केंद्र सरकार ने सिडबी को 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। 21 जनवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) में ₹5,000 करोड़ के इक्विटी निवेश (Equity Infusion) को मंजूरी दी। इस कदम का उद्देश्य SIDBI की पूंजी आधार को सुदृढ़ करना, एमएसएमई को ऋण उपलब्धता बढ़ाना, सस्ती वित्तीय पहुँच सुनिश्चित करना और देशभर में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है।

क्यों चर्चा में?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने SIDBI में ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य एमएसएमई ऋण प्रवाह को बढ़ाना और बढ़ती ऋण मांग के बीच SIDBI की पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) बनाए रखना है।

SIDBI पर कैबिनेट का निर्णय

  • SIDBI की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए इक्विटी समर्थन को मंजूरी।
  • SIDBI भारत में एमएसएमई क्षेत्र की प्रमुख वित्तीय संस्था है, जो बैंकों, NBFCs और MFIs को पुनर्वित्त (Refinancing) उपलब्ध कराती है।
  • इस निवेश से SIDBI एमएसएमई को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में प्रतिस्पर्धी दरों पर ऋण दे सकेगा।
  • स्टार्टअप, डिजिटल लेंडिंग और समावेशी विकास पर बढ़ते फोकस के बीच यह कदम SIDBI को आने वाले वर्षों में मजबूत बनाए रखेगा।

₹5,000 करोड़ इक्विटी निवेश की संरचना

  • यह निवेश वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
  • FY26 में ₹3,000 करोड़ का निवेश ₹568.65 प्रति शेयर के बुक वैल्यू पर।
  • शेष ₹2,000 करोड़ FY27 और FY28 में ₹1,000 करोड़ की दो समान किस्तों में।
  • यह चरणबद्ध रणनीति वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए SIDBI की पूंजी को क्रमिक रूप से मजबूत करेगी।

एमएसएमई ऋण और पहुँच पर प्रभाव

  • FY25 में 76.26 लाख एमएसएमई से बढ़कर FY28 तक लगभग 1.02 करोड़ एमएसएमई को वित्तीय सहायता मिलने की संभावना।
  • इससे लगभग 25.74 लाख अतिरिक्त एमएसएमई को औपचारिक ऋण प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
  • इससे छोटे व्यवसायों को विस्तार, तकनीक अपनाने और कार्यशील पूंजी में मदद मिलेगी तथा अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता घटेगी।

रोजगार सृजन से जुड़ा प्रभाव

  • सितंबर 2025 तक लगभग 6.90 करोड़ एमएसएमई, 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे थे।
  • अनुमान है कि SIDBI के बढ़े हुए ऋण समर्थन से FY28 तक लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
  • इस प्रकार यह निर्णय केवल वित्तीय नहीं, बल्कि रोजगार और समावेशी विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है।

SIDBI को अधिक पूंजी की आवश्यकता क्यों?

  • अगले पाँच वर्षों में SIDBI की जोखिम-भारित परिसंपत्तियाँ (Risk-Weighted Assets) तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
  • कारण: निर्देशित ऋण में वृद्धि, डिजिटल व बिना गारंटी ऋण उत्पादों का विस्तार, और स्टार्टअप्स को वेंचर डेट।
  • पर्याप्त पूंजी SIDBI की वित्तीय स्थिरता और क्रेडिट रेटिंग बनाए रखने में मदद करेगी, जिससे वह बाज़ार से कम ब्याज दरों पर धन जुटा सकेगा।

स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI)

विषय विवरण
SIDBI का परिचय भारत में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र के संवर्धन, वित्तपोषण और विकास के लिए प्रमुख वित्तीय संस्था
मुख्य फोकस Micro, Small और Medium Enterprises (MSMEs)
स्थापना 2 अप्रैल 1990
कानूनी स्थिति भारतीय संसद के अधिनियम के तहत स्थापित
प्रारंभिक संरचना प्रारंभ में IDBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी
वर्तमान स्वामित्व भारत सरकार तथा 22 अन्य केंद्र सरकार नियंत्रित संस्थान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) और बीमा कंपनियाँ
प्रशासनिक नियंत्रण वित्त मंत्रालय, भारत सरकार
मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मुख्य उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र का संवर्धन, वित्तपोषण और विकास
प्रमुख कार्य एमएसएमई वित्तपोषण से जुड़े संस्थानों की गतिविधियों का समन्वय
एमएसएमई को समर्थन • वृद्धि और विस्तार
• विपणन (Marketing)
• प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावसायीकरण
• नवाचार और उद्यमिता

Republic Day 2026: 77वां या 78वां? जानिए गणतंत्र दिवस की गिनती

हर साल 26 जनवरी को भारत गर्व और खुशी के साथ गणतंत्र दिवस मनाता है। यह वह दिन है जब 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था, जिससे भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना। 2026 में, बहुत से लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि यह 77वां गणतंत्र दिवस है या 78वां।

क्या यह 77वां या 78वां गणतंत्र दिवस है?

गणतंत्र दिवस की गिनती कैसे होती है?

भारत 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बना, जब भारतीय संविधान लागू हुआ। उसी दिन को पहला गणतंत्र दिवस माना जाता है। इसके बाद हर वर्ष गिनती एक बढ़ती है।

गिनती का क्रम

  • 1950 – पहला गणतंत्र दिवस
  • 2000 – 51वाँ गणतंत्र दिवस
  • 2025 – 76वाँ गणतंत्र दिवस
  • 2026 – 77वाँ गणतंत्र दिवस

कुछ लोग इसे 78वाँ मान लेते हैं क्योंकि वे 1947 (स्वतंत्रता वर्ष) से गिनती शुरू कर देते हैं, जो गलत है।

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में अंतर

  • स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है, इसी दिन 1947 में भारत ब्रिटिश शासन से आज़ाद हुआ था।
  • गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है, इसी दिन 1950 में भारत ने अपने संविधान के तहत खुद पर शासन करना शुरू किया था।

भारत कब गणतंत्र बना?

भारत 26 जनवरी 1950 को एक गणतंत्र बना। इस दिन, संविधान ने पुराने ब्रिटिश कानून, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1935 की जगह ले ली। तब से, भारत ने भारतीयों द्वारा बनाए गए अपने नियमों के अनुसार देश चलाना शुरू किया।

26 जनवरी ही क्यों चुनी गई?

इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना को सम्मान देने के लिए 26 जनवरी की तारीख चुनी गई थी। 26 जनवरी 1930 को, भारतीय नेताओं ने पूर्ण स्वराज यानी ब्रिटिश शासन से पूरी आज़ादी की घोषणा की थी। इस तारीख को चुनकर, भारत ने अपने स्वतंत्रता संग्राम को अपने नए संविधान से जोड़ा।

गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाता है?

गणतंत्र दिवस नई दिल्ली में एक शानदार परेड के साथ मनाया जाता है। इसमें दिखाया जाता है:

  • भारत की रक्षा शक्ति
  • राज्यों की सांस्कृतिक विविधता
  • विज्ञान और टेक्नोलॉजी में उपलब्धियां

इस दिन, भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, जो गणतंत्र के प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका को दर्शाता है।

भारतीय संविधान किसने लिखा?

भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे और उन्होंने संविधान के मसौदे को अंतिम रूप देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। संविधान के निर्माण में लगभग तीन वर्ष लगे और यह अपने व्यापक प्रावधानों के कारण विश्व के सबसे लंबे लिखित संविधानों में से एक माना जाता है।

गणतंत्र दिवस का महत्व

यह दिन हमें संविधान के मूल मूल्यों की याद दिलाता है:

  • न्याय (Justice)
  • स्वतंत्रता (Liberty)
  • समानता (Equality)
  • बंधुत्व (Fraternity)

ये मूल्य भारतीय लोकतंत्र की नींव बनाते हैं। यह हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और संविधान की शक्ति को याद करने का दिन है।

रवि शंकर छबी सेंट्रल डेपुटेशन पर CRPF में DIG नियुक्त

केंद्र सरकार ने एक अनुभवी IPS अधिकारी को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में शामिल करके एक अहम सीनियर-लेवल पुलिस नियुक्ति की है। उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी रवि शंकर छबी को CRPF में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) नियुक्त किया गया है, जिससे बढ़ी हुई आंतरिक सुरक्षा जिम्मेदारियों के समय लीडरशिप मजबूत होगी।

क्यों चर्चा में? 

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी रवि शंकर छबी को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त करने को मंज़ूरी दी है।

नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति का विवरण

  • नियुक्ति CRPF में मौजूदा रिक्त पद के विरुद्ध की गई है।
  • MHA आदेश दिनांक: 19 जनवरी 2026।
  • पदस्थापना केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के मानक सेवा नियमों के अंतर्गत।
  • उत्तर प्रदेश सरकार को अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश।
  • इस प्रकार की प्रतिनियुक्तियाँ राज्य कैडर के अनुभवी अधिकारियों को राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा में योगदान का अवसर देती हैं।

उत्तर प्रदेश में वर्तमान/पूर्व पदस्थापना

CRPF नियुक्ति से पहले:

  • DIG (पब्लिक ग्रिवेंसेज़), DGP मुख्यालय, लखनऊ
  • जून 2023 में इस पद पर नियुक्ति

प्रमुख दायित्व:

  • जनशिकायत निवारण
  • शिकायतों की निगरानी
  • पुलिस प्रणाली में जवाबदेही और सुधार
  • इस भूमिका से उन्हें नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग का व्यापक अनुभव मिला।

अधिकारी परिचय (Officer Profile)

  • नाम: रवि शंकर छबी
  • सेवा: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) – नियमित भर्ती
  • बैच: 2007
  • कैडर: उत्तर प्रदेश
  • जन्म तिथि: 1 फरवरी 1983
  • मूल निवासी: रोहतास जिला, बिहार

शैक्षणिक योग्यता

  • बी.ए. (ऑनर्स): अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास
  • एम.ए. (Master of Arts)
  • सामाजिक विज्ञान की पृष्ठभूमि ने नीतिगत विश्लेषण और प्रशासनिक नेतृत्व में सहायता की।

प्रमुख सेवाकालीन पदस्थापनाएँ

  • SP, जौनपुर – ज़िला कानून-व्यवस्था का प्रबंधन
  • Women Powerline – 1090 (लखनऊ) – महिला सुरक्षा की प्रमुख पहल का नेतृत्व
  • ACP, नोएडा कमिश्नरेट – शहरी पुलिसिंग का अनुभव
  • DIG, कारागार प्रशासन एवं सुधार – जेल प्रबंधन और सुधारात्मक पहल
  • पुलिस पर्यवेक्षक, 2024 लोकसभा चुनाव – बारामूला संसदीय क्षेत्र

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF): संक्षिप्त परिचय

  • भारत का प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF)
  • मंत्रालय: गृह मंत्रालय (MHA)
  • देश के सबसे पुराने और बड़े अर्धसैनिक बलों में से एक

इतिहास

  • 1939 में Crown Representative Police के रूप में गठन

कारण:

  • रियासतों में राजनीतिक अशांति
  • 1936 के मद्रास प्रस्ताव के बाद आंदोलन
  • 28 दिसंबर 1949 को CRPF अधिनियम के बाद नाम बदला गया।

CRPF के प्रमुख कार्य

  • भीड़ नियंत्रण एवं दंगा नियंत्रण
  • उग्रवाद/आतंकवाद विरोधी अभियान
  • वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटना
  • संवेदनशील क्षेत्रों में चुनाव सुरक्षा
  • पर्यावरण संरक्षण (स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतुओं की सुरक्षा)
  • युद्धकाल में आंतरिक सुरक्षा सहायता
  • संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भागीदारी
  • प्राकृतिक आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्य

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया गया

पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को उस समय नई मजबूती मिली, जब राजस्थान के कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) घोषित किया गया। यह अधिसूचना अरावली पर्वत श्रृंखला की नाज़ुक पारिस्थितिकी की रक्षा पर केंद्रित है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि संरक्षण के साथ-साथ आसपास रहने वाले समुदायों का कल्याण और सतत विकास भी बना रहे।

क्यों चर्चा में?

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास क्षेत्र को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करने की अधिसूचना जारी की है। इसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण करना और अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों को सहयोग देना है।

इको-सेंसिटिव ज़ोन की घोषणा

  • कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित) के चारों ओर शून्य से एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया गया है।
  • इको-सेंसिटिव ज़ोन वे क्षेत्र होते हैं, जिन्हें पर्यावरण कानूनों के तहत संरक्षित क्षेत्रों के आसपास गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अधिसूचित किया जाता है।
  • इस घोषणा से अनियंत्रित विकास, खनन और औद्योगिक विस्तार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
  • ESZ का दर्जा यह सुनिश्चित करता है कि संरक्षण प्राथमिकताओं और नियंत्रित मानवीय गतिविधियों के बीच संतुलन बना रहे, जिससे वन, जल संसाधन और वन्यजीव आवास सुरक्षित रहें।

जैव विविधता और वन्यजीव महत्व

  • कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता और विविध आवासों के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहाँ तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगल बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय और चिंकारा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।
  • यह क्षेत्र कई पक्षी प्रजातियों का भी आवास है, जिनमें पेंटेड फ्रैंकोलिन प्रमुख है, जिससे यह पक्षी संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता है।
  • आसपास के क्षेत्र को ESZ घोषित करने से प्रवास गलियारों, प्रजनन स्थलों और खाद्य शृंखलाओं की सुरक्षा होगी, जो इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।

स्थानीय और आदिवासी समुदायों के लिए लाभ

  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, ESZ अधिसूचना से अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय और आदिवासी समुदायों को सहयोग मिलेगा।
  • इसका उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं, बल्कि सतत आजीविका को भी बढ़ावा देना है।
  • जैविक खेती, कृषि-वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि समुदायों की आजीविका सुरक्षित रहे और प्रकृति का संरक्षण भी हो सके।

इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के बारे में 

विषय विवरण
इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के क्षेत्र, जो बफर/शॉक एब्जॉर्बर के रूप में कार्य करते हैं।
नीतिगत आधार राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002–2016) के अनुसार, सामान्यतः पार्क/अभयारण्य की सीमा से 10 किमी तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया जाता है।
10 किमी नियम यह एक दिशानिर्देश है; वास्तविक ESZ की सीमा क्षेत्र-विशेष की पारिस्थितिकी के अनुसार कम–ज़्यादा हो सकती है।
10 किमी से बाहर क्षेत्र यदि कोई क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो (जैसे संवेदनशील गलियारे), तो 10 किमी से बाहर भी ESZ घोषित किया जा सकता है।
ESZ का उद्देश्य नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को मानव गतिविधियों के नकारात्मक प्रभाव से बचाना।
संक्रमण क्षेत्र की भूमिका संरक्षित क्षेत्र के भीतर कड़ा संरक्षण → बाहर अपेक्षाकृत कम नियंत्रण (संतुलन बनाए रखना)।
स्थानीय लोगों पर प्रभाव स्थानीय लोगों की दैनिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधा न डालना।
मुख्य लक्ष्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास के पर्यावरण को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाना।
ESZ में निषिद्ध गतिविधियाँ व्यावसायिक खनन, आरा मिलें, लकड़ी का व्यावसायिक उपयोग, वृक्षों की कटाई (नियंत्रित मामलों को छोड़कर)।
ESZ में अनुमत गतिविधियाँ मौजूदा कृषि/बागवानी, वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, अन्य गैर-हानिकारक गतिविधियाँ।
भारत में ESZ की संख्या पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित; 600 से अधिक ESZ देशभर में घोषित।

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025: समावेशी विकास के लिए भारत का सहकारिता अभियान

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब समावेशी विकास और समुदाय-आधारित विकास को वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है। भारत ने इस अवसर का उपयोग करते हुए सुधारों, डिजिटलाइजेशन, नए संस्थानों और वित्तीय सहायता के माध्यम से अपने सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है, जिससे सहकारिता को जमीनी स्तर के आर्थिक विकास का एक प्रमुख स्तंभ बनाया गया है।

क्यों चर्चा में?

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 को “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित किया है, जिसकी थीम है — “Cooperatives Build a Better World (सहकारिताएँ एक बेहतर विश्व का निर्माण करती हैं)”। भारत ने इस वैश्विक पहल के अनुरूप सहकारी क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों और सुधारों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025: वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  • IYC 2025 का उद्देश्य 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में सहकारिताओं की भूमिका को मान्यता देना है।
  • सहकारिताएँ साझा स्वामित्व और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देती हैं।
  • ये गरीबी, असमानता और टिकाऊ आजीविका जैसी चुनौतियों का समाधान करती हैं।
  • यह वर्ष सरकारों और संस्थानों को सहकारी उद्यमों को सशक्त करने के लिए प्रेरित करता है।
  • वैश्विक स्तर पर सहकारिताओं को जन-केंद्रित आर्थिक मॉडल के रूप में देखा जाता है, जो विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व में संतुलन बनाते हैं।

भारत में सहकारी आंदोलन: पृष्ठभूमि

  • भारत की सहकारी सोच “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना से प्रेरित है और “सहकार से समृद्धि” नीति से सशक्त हुई है।
  • 1904 का कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज एक्ट इसका कानूनी आधार बना।
  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) और नाबार्ड (NABARD) जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
  • जुलाई 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन से इस क्षेत्र को विशेष ध्यान मिला।
  • दिसंबर 2025 तक भारत में 8.5 लाख से अधिक सहकारिताएँ, लगभग 32 करोड़ सदस्यों को 30 क्षेत्रों में सेवाएँ दे रही हैं और लगभग सभी ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती हैं।

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को सशक्त बनाना

  • PACS ग्रामीण सहकारिता की रीढ़ हैं और इन्हें सुधारों व डिजिटलाइजेशन से मजबूत किया गया है।
  • मॉडल उपविधियों के तहत PACS अब 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियाँ कर सकती हैं।
  • महिला एवं SC/ST प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर।
  • 79,630 PACS को राष्ट्रीय ERP प्लेटफॉर्म पर कंप्यूटरीकरण की स्वीकृति।
  • अब तक 59,261 PACS ERP सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं, 32,119 e-PACS बन चुकी हैं।
  • 34 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

बहुउद्देश्यीय और नई सहकारिताओं का विस्तार

  • गांव स्तर तक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए नई सहकारिताओं को बढ़ावा दिया गया।
  • 32,009 नई PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारिताएँ पंजीकृत।
  • PACS अब 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में कार्यरत।
  • डेयरी सहकारिताएँ 87,159 ग्राम पंचायतों में और मत्स्य सहकारिताएँ लगभग 30,000 ग्राम पंचायतों में सक्रिय।
  • ये सहकारिताएँ स्थानीय सेवा केंद्र बनकर ऋण, बाजार और सरकारी योजनाओं तक पहुँच आसान बना रही हैं।

सरकारी योजनाओं के साथ एकीकरण

  • PACS को बहु-सेवा केंद्रों में बदला जा रहा है।
  • 38,000 से अधिक PACS को पीएम किसान समृद्धि केंद्र के रूप में उन्नत किया गया।
  • कई PACS कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में भी कार्य कर रही हैं।
  • PACS स्तर पर विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना लागू।
  • पायलट चरण में 112 PACS ने 68,702 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम पूरे किए, जिससे फसलोत्तर नुकसान कम हुआ।

राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाएँ

  • तीन प्रमुख राष्ट्रीय सहकारिताएँ उत्पादन और निर्यात को मजबूती देती हैं।
  • नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने 28 देशों में 13.77 लाख मीट्रिक टन का, ₹5,556 करोड़ मूल्य का निर्यात किया।
  • नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है और इसके 28 प्रमाणित उत्पाद हैं।
  • भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड “भारत बीज” ब्रांड के तहत बीज क्षेत्र को सशक्त बना रही है।
  • इनसे किसानों और सहकारिताओं की आय व बाजार पहुँच में सुधार हुआ है।

श्वेत क्रांति 2.0 और वित्तीय समावेशन

  • श्वेत क्रांति 2.0 का लक्ष्य पाँच वर्षों में दूध खरीद में 50% वृद्धि करना है।
  • 20,000 से अधिक नई डेयरी सहकारी समितियाँ पंजीकृत।
  • कोऑपरेटिव बैंक मित्र और RuPay किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से डिजिटल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Punjab की पहली डॉग सैंक्चुअरी लुधियाना में शुरू

पंजाब ने पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लुधियाना में राज्य का पहला डॉग सैंक्चुअरी (कुत्ता आश्रय स्थल) शुरू किया है। पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य आवारा कुत्तों की समस्या का मानवीय समाधान करना और शहरी क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करना है। भविष्य में इसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना है।

क्यों चर्चा में?

पंजाब सरकार ने लुधियाना में राज्य का पहला डॉग सैंक्चुअरी उद्घाटित किया है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है और आगे चलकर इसे अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा।

लुधियाना डॉग सैंक्चुअरी: मुख्य विशेषताएँ

  • यह पंजाब का पहला संगठित केंद्र है, जो विशेष रूप से आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्थापित किया गया है।
  • सैंक्चुअरी लुधियाना में स्थित है और यहाँ आवारा कुत्तों को आश्रय व देखभाल प्रदान की जाएगी।
  • व्यवस्थित प्रबंधन के माध्यम से कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
  • यह केंद्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पशु कल्याण दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित होगा।
  • पहल में सार्वजनिक सुरक्षा और पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार—दोनों के बीच संतुलन पर जोर दिया गया है।

सरकार का उद्देश्य और दृष्टिकोण

  • इस पहल का उद्घाटन पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री संजेव अरोड़ा ने किया।
  • उद्देश्य है बिना क्रूरता के आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना।
  • शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनस्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना।
  • पायलट मॉडल के माध्यम से कार्यक्षमता का आकलन कर राज्यव्यापी विस्तार की योजना बनाना।
  • सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए पशु देखभाल और जिम्मेदार शहरी शासन—दोनों आवश्यक हैं।

सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश और कानूनी ढांचा

  • सैंक्चुअरी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संचालित होगी।
  • कुत्तों के मानवीय प्रबंधन, आश्रय और देखभाल पर विशेष जोर।
  • एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के अनुरूप नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित पुनर्वास।
  • इससे पशु करुणा और नागरिक सुरक्षा के बीच संवैधानिक संतुलन सुनिश्चित होगा।

पायलट परियोजना और राज्यव्यापी विस्तार

  • लुधियाना सैंक्चुअरी एक परीक्षण मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
  • इसके प्रदर्शन के आधार पर अन्य जिलों में इसे लागू किया जाएगा।
  • शहरी स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  • यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य राज्यों के लिए भी यह एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: दुनिया के लिए समावेशी और ज़िम्मेदार AI को आकार देना

भारत 16 से 20 फ़रवरी 2026 के बीच भारत मंडपम, नई दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी करेगा। यह पाँच दिवसीय वैश्विक सम्मेलन नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स और नागरिक समाज को एक मंच पर लाएगा। इस समिट का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को सामाजिक कल्याण, सतत विकास और आर्थिक प्रगति के लिए उपयोग करना है तथा वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय AI विमर्श में मजबूती से प्रस्तुत करना है।

क्यों चर्चा में?

भारत पहली बार वैश्विक दक्षिण में एक वैश्विक AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट का लक्ष्य वैश्विक AI चर्चाओं को डिजिटल इंडिया और IndiaAI मिशन के अनुरूप व्यावहारिक विकास परिणामों में बदलना है।

इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 क्या है?

यह एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो समाज-केंद्रित, समावेशी और नैतिक AI के उपयोग पर केंद्रित है। पाँच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में नीति संवाद, शोध चर्चा, उद्योग प्रदर्शन और जन सहभागिता शामिल होंगी। भारत इस समिट के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि AI केवल चुनिंदा तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि बड़े पैमाने पर समाज की सेवा करे।

सूत्र और चक्र 

समिट तीन सूत्रों—People (लोग), Planet (पृथ्वी) और Progress (प्रगति)—पर आधारित है, जिन्हें सात “चक्रों” के माध्यम से लागू किया जाएगा, जैसे मानव पूंजी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और विश्वसनीय AI, नवाचार एवं दक्षता, विज्ञान, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण तथा आर्थिक विकास व सामाजिक हित के लिए AI।

भारत में AI के प्रमुख अनुप्रयोग

स्वास्थ्य क्षेत्र में AI टेलीमेडिसिन, रोग पूर्वानुमान और मेडिकल इमेजिंग में मदद कर रहा है। कृषि में ड्रोन, मौसम पूर्वानुमान और स्मार्ट सलाह से किसानों की आय बढ़ रही है। शिक्षा में व्यक्तिगत शिक्षण, भाषा अनुवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये 24×7 सीखने की सुविधा मिल रही है। वहीं शासन और वित्त में AI से धोखाधड़ी पहचान, स्मार्ट सिटी समाधान और तेज़ सार्वजनिक सेवाएँ संभव हो रही हैं।

समिट के प्रमुख आकर्षण

इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में 400 से अधिक प्रदर्शक, सात थीमैटिक पवेलियन और लगभग 1.5 लाख आगंतुक शामिल होंगे। AI for ALL, AI by HER और YUVAi जैसे कार्यक्रम स्टार्टअप्स, महिला नेतृत्व और युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देंगे। 17 फ़रवरी 2026 को जारी होने वाला AI कॉम्पेंडियम भारत में वास्तविक AI उपयोग मामलों का दस्तावेज़ प्रस्तुत करेगा।

संस्थागत ढांचा

इस समिट का नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) कर रहा है, जिसे IndiaAI मिशन, STPI और डिजिटल इंडिया पहल का समर्थन प्राप्त है। यह समिट भारत को समावेशी, सुरक्षित और जन-केंद्रित AI के वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

सरकार ने न्यूज़ीलैंड और जॉर्जिया के लिए नए राजदूत नियुक्त किए

भारत ने अपनी विदेश नीति को सशक्त करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण राजनयिक नियुक्तियों की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारियों मुआनपुई सायावी और अमित कुमार मिश्रा को क्रमशः न्यूज़ीलैंड में भारत का अगला उच्चायुक्त और जॉर्जिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। ये नियुक्तियाँ विभिन्न क्षेत्रों में भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाती हैं।

क्यों खबर में?

विदेश मंत्रालय (MEA) ने मुआनपुई सायावी को न्यूज़ीलैंड के लिए भारत की अगली उच्चायुक्त और अमित कुमार मिश्रा को जॉर्जिया के लिए भारत का अगला राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की है। दोनों अधिकारी शीघ्र ही अपना कार्यभार संभालेंगे।

मुआनपुई सायावी की नियुक्ति

  • मुआनपुई सायावी को न्यूज़ीलैंड में भारत की अगली उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है।
  • वह 2005 बैच की वरिष्ठ IFS अधिकारी हैं।
  • वर्तमान में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
  • उनकी नियुक्ति की घोषणा 19 जनवरी 2026 को की गई।
  • उच्चायुक्त के रूप में वह शिक्षा, व्यापार, कृषि और इंडो-पैसिफिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत–न्यूज़ीलैंड संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

अमित कुमार मिश्रा की नियुक्ति

  • अमित कुमार मिश्रा को जॉर्जिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।
  • वह 2004 बैच के IFS अधिकारी हैं।
  • वर्तमान में नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय में कार्यरत हैं।
  • उनकी नियुक्ति की घोषणा 20 जनवरी 2026 को की गई।
  • उनसे जॉर्जिया के साथ शिक्षा, व्यापार और जन-जन के बीच संपर्क (people-to-people relations) को मजबूत करने की अपेक्षा की जा रही है।

उच्चायुक्त बनाम राजदूत : अंतर

पहलू राजदूत (Ambassador) उच्चायुक्त (High Commissioner)
देशों का प्रकार गैर-राष्ट्रमंडल (Non-Commonwealth) देश राष्ट्रमंडल (Commonwealth) देश
ऐतिहासिक आधार साझा औपनिवेशिक इतिहास नहीं ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास साझा
राजनयिक कार्यालय दूतावास (Embassy) उच्चायोग (High Commission)
संबंधों की प्रकृति अपेक्षाकृत अधिक औपचारिक अपेक्षाकृत कम औपचारिक
नियुक्ति गैर-राष्ट्रमंडल देशों में राष्ट्रमंडल देशों में
रैंक सर्वोच्च राजनयिक पद राजदूत के समान ही सर्वोच्च रैंक

सुनीता विलियम्स ने NASA से लिया रिटायरमेंट, जानें सबकुछ

नासा की प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम से सेवानिवृत्ति ले ली। अपने लंबे और गौरवशाली करियर के दौरान वह नासा के इतिहास की सबसे सम्मानित अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल रहीं। उन्होंने तीन बार अंतरिक्ष की यात्रा की, कई महीनों तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर निवास किया और अनेक कीर्तिमान स्थापित किए। उनका समर्पण, साहस और नेतृत्व न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक रहा, बल्कि दुनिया भर के लोगों को पृथ्वी से परे खोज के सपने देखने के लिए प्रेरित करता रहा।

क्यों चर्चा में?

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली। अपने कार्यकाल में उन्होंने अंतरिक्ष अभियानों में असाधारण योगदान दिया और नासा के लिए एक प्रेरणास्रोत रहीं।

प्रारंभिक करियर और नासा में प्रवेश

सुनीता विलियम्स ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत अमेरिकी नौसेना में एक अधिकारी और पायलट के रूप में की। उन्होंने हेलीकॉप्टर और फिक्स्ड-विंग विमान उड़ाए, जिससे उन्हें तकनीकी दक्षता और नेतृत्व क्षमता मिली। वर्ष 1998 में उनका चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ। शुरुआती वर्षों में उन्होंने विज्ञान, इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष अभियानों का कठोर प्रशिक्षण लिया। इसके साथ ही उन्होंने अंडरवॉटर ट्रेनिंग जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में भाग लिया, जिसने उन्हें अंतरिक्ष जैसे कठिन वातावरण में काम करने के लिए तैयार किया।

अंतरिक्ष मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन पर जीवन

सुनीता विलियम्स ने पहली बार 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी के माध्यम से अंतरिक्ष की यात्रा की और बाद में स्पेस शटल अटलांटिस से पृथ्वी पर लौटीं। वर्ष 2012 में उन्होंने एक दीर्घकालिक मिशन के लिए पुनः अंतरिक्ष उड़ान भरी और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमांडर भी रहीं। उनकी अंतिम अंतरिक्ष उड़ान 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर यान से हुई। अपने विभिन्न अभियानों के दौरान उन्होंने 600 से अधिक दिन अंतरिक्ष में बिताए और वैज्ञानिक प्रयोगों तथा स्टेशन के रखरखाव में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रिकॉर्ड और ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

अपने करियर में सुनीता विलियम्स ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। उन्होंने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो नासा के अंतरिक्ष यात्रियों में दूसरा सबसे अधिक समय है। उन्होंने 9 स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे से अधिक रही, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे अधिक है। वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति भी बनीं। ये उपलब्धियाँ उनकी शारीरिक क्षमता, दृढ़ संकल्प और कठिन परिस्थितियों में काम करने की दक्षता को दर्शाती हैं।

नेतृत्व और अंतरिक्ष उड़ान से परे योगदान

अंतरिक्ष अभियानों के अलावा, सुनीता विलियम्स ने नासा में महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएँ भी निभाईं। उन्होंने एस्ट्रोनॉट ऑफिस की डिप्टी चीफ के रूप में कार्य किया और रूस के स्टार सिटी में संचालन निदेशक के रूप में भी सेवाएँ दीं। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी के लिए हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विकास में योगदान दिया। उनका कार्य नासा के आर्टेमिस मिशनों और भविष्य में मंगल ग्रह की यात्राओं की दिशा तय करने में सहायक रहा।

शिक्षा, विरासत और सेवानिवृत्ति

सुनीता विलियम्स ने अमेरिकी नौसेना अकादमी से स्नातक और इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। एक सेवानिवृत्त नौसेना कैप्टन और कुशल पायलट के रूप में उन्होंने नासा को अनुशासन और अनुभव प्रदान किया। दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्ति के साथ उन्होंने सेवा, साहस और प्रेरणा की एक मजबूत विरासत छोड़ी। उनका जीवन और करियर आज भी छात्रों और भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को यह विश्वास दिलाता है कि कड़ी मेहनत और समर्पण से अंतरिक्ष की सीमाओं को छुआ जा सकता है।

नए समझौते के बाद UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की जनवरी 2026 में भारत यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक ऊर्जा समझौता संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत UAE भारत को हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति करेगा। इस करार के बाद UAE, क़तर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत हुए हैं।

क्यों चर्चा में?

भारत और UAE ने नई दिल्ली में शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की आधिकारिक यात्रा के दौरान एक दीर्घकालिक LNG आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ UAE, क़तर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया।

दीर्घकालिक LNG समझौता

  • इस यात्रा का सबसे अहम परिणाम हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति का दीर्घकालिक करार रहा।
  • LNG एक अपेक्षाकृत स्वच्छ जीवाश्म ईंधन है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उद्योग और रसोई गैस में व्यापक रूप से किया जाता है।
  • आर्थिक वृद्धि और शहरीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
  • यह समझौता वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता के दौर में स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • पारंपरिक रूप से प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहे UAE के साथ यह करार स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करता है।
  • क़तर से आगे आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाकर भारत आपूर्ति जोखिम कम करता है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करता है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

व्यापार, रक्षा और आर्थिक सहयोग

  • ऊर्जा के अलावा, दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया।
  • वर्तमान में (2023–24) भारत–UAE द्विपक्षीय व्यापार लगभग 84 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिससे UAE भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
  • दोनों नेताओं ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई, जो हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में बढ़ते सुरक्षा सहयोग को दर्शाती है।
  • निवेश, अवसंरचना, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल व्यापार उभरते हुए प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

परमाणु और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग

  • वार्ताओं में नागरिक परमाणु सहयोग जैसे नए और उभरते क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
  • भारत में सतत परमाणु ऊर्जा विकास से जुड़े विधायी सुधारों (जैसे शांति अधिनियम) के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खुले हैं।
  • परमाणु ऊर्जा को भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।
  • उन्नत परमाणु बिजली संयंत्र संचालित करने वाला UAE इस क्षेत्र में विशेषज्ञता और तकनीक साझा कर सकता है।

यह सहयोग वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है और बढ़ती ऊर्जा मांग को विविध एवं टिकाऊ स्रोतों से पूरा करते हुए भारत की कार्बन उत्सर्जन घटाने की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।

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