दक्षिण कोरिया, अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य की पुष्टि की

वैश्विक तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु-मुक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वी सुंग-लैक ने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया के रुख से परे, परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य अटल है। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय संबंधों, रणनीतिक अध्ययन और कूटनीति में अत्यंत प्रासंगिक है—विशेषकर यूपीएससी, एसएससी, रक्षा सेवाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए।

परमाणु निरस्त्रीकरण योजना का विवरण

सियोल में बोलते हुए वी सुंग-लैक ने तीन-स्तरीय योजना प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को कम करना और क्षेत्रीय सुरक्षा व कूटनीतिक जुड़ाव सुनिश्चित करना है।

तीन-स्तरीय योजना

  1. प्रारंभिक रोकथाम : तत्काल प्राथमिकता उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकना है।

  2. विश्वास निर्माण उपाय : संवाद के माध्यम से तनाव कम करना, बिना राष्ट्रीय सुरक्षा या प्रतिरोध क्षमता को कमजोर किए।

  3. अंतिम परमाणु निरस्त्रीकरण : दीर्घकालिक लक्ष्य उत्तर कोरिया के पूरे परमाणु शस्त्रागार को अंतरराष्ट्रीय सत्यापन के साथ समाप्त करना है।

वी ने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया की रणनीति शांतिपूर्ण वार्ता और सैन्य तत्परता के बीच संतुलन पर आधारित है, ताकि प्रतिरोध क्षमता बनी रहे और निरस्त्रीकरण की दिशा में प्रगति हो सके।

एपीईसी शिखर सम्मेलन और कूटनीतिक संदर्भ

  • आगामी एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन ग्योंगजु, दक्षिण कोरिया में आयोजित होने वाला है। यह मंच सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग पर बहुपक्षीय चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • उत्तर कोरिया की अनुपस्थिति : वी ने पुष्टि की कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के शिखर सम्मेलन में भाग लेने की कोई संभावना नहीं है।

  • अमेरिका की भागीदारी : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस सम्मेलन में दक्षिण कोरिया आने की उम्मीद है, जिससे द्विपक्षीय संबंध और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए कूटनीतिक प्रयास मजबूत होंगे।

प्रमुख तथ्य

  • समझौता : दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच

  • अधिकारी : वी सुंग-लैक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (दक्षिण कोरिया)

  • लक्ष्य : कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निरस्त्रीकरण

  • योजना का प्रकार : तीन-स्तरीय दृष्टिकोण

  • शिखर सम्मेलन : एपीईसी 2025 (ग्योंगजु, दक्षिण कोरिया)

पिंपरी-चिंचवड़ में छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा का सम्मान

महाराष्ट्र ने 14 सितम्बर 2025 को पिंपरी-चिंचवड़ में एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन का साक्षी बना, जब धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की 180 फुट ऊँची कांस्य प्रतिमा — ‘हिंदूभूषण प्रतिमा’ — का सम्मान अब तक के सबसे बड़े ढोल-ताशा सलामी समारोह के साथ किया गया। यह गगनभेदी आयोजन संभाजी महाराज के बलिदान और शौर्य का उत्सव था, जिसने मराठा विरासत और सांस्कृतिक गौरव को जनभावनाओं से जोड़ते हुए इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया।

स्मारक परिचय : हिंदूभूषण प्रतिमा

  • स्थान : मोशी-बोरहादेवाड़ी, पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए)

  • कुल ऊँचाई : 180 फुट (140 फुट प्रतिमा + 40 फुट आधार)

  • विशिष्टता : धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की विश्व की सबसे ऊँची पूर्णाकृति प्रतिमा

  • परिसर का नाम : शंभू सृष्टि स्मारक परिसर

इस भव्य परियोजना में सम्मिलित हैं –

  • 10 फुट की हम्बीरराव मोहिते की प्रतिमा

  • 16 मराठा सरदारों व मावलों की प्रतिमाएँ

  • मराठा इतिहास के दृश्यों को दर्शाती कांस्य भित्तिचित्र शृंखला

  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों हेतु मुक्त आकाश रंगमंच

  • संभाजी महाराज के जीवन की कथा प्रस्तुत करने वाला होलोग्राफिक सभागार

यह प्रतिमा मराठा शौर्य का स्थायी प्रतीक है, जिसकी परिकल्पना विधायक महेश लांडगे ने की और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में इसे आकार दिया जा रहा है।

महाराष्ट्र की सबसे बड़ी ढोल-ताशा सलामी

14 सितम्बर 2025 को धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी केंद्र, मोशी में 3,000 से अधिक ढोल, 1,000 ताशे और सैकड़ों भगवे ध्वजों के साथ ऐतिहासिक सलामी दी गई।

आयोजनकर्ता : हिंदूभूषण स्मारक ट्रस्ट एवं ढोल-ताशा फेडरेशन

मुख्य उद्देश्य :

  • भगवे ध्वज का सम्मान, जो मराठा पराक्रम और आत्मसम्मान का प्रतीक है

  • संभाजी महाराज की गौरवमयी विरासत को संगीतमय श्रद्धांजलि

  • परंपरागत कला के माध्यम से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करना

यह आयोजन महाराष्ट्र का अब तक का सबसे बड़ा ढोल-ताशा कार्यक्रम माना गया, जिसने सांस्कृतिक अस्मिता को जन-आंदोलन का रूप दिया।

आगामी विशेषता

2 अक्टूबर 2025 को प्रतिमा की तलवार का शस्त्र पूजन किया जाएगा। यह पारंपरिक अनुष्ठान मराठा सैन्य परंपरा की निरंतरता और आधुनिक युग में भी प्राचीन रीति-रिवाजों की जीवंतता का प्रतीक होगा।

मुख्य तथ्य

  • प्रतिमा का नाम : हिंदूभूषण प्रतिमा

  • सम्मानित व्यक्तित्व : धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज

  • स्थान : मोशी-बोरहादेवाड़ी, पिंपरी-चिंचवड़, महाराष्ट्र

  • कुल ऊँचाई : 180 फुट (140 फुट प्रतिमा + 40 फुट आधार)

  • परिसर : शंभू सृष्टि

RBI ने आवधिक निगरानी के लिए नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना की

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत की वित्तीय विनियामक प्रणाली को आधुनिक, प्रभावी और हितधारक–अनुकूल बनाए रखने के लिए एक रेगुलेटरी रिव्यू सेल (Regulatory Review Cell – RRC) की स्थापना की है। यह सेल मौजूदा विनियमों की व्यवस्थित और चरणबद्ध समीक्षा हर 5 से 7 वर्ष में करेगी। यह पहल 1 अक्तूबर 2025 से शुरू होगी। साथ ही, बाहरी विशेषज्ञों से युक्त एक स्वतंत्र एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (Advisory Group on Regulation – AGR) भी गठित किया गया है।

रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC) क्या है?

  • यह RBI के विनियमन विभाग (Department of Regulation) के अंतर्गत कार्य करेगा।

  • प्रमुख उद्देश्य:

    • सभी मौजूदा नियमों की चरणबद्ध समीक्षा।

    • बाज़ार परिस्थितियों, तकनीकी प्रगति और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप नियमों को ढालना।

    • नियमों को सरल, संगत और प्रासंगिक बनाए रखना।

  • इससे भारत एक मजबूत और सुविनियमित वित्तीय बाज़ार के रूप में स्थापित होगा।

एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (AGR)

  • हितधारकों के सुझावों और उद्योग की ज़रूरतों को शामिल करने के लिए गठित।

  • विशेषताएँ:

    • बैंकिंग और वित्त क्षेत्र के बाहरी विशेषज्ञ शामिल।

    • आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सदस्यों को जोड़ा जा सकता है।

    • प्रारंभिक कार्यकाल: 3 वर्ष (प्रदर्शन की समीक्षा के बाद 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है)।

    • RRC के साथ मिलकर कार्य करेगा।

AGR के सदस्य

  • राणा अशुतोष कुमार सिंह – प्रबंध निदेशक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया → अध्यक्ष

  • टी. टी. श्रीनिवासाराघवन – पूर्व MD एवं निदेशक, सुंदरम फाइनेंस लिमिटेड → सदस्य

  • गौतम ठाकुर – अध्यक्ष, सरस्वत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड → सदस्य

  • श्याम श्रीनिवासन – पूर्व MD एवं CEO, फेडरल बैंक लिमिटेड → सदस्य

  • रवि दुब्बुरु – पूर्व CCO, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड → सदस्य

  • एन. एस. कन्नन – पूर्व MD एवं CEO, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस → सदस्य

महत्व

  • पुराने और अप्रासंगिक नियमों को हटाकर विनियामक अव्यवस्था कम होगी।

  • वित्तीय विनियमों में पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता बढ़ेगी।

  • Ease of Doing Business में सुधार होगा।

  • RBI की नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी।

  • जनविश्वास और वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता में वृद्धि।

वैश्विक संदर्भ

  • यूके, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों के केंद्रीय बैंक भी समय-समय पर ऐसे ही नियामक समीक्षाएँ करते हैं ताकि वित्तीय परिदृश्य के अनुरूप बने रहें।

स्थिर तथ्य

  • पहल का नाम: रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC)

  • शुरू करने वाला संस्थान: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

  • प्रभावी तिथि: 1 अक्तूबर 2025

  • समीक्षा अंतराल: हर 5–7 वर्ष

  • सलाहकार निकाय: एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (AGR)

प्रधानमंत्री मोदी ने धार में पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के धार ज़िले में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM Mitra) पार्क का शुभारंभ किया। यह पहल भारत के वस्त्र क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने महेश्वरी साड़ियों की विरासत को भी नमन किया, जिसकी प्रेरणा देवी अहिल्याबाई होल्कर ने दी थी। इस कार्यक्रम ने कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

पीएम मित्रा पार्क: वस्त्र उद्योग का उभरता हुआ शक्ति केंद्र

केंद्र सरकार की पीएम मित्रा योजना के तहत देशभर में सात एकीकृत टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य भारत की संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला (value chain) को एक छत के नीचे लाना है – जिसमें स्पिनिंग, वीविंग, प्रोसेसिंग, डिज़ाइनिंग और गारमेंट उत्पादन शामिल है।

धार में उद्घाटित पार्क की मुख्य विशेषताएँ:

  • आत्मनिर्भर वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करेगा।

  • सूत काताई, रंगाई, डिज़ाइनिंग, प्रोसेसिंग और निर्यात की सुविधा।

  • कपास (कपास) और रेशम (रेशम) की उपलब्धता एक ही स्थान पर।

  • गुणवत्ता जाँच और बाज़ार विस्तार के अवसर।

  • भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा।

यह पहल मध्यप्रदेश के ग्रामीण और अर्धशहरी युवाओं के लिए हजारों रोज़गार अवसर पैदा करेगी।

सांस्कृतिक महत्व: महेश्वरी साड़ियों की विरासत

धार टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन महेश्वरी साड़ियों की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ा गया। कहा गया कि मालवा की महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर ने महेश्वर किले की स्थापत्य कला से प्रेरित होकर महेश्वरी साड़ी बुनाई की शुरुआत करवाई थी।

महेश्वरी साड़ियों की विशेषताएँ:

  • अनोखे डिज़ाइन और पैटर्न।

  • हल्की और आकर्षक बनावट।

  • राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा।

इस कुटीर कला को आधुनिक औद्योगिक केंद्र से जोड़ने से:

  • कारीगरों का पुनरुत्थान होगा।

  • मेक इन इंडिया अभियान को बढ़ावा मिलेगा।

  • पारंपरिक बुनकरों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ार से सीधा जुड़ाव मिलेगा।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

धार टेक्सटाइल पार्क से क्षेत्र में व्यापक आर्थिक विकास की उम्मीद है:

  • किसानों को कपास का उचित मूल्य मिलेगा।

  • बुनकरों और कारीगरों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा।

  • निर्यात में वृद्धि होगी।

  • निवेशकों को वस्त्र आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

यह पहल भारत को वस्त्र आयात कम करने और वैश्विक वस्त्र केंद्र (global textile hub) बनाने की दिशा में सहायक है।

स्थिर तथ्य

  • स्थान: धार ज़िला, मध्यप्रदेश

  • योजना: पीएम मित्रा पार्क (PM Mega Integrated Textile Region and Apparel)

  • सम्मानित ऐतिहासिक व्यक्तित्व: देवी अहिल्याबाई होल्कर

विश्व बांस दिवस 2025: थीम, इतिहास और भारत की भूमिका

विश्व बांस दिवस 2025 को 18 सितम्बर को पूरे विश्व में मनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य बांस को एक सतत एवं बहुउपयोगी संसाधन के रूप में बढ़ावा देना है। बांस को अक्सर “हरा सोना” (Green Gold) कहा जाता है, क्योंकि यह ग्रामीण आजीविका, पर्यावरण संरक्षण तथा उद्योग एवं डिज़ाइन में नवाचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े बांस उत्पादक देशों में से एक है, राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) जैसी पहलों के माध्यम से बांस को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह दिवस पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

विश्व बांस दिवस क्या है?

  • विश्व बांस दिवस पहली बार 2009 में बैंकॉक (8वाँ विश्व बाँस कांग्रेस) में मनाया गया।

  • इसे विश्व बांस संगठन (World Bamboo Organization) द्वारा शुरू किया गया था ताकि बाँस के सांस्कृतिक, आर्थिक और पारिस्थितिक महत्व को उजागर किया जा सके।

  • तब से इस दिन को रोपण कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और नीतिगत चर्चाओं के माध्यम से बाँस की भूमिका को जलवायु कार्रवाई और आर्थिक विकास में रेखांकित किया जाता है।

विश्व बांस दिवस 2025 की थीम

“अगली पीढ़ी का बांस: समाधान, नवाचार और डिज़ाइन”

मुख्य बिंदु

  • जलवायु और विकास चुनौतियों को हल करने में बांस की आधुनिक उपयोगिता।

  • नवाचार में युवाओं और उद्यमियों की भागीदारी।

  • परंपरा और प्रौद्योगिकी के समन्वय से बांस-आधारित डिज़ाइन और उत्पादों का विकास।

  • आवास, पैकेजिंग, फर्नीचर और जलवायु-सहनशील समाधान जैसे क्षेत्रों में बांस को भविष्य-उन्मुख सामग्री के रूप में प्रस्तुत करना।

भारत की भूमिका

भारत ने बांस को जलवायु कार्रवाई, रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि के लिए एक रणनीतिक संसाधन माना है।

राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) के प्रमुख उद्देश्य

  • कृषि/बंजर भूमि पर बांस के रोपण का विस्तार।

  • नर्सरी, ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाओं और प्रसंस्करण अवसंरचना को बढ़ावा।

  • कारीगरों और किसानों के लिए प्रशिक्षण और विपणन सहायता।

  • उत्पाद विकास एवं उद्योग से जुड़ाव।

  • बांस को वन विभाग से कृषि श्रेणी में स्थानांतरित करना ताकि किसानों को इसकी खेती आसान हो।

भारत में बांस उत्पादन

  • भारत में लगभग 1.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र और करीब 136 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

  • बांस हस्तशिल्प, फर्नीचर, कागज़, पैकेजिंग, निर्माण जैसे क्षेत्रों को समर्थन देता है।

आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व

  • बांस तेजी से बढ़ता है और मृदा स्वास्थ्य सुधारता है।

  • वनों की कटाई और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाता है।

  • किसानों और कारीगरों के लिए लंबे समय तक आय का स्रोत है।

  • लकड़ी और प्लास्टिक के आयात को कम करने में सहायक।

  • भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में कुल बांस भंडार का 2/3 हिस्सा है, जो इसके सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है।

स्थिर तथ्य

  • तिथि: 18 सितम्बर 2025

  • पहली बार मनाया गया: 2009, बैंकॉक (विश्व बाँस कांग्रेस)

  • थीम (2025): “अगली पीढ़ी का बांस: समाधान, नवाचार और डिज़ाइन”

  • आयोजक: विश्व बांस संगठन

  • भारत की प्रमुख योजना: राष्ट्रीय बांस मिशन

वैश्विक नवाचार सूचकांक 2025 में भारत 38वें स्थान पर पहुंचा

भारत ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025 में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है और अब वह 38वें स्थान पर पहुँच गया है। यह रिपोर्ट विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा प्रकाशित की गई है। 2020 में भारत की रैंक 48 थी, यानी पाँच वर्षों में भारत ने 10 स्थानों की छलांग लगाई है। इसके साथ ही भारत निम्न-मध्यम आय वाले देशों तथा मध्य एवं दक्षिण एशिया क्षेत्र में नंबर 1 पर है।

यह निरंतर सुधार भारत के अनुसंधान, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स, भारत की वैश्विक स्थिति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, और आर्थिक विकास के खंडों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विश्व के शीर्ष 10 नवाचारी देश (GII 2025)

रैंक देश स्कोर
1 स्विट्ज़रलैंड 66
2 स्वीडन 62.6
3 अमेरिका 61.7
4 दक्षिण कोरिया 60
5 सिंगापुर 59.8
6 यूनाइटेड किंगडम 59.1
7 फ़िनलैंड 57.7
8 नीदरलैंड 57
9 डेनमार्क 56.9
10 चीन 56.6

क्षेत्रीय मुख्य बिंदु

  • यूरोप: शीर्ष 10 में 6 देश और शीर्ष 25 में 15 देश।

  • उत्तर अमेरिका: अमेरिका (3) और कनाडा (17)।

  • एशिया: दक्षिण कोरिया (4), सिंगापुर (5), चीन (10)।

भारत का प्रदर्शन (GII 2025)

  • वैश्विक रैंक: 38

  • स्कोर: लगभग 40.5

  • 2020 की तुलना में: 48 → 38

  • निम्न-मध्यम आय वाले देशों और दक्षिण-मध्य एशिया में स्थान: 1

भारत की मजबूतियाँ

  • ज्ञान और तकनीकी उत्पादन: 22वाँ स्थान

  • बाज़ार परिपक्वता: 38वाँ स्थान

  • मानव पूंजी और अनुसंधान: शीर्ष 40 में

भारत की कमजोरियाँ

  • व्यापार परिपक्वता: 64वाँ स्थान

  • अवसंरचना: 61वाँ स्थान

  • संस्थान: 58वाँ स्थान

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) के बारे में

  • प्रकाशक: विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO)

  • देशों की संख्या: 139

  • सूचकांक आधारित: 80+ संकेतक, 7 स्तंभों पर

    1. संस्थान

    2. मानव पूंजी और अनुसंधान

    3. अवसंरचना

    4. बाज़ार परिपक्वता

    5. व्यापार परिपक्वता

    6. ज्ञान और तकनीकी उत्पादन

    7. रचनात्मक उत्पादन

यह सूचकांक दर्शाता है कि देश नवाचार-आधारित विकास को किस प्रकार प्रोत्साहित कर रहे हैं और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को आर्थिक उत्पादन में कैसे बदल पा रहे हैं।

स्थिर तथ्य

  • सूचकांक नाम: ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025

  • प्रकाशित करने वाला: विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO)

  • भारत की रैंक (2025): 38

  • भारत की रैंक (2020): 48

  • शीर्ष देश: स्विट्ज़रलैंड

भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा

भारत एक बार फिर प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए चालू वित्त वर्ष (FY 2025) में 6.5% जीडीपी वृद्धि दर के साथ मजबूत प्रक्षेपण बनाए हुए है। अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

यह अनुमान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है और समसामयिक घटनाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था, वैश्विक रैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स जैसे खंडों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

S&P रिपोर्ट की मुख्य झलकियाँ

  • जीडीपी वृद्धि का अनुमान: भारत की अर्थव्यवस्था FY 2025 में 6.5% की दर से बढ़ने की संभावना।

  • वैश्विक स्थिति: प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।

  • नीतिगत स्थिरता: आर्थिक सुधार, नीतिगत स्थायित्व और अवसंरचना निवेश को प्रमुख विकास चालक बताया गया।

  • झटकों से निपटने की क्षमता: आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत ने स्थिरता बनाए रखी।

  • भविष्य की दृष्टि: वैश्विक व्यापार में अधिक एकीकरण से रोजगार अवसर और उत्पादकता में वृद्धि होगी।

भारत की मजबूत विकास गति के पीछे कारण

  • सुधार और व्यापार सुगमता: नियमों का सरलीकरण, डिजिटलीकरण और पारदर्शिता से निवेश माहौल बेहतर हुआ।

  • अवसंरचना निवेश: परिवहन, शहरी विकास, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना में बड़े निवेश।

  • निर्माण और निर्यात: पीएलआई योजनाएँ, मेक इन इंडिया और व्यापार विविधीकरण से उत्पादन में वृद्धि।

  • घरेलू खपत: बड़ी उपभोक्ता आबादी और उभरता मध्यम वर्ग घरेलू मांग को मजबूत बनाए हुए है।

  • तकनीक और नवाचार: फिनटेक, ई-कॉमर्स और सेवाओं में तेज़ तकनीकी अपनाने से आर्थिक परिवर्तन को गति मिली।

स्थिर तथ्य

  • रिपोर्ट जारी करने वाला: स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P)

  • FY 2025 के लिए वृद्धि अनुमान: 6.5%

  • स्थिति: सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था

  • मुख्य चालक: सुधार, अवसंरचना, नीतिगत स्थिरता

सेंटिएंट एआई ने 2 मिलियन उपयोगकर्ताओं के लिए ओपन एजीआई नेटवर्क लॉन्च किया

वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एआई स्टार्टअप सेंटिएंट (Sentient) ने अपना ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) नेटवर्क लॉन्च कर दिया है। यह लॉन्च 17 सितम्बर 2025 को किया गया और इसके तहत 20 लाख (2 मिलियन) प्रतीक्षारत उपयोगकर्ताओं को एक्सेस दिया गया। इस पहल ने भारत को ओपन एआई नवाचार के अग्रणी देशों में ला खड़ा किया है और अब यह सीधे OpenAI और Amazon Web Services (AWS) जैसे वैश्विक दिग्गजों से प्रतिस्पर्धा करेगा।

सेंटिएंट के AGI नेटवर्क की मुख्य विशेषताएँ

वास्तविक समय (Real-Time) एआई एजेंट सहयोग

  • प्लेटफ़ॉर्म पर 40+ एआई एजेंट्स और मॉडल्स मौजूद हैं, जो 50+ डेटा स्रोतों के साथ एकीकृत होकर वास्तविक समय में सहयोग कर सकते हैं।

  • एआई अब बहु-स्तरीय और उच्च स्तरीय कार्य जैसे बाज़ार विश्लेषण, समाचार ब्रीफिंग आदि कर सकता है, बिना अलग-अलग सिस्टम पर निर्भर हुए।

ब्लॉकचेन एकीकरण और ओपन एक्सेस

  • AGI नेटवर्क को कई ब्लॉकचेन से जोड़ा गया है।

  • उपभोक्ताओं के लिए Sentient Chat इंटरफ़ेस उपलब्ध कराया गया है।

  • ओपन-सोर्स होने के कारण दुनिया भर के डेवलपर्स इसमें योगदान कर सकते हैं और टोकन-आधारित रिवार्ड सिस्टम से अपने मॉडल को मोनेटाइज कर सकते हैं।

विकेंद्रीकृत एआई नवाचार का नया मॉडल

  • डेवलपर-केंद्रित प्रोत्साहन (Incentive) मॉडल

    • योगदानकर्ताओं को टोकन तब मिलेंगे जब उनके एजेंट, डेटा या मॉडल का उपयोग होगा।

    • उपयोगकर्ता अपने पसंदीदा एजेंट्स को समर्थन देने के लिए टोकन स्टेक कर सकते हैं।

    • यह पारंपरिक “पे-पर-एपीआई” मॉडल से बिल्कुल अलग है और योगदानकर्ताओं को स्वामित्व व लाभ-साझेदारी अधिकार देता है।

  • वैश्विक सहयोग बनाम केंद्रीकृत नियंत्रण

    • सेंटिएंट का उद्देश्य “अमेरिका-चीन एआई गतिरोध” का विकल्प पेश करना है।

    • यह ओपन AGI दृष्टिकोण भारत और सहयोगी देशों को स्वतंत्र रूप से नवाचार करने की शक्ति देता है, ताकि वे बंद टेक इकोसिस्टम पर निर्भर न रहें।

सेंटिएंट का AGI क्या कर सकता है?

  • वास्तविक समय में निवेश अनुसंधान और रिपोर्टिंग

  • व्यक्तिगत दैनिक समाचार सारांश

  • यात्रा योजनाओं में सहायता

  • अकादमिक और नीति शोध सारांश

यह साधारण चैटबॉट से कहीं आगे जाकर सहयोगी और संयोज्य एआई की शक्ति दिखाता है।

संस्थापक, फंडिंग और विज़न

  • संस्थापक (Cofounders): संदीप नेलवाल और हिमांशु त्यागी

  • स्थापना स्थान: सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका

  • फंडिंग: 2024 में Founders Fund, Pantera Capital और Framework Ventures द्वारा नेतृत्व किए गए सीड राउंड में 85 मिलियन डॉलर जुटाए

  • विज़न: यह साबित करना कि ओपन, विकेंद्रीकृत इंटेलिजेंस बंद कॉरपोरेट सिस्टम से बेहतर नवाचार कर सकती है।

संदीप नेलवाल के अनुसार, यह वह मोड़ है जहाँ भारत वैश्विक एआई परिदृश्य को आकार देगा, न कि केवल उसका अनुकरण करेगा।

स्थिर तथ्य

  • स्टार्टअप: सेंटिएंट

  • AGI नेटवर्क उपयोगकर्ता: 20 लाख (प्रारंभिक चरण)

  • एजेंट्स और मॉडल्स: 40+ एआई एजेंट्स, 50+ डेटा स्रोत

  • इंटरफ़ेस: सेंटिएंट चैट

  • संस्थापक: संदीप नेलवाल, हिमांशु त्यागी

  • प्रोत्साहन मॉडल: टोकन-आधारित रिवार्ड और स्टेकिंग

  • मुख्यालय: सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका

PM मोदी के जन्मदिन पर नमो ऐप से शुरू हुआ ‘सेवा पर्व 2025’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितम्बर) को स्मरण करने के लिए नमो ऐप (NaMo App) पर 15 दिवसीय डिजिटल नागरिक सहभागिता अभियान “सेवा पर्व 2025” की शुरुआत की गई है। यह अभियान 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती) तक चलेगा और इसका उद्देश्य सेवा एवं राष्ट्रभावना की प्रेरणा देना है।

सेवा पर्व 2025 की मुख्य झलकियाँ (NaMo App पर)

डिजिटल अभियान अवलोकन

  • सेवा पर्व 2025 में 9 इंटरैक्टिव गतिविधियाँ शामिल हैं, जो जनता को स्वैच्छिक कार्यों और शासन-जनभागीदारी से जोड़ती हैं।

प्रमुख गतिविधियाँ

  1. सबका साथ, सबकी सेवा – वृक्षारोपण, रक्तदान व अन्य सामुदायिक सेवाओं जैसे कार्य।

  2. एआई शुभकामना रील – उपयोगकर्ता अपनी जानकारी के आधार पर एआई-निर्मित ऑडियो और स्क्रिप्ट से पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ भेज सकते हैं।

  3. वर्चुअल प्रदर्शनी – प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के मील के पत्थर दर्शाती है।

  4. सेल्फी विद पीएम – उपयोगकर्ताओं को पीएम मोदी के साथ डिजिटल छवि बनाने की सुविधा।

  5. डिस्कवर योर मोदी ट्रेट – उपयोगकर्ता की खूबियों की तुलना पीएम मोदी के मूल्यों से करता है।

  6. नो योर नमो क्विज़ – पीएम मोदी के जीवन और नेतृत्व पर आधारित प्रश्नोत्तरी।

  7. नमो पुस्तक संग्रह – मोदी के जीवन और नीतियों पर चुनी हुई सामग्री।

  8. नमो मर्चेंडाइज़ – थीम आधारित वस्तुएँ उपलब्ध।

  9. वर्ल्ड विशेज पीएम मोदी – दुनिया भर से लोग डिजिटल माध्यम से शुभकामनाएँ भेज सकते हैं।

उद्देश्य और जनसहभागिता

यह अभियान न केवल प्रधानमंत्री के जन्मदिन का उत्सव है बल्कि नागरिकों को राष्ट्रनिर्माण गतिविधियों में भाग लेने का मंच भी देता है। इसका उद्देश्य सेवा (सेवा भाव), सामूहिक गौरव और नागरिक-सरकार संबंधों को मजबूत करना है।

स्थिर तथ्य

  • अभियान का नाम: सेवा पर्व 2025

  • मंच (Platform): नमो ऐप (NaMo App)

  • अवधि: 15 दिन (17 सितम्बर – 2 अक्टूबर 2025)

  • अवसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन और गांधी जयंती

चुनाव आयोग ने ईवीएम मतपत्र के डिज़ाइन में बदलाव किया

मतदान अनुभव और मतपत्र की स्पष्टता को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) मतपत्रों के डिज़ाइन में बदलाव की घोषणा की है। नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य मतदाताओं के लिए दृश्यता, एकरूपता और पठनीयता को बढ़ाना है।

यह बदलाव चुनाव आयोग द्वारा पिछले छह महीनों में शुरू की गई 28 पहलों का हिस्सा है, जिनका लक्ष्य चुनावी प्रक्रियाओं को सरल और मतदाता-हितैषी बनाना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह अपडेट “चुनावी सुधार, EVM और सुशासन” जैसे विषयों के अंतर्गत महत्वपूर्ण है।

EVM मतपत्र डिज़ाइन में क्या बदला?

चुनाव आयोग ने Conduct of Elections Rules में संशोधन करते हुए EVM मतपत्र के लिए नए मानक तय किए हैं।

नए डिज़ाइन की प्रमुख विशेषताएँ

  • रंगीन उम्मीदवार की तस्वीरें – अब उम्मीदवारों की तस्वीरें रंगीन छपी होंगी, ताकि पहचान आसान हो।

  • बड़ा फोटो स्पेस – उम्मीदवार का चेहरा कुल फोटो स्पेस का तीन-चौथाई भाग घेरेगा, जिससे पहचान और स्पष्ट होगी।

  • समान फॉन्ट और शैली – सभी उम्मीदवारों के नाम और “नोटा” (NOTA – None of the Above) विकल्प समान फॉन्ट और आकार में छपे होंगे।

  • उम्मीदवारों की लेआउट सीमा – एक शीट पर अधिकतम 15 उम्मीदवारों को दिखाया जाएगा।

  • NOTA की स्थिति – “नोटा” विकल्प हमेशा अंतिम उम्मीदवार के नाम के बाद स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होगा।

कार्यान्वयन और रोलआउट

  • निर्देश जारी – चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को नई गाइडलाइन लागू करने का निर्देश दिया है।

  • पहली बार उपयोग – redesigned मतपत्रों का पहली बार उपयोग आगामी बिहार विधानसभा चुनावों (2025) में होगा।

  • देशभर में उपयोग – इसके बाद यह बदलाव सभी आगामी विधानसभा और आम चुनावों में लागू किया जाएगा।

स्थिर तथ्य

  • जारी करने वाला: भारतीय चुनाव आयोग (ECI)

  • उद्देश्य: EVM मतपत्र की स्पष्टता, पठनीयता और एकरूपता बढ़ाना

  • प्रमुख बदलाव: रंगीन फोटो, समान फॉन्ट, बड़ा फोटो स्पेस

  • पहला कार्यान्वयन: बिहार चुनाव (2025)

  • प्रति शीट अधिकतम उम्मीदवार: 15

  • NOTA की स्थिति: अंतिम उम्मीदवार के बाद

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