथमिकताओं और नियंत्रित मानवीय गतिविधियों के बीच संतुलन बना रहे, जिससे वन, जल संसाधन और वन्यजीव आवास सुरक्षित रहें।

जैव विविधता और वन्यजीव महत्व

  • कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता और विविध आवासों के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहाँ तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगल बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय और चिंकारा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।
  • यह क्षेत्र कई पक्षी प्रजातियों का भी आवास है, जिनमें पेंटेड फ्रैंकोलिन प्रमुख है, जिससे यह पक्षी संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता है।
  • आसपास के क्षेत्र को ESZ घोषित करने से प्रवास गलियारों, प्रजनन स्थलों और खाद्य शृंखलाओं की सुरक्षा होगी, जो इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।

स्थानीय और आदिवासी समुदायों के लिए लाभ

  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, ESZ अधिसूचना से अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय और आदिवासी समुदायों को सहयोग मिलेगा।
  • इसका उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं, बल्कि सतत आजीविका को भी बढ़ावा देना है।
  • जैविक खेती, कृषि-वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि समुदायों की आजीविका सुरक्षित रहे और प्रकृति का संरक्षण भी हो सके।

इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के बारे में 

विषय विवरण
इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के क्षेत्र, जो बफर/शॉक एब्जॉर्बर के रूप में कार्य करते हैं।
नीतिगत आधार राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002–2016) के अनुसार, सामान्यतः पार्क/अभयारण्य की सीमा से 10 किमी तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया जाता है।
10 किमी नियम यह एक दिशानिर्देश है; वास्तविक ESZ की सीमा क्षेत्र-विशेष की पारिस्थितिकी के अनुसार कम–ज़्यादा हो सकती है।
10 किमी से बाहर क्षेत्र यदि कोई क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो (जैसे संवेदनशील गलियारे), तो 10 किमी से बाहर भी ESZ घोषित किया जा सकता है।
ESZ का उद्देश्य नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को मानव गतिविधियों के नकारात्मक प्रभाव से बचाना।
संक्रमण क्षेत्र की भूमिका संरक्षित क्षेत्र के भीतर कड़ा संरक्षण → बाहर अपेक्षाकृत कम नियंत्रण (संतुलन बनाए रखना)।
स्थानीय लोगों पर प्रभाव स्थानीय लोगों की दैनिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधा न डालना।
मुख्य लक्ष्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास के पर्यावरण को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाना।
ESZ में निषिद्ध गतिविधियाँ व्यावसायिक खनन, आरा मिलें, लकड़ी का व्यावसायिक उपयोग, वृक्षों की कटाई (नियंत्रित मामलों को छोड़कर)।
ESZ में अनुमत गतिविधियाँ मौजूदा कृषि/बागवानी, वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, अन्य गैर-हानिकारक गतिविधियाँ।
भारत में ESZ की संख्या पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित; 600 से अधिक ESZ देशभर में घोषित।

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025: समावेशी विकास के लिए भारत का सहकारिता अभियान

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब समावेशी विकास और समुदाय-आधारित विकास को वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है। भारत ने इस अवसर का उपयोग करते हुए सुधारों, डिजिटलाइजेशन, नए संस्थानों और वित्तीय सहायता के माध्यम से अपने सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है, जिससे सहकारिता को जमीनी स्तर के आर्थिक विकास का एक प्रमुख स्तंभ बनाया गया है।

क्यों चर्चा में?

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 को “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित किया है, जिसकी थीम है — “Cooperatives Build a Better World (सहकारिताएँ एक बेहतर विश्व का निर्माण करती हैं)”। भारत ने इस वैश्विक पहल के अनुरूप सहकारी क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों और सुधारों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025: वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  • IYC 2025 का उद्देश्य 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में सहकारिताओं की भूमिका को मान्यता देना है।
  • सहकारिताएँ साझा स्वामित्व और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देती हैं।
  • ये गरीबी, असमानता और टिकाऊ आजीविका जैसी चुनौतियों का समाधान करती हैं।
  • यह वर्ष सरकारों और संस्थानों को सहकारी उद्यमों को सशक्त करने के लिए प्रेरित करता है।
  • वैश्विक स्तर पर सहकारिताओं को जन-केंद्रित आर्थिक मॉडल के रूप में देखा जाता है, जो विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व में संतुलन बनाते हैं।

भारत में सहकारी आंदोलन: पृष्ठभूमि

  • भारत की सहकारी सोच “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना से प्रेरित है और “सहकार से समृद्धि” नीति से सशक्त हुई है।
  • 1904 का कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज एक्ट इसका कानूनी आधार बना।
  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) और नाबार्ड (NABARD) जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
  • जुलाई 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन से इस क्षेत्र को विशेष ध्यान मिला।
  • दिसंबर 2025 तक भारत में 8.5 लाख से अधिक सहकारिताएँ, लगभग 32 करोड़ सदस्यों को 30 क्षेत्रों में सेवाएँ दे रही हैं और लगभग सभी ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती हैं।

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को सशक्त बनाना

  • PACS ग्रामीण सहकारिता की रीढ़ हैं और इन्हें सुधारों व डिजिटलाइजेशन से मजबूत किया गया है।
  • मॉडल उपविधियों के तहत PACS अब 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियाँ कर सकती हैं।
  • महिला एवं SC/ST प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर।
  • 79,630 PACS को राष्ट्रीय ERP प्लेटफॉर्म पर कंप्यूटरीकरण की स्वीकृति।
  • अब तक 59,261 PACS ERP सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं, 32,119 e-PACS बन चुकी हैं।
  • 34 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

बहुउद्देश्यीय और नई सहकारिताओं का विस्तार

  • गांव स्तर तक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए नई सहकारिताओं को बढ़ावा दिया गया।
  • 32,009 नई PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारिताएँ पंजीकृत।
  • PACS अब 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में कार्यरत।
  • डेयरी सहकारिताएँ 87,159 ग्राम पंचायतों में और मत्स्य सहकारिताएँ लगभग 30,000 ग्राम पंचायतों में सक्रिय।
  • ये सहकारिताएँ स्थानीय सेवा केंद्र बनकर ऋण, बाजार और सरकारी योजनाओं तक पहुँच आसान बना रही हैं।

सरकारी योजनाओं के साथ एकीकरण

  • PACS को बहु-सेवा केंद्रों में बदला जा रहा है।
  • 38,000 से अधिक PACS को पीएम किसान समृद्धि केंद्र के रूप में उन्नत किया गया।
  • कई PACS कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में भी कार्य कर रही हैं।
  • PACS स्तर पर विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना लागू।
  • पायलट चरण में 112 PACS ने 68,702 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम पूरे किए, जिससे फसलोत्तर नुकसान कम हुआ।

राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाएँ

  • तीन प्रमुख राष्ट्रीय सहकारिताएँ उत्पादन और निर्यात को मजबूती देती हैं।
  • नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने 28 देशों में 13.77 लाख मीट्रिक टन का, ₹5,556 करोड़ मूल्य का निर्यात किया।
  • नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है और इसके 28 प्रमाणित उत्पाद हैं।
  • भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड “भारत बीज” ब्रांड के तहत बीज क्षेत्र को सशक्त बना रही है।
  • इनसे किसानों और सहकारिताओं की आय व बाजार पहुँच में सुधार हुआ है।

श्वेत क्रांति 2.0 और वित्तीय समावेशन

  • श्वेत क्रांति 2.0 का लक्ष्य पाँच वर्षों में दूध खरीद में 50% वृद्धि करना है।
  • 20,000 से अधिक नई डेयरी सहकारी समितियाँ पंजीकृत।
  • कोऑपरेटिव बैंक मित्र और RuPay किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से डिजिटल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Punjab की पहली डॉग सैंक्चुअरी लुधियाना में शुरू

पंजाब ने पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लुधियाना में राज्य का पहला डॉग सैंक्चुअरी (कुत्ता आश्रय स्थल) शुरू किया है। पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य आवारा कुत्तों की समस्या का मानवीय समाधान करना और शहरी क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करना है। भविष्य में इसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना है।

क्यों चर्चा में?

पंजाब सरकार ने लुधियाना में राज्य का पहला डॉग सैंक्चुअरी उद्घाटित किया है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है और आगे चलकर इसे अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा।

लुधियाना डॉग सैंक्चुअरी: मुख्य विशेषताएँ

  • यह पंजाब का पहला संगठित केंद्र है, जो विशेष रूप से आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्थापित किया गया है।
  • सैंक्चुअरी लुधियाना में स्थित है और यहाँ आवारा कुत्तों को आश्रय व देखभाल प्रदान की जाएगी।
  • व्यवस्थित प्रबंधन के माध्यम से कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
  • यह केंद्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पशु कल्याण दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित होगा।
  • पहल में सार्वजनिक सुरक्षा और पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार—दोनों के बीच संतुलन पर जोर दिया गया है।

सरकार का उद्देश्य और दृष्टिकोण

  • इस पहल का उद्घाटन पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री संजेव अरोड़ा ने किया।
  • उद्देश्य है बिना क्रूरता के आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना।
  • शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनस्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना।
  • पायलट मॉडल के माध्यम से कार्यक्षमता का आकलन कर राज्यव्यापी विस्तार की योजना बनाना।
  • सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए पशु देखभाल और जिम्मेदार शहरी शासन—दोनों आवश्यक हैं।

सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश और कानूनी ढांचा

  • सैंक्चुअरी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संचालित होगी।
  • कुत्तों के मानवीय प्रबंधन, आश्रय और देखभाल पर विशेष जोर।
  • एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के अनुरूप नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित पुनर्वास।
  • इससे पशु करुणा और नागरिक सुरक्षा के बीच संवैधानिक संतुलन सुनिश्चित होगा।

पायलट परियोजना और राज्यव्यापी विस्तार

  • लुधियाना सैंक्चुअरी एक परीक्षण मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
  • इसके प्रदर्शन के आधार पर अन्य जिलों में इसे लागू किया जाएगा।
  • शहरी स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  • यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य राज्यों के लिए भी यह एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: दुनिया के लिए समावेशी और ज़िम्मेदार AI को आकार देना

भारत 16 से 20 फ़रवरी 2026 के बीच भारत मंडपम, नई दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी करेगा। यह पाँच दिवसीय वैश्विक सम्मेलन नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स और नागरिक समाज को एक मंच पर लाएगा। इस समिट का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को सामाजिक कल्याण, सतत विकास और आर्थिक प्रगति के लिए उपयोग करना है तथा वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय AI विमर्श में मजबूती से प्रस्तुत करना है।

क्यों चर्चा में?

भारत पहली बार वैश्विक दक्षिण में एक वैश्विक AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट का लक्ष्य वैश्विक AI चर्चाओं को डिजिटल इंडिया और IndiaAI मिशन के अनुरूप व्यावहारिक विकास परिणामों में बदलना है।

इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 क्या है?

यह एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो समाज-केंद्रित, समावेशी और नैतिक AI के उपयोग पर केंद्रित है। पाँच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में नीति संवाद, शोध चर्चा, उद्योग प्रदर्शन और जन सहभागिता शामिल होंगी। भारत इस समिट के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि AI केवल चुनिंदा तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि बड़े पैमाने पर समाज की सेवा करे।

सूत्र और चक्र 

समिट तीन सूत्रों—People (लोग), Planet (पृथ्वी) और Progress (प्रगति)—पर आधारित है, जिन्हें सात “चक्रों” के माध्यम से लागू किया जाएगा, जैसे मानव पूंजी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और विश्वसनीय AI, नवाचार एवं दक्षता, विज्ञान, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण तथा आर्थिक विकास व सामाजिक हित के लिए AI।

भारत में AI के प्रमुख अनुप्रयोग

स्वास्थ्य क्षेत्र में AI टेलीमेडिसिन, रोग पूर्वानुमान और मेडिकल इमेजिंग में मदद कर रहा है। कृषि में ड्रोन, मौसम पूर्वानुमान और स्मार्ट सलाह से किसानों की आय बढ़ रही है। शिक्षा में व्यक्तिगत शिक्षण, भाषा अनुवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये 24×7 सीखने की सुविधा मिल रही है। वहीं शासन और वित्त में AI से धोखाधड़ी पहचान, स्मार्ट सिटी समाधान और तेज़ सार्वजनिक सेवाएँ संभव हो रही हैं।

समिट के प्रमुख आकर्षण

इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में 400 से अधिक प्रदर्शक, सात थीमैटिक पवेलियन और लगभग 1.5 लाख आगंतुक शामिल होंगे। AI for ALL, AI by HER और YUVAi जैसे कार्यक्रम स्टार्टअप्स, महिला नेतृत्व और युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देंगे। 17 फ़रवरी 2026 को जारी होने वाला AI कॉम्पेंडियम भारत में वास्तविक AI उपयोग मामलों का दस्तावेज़ प्रस्तुत करेगा।

संस्थागत ढांचा

इस समिट का नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) कर रहा है, जिसे IndiaAI मिशन, STPI और डिजिटल इंडिया पहल का समर्थन प्राप्त है। यह समिट भारत को समावेशी, सुरक्षित और जन-केंद्रित AI के वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

सरकार ने न्यूज़ीलैंड और जॉर्जिया के लिए नए राजदूत नियुक्त किए

भारत ने अपनी विदेश नीति को सशक्त करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण राजनयिक नियुक्तियों की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारियों मुआनपुई सायावी और अमित कुमार मिश्रा को क्रमशः न्यूज़ीलैंड में भारत का अगला उच्चायुक्त और जॉर्जिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। ये नियुक्तियाँ विभिन्न क्षेत्रों में भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाती हैं।

क्यों खबर में?

विदेश मंत्रालय (MEA) ने मुआनपुई सायावी को न्यूज़ीलैंड के लिए भारत की अगली उच्चायुक्त और अमित कुमार मिश्रा को जॉर्जिया के लिए भारत का अगला राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की है। दोनों अधिकारी शीघ्र ही अपना कार्यभार संभालेंगे।

मुआनपुई सायावी की नियुक्ति

  • मुआनपुई सायावी को न्यूज़ीलैंड में भारत की अगली उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है।
  • वह 2005 बैच की वरिष्ठ IFS अधिकारी हैं।
  • वर्तमान में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
  • उनकी नियुक्ति की घोषणा 19 जनवरी 2026 को की गई।
  • उच्चायुक्त के रूप में वह शिक्षा, व्यापार, कृषि और इंडो-पैसिफिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत–न्यूज़ीलैंड संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

अमित कुमार मिश्रा की नियुक्ति

  • अमित कुमार मिश्रा को जॉर्जिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।
  • वह 2004 बैच के IFS अधिकारी हैं।
  • वर्तमान में नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय में कार्यरत हैं।
  • उनकी नियुक्ति की घोषणा 20 जनवरी 2026 को की गई।
  • उनसे जॉर्जिया के साथ शिक्षा, व्यापार और जन-जन के बीच संपर्क (people-to-people relations) को मजबूत करने की अपेक्षा की जा रही है।

उच्चायुक्त बनाम राजदूत : अंतर

पहलू राजदूत (Ambassador) उच्चायुक्त (High Commissioner)
देशों का प्रकार गैर-राष्ट्रमंडल (Non-Commonwealth) देश राष्ट्रमंडल (Commonwealth) देश
ऐतिहासिक आधार साझा औपनिवेशिक इतिहास नहीं ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास साझा
राजनयिक कार्यालय दूतावास (Embassy) उच्चायोग (High Commission)
संबंधों की प्रकृति अपेक्षाकृत अधिक औपचारिक अपेक्षाकृत कम औपचारिक
नियुक्ति गैर-राष्ट्रमंडल देशों में राष्ट्रमंडल देशों में
रैंक सर्वोच्च राजनयिक पद राजदूत के समान ही सर्वोच्च रैंक

सुनीता विलियम्स ने NASA से लिया रिटायरमेंट, जानें सबकुछ

नासा की प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम से सेवानिवृत्ति ले ली। अपने लंबे और गौरवशाली करियर के दौरान वह नासा के इतिहास की सबसे सम्मानित अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल रहीं। उन्होंने तीन बार अंतरिक्ष की यात्रा की, कई महीनों तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर निवास किया और अनेक कीर्तिमान स्थापित किए। उनका समर्पण, साहस और नेतृत्व न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक रहा, बल्कि दुनिया भर के लोगों को पृथ्वी से परे खोज के सपने देखने के लिए प्रेरित करता रहा।

क्यों चर्चा में?

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली। अपने कार्यकाल में उन्होंने अंतरिक्ष अभियानों में असाधारण योगदान दिया और नासा के लिए एक प्रेरणास्रोत रहीं।

प्रारंभिक करियर और नासा में प्रवेश

सुनीता विलियम्स ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत अमेरिकी नौसेना में एक अधिकारी और पायलट के रूप में की। उन्होंने हेलीकॉप्टर और फिक्स्ड-विंग विमान उड़ाए, जिससे उन्हें तकनीकी दक्षता और नेतृत्व क्षमता मिली। वर्ष 1998 में उनका चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ। शुरुआती वर्षों में उन्होंने विज्ञान, इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष अभियानों का कठोर प्रशिक्षण लिया। इसके साथ ही उन्होंने अंडरवॉटर ट्रेनिंग जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में भाग लिया, जिसने उन्हें अंतरिक्ष जैसे कठिन वातावरण में काम करने के लिए तैयार किया।

अंतरिक्ष मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन पर जीवन

सुनीता विलियम्स ने पहली बार 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी के माध्यम से अंतरिक्ष की यात्रा की और बाद में स्पेस शटल अटलांटिस से पृथ्वी पर लौटीं। वर्ष 2012 में उन्होंने एक दीर्घकालिक मिशन के लिए पुनः अंतरिक्ष उड़ान भरी और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमांडर भी रहीं। उनकी अंतिम अंतरिक्ष उड़ान 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर यान से हुई। अपने विभिन्न अभियानों के दौरान उन्होंने 600 से अधिक दिन अंतरिक्ष में बिताए और वैज्ञानिक प्रयोगों तथा स्टेशन के रखरखाव में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रिकॉर्ड और ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

अपने करियर में सुनीता विलियम्स ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। उन्होंने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो नासा के अंतरिक्ष यात्रियों में दूसरा सबसे अधिक समय है। उन्होंने 9 स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे से अधिक रही, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे अधिक है। वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति भी बनीं। ये उपलब्धियाँ उनकी शारीरिक क्षमता, दृढ़ संकल्प और कठिन परिस्थितियों में काम करने की दक्षता को दर्शाती हैं।

नेतृत्व और अंतरिक्ष उड़ान से परे योगदान

अंतरिक्ष अभियानों के अलावा, सुनीता विलियम्स ने नासा में महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएँ भी निभाईं। उन्होंने एस्ट्रोनॉट ऑफिस की डिप्टी चीफ के रूप में कार्य किया और रूस के स्टार सिटी में संचालन निदेशक के रूप में भी सेवाएँ दीं। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी के लिए हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विकास में योगदान दिया। उनका कार्य नासा के आर्टेमिस मिशनों और भविष्य में मंगल ग्रह की यात्राओं की दिशा तय करने में सहायक रहा।

शिक्षा, विरासत और सेवानिवृत्ति

सुनीता विलियम्स ने अमेरिकी नौसेना अकादमी से स्नातक और इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। एक सेवानिवृत्त नौसेना कैप्टन और कुशल पायलट के रूप में उन्होंने नासा को अनुशासन और अनुभव प्रदान किया। दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्ति के साथ उन्होंने सेवा, साहस और प्रेरणा की एक मजबूत विरासत छोड़ी। उनका जीवन और करियर आज भी छात्रों और भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को यह विश्वास दिलाता है कि कड़ी मेहनत और समर्पण से अंतरिक्ष की सीमाओं को छुआ जा सकता है।

नए समझौते के बाद UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की जनवरी 2026 में भारत यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक ऊर्जा समझौता संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत UAE भारत को हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति करेगा। इस करार के बाद UAE, क़तर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत हुए हैं।

क्यों चर्चा में?

भारत और UAE ने नई दिल्ली में शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की आधिकारिक यात्रा के दौरान एक दीर्घकालिक LNG आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ UAE, क़तर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया।

दीर्घकालिक LNG समझौता

  • इस यात्रा का सबसे अहम परिणाम हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति का दीर्घकालिक करार रहा।
  • LNG एक अपेक्षाकृत स्वच्छ जीवाश्म ईंधन है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उद्योग और रसोई गैस में व्यापक रूप से किया जाता है।
  • आर्थिक वृद्धि और शहरीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
  • यह समझौता वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता के दौर में स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • पारंपरिक रूप से प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहे UAE के साथ यह करार स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करता है।
  • क़तर से आगे आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाकर भारत आपूर्ति जोखिम कम करता है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करता है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

व्यापार, रक्षा और आर्थिक सहयोग

  • ऊर्जा के अलावा, दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया।
  • वर्तमान में (2023–24) भारत–UAE द्विपक्षीय व्यापार लगभग 84 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिससे UAE भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
  • दोनों नेताओं ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई, जो हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में बढ़ते सुरक्षा सहयोग को दर्शाती है।
  • निवेश, अवसंरचना, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल व्यापार उभरते हुए प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

परमाणु और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग

  • वार्ताओं में नागरिक परमाणु सहयोग जैसे नए और उभरते क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
  • भारत में सतत परमाणु ऊर्जा विकास से जुड़े विधायी सुधारों (जैसे शांति अधिनियम) के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खुले हैं।
  • परमाणु ऊर्जा को भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।
  • उन्नत परमाणु बिजली संयंत्र संचालित करने वाला UAE इस क्षेत्र में विशेषज्ञता और तकनीक साझा कर सकता है।

यह सहयोग वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है और बढ़ती ऊर्जा मांग को विविध एवं टिकाऊ स्रोतों से पूरा करते हुए भारत की कार्बन उत्सर्जन घटाने की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।

भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026: व्यापार, रक्षा और मोबिलिटी वार्ता निर्णायक दौर में पहुंची

नई दिल्ली में 27 जनवरी 2026 को प्रस्तावित भारत–यूरोपीय संघ (EU) शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज़ से एक अहम मोड़ पर आयोजित हो रहा है। गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय नेताओं की भागीदारी के साथ, व्यापार, रक्षा सहयोग और श्रमिकों की आवाजाही (मोबिलिटी) जैसे क्षेत्रों में बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। इससे हाल के वर्षों में लगातार मज़बूत होती भारत–EU रणनीतिक साझेदारी को और बल मिलेगा।

क्यों चर्चा में?

भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी 2026 को उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। इस बैठक में भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के निष्कर्ष, रक्षा सहयोग और मोबिलिटी से जुड़े नए समझौतों की घोषणा की संभावना है।

गणतंत्र दिवस कूटनीति

  • भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शीर्ष यूरोपीय नेतृत्व की मौजूदगी दोनों पक्षों के बीच बढ़ते राजनीतिक भरोसे को दर्शाती है।
  • यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
  • एक छोटा EU सैन्य दल परेड में भाग लेगा।
  • ऑपरेशन अटलांटा और ऑपरेशन एस्पाइड्स जैसे EU नौसैनिक अभियानों के झंडे प्रदर्शित किए जाएंगे।
  • व्यापार और सुरक्षा से जुड़े नेताओं सहित 90 से अधिक EU अधिकारी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।
  • यह सब EU की उस मंशा को दर्शाता है, जिसमें वह केवल आर्थिक समूह नहीं बल्कि भारत का रणनीतिक साझेदार बनकर उभरना चाहता है।

क्या FTA वार्ता अपने अंतिम चरण में?

  • भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस शिखर सम्मेलन का सबसे अहम परिणाम हो सकता है।
  • वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, 2013 में स्थगित हुई और जून 2022 में फिर से शुरू की गई।
  • शिखर सम्मेलन में वार्ताओं के औपचारिक समापन की घोषणा संभव है।
  • इसके बाद कानूनी जाँच और यूरोपीय संसद द्वारा अनुमोदन की प्रक्रिया होगी।
  • प्रमुख मुद्दों में वाइन व स्पिरिट्स, ऑटोमोबाइल और स्टील व्यापार शामिल हैं।
  • FTA लागू होने से द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, शुल्क कम होंगे और भारतीय निर्यातकों व यूरोपीय निवेशकों को बेहतर बाज़ार पहुंच मिलेगी।

CBAM और व्यापार चुनौतियाँ

  • प्रगति के बावजूद कुछ संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं, विशेषकर कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM)।
  • CBAM के तहत स्टील और सीमेंट जैसे कार्बन-गहन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित है।
  • भारत को आशंका है कि यह विकासशील देशों के लिए व्यापार बाधा बन सकता है।
  • EU का तर्क है कि यह जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और “कार्बन लीकेज” रोकने के लिए आवश्यक है।
  • शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष मतभेद कम करने का प्रयास करेंगे।
  • यह मुद्दा व्यापार नीति और जलवायु कार्रवाई को जोड़ता है, इसलिए परीक्षाओं और वैश्विक वार्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सुरक्षा और रक्षा साझेदारी

  • शिखर सम्मेलन में सुरक्षा और रक्षा साझेदारी (SDP) की घोषणा की भी उम्मीद है, जो भारत–EU सुरक्षा सहयोग के नए चरण की शुरुआत करेगी।
  • रक्षा इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त समन्वय में सुधार होगा।
  • भारतीय कंपनियों को EU के SAFE (Security Action for Europe) कार्यक्रम तक पहुँच मिल सकती है।
  • SAFE यूरोप की रक्षा तैयारी बढ़ाने के लिए €150 अरब का रक्षा फंडिंग साधन है।
  • इसके अलावा सिक्योरिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट (SOIA) पर बातचीत शुरू हो सकती है, जिससे गोपनीय रक्षा जानकारी का सुरक्षित आदान–प्रदान और संयुक्त रक्षा विनिर्माण संभव होगा।

भारतीय श्रमिकों के लिए मोबिलिटी ढांचा

  • एक और अहम परिणाम भारतीय श्रमिकों की यूरोप में आवाजाही पर प्रस्तावित MoU हो सकता है।
  • यह कानूनी और संरचित प्रवासन मार्गों पर केंद्रित होगा।
  • कुशल पेशेवरों, छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा।
  • फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों के साथ पहले से ऐसे द्विपक्षीय समझौते मौजूद हैं।
  • नया ढांचा EU स्तर पर सहयोग को विस्तार देगा।

यह पहल लोगों के बीच संपर्क बढ़ाएगी, यूरोप की कुशल श्रम मांग को पूरा करेगी और भारत के युवा कार्यबल के लिए नए अवसर खोलेगी।

एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में भारत 6वें नंबर पर

भारत को एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में छठा स्थान मिला है, जो देश की विनिर्माण क्षमता में हुई प्रगति को दर्शाता है, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धात्मकता में मौजूद कमियों को भी उजागर करता है। यह रैंकिंग एशिया की प्रमुख विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं की तुलना संरचनात्मक और नीतिगत संकेतकों के आधार पर करती है। भारत एक महत्वपूर्ण विनिर्माण गंतव्य बना हुआ है, परंतु सूचकांक के अनुसार अग्रणी एशियाई देशों के साथ कदम से कदम मिलाने के लिए तेज़ सुधारों और बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

क्यों चर्चा में?

एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में भारत 11 एशियाई देशों में छठे स्थान पर रहा। रिपोर्ट में एशिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भारत द्वारा विनिर्माण सुधारों को तेज़ करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है।

एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स (AMI) क्या है?

एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स एक वार्षिक मूल्यांकन है, जिसे हांगकांग स्थित पैन-एशियन सलाहकार संस्था डेज़न शिरा एंड एसोसिएट्स द्वारा जारी किया जाता है। यह सूचकांक एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को आठ प्रमुख स्तंभों—अर्थव्यवस्था, राजनीतिक जोखिम, व्यवसायिक वातावरण, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कर नीति, अवसंरचना, कार्यबल और नवाचार—के आधार पर परखता है। इन स्तंभों को 43 उप-मापदंडों में विभाजित किया गया है, जिससे दीर्घकालिक विनिर्माण क्षमता की गहन और डेटा-आधारित तुलना संभव होती है।

भारत की स्थिति और प्रमुख निष्कर्ष

छठा स्थान भारत को एशियाई विनिर्माण परिदृश्य के मध्य में रखता है। सूचकांक के अनुसार, बड़े घरेलू बाज़ार, बेहतर होती अवसंरचना और बढ़ते कार्यबल के बावजूद भारत नीति स्थिरता, क्रियान्वयन की गति और नवाचार की गहराई में अग्रणी देशों से पीछे है। प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस, लॉजिस्टिक्स दक्षता, कौशल विकास और तकनीक अपनाने पर निरंतर ध्यान आवश्यक होगा।

अन्य एशियाई देशों का प्रदर्शन

चीन ने एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में शीर्ष स्थान बनाए रखा, जो उसके विशाल पैमाने, मज़बूत अवसंरचना और एकीकृत आपूर्ति शृंखलाओं को दर्शाता है। मलेशिया पहली बार दूसरे स्थान पर पहुँचा, जबकि वियतनाम तीसरे स्थान पर खिसक गया। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सिंगापुर चौथे स्थान पर रहा और दक्षिण कोरिया पाँचवें स्थान पर आ गया। ये बदलाव एशिया में तेज़ होती प्रतिस्पर्धा और सुधारों की रफ़्तार को रेखांकित करते हैं।

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