जुलाई में भारत का कच्चे तेल का आयात 18 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा

भारत के कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) आयात में जुलाई 2025 में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आँकड़ों के अनुसार, आयात माह-दर-माह (MoM) 8.7% घटकर 1.856 करोड़ मीट्रिक टन रह गया, जो फरवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस कमी के पीछे घरेलू ईंधन माँग में गिरावट, भू-राजनीतिक व्यापार तनाव और ख़ासकर रूसी तेल की ख़रीदारी से जुड़े नए आयात पैटर्न जिम्मेदार रहे।

आयात और खपत के प्रमुख आँकड़े

  • कच्चा तेल आयात (Crude Imports)

    • MoM गिरावट: 8.7%

    • YoY गिरावट: 4.3% (जुलाई 2024 के 1.94 करोड़ टन से घटकर 1.856 करोड़ टन)

  • पेट्रोलियम उत्पाद (Oil Products)

    • आयात: 12.8% की गिरावट से 43.1 लाख टन

    • निर्यात: 2.1% की गिरावट से 50.2 लाख टन

  • ईंधन खपत (Fuel Consumption)

    • MoM गिरावट: 4.3% से घटकर 1.943 करोड़ टन

(ये आँकड़े संकेत देते हैं कि जुलाई 2025 में पेट्रोलियम क्षेत्र की गतिविधियों में समग्र रूप से सुस्ती रही।)

भू-राजनीतिक और व्यापारिक कारण

अमेरिका का रूसी तेल पर दबाव

  • भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जारी रखने पर अमेरिका ने दबाव बढ़ा दिया है।

  • 27 अगस्त से भारत के निर्यात पर 50% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी है।

  • पहले से ही 25% टैरिफ लगाया जा चुका है।

भारत की स्थिति

  • वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अपने अमेरिका व्यापार संबंधों को “खुले मन” से आगे बढ़ाएगा।

रूसी तेल की ओर वापसी

  • बढ़ते दबाव के बावजूद, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों ने सितंबर और अक्टूबर के लिए सस्ते दाम पर रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है, क्योंकि छूट का लाभ और बढ़ गया है।

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत का कोयला आयात मामूली बढ़ा

भारत के कोयला आयात में वित्त वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) के दौरान 1.5% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में आयात बढ़कर 76.40 मिलियन टन (एमटी) हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 75.26 एमटी था। यह बढ़ोतरी सरकार द्वारा घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर देने के बावजूद हुई, जिसका मुख्य कारण मौसमी और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियाँ रहीं, विशेषकर मानसून के महीनों में।

आयात का विवरण (अप्रैल–जून 2025)

मासिक और खंडवार रुझान

  • जून 2025: कोयला आयात बढ़कर 23.91 एमटी हुआ, जो जून 2024 में 22.97 एमटी था।

  • ग़ैर-धातुकर्म (Non-Coking) कोयला: Q1 FY26 में 49.08 एमटी, जो Q1 FY25 के 49.12 एमटी के लगभग बराबर रहा।

  • धातुकर्म (Coking) कोयला: Q1 FY26 में बढ़कर 16.37 एमटी हो गया, जबकि Q1 FY25 में यह 15.45 एमटी था।

जून 2025 में खंडवार आँकड़े

  • ग़ैर-धातुकर्म कोयला: 14.85 एमटी (जून 2024: 14.19 एमटी)

  • धातुकर्म कोयला: 5.78 एमटी (जून 2024: 5.45 एमटी)

(ये आँकड़े mjunction सर्विसेज लिमिटेड द्वारा संकलित किए गए, जो टाटा स्टील और सेल की संयुक्त ई-कॉमर्स इकाई है।)

घरेलू उत्पादन की चुनौतियाँ

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का प्रदर्शन

  • सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड, जो देश की कुल कोयला आपूर्ति का 80% से अधिक करती है, ने जून 2025 में 8.5% की गिरावट दर्ज की।

  • उत्पादन घटकर 57.8 एमटी रहा, जबकि जून 2024 में यह 63.1 एमटी था।

मानसून का प्रभाव

  • कंपनी ने कोई विशेष कारण नहीं बताया, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार मानसून से खनन कार्य प्रभावित हुआ, जिससे उत्पादन और बिजलीघरों तक आपूर्ति धीमी पड़ी।

सरकारी प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय दृष्टिकोण

कोयला उपलब्धता का आश्वासन

  • कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आश्वासन दिया कि मानसून के दौरान देश में कोयले की कोई कमी नहीं होगी और सरकार बिजली एवं औद्योगिक क्षेत्रों की माँग पूरी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दीर्घकालिक नीति दिशा
कोयला मंत्रालय ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई:

  • सतत कोयला उत्पादन सुनिश्चित करना

  • आयात पर निर्भरता कम करना

  • घरेलू आपूर्ति मज़बूत करना

इसके लिए सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर, मैकेनाइज्ड निकासी (evacuation) और नई खदानों में निवेश कर रही है ताकि आपूर्ति-पक्ष की क्षमता को सुदृढ़ बनाया जा सके।

भारत में 2035 तक 9.5 ट्रिलियन डॉलर का वित्तीय प्रवाह होगा: गोल्डमैन सैक्स

भारत की घरेलू वित्तीय बचत को लेकर गोल्डमैन सैक्स ने एक बड़ा अनुमान जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दस वर्षों (2025–2035) में घरेलू वित्तीय बचत से 9.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि वित्तीय परिसंपत्तियों में प्रवाहित होगी। यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था में भौतिक संपत्तियों (जैसे सोना और रियल एस्टेट) से वित्तीय साधनों की ओर झुकाव को दर्शाता है और वित्तीयकरण (financialization) एवं पूंजी बाज़ार की गहराई (capital market deepening) के एक अहम चरण को इंगित करता है।

गोल्डमैन सैक्स रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

1. जीडीपी में वित्तीय बचत की हिस्सेदारी में वृद्धि

  • अगले दशक में भारत की घरेलू वित्तीय बचत औसतन जीडीपी का 13% रहने का अनुमान है।

  • पिछले 10 वर्षों का औसत मात्र 11.6% रहा था।

  • इस वृद्धि का कारण है: बढ़ती आय, वित्तीय साक्षरता में सुधार और वित्तीय बाज़ारों तक बेहतर पहुँच।

2. अनुमानित प्रवाह (Inflows) का विभाजन

  • दीर्घकालिक बचत उत्पाद (बीमा, पेंशन, सेवानिवृत्ति निधि): 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक

  • बैंक जमा: 3.5 ट्रिलियन डॉलर

  • इक्विटी और म्यूचुअल फंड्स: 0.8 ट्रिलियन डॉलर
    यह पुनर्वितरण दर्शाता है कि लोग भौतिक संपत्तियों से हटकर संगठित वित्तीय उत्पादों और बाज़ारों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

1. कॉर्पोरेट विकास के लिए मज़बूत पूंजी

  • कंपनियों को घरेलू बचत से स्थिर फंडिंग उपलब्ध होगी।

  • पूंजीगत व्यय (capex) चक्र को गति मिलेगी।

  • विदेशी ऋण पर निर्भरता और चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा।

2. दीर्घकालिक बॉन्ड बाज़ार का विकास

  • घरेलू वित्तीय बचत से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड बाज़ार को मज़बूती मिलेगी।

  • ब्याज दरें समय के साथ कम होंगी।

  • अवसंरचना विकास के लिए लंबे कार्यकाल वाले बॉन्ड को समर्थन मिलेगा।

3. खुदरा निवेश और वेल्थ मैनेजमेंट को बढ़ावा

  • अधिक खुदरा निवेशक पूंजी बाज़ार में भाग लेंगे।

  • वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं और वित्तीय सलाहकारों की माँग बढ़ेगी।

  • निवेश पैटर्न में वित्तीय समावेशन और परिपक्वता आएगी।

भौतिक से वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर बदलाव

गोल्डमैन सैक्स ने ज़ोर देकर कहा कि भारत में भी वही रुझान उभर रहा है जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं में देखा गया था—

  • लोग धीरे-धीरे सोना और रियल एस्टेट जैसी पारंपरिक बचत से हटकर पेंशन फंड, बीमा और इक्विटी बाज़ार जैसे वित्तीय उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं।

  • इस बदलाव के पीछे कारण हैं:

    • वित्तीय बाज़ारों तक अधिक पहुँच

    • महँगाई दरों में गिरावट

    • डिजिटल अवसंरचना में सुधार

    • अधिक पारदर्शी निवेश विकल्प

भारत की यह दिशा वैश्विक रुझानों से मेल खाती है और आने वाले वर्षों में देश की वित्तीय प्रणाली और भी परिपक्व होने की संभावना है।

भारत, जापान ने स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को गहरा किया

भारत और जापान ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी बढ़ती साझेदारी को और मज़बूत किया है। इसके तहत 25 अगस्त 2025 को आयोजित भारत-जापान ऊर्जा संवाद (Ministerial-level India-Japan Energy Dialogue) में दोनों देशों ने भाग लिया, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुआ। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विद्युत एवं आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल तथा जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री श्री मुतो योजी ने की। यह संवाद दोनों देशों के बीच जापान-भारत स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी (Clean Energy Partnership) के रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।

संस्थागत ढांचा और रणनीतिक संवाद

स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी की दिशा में कदम
भारत और जापान ने सहयोग को मज़बूती देने के लिए इसे संस्थागत रूप दिया है, जिसमें शामिल हैं:

  • भारत-जापान ऊर्जा संवाद

  • कई क्षेत्र-विशेष संयुक्त कार्य समूह (JWGs), जो भारत के विद्युत मंत्रालय (MoP), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) और कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत हैं।

बैठक में इन मंत्रालयों ने संयुक्त परियोजनाओं, नीतिगत पहलों और तकनीकी आदान-प्रदान पर प्रगति की जानकारी दी, जो साझा ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में सहायक हैं।

2025 ऊर्जा संवाद के प्रमुख परिणाम

दोनों देशों के मंत्रियों ने:

  • ऊर्जा सुरक्षा और समावेशी आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, और सतत विकास में ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया।

  • निम्न क्षेत्रों में प्रगति का स्वागत किया:

    • ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकियाँ

    • स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया-आधारित ईंधन

    • सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार

  • आगे सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, खासकर इन उभरते क्षेत्रों में:

    • कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS)

    • ग्रीन केमिकल्स और बायोफ्यूल्स

    • उन्नत ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ, जैसे ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण

यह व्यापक सहयोग दोनों देशों में कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को गति देगा, साथ ही महत्वपूर्ण तकनीकों में नवाचार और निवेश को भी बढ़ावा देगा।

इस साझेदारी का महत्व

भारत-जापान ऊर्जा सहयोग दोनों देशों की पेरिस समझौते के तहत जलवायु प्रतिबद्धताओं से मेल खाता है—जापान ने 2050 तक और भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। जापान की ऊर्जा नवाचार क्षमता और भारत के तेज़ी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा बाज़ार के बीच यह साझेदारी दोनों के लिए लाभकारी है।

यह सहयोग व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति को भी मज़बूत करता है, जो सतत विकास, ऊर्जा पहुंच और लचीलापन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

Fitch ने स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की ‘बीबीबी-’ रेटिंग बरकरार रखी

अपनी ताज़ा समीक्षा में फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग (IDR) को ‘BBB-’ स्थिर दृष्टिकोण के साथ बरकरार रखा है। यह निर्णय, जो 25 अगस्त 2025 को जारी किया गया, भारत की मज़बूत विकास दर, सुदृढ़ बाहरी वित्तीय स्थिति और स्थिर व्यापक आर्थिक ढाँचे (macroeconomic framework) को मान्यता देता है। साथ ही, यह दर्शाता है कि अल्पकालिक जोखिमों के बावजूद भारत की दीर्घकालिक आर्थिक बुनियाद पर फिच को पूरा विश्वास है।

विकास परिदृश्य और संरचनात्मक मजबूती

GDP अनुमान

  • फिच ने अनुमान लगाया है कि भारत की GDP वृद्धि दर 2024–25 और 2025–26 में 6.5% रहेगी, जो BBB रेटिंग वाले देशों के औसत 2.5% से कहीं अधिक है।

  • इस मजबूती का आधार है –

    • मज़बूत घरेलू मांग

    • सार्वजनिक पूंजीगत व्यय

    • स्थिर निजी खपत

हालाँकि, निजी निवेश वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापारिक जोखिमों के कारण मध्यम स्तर पर रहने की संभावना जताई गई है।

दीर्घकालिक लाभ
फिच ने कहा कि भारत की राजकोषीय स्थिरता (fiscal consolidation) और बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक विश्वसनीयता आने वाले वर्षों में प्रति व्यक्ति आय (GDP per capita) जैसे संरचनात्मक संकेतकों में सुधार करेगी और सरकारी ऋण (government debt) का स्तर धीरे-धीरे घटेगा।

बाहरी जोखिम: अमेरिकी टैरिफ और आपूर्ति श्रृंखला

  • अमेरिका द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव (27 अगस्त 2025 से लागू होने की संभावना) भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  • भारत के GDP पर इसका सीधा असर सीमित (लगभग 2%) होगा क्योंकि अमेरिका को निर्यात केवल GDP का छोटा हिस्सा है।

  • लेकिन इससे व्यवसायिक भावना (business sentiment) और विदेशी निवेश (FDI) प्रभावित हो सकता है।

  • यदि भारत पर लगाए गए शुल्क एशियाई प्रतिस्पर्धियों से अधिक रहे, तो चीन से हटती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का लाभ उठाने की भारत की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता: मुद्रास्फीति और वित्तीय रुझान

मुद्रास्फीति पर नियंत्रण

  • जुलाई 2025 में मुख्य मुद्रास्फीति (headline inflation) 1.6% रही, जिसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट है।

  • कोर मुद्रास्फीति लगभग 4% पर स्थिर है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 2–6% लक्ष्य दायरे में है।

RBI की नीतिगत पहलें

  • RBI ने फरवरी से जून 2025 के बीच रेपो दर (Repo Rate) में 100 आधार अंक (bps) की कटौती कर इसे 5.5% कर दिया।

  • फिच को उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक RBI इसे और 25 आधार अंक घटाकर 5.25% कर सकता है।

बारबाडोस में भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व करेंगे ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला 5 से 12 अक्टूबर 2025 तक ब्रिजटाउन, बारबाडोस में आयोजित होने वाले 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (CPC) में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) द्वारा आयोजित किया जाता है और इसमें 180 CPA शाखाओं से सांसद लोकतंत्र, सुशासन और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल और तैयारियाँ

उच्च स्तरीय प्रतिनिधित्व
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे –

  • राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी और सचिव

  • CPA इंडिया रीजन के प्रतिनिधि

सम्मेलन से पूर्व, अध्यक्ष बिड़ला ने संसद भवन में एक अंतर-मंत्रालयी बैठक की, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों ने सम्मेलन के एजेंडे, विषयगत सत्रों और भारत की भूमिका की जानकारी दी।

सम्मेलन का विषय और भारत की भागीदारी

वैश्विक संवाद पर जोर
68वें CPC का विषय है – “The Commonwealth: A Global Partner” (राष्ट्रमंडल: एक वैश्विक साझेदार)।
अध्यक्ष ओम बिड़ला आम सभा को संबोधित करेंगे और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं तथा संसदीय नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डालेंगे।

थीमेटिक कार्यशालाएँ
भारतीय प्रतिनिधि सात कार्यशालाओं में भाग लेंगे, जिनमें मुख्य विषय होंगे –

  • लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करना

  • शासन में प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • जलवायु परिवर्तन और जन स्वास्थ्य

  • वित्तीय पारदर्शिता

  • शक्तियों का पृथक्करण

  • बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग

इन सत्रों में भारत अपने अनुभव साझा करेगा और अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ प्रथाओं से सीख लेगा।

युवा गोलमेज सम्मेलन: भविष्य के नेताओं को सशक्त बनाना

युवा सुरक्षा और सशक्तिकरण पर केंद्रित
विशेष Youth Roundtable सत्र में आधुनिक सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा होगी, जैसे –

  • गैंग हिंसा

  • साइबर बुलिंग

  • डिजिटल सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य

यह पहल CPA की समावेशी संवाद की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारत की युवा शक्ति मिशन तथा डिजिटल इंडिया जैसी पहलों से जुड़ती है।

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (CPC) के बारे में

संसदीय आदान-प्रदान की परंपरा
CPC विश्व का सबसे बड़ा वार्षिक संसदीय सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य है –

  • विधायी नवाचारों का आदान-प्रदान

  • लोकतांत्रिक मानकों को मज़बूत करना

  • सहयोगात्मक शासन मॉडल को बढ़ावा देना

1911 में स्थापित CPA संसदीय लोकतंत्र को प्रोत्साहित करने और सदस्य देशों की विधायी क्षमताओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में 5,400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अगस्त 2025 को अपने गृह राज्य गुजरात में विकास की एक बड़ी पहल की। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिनकी कुल लागत ₹5,400 करोड़ से अधिक है। इन पहलों में रेलवे, सड़क, बिजली वितरण, आवास और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जो गुजरात को एकीकृत अवसंरचना विकास का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में मज़बूत कदम हैं।

रेलवे आधुनिकीकरण और कनेक्टिविटी

₹1,400 करोड़ की रेलवे परियोजनाएँ

  • महेसाणा–पालनपुर 65 किमी लाइन का दोहरीकरण – ₹530 करोड़

  • कलोल–कड़ी–काटोसण रोड और बेचराजी–रनुज लाइन का गेज परिवर्तन – ₹860 करोड़

इनसे यात्रियों को सुविधा, मालगाड़ियों की तेज़ आवाजाही और उत्तर गुजरात की औद्योगिक तथा कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

नई रेल सेवाएँ

  • काटोसण रोड–साबरमती यात्री ट्रेन – धार्मिक स्थलों और स्थानीय बाज़ारों तक आसान पहुँच

  • बेचराजी से कार-लोडेड मालगाड़ी सेवा – औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा

सड़क और शहरी अवसंरचना

  • वीरमगाम–खुदाद–रामपुरा मार्ग का चौड़ीकरण

  • अहमदाबाद–महेसाणा–पालनपुर मार्ग पर छह-लेन अंडरपास

  • अहमदाबाद–वीरमगाम रेल ओवरब्रिज

  • सरदार पटेल रिंग रोड चौड़ीकरण की आधारशिला – अहमदाबाद के यातायात दबाव को कम करने हेतु

  • जलापूर्ति और सीवरेज सुधार परियोजनाएँ – सतत शहरी जीवन को समर्थन

बिजली क्षेत्र में आधुनिकीकरण

UGVCL परियोजनाएँ (₹1,000 करोड़)
अहमदाबाद, महेसाणा और गांधीनगर में बिजली वितरण सुधार आरंभ।
मुख्य लाभ:

  • ट्रांसमिशन लॉस में कमी

  • प्रतिकूल मौसम में मज़बूत ग्रिड

  • सुरक्षित ट्रांसफॉर्मर मानक

  • विश्वसनीय एवं कुशल विद्युत आपूर्ति

आवास और सामाजिक कल्याण

पीएम आवास योजना (शहरी)
अहमदाबाद के रामापीर नो टेकरो क्षेत्र में इन-सिचू स्लम पुनर्विकास परियोजना का शुभारंभ।
लाभ:

  • शहरी गरीबों को गरिमापूर्ण आवास

  • मूलभूत सुविधाओं तक बेहतर पहुँच

  • अनौपचारिक बस्तियों का औपचारिक आवास में रूपांतरण

डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक सेवाएँ

  • अहमदाबाद पश्चिम में स्टाम्प्स एंड रजिस्ट्रेशन भवन – संपत्ति दस्तावेज़ और नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता

  • गांधीनगर में राज्य स्तरीय डेटा स्टोरेज केंद्र – डेटा सुरक्षा और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा

यह सुधार गुजरात की डिजिटल परिवर्तन यात्रा का हिस्सा हैं, जो पारदर्शी और प्रभावी सार्वजनिक सेवा डिलीवरी सुनिश्चित करेंगे।

MCA ने गावस्कर की प्रतिमा का अनावरण किया, शरद पवार को सम्मानित किया

मुंबई क्रिकेट संघ (MCA) ने 23 अगस्त 2025 को वानखेड़े स्टेडियम में एक ऐतिहासिक पहल की। भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों को श्रद्धांजलि देते हुए, MCA ने पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गवासकर की प्रतिमा का अनावरण किया और शरद पवार क्रिकेट संग्रहालय का उद्घाटन किया। यह कदम मुंबई की समृद्ध क्रिकेट परंपरा को सलाम करता है, जहाँ एक महान बल्लेबाज़ और एक दूरदर्शी प्रशासक दोनों के योगदान को सम्मानित किया गया।

सुनील गवासकर: कांस्य में अमर

प्रतिमा और आत्मीय स्मृतियाँ
भारतीय क्रिकेट के “मूल बल्लेबाज़ी शिल्पकार” कहे जाने वाले गवासकर अपनी जीवन-आकार की प्रतिमा देखकर भावुक हो उठे। यह प्रतिमा संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर स्थापित की गई है, जिसमें वह प्रसिद्ध शॉट दर्शाया गया है जिसके दम पर गवासकर ने 10,000 टेस्ट रन पूरे किए थे।

गवासकर ने मुंबई को अपनी “माँ” बताते हुए कहा कि यही शहर उनके क्रिकेट करियर की जन्मभूमि रहा है, जहाँ से वह स्कूल क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचे।
उन्होंने कहा – “जब भी कोई संग्रहालय में प्रवेश करेगा, सबसे पहले यह प्रतिमा दिखाई देगी। यह मेरे लिए बहुत खास है।”

शरद पवार क्रिकेट संग्रहालय: प्रशासन और विरासत को समर्पण

दूरदर्शी नेता का सम्मान
MCA ने पूर्व अध्यक्ष और बीसीसीआई (BCCI) के प्रमुख रह चुके शरद पवार की प्रतिमा का भी अनावरण किया और संग्रहालय को उनके नाम से समर्पित किया। यह संग्रहालय उन प्रशासकों के योगदान को प्रदर्शित करता है जिन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रशासन को पेशेवर दिशा दी।

संग्रहालय की प्रमुख झलकियाँ:

  • बापू नाडकर्णी का ब्लेज़र और रोहित शर्मा की विश्व कप टी-शर्ट जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के अवशेष।

  • BEST बस और ट्रेन सेक्शन, जो मुंबई की रोज़मर्रा की जद्दोजहद और क्रिकेट यात्राओं का प्रतीक है।

  • पुनर्जीवित कंगा लीग लाइब्रेरी, जिसमें मुंबई के मशहूर मॉनसून टूर्नामेंट का ऐतिहासिक संग्रह सुरक्षित है।

यह संग्रहालय नॉस्टेल्जिया और आधुनिक कहानी कहने का मेल है, जो युवाओं को प्रेरित करेगा और शहर की खेल संस्कृति को जीवंत बनाएगा।

दादर यूनियन कैप: अंधविश्वास और प्रतीक

गवासकर की मेलबर्न स्मृति
गवासकर ने 1981 की ऑस्ट्रेलिया टेस्ट श्रृंखला की एक याद साझा की। मेलबर्न टेस्ट में उन्होंने भारतीय टीम की टोपी नहीं, बल्कि अपनी दादर यूनियन क्लब की कैप पहनी थी, जिसे वह “लकी” मानते थे। उस मैच में भारत ने शानदार जीत दर्ज की, जिसमें कपिल देव ने बीमार होने के बावजूद 5 विकेट चटकाए थे।

गवासकर ने बताया कि यह कैप केवल सौभाग्य का प्रतीक नहीं थी, बल्कि उनके जड़ों और मुंबई क्रिकेट की ताकत का भी स्मरण कराती थी।

RBI ने दर नियंत्रण को मजबूत करने के लिए तरलता ढांचे की समीक्षा की

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2025 में तरलता प्रबंधन ढाँचे (Liquidity Management Framework) की समीक्षा करते हुए अपनी आंतरिक कार्य समूह (IWG) की प्रमुख सिफारिशें जारी कीं। इस समीक्षा का उद्देश्य तरलता प्रबंधन के परिचालन उपकरणों को और प्रभावी बनाना, अल्पकालिक ब्याज दरों पर RBI का नियंत्रण मज़बूत करना तथा बाज़ार स्थिरता और मौद्रिक नीति के बेहतर प्रसारण (Transmission) को सुनिश्चित करना है।

14-दिवसीय वेरिएबल रेट रेपो को समाप्त करना

तरलता प्रबंधन संचालन में बदलाव

आईडब्ल्यूजी (IWG) ने 14-दिवसीय वेरिएबल रेट रेपो/रिवर्स रेपो को मुख्य तरलता संचालन के रूप में समाप्त करने का सुझाव दिया है। इसके पीछे कारण बताए गए हैं –

  • बैंकों की दो सप्ताह तक अधिशेष धनराशि को लॉक करने में अनिच्छा।

  • सरकारी नकदी प्रवाह और मुद्रा गतिविधियों की अनिश्चितता के कारण पूर्वानुमान संबंधी कठिनाइयाँ।

इसके स्थान पर, आरबीआई साप्ताहिक संचालन पर निर्भर कर सकता है और अल्पकालिक तरलता में उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए फाइन-ट्यूनिंग उपकरणों का उपयोग कर सकता है।

WACR को परिचालन लक्ष्य के रूप में बनाए रखना

कॉल रेट बनाम बाजार गतिविधि

आरबीआई मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य के रूप में भारित औसत कॉल रेट (WACR) का उपयोग जारी रखेगा, भले ही ओवरनाइट कॉल मनी बाजार की गतिविधि में गिरावट आई हो।

  • संकीर्ण ब्याज दर गलियारे ने अंतर-बैंक ट्रेडिंग को हतोत्साहित किया है।

  • बैंक अब बाजार-आधारित लेनदेन की बजाय आरबीआई की तरलता विंडो को प्राथमिकता देते हैं।

रिपोर्ट गलियारे की चौड़ाई में संतुलन बनाने की सिफारिश करती है ताकि दरों की स्थिरता और बाजार की सक्रियता दोनों सुनिश्चित की जा सकें।

आरक्षित आवश्यकताएँ और औसत तंत्र

अंतर-बैंक दरों को स्थिर करना

आईडब्ल्यूजी ने निम्नलिखित पर जोर दिया है –

  • न्यूनतम आरक्षित आवश्यकताएँ।

  • रखरखाव अवधि में औसत की सुविधा।

ये उपकरण मुद्रा और सरकारी नकदी प्रवाह से उत्पन्न झटकों को अवशोषित करने में मदद करते हैं। लेकिन बैंक अक्सर दैनिक आधार पर अतिरिक्त आरक्षित रखते हैं, जिससे इसका वास्तविक लाभ कम हो जाता है। एक कम दैनिक आरक्षित न्यूनतम स्तर आर्बिट्राज को प्रोत्साहित कर सकता है और कॉल रेट में उतार-चढ़ाव घटा सकता है।

स्टैंडअलोन प्राइमरी डीलर्स (SPD) की भूमिका पर ध्यान

बाजार अस्थिरता और भागीदारी

स्टैंडअलोन प्राइमरी डीलर्स (SPDs) कॉल मनी दर की अस्थिरता में योगदान देते हैं क्योंकि –

  • वे भारी उधारी करते हैं लेकिन मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) तक पहुँच नहीं रखते।

  • तरलता की कमी के समय दरें गलियारे की सीमा से ऊपर चली जाती हैं।

आईडब्ल्यूजी, SPDs को MSF की पहुँच देने के खिलाफ है, लेकिन सुझाव देता है कि धीरे-धीरे उनकी कॉल मार्केट में भागीदारी समाप्त की जाए और सरकारी प्रतिभूति (G-sec) बाजार में उनकी भूमिका के लिए वैकल्पिक तरलता साधन उपलब्ध कराए जाएँ।

संरचनात्मक अधिशेष तरलता: एक प्रमुख चुनौती

परिचालन लक्ष्य बनाम नीतिगत दर

भारत की लगातार अधिशेष तरलता के कारण WACR, नीतिगत रेपो दर से अलग हो गया है और कभी-कभी गलियारे की सीमाओं को भी पार कर गया है। इससे नीतिगत दर का प्रसारण प्रभावित होता है।

  • WACR को नीतिगत दर के करीब बनाए रखना आवश्यक है।

  • बेहतर तरलता पूर्वानुमान और उपकरणों में लचीलापन जरूरी है।

  • आरबीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका परिचालन लक्ष्य मौद्रिक रुख के अनुरूप रहे।

गलियारे की चौड़ाई: पुनर्मूल्यांकन का समय

उभरती अर्थव्यवस्थाओं से तुलनात्मक अध्ययन

भारत का 50 आधार अंक का गलियारा, अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में संकरा है। यह जहाँ अस्थिरता को कम करता है, वहीं –

  • अंतर-बैंक बाजार गतिविधि को दबाता है।

  • बाजार-आधारित तरलता प्रसारण को घटाता है।

आईडब्ल्यूजी ने एक प्रायोगिक अध्ययन (empirical study) की सिफारिश की है ताकि इन समझौतों का मूल्यांकन किया जा सके और मौद्रिक संचालन को बेहतर बनाने के लिए गलियारे की चौड़ाई में संभावित समायोजन किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आराधे और पंचोली को शीर्ष अदालत में पदोन्नति की सिफारिश की

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI बी.आर. गवई) की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 25 अगस्त 2025 को एक अहम कदम उठाते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की अनुशंसा की। इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने पर, सुप्रीम कोर्ट अपने स्वीकृत पूर्ण 34 न्यायाधीशों की संख्या पर वापस आ जाएगा।

कॉलेजियम की बैठक

अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट के पांच-सदस्यीय कॉलेजियम की बैठक में की गई, जिसमें शामिल थे:

  • मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई

  • न्यायमूर्ति सूर्यकांत

  • न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

  • न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी

  • न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना

निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया।

न्यायमूर्ति आलोक अराधे कौन हैं?

करियर और पृष्ठभूमि

  • वर्तमान पद: मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे हाई कोर्ट (21 जनवरी 2025 से)

  • मूल उच्च न्यायालय: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट

  • अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्ति: 29 दिसंबर 2009

  • स्थायी न्यायाधीश बने: 15 फरवरी 2011

प्रमुख पद

  • कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट (मई 2018)

  • कर्नाटक हाई कोर्ट में स्थानांतरित; 2022 में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे

  • कई उच्च न्यायालयों में कार्य करते हुए, अपनी कानूनी समझ और प्रशासनिक दक्षता के लिए प्रसिद्ध

न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली कौन हैं?

करियर की प्रमुख उपलब्धियां

  • वर्तमान पद: मुख्य न्यायाधीश, पटना हाई कोर्ट (24 जुलाई 2025 से)

  • मूल उच्च न्यायालय: गुजरात हाई कोर्ट

  • अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्ति: 1 अक्टूबर 2014

  • स्थायी न्यायाधीश बने: 10 जून 2016

उल्लेखनीय अनुभव

  • गुजरात में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक रहे

  • अहमदाबाद स्थित सर एल.ए. शाह लॉ कॉलेज में 21 वर्षों तक अतिथि प्राध्यापक रहे

भविष्य के CJI

अगर वरिष्ठता क्रम में बदलाव नहीं हुआ, तो न्यायमूर्ति पंचोली 3 अक्टूबर 2031 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनेंगे और 27 मई 2033 तक इस पद पर रहेंगे।

इस अनुशंसा का महत्व

न्यायिक मजबूती और निरंतरता

  • वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में दो रिक्तियां हैं

  • न्यायमूर्ति अराधे और पंचोली की नियुक्ति से पूर्ण शक्ति 34 न्यायाधीश बहाल होगी

  • इससे लंबित मामलों का बोझ घटेगा और न्यायिक क्षमता में वृद्धि होगी

व्यापक प्रभाव

  • दोनों न्यायाधीशों ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में कार्य किया है

  • प्रशासनिक नेतृत्व और कानूनी विद्वता के साथ सुप्रीम कोर्ट की पीठ को मजबूत करेंगे

  • न्यायपालिका में अनुभव और विविधता का प्रतिनिधित्व

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