भारत अपनी अंतरिक्ष-आधारित खुफिया क्षमताओं में बड़ा उन्नयन करने की तैयारी कर रहा है। हालिया सैन्य गतिरोध के दौरान सामने आई कमियों और ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक के बाद, सरकार 50 से अधिक नए जासूसी (निगरानी) उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रही है। इन उपग्रहों में रात और हर मौसम में इमेजिंग की क्षमता होगी, जिससे निगरानी, युद्धक्षेत्र की स्थिति समझने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
क्यों खबर में?
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के साथ चार दिन के संघर्ष के दौरान मौजूदा अंतरिक्ष संपत्तियों की सीमाएँ उजागर होने के बाद, भारत ने 50 से अधिक उन्नत निगरानी उपग्रहों की तैनाती की योजना बनाई है, ताकि सैटेलाइट-आधारित खुफिया प्रणालियों में त्वरित सुधार किया जा सके।
उन्नत उपग्रह तकनीक की ओर बदलाव
- भारत की नई योजना का केंद्र तकनीकी उन्नयन है।
- पारंपरिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग से आगे बढ़कर सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) उपग्रहों पर जोर।
- SAR तकनीक रात में और बादलों/खराब मौसम में भी उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम।
- इससे सीमाओं की निरंतर निगरानी, गतिविधियों की ट्रैकिंग और रीयल-टाइम खुफिया जानकारी संभव होगी।
आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसी क्षमताएँ अब अनिवार्य मानी जा रही हैं।
स्पेस-बेस्ड सर्विलांस (SBS) फेज़-3 कार्यक्रम
- उपग्रह विस्तार SBS कार्यक्रम के फेज़-3 के तहत होगा, जिसे पिछले वर्ष अक्टूबर में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने मंज़ूरी दी थी।
- 50+ उपग्रहों का प्रक्षेपण; कुछ ISRO द्वारा और कुछ तीन निजी भारतीय कंपनियों द्वारा—यह पब्लिक–प्राइवेट साझेदारी को दर्शाता है।
- कुल मिलाकर 150 तक उपग्रहों की तैनाती की अनुमानित लागत ₹260 अरब है, जो पहल के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।
सैटेलाइट संचार और गति में सुधार
- सैटेलाइट-टू-सैटेलाइट डेटा ट्रांसफर प्रणालियों पर काम, ताकि ग्राउंड स्टेशनों पर निर्भरता घटे।
- संघर्ष की स्थिति में मिनटों की देरी भी निर्णायक हो सकती है; तेज़ डेटा प्रवाह से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय संभव होगा।
विदेशी ग्राउंड स्टेशन और अंतरिक्ष सुरक्षा
- मिडिल ईस्ट, दक्षिण-पूर्व एशिया और स्कैंडिनेविया जैसे क्षेत्रों में ओवरसीज़ ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने पर विचार, ताकि डेटा रिले की गति और वैश्विक कवरेज बढ़े।
- कक्षा में भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा के लिए “बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स” का विकास—जो खतरों का पता लगाकर प्रतिकार कर सकें।
- ये कदम अंतरिक्ष सुरक्षा और बाह्य अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को दर्शाते हैं।


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