येलोस्टोन का दुर्लभ Echinus Geyser छह साल बाद फिर फटा

अमेरिका के प्रसिद्ध येलोस्टोन नेशनल पार्क में लगभग छह वर्षों की शांति के बाद एक बार फिर इचिनस गीजर सक्रिय हो गया है। हाल ही में हुए विस्फोटों में इस गीजर से लगभग 30 फीट तक गर्म भाप और पानी के शक्तिशाली फव्वारे उठते देखे गए। इचिनस गीजर को दुनिया का सबसे बड़ा अम्लीय गीजर माना जाता है और इसकी दोबारा सक्रियता ने वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। साल 2017 के बाद यह पहली बार है जब इस गीजर में लगातार गतिविधि दर्ज की गई है। येलोस्टोन का भू-तापीय क्षेत्र अपने लगातार बदलते स्वरूप के लिए जाना जाता है, और इचिनस गीजर की वापसी भूमिगत जल-तापीय प्रणालियों की गतिशीलता को दर्शाती है।

इचिनस गीजर को क्या बनाता है खास?

संयुक्त राज्य अमेरिका के येलोस्टोन राष्ट्रीय उद्यान के नॉरिस गीजर बेसिन क्षेत्र में स्थित इचिनस गीजर अपनी अनोखी अम्लीय जल-रसायन (Acidic Water Chemistry) के कारण अन्य गीजरों से अलग माना जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • यह दुनिया का सबसे बड़ा अम्लीय (Acidic) गीजर माना जाता है।
  • यह येलोस्टोन के सबसे गर्म भू-तापीय क्षेत्र नॉरिस गीजर बेसिन में स्थित है।
  • इसके आसपास लाल रंग की चट्टानें पाई जाती हैं जो समुद्री साही (Sea Urchin) जैसी दिखाई देती हैं, इसी कारण इसका नाम Echinus रखा गया।
  • इसमें निकलने वाला पानी अम्लीय गैसों और सामान्य भूजल के मिश्रण से बनता है।
  • अधिकांश अम्लीय गीजर समय के साथ कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अम्ल चट्टानों को धीरे-धीरे घोल देता है।

गीजर कैसे काम करते हैं?

गीजर एक भू-तापीय झरना (Geothermal Spring) होता है जो पृथ्वी के भीतर की गर्मी के कारण समय-समय पर फूटता है।

प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

  • भूमिगत कक्षों में पानी भर जाता है जो पृथ्वी की सतह से जुड़े होते हैं।
  • धरती के भीतर मौजूद मैग्मा इस पानी को गर्म करता है।
  • पानी के उबलने से दबाव बढ़ने लगता है।
  • भाप के दबाव से गर्म पानी गीजर के छिद्र से ऊपर की ओर फूट पड़ता है और विस्फोट होता है।
  • विस्फोट के बाद कक्ष फिर से पानी से भर जाता है और यह चक्र दोहराया जाता है।
  • इसी भू-तापीय प्रणाली के कारण येलोस्टोन नेशनल पार्क में दुनिया में सबसे अधिक गीजर पाए जाते हैं।

इचिनस गीजर का विस्फोट इतिहास

  • ऐतिहासिक रूप से इचिनस गीजर नियमित रूप से फूटता था।
  • 1970 के दशक में हर 40–80 मिनट में विस्फोट होता था।
  • कई बार विस्फोट 90 मिनट तक चलता था।
  • पानी की ऊँचाई लगभग 75 फीट (23 मीटर) तक पहुँच जाती थी।

हाल के वर्षों में इसकी गतिविधि अनियमित हो गई:

  • 2018: 1 विस्फोट दर्ज
  • 2019: 1 विस्फोट दर्ज
  • 2020: 2 विस्फोट दर्ज
  • 2026: फरवरी में गतिविधि फिर शुरू

हालिया विस्फोट लगभग 3 मिनट तक चले और पानी करीब 30 फीट तक उठा।

क्या विस्फोट जारी रहेंगे?

संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों के अनुसार गीजर अक्सर कुछ समय के लिए सक्रिय होते हैं और फिर दोबारा शांत हो जाते हैं।
संभावना है कि इचिनस गीजर कुछ सप्ताह या महीनों तक सक्रिय रहने के बाद फिर से निष्क्रिय हो सकता है। फरवरी के अंत तक किए गए अवलोकनों से यह भी संकेत मिला है कि इसकी गतिविधि धीरे-धीरे कम हो सकती है।

 

हरियाणा ने 2026-27 के लिए ₹2.23 लाख करोड़ का बजट पेश किया

हरियाणा के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी ने ₹2,23,658 करोड़ के खर्च के साथ हरियाणा बजट 2026-27 पेश किया। यह 2025-26 के लिए ₹2,02,816 करोड़ के रिवाइज़्ड अनुमान से 10.28% ज़्यादा है। बजट में ₹40,293 करोड़ (GSDP का 2.65%) का फिस्कल डेफिसिट प्रोजेक्ट किया गया है। साथ ही AI, एग्रीकल्चर, महिला एम्पावरमेंट, इंडस्ट्रियल ग्रोथ और एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करने वाला एक बड़ा रोडमैप भी दिया गया है।

वर्ष 2026-27 के लिए कुल ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट पेश किया, जो कि 2025-26 के मुकाबले ₹2,02,816.66 करोड़ यानी 10.28% अधिक रहा। इस बजट में राजकोषीय घाटा ₹40,293.17 करोड़ जो GDP का 2.65%, राजस्व घाटा 0.87%, प्रभावी राजस्व घाटा 0.41%, पूंजीगत व्यय 1.86%, प्रभावी पूंजीगत व्यय 2.32% है।

हरियाणा बजट 2026-27: मुख्य फिस्कल नंबर

बजट के मुख्य नंबर

  • कुल बजट खर्च: ₹2,23,658 करोड़
  • 2025-26 की तुलना में बढ़ोतरी: 10.28%
  • फिस्कल डेफिसिट: ₹40,293 करोड़ (GSDP का 2.65%)
  • रेवेन्यू डेफिसिट: 0.87%
  • इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट: 0.41%
  • कैपिटल खर्च: 1.86%
  • इफेक्टिव कैपिटल खर्च: 2.32%

सरकार ने 2047 तक हरियाणा को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के अपने लक्ष्य को दोहराया।

हरियाणा AI मिशन 2026: ₹474 करोड़ का आवंटन

  • हरियाणा AI मिशन के लिए ₹474 करोड़ आवंटित किए गए।
  • 1 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • AI-बेस्ड मॉडल्स को डिपार्टमेंटल सर्विसेज़ में इंटीग्रेट किया जाएगा।
  • डिजिटल गवर्नेंस और इनोवेशन पर फोकस किया जाएगा।

हरियाणा AI मिशन 2026 का मकसद राज्य को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकॉनमी के तौर पर बनाना है।

वॉटर सिक्योर हरियाणा परियोजना एवं यमुना मिशन

  • हरियाणा सरकार ने वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोजेक्ट के लिए ₹5,715 करोड़ का प्रावधान किया है। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करना और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।
  • इसके साथ ही “जल ही जीवन है” थीम के अंतर्गत 313 किलोमीटर लंबी Yamuna River के किनारे प्रदूषण समाप्त करने के लिए एक नया मिशन शुरू किया गया है। यह पहल नदी की स्वच्छता, पारिस्थितिक संतुलन और पेयजल गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
  • पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सभी सरकारी भवनों और पंजीकृत गौशालाओं को सौर ऊर्जा आधारित परिसरों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है।

हरियाणा बजट 2026-27: महिला-केंद्रित घोषणाएं

हरियाणा बजट 2026-27 में महिलाओं के स्वास्थ्य और रोजगार को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ₹5 करोड़ का वर्कप्लेस सेफ्टी फंड स्थापित किया गया है। 14–15 वर्ष आयु वर्ग की 3 लाख बालिकाओं के लिए एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक जिला और उप-मंडल अस्पताल में “स्वस्थ महिला सशक्त परिवार” क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे, ताकि महिलाओं को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर नियोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी ₹48,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष कर दी गई है।

कृषि एवं किसान कल्याण उपाय

कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए दलहन, तिलहन और कपास (धान को छोड़कर) पर ₹2,000 प्रति एकड़ का बोनस दिया जाएगा। देशी कपास पर प्रोत्साहन राशि ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति एकड़ कर दी गई है। प्रमाणित जैविक किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ वार्षिक अनुदान मिलेगा। 8 लाख ट्यूबवेल की गुणवत्ता जांच के लिए तीन वर्षीय योजना लागू की जाएगी। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण हाट मंडियों को मजबूत किया जाएगा तथा बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा बढ़ाया जाएगा।

बिजली क्षेत्र सुधार: हरियाणा एग्री डिस्कॉम

हरियाणा सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तीसरी विद्युत वितरण कंपनी – हरियाणा एग्री डिस्कॉम – के गठन की घोषणा की है। यह नई कंपनी 5,084 कृषि फीडरों और लगभग 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा कृषि क्षेत्र के लिए विशेष दक्षता विकसित करना है। यह सुधार कृषि बिजली वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उद्योग, रोजगार एवं वेतन नीति

पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के पुनरुद्धार के लिए ₹500 करोड़ का सशक्तिकरण कोष स्थापित किया जाएगा। “मेक इन हरियाणा” नीति के अंतर्गत ब्लॉक आधारित वर्गीकरण को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, जिससे उद्योगों को अधिक लचीलापन मिलेगा। न्यूनतम वेतन को ₹11,257 से बढ़ाकर ₹15,200 प्रति माह करने पर निर्णय लंबित है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मॉडल परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें पहला केंद्र कुरुक्षेत्र में 25 दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है।

सबा शॉल बनीं सेंट्रल जेल की पहली कश्मीरी महिला प्रमुख

सबा शॉल को जम्मू-कश्मीर की उच्च सुरक्षा वाली सुधारात्मक संस्था सेंट्रल जेल श्रीनगर की पहली कश्मीरी महिला प्रमुख नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 2 मार्च 2026 को गृह विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के तहत की गई। इस निर्णय के साथ जम्मू-कश्मीर कारागार विभाग में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल लागू हुआ है। साथ ही यह कदम क्षेत्र में वर्दीधारी सेवाओं में महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसने लैंगिक समानता की दिशा में नई मिसाल कायम की है।

सबा शॉल कौन हैं?

सबा शॉल जम्मू-कश्मीर की एक वरिष्ठ कारागार अधिकारी हैं, जिन्होंने हाल ही में श्रीनगर की केंद्रीय जेल की पहली कश्मीरी महिला प्रमुख बनकर इतिहास रचा है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सबा शॉल श्रीनगर के पीरबाग क्षेत्र से संबंध रखती हैं। उन्होंने सोशल वर्क (समाज कार्य) में परास्नातक (मास्टर डिग्री) प्राप्त की है। वर्ष 2012 में उन्होंने जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग (JKPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की। उस वर्ष उन्होंने सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (प्रिज़न्स) पद के लिए ओपन मेरिट में एकमात्र स्थान हासिल किया।

2012 में JKPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, खासकर उस समय जब बहुत कम कश्मीरी महिलाएं वर्दीधारी सरकारी सेवाओं में प्रवेश कर पाती थीं। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

सबा शॉल का पेशेवर करियर सफर

प्रारंभिक पेशेवर अनुभव

  • सबा शॉल ने कारागार विभाग में शामिल होने से पहले सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने वरिष्ठ सामुदायिक विकास सलाहकार (Senior Community Development Consultant) के रूप में कार्य किया।
  • इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी के साथ जुड़कर जमीनी स्तर पर सामाजिक कार्य और क्षमता निर्माण (Capacity Building) पहलों पर काम किया।
  • सामुदायिक विकास के क्षेत्र में उनके प्रारंभिक अनुभव ने उन्हें सामाजिक सुधार, पुनर्वास (Rehabilitation) और प्रशासनिक समन्वय की गहरी समझ प्रदान की।

जम्मू-कश्मीर कारागार विभाग में भूमिका

वर्ष 2012 में जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग (JKPSC) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक (कारागार) का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने विभाग में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जैसे:

  • कारागार मुख्यालय में सेवा
  • प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन
  • जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के रूप में कार्य
  • विभागीय प्रशिक्षण और संचार का समन्वय

मैदानी अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के इस संयोजन ने उन्हें श्रीनगर की उच्च सुरक्षा वाली केंद्रीय जेल जैसे संस्थान का नेतृत्व करने के लिए एक मजबूत और उपयुक्त उम्मीदवार बनाया।

सेंट्रल जेल श्रीनगर की प्रमुख के रूप में नियुक्ति

सबा शॉल को कारागार महानिदेशक के स्टाफ अधिकारी पद से स्थानांतरित कर तत्काल प्रभाव से सेंट्रल जेल श्रीनगरकी अधीक्षक (Superintendent) का कार्यभार सौंपा गया है।

सेंट्रल जेल श्रीनगर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सबसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाली सुधारात्मक संस्थाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान का नेतृत्व सौंपा जाना उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।

उनकी नियुक्ति को निम्न रूप में देखा जा रहा है—

  • लैंगिक प्रतिनिधित्व (Gender Representation) की दिशा में एक प्रगतिशील कदम
  • उनकी प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता की मान्यता
  • जम्मू-कश्मीर में महिला अधिकारियों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि

यह निर्णय क्षेत्र में वर्दीधारी सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का प्रतीक भी है।

‘प्रोजेक्ट हनुमान’ की शुरुआत: बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की पहल

वन्यजीव संरक्षण और जनसुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने प्रोजेक्ट हनुमान की शुरुआत की है। यह पहल राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या से निपटने और ग्रामीण समुदायों तथा वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटना है। हाल के समय में जंगली जानवरों के मानव बस्तियों में प्रवेश की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे फसलों को नुकसान, संपत्ति की हानि और मानव जीवन के लिए खतरे जैसी गंभीर चुनौतियाँ सामने आई हैं।

प्रोजेक्ट हनुमान का लक्ष्य ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, वन्यजीवों की रक्षा करना और मानव-जानवर टकराव की घटनाओं को कम करना है। यह पहल संतुलित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

प्रोजेक्ट हनुमान क्या है?

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण द्वारा प्रारंभ किया गया प्रोजेक्ट हनुमान आंध्र प्रदेश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए एक संगठित और दीर्घकालिक पहल है। इसका उद्देश्य संवेदनशील जिलों में मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाली टकराव की घटनाओं को कम करना तथा एक स्थायी समाधान विकसित करना है।

प्रोजेक्ट हनुमान की प्रमुख विशेषताएँ

  • संवेदनशील जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर विशेष ध्यान
  • आपात स्थितियों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (Rapid Response Teams) की तैनाती
  • आधुनिक तकनीक और निगरानी प्रणालियों का उपयोग
  • वन अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय मजबूत करना
  • वन क्षेत्रों के आसपास जोखिमपूर्ण गतिविधियों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान

यह परियोजना अस्थायी संकट प्रबंधन के बजाय एक संरचित और संस्थागत प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने पर केंद्रित है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष क्यों बढ़ रहा है?

भारत के कई राज्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इसके मुख्य कारण हैं—

  • वनों के आसपास तेज़ी से हो रहा शहरी विस्तार
  • प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
  • वन सीमांत क्षेत्रों में कृषि पर बढ़ती निर्भरता

हाथी, तेंदुए और जंगली सूअर जैसे जानवर भोजन और पानी की तलाश में अक्सर गांवों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे खतरनाक स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट हनुमान एक समयानुकूल और आवश्यक हस्तक्षेप के रूप में सामने आया है।

प्रोजेक्ट हनुमान कैसे कार्य करेगा?

परियोजना के अंतर्गत—

  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाया जाएगा
  • वन सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की जाएगी
  • वन्यजीवों की गतिविधियों की डेटा-आधारित निगरानी की जाएगी
  • स्थानीय समुदायों को सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण दिया जाएगा
  • मुआवजा और राहत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा

तकनीक और सामुदायिक भागीदारी पर जोर

प्रोजेक्ट हनुमान की एक प्रमुख विशेषता आधुनिक तकनीक और जमीनी स्तर की भागीदारी का संयोजन है।

  • जानवरों की गतिविधि पर निगरानी के लिए सर्विलांस उपकरण
  • ग्रामीणों और वन अधिकारियों के बीच त्वरित संचार व्यवस्था
  • संघर्ष-प्रवण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान

समुदायों की सक्रिय भागीदारी से घबराहट में उठाए जाने वाले कदमों को रोका जा सकेगा, जो अक्सर संघर्ष को और बढ़ा देते हैं।

वन्यजीव संरक्षण पर व्यापक प्रभाव

प्रोजेक्ट हनुमान केवल हमलों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि—

  • पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने
  • लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा
  • प्रतिशोध में वन्यजीवों की हत्या को कम करने
  • सह-अस्तित्व की रणनीतियों को बढ़ावा देने

जैसे दीर्घकालिक उद्देश्यों को भी आगे बढ़ाता है। यह पहल मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

RBI ने 2025 में भारत के चालू खाता घाटे में भारी गिरावट की रिपोर्ट दी

भारत के एक्सटर्नल सेक्टर में 2025 में सुधार दिखा है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने बताया है कि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) में काफ़ी कमी आई है। करंट अकाउंट डेफिसिट 30.1 बिलियन डॉलर रहा। यह CAD GDP का 1% है और इसकी तुलना पिछले साल इसी समय के 36.6 बिलियन डॉलर से की जा सकती है। भारत के बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स पर RBI की लेटेस्ट रिपोर्ट में बढ़ते FDI इनफ्लो और सर्विसेज़ एक्सपोर्ट ग्रोथ और फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व में बदलाव पर रोशनी डाली गई है।

चालू खाता घाटा (CAD) 2025 में घटकर जीडीपी का 1%

  • भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit – CAD) अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान घटकर 30.1 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 36.6 अरब डॉलर था। अब CAD जीडीपी का केवल 1% है, जो देश की बाहरी आर्थिक स्थिरता में सुधार का संकेत देता है।
  • कम चालू खाता घाटा का अर्थ है कि विदेशी उधारी पर दबाव कम हुआ है और भुगतान संतुलन (Balance of Payments) की स्थिति मजबूत हुई है। यह सुधार वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
  • ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए हैं। CAD में यह गिरावट वर्ष 2025 में भुगतान संतुलन प्रबंधन की सुदृढ़ स्थिति और बाहरी क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है।

अप्रैल–दिसंबर 2025 में शुद्ध एफडीआई प्रवाह में तेज वृद्धि

  • अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Net FDI) बढ़कर 3 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह केवल 0.6 अरब डॉलर था। यह वृद्धि भारत में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
  • एफडीआई में व्यवसायों और बुनियादी ढांचे में किए जाने वाले दीर्घकालिक निवेश शामिल होते हैं, जो अर्थव्यवस्था को स्थिर और टिकाऊ विकास प्रदान करते हैं। उच्च एफडीआई प्रवाह चालू खाता घाटे (CAD) के वित्तपोषण में मदद करता है और देश के पूंजी खाते (Capital Account) की स्थिति को मजबूत बनाता है।
  • एफडीआई में यह बढ़ोतरी चालू खाता घाटे में आई कमी को समर्थन देने और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुई है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में शुद्ध निकासी

अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में 4.3 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में 9.4 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश प्रवाह हुआ था। एफपीआई में शेयरों और बॉन्ड में किए जाने वाले निवेश शामिल होते हैं, जो आमतौर पर अल्पकालिक और अधिक अस्थिर होते हैं। यह निकासी वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं से जुड़ी हो सकती है। हालांकि एफपीआई में निकासी के बावजूद भारत की समग्र बाहरी स्थिरता संतुलित बनी रही। एफपीआई रुझान दर्शाते हैं कि अल्पकालिक पूंजी प्रवाह, स्थिर एफडीआई प्रवाह की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव वाले होते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार में कमी

2025 में भुगतान संतुलन (Balance of Payments) आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार में 30.8 अरब डॉलर की कमी आई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 13.8 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। यह कमी पूंजी निकासी या भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप का संकेत हो सकती है। विदेशी मुद्रा भंडार मुद्रा को स्थिर रखने और बाहरी झटकों से निपटने में सहायक होता है। कमी के बावजूद भारत के पास पर्याप्त भंडार स्तर बना हुआ है।

सेवा निर्यात से भुगतान संतुलन को मजबूती

Reserve Bank of India (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार सेवा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से कंप्यूटर सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। सेवा निर्यात, वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई में मदद करता है और चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने में सहायक होता है। यह जानकारी RBI की 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) की भुगतान संतुलन रिपोर्ट का हिस्सा है। सेवा क्षेत्र का बढ़ता योगदान भारत के बाहरी क्षेत्र की प्रमुख ताकत बना हुआ है।

चालू खाता घाटा (CAD) क्या है?

चालू खाता घाटा (Current Account Deficit – CAD) तब होता है जब किसी देश का कुल आयात (वस्तुएं, सेवाएं और अंतरण) उसके निर्यात से अधिक हो जाता है। यह दर्शाता है कि देश विश्व से जितनी कमाई करता है, उससे अधिक खर्च विदेशों में कर रहा है। CAD को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है, ताकि उसकी स्थिरता को मापा जा सके। मध्यम स्तर का CAD प्रबंधनीय होता है, लेकिन अत्यधिक घाटा मुद्रा पर दबाव और बाहरी उधारी बढ़ा सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक नियमित रूप से भुगतान संतुलन ढांचे के तहत CAD की निगरानी करता है।

बी.पी. सिंह ने नौसेना मुख्यालय में महानिदेशक नौसैनिक आयुध का कार्यभार संभाला

बी.पी. सिंह ने नई दिल्ली में नेवल हेडक्वार्टर में नेवल आर्मामेंट (DGONA) के नए डायरेक्टर जनरल के तौर पर ऑफिशियली चार्ज ले लिया है। यह अपॉइंटमेंट 1 मार्च 2026 से होगा। वे इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस के 1994 बैच के सीनियर ऑफिसर हैं। वे श्री दिवाकर जयंत की जगह लेंगे जो 28 फरवरी 2026 को रिटायर हुए थे। नेवल आर्मामेंट मैनेजमेंट, प्रोक्योरमेंट और लॉजिस्टिक्स में तीन दशकों से ज़्यादा का अनुभव है। उनकी अपॉइंटमेंट इंडियन नेवी के आर्मामेंट ऑर्गनाइज़ेशन में एक ज़रूरी लीडरशिप ट्रांज़िशन को दिखाता है।

नेवल हेडक्वार्टर में नेवल आर्मामेंट के डायरेक्टर जनरल

बी.पी. सिंह ने 01 मार्च 2026 को नेवल आर्मामेंट के डायरेक्टर जनरल (DGONA) का पद संभाला।

  • यह पद नई दिल्ली में नेवल हेडक्वार्टर में है।
  • वह इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस (INAS) के 1994 बैच के हैं।
  • वह श्री दिवाकर जयंत की जगह लेंगे, जो 28 फरवरी 2026 को रिटायर हुए थे।
  • DGONA नेवल वेपन सिस्टम और एम्युनिशन लॉजिस्टिक्स को मैनेज करने में अहम भूमिका निभाता है।
  • इस अपॉइंटमेंट से नेवल आर्मामेंट ऑर्गनाइज़ेशन में लीडरशिप मज़बूत होती है।

नेवल आर्मामेंट के डायरेक्टर जनरल की ज़िम्मेदारी नेवल वेपन सिस्टम की ऑपरेशनल रेडीनेस पक्का करना है।

इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस में  बी.पी. सिंह का करियर

बी.पी. सिंह बिहार कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, जो अब नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) पटना है, से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं।

  • नेवल आर्मामेंट ऑर्गनाइज़ेशन में उनकी 30 साल से ज़्यादा की सर्विस रही है।
  • पहले नेवल आर्मामेंट डिपो (NAD), मुंबई में चीफ़ जनरल मैनेजर के तौर पर काम किया।
  • NAD विशाखापत्तनम, NAD मुंबई और NAD ट्रॉम्बे में अहम पदों पर रहे।
  • NAD अलुवा में चीफ़ जनरल मैनेजर के तौर पर काम किया।
  • नेवल हेडक्वार्टर के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ नेवल आर्मामेंट में भी काम किया।

इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस में उनका लंबा अनुभव उन्हें DGONA रोल के लिए अच्छी तरह से तैयार करता है।

नेवल आर्मामेंट ऑर्गनाइज़ेशन में अनुभव

पारंपरिक हथियार और गोला-बारूद को मैनेज करने में एक्सपर्ट।

  • इंडियन नेवी के गाइडेड वेपन सिस्टम को संभालने का अनुभव।
  • कॉम्प्लेक्स सिस्टम की खरीद, स्टोरेज और मेंटेनेंस में शामिल।
  • नेवल एम्युनिशन की सेफ्टी और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट पक्का किया।
  • वेपन सिस्टम के लिए लाइफ साइकिल सपोर्ट को मज़बूत किया।
  • नेवल की जगहों पर ऑपरेशनल तैयारी में सुधार किया।
  • नेवल आर्मामेंट के डायरेक्टर जनरल नेवल यूनिट्स में स्ट्रेटेजिक वेपन सिस्टम सपोर्ट की देखरेख करते हैं।

स्ट्रेटेजिक ट्रेनिंग और नेशनल सिक्योरिटी बैकग्राउंड

बी.पी. सिंह जाने-माने नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC-60) के पुराने स्टूडेंट हैं।

  • स्ट्रेटेजिक और नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ में एडवांस्ड ट्रेनिंग ली है।
  • आर्ममेंट मैनेजमेंट में पॉलिसी बनाने और स्ट्रेटेजिक प्लानिंग में योगदान दिया है।
  • पिछली भूमिकाओं के दौरान डिपो मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम को मजबूत किया है।
  • नेवल आर्मामेंट ऑर्गनाइज़ेशन में स्ट्रेटेजिक लीडरशिप लाते हैं।

नेशनल डिफेंस कॉलेज में उनकी ट्रेनिंग नेशनल सिक्योरिटी में फैसले लेने की उनकी क्षमता को बढ़ाती है।

इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस (INAS) क्या है?

  • इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस (INAS) मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस के तहत एक स्पेशलाइज़्ड सिविलियन सर्विस है।
  • जो नेवल आर्मामेंट और एम्युनिशन के मैनेजमेंट के लिए ज़िम्मेदार है।
  • INAS के ऑफिसर इंडियन नेवी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वेपन सिस्टम की खरीद, स्टोरेज, इंस्पेक्शन, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स को संभालते हैं।
  • यह सर्विस नेवल एम्युनिशन डिपो के सेफ्टी स्टैंडर्ड, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लॉन्ग टर्म सस्टेनेबिलिटी पक्का करती है।
  • डायरेक्टर जनरल ऑफ़ नेवल आर्मामेंट इस ऑर्गनाइज़ेशन को हेड करते हैं।
  • भारत की समुद्री डिफेंस तैयारियों को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

छह बार के सांसद केपी उन्नीकृष्णन का 89 वर्ष की आयु में निधन

कांग्रेस के पुराने नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री केपी उन्नीकृष्णन का 89 साल की उम्र में केरल के कोझिकोड में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों के मुताबिक, एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उम्र से जुड़ी दिक्कतों का इलाज कराते समय उनकी मौत हो गई। वह वडकारा से छह बार सांसद रहे। वह 1980 और 1990 के दशक में एक अहम पॉलिटिकल हस्ती थे। उन्नीकृष्णन ने नेशनल पॉलिटिक्स में अहम रोल निभाया, जिसमें वीपी सिंह कैबिनेट में काम करना भी शामिल है।

वडकारा से छह बार लोकसभा MP

  • वडकारा से लगातार छह बार लोकसभा के लिए चुने गए।
  • पहली बार 1971 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुने गए।
  • 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में फिर से चुने गए।
  • पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (1980-82) में काम किया।
  • संसद में कांग्रेस (सेक्युलर) के नेता (1981-84)।
  • उनकी बार-बार की जीत केरल में ज़मीनी स्तर पर मज़बूत समर्थन दिखाती है।

वीपी सिंह कैबिनेट और खाड़ी युद्ध में लोगों को निकालने में भूमिका

  • 1989-90 में केंद्रीय भूतल परिवहन और संचार मंत्री के तौर पर काम किया।
  • खाड़ी युद्ध के संकट के दौरान भारतीयों को निकालने की देखरेख की।
  • ट्रांसपोर्ट और संचार सिस्टम को मज़बूत करने में योगदान दिया।
  • ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में उथल-पुथल भरे समय में अहम भूमिका निभाई।
  • वीपी सिंह कैबिनेट में उनका कार्यकाल उनके करियर के सबसे अहम दौर में से एक है।

पॉलिटिकल सफ़र: सोशलिस्ट जड़ों से कांग्रेस लीडरशिप तक

  • एक जर्नलिस्ट के तौर पर प्रोफेशनल ज़िंदगी शुरू की।
  • सोशलिस्ट पार्टी और बाद में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े।
  • 1960 के दशक में इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुए।
  • 1962 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मेंबर बने।
  • बाद में 1995 में कांग्रेस में लौटने से पहले कांग्रेस (U) और कांग्रेस (S) से जुड़े।
  • उन्नीकृष्णन को वी. के. कृष्ण मेनन का करीबी माना जाता था और उन्हें कभी इंदिरा गांधी का भरोसेमंद माना जाता था।

पढ़ाई और शुरुआती ज़िंदगी

  • जन्म 20 सितंबर, 1936।
  • मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की।
  • चेन्नई में लॉ की डिग्री पूरी की।
  • राजनीति में आने से पहले पत्रकारिता के ज़रिए पब्लिक लाइफ़ में आए।
  • उनके एजुकेशनल बैकग्राउंड और सोच ने उनके पार्लियामेंट्री योगदान को आकार दिया।

16 अप्रैल से नई दिल्ली में भारत करेगा ‘भारत स्टील समिट’ की मेजबानी

भारत 16 अप्रैल 2026 से नई दिल्ली में भारत स्टील 2026 समिट होस्ट करेगा। दो दिन के इस ग्लोबल इवेंट में स्टील, टेक्नोलॉजी, माइनिंग और ट्रेडिंग कंपनियों के लीडर्स एक साथ आएंगे। वे अगली पीढ़ी के स्टील इकोसिस्टम के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एक साथ आएंगे। इस समिट का मकसद पॉलिसी बिज़नेस बातचीत के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनना है, जो स्टील सेक्टर की भविष्य की दिशा तय करेगा और साथ ही भारत में सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देगा।

भारत स्टील 2026 समिट: विज़न और उद्देश्य

भारत स्टील 2026 समिट के मुख्य फोकस एरिया

  • अगली पीढ़ी का स्टील इकोसिस्टम बनाना।
  • पॉलिसी बनाने वालों और इंडस्ट्री लीडर्स के बीच सहयोग को मज़बूत करना।
  • सस्टेनेबल और ग्रीन स्टील प्रोडक्शन को बढ़ावा देना।
  • ग्लोबल स्टील मार्केट में भारत की स्थिति को बढ़ाना।
  • स्टील मैन्युफैक्चरिंग में टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को बढ़ाना।

भारत स्टील 2026 समिट से स्टील सेक्टर में इनोवेशन से चलने वाले और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार विकास के लिए एक रोडमैप बनाने की उम्मीद है।

पॉलिसी बिज़नेस डायलॉग के लिए ग्लोबल प्लेटफ़ॉर्म

नई दिल्ली में एम्बेसडर को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी सुधाकर दलेला ने भारत स्टील 2026 समिट को एक ग्लोबल प्लेटफ़ॉर्म बताया।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि,

  • यह समिट सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देगा।
  • यह स्टील सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत को दिखाएगा।
  • यह ग्लोबल इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को बढ़ावा देगा।

भारत स्टील 2026 समिट को सरकारी पॉलिसी और इंडस्ट्री स्ट्रैटेजी के बीच एक ब्रिज के तौर पर रखा गया है और यह कोऑर्डिनेटेड डेवलपमेंट पक्का करता है।

भारत स्टील 2026 भारत के स्टील सेक्टर के लिए क्यों ज़रूरी है

भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टील प्रोड्यूसर में से एक है। बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड, शहरीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार के साथ, स्टील इंडस्ट्री आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाती है।

भारत स्टील 2026 समिट इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह,

  • ग्लोबल स्टील हब बनने के भारत के सपने को मज़बूत करता है।
  • ग्रीन स्टील और कम कार्बन प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देता है।
  • माइनिंग, ट्रेडिंग और स्टील कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • कच्चे माल और सप्लाई चेन में इंटरनेशनल पार्टनरशिप को मज़बूत करता है।

सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ और नेक्स्ट-जेनरेशन स्टील

स्टील का भविष्य इनमें है,

  • साफ़ प्रोडक्शन के तरीके।
  • एनर्जी बचाने वाली टेक्नोलॉजी।
  • ज़िम्मेदार माइनिंग के तरीके।
  • स्टील बनाने में डिजिटल बदलाव।

भारत स्टील 2026 समिट का मकसद इंडस्ट्रियल ग्रोथ को सस्टेनेबिलिटी के लक्ष्यों के साथ जोड़ना है, ताकि पर्यावरण से कोई समझौता किए बिना आर्थिक बढ़ोतरी हो सके।

भारत और कनाडा के बीच यूरेनियम आपूर्ति पर समझौता, जानें विस्तार से

भारत और कनाडा ने 02 मार्च 2026 को यूरेनियम एवं महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर अहम समझौतों पर हस्ताक्षर करने के साथ वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को जल्द अंतिम रूप देने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं के बीच यहां हुई बातचीत के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, छोटे एवं मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (एसएमआर), शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

दोनों देशों के बीच स्ट्रेटेजिक एनर्जी पार्टनरशिप

  • भारत-कनाडा स्ट्रेटेजिक एनर्जी पार्टनरशिप की शुरुआत।
  • फोकस एरिया में क्लीन एनर्जी, कन्वेंशनल एनर्जी, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और ज़रूरी मिनरल शामिल हैं।
  • इंडिया एनर्जी वीक 2026 में कनाडा और इंडिया मिनिस्टीरियल एनर्जी डायलॉग की दोबारा शुरुआत।
  • हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, बैटरी स्टोरेज, CCUS में सहयोग।
  • एक खास बात कैमेको और इंडिया के डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी के बीच कैनेडियन डॉलर (CAD) का 2.6 बिलियन यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट था। इससे इंडिया की सिविल न्यूक्लियर एनर्जी कैपेसिटी भी बढ़ रही है।
  • कनाडा का लक्ष्य 2030 तक हर साल 50 मिलियन टन LNG बनाना और इंडिया के साथ एनर्जी ट्रेड बढ़ाना भी है।

भारत एवं कनाडा के द्विपक्षीय संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एवं कनाडा के द्विपक्षीय संबंध अब ‘नई ऊर्जा, आपसी विश्वास और सकारात्मकता’ से भरे हुए हैं। कनाडा 2.6 अरब डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते के तहत भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का समर्थन करेगा। मोदी ने कहा कि असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति पर ऐतिहासिक समझौता हुआ है। हम छोटे मॉड्यूलर और उन्नत रिएक्टरों पर भी साथ काम करेंगे।

महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन

  • महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) से स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत विनिर्माण के लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलेगी। कनाडा के पास दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है।
  • दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को साझा एवं गंभीर चुनौती बताते हुए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन चुनौतियों के खिलाफ हमारा करीबी सहयोग वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मोदी और कार्नी ने बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की। मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
  • मोदी ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यह फिलहाल लगभग 13 अरब डॉलर है।

शिक्षा क्षेत्र में कृत्रिम मेधा

  • रक्षा क्षेत्र में ‘भारत-कनाडा रक्षा संवाद’ स्थापित करने पर सहमति बनी। समुद्री क्षेत्र में निगरानी क्षमता और सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।
  • शिक्षा क्षेत्र में कृत्रिम मेधा, स्वास्थ्य, कृषि और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों के बीच नई साझेदारियां होंगी तथा कनाडाई विश्वविद्यालय भारत में परिसर खोलेंगे।
  • कार्नी ने रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि यह समझौते दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा करेंगे।

 

 

विश्व वन्यजीव दिवस 2026: थीम, इतिहास और महत्व

विश्व वन्यजीव दिवस हर वर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है ताकि ग्रह के जीवों और वनस्पतियों को होने वाले खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस दिन का उद्देश्य विश्व के जंगली जीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता पैदा करना और उन्हें जागृत करना है। यह दिन दुनिया भर में इकोसिस्टम को सुरक्षित रखने और हैबिटैट डिस्ट्रक्शन और क्लाइमेट चेंज जैसे बढ़ते खतरों के बीच वाइल्डलाइफ क्राइम से निपटने की तुरंत ज़रूरत की याद दिलाता है।

विश्व वन्यजीव दिवस क्या है?

  • विश्व वन्यजीव दिवस यूनाइटेड नेशंस का एक इंटरनेशनल कार्यक्रम है जो जंगली जानवरों और पौधों का जश्न मनाता है और दुनिया भर में बचाव की कोशिशों को बढ़ावा देता है।
  • यह दिन 3 मार्च 1973 को कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज़ ऑफ़ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा (CITES) पर साइन करने की सालगिरह है।
  • CITES एक ग्लोबल एग्रीमेंट है जो एंडेंजर्ड स्पीशीज़ के इंटरनेशनल ट्रेड को रेगुलेट करता है ताकि जंगल में उनका ज़िंदा रहना पक्का हो सके।

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे दुनिया को याद दिलाता है कि,

  • खतरे में पड़ी प्रजातियों की रक्षा करें
  • प्राकृतिक आवासों को बचाएँ
  • वाइल्डलाइफ क्राइम को कम करें
  • बायोडायवर्सिटी के सस्टेनेबल इस्तेमाल को बढ़ावा दें

विश्व वन्यजीव दिवस 2026 की थीम

“Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods” (“औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण”)

विश्व वन्यजीव दिवस 2026 की थीम मानव जीवन में औषधीय और सुगंधित पौधों की महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित है। ये पौधे केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परंपराओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।

इनका योगदान निम्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है—

  • पारंपरिक और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियाँ
  • सांस्कृतिक एवं आदिवासी ज्ञान परंपराएँ
  • सतत आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

विकासशील देशों में लगभग 70% से 95% लोग पौधों पर आधारित पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर हैं। यह तथ्य दर्शाता है कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वनस्पति जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

मेडिसिनल और एरोमैटिक पौधों को सुरक्षा की ज़रूरत क्यों है

मेडिकल और एरोमैटिक पौधे इन वजहों से तेज़ी से खतरे में हैं,

  • हैबिटेट का खत्म होना
  • क्लाइमेट चेंज
  • ज़्यादा कटाई
  • गैर-कानूनी वाइल्डलाइफ़ ट्रेड

2026 कैंपेन इन चीज़ों को बढ़ावा देता है,

  • सस्टेनेबल कटाई के तरीके
  • कानूनी और रेगुलेटेड ट्रेड
  • मज़बूत कंज़र्वेशन पॉलिसी
  • प्लांट बायोडायवर्सिटी का प्रोटेक्शन

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे 2026 के खास फोकस एरिया

1. बायोडायवर्सिटी कंज़र्वेशन

  • वाइल्डलाइफ और पौधों की प्रजातियां इकोसिस्टम की रीढ़ हैं।
  • अकेले जंगल ही ज़मीन पर रहने वाली लगभग 80% प्रजातियों को सपोर्ट करते हैं।

2. सस्टेनेबल ट्रेड और रेगुलेशन

CITES और नेशनल कानूनों के ज़रिए कई देश खतरे में पड़े पेड़-पौधों और जानवरों के ट्रेड को रेगुलेट करने का मकसद रखते हैं।

3. क्लाइमेट और इकोलॉजिकल बैलेंस

हेल्दी इकोसिस्टम इनमें योगदान देते हैं,

  • फूड सिक्योरिटी
  • क्लाइमेट स्टेबिलिटी
  • साफ हवा और पानी
  • मिट्टी की सुरक्षा

जैसे, पॉलिनेटर दुनिया भर में 75% मुख्य खाने की फसलें उगाने में मदद करते हैं।

कैसे हुई विश्व वन्यजीव दिवस की शुरुआत?

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 20 दिसंबर 2013 को, अपने 68वें अधिवेशन में वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने एवं वनस्पति के लुप्तप्राय प्रजाति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 3 मार्च को हर साल विश्व वन्यजीव दिवस मनाने की घोषणा की थी। वन्य जीवों को विलुप्त होने से रोकने के लिए सबसे पहले साल 1872 में वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट पारित हुआ था।

विश्व वन्यजीव दिवस मनाने का उद्देश्य

इस दिवस को मनाने का मकसद बहुत ही साफ है कि दुनियाभर में जिस भी वजहों से वन्यजीव और वनस्पतियों लुप्त हो रही हैं उन्हें बचाने के तरीकों पर काम करना। पृथ्वी की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए वनस्पतियां और जीव-जंतु बहुत जरूरी हैं। लेकिन पर्यावरण के असंतुलन और तरह-तरह के एक्सरपेरिमेंट्स के कुछ सारे जीव और वनस्पतियों का अस्तित्व खतरे में है।

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