ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए “मिलियन डिजाइनर्स, बिलियन ड्रीम्स” पहल का शुभारंभ

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दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ने 6 अगस्त को “मिलियन डिज़ाइनर्स, बिलियन ड्रीम्स” पहल की शुरुआत की घोषणा की। इस अभिनव कार्यक्रम का उद्देश्य जटिल सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए सिस्टम डिज़ाइन की जानकारी के साथ भारत भर के व्यक्तियों को सशक्त बनाना है। डीएवाई-एनआरएलएम के सहयोग से LEAP द्वारा संचालित LEAP एक उत्प्रेरक संगठन है जो हार्वर्ड टी.एच. में डिज़ाइन प्रयोगशाला द्वारा भारत में विकसित बहु-विषयक कार्य से उभरा है।

मीटिंग में उपस्थित लोग

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण आजीविका (आरएल) के अतिरिक्त सचिव श्री चरणजीत सिंह ने की और इसमें ग्रामीण आजीविका की संयुक्त सचिव सुश्री स्मृति शरण और डीएवाई-एनआरएलएम के उप निदेशक श्री रमन वाधवा के साथ-साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय के एनएमएमयू विशेषज्ञ भी शामिल हुए। LEAP की ओर से, LEAP के सीईओ और जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय में डिज़ाइन नॉलेज के एसोसिएट फैकल्टी, पीएचडी श्री आंद्रे नोगीरा ने कार्यक्रम के विज़न और संरचना पर एक प्रस्तुति दी। टीआरआईएफ के प्रबंध निदेशक श्री अनीश कुमार और LEAP और टीआरआईएफ के अन्य प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

“मिलियन डिज़ाइनर, बिलियन ड्रीम्स” क्या है?

“मिलियन डिज़ाइनर्स, बिलियन ड्रीम्स” एक अनूठी पहल है जिसे सिस्टम डिज़ाइन के ज्ञान के माध्यम से व्यक्तियों की क्षमता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ग्रामीण नेताओं, अग्रणी परिवर्तन एजेंटों और ग्रामीण उद्यमियों को लक्षित करता है, उन्हें प्रभावशाली, स्केलेबल समाधान बनाने के कौशल से लैस करता है।

इस कार्यक्रम के उद्देश्य

कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य प्रणाली परिवर्तन को गति देने के लिए डिजाइन ढांचे में प्रतिभागियों की दक्षता को बढ़ाना, जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए विविध हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, तथा रचनात्मकता और स्वामित्व के माध्यम से बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए आत्मविश्वास और एजेंसी को बढ़ावा देना है।

परिणाम क्या हैं?

अपेक्षित परिणामों में सिस्टम डिजाइन की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि, विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना; जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले समाधानों का विकास; पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने वाले टिकाऊ तरीकों को अपनाना; और डिजाइन और नवाचार में भारत को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना शामिल है।

“मिलियन डिज़ाइनर, बिलियन ड्रीम्स” के उद्देश्य क्या हैं?

“मिलियन डिज़ाइनर्स, बिलियन ड्रीम्स” का उद्देश्य सामाजिक चुनौतियों से निपटने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाना है, तथा ग्रामीण नेताओं की नई पीढ़ी को सशक्त बनाना है ताकि वे पूरे भारत में हमारे समुदायों और उससे परे सतत विकास को आगे बढ़ा सकें।

 

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केंद्र सरकार ने बांग्लादेश सीमा की स्थिति पर नजर रखने के लिए समिति गठित की

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केंद्र सरकार ने बांग्लादेश में बवाल के बीच बॉर्डर पर नजर रखने के लिए एक समिति बनाई है। गृह मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी। इस समिति का नेतृत्व सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एडीजी, पूर्वी कमान करेंगे। यह समिति भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की निगरानी करेगी और संकट के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। समिति में छह सदस्य होंगे। बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन और तख्तापलट के बाद भारत ने सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है। खास तौर पर अवैध रूप से घुसपैठ नहीं हो इसके लिए बीएसएफ जवान अलर्ट हैं।

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया है। समिति बांग्लादेश में अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बातचीत का एक चैनल बनाए रखेगी। जिससे भारतीय नागरिकों और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मंत्रालय के अनुसार, समिति में IG, BSF फ्रंटियर मुख्यालय दक्षिण बंगाल, IG, BSF फ्रंटियर मुख्यालय त्रिपुरा, सदस्य (योजना और विकास), भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण और LPAI सचिव इसके सदस्य होंगे।

पृष्ठभूमि

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और उसके बाद छात्रों द्वारा किए गए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश में अशांति बढ़ गई है। अवामी लीग समर्थकों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हाल ही में हुए हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है, जिसके कारण भारत को सीमा पर एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं। वहीं बीते दिन गुरूवार को बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का गठन हो गया है। इस सरकार के प्रमुख नोबल पुरूस्कार विजेता मोहम्मद युनूस को बनाया गया है।

Paris Olympics 2024: समापन समारोह में मनु भाकर के साथ पीआर श्रीजेश होंगे ध्वजवाहक

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पेरिस ओलंपिक के समापन समारोह में मनु भाकर के साथ भारतीय हॉकी टीम के दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश भारत के ध्वजवाहक होंगे। भारतीय ओलंपिक संघ ने इसकी घोषणा की। आईओए ने अपने बयान में कहा कि पेरिस 2024 ओलंपिक खेलों के समापन समारोह में पिस्टल निशानेबाज मनु भाकर के साथ संयुक्त ध्वजवाहक के रूप में हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश को नियुक्त करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ को खुशी हो रही है।

आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने कहा कि श्रीजेश आईओए नेतृत्व के भीतर एक भावनात्मक और लोकप्रिय पसंद थे। मौजूदा खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कांस्य जीतने के बाद श्रीजेश ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया। हॉकी इंडिया ने दिग्गज खिलाड़ी को जूनियर पुरुष हॉकी टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। वह अब युवा टीम को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

भारत ने स्पेन को हराकर कांस्य पदक जीता

भारत ने स्पेन को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता और इसके साथ ही श्रीजेश ने हॉकी को अलविदा कह दिया। श्रीजेश लंबे समय से भारतीय हॉकी टीम के अहम सदस्य रहे हैं। श्रीजेश ने पेरिस ओलंपिक में भी शानदार प्रदर्शन किया और विरोधी टीम के सामने दीवार बनकर खड़े रहे। स्पेन के खिलाफ कांस्य पदक मुकाबले में भी श्रीजेश ने अंतिम क्वार्टर में शानदार बचाव किए थे और उन्हें बढ़त लेने से रोका था। इस तरह टीम ने श्रीजेश को जीत के साथ विदाई दी।

भाकर की ऐतिहासिक उपलब्धि

मनु भाकर, जिन्होंने खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल महिला स्पर्धा और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा दोनों में कांस्य पदक जीता, वे भी ध्वज लेकर चलेंगी। महिला ध्वजवाहक के रूप में उनका चयन उनके उल्लेखनीय प्रदर्शन का प्रमाण है, जिससे वे एक ही ओलंपिक खेलों में कई पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं।

नीरज चोपड़ा का समर्थन

पेरिस खेलों में रजत पदक जीतने वाले भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने भी श्रीजेश के चयन का समर्थन किया। श्रीजेश के लिए चोपड़ा का समर्थन भारतीय खेल समुदाय में श्रीजेश के योगदान के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है।

 

World Lion Day 2024: जानें इतिहास और महत्व

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विश्व शेर दिवस (World Lion Day) हर साल 10 अगस्त को शेरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन शेर के संरक्षण के लिए समर्थन जुटाने का भी प्रयास करता है। यह दिन शेर के संरक्षण के लिए समर्थन जुटाने का भी प्रयास करता है।

भारत समेत दुनिया भर में हर साल 10 अगस्त को विश्व शेर दिवस मनाया जाता है। इस खास दिन को मनाने का उद्देश्य शेरों की घटती आबादी और संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। ये शीर्ष शिकारी शाकाहारी आबादी को नियमित करके समग्र पारिस्थितिक संतुलन में योगदान करते हैं।

विश्व शेर दिवस मनाना क्यों महत्वपूर्ण है?

विश्व शेर दिवस शेरों के संरक्षण के बारे में बताना और उसके लिए जरूरी कदम उठाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है। जागरूकता की कमी की वजह से शेरों की संख्या कम होती जा रही है। इसलिए इसके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को पारिस्थितिक तंत्र में शेरों के महत्व और उनके सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी शिक्षित करना है।

विश्व शेर दिवस का इतिहास

साल 2013 में विश्व शेर दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी, ताकि शेर की दुर्दशा और उनके विषय में विश्व स्तर पर बात की जा सके एवं लोगों को इनके लिए जागरूकता फैलाए जा सके। जो लोग जंगली शेर के आस-पास रहते हैं उन्हें उनके विषय में शिक्षित किया जा सके और उनकी विलुप्त हो रही प्रजातियों को सुरक्षित और संरक्षित किया जा सके। हर साल 2013 से लेकर अब तक 10 अगस्त को विश्व शेर दिवस मनाया जाता है।

ओडिशा में देश का पहला राइस एटीएम लॉन्‍च

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ओडिशा ने भारत की पहली चौबीसों घंटे अनाज देने वाली मशीन शुरू की है, जिसे अन्नपुर्ति ग्रेन एटीएम के नाम से जाना जाता है, जिसे राशन कार्डधारकों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ओडिशा सरकार ने इस योजना को लॉन्च कर दिया है। इसे ‘राइस एटीएम’ नाम दिया गया है। भुवनेश्वर में खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने देश के पहले राइस एटीएम का उद्घाटन किया है।

मंचेश्वर क्षेत्र के एक गोदाम में राइस एटीएम लॉन्च किया गया है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को व्यवस्थित करने के लिए डिजाइन किया गया है। सरकार का मानना है कि राइस एटीएम से चावल वितरण की व्यवस्था में पारदर्शित आएगी और लोगों को दर-दर की ठोकरें भी नहीं खानी होगी। सरकार ने राइस एटीएम का लाभ उठाने के लिए एक प्रक्रिया भी तय की है।

कैसे मिलेगा एटीएम से राइस?

राइस एटीएम बायोमेट्रिक है। ऐसे में कार्ड धारकों को चावल लेने के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उसके बाद टच स्क्रीन डिस्प्ले पर अपना राशन कार्ड नंबर दर्ज करना होगा। अंत में एटीएम 25 किलोग्राम तक चावल प्राप्त करने की अनुमति देता है। नए सिस्टम की वजह से सब्सिडी वाले चावल की चोरी और कालाबाजारी से संबंधित मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है।

राइस एटीएम की शुरूआत भुवनेश्वर से

फिलहाल राइस एटीएम की शुरूआत भुवनेश्वर से हुई है। अभी राइस एटीएम पायलट आधार पर लॉन्च किया गया है। आगे चलकर इसे राज्य के सभी 30 जनपदों में खोलने की योजना है। वहीं, सफल होने पर, यह मॉडल अन्य राज्यों में भी वन नेशन वन राशन कार्ड योजना में शामिल किया जा सकता है।

चेक ट्रंकेशन सिस्टम की प्रक्रिया में होगा बदलाव: RBI

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भारतीय रिजर्व बैंक ने चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) में सुधार किया है, जो वर्तमान में दो कार्य दिवसों तक के समाशोधन चक्र के साथ चेकों का प्रसंस्करण करता है, ताकि ग्राहक अनुभव को बढ़ाने के अलावा चेक समाशोधन की दक्षता में सुधार हो और प्रतिभागियों के लिए निपटान जोखिम कम हो। भारतीय रिजर्व बैंक ने चेक क्लियरिंग में लगने वाले समय को कुछ घंटे करने और उससे जुड़े जोखिम को कम करने के उद्देश्य से कदम उठाने का फैसला किया है।

चेक क्लियर होने में लगता है अभी 2 दिन का समय

वर्तमान में चेक जमा करने से लेकर चेक क्लियर होकर पैसे आने में कम से कम दो दिन का समय लग जाता है। लेकिन नए सिस्टम में चेक जमा करने के कुछ ही घंटों में ये क्लियर हो जाएगा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा की घोषणा करते हुए इसका ऐलान किया।

चेक ट्रंकेशन सिस्टम में बदलाव का प्रस्ताव

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि चेक क्लियरिंग को दुरुस्त करने, निपटान जोखिम कम करने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के मकसद से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) के मौजूदा सिस्टम में बदलाव का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि नए सिस्टम में मौजूदा सीटीएस व्यवस्था के तहत ‘बैच’ में प्रोसेसिंग की जगह कारोबारी समय (Working Hours) में निरंतर आधार पर क्लियरेंस की व्यवस्था की जाएगी।

चेक नए सिस्टम में स्कैन किया जाएगा

आरबीआई के मुताबिक, ”नई व्यवस्था में चेक को ‘स्कैन’ किया जाएगा, उसे प्रस्तुत किया जाएगा और कुछ घंटों में क्लियर किया जाएगा। इससे चेक का क्लियरेंस कुछ घंटे में हो जाएगा जबकि अभी दो दिन तक का समय (T+1) लगता है। शक्तिकांत दास ने कहा कि जल्द ही इस मामले में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

रेपो रेट लगातार 9वीं बार स्थिर

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अब यूपीआई के जरिए टैक्स पेमेंट की लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने रेपो रेट को लगातार 9वीं बार 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखने का ऐलान किया।

केंद्र सरकार ने आठ नई रेलवे परियोजनाओं को दी मंजूरी

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केंद्र सरकार ने आठ नई रेल लाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनसे रेल यात्रा में सहजता, माल ढुलाई की लागत में कमी के साथ-साथ राज्यों के बीच संपर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा बिहार, झारखंड, ओडिशा, बंगाल और महाराष्ट्र समेत पूर्वोत्तर के राज्यों को मिलेगा।

केंद्रीय कैबिनेट की हुई बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सूचना- प्रसारण एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रस्तावित परियोजनाएं हाल में ही पारित बजट की नई परिकल्पना पूर्वोदय के अनुकूल है, जिसमें पूर्वोत्तर के राज्यों के विकास की विशेष चिंता की गई है। इससे आर्थिक विकास के साथ रोजगार में भी वृद्धि होगी।

पीएम-गतिशक्ति प्लान के तहत

पीएम-गतिशक्ति प्लान के तहत सभी परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा कर लिया जाएगा। इनपर कुल 24 हजार 657 करोड़ की लागत आएगी।कैबिनेट ने भागलपुर के पास गंगा पर 26 किमी लंबी बिक्रमशिला-कटारिया न्यू डबल लाइन के साथ ब्रिज को मंजूर कर दिया है। इसपर 2,549 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वर्षों से इसकी मांग चली आ रही थी। इससे नेपाल से बिहार होते हुए झारखंड तक जाना आसान हो जाएगा।

इन आठ परियोजनाओं में शामिल रेलवे नेटवर्क

  1. गुनुपुर-थेरुबली (नई लाइन) 73.62 किमी रायगड़ा, ओडिशा,
  2. जूनागढ़-नबरंगपुर 116.21 किमी कालाहांडी और नबरंगपुर ओडिशा
  3. बादामपहाड़ कंदुझारगढ़ 82.06 किमी क्योंझर और मयूरभंज ओडिशा
  4. बंग्रिपोसी गोरुमहिसानी 85.60 किमी मयूरभंज ओडिशा
  5. मलकानगिरी पांडुरंगपुरम (भद्राचलम से होते हुए) 173.61 किमीमलकानगिरि, पूर्वी गोदावरी और भद्राद्री कोठागुडेम ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
  6. बुरामारा चाकुलिया 59.96 किमी पूर्वी सिंहभूम, झाड़ग्राम और मयूरबनंज (झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा)
  7. बिक्रमशिला कटारेह 26.23 किमी भागलपुर बिहार
  8. जालना – जलगांव 174 किमी औरंगाबाद महाराष्ट्र इसमें यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, अजंता गुफाओं को भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ना शामिल है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

बंदरगाह तक सामान की ढुलाई आसान

पूर्वोदय के अन्य राज्यों के संपर्क में वृद्धि होगी और बंदरगाह तक सामान की ढुलाई आसान होगी। इन रेल मार्गों से कृषि उत्पाद, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट, बाक्साइट, ग्रेनाइट, चूना पत्थर, एल्यूमीनियम पाउडर एवं गिट्टी आदि का परिवहन आसान हो जाएगा। कार्बन उत्सर्जन कम हो जाएगा, जिससे पर्यावरण को भी संतुलित करने में मदद मिलेगी। सामान ढुलाई की मात्रा भी बढ़ जाएगी।

14 जिलों की रेल संपर्कता बढ़ेगी

नई रेल लाइनों के निर्माण से पूर्वोदय की अवधारणा में शामिल सात राज्यों के 14 जिलों की रेल संपर्कता बढ़ेगी। साथ ही रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में 900 किलोमीटर की वृद्धि होगी। रेल लाइनों पर 64 नए स्टेशन बनाए जाएंगे, जो पूर्वी सिंहभूम, कालाहांडी, मलकानगिरी, नबरंगपुर, रायगढ़ को कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। इससे 510 गांव की लगभग 40 लाख आबादी के बीच विकास का असर देखा जा सकेगा। महाराष्ट्र की रेल लाइन से यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल अजंता की गुफाएं भी रेल नेटवर्क से जुड़ेंगी, जिससे बड़ी संख्या में पर्यटकों को सुविधा मिलेगी।

वैधानिक शक्ति देने के लिए विधेयक

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड को वैधानिक शक्तियां प्रदान करने के लिए शुक्रवार को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया। रेलवे (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य रेलवे बोर्ड के कामकाज और स्वतंत्रता को बढ़ाना है। वैष्णव ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम, 1905 के सभी प्रविधानों को रेलवे अधिनियम, 1989 में शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे दो कानूनों का संदर्भ लेने की आवश्यकता कम हो जाएगी।

परियोजना से रोजगार पैदा

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि आठ नई रेलवे लाइन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से कनेक्टिविटी से संबंधित बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा। यह वाणिज्य और कनेक्टिविटी के लिए बहुत अच्छी खबर है और इससे रोजगार सृजन भी बढ़ेगा। प्रधानमंत्री जी-वन योजना में संशोधन से आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारे प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा सुरक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा।

 

 

 

 

 

 

Paris Olympics 2024: पहलवान अमन सहरावत ने जीता कांस्य पदक

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भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। 21 वर्षीय अमन ने कांस्य के लिए खेले गए मुकाबले में पुअर्तो रिको के डारियान टोई क्रूज को 13-5 के अंतर से हराया। इससे पहले, छत्रसाल अखाड़े के प्रतिभाशाली पहलवान अमन ने गुरुवार को प्री क्वार्टर फाइनल और क्वार्टर फाइनल में दमदार प्रदर्शन किया था, लेकिन पुरुषों के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के सेमीफाइल में जापान के शीर्ष वरीय रेई हिगुची से एकतरफा अंदाज में हार गए थे।

अमन भले ही पदक पक्का करने से चूक गए थे, लेकिन उन्होंने कांस्य पदक मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया और देश को पेरिस खेलों में छठा पदक दिला दिया। भारत ने पेरिस ओलंपिक में अब तक पांच कांस्य और एक रजत सहित कुल छह पदक जीते हैं।

पहले राउंड में ही अमन

पहले राउंड में ही अमन 6-3 से आगे चल रहे थे। दूसरे राउंड अमन ने इस बढ़त को और आगे बढ़ाया और क्रूज को कोई मौका नहीं दिया। इस तरह अमन सहरावत ने जीत हासिल की।

भारत के एकमात्र पुरुष पहलवान

अमन पेरिस ओलंपिक में भारत के एकमात्र पुरुष पहलवान थे। हालांकि, उन्होंने कुश्ती में पदकों के सिलसिले को बरकरार रखा। भारत 2008 बीजिंग ओलंपिक के बाद से हर ओलंपिक में कुश्ती में पदक जीत रहा है। 2008 में सुशील कुमार ने कांस्य, 2012 में सुशील ने रजत और योगेश्वर दत्त ने कांस्य, 2016 में साक्षी मलिक ने कांस्य, 2020 टोक्यो ओलंपिक में रवि दहिया ने रजत और बजरंग पूनिया ने कांस्य पदक जीता था। अमन का यह पहला ओलंपिक था और उन्होंने अपने पहले ही ओलंपिक में कांस्य पदक जीत लिया है।

अमन सहरावत के बारे में

अमन का जन्म 2003 में हुआ था और जब वो 11 साल के थे उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया। उनके दादा ने उनका पालन पोषण किया और इस हादसे से उबरने में उनकी मदद की। अमन ने कुश्ती के प्रति अपने जुनून को जारी रखा और कोच ललित कुमार के अंडर ट्रेनिंग लेना शुरू किया। अमन 2021 में अपना पहला राष्ट्रीय चैम्पियनशिप खिताब जीतकर लाइमलाइट में आए। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2022 के एशियन गेम्स में 57 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता। फिर साल 2023 एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया। जनवरी 2024 में उन्होंने जागरेब ओपन कुश्ती टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।

बोइंग ने नए सीईओ की नियुक्ति की

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बोइंग कंपनी ने 8 अगस्त से प्रभावी एयरोस्पेस उद्योग के दिग्गज केली ऑर्टबर्ग को अपने नए अध्यक्ष और सीईओ के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की है। बोइंग ने रॉबर्ट “केली” ऑर्टबर्ग को अपना नया सीईओ घोषित किया है, जो 8 अगस्त से प्रभावी होगा और डेविड कैलहॉन की जगह लेगा। रॉकवेल कॉलिन्स के पूर्व कार्यकारी, जो अब रेथियॉन टेक्नोलॉजीज (NYSE:RTX) का हिस्सा हैं, बढ़ते वित्तीय नुकसान और चल रहे गुणवत्ता के मुद्दों के बीच कंपनी का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

नकदी जलने का सामना

ऑर्टबर्ग बोइंग के लिए एक चुनौतीपूर्ण अवधि के दौरान शीर्ष पर पहुंच जाता है, कंपनी को नकदी जलने का सामना करना पड़ रहा है, जो पहले से प्रत्याशित से बड़ा होने की उम्मीद है, खासकर 2024 की तीसरी तिमाही के दौरान। यह तब आता है जब बोइंग ने दूसरी तिमाही में 1.4 बिलियन डॉलर का नुकसान दर्ज किया, जो उसके रक्षा और अंतरिक्ष व्यवसाय से काफी प्रभावित हुआ।

लक्ष्य

नए सीईओ के तात्कालिक कार्यों में बोइंग के 737 जेट विमानों का उत्पादन बढ़ाना शामिल है, जो वर्तमान में लगभग 25 प्रति माह की दर से उत्पादित किए जा रहे हैं, जिसका लक्ष्य वर्ष के अंत तक 38 तक पहुंचने का लक्ष्य है।

कार्यकारी फेरबदल

इस घटना ने एक कार्यकारी फेरबदल को प्रेरित किया, जिसके कारण वर्ष के अंत तक सीईओ डेव कैलहौन का पद छोड़ दिया गया और घोषणा की गई कि बोर्ड के अध्यक्ष लैरी केलनर फिर से चुनाव नहीं लड़ेंगे। कैलहौन, जो मार्च 2025 तक बोर्ड के विशेष सलाहकार के रूप में काम करेंगे, ने ऑर्टबर्ग के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त करते हुए सुझाव दिया कि वह वर्तमान टीम में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं करेंगे।

30 से अधिक वर्षों का अनुभव

64 वर्षीय ऑर्टबर्ग के पास एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है, जिसमें रॉकवेल कॉलिन्स का नेतृत्व करने वाला एक सफल कार्यकाल और यूनाइटेड टेक्नोलॉजीज के साथ इसका एकीकरण शामिल है। उनके अनुभव का परीक्षण तब किया जाएगा जब बोइंग इस साल की शुरुआत में फ्यूजलेज निर्माता को वापस खरीदने के लिए एक सौदे पर पहुंचने के बाद स्पिरिट एयरोसिस्टम्स (NYSE:SPR) को एकीकृत करने के लिए काम करता है।

नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी त्सुंग-दाओ ली का निधन

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चीनी-अमेरिकी भौतिक विज्ञानी त्सुंग-दाओ ली, जो 1957 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक बने, का 4 अगस्त को 97 वर्ष की आयु में सैन फ्रांसिस्को में उनके घर पर निधन हो गया। प्रो. ली, जिनके कार्य ने कण भौतिकी की समझ को आगे बढ़ाया, इस क्षेत्र के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थे।

प्रो त्संग-दाओ ली कौन थे?

स्थानीय समाचार पत्र वेनहुई डेली के अनुसार, प्रो. ली का जन्म 24 नवंबर, 1926 को शंघाई में हुआ था। वे व्यापारी पिता त्सिंग-कोंग ली और मां मिंग-चांग चांग की छह संतानों में तीसरे थे, जो एक कट्टर कैथोलिक थीं। उन्होंने शंघाई में हाई स्कूल की पढ़ाई की और गुइझोउ प्रांत में नेशनल चेकियांग यूनिवर्सिटी और युन्नान प्रांत में कुनमिंग में नेशनल साउथवेस्ट एसोसिएटेड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। अपने द्वितीय वर्ष के बाद, उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका में स्नातक विद्यालय में भाग लेने के लिए चीनी सरकार से छात्रवृत्ति मिली।

1946 से 1950 के बीच उन्होंने भौतिकी में नोबेल पुरस्कार विजेता एनरिको फर्मी के अधीन शिकागो विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। 1950 के दशक की शुरुआत में, प्रोफ़ेसर ली ने विस्कॉन्सिन में यर्केस वेधशाला, बर्कले में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और प्रिंसटन, एन.जे. में उन्नत अध्ययन संस्थान में काम किया। प्राथमिक कणों, सांख्यिकीय यांत्रिकी, खगोल भौतिकी और क्षेत्र सिद्धांत आदि में उनका शोध उल्लेखनीय था।

अमेरिका की नागरिकता

1962 से अमेरिका के नागरिक रहे प्रोफ़ेसर ली न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय में एमेरिटस प्रोफ़ेसर भी थे। परमाणु बम के जनक के रूप में जाने जाने वाले रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने एक बार प्रोफ़ेसर ली की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वे उस समय के सबसे प्रतिभाशाली सैद्धांतिक भौतिकविदों में से एक थे, जिनके काम में “असाधारण ताज़गी, बहुमुखी प्रतिभा और शैली” दिखती थी।

एक सहायक प्रोफेसर के रूप में

1953 में, वे कोलंबिया विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए। तीन साल बाद, 29 साल की उम्र में, वे वहां सबसे कम उम्र के पूर्ण प्रोफेसर बन गए। उन्होंने विभिन्न क्वांटम घटनाओं के अध्ययन के लिए एक मॉडल विकसित किया जिसे “ली मॉडल” के रूप में जाना जाता है।

उनकी उपलब्धि और पुरस्कार

1957 में, प्रो. ली को चेन-निंग यांग के साथ भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, क्योंकि उन्होंने उप-परमाणु कणों की समरूपता की खोज की थी, क्योंकि वे परमाणुओं को एक साथ रखने वाले बल के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। 31 साल की उम्र में, प्रो. ली यह सम्मान पाने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक थे। उन्होंने विज्ञान में अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार, गैलीलियो गैलीली पदक और जी. ब्यूड पदक सहित कई अन्य पुरस्कार जीते, साथ ही दुनिया भर के संगठनों से मानद डॉक्टरेट और उपाधियाँ भी प्राप्त कीं।

 

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