UGC ने पूरे भारत में 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान की, यह राज्य लिस्ट में सबसे ऊपर

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने एक बार फिर देश में चल रही फर्जी यूनिवर्सिटीज की लिस्ट जारी की है। 12 राज्यों में 32 ऐसे यूनिवर्सिटीज की पहचान की गई है, जिससे स्टूडेंट के भविष्य की सुरक्षा और हायर एजुकेशन के भरोसे को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं। UGC ने स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को सावधान रहने और इन इंस्टीट्यूशन में एडमिशन लेने से बचने की सलाह दी है, जिन्हें UGC एक्ट के तहत मान्यता नहीं मिली है और जिनके पास वैलिड डिग्री देने का अधिकार नहीं है।

ताज़ा नोटिस के अनुसार, दिल्ली में सबसे अधिक 12 फर्जी विश्वविद्यालय पाए गए हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों का स्थान है। छात्रों को प्रवेश लेने से पहले मान्यता की स्थिति अवश्य जांचने की सलाह दी गई है।

यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026: कानून क्या कहता है?

यूजीसी ने स्पष्ट किया कि ये संस्थान न तो केंद्र सरकार और न ही किसी राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। नोटिस में निम्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया है—

  • यूजीसी अधिनियम की धारा 2(फ) – मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय की परिभाषा
  • यूजीसी अधिनियम की धारा 3 – “डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी” संस्थानों से संबंधित प्रावधान

इन मानकों को पूरा न करने वाला कोई भी संस्थान कानूनी रूप से डिग्री प्रदान नहीं कर सकता। ऐसे फर्जी विश्वविद्यालयों की डिग्रियों की कोई वैधानिक मान्यता नहीं होती।

राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या

नीचे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या दी गई है—

राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या
दिल्ली 12
उत्तर प्रदेश 4
आंध्र प्रदेश 2
कर्नाटक 2
केरल 2
महाराष्ट्र 2
पुडुचेरी 2
पश्चिम बंगाल 2
अरुणाचल प्रदेश 1
हरियाणा 1
झारखंड 1
राजस्थान 1

यह आंकड़े यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026 को लेकर जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

दिल्ली में चिन्हित 12 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची

दिल्ली में यूजीसी द्वारा चिन्हित फर्जी विश्वविद्यालयों के नाम इस प्रकार हैं—

  1. वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (WPUNU)
  2. इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग
  3. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज
  4. कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड
  5. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी
  6. वोकेशनल यूनिवर्सिटी
  7. एडीआर-सेंट्रिक ज्युडिशियल यूनिवर्सिटी
  8. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग
  9. विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट
  10. आध्यात्मिक विश्वविद्यालय
  11. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सॉल्यूशन
  12. माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी

दिल्ली के छात्रों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता स्थिति आधिकारिक यूजीसी वेबसाइट पर अवश्य जांच लें।

अन्य प्रमुख राज्यों में फर्जी विश्वविद्यालय 

UGC द्वारा जारी सूची के अनुसार, दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों में भी फर्जी विश्वविद्यालय चिन्हित किए गए हैं। इन संस्थानों की डिग्रियां कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं।

हरियाणा

  • हरियाणा मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी – फरीदाबाद

झारखंड

  • दक्ष यूनिवर्सिटी (वोकेशनल एंड लाइफ स्किल एजुकेशन) – रांची

कर्नाटक

  • सर्व भारतीय शिक्षा पीठ – तुमकुर
  • ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी – बेंगलुरु

केरल

  • इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोफेटिक मेडिसिन (IIUPM) – कोझिकोड
  • सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी – (केरल)

महाराष्ट्र

  • राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी – नागपुर
  • नेशनल बैकवर्ड कृषी विद्यापीठ – सोलापुर

पुडुचेरी

  • उषा लच्छुमनन कॉलेज ऑफ एजुकेशन
  • श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन

राजस्थान

  • राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट – भिवाड़ी

उत्तर प्रदेश

  • गांधी हिंदी विद्यापीठ – प्रयागराज
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी) – अलीगढ़
  • भारतीय शिक्षा परिषद – लखनऊ
  • महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी – नोएडा

पश्चिम बंगाल

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन – कोलकाता
  • इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च – कोलकाता

इसके अतिरिक्त कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, झारखंड, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी फर्जी संस्थानों को लेकर सतर्कता की आवश्यकता बताई गई है।

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता स्थिति आधिकारिक यूजीसी वेबसाइट पर अवश्य सत्यापित करें, ताकि भविष्य में डिग्री की वैधता से संबंधित किसी भी समस्या से बचा जा सके।

यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026 की चेतावनी क्यों महत्वपूर्ण है?

UGC द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों का मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों के करियर, समय और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करता है।

प्रमुख जोखिम

  • सरकारी नौकरियों के लिए डिग्री अमान्य
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में अयोग्यता
  • उच्च शिक्षा (PG, PhD आदि) में प्रवेश न मिलना
  • फर्जी प्रवेश के कारण आर्थिक नुकसान
  • समय और करियर का नुकसान

फर्जी संस्थानों से प्राप्त डिग्रियों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती, जिससे छात्रों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

इसलिए यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026 की सूची एक निवारक (Preventive) कदम के रूप में कार्य करती है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक पारदर्शिता और गुणवत्ता को बनाए रखना तथा छात्रों को धोखाधड़ी से बचाना है।

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह लगाई गई राजाजी की प्रतिमा

राष्ट्रपति भवन में 23 फरवरी 2026 को पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत को दर्शाने वाले ‘राजाजी उत्सव’ का आरंभ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस खास मौके पर उन्होंने सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति का अनावरण किया। राजगोपालाचारी भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे।

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, यह मूर्ति अशोक मंडप के पास बनी बड़ी सीढ़ियों पर लगाई गई है। यह मूर्ति वहां पहले से लगी एडविन लुटियंस की मूर्ति की जगह ली है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव गुलामी की सोच को पीछे छोड़ने की एक कोशिश है। यह भारत की संस्कृति, विरासत और परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने का तरीका है।

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की प्रतिमा क्यों बदली जा रही है?

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद भी राष्ट्रपति भवन परिसर में ब्रिटिश अधिकारियों की प्रतिमाएँ बनी रहीं, जबकि कई भारतीय नेताओं को समुचित सम्मान नहीं मिला।

इस निर्णय के प्रमुख कारण:

  • औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने का प्रयास
  • भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं को सम्मान
  • ‘पंच-प्राण’ दृष्टि के तहत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति

राजाजी की प्रतिमा को केंद्रीय प्रांगण (Central Courtyard) में राजाजी उत्सव के दौरान अनावरण किया जाएगा।

एडविन लुटियंस कौन थे?

एडविन लुटियंस एक प्रमुख ब्रिटिश वास्तुकार थे, जिन्हें 1912 में ब्रिटिश भारत की नई राजधानी दिल्ली के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

लुटियंस द्वारा डिज़ाइन किए गए प्रमुख स्थल:

  • राष्ट्रपति भवन
  • नॉर्थ ब्लॉक
  • साउथ ब्लॉक
  • इंडिया गेट
  • हैदराबाद हाउस
  • कॉनॉट प्लेस

नई दिल्ली का केंद्रीय क्षेत्र आज भी “लुटियंस दिल्ली” के नाम से जाना जाता है।

सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) कौन थे?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें राजाजी के नाम से जाना जाता है, एक प्रसिद्ध वकील, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे।

प्रमुख तथ्य:

  • भारत के एकमात्र और अंतिम गवर्नर-जनरल (1948–1950)
  • महात्मा गांधी के निकट सहयोगी
  • गांधीजी की जेल अवधि के दौरान ‘Young India’ का संपादन
  • जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में गृह मंत्री
  • 1957 में स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक

वे अपने स्वतंत्र विचार, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं।

कार्यक्रम की मुख्य बातें

  • राष्ट्रपति भवन में प्रतिमा अनावरण
  • 24 फरवरी से 1 मार्च तक राजगोपालाचारी पर प्रदर्शनी
  • भारतीय लोकतंत्र में उनके योगदान को श्रद्धांजलि
  • औपनिवेशिक प्रतीकों से नई पहचान की ओर

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की प्रतिमा को बदलने का निर्णय एक व्यापक सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक परिवर्तन का हिस्सा बताया जा रहा है।

सरकार ने निम्न बिंदुओं पर बल दिया है:

  • ऐतिहासिक स्थलों का पुनः भारतीयकरण
  • भारतीय नेतृत्व और विरासत का सम्मान
  • राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करना

यह कदम भारत की उत्तर-औपनिवेशिक (Post-Colonial) परिवर्तन यात्रा के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

स्टैटिक जीके

  • घोषणा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • कार्यक्रम: मन की बात
  • स्थान: राष्ट्रपति भवन
  • नई प्रतिमा: सी. राजगोपालाचारी
  • उत्सव: 23 फरवरी – राजाजी उत्सव
  • प्रदर्शनी: 24 फरवरी – 1 मार्च

पंजाब सरकार ‘मेरी रसोई योजना’ के तहत 40 लाख परिवारों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएगी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘मेरी रसोई’ योजना शुरु करने की 23 फरवरी 2026 को घोषणा की, जिसके तहत राज्य सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत 40 लाख परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएगी। मान ने यहां मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इस पहल का उद्देश्य गरीब परिवारों के बच्चों का पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पहले से ही इन लाभार्थियों को रियायती दरों पर गेहूं उपलब्ध करा रही है और वह राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

मेरी रसोई योजना: लाभार्थियों को क्या मिलेगा?

‘मेरी रसोई’ योजना के तहत पात्र परिवारों को हर तीन महीने के लिए मुफ्त राशन किट दी जाएगी।

प्रथम चरण (अप्रैल, मई, जून) में प्रत्येक परिवार को मिलेगा:

  • 2 किलोग्राम चना दाल
  • 2 किलोग्राम चीनी
  • 1 किलोग्राम आयोडीन युक्त नमक
  • 200 ग्राम हल्दी पाउडर
  • 1 लीटर सरसों का तेल

ये सभी वस्तुएँ निःशुल्क वितरित की जाएंगी।

योजना का उद्देश्य: पोषण पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य निम्न आय वर्ग के परिवारों, विशेषकर बच्चों में पोषण की कमी को दूर करना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • संतुलित और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करना
  • बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को बढ़ावा देना
  • कुपोषण में कमी लाना
  • कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा मजबूत करना

सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि खाद्य सामग्री की नियमित गुणवत्ता जांच (Quality Check) की जाएगी, ताकि लाभार्थियों को मानक गुणवत्ता का राशन मिले।

इस स्कीम के तहत किसे फ़ायदा होगा?

यह स्कीम ब्लू कार्ड होल्डर परिवारों को टारगेट करती है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार हैं और राज्य के वेलफ़ेयर प्रोग्राम के तहत एलिजिबल हैं।

पहलू (Aspect) विवरण (Details)
लाभार्थी 40 लाख परिवार
पात्रता ब्लू कार्ड धारक परिवार
वितरण अवधि एक बार में तीन माह
प्रथम चरण अप्रैल–जून 2026

सरकार का कल्याणकारी दृष्टिकोण

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना भी राज्य की जिम्मेदारी है कि उसके अपने नागरिकों को पर्याप्त पोषण सुरक्षा (Nutrition Security) मिले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल अनाज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिवार को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है।

सरकार का व्यापक फोकस

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार
  • जनकल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी प्रणाली को मजबूत करना
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की चुनौतियों का समाधान
  • यह सुनिश्चित करना कि कोई भी परिवार बुनियादी खाद्य आवश्यकताओं से वंचित न रहे

शशि थरूर को सेंट जेवियर विश्वविद्यालय, कोलकाता ने मानद डीलिट की उपाधि दी

लोकसभा MP शशि थरूर को 21 फरवरी 2026 को कोलकाता स्थित सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षा समारोह में मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डीलिट) की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसे उन्होंने भारत में अपनी पहली मानद डॉक्टरेट बताया। यह समारोह न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया, जहां 1,052 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। 25 पीएचडी शोधार्थियों को सम्मानित किया गया और 17 छात्रों को स्वर्ण पदक प्राप्त हुए। थरूर ने समाज की सेवा के रूप में शिक्षा के अंतिम उद्देश्य को रेखांकित करते हुए छात्रों से नागरिक उत्तरदायित्व को अपनाने का आग्रह किया।

शशि थरूर को मानद डीलिट से सम्मानित

  • दीक्षांत समारोह में शशि थरूर को डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (Honoris Causa) से सम्मानित किया गया।
  • उन्होंने इसे भारत में प्राप्त अपना पहला मानद डॉक्टरेट बताया और कहा कि एक पूर्व ज़ेवेरियन होने के कारण यह सम्मान उनके लिए बेहद विशेष और भावनात्मक है।
  • उन्होंने कहा कि वे “अत्यंत सम्मानित और विनम्र” महसूस कर रहे हैं। सात वर्ष पहले वे इसी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत वक्ता (Convocation Speaker) भी रह चुके हैं।
  • हालाँकि उन्होंने एक डॉक्टरेट शैक्षणिक रूप से अर्जित की है और विदेशों में मानद उपाधियाँ प्राप्त की हैं, लेकिन भारत में यह उनका पहला मानद डॉक्टरेट है।

दीक्षांत समारोह की मुख्य विशेषताएँ

  • 1,052 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई
  • 25 पीएचडी शोधार्थियों को सम्मानित किया गया
  • 17 स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मान मिला
  • अधिकांश स्वर्ण पदक विजेता महिलाएँ थीं
  • थरूर ने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति की सराहना की।

छात्रों के लिए शशि थरूर का संदेश

थिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि— शिक्षा केवल जानकारी (Information) तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण (Formation) और नैतिक चेतना (Conscience) से जुड़ी होनी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे—

  • कौशल (Skill) के साथ संवेदनशीलता (Sensitivity)
  • सफलता (Success) के साथ सेवा भाव (Service) को जोड़ें।

अपनी जेसुइट शिक्षा को याद करते हुए उन्होंने निम्न मूल्यों पर बल दिया:

  • बौद्धिक जिज्ञासा (Intellectual Curiosity)
  • मानसिक कठोरता (Mental Rigour)
  • परिश्रम का सम्मान
  • आत्म-अनुशासन
  • नैतिक ढांचे के भीतर प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति

उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य नारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों से तय होगा।

यह सम्मान विशेष क्यों है?

  • शशि थरूर ने 1969 से 1971 के बीच कोलकाता के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेजिएट स्कूल में अध्ययन किया था।
  • इसी कारण उसी परंपरा से जुड़े विश्वविद्यालय से मानद डी.लिट प्राप्त करना उनके लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • वे 2009 से लगातार चार बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं। वे संयुक्त राष्ट्र में अपने कूटनीतिक करियर, साहित्यिक लेखन और भारत में सार्वजनिक विमर्श में योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।

स्टैटिक जीके (Static GK)

  • पुरस्कार: डॉक्टर ऑफ लेटर्स (D.Litt – Honoris Causa)
  • प्राप्तकर्ता: शशि थरूर
  • संस्थान: सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता
  • कार्यक्रम: 7वाँ दीक्षांत समारोह
  • तिथि: 21 फरवरी 2026
  • स्थान: बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर, न्यू टाउन
  • लोकसभा क्षेत्र: तिरुवनंतपुरम

भारत-अमेरिका वज्र प्रहार 2026: हिमाचल में 16वें संयुक्त अभ्यास के लिए विशेष बल तैयार

भारत और अमेरिका 23 फरवरी से 15 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का 16वां संस्करण आयोजित करेंगे। इस वार्षिक अभ्यास का उद्देश्य भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग को मजबूत करना, आपसी सामरिक तालमेल (Interoperability) बढ़ाना और संयुक्त परिचालन तैयारी को सुदृढ़ करना है। यह अभ्यास दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और आतंकवाद-रोधी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वज्र प्रहार 2026: उद्देश्य और रणनीतिक महत्व

वज्र प्रहार एक संयुक्त विशेष बल अभ्यास है, जो बारी-बारी से भारत और अमेरिका में आयोजित होता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत सैन्य सहयोग और संयुक्त अभियान क्षमता को बढ़ाना है।

अभ्यास के प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • विशेष अभियानों की उन्नत रणनीतियों और तकनीकों का आदान-प्रदान
  • परिचालन समन्वय (Operational Synergy) को मजबूत करना
  • यथार्थवादी युद्ध परिदृश्य में प्रशिक्षण
  • रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में संयुक्त क्षमता बढ़ाना

भारतीय सेना के अनुसार, यह प्रशिक्षण आपसी विश्वास को गहरा करेगा और संयुक्त ऑपरेशनल तत्परता को बेहतर बनाएगा।

पिछले संस्करणों की झलक

  • 2024 में 15वां संस्करण अमेरिका के इडाहो में आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के 45-45 सैनिकों ने भाग लिया।
  • 2023 का संस्करण मेघालय के उमरोई में आयोजित किया गया था।
  • इसमें भारतीय विशेष बलों और अमेरिकी ग्रीन बेरेट्स ने हेलोकास्टिंग, एयरबोर्न ऑपरेशन और काउंटर-टेरर अभ्यास किए।

बारी-बारी से अलग-अलग स्थानों पर आयोजन से विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन की समझ बढ़ती है।

भाग लेने वाली सेनाएं

भारतीय दल का प्रतिनिधित्व Indian Army की स्पेशल फोर्सेस इकाइयाँ करेंगी, जबकि अमेरिकी पक्ष से United States Army के विशिष्ट Green Berets भाग लेंगे।

अभ्यास में शामिल प्रमुख गतिविधियाँ:

  • क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) ड्रिल
  • आतंकवाद-रोधी अभियान
  • शहरी युद्ध सिमुलेशन
  • उच्च ऊंचाई और अर्ध-रेगिस्तानी प्रशिक्षण

इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास सटीकता, पेशेवर दक्षता और सामरिक तालमेल को उच्च स्तर पर बनाए रखने में सहायक होते हैं।

व्यापक भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग

पिछले दशक में भारत–अमेरिका रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वज्र प्रहार जैसे अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच भरोसा और संचालन क्षमता को मजबूत करते हैं।

भारत और अमेरिका निम्न प्रमुख संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करते हैं—

  • युद्ध अभ्यास (थल सेना)
  • मालाबार (नौसेना)
  • कोप इंडिया (वायु सेना)

यह बढ़ता रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और आतंकवाद-रोधी प्रयासों में साझा हितों को दर्शाता है।

वायुशक्ति-26: भारतीय वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन

वज्र प्रहार 2026 के अलावा, Indian Air Force 27 फरवरी 2026 को जैसलमेर के पोखरण एयर-टू-ग्राउंड रेंज में Exercise Vayushakti (वायुशक्ति-26) का आयोजन करेगी।

इस अभ्यास में प्रदर्शित होंगे:

  • लड़ाकू विमानों की संचालन क्षमता
  • परिवहन और हेलीकॉप्टर मिशन
  • रात और सांध्यकालीन युद्धाभ्यास
  • मानवीय सहायता और आपदा राहत क्षमता

संभावित भाग लेने वाले विमान:

  • तेजस
  • राफेल
  • सुखोई-30 एमकेआई
  • मिराज-2000
  • जगुआर
  • मिग-29
  • C-130J और C-17 परिवहन विमान
  • अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर

ये दोनों सैन्य अभ्यास भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता और वैश्विक साझेदारी को प्रदर्शित करते हैं।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 725.727 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचे

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 725.727 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक ही सप्ताह में भंडार में 8.663 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets – FCA) में मजबूत वृद्धि रही। यह रिकॉर्ड स्तर भारत की बाह्य क्षेत्र (External Sector) की स्थिति को मजबूत करता है और रुपये की स्थिरता को लेकर विश्वास बढ़ाता है।

आरबीआई के आंकड़ों का महत्व

ताज़ा आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत व्यापक आर्थिक प्रबंधन (Macroeconomic Management) का संकेत देता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से—

  • आयात भुगतान क्षमता मजबूत होती है
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से सुरक्षा मिलती है
  • रुपये पर दबाव कम होता है
  • निवेशकों का विश्वास बढ़ता है

यह उपलब्धि भारत की वित्तीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक स्थिति में मजबूती को दर्शाती है।

इंडिया फॉरेक्स रिज़र्व रिकॉर्ड लेवल पर: RBI डेटा की जानकारी

ताज़ा आंकड़े इंडिया फॉरेक्स रिज़र्व में तेज़ बढ़ोतरी दिखाते हैं जो मज़बूत मैक्रोइकॉनॉमिक मैनेजमेंट को दिखाता है।

नीचे डिटेल में बताया गया है।

घटक नवीनतम मूल्य (अरब डॉलर) साप्ताहिक वृद्धि (अरब डॉलर)
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) 573.603 +3.550
स्वर्ण भंडार 128.466 +4.990
विशेष आहरण अधिकार (SDRs) 18.924 +0.103
कुल विदेशी मुद्रा भंडार 725.727 +8.663

भारत के फॉरेक्स रिज़र्व में बढ़ोतरी वैल्यूएशन में बढ़ोतरी और मज़बूत बाहरी इनफ्लो, दोनों को दिखाती है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA): फॉरेक्स रिज़र्व का सबसे बड़ा हिस्सा

भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां(FCA) सबसे बड़ा घटक है, जो वर्तमान में 573.603 अरब डॉलर पर है।

FCA में शामिल प्रमुख मुद्राएँ—

  • अमेरिकी डॉलर
  • यूरो
  • जापानी येन
  • ब्रिटिश पाउंड

इन परिसंपत्तियों का मूल्य अमेरिकी डॉलर में व्यक्त किया जाता है। वैश्विक स्तर पर विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण, बिना नए पूंजी प्रवाह के भी कुल विदेशी मुद्रा भंडार के मूल्य में बदलाव आ सकता है।

RBI द्वारा FCA में लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत के बाहरी सुरक्षा कवच (External Buffers) मजबूत हो रहे हैं और तरलता प्रबंधन बेहतर हुआ है।

स्वर्ण भंडार में तेज वृद्धि: आर्थिक स्थिरता को मजबूती

भारत के स्वर्ण भंडार में 4.990 अरब डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे यह 128.466 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

स्वर्ण भंडार महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  • यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षा कवच (Hedge) का कार्य करता है।
  • निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है।
  • मुद्रा की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • स्वर्ण भंडार में यह वृद्धि भारत के रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

एसडीआर (SDRs) की भूमिका

भारत के Special Drawing Rights (SDRs) में 103 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई और यह 18.924 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

SDR एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति है, जिसे International Monetary Fund (IMF) द्वारा बनाया गया है।

SDR देशों की मदद करते हैं—

  • आधिकारिक भंडार को पूरक (Supplement) करने में
  • भुगतान संतुलन (Balance of Payments) की आवश्यकताओं को प्रबंधित करने में
  • वैश्विक संकट के दौरान तरलता बनाए रखने में

हालांकि FCA और स्वर्ण भंडार की तुलना में SDR का आकार छोटा है, फिर भी यह भारत को अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन प्रदान करता है।

कौन थे मुकुल रॉय?, बंगाल की राजनीति के चाणक्य ने ली अंतिम सांस

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का 73 वर्ष की आयु में कोलकाता में निधन हो गया। उनका निधन साल्ट लेक स्थित Apollo Hospital में तड़के लगभग 1:30 बजे हृदयाघात (मैसिव कार्डियक अरेस्ट) के कारण हुआ। उनके पुत्र सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की। मुकुल रॉय लंबे समय से डिमेंशिया और पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूर थे। करीब चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में मुकुल रॉय ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तीनों दलों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

कौन थे मुकुल रॉय? ‘बंगाल की राजनीति के चाणक्य’

17 अप्रैल 1954 को जन्मे मुकुल रॉय अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्हें उनकी रणनीतिक राजनीतिक समझ के कारण “बंगाल की राजनीति का चाणक्य” कहा जाता था।

मुख्य तथ्य:

  • ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी
  • टीएमसी के शुरुआती वर्षों में दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे
  • दो बार राज्यसभा सदस्य निर्वाचित
  • कृष्णानगर उत्तर से विधायक (MLA)

उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई।

राजनीतिक सफर: टीएमसी के शिल्पकार से रेल मंत्री तक

मुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन कई महत्वपूर्ण मोड़ों से गुजरा।

प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका, जिससे 34 वर्षों का वाम मोर्चा शासन समाप्त हुआ।
  • 2009–2011 तक जहाजरानी राज्य मंत्री
  • मार्च से सितंबर 2012 तक 32वें केंद्रीय रेल मंत्री, तत्कालीन प्रधानमंत्री Manmohan Singh के कार्यकाल में

उन्होंने रेल किराया वृद्धि विवाद के बाद Dinesh Trivedi का स्थान लिया। यद्यपि उनका कार्यकाल संक्षिप्त रहा, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।

राजनीतिक बदलाव और विवाद

मुकुल रॉय के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए।

समयरेखा:

  • 2015 में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाए गए
  • 2017 में Bharatiya Janata Party (भाजपा) में शामिल
  • 2020 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने
  • 11 जून 2021 को पुनः टीएमसी में वापसी

वे नारदा स्टिंग मामले में भी चर्चा में रहे। जनवरी 2026 में Supreme Court of India ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य ठहराया गया था।

स्वास्थ्य समस्याएँ और निधन का कारण

23 फरवरी 2026 को उनका निधन हृदयाघात से हुआ।

हाल के स्वास्थ्य मुद्दे:

  • 2023 में डिमेंशिया और पार्किंसन रोग का निदान
  • 2023 में हाइड्रोसेफेलस के लिए ब्रेन सर्जरी
  • जुलाई 2024 में सिर में चोट और रक्त के थक्के की सर्जरी
  • मधुमेह और उम्र संबंधी अन्य बीमारियाँ
  • स्वास्थ्य गिरने के कारण वे 2022 से सक्रिय राजनीति से दूर थे।

संपत्ति और पारिवारिक जानकारी

हालिया चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹50.85 लाख थी।

परिवार:

  • पिता: हरि देव कौशल (सेवानिवृत्त एसीपी, दिल्ली)
  • माता: अनुप कौशल (शिक्षिका)
  • भाई: राहुल देव (अभिनेता)
  • पूर्व पत्नी: शिल्पा देव
  • पुत्र: सुभ्रांशु रॉय

मुकुल रॉय का निधन पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द एटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में 21 फरवरी 2026 को कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया। उन्होंने इस पुस्तक को भारत रत्न Atal Bihari Vajpayee के प्रति एक उपयुक्त श्रद्धांजलि बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रकाशन केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भारत के महानतम राजनेताओं में से एक के जीवन, नेतृत्व और अमर विरासत का उत्सव है, जिनके आदर्श आज भी राष्ट्र को प्रेरित करते हैं। ये किताब पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल द्वारा लिखी गई है, जिसका विमोचन उपराष्‍ट्रपति सी. पी. राधाकृष्‍णन ने किया है।

नई दिल्ली में पुस्तक विमोचन: अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि

नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को उजागर करती है। उपराष्ट्रपति ने इसे वाजपेयी जी की लोकतांत्रिक विरासत का उत्सव बताया और कहा कि यह पुस्तक उनके नेतृत्व, दूरदर्शिता और राष्ट्रसेवा को रेखांकित करती है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह पुस्तक वाजपेयी जी के जीवन के व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों आयामों को समग्र रूप से प्रस्तुत करती है।

अटल बिहारी वाजपेयी: सांसद से प्रधानमंत्री तक

  • पुस्तक विमोचन समारोह में उपराष्ट्रपति ने वाजपेयी जी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को भी याद किया।
  • उन्होंने कहा कि उन्हें वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान लोकसभा सदस्य के रूप में सेवा करने का अवसर मिला था।
  • उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी की सांसद से प्रधानमंत्री तक की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और परिपक्वता का प्रतीक है।
  • पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि वाजपेयी जी ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में संवाद, सहमति निर्माण और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा।

पोखरण परमाणु परीक्षण और दिल्ली मेट्रो: नेतृत्व के ऐतिहासिक क्षण

उपराष्ट्रपति ने वाजपेयी जी के नेतृत्व के कुछ निर्णायक क्षणों का विशेष उल्लेख किया।

मुख्य उपलब्धियाँ:

  • 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त किया।
  • दूरदर्शी बुनियादी ढांचा विकास, जिसमें Delhi Metro परियोजना की शुरुआत शामिल है।
  • विकासोन्मुखी शासन पर विशेष जोर।
  • उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी ने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व में शक्ति और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं।

मार्गदर्शक सिद्धांत: संवाद, लोकतंत्र और विकास

पुस्तक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ वाजपेयी जी के नेतृत्व के तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित करती है—

  • टकराव के स्थान पर संवाद
  • लोकतंत्र को सर्वोच्च मूल्य मानना
  • विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जटिल राजनीतिक और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी वाजपेयी जी ने इन सिद्धांतों को दृढ़ता से निभाया और राष्ट्र को स्थिर, सशक्त और प्रगतिशील दिशा प्रदान की।

 

AI इम्पैक्ट समिट 2026 संपन्न: 89 देशों ने नई दिल्ली घोषणा का समर्थन किया

AI इम्पैक्ट समिट 2026 (AI Impact Summit 2026) का समापन 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में “नई दिल्ली घोषणा ऑन AI इम्पैक्ट” को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणा का समर्थन विश्वभर के 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने किया। यह शिखर सम्मेलन वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन और सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। भारत ने “AI for All” का आह्वान किया, जो समानता, पहुंच और साझा वैश्विक प्रगति के सिद्धांतों पर आधारित है। नई दिल्ली घोषणा में सात प्रमुख कार्य स्तंभों (Seven Pillars of Action) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है और साथ ही नए वैश्विक प्लेटफॉर्म की शुरुआत का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता के लिए सहयोगात्मक, विश्वसनीय, सुदृढ़ और प्रभावी बनी रहे।

ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट 2026 और नई दिल्ली घोषणा

AI इम्पैक्ट समिट 2026 का मुख्य उद्देश्य जिम्मेदार और समावेशी AI विकास के लिए एक साझा वैश्विक ढांचा तैयार करना था। इस शिखर सम्मेलन में अपनाई गई “नई दिल्ली घोषणा” कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संतुलित, सुरक्षित और मानव-केंद्रित उपयोग पर जोर देती है।

संस्कृत सिद्धांत “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” (सभी के कल्याण और सभी के सुख के लिए) से प्रेरित यह घोषणा इस बात पर बल देती है कि AI के लाभ समान रूप से सभी देशों और समाजों तक पहुंचने चाहिए।

प्रमुख बिंदु

  • 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा समर्थन
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहु-हितधारक भागीदारी पर जोर
  • राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान
  • विश्वसनीय, सुलभ और ऊर्जा-कुशल AI प्रणालियों पर ध्यान

यह घोषणा स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी (Non-binding) है, लेकिन यह वैश्विक AI शासन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में उभरकर सामने आई है।

AI इम्पैक्ट समिट 2026 के सात पिलर (चक्र)

नई दिल्ली डिक्लेरेशन सात पिलर के आस-पास बना है, जो ग्लोबल AI कोऑपरेशन की रीढ़ हैं।

स्तंभ फोकस क्षेत्र
AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण AI अवसंरचना तक किफायती और समान पहुंच सुनिश्चित करना
आर्थिक वृद्धि एवं सामाजिक विकास विकास और विस्तार के लिए “अच्छा AI” (Good AI) को बढ़ावा देना
सुरक्षित और विश्वसनीय AI सुरक्षा, पारदर्शिता और मानक (Benchmarks) स्थापित करना
विज्ञान के लिए AI वैश्विक शोध सहयोग को प्रोत्साहन देना
सामाजिक सशक्तिकरण हेतु पहुंच समावेशी AI अपनाने को बढ़ावा देना
मानव पूंजी विकास कौशल विकास और AI साक्षरता को मजबूत करना
लचीली और कुशल AI प्रणालियां ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ AI अवसंरचना विकसित करना

ये पिलर्स यह पक्का करेंगे कि AI इम्पैक्ट समिट 2026 चर्चा से आगे बढ़कर स्ट्रक्चर्ड ग्लोबल एक्शन की ओर बढ़े।

AI इम्पैक्ट समिट 2026 में घोषित प्रमुख वैश्विक पहलें

नई दिल्ली घोषणा के तहत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कई महत्वपूर्ण वैश्विक सहयोगात्मक पहलों की घोषणा की गई, जो “AI for All” ढांचे को मजबूत करती हैं।

1. लोकतांत्रिक AI प्रसार के लिए चार्टर 

  • आधारभूत AI उपकरणों तक किफायती पहुंच को बढ़ावा
  • स्थानीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन
  • लचीली और सुदृढ़ AI अवसंरचना को मजबूत करना

2. ग्लोबल AI इम्पैक्ट कॉमन्स 

  • स्केलेबल AI उपयोग मामलों को साझा करने का मंच
  • विभिन्न देशों में AI समाधानों की पुनरावृत्ति (Replication) को प्रोत्साहन
  • आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति को समर्थन

3. ट्रस्टेड AI कॉमन्स 

  • उपकरणों, मानकों (Benchmarks) और सर्वोत्तम प्रथाओं का भंडार
  • सुरक्षित और विश्वसनीय AI जीवनचक्र को प्रोत्साहन

4. AI फॉर साइंस संस्थानों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

  • वैश्विक शोध संस्थानों को जोड़ना
  • AI-आधारित वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देना

5. AI वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्लेबुक

  • कौशल विकास और पुनःकौशल (Reskilling) पहलों को समर्थन
  • AI साक्षरता और व्यावसायिक सुधारों को प्रोत्साहन

6. लचीले और कुशल AI पर मार्गदर्शक सिद्धांत

  • ऊर्जा-कुशल AI प्रणालियों पर विशेष ध्यान
  • AI अवसंरचना लचीलापन प्लेबुक द्वारा समर्थित

ये सभी पहलें AI इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रस्तुत “AI for All” दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती हैं, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समावेशी, सुरक्षित और मानव-केंद्रित बनाना है।

आर्थिक वृद्धि और सामाजिक कल्याण के लिए AI

नई दिल्ली घोषणा का एक प्रमुख फोकस आर्थिक परिवर्तन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर है। समिट में इस बात पर जोर दिया गया कि ओपन-सोर्स पारिस्थितिकी तंत्र और सुलभ AI उपकरण शासन, विज्ञान तथा सार्वजनिक सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

प्रमुख प्राथमिकताएं:

  • विभिन्न क्षेत्रों में AI अपनाने का विस्तार
  • ओपन-सोर्स AI फ्रेमवर्क को बढ़ावा
  • ऊर्जा-कुशल AI अवसंरचना सुनिश्चित करना
  • उद्योग-नेतृत्व वाले स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों को प्रोत्साहन

AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सतत वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक (Key Driver) बताया।

वैश्विक AI शासन और सहयोग को सुदृढ़ करना

नई दिल्ली घोषणा वैश्विक AI शासन में स्वैच्छिक सहयोग को मजबूत करती है। सहभागी देशों ने सहमति व्यक्त की कि वे—

  • गैर-बाध्यकारी (Non-binding) AI सिद्धांतों को बढ़ावा देंगे
  • बहुपक्षीय साझेदारियों को आगे बढ़ाएंगे
  • समिट की प्रतिबद्धताओं को क्रियान्वित करेंगे
  • लचीले और समावेशी AI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेंगे

एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU) और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) जैसे संगठनों की भागीदारी ने इस पहल पर मजबूत वैश्विक सहमति को दर्शाया।

पीएम मोदी ने इस कॉरिडोर पर भारत के पहले नमो भारत आरआरटीएस का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी 2026 को मेरठ में भारत की पहली नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का उद्घाटन किया और दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को जनता को समर्पित किया। यह परियोजना भारत में पहली बार ऐसी व्यवस्था लेकर आई है, जहां रैपिड रेल और मेट्रो सेवा एक ही स्टेशन तथा एक ही ट्रैक से संचालित हो रही है। प्रधानमंत्री ने इस पहल को उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने, यात्रा समय कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत की पहली RRTS और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन

दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर भारत की पहली परिचालन क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट प्रणाली (RRTS) है। 22 फरवरी 2026 को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया। इसी प्लेटफॉर्म से मेरठ मेट्रो सेवा की भी शुरुआत की गई।

प्रमुख विशेषताएं

  • पहली बार नमो भारत और मेट्रो रेल एक ही ट्रैक और स्टेशन से संचालित
  • इंट्रा-सिटी (शहर के भीतर) और इंटर-सिटी (शहरों के बीच) यात्रा के लिए एकीकृत परिवहन मॉडल
  • दिल्ली और मेरठ के बीच तीव्र कनेक्टिविटी
  • एक ही प्लेटफॉर्म से शहर के भीतर या दिल्ली तक सीधी यात्रा

यह परियोजना यात्रियों को शहर के भीतर यात्रा के लिए मेट्रो और क्षेत्रीय हाई-स्पीड यात्रा के लिए नमो भारत ट्रेन का विकल्प प्रदान करती है।

NCR कनेक्टिविटी और “ट्विन सिटीज” विजन को बढ़ावा

यह एकीकृत कॉरिडोर मेरठ और दिल्ली को सहज रूप से जोड़कर “ट्विन सिटीज” अवधारणा को मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार—

  • बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब लोगों को दिल्ली में किराए पर घर लेने की आवश्यकता कम होगी।
  • यात्रा तेज, सुगम और सुविधाजनक बनेगी।
  • कम यात्रा समय से आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

प्रमुख एकीकरण केंद्र

  • सराय काले खां
  • आनंद विहार
  • गाजियाबाद
  • मेरठ

यह कॉरिडोर भारतीय रेलवे, मेट्रो और बस टर्मिनलों से जुड़कर मल्टी-मॉडल परिवहन को सहज बनाता है।

बुनियादी ढांचा विकास और रोजगार वृद्धि

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और रैपिड रेल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार और औद्योगिक विकास को गति दे रही हैं।
  • उन्होंने उल्लेख किया कि 2014 से पहले जहां मेट्रो सेवाएं केवल 5 शहरों में थीं, वहीं आज 25 से अधिक शहरों में विस्तार हो चुका है, जिससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन गया है।

नमो भारत संचालन में महिला सशक्तिकरण

नमो भारत RRTS की एक विशेष उपलब्धि महिलाओं की भागीदारी है।

  • अधिकांश ट्रेन ऑपरेटर महिलाएं हैं।
  • स्टेशन कंट्रोल स्टाफ में भी महिलाओं की संख्या अधिक है।

प्रधानमंत्री ने इसे अवसंरचना और परिवहन क्षेत्र में “नारी शक्ति” का प्रतीक बताया।

स्थैतिक तथ्य (Static Points)

  • परियोजना: नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS)
  • कॉरिडोर: दिल्ली–मेरठ
  • लॉन्च तिथि: 22 फरवरी 2026
  • उद्घाटनकर्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • पहली बार: मेट्रो और रैपिड रेल एक ही स्टेशन और ट्रैक पर
  • मुख्य एकीकरण हब: सराय काले खां, आनंद विहार, गाजियाबाद, मेरठ
  • राज्य: उत्तर प्रदेश

Recent Posts

about - Part 27_12.1
QR Code
Scan Me