जियो ने लॉन्च किया एआई रेडी क्लाउड कम्प्यूटर Jio PC

रिलायंस जियो ने एक क्रांतिकारी डिजिटल सेवा JioPC लॉन्च की है, जो एक क्लाउड-आधारित वर्चुअल डेस्कटॉप सेवा है। यह सेवा किसी भी टेलीविज़न को बिना अलग सीपीयू के एक पूर्ण रूप से कार्यशील पर्सनल कंप्यूटर में बदल देती है। Jio सेट-टॉप बॉक्स के माध्यम से संचालित यह समाधान छात्रों, पेशेवरों और घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए कम लागत में लचीलापन और डेस्कटॉप जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। JioPC के माध्यम से उपयोगकर्ता अपने टीवी स्क्रीन पर ही वर्क, स्टडी और ब्राउज़िंग जैसे कार्य कर सकते हैं, जिससे यह डिजिटल इंडिया के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

JioPC क्या है?

JioPC सेवा क्लाउड तकनीक का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं को उनके टीवी स्क्रीन पर एक वर्चुअल डेस्कटॉप इंटरफेस प्रदान करती है। उपयोगकर्ता बस Jio सेट-टॉप बॉक्स से टीवी को जोड़कर, कीबोर्ड और माउस कनेक्ट कर सकते हैं और फिर वे वेब ब्राउज़िंग, ऑनलाइन लर्निंग, प्रोग्रामिंग और डॉक्यूमेंट एडिटिंग जैसे जरूरी कंप्यूटिंग कार्य कर सकते हैं। पारंपरिक कंप्यूटरों के विपरीत, JioPC को सीपीयू या भारी हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह घर के उपयोग के लिए कम बजट और जगह बचाने वाला विकल्प बन जाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ़्टवेयर सपोर्ट

JioPC पर Ubuntu (Linux) चलता है, जो एक लोकप्रिय और व्यापक रूप से उपयोग होने वाला ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह प्लेटफ़ॉर्म LibreOffice के साथ पहले से इंस्टॉल आता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को बुनियादी प्रोडक्टिविटी कार्यों जैसे डॉक्यूमेंट बनाना, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन तैयार करना आसान हो जाता है।

इसके अतिरिक्त, उपयोगकर्ता ब्राउज़र के ज़रिए Microsoft Office एप्लिकेशन (जैसे Word, Excel और PowerPoint) का भी उपयोग कर सकते हैं, जिससे उन लोगों को भी सुविधा मिलती है जो इन टूल्स पर निर्भर हैं। क्रिएटिव यूज़र्स के लिए, JioPC ने Adobe के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत Adobe Express का मुफ्त उपयोग उपलब्ध है — यह डिज़ाइन और कंटेंट क्रिएशन के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।

उत्पादकता को और बेहतर बनाने के लिए, ग्राहकों को Jio Workspace का एक महीने का ट्रायल भी मिलता है, जिसमें ब्राउज़र-आधारित Microsoft Office टूल्स और 512GB का विस्तारित क्लाउड स्टोरेज शामिल है।

प्लान और मूल्य निर्धारण

JioPC एक पे-एज़-यू-गो (Pay-as-you-go) मॉडल पर आधारित है, जिससे उपयोगकर्ताओं को किसी दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट या मेंटेनेंस शुल्क से नहीं जूझना पड़ता। इसकी योजनाएं विभिन्न ज़रूरतों के अनुसार बनाई गई हैं:

  • बेसिक प्लान: ₹599 प्रति माह + GST

  • त्रैमासिक ऑफर: ₹1,499 में तीन महीने, साथ में एक अतिरिक्त महीना मुफ्त (कुल 4 महीने)

  • वार्षिक प्लान: ₹4,599 में 12 महीने, साथ में 3 मुफ्त महीने (कुल 15 महीने)

यह मूल्य निर्धारण रणनीति JioPC को उन परिवारों और छात्रों के लिए एक किफायती समाधान बनाती है जो बिना महंगे कंप्यूटर या लैपटॉप में निवेश किए भरोसेमंद कंप्यूटिंग सुविधा चाहते हैं।

तकनीकी विशेषताएं

हर JioPC वर्चुअल मशीन एक मजबूत कॉन्फ़िगरेशन के साथ आती है, जो सामान्य से मध्यम स्तर की कंप्यूटिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है:

  • 4 CPUs – स्मूद मल्टीटास्किंग के लिए

  • 8GB RAM – स्थिर परफॉर्मेंस के लिए

  • 100GB क्लाउड स्टोरेज – (ट्रायल अवधि में विस्तार योग्य)

इन सुविधाओं के साथ उपयोगकर्ता डॉक्यूमेंट पर काम कर सकते हैं, इंटरनेट ब्राउज़ कर सकते हैं और एक साथ कई एप्लिकेशन का उपयोग आसानी से कर सकते हैं।

ध्यान देने योग्य सीमाएं

हालाँकि JioPC किफायती कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव है, लेकिन वर्तमान में इसकी कुछ सीमाएं भी हैं:

  • हार्डवेयर परिधीय (पेरिफेरल्स) जैसे वेबकैम और प्रिंटर का समर्थन नहीं करता।

  • सभी प्रक्रियाएं क्लाउड सर्वर पर चलती हैं, इसलिए निरंतर और स्थिर इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक है।

ये सीमाएं उन उपयोगकर्ताओं के लिए बाधा बन सकती हैं जिन्हें काम या पेशेवर उपयोग के लिए हार्डवेयर कनेक्टिविटी की व्यापक ज़रूरत होती है।

JioPC कैसे सेट करें

JioPC को सेट करना आसान और त्वरित है:

  1. Jio सेट-टॉप बॉक्स को चालू करें।

  2. Apps सेक्शन में जाकर JioPC एप्लिकेशन खोलें।

  3. लिंक किए गए मोबाइल नंबर से पंजीकरण करें।

  4. तुरंत अपने क्लाउड-बेस्ड डेस्कटॉप तक पहुंच प्राप्त करें।

कौन करें उपयोग?

JioPC विशेष रूप से इन उपयोगकर्ताओं के लिए फायदेमंद है:

  • छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं और असाइनमेंट हेतु।

  • गृह उपयोगकर्ताओं के लिए ब्राउज़िंग, ऑनलाइन लर्निंग और दस्तावेज़ प्रबंधन में।

  • शुरुआती प्रोग्रामर्स के लिए जो बजट-फ्रेंडली कोडिंग सेटअप चाहते हैं।

  • क्रिएटिव लर्नर्स के लिए जो Adobe Express और AI टूल्स का उपयोग करते हैं।

कम लागत में डेस्कटॉप-स्तरीय प्रदर्शन उपलब्ध कराकर, JioPC भारत के घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए एक प्रभावी डिजिटल समावेशन उपकरण के रूप में उभर रहा है।

भारत की कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था 2032 तक 12 मिलियन नौकरियां पैदा करेगी

भारत की कॉन्सर्ट इकॉनमी तेजी से रोजगार और आर्थिक विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है, जो केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। NLB सर्विसेज के अनुसार, यह उद्योग 2030 से 2032 के बीच लगभग 1.2 करोड़ अस्थायी नौकरियों का सृजन कर सकता है।टियर-2 और टियर-3 शहरों में लाइव एंटरटेनमेंट के आयोजन में तेजी देखी जा रही है, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ रहा है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य में भी यह क्षेत्र एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

भारत में लाइव कॉन्सर्ट उद्योग का विस्तार

परंपरागत रूप से, बड़े पैमाने पर होने वाले कॉन्सर्ट केवल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों तक सीमित थे। लेकिन हाल के वर्षों में यह उद्योग अब गुवाहाटी, जयपुर, लखनऊ, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में भी तेजी से फैल रहा है।

इस विकास के पीछे प्रमुख कारण हैं:

  • बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा

  • छोटे शहरों में आकांक्षी युवा दर्शक वर्ग

  • उभरते बाजारों में ब्रांड्स की बढ़ती रुचि

इसका नतीजा यह हुआ है कि लाइव कॉन्सर्ट अब केवल कभी-कभार होने वाले आयोजन नहीं रहे, बल्कि यह साल भर चलने वाली आर्थिक गतिविधियों में तब्दील हो रहे हैं।

रोज़गार सृजन: युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान

अब प्रत्येक बड़े कॉन्सर्ट या कार्यक्रम से 15,000 से 20,000 तक अस्थायी नौकरियां उत्पन्न होती हैं। ये नौकरियां कई क्षेत्रों में फैलती हैं, जैसे:

  • भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा

  • आतिथ्य और लॉजिस्टिक्स

  • डिजिटल मीडिया और प्रचार

  • आर्टिस्ट मैनेजमेंट और साउंड इंजीनियरिंग

  • इवेंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी

NLB सर्विसेज के CEO सचिन आलुग के अनुसार, इन नौकरियों में से लगभग 10–15% नौकरियां अब स्थायी रोजगार में बदल रही हैं, विशेष रूप से ऑडियो इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन मैनेजमेंट और डिजिटल रणनीति जैसे क्षेत्रों में।

यह रोजगार वृद्धि छोटे शहरों में स्थानीय युवाओं को सशक्त बना रही है और स्थानीय आर्थिक विकास को गति दे रही है।

कॉन्सर्ट्स का आर्थिक प्रभाव: मनोरंजन से परे एक नई अर्थव्यवस्था

लाइव कॉन्सर्ट्स का असर केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। उदाहरण के तौर पर, कोल्डप्ले का 2024 में अहमदाबाद में हुआ कॉन्सर्ट शहर की अर्थव्यवस्था को लगभग ₹641 करोड़ का बढ़ावा देने वाला साबित हुआ, जिसमें से ₹72 करोड़ जीएसटी के रूप में एकत्र हुए।

इस कार्यक्रम से जुड़े आर्थिक प्रभावों में शामिल थे:

  • फ्लाइट्स और होटलों की पूरी बुकिंग

  • रेस्तरां और स्थानीय व्यापारों की बिक्री में भारी वृद्धि

  • पर्यटन और MSME गतिविधियों को बढ़ावा

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कॉन्सर्ट्स अब स्थानीय आर्थिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण साधन बनते जा रहे हैं।

उद्योग का विकास और चुनौतियां

भारत का लाइव एंटरटेनमेंट क्षेत्र अब लगभग ₹15,000 करोड़ का हो चुका है। लोलापालूजा इंडिया और बैंडलैंड जैसे प्रमुख फेस्टिवल्स न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव भी डाल रहे हैं।

लेकिन यह उद्योग कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का भी सामना कर रहा है, विशेषकर कुशल पेशेवरों की कमी के मामले में, जैसे:

  • लाइव प्रोडक्शन

  • लाइटिंग टेक्नोलॉजी

  • टिकटिंग और इवेंट टेक सॉल्यूशंस

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतर को पाटने के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रमों में निवेश की अत्यंत आवश्यकता है, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहां मांग तेजी से बढ़ रही है।

उद्योग विशेषज्ञों की राय

सचिन आलुग, CEO, NLB Services के अनुसार, “लाइव इवेंट्स अब साल भर चलने वाली आर्थिक गतिविधियाँ बन चुकी हैं, जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युवा सशक्तिकरण और रोज़गार के औपचारिकरण को भी बढ़ावा देती हैं।”

नमन पुगलिया, Chief Business Officer – Live Events, BookMyShow ने बताया कि भारत का लाइव एंटरटेनमेंट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच चुका है, जो रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक प्रभाव पैदा कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कोल्डप्ले के अहमदाबाद कॉन्सर्ट में 15,000 से अधिक नौकरियाँ उत्पन्न हुईं, जिनमें से लगभग 9,000 स्थानीय लोगों को दी गईं।

सरकार और कॉर्पोरेट समर्थन: स्थायित्व की कुंजी

राज्य सरकारों की नीतिगत मदद, बुनियादी ढांचे का विकास और कॉर्पोरेट निवेश की बदौलत कंसर्ट इकोनॉमी अब भारत की जीडीपी में औपचारिक योगदानकर्ता बनती जा रही है। यह एक दुर्लभ अवसर है जिसमें सरकार, उद्योग जगत और स्किलिंग संस्थान मिलकर एक स्थायी प्रतिभा तंत्र का निर्माण कर सकते हैं, जिससे अगले दशक में इस क्षेत्र की विशाल रोजगार संभावनाएं पूरी हो सकें।

रूस के कामचटका में 8.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र कामचटका में मंगलवार (29 जुलाई 2025) रात 11:24 बजे (GMT) 8.7 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र पेत्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की शहर से 125 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में, अवाचा खाड़ी के पास 19.3 किलोमीटर की गहराई पर था। इससे सतह पर जोरदार झटके महसूस किए गए। हालांकि USGS ने पहले भूकंप की तीव्रता 8.0 बताई थी, लेकिन बाद में नए आंकड़ों के अनुसार इसे 8.7 कर दिया गया। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है।

भूकंप का उपकेंद्र और तीव्रता

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने पहले इस भूकंप की तीव्रता 8.0 दर्ज की थी, जिसे बाद में 8.7 कर दिया गया। यह पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है।

  • गहराई: 19.3 किलोमीटर (कम गहराई, जिससे सुनामी का खतरा अधिक होता है)

  • स्थान: पेट्रोपावलोव्स्क-कमचात्स्की से लगभग 125 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, यह शहर अवाचा बे पर स्थित है और यहां लगभग 1.65 लाख लोग रहते हैं।

  • राज्यपाल व्लादिमीर सोलोडोव ने इसे “दशकों में सबसे शक्तिशाली भूकंप” बताया।

  • स्थानीय अधिकारियों ने कुछ इमारतों—जैसे कि एक बालवाड़ी (किंडरगार्टन)—को नुकसान की सूचना दी है, हालांकि बड़े पैमाने पर विनाश नहीं हुआ है।

कमचटका में सुनामी प्रभाव

रूसी आपातकालीन मंत्रालय ने पुष्टि की कि कमचटका क्षेत्र के कुछ हिस्सों में 3 से 4 मीटर ऊँची सुनामी लहरें दर्ज की गईं। “सुनामी संभावित क्षेत्रों में समुद्र तट से दूर रहें और लाउडस्पीकर पर दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें,” मंत्रालय ने चेतावनी दी।

सेवेरो-कुरील्स्क में संभावित ऊँची लहरों की चेतावनी के बाद तत्काल निकासी के आदेश दिए गए। आपातकालीन सेवाओं ने लगातार आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटकों) की भी रिपोर्ट दी है, हालांकि कोई बड़ा झटका अपेक्षित नहीं है।

प्रशांत क्षेत्र में सुनामी अलर्ट

इस शक्तिशाली भूकंप के बाद प्रशांत महासागर के कई देशों में सुनामी चेतावनियों की श्रृंखला शुरू हो गई:

  • जापान: जापान के मौसम विभाग ने प्रशांत तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी परामर्श जारी किया।

    • अनुमानित लहरें: अधिकतम 1 मीटर ऊँची।

    • होक्काइदो में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ।

  • संयुक्त राज्य अमेरिका (अलास्का और हवाई):

    • अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने खतरनाक लहरों की चेतावनी दी।

    • एल्युशियन द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में तुरंत चेतावनी लागू की गई।

    • कैलिफोर्निया, ओरेगन, वॉशिंगटन और हवाई तक निगरानी बढ़ा दी गई।

  • न्यूज़ीलैंड:

    • सिविल डिफेंस ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने की सलाह दी, क्योंकि असामान्य और तेज धाराओं की आशंका जताई गई।

  • अन्य प्रशांत राष्ट्र:

    • दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, ताइवान: लहरों की ऊँचाई 0.3 मीटर से कम।

    • फिलिपींस, मार्शल द्वीप, पалау: 0.3 से 1 मीटर ऊँची लहरें।

    • गुआम, हवाई, जापान के कुछ हिस्सों: 1 से 3 मीटर ऊँचाई तक।

    • उत्तर-पश्चिमी हवाई द्वीप और रूसी तट: 3 मीटर से अधिक ऊँची लहरें।

भूकंप विज्ञानी कहते हैं कि इस तरह के कम गहराई वाले भूकंप दूरस्थ समुद्र तटों तक लंबी दूरी की सुनामी लहरें पैदा कर सकते हैं।

चोटें और स्थानीय प्रतिक्रिया

हालांकि कोई मृत्यु दर्ज नहीं की गई है, कमचटका के स्वास्थ्य मंत्री ओलेग मेल्निकोव ने कुछ मामूली चोटों की पुष्टि की:

  • कुछ लोग बाहर भागते समय घायल हो गए।

  • एक मरीज खिड़की से कूदने पर घायल हुआ।

  • एक अन्य व्यक्ति नए एयरपोर्ट टर्मिनल में घायल हुआ।

  • सभी घायलों की स्थिति संतोषजनक बताई गई है।

कमचटका में भूकंपीय इतिहास

कमचटका क्षेत्र पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में से एक है।

  • जुलाई 2025 में ही क्षेत्र में पांच बड़े भूकंप आए थे, जिनमें सबसे बड़ा 7.4 तीव्रता का था।

  • 4 नवंबर 1952 को 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने हवाई में 9.1 मीटर ऊँची लहरें पैदा की थीं।
    हालांकि भारी नुकसान हुआ था, लेकिन कोई मृत्यु दर्ज नहीं हुई थी।

यह इतिहास कमचटका क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता और भविष्य में संभावित खतरे को उजागर करता है।

DRDO ने किया प्रलय मिसाइल का लगातार दूसरा सफल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 28 और 29 जुलाई 2025 को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा से ‘प्रलय’ मिसाइल के दो लगातार सफल परीक्षण किए। ये उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण (User Evaluation Trials) मिसाइल की अधिकतम और न्यूनतम मारक सीमा की पुष्टि के लिए किए गए थे, जिनमें इसकी उच्च सटीकता और विश्वसनीयता सिद्ध हुई। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित ‘प्रलय’ मिसाइल अत्याधुनिक मार्गदर्शन (guidance) और नेविगेशन सिस्टम से लैस है। यह विभिन्न प्रकार के वारहेड्स (warheads) को ले जाने में सक्षम है, जिससे यह भारतीय सशस्त्र बलों की संचालनिक तैयारी (operational readiness) को काफी मजबूती प्रदान करती है। इस सफल परीक्षण ने एक बार फिर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है।

ओडिशा तट से ‘प्रलय’ मिसाइल के सफल परीक्षण

रक्षा मंत्रालय (MoD) ने घोषणा की है कि DRDO ने 28 और 29 जुलाई 2025 को ओडिशा तट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘प्रलय’ मिसाइल के दो लगातार सफल उड़ान परीक्षण किए। ये परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन अभ्यास (User Evaluation Exercises) के तहत किए गए, जिनका उद्देश्य मिसाइल प्रणाली की अधिकतम और न्यूनतम मारक सीमा को प्रमाणित करना था। मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल ने निर्धारित मार्ग (trajectory) का सफलतापूर्वक पालन किया और चिह्नित लक्ष्य बिंदु को सटीकता से भेदा, जिससे सभी तय मानदंड पूरे हुए। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) द्वारा तैनात उन्नत ट्रैकिंग सेंसरों—जिनमें एक निकटवर्ती पोत पर स्थापित उपकरण भी शामिल थे—ने मिसाइल के प्रदर्शन की सत्यापन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

प्रलय मिसाइल की विशेषताएं

प्रलय मिसाइल एक स्वदेशी रूप से विकसित ठोस ईंधन आधारित अर्ध-प्रक्षेपवक्रिक (quasi-ballistic) मिसाइल है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • उच्च सटीकता वाली मार्गदर्शन प्रणाली: इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणालियाँ हैं जो लक्ष्य पर सटीक प्रहार सुनिश्चित करती हैं।

  • बहु-वारहेड क्षमता: यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के वारहेड्स ढोने में सक्षम है, जिससे यह कई प्रकार के लक्ष्यों पर हमला कर सकती है और इसकी परिचालन बहुउपयोगिता बढ़ती है।

  • स्वदेशी विकास: इसे रिसर्च सेंटर इमरत (RCI) द्वारा अन्य DRDO प्रयोगशालाओं जैसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) और आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के सहयोग से विकसित किया गया है।

  • औद्योगिक भागीदारी: इसमें प्रमुख भारतीय रक्षा कंपनियाँ जैसे भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और कई अन्य भारतीय उद्योग व MSMEs शामिल हैं।

सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग की उपस्थिति

मिसाइल परीक्षणों के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, भारतीय वायुसेना और थलसेना के प्रतिनिधियों, और रक्षा क्षेत्र के औद्योगिक साझेदारों की उपस्थिति रही। यह परीक्षण प्रणाली को भारत की रक्षा क्षमताओं में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

DRDO की हालिया उपलब्धियाँ

प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद DRDO ने एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। 25 जुलाई 2025 को, DRDO ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित नेशनल ओपन एरिया रेंज (NOAR) में Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile (ULPGM)-V3 का सफल परीक्षण किया।

ULPGM-V3 मिसाइल, अपने पिछले संस्करण ULPGM-V2 का उन्नत संस्करण है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • हाई-डेफिनिशन डुअल-चैनल सीकर: विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को सटीकता से भेदने में सक्षम।

  • दिवा-रात्रि संचालन की क्षमता: दिन और रात दोनों में प्रभावी मिशनों के लिए उपयुक्त।

  • टू-वे डाटा लिंक: प्रक्षेपण के बाद भी लक्ष्य बिंदु को अद्यतन (अपडेट) करने की सुविधा।

  • तीन प्रकार के मॉड्यूलर वारहेड विकल्प:

    • एंटी-आर्मर (टैंक-रोधी)

    • पिनेट्रेशन-कम-ब्लास्ट (बंकर-भेदी विस्फोट)

    • प्री-फ्रैगमेंटेशन विद हाई लेथैलिटी (अधिक घातकता वाला टुकड़ा-विस्फोटक वारहेड)

इन निरंतर सफल परीक्षणों के माध्यम से DRDO ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि वह स्वदेशी नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी विकास के ज़रिए भारत की रक्षा क्षमता को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारतीय तटरक्षक बल के तीव्र गश्ती पोत ‘अटल’ का गोवा में जलावतरण

भारत ने अपनी तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के नवीनतम तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel – FPV) ‘अटल’ का जलावतरण किया गया। यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा वास्को-दा-गामा में निर्मित किया गया है और आठ अत्याधुनिक एफपीवी श्रृंखला में यह छठा पोत है। यह जलयान रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भरता’ के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।

जहाज निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

तेज गश्ती पोत ‘अटल’ (यार्ड 1275) को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत सार्वजनिक उपक्रम गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया है। यह लॉन्च भारत की बढ़ती समुद्री रक्षा क्षमताओं का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि देश अब उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्माण में विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रह रहा है। ‘अटल’ का जलावतरण टीम GSL की अटूट प्रतिबद्धता, नवाचार और स्वदेशीकरण के प्रति समर्पण को दर्शाता है, जो उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बावजूद सिद्ध किया है।

FPV ‘अटल’ की विशेषताएँ और क्षमताएँ:

  • आकार व भार: यह पोत 52 मीटर लंबा, 8 मीटर चौड़ा है और इसका वजन लगभग 320 टन है। इसकी संरचना इसे तेज़ और फुर्तीला बनाती है, जो तटीय सुरक्षा अभियानों के लिए उपयुक्त है।

  • संचालन भूमिकाएँ: ‘अटल’ को तटीय गश्त, द्वीप सुरक्षा, अपतटीय परिसंपत्ति रक्षा, तस्करी-विरोधी, समुद्री डकैती-रोधी और खोज व बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

  • आधुनिक डिज़ाइन: GSL द्वारा देश में ही विकसित डिज़ाइन अत्याधुनिक नौसैनिक वास्तुकला का उदाहरण है, जो गति और स्थिरता दोनों सुनिश्चित करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान:

FPV ‘अटल’ का जलावतरण भारत की समुद्री सतर्कता को बढ़ाता है और भारतीय तटरेखा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तस्करी व समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों के मद्देनज़र, ऐसे पोत भारत की अग्रिम रक्षा पंक्ति बनाते हैं। मुख्य अतिथि रोज़ी अग्रवाल (प्रधान आंतरिक वित्तीय सलाहकार, तटरक्षक मुख्यालय) ने GSL की क्षमता की सराहना की और पोत के माध्यम से भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण बताया।

भागीदारी और सहयोग:

इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और रणनीतिक औद्योगिक भागीदारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जो भारत की रक्षा तैयारी को सशक्त बनाने में संयुक्त प्रयासों को दर्शाता है।

Asian Youth TT Championships: दिव्यांशी भौमिक ने गोल्ड जीत रचा इतिहास

भारत की युवा टेबल-टेनिस खिलाड़ी दिव्यांशी भौमिक ने एशियन यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। 14 वर्षीय दिव्यांशी इस चैंपियनशिप की अंडर-15 कैटेगरी में खेल रही थीं। अंडर-15 बालिका एकल खिताब जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया। दिव्यांशी की ये स्वर्णिम सफलता इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि 36 वर्षों बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने ये खिताब जीता है।गोल्ड मेडल मैच में दिव्यांशी ने चीन की झू छीही को 4-2 से हराया।

एशियन यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का फाइनल जीतकर 36 वर्षों बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी दिव्यांशी ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण प्रदर्शन किया। भारत की युवा सनसनी ने तीन चीनी खिलाड़ियों को हराया। भारत ने इस कड़ी प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदकों अपने नाम किए।

कई और भी पुरस्कार जीत चुकी हैं दिव्यांशी भौमिक

रिपोर्ट के मुताबिक दिव्यांशी दानी स्पोर्ट्स फाउंडेशन के डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा हैं। फाउंडेशन अल्टीमेट टेबल टेनिस (UTT) के साथ मिलकर युवा प्रतिभाओं को निखारने की मुहिम में जुटा है। उन्होंने ड्रीम UTT जूनियर्स के पहले संस्करण में भी पुरस्कार जीता था। इसी साल अप्रैल में टेबल टेनिस सुपर लीग महाराष्ट्र में दिव्यांशी को सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी (ओवरऑल) चुना गया था।

भारत का समग्र प्रदर्शन

भारत ने इस चैंपियनशिप में अपना अभियान एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदकों के साथ समाप्त किया। हालांकि, इस प्रतियोगिता की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि दिव्यांशी की ऐतिहासिक जीत रही, जिसने भारत में युवा टेबल टेनिस के पुनरुत्थान का संकेत दिया और भविष्य में और भी बड़ी सफलता की उम्मीद जगाई।

पीएम मोदी ने प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल बनाने के लिए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ लॉन्च किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2025 को ‘मन की बात’ के 124वें संस्करण के दौरान भारत के प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी पहल ‘ज्ञान भारतम मिशन’ की घोषणा की। यह मिशन देश की सभ्यतागत धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार (National Digital Repository) तैयार किया जाएगा, जिसमें हजारों वर्ष पुराने ज्ञान, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, गणित और अन्य विषयों से संबंधित ग्रंथों को डिजिटल रूप में संग्रहीत और साझा किया जाएगा। यह पहल न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी एक सशक्त माध्यम बनेगी।

ज्ञान भारतम मिशन क्या है?

ज्ञान भारतम मिशन भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने और डिजिटाइज़ करने की एक राष्ट्रव्यापी परियोजना है। इसका उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें “भारत की आत्मा के अध्याय” बताते हुए कहा कि ये ग्रंथ हमारे सांस्कृतिक, सभ्यतागत और आध्यात्मिक धरोहर के अनमोल स्रोत हैं।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य:

  • पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण: नाज़ुक और दुर्लभ ग्रंथों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करना ताकि उनका क्षरण रोका जा सके।

  • राष्ट्रीय डिजिटल भंडार की स्थापना: एक ऐसा केंद्रीय मंच तैयार करना, जहाँ से ये पांडुलिपियाँ वैश्विक स्तर पर छात्रों, शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए सुलभ हो सकें।

  • ज्ञान की पहुँच: पारंपरिक भारतीय ज्ञान-विज्ञान को आधुनिक शोध और शिक्षा के लिए उपलब्ध कराना।

  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: आने वाली पीढ़ियों को भारत की जड़ों से जोड़ना और परंपराओं की निरंतरता सुनिश्चित करना।

बजटीय समर्थन और विस्तार:

इस मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025 में की गई थी। शुरुआत में ₹3.5 करोड़ का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर ₹60 करोड़ कर दिया गया है। यह सरकार की इस दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सभ्यतागत महत्व:

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को भारत की आत्मा के पुनर्जागरण से जोड़ते हुए कहा कि ये पांडुलिपियाँ केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों की बौद्धिक और आध्यात्मिक यात्रा का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें और इस अमूल्य धरोहर को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने में सहयोग दें।

यूनेस्को द्वारा मराठा किलों की मान्यता:

इसी संबोधन में पीएम मोदी ने 12 मराठा किलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये किले “इतिहास के पन्ने” हैं— जिनमें से 11 महाराष्ट्र और 1 तमिलनाडु में स्थित है। यह सम्मान भारत की इतिहासबोध और सांस्कृतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

भारतीय हॉकी के 100 साल: हॉकी इंडिया ने अनुदानों की घोषणा की

हॉकी इंडिया ने अपनी 15वीं कांग्रेस के दौरान राष्ट्रीय और जमीनी स्तर के टूर्नामेंट के समर्थन के लिए अपने वित्तीय अनुदान में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा की है। वहीं, भारतीय हॉकी के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस कांग्रेस में कई ऐतिहासिक घोषणाएं हुईं, जिनमें सात नवंबर को एक राष्ट्रव्यापी उत्सव का आयोजन भी शामिल है।

अब से सीनियर पुरुष और सीनियर महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेजबानी के लिए 70-70 लाख रुपये, जूनियर पुरुष, जूनियर महिला, सब जूनियर पुरुष और सब जूनियर महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजन के लिए 30-30 लाख रुपये आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के समर्थन के लिए प्रत्येक राज्य को 25 लाख रुपये दिए जाएंगे।

राष्ट्रीय हॉकी उत्सव: विरासत का उत्सव

भारतीय हॉकी के 100 वर्षों की उपलब्धि को मनाने के लिए, हॉकी इंडिया 7 नवंबर 2025 को एक राष्ट्रीय उत्सव का आयोजन करेगी। इस दिन देश के हर जिले में एक पुरुष और एक महिला मैच सहित कुल 1,000 हॉकी मैच एक साथ खेले जाएंगे। इस आयोजन में लगभग 36,000 खिलाड़ी (महिला और पुरुष समान संख्या में) भाग लेंगे, जो भारतीय हॉकी में समावेशिता और एकता का प्रतीक होगा।

विरासत को सम्मान और भविष्य में निवेश

इस अवसर पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा, “जब हम भारतीय हॉकी के 100 साल का उत्सव मना रहे हैं, तब हम अपनी स्वर्णिम विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ भविष्य की नींव भी रख रहे हैं। यह वित्तीय सहायता अगली पीढ़ी के सपनों में सीधा निवेश है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे।”

घोषणा का महत्व

यह पहल भारतीय हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जिसमें उत्सव को रणनीतिक निवेश से जोड़ा गया है। बढ़ी हुई वित्तीय सहायता सीधे तौर पर खिलाड़ियों, कोचों और जमीनी स्तर के अधिकारियों को समर्थन देगी, जो भारत की हॉकी व्यवस्था की रीढ़ हैं। साथ ही, 7 नवंबर को होने वाला भव्य उत्सव न केवल हॉकी की समृद्ध विरासत को श्रद्धांजलि देगा, बल्कि युवाओं को प्रेरित कर इसे भारत के राष्ट्रीय गौरव के रूप में और सुदृढ़ करेगा।

भारतीय हॉकी: भविष्य की रीढ़

हॉकी इंडिया ने कहा कि इन बढ़े हुए अनुदानों का उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आयोजन की गुणवत्ता में सुधार करना और स्थानीय स्तर पर वित्तीय बाधाओं को कम करके व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस सहयोग से हजारों उभरते खिलाड़ियों, कोचों और जमीनी स्तर के अधिकारियों को लाभ होने की उम्मीद है जो भारतीय हॉकी के भविष्य की रीढ़ हैं।

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने ‘सस्टेनेबल वेलनेस ऑफ स्टूडेंट्स’ पुस्तक का किया विमोचन

छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 जुलाई 2025 को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास के सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ‘सस्टेनेबल वेलनेस ऑफ स्टूडेंट्सः अ कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी इन हायर एजुकेशन‘ नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों द्वारा झेली जा रही मानसिक और सामाजिक चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

मुख्यमंत्री का छात्र-केंद्रित प्रयासों पर जोर

पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन में छात्रों पर पड़ने वाले दबावों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्थानों को ज्ञान के साथ-साथ कल्याण के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पुस्तक के प्रकाशन की सराहना की और इसके हिंदी संस्करण की आवश्यकता जताई, ताकि इसके विचार राज्य और देश भर के व्यापक छात्र समुदाय तक पहुंच सकें।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से जुड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड NEP को लागू करने वाला पहला राज्य बना। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के साथ-साथ राज्य अब छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहा है, जो समग्र शिक्षा प्रणाली की दिशा में एक मजबूत कदम है।

पुस्तक के बारे में: छात्र कल्याण के लिए एक रोडमैप

सस्टेनेबल वेलनेस ऑफ स्टूडेंट्सः अ कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी इन हायर एजुकेशन‘ नामक इस पुस्तक का संपादन प्रो. लता पांडे (प्रमुख, गृह विज्ञान विभाग, डीएसबी परिसर, कुमाऊं विश्वविद्यालय) और डॉ. रमाआनंद (निदेशक, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली) ने संयुक्त रूप से किया है।

यह पुस्तक छात्र कल्याण की गहराई से पड़ताल करती है और निम्नलिखित विषयों पर प्रकाश डालती है:

  • मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श

  • कौशल विकास एवं करियर मार्गदर्शन

  • पुनर्वास और सामाजिक उत्थान की पहलें

  • शिक्षकों, प्रशासन, अभिभावकों और नीति-निर्माताओं की सक्रिय भूमिका

उच्च शिक्षा में महत्व

उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो. कमल किशोर पांडे भी कार्यक्रम में उपस्थित थे और उन्होंने राज्य सरकार की छात्र-अनुकूल नीतियों और सहायता प्रणालियों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

इस पुस्तक का विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब दुनियाभर में छात्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं का सामना कर रहे हैं। यह पहल छात्र कल्याण को सामूहिक उत्तरदायित्व के रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे एक समावेशी और सहायक शैक्षिक वातावरण का निर्माण हो सके, जहाँ छात्र शैक्षणिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से समृद्ध हो सकें।

ओडिशा में 7808 करोड़ का होगा निवेश

ओडिशा ने अपने वस्त्र एवं परिधान उद्योग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 7,808 करोड़ रुपये (902 मिलियन डॉलर) के 33 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह उपलब्धि भुवनेश्वर में आयोजित ओडिशा-टेक्स 2025 सम्मेलन के दौरान हासिल की गई। यह पहल “ओडिशा अपैरल एवं टेक्निकल टेक्सटाइल नीति 2022” के अंतर्गत की गई है, जिसका उद्देश्य राज्य को पूर्वी भारत का वस्त्र हब बनाना है।

घोषणा की प्रमुख विशेषताएं

बड़ी निवेश वृद्धि
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार ने 160 से अधिक वस्त्र कंपनियों के साथ 902 मिलियन डॉलर (₹7,808 करोड़) के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। प्रमुख भागीदारों में पेज इंडस्ट्रीज़, केपीआर मिल्स, स्पोर्टकिंग, आदर्श निटवियर, बॉन एंड कंपनी और बी.एल. इंटरनेशनल शामिल रहे।

रोजगार सृजन का लक्ष्य
राज्य सरकार ने 2030 तक वस्त्र और परिधान क्षेत्र में एक लाख से अधिक नौकरियां उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है। इससे न केवल राज्य में रोजगार दर में वृद्धि होगी बल्कि कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों को भी अवसर मिलेंगे।

वस्त्र क्लस्टर्स का विस्तार
सरकार छह प्रमुख जिलों में वस्त्र हब विकसित करने की योजना बना रही है—

  • बलांगीर

  • क्योंझर

  • संबलपुर

  • जगतसिंहपुर

  • गंजाम

  • कटक

इन क्लस्टरों में बड़े पैमाने पर वस्त्र निर्माण इकाइयों के आने की संभावना है, जिससे राज्य का औद्योगिक आधार मजबूत होगा।

नीतिगत सहयोग और प्रोत्साहन

अपैरल एवं टेक्निकल टेक्सटाइल नीति 2022
औद्योगिक नीति संकल्प 2022 के अनुरूप, यह नीति निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करती है। नीति का मुख्य फोकस है—

  • विश्वस्तरीय अवसंरचना

  • त्वरित परियोजना अनुमोदन

  • रोजगार सब्सिडी

  • सहायक शासन प्रणाली

रोजगार सब्सिडी में वृद्धि
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को प्रोत्साहित करने के लिए मासिक रोजगार लागत सब्सिडी में वृद्धि की घोषणा की—

  • पुरुष श्रमिकों के लिए ₹5,000 से बढ़ाकर ₹6,000

  • महिला श्रमिकों के लिए ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,000

इस कदम से क्षेत्र को श्रमिक अनुकूल बनाया जाएगा और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।

ओडिशा-टेक्स 2025 सम्मेलन

ओडिशा-टेक्स 2025 सम्मेलन राज्य की निवेश क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच बना। इसमें 650 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें वैश्विक वस्त्र ब्रांड, प्रौद्योगिकी प्रदाता, स्टार्टअप्स और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे।

राज्य के उद्योग विभाग के अंतर्गत एक समर्पित टास्क फोर्स भी गठित की गई है, जो सभी MoUs के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी और निवेशकों को पूर्ण सरकारी सहयोग सुनिश्चित करेगी।

रणनीतिक महत्व

इस पहल के माध्यम से ओडिशा पूर्वी भारत के भविष्य के वस्त्र हब के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है। नीतिगत सुधार, आधारभूत संरचना विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात बाजार को मजबूत करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में भी योगदान देगा।

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