DRDO ने किया प्रलय मिसाइल का लगातार दूसरा सफल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 28 और 29 जुलाई 2025 को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा से ‘प्रलय’ मिसाइल के दो लगातार सफल परीक्षण किए। ये उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण (User Evaluation Trials) मिसाइल की अधिकतम और न्यूनतम मारक सीमा की पुष्टि के लिए किए गए थे, जिनमें इसकी उच्च सटीकता और विश्वसनीयता सिद्ध हुई। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित ‘प्रलय’ मिसाइल अत्याधुनिक मार्गदर्शन (guidance) और नेविगेशन सिस्टम से लैस है। यह विभिन्न प्रकार के वारहेड्स (warheads) को ले जाने में सक्षम है, जिससे यह भारतीय सशस्त्र बलों की संचालनिक तैयारी (operational readiness) को काफी मजबूती प्रदान करती है। इस सफल परीक्षण ने एक बार फिर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है।

ओडिशा तट से ‘प्रलय’ मिसाइल के सफल परीक्षण

रक्षा मंत्रालय (MoD) ने घोषणा की है कि DRDO ने 28 और 29 जुलाई 2025 को ओडिशा तट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘प्रलय’ मिसाइल के दो लगातार सफल उड़ान परीक्षण किए। ये परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन अभ्यास (User Evaluation Exercises) के तहत किए गए, जिनका उद्देश्य मिसाइल प्रणाली की अधिकतम और न्यूनतम मारक सीमा को प्रमाणित करना था। मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल ने निर्धारित मार्ग (trajectory) का सफलतापूर्वक पालन किया और चिह्नित लक्ष्य बिंदु को सटीकता से भेदा, जिससे सभी तय मानदंड पूरे हुए। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) द्वारा तैनात उन्नत ट्रैकिंग सेंसरों—जिनमें एक निकटवर्ती पोत पर स्थापित उपकरण भी शामिल थे—ने मिसाइल के प्रदर्शन की सत्यापन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

प्रलय मिसाइल की विशेषताएं

प्रलय मिसाइल एक स्वदेशी रूप से विकसित ठोस ईंधन आधारित अर्ध-प्रक्षेपवक्रिक (quasi-ballistic) मिसाइल है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • उच्च सटीकता वाली मार्गदर्शन प्रणाली: इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणालियाँ हैं जो लक्ष्य पर सटीक प्रहार सुनिश्चित करती हैं।

  • बहु-वारहेड क्षमता: यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के वारहेड्स ढोने में सक्षम है, जिससे यह कई प्रकार के लक्ष्यों पर हमला कर सकती है और इसकी परिचालन बहुउपयोगिता बढ़ती है।

  • स्वदेशी विकास: इसे रिसर्च सेंटर इमरत (RCI) द्वारा अन्य DRDO प्रयोगशालाओं जैसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) और आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के सहयोग से विकसित किया गया है।

  • औद्योगिक भागीदारी: इसमें प्रमुख भारतीय रक्षा कंपनियाँ जैसे भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और कई अन्य भारतीय उद्योग व MSMEs शामिल हैं।

सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग की उपस्थिति

मिसाइल परीक्षणों के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, भारतीय वायुसेना और थलसेना के प्रतिनिधियों, और रक्षा क्षेत्र के औद्योगिक साझेदारों की उपस्थिति रही। यह परीक्षण प्रणाली को भारत की रक्षा क्षमताओं में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

DRDO की हालिया उपलब्धियाँ

प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद DRDO ने एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। 25 जुलाई 2025 को, DRDO ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित नेशनल ओपन एरिया रेंज (NOAR) में Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile (ULPGM)-V3 का सफल परीक्षण किया।

ULPGM-V3 मिसाइल, अपने पिछले संस्करण ULPGM-V2 का उन्नत संस्करण है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • हाई-डेफिनिशन डुअल-चैनल सीकर: विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को सटीकता से भेदने में सक्षम।

  • दिवा-रात्रि संचालन की क्षमता: दिन और रात दोनों में प्रभावी मिशनों के लिए उपयुक्त।

  • टू-वे डाटा लिंक: प्रक्षेपण के बाद भी लक्ष्य बिंदु को अद्यतन (अपडेट) करने की सुविधा।

  • तीन प्रकार के मॉड्यूलर वारहेड विकल्प:

    • एंटी-आर्मर (टैंक-रोधी)

    • पिनेट्रेशन-कम-ब्लास्ट (बंकर-भेदी विस्फोट)

    • प्री-फ्रैगमेंटेशन विद हाई लेथैलिटी (अधिक घातकता वाला टुकड़ा-विस्फोटक वारहेड)

इन निरंतर सफल परीक्षणों के माध्यम से DRDO ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि वह स्वदेशी नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी विकास के ज़रिए भारत की रक्षा क्षमता को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारतीय तटरक्षक बल के तीव्र गश्ती पोत ‘अटल’ का गोवा में जलावतरण

भारत ने अपनी तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के नवीनतम तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel – FPV) ‘अटल’ का जलावतरण किया गया। यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा वास्को-दा-गामा में निर्मित किया गया है और आठ अत्याधुनिक एफपीवी श्रृंखला में यह छठा पोत है। यह जलयान रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भरता’ के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।

जहाज निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

तेज गश्ती पोत ‘अटल’ (यार्ड 1275) को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत सार्वजनिक उपक्रम गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया है। यह लॉन्च भारत की बढ़ती समुद्री रक्षा क्षमताओं का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि देश अब उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्माण में विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रह रहा है। ‘अटल’ का जलावतरण टीम GSL की अटूट प्रतिबद्धता, नवाचार और स्वदेशीकरण के प्रति समर्पण को दर्शाता है, जो उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बावजूद सिद्ध किया है।

FPV ‘अटल’ की विशेषताएँ और क्षमताएँ:

  • आकार व भार: यह पोत 52 मीटर लंबा, 8 मीटर चौड़ा है और इसका वजन लगभग 320 टन है। इसकी संरचना इसे तेज़ और फुर्तीला बनाती है, जो तटीय सुरक्षा अभियानों के लिए उपयुक्त है।

  • संचालन भूमिकाएँ: ‘अटल’ को तटीय गश्त, द्वीप सुरक्षा, अपतटीय परिसंपत्ति रक्षा, तस्करी-विरोधी, समुद्री डकैती-रोधी और खोज व बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

  • आधुनिक डिज़ाइन: GSL द्वारा देश में ही विकसित डिज़ाइन अत्याधुनिक नौसैनिक वास्तुकला का उदाहरण है, जो गति और स्थिरता दोनों सुनिश्चित करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान:

FPV ‘अटल’ का जलावतरण भारत की समुद्री सतर्कता को बढ़ाता है और भारतीय तटरेखा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तस्करी व समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों के मद्देनज़र, ऐसे पोत भारत की अग्रिम रक्षा पंक्ति बनाते हैं। मुख्य अतिथि रोज़ी अग्रवाल (प्रधान आंतरिक वित्तीय सलाहकार, तटरक्षक मुख्यालय) ने GSL की क्षमता की सराहना की और पोत के माध्यम से भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण बताया।

भागीदारी और सहयोग:

इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और रणनीतिक औद्योगिक भागीदारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जो भारत की रक्षा तैयारी को सशक्त बनाने में संयुक्त प्रयासों को दर्शाता है।

Asian Youth TT Championships: दिव्यांशी भौमिक ने गोल्ड जीत रचा इतिहास

भारत की युवा टेबल-टेनिस खिलाड़ी दिव्यांशी भौमिक ने एशियन यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। 14 वर्षीय दिव्यांशी इस चैंपियनशिप की अंडर-15 कैटेगरी में खेल रही थीं। अंडर-15 बालिका एकल खिताब जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया। दिव्यांशी की ये स्वर्णिम सफलता इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि 36 वर्षों बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने ये खिताब जीता है।गोल्ड मेडल मैच में दिव्यांशी ने चीन की झू छीही को 4-2 से हराया।

एशियन यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का फाइनल जीतकर 36 वर्षों बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी दिव्यांशी ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण प्रदर्शन किया। भारत की युवा सनसनी ने तीन चीनी खिलाड़ियों को हराया। भारत ने इस कड़ी प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदकों अपने नाम किए।

कई और भी पुरस्कार जीत चुकी हैं दिव्यांशी भौमिक

रिपोर्ट के मुताबिक दिव्यांशी दानी स्पोर्ट्स फाउंडेशन के डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा हैं। फाउंडेशन अल्टीमेट टेबल टेनिस (UTT) के साथ मिलकर युवा प्रतिभाओं को निखारने की मुहिम में जुटा है। उन्होंने ड्रीम UTT जूनियर्स के पहले संस्करण में भी पुरस्कार जीता था। इसी साल अप्रैल में टेबल टेनिस सुपर लीग महाराष्ट्र में दिव्यांशी को सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी (ओवरऑल) चुना गया था।

भारत का समग्र प्रदर्शन

भारत ने इस चैंपियनशिप में अपना अभियान एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदकों के साथ समाप्त किया। हालांकि, इस प्रतियोगिता की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि दिव्यांशी की ऐतिहासिक जीत रही, जिसने भारत में युवा टेबल टेनिस के पुनरुत्थान का संकेत दिया और भविष्य में और भी बड़ी सफलता की उम्मीद जगाई।

पीएम मोदी ने प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल बनाने के लिए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ लॉन्च किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2025 को ‘मन की बात’ के 124वें संस्करण के दौरान भारत के प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी पहल ‘ज्ञान भारतम मिशन’ की घोषणा की। यह मिशन देश की सभ्यतागत धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार (National Digital Repository) तैयार किया जाएगा, जिसमें हजारों वर्ष पुराने ज्ञान, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, गणित और अन्य विषयों से संबंधित ग्रंथों को डिजिटल रूप में संग्रहीत और साझा किया जाएगा। यह पहल न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी एक सशक्त माध्यम बनेगी।

ज्ञान भारतम मिशन क्या है?

ज्ञान भारतम मिशन भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने और डिजिटाइज़ करने की एक राष्ट्रव्यापी परियोजना है। इसका उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें “भारत की आत्मा के अध्याय” बताते हुए कहा कि ये ग्रंथ हमारे सांस्कृतिक, सभ्यतागत और आध्यात्मिक धरोहर के अनमोल स्रोत हैं।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य:

  • पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण: नाज़ुक और दुर्लभ ग्रंथों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करना ताकि उनका क्षरण रोका जा सके।

  • राष्ट्रीय डिजिटल भंडार की स्थापना: एक ऐसा केंद्रीय मंच तैयार करना, जहाँ से ये पांडुलिपियाँ वैश्विक स्तर पर छात्रों, शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए सुलभ हो सकें।

  • ज्ञान की पहुँच: पारंपरिक भारतीय ज्ञान-विज्ञान को आधुनिक शोध और शिक्षा के लिए उपलब्ध कराना।

  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: आने वाली पीढ़ियों को भारत की जड़ों से जोड़ना और परंपराओं की निरंतरता सुनिश्चित करना।

बजटीय समर्थन और विस्तार:

इस मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025 में की गई थी। शुरुआत में ₹3.5 करोड़ का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर ₹60 करोड़ कर दिया गया है। यह सरकार की इस दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सभ्यतागत महत्व:

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को भारत की आत्मा के पुनर्जागरण से जोड़ते हुए कहा कि ये पांडुलिपियाँ केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों की बौद्धिक और आध्यात्मिक यात्रा का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें और इस अमूल्य धरोहर को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने में सहयोग दें।

यूनेस्को द्वारा मराठा किलों की मान्यता:

इसी संबोधन में पीएम मोदी ने 12 मराठा किलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये किले “इतिहास के पन्ने” हैं— जिनमें से 11 महाराष्ट्र और 1 तमिलनाडु में स्थित है। यह सम्मान भारत की इतिहासबोध और सांस्कृतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

भारतीय हॉकी के 100 साल: हॉकी इंडिया ने अनुदानों की घोषणा की

हॉकी इंडिया ने अपनी 15वीं कांग्रेस के दौरान राष्ट्रीय और जमीनी स्तर के टूर्नामेंट के समर्थन के लिए अपने वित्तीय अनुदान में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा की है। वहीं, भारतीय हॉकी के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस कांग्रेस में कई ऐतिहासिक घोषणाएं हुईं, जिनमें सात नवंबर को एक राष्ट्रव्यापी उत्सव का आयोजन भी शामिल है।

अब से सीनियर पुरुष और सीनियर महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेजबानी के लिए 70-70 लाख रुपये, जूनियर पुरुष, जूनियर महिला, सब जूनियर पुरुष और सब जूनियर महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजन के लिए 30-30 लाख रुपये आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के समर्थन के लिए प्रत्येक राज्य को 25 लाख रुपये दिए जाएंगे।

राष्ट्रीय हॉकी उत्सव: विरासत का उत्सव

भारतीय हॉकी के 100 वर्षों की उपलब्धि को मनाने के लिए, हॉकी इंडिया 7 नवंबर 2025 को एक राष्ट्रीय उत्सव का आयोजन करेगी। इस दिन देश के हर जिले में एक पुरुष और एक महिला मैच सहित कुल 1,000 हॉकी मैच एक साथ खेले जाएंगे। इस आयोजन में लगभग 36,000 खिलाड़ी (महिला और पुरुष समान संख्या में) भाग लेंगे, जो भारतीय हॉकी में समावेशिता और एकता का प्रतीक होगा।

विरासत को सम्मान और भविष्य में निवेश

इस अवसर पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा, “जब हम भारतीय हॉकी के 100 साल का उत्सव मना रहे हैं, तब हम अपनी स्वर्णिम विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ भविष्य की नींव भी रख रहे हैं। यह वित्तीय सहायता अगली पीढ़ी के सपनों में सीधा निवेश है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे।”

घोषणा का महत्व

यह पहल भारतीय हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जिसमें उत्सव को रणनीतिक निवेश से जोड़ा गया है। बढ़ी हुई वित्तीय सहायता सीधे तौर पर खिलाड़ियों, कोचों और जमीनी स्तर के अधिकारियों को समर्थन देगी, जो भारत की हॉकी व्यवस्था की रीढ़ हैं। साथ ही, 7 नवंबर को होने वाला भव्य उत्सव न केवल हॉकी की समृद्ध विरासत को श्रद्धांजलि देगा, बल्कि युवाओं को प्रेरित कर इसे भारत के राष्ट्रीय गौरव के रूप में और सुदृढ़ करेगा।

भारतीय हॉकी: भविष्य की रीढ़

हॉकी इंडिया ने कहा कि इन बढ़े हुए अनुदानों का उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आयोजन की गुणवत्ता में सुधार करना और स्थानीय स्तर पर वित्तीय बाधाओं को कम करके व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस सहयोग से हजारों उभरते खिलाड़ियों, कोचों और जमीनी स्तर के अधिकारियों को लाभ होने की उम्मीद है जो भारतीय हॉकी के भविष्य की रीढ़ हैं।

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने ‘सस्टेनेबल वेलनेस ऑफ स्टूडेंट्स’ पुस्तक का किया विमोचन

छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 जुलाई 2025 को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास के सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ‘सस्टेनेबल वेलनेस ऑफ स्टूडेंट्सः अ कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी इन हायर एजुकेशन‘ नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों द्वारा झेली जा रही मानसिक और सामाजिक चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

मुख्यमंत्री का छात्र-केंद्रित प्रयासों पर जोर

पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन में छात्रों पर पड़ने वाले दबावों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्थानों को ज्ञान के साथ-साथ कल्याण के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पुस्तक के प्रकाशन की सराहना की और इसके हिंदी संस्करण की आवश्यकता जताई, ताकि इसके विचार राज्य और देश भर के व्यापक छात्र समुदाय तक पहुंच सकें।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से जुड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड NEP को लागू करने वाला पहला राज्य बना। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के साथ-साथ राज्य अब छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहा है, जो समग्र शिक्षा प्रणाली की दिशा में एक मजबूत कदम है।

पुस्तक के बारे में: छात्र कल्याण के लिए एक रोडमैप

सस्टेनेबल वेलनेस ऑफ स्टूडेंट्सः अ कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी इन हायर एजुकेशन‘ नामक इस पुस्तक का संपादन प्रो. लता पांडे (प्रमुख, गृह विज्ञान विभाग, डीएसबी परिसर, कुमाऊं विश्वविद्यालय) और डॉ. रमाआनंद (निदेशक, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली) ने संयुक्त रूप से किया है।

यह पुस्तक छात्र कल्याण की गहराई से पड़ताल करती है और निम्नलिखित विषयों पर प्रकाश डालती है:

  • मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श

  • कौशल विकास एवं करियर मार्गदर्शन

  • पुनर्वास और सामाजिक उत्थान की पहलें

  • शिक्षकों, प्रशासन, अभिभावकों और नीति-निर्माताओं की सक्रिय भूमिका

उच्च शिक्षा में महत्व

उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो. कमल किशोर पांडे भी कार्यक्रम में उपस्थित थे और उन्होंने राज्य सरकार की छात्र-अनुकूल नीतियों और सहायता प्रणालियों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

इस पुस्तक का विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब दुनियाभर में छात्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं का सामना कर रहे हैं। यह पहल छात्र कल्याण को सामूहिक उत्तरदायित्व के रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे एक समावेशी और सहायक शैक्षिक वातावरण का निर्माण हो सके, जहाँ छात्र शैक्षणिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से समृद्ध हो सकें।

ओडिशा में 7808 करोड़ का होगा निवेश

ओडिशा ने अपने वस्त्र एवं परिधान उद्योग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 7,808 करोड़ रुपये (902 मिलियन डॉलर) के 33 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह उपलब्धि भुवनेश्वर में आयोजित ओडिशा-टेक्स 2025 सम्मेलन के दौरान हासिल की गई। यह पहल “ओडिशा अपैरल एवं टेक्निकल टेक्सटाइल नीति 2022” के अंतर्गत की गई है, जिसका उद्देश्य राज्य को पूर्वी भारत का वस्त्र हब बनाना है।

घोषणा की प्रमुख विशेषताएं

बड़ी निवेश वृद्धि
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार ने 160 से अधिक वस्त्र कंपनियों के साथ 902 मिलियन डॉलर (₹7,808 करोड़) के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। प्रमुख भागीदारों में पेज इंडस्ट्रीज़, केपीआर मिल्स, स्पोर्टकिंग, आदर्श निटवियर, बॉन एंड कंपनी और बी.एल. इंटरनेशनल शामिल रहे।

रोजगार सृजन का लक्ष्य
राज्य सरकार ने 2030 तक वस्त्र और परिधान क्षेत्र में एक लाख से अधिक नौकरियां उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है। इससे न केवल राज्य में रोजगार दर में वृद्धि होगी बल्कि कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों को भी अवसर मिलेंगे।

वस्त्र क्लस्टर्स का विस्तार
सरकार छह प्रमुख जिलों में वस्त्र हब विकसित करने की योजना बना रही है—

  • बलांगीर

  • क्योंझर

  • संबलपुर

  • जगतसिंहपुर

  • गंजाम

  • कटक

इन क्लस्टरों में बड़े पैमाने पर वस्त्र निर्माण इकाइयों के आने की संभावना है, जिससे राज्य का औद्योगिक आधार मजबूत होगा।

नीतिगत सहयोग और प्रोत्साहन

अपैरल एवं टेक्निकल टेक्सटाइल नीति 2022
औद्योगिक नीति संकल्प 2022 के अनुरूप, यह नीति निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करती है। नीति का मुख्य फोकस है—

  • विश्वस्तरीय अवसंरचना

  • त्वरित परियोजना अनुमोदन

  • रोजगार सब्सिडी

  • सहायक शासन प्रणाली

रोजगार सब्सिडी में वृद्धि
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को प्रोत्साहित करने के लिए मासिक रोजगार लागत सब्सिडी में वृद्धि की घोषणा की—

  • पुरुष श्रमिकों के लिए ₹5,000 से बढ़ाकर ₹6,000

  • महिला श्रमिकों के लिए ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,000

इस कदम से क्षेत्र को श्रमिक अनुकूल बनाया जाएगा और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।

ओडिशा-टेक्स 2025 सम्मेलन

ओडिशा-टेक्स 2025 सम्मेलन राज्य की निवेश क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच बना। इसमें 650 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें वैश्विक वस्त्र ब्रांड, प्रौद्योगिकी प्रदाता, स्टार्टअप्स और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे।

राज्य के उद्योग विभाग के अंतर्गत एक समर्पित टास्क फोर्स भी गठित की गई है, जो सभी MoUs के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी और निवेशकों को पूर्ण सरकारी सहयोग सुनिश्चित करेगी।

रणनीतिक महत्व

इस पहल के माध्यम से ओडिशा पूर्वी भारत के भविष्य के वस्त्र हब के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है। नीतिगत सुधार, आधारभूत संरचना विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात बाजार को मजबूत करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में भी योगदान देगा।

चीन ने AI विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन पर वैश्विक सहमति का आह्वान किया

शंघाई में आयोजित वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ़्रेंस (WAIC) 2025 के दौरान चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास और उससे जुड़ी सुरक्षा जोखिमों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वैश्विक सहमति की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज़ होती जा रही है, और दोनों देश वैश्विक AI नेतृत्व के लिए प्रयासरत हैं। ली क्यांग ने कहा कि AI का विकास मानवता के लिए अपार संभावनाएं रखता है, लेकिन इसके साथ जुड़े खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए सभी देशों को मिलकर एक जिम्मेदार और सुरक्षित ढांचा तैयार करना होगा।

AI शासन पर चीन की स्थिति

नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन की आवश्यकता
चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने ज़ोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां विकास और नवाचार के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करता है, वहीं यह गलत सूचना के प्रसार, नौकरी छिनने, नैतिक प्रश्नों, और तकनीकी नियंत्रण खोने के खतरों जैसे गंभीर जोखिम भी उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को तत्काल एक साझा ढांचे की आवश्यकता है जो AI की प्रगति को सुरक्षा विनियमों के साथ संतुलित कर सके।

ओपन-सोर्स विकास को बढ़ावा
ली क्यांग ने घोषणा की कि चीन की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय AI सहयोग संगठन की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि चीन ओपन-सोर्स AI को बढ़ावा देगा ताकि विकासशील देश भी नवीनतम तकनीकों का लाभ उठा सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश प्रौद्योगिकीय एकाधिकार और अवरोधों में लगे रहेंगे, तो AI केवल कुछ शक्तिशाली देशों और कंपनियों तक ही सीमित रह जाएगा।

अमेरिकी रणनीति और उसका प्रभाव

ट्रंप की विनियमन-मुक्त नीति
ली क्यांग की टिप्पणी उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कम-नियमन रणनीति की घोषणा की। उन्होंने निजी क्षेत्र की वृद्धि को बाधित करने वाले नियमों को हटाने का वादा किया, जिससे अमेरिका की AI में वैश्विक बढ़त सुनिश्चित की जा सके।

चीन पर निर्यात प्रतिबंध
साथ ही, अमेरिका ने उन्नत चिप्स के चीन को निर्यात पर प्रतिबंधों का विस्तार किया है, यह कहते हुए कि ये तकनीकें बीजिंग की सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर सकती हैं और अमेरिका की तकनीकी बढ़त को खतरे में डाल सकती हैं।

चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की राह

रुकावटों पर काबू
ली क्यांग ने माना कि कंप्यूटिंग पावर और चिप्स की कमी चीन की AI प्रगति में एक बड़ी बाधा है। फिर भी, उन्होंने घरेलू स्तर पर हुए महत्वपूर्ण तकनीकी विकास की ओर इशारा किया। उदाहरण के लिए, जनवरी 2025 में चीनी स्टार्टअप DeepSeek ने एक ऐसा AI मॉडल लॉन्च किया, जो अमेरिकी प्रणालियों के बराबर था, जबकि उसने कमज़ोर चिप्स का उपयोग किया।

AI को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना
चीन ने AI विकास को अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता रणनीति का स्तंभ घोषित किया है, और सरकार ने इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नीतिगत समर्थन और निवेश का वादा किया है।

वैश्विक चिंताएं और नैतिक आयाम

विशेषज्ञों की चेतावनियाँ
WAIC सम्मेलन में नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी जियोफ्री हिंटन, जिन्हें “AI के गॉडफादर” के रूप में जाना जाता है, ने AI विकास की तुलना बाघ के शावक को पालने से की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सावधानीपूर्वक शासन नहीं किया गया, तो AI अनियंत्रित हो सकता है – जैसे बड़ा हुआ बाघ अपने मालिक पर हमला कर दे।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पुकार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक वीडियो संदेश में AI शासन को “अंतरराष्ट्रीय सहयोग की एक निर्णायक परीक्षा” बताया। वहीं फ्रांस की AI दूत ऐनी बुवेरो ने कहा कि AI के सुरक्षित और नैतिक उपयोग के लिए वैश्विक कार्रवाई आवश्यक है।

फरवरी 2025 में पेरिस में आयोजित AI शिखर सम्मेलन में 58 देशों—जैसे चीन, फ्रांस और भारत, साथ ही यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ आयोग—ने AI शासन पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि, अमेरिका और ब्रिटेन ने इस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, यह कहते हुए कि अत्यधिक विनियमन नवाचार में बाधा बन सकता है।

मास्टरकार्ड ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ सहयोग किया

आंध्र प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम (APTDC) ने वैश्विक भुगतान कंपनी मास्टरकार्ड के साथ साझेदारी की है। यह सहयोग 27 जून 2025 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। इस समझौते का उद्देश्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और आधुनिक आतिथ्य क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच लोकप्रिय बनाना है।

पर्यटन विकास के लिए एक रणनीतिक साझेदारी

दावोस में हुई बातचीत का परिणाम
यह सहयोग विश्व आर्थिक मंच, दावोस में हुई चर्चाओं का प्रत्यक्ष परिणाम है, जहाँ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मास्टरकार्ड के अधिकारियों के साथ राज्य में पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा की थी। उसी बैठक के बाद APTDC और मास्टरकार्ड के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिससे राज्य के पर्यटन प्रचार के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई।

विजयवाड़ा में कार्यशाला
25 जुलाई 2025 को विजयवाड़ा में आयोजित एक कार्यशाला में, मास्टरकार्ड के देशभर से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की मेज़बानी APTDC की प्रबंध निदेशक अम्रपाली काटा ने की। उन्होंने निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी:

  • राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का परिचय

  • नवविकसित पर्यटन गंतव्य

  • लक्ज़री आवास और स्टार होटल

  • पर्यटन अधोसंरचना में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल)

  • रिसॉर्ट्स और होटलों के निर्माण और संचालन के लिए सरकार की सक्रिय पहल

मास्टरकार्ड की भूमिका

पर्यटन के लिए एक्शन प्लान
राज्य पर्यटन विभाग के विशेष मुख्य सचिव अजय जैन के अनुसार, मास्टरकार्ड ने आंध्र प्रदेश में एक विशेष टीम तैनात की है। यह टीम निम्नलिखित जिम्मेदारियों पर कार्य कर रही है:

  • पर्यटन अधोसंरचना की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन

  • वैश्विक मास्टरकार्ड उपयोगकर्ताओं को राज्य की पर्यटन प्रणाली से जोड़ने की योजना बनाना

  • अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लक्षित प्रचार रणनीतियाँ तैयार करना

रुचिकर क्षेत्र
मास्टरकार्ड की टीम ने विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के तटीय स्थलों जैसे बंगाल की खाड़ी के समुद्र तटों, साथ ही ऐतिहासिक मंदिरों, स्मारकों और स्थानीय कलाओं में रुचि दिखाई। उनके सकारात्मक सुझावों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में प्रीमियम पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं।

आगामी योजनाएँ
इस साझेदारी के तहत निम्नलिखित प्रमुख पहलें शुरू की जाएँगी:

  • मास्टरकार्ड के वैश्विक कार्डधारकों के बीच आंध्र प्रदेश पर्यटन का लक्षित प्रचार

  • मास्टरकार्ड के विशेष भागीदारों के माध्यम से यात्रा और बुकिंग पर आकर्षक प्रोत्साहन

  • पर्यटक स्थलों पर डिजिटल भुगतान की सुविधाओं का विस्तार, जिससे यात्रा होगी अधिक सुगम और कैशलेस

  • स्थानीय होटलों, रिसॉर्ट्स और अनोखे अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा

भविष्य की संभावनाएँ

यह साझेदारी आंध्र प्रदेश को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, विशेष रूप से लक्ज़री पर्यटन, सांस्कृतिक यात्रा, और तटीय अनुभवों पर केंद्रित। मास्टरकार्ड के वैश्विक ग्राहक आधार और भुगतान नेटवर्क का लाभ उठाकर, राज्य में विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे न केवल पर्यटन बल्कि स्थानीय व्यवसायों, रोज़गार और कुल आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।

मैंगलोर की छात्रा रेमोना परेरा ने लगातार 170 घंटे भरतनाट्यम करके विश्व रिकॉर्ड बनाया

कर्नाटक की मैंगलोर की छात्रा रेमोना परेरा नेलगातार 170 घंटे भरतनाट्यम करके विश्व रिकॉर्ड बनाया है। मैंगलोर के सेंट एलॉयसियस कॉलेज की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा रेमोना का नाम अब गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। रेमोना ने कॉलेज के रॉबर्ट सेक्वेरा हॉल में भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। उन्होंने लगातार सात दिनों तक दिन-रात भरतनाट्यम किया।

पिछला रिकॉर्ड 127 घंटे लगातार भरतनाट्यम का था। अब लगातार 170 घंटे भरतनाट्यम करके रेमोना परेरा ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेमोना पिछले 13 सालों से भरतनाट्यम का अभ्यास कर रही हैं। उन्होंने भरतनाट्यम में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। वह रोजाना 5 से 6 घंटे भरतनाट्यम का अभ्यास करती हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ भरतनाट्यम को भी उतनी ही प्राथमिकता दी है।

रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

सात दिनों तक निरंतर नृत्य
सेंट एलोयसियस कॉलेज, मैंगलोर की छात्रा रेमोना ने लगातार सात दिन तक भरतनाट्यम नृत्य करते हुए 10,200 मिनट यानी 170 घंटे का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। यह प्रस्तुति 28 जुलाई 2025 को संपन्न हुई, और इस दौरान उन्होंने 2023 में 16 वर्षीय सुधीर जगपत द्वारा बनाए गए 127 घंटे के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

उत्सव का क्षण
जैसे-जैसे अंतिम घंटे नजदीक आया, सेंट एलोयसियस यूनिवर्सिटी का परिसर छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और शुभचिंतकों की तालियों और उत्साह से गूंज उठा। समापन समारोह में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के एशिया प्रमुख डॉ. मनीष विष्णोई ने आधिकारिक रूप से इस उपलब्धि को मान्यता दी और इसे “कल्पनातीत” बताते हुए रेमोना की सहनशक्ति और संकल्प की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

परंपरा और आस्था को समर्पित

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
रेमोना की इस अद्वितीय यात्रा में उनका साथ देने वाले जेसुइट पादरी और कुलपति फादर प्रवीन मार्टिस ने इसे “170 घंटे की कृपा और संकल्प” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन केवल सहनशक्ति का परिचय नहीं था, बल्कि भरतनाट्यम की आध्यात्मिक गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि को समर्पित एक गंभीर श्रद्धांजलि थी।

धार्मिक नेताओं का समर्थन
मैंगलोर के बिशप पीटर पॉल साल्डान्हा सहित कई गिरजाघर नेताओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर रेमोना की सांस्कृतिक समरसता के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। पूरे प्रदर्शन के दौरान रेमोना ने जपमाला (रोसरी) धारण की हुई थी, जिसे उन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति का स्रोत बताया।

तैयारी की यात्रा

वर्षों की साधना
रेमोना पिछले 13 वर्षों से गुरु श्री विद्या के मार्गदर्शन में भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रही हैं। इस मैराथन नृत्य की तैयारी के लिए उन्होंने हर दिन लगभग छह घंटे अभ्यास किया, जिससे उन्होंने अद्भुत सहनशक्ति और अनुशासन विकसित किया जो इस रिकॉर्ड को हासिल करने के लिए आवश्यक था।

भरतनाट्यम से परे बहुमुखी प्रतिभा
हालाँकि भरतनाट्यम उनकी मुख्य शैली है, लेकिन रेमोना सेमी-क्लासिकल, वेस्टर्न और कंटेम्पररी डांस शैलियों में भी दक्ष हैं, जो उन्हें एक बहुआयामी कलाकार बनाता है।

पहचान और पूर्व उपलब्धियाँ
रेमोना को इससे पहले कई प्रतिष्ठित रिकॉर्ड पुस्तकों में स्थान मिल चुका है, जिनमें शामिल हैं:

  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स

  • गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – लंदन

  • भारत बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (2017)

ये सम्मान उनके निरंतर समर्पण और प्रदर्शन कलाओं में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

कला के माध्यम से सांस्कृतिक एकता

धर्मों के बीच सेतु के रूप में नृत्य

प्रसिद्ध शास्त्रीय बांसुरी वादिका क्लारा डी’कुन्हा ने रेमोना की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि संगीत और नृत्य धार्मिक सीमाओं से परे होते हैं और वे एकता व पारस्परिक सम्मान का संदेश फैलाते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मैंगलोर के कई कैथोलिक युवा भारतीय शास्त्रीय कलाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मैंगलोर डायोसीज़ का संदेशा सांस्कृतिक केंद्र जैसे संस्थान शास्त्रीय नृत्य और संगीत में प्रशिक्षण देकर इस सांस्कृतिक समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।

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