बढ़ते आयात का असर, भारत का व्यापार घाटा 27.1 अरब डॉलर हुआ

भारत का व्यापार घाटा फरवरी 2026 में बढ़कर 27.1 अरब डॉलर हो गया है। इसका मुख्य कारण आयात में तेज वृद्धि और निर्यात में हल्की गिरावट है। वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस महीने भारत का निर्यात 36.61 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.81% कम है। वहीं, आयात 24% बढ़कर 63.71 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण सोना और चांदी की अधिक खरीद है।

भारत का व्यापार घाटा: फरवरी 2026

फरवरी 2026 में भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में काफी बढ़ गया है। यह 27.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो फरवरी 2025 के 14 अरब डॉलर से लगभग दोगुना है। व्यापार घाटा तब होता है जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक हो जाता है, जिससे नकारात्मक व्यापार संतुलन बनता है।

फरवरी में आयात बढ़कर 63.71 अरब डॉलर

व्यापार घाटा बढ़ने का एक प्रमुख कारण आयात में तेज वृद्धि है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में आयात 24% बढ़कर 63.71 अरब डॉलर हो गया। इस वृद्धि का मुख्य कारण सोना और चांदी की अधिक खरीद रही।

वैश्विक चुनौतियों के बीच निर्यात में हल्की गिरावट

फरवरी 2026 में भारत का निर्यात 36.61 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.81% की गिरावट दर्शाता है। यह गिरावट वैश्विक व्यापार परिस्थितियों में चल रही चुनौतियों को दर्शाती है।

पश्चिम एशिया संकट और लॉजिस्टिक्स बाधाओं का प्रभाव

अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम भारत के व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं। इस क्षेत्र की स्थिति ने वैश्विक शिपिंग मार्गों में बाधा उत्पन्न की है और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ा दी है। विशेष रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति ने माल परिवहन को धीमा कर दिया है और परिवहन खर्च में वृद्धि की है।

नागोया प्रोटोकॉल: भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी

भारत ने नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) के तहत अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) को सौंपी है। यह रिपोर्ट 27 फरवरी 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के सहयोग से प्रस्तुत की। इसमें 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 तक भारत की प्रगति को दर्शाया गया है।

नागोया प्रोटोकॉल रिपोर्ट: वैश्विक महत्व

  • यह रिपोर्ट प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 29 के तहत प्रस्तुत की गई है, जिसके अनुसार देशों को पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS) नियमों के क्रियान्वयन की प्रगति बतानी होती है।
  • नागोया प्रोटोकॉल यह सुनिश्चित करता है कि जैव संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और समान वितरण हो।
  • यह भारत की CBD के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति (NBSAP) के लक्ष्य 13 को पूरा करने के प्रयासों को दर्शाता है।

भारत में ABS का कानूनी ढांचा

भारत में पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS) ढांचा जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत संचालित होता है। यह अधिनियम देश में जैव संसाधनों के प्रबंधन के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। इस ढांचे को जैव विविधता नियम, 2024 और ABS Regulations, 2025 का समर्थन प्राप्त है, जो विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं। साथ ही, यह प्रणाली एक तीन-स्तरीय संस्थागत संरचना का पालन करती है, जिसमें राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित कर जैव विविधता प्रबंधन को मजबूत बनाया जाता है।

तीन-स्तरीय जैव विविधता शासन प्रणाली

भारत में नागोया प्रोटोकॉल के तहत ABS ढांचा एक सुव्यवस्थित संस्थागत प्रणाली के माध्यम से संचालित होता है। यह प्रणाली पूरे देश में जैव विविधता शासन को मजबूत बनाने के लिए बनाई गई है।

इस संरचना में राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर की संस्थाएं शामिल हैं। प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं:

  • राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)
  • राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) और केंद्र शासित प्रदेशों के जैव विविधता परिषदें
  • स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs)

भारत में अब तक 2,76,653 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs) स्थापित की जा चुकी हैं। ये समितियां स्थानीय समुदायों को जैव विविधता संरक्षण और लाभ-साझाकरण (Benefit Sharing) की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करती हैं।

ABS से प्राप्त वित्तीय लाभ

भारत में नागोया प्रोटोकॉल के तहत ABS ढांचे के कार्यान्वयन से जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों को महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ प्राप्त हुए हैं। इस प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्वीकृतियों से ₹216.31 करोड़ की राशि संचित की गई है।

इसके अलावा, ₹139.69 करोड़ की राशि लाभार्थियों—जिनमें स्थानीय समुदाय, किसान और पारंपरिक ज्ञान धारक शामिल हैं—को वितरित की गई है। वहीं, राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) की स्वीकृतियों के माध्यम से ₹51.96 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी उत्पन्न की गई है।

यह वित्तीय उपलब्धियां दर्शाती हैं कि भारत में ABS तंत्र न केवल जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

नागोया प्रोटोकॉल क्या है?

नागोया प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसे वर्ष 2010 में जैव विविधता पर अभिसमय के तहत अपनाया गया था। यह समझौता आनुवंशिक संसाधनों (Genetic Resources) तक पहुंच (Access) और उनके उपयोग से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत एवं समान वितरण (Access and Benefit Sharing – ABS) पर केंद्रित है। इस प्रोटोकॉल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब किसी देश या आदिवासी/स्थानीय समुदाय के जैव संसाधनों या पारंपरिक ज्ञान का उपयोग अनुसंधान, औषधि, कृषि या जैव प्रौद्योगिकी में किया जाए, तो उन्हें उचित लाभ प्राप्त हो। साथ ही, यह समझौता वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देते हुए सतत जैव विविधता संरक्षण को भी प्रोत्साहित करता है।

डाक सेवाओं में सुधार: इंडिया पोस्ट ने ‘24 स्पीड पोस्ट’ की शुरुआत की

डाक विभाग 17 मार्च 2026 से नई ’24 स्पीड पोस्ट’ सेवा शुरू करने जा रहा है। यह प्रणाली तत्काल पार्सलों की अगले दिन गारंटीशुदा डिलीवरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। यह सेवा शुरू में छह प्रमुख शहरों में संचालित होगी, जो हैं—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद। इस सेवा का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन के रंगभवन सभागार में होगा।

छह प्रमुख शहरों में सेवाएं शुरू की गईं

शुरुआत में, ये सेवाएं छह शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में शुरू की जा रही हैं। विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रसंस्करण और प्राथमिकता आधारित हवाई परिवहन का उपयोग करेगा। 24 स्पीड पोस्ट सेवा के तहत अगले ही दिन यानी शिपमेंट की डिलीवरी तत्काल और समयबद्ध तरीके से की जाएगी। सबसे खास बात यह है कि डिलीवरी में देरी होने पर मनी-बैक गारंटी भी दी जाएगी।

ग्रामीण डाक सेवा की जमकर तारीफ

केंद्रीय संचार मंत्री इस मौके पर ग्रामीण डाक सेवा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इंडिया पोस्ट के पास दुनिया का सबसे बड़ा और गहरा नेटवर्क है। देश के 6.5 लाख गांवों की हर तहसील और तालुका में लोग परिवार के किसी सदस्य से भी बढ़कर किसी पर भरोसा करते हैं, तो वह ग्रामीण डाक सेवा है। उनके अनुसार, यह इंडिया पोस्ट के लिए एक नई शुरुआत का पल है।

सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान रहेगा

इस सेवा में सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें ग्राहकों को ओटीपी आधारित सुरक्षित डिलीवरी, एसएमएस अलर्ट और एंड-टू-एंड ट्रैकिंग की सुविधा मिलेगी। व्यापारिक ग्राहकों के लिए बाद में भुगतान, भारी मात्रा में बुकिंग के लिए मुफ्त पिकअप और केंद्रीकृत बिलिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

स्मार्ट गांव की दिशा में कदम: कुसुनपुर होगा ओडिशा का पहला स्मार्ट गांव

कुसुनपुर गाँव, ओडिशा (Kusunpur village, Odisha) के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित, राज्य का पहला स्मार्ट गांव बनने जा रहा है। इस पहल को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research) द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत शुरू किया गया है। लगभग 130 परिवारों और 700 की आबादी वाले इस गांव को सतत और आत्मनिर्भर ग्रामीण जीवन के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

कुसुनपुर स्मार्ट गांव परियोजना: दृष्टि और उद्देश्य

कुसुनपुर स्मार्ट गांव परियोजना का उद्देश्य उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक समाधानों को सीधे ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना है। यह पहल मिशन मोड में लागू की जा रही है, जिसमें कई अनुसंधान संस्थान मिलकर व्यावहारिक और विस्तार योग्य समाधान लागू करेंगे। इसका मुख्य लक्ष्य एक आत्मनिर्भर, जलवायु-लचीला (climate resilient) और टिकाऊ गांव का निर्माण करना है, जो पूरे भारत के लिए एक मॉडल बन सके।

CSIR स्मार्ट गांव परियोजना: प्रमुख संस्थान

इस परियोजना में CSIR के अंतर्गत कई विशेषज्ञ संस्थान शामिल हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेंगे:

  • CSIR-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की
  • CSIR-खनिज एवं सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (IMMT), भुवनेश्वर
  • CSIR-केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (CEERI)
  • CSIR-अंतर्विषयक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय संस्थान (NIIST)
  • CSIR-संरचनात्मक इंजीनियरिंग अनुसंधान केंद्र (SERC)
  • CSIR-केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान (CLRI)

कुसुनपुर में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

इस परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा आधुनिक और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे का विकास है। इसके तहत—

  • जलवायु-लचीले स्कूल और आंगनवाड़ी भवन
  • सामुदायिक शौचालयों का निर्माण
  • बेहतर गांव नियोजन और लेआउट
  • बहुउद्देश्यीय चक्रवात शेल्टर का निर्माण

ये सभी सुधार विशेष रूप से ओडिशा जैसे तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा, स्वच्छता और आपदा-प्रबंधन को मजबूत करेंगे।

नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ जीवन समाधान

कुसुनपुर स्मार्ट गांव पहल के तहत स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अंतर्गत—

  • सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग
  • स्वच्छ ईंधन (clean cooking fuel) की उपलब्धता
  • सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था

यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वायु प्रदूषण से निपटने के लिए यूपी में विश्व बैंक और भारत का संयुक्त कार्यक्रम

विश्व बैंक, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल को “उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम” कहा जाता है, जिसमें 299.66 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित उपायों के माध्यम से बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करना है।

उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम: परिचय

  • यह कार्यक्रम परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर केंद्रित है, जो उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।
  • इस योजना के तहत राज्यभर में लगभग 200 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जो उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttar Pradesh Pollution Control Board) के माध्यम से रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएंगे।

कार्यक्रम में विश्व बैंक की भूमिका

  • विश्व बैंक का यह प्रोजेक्ट भारत के साथ पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के व्यापक सहयोग का हिस्सा है।
  • इसके तहत लगभग 150 मिलियन डॉलर का निजी निवेश भी आकर्षित होने की उम्मीद है, जो इलेक्ट्रिक बसों, ई-रिक्शा (तीन पहिया वाहन) और उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों को बढ़ावा देगा।
  • यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के संतुलन का उदाहरण है।

स्वच्छ परिवहन और औद्योगिक उत्सर्जन में कमी

  • इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य परिवहन और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
  • शहरी क्षेत्रों में परिवहन प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, जिसे कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • ये वाहन पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं।

ईंट भट्टों में स्वच्छ तकनीक का उपयोग

  • उत्तर भारत में ईंट भट्टे वायु प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत हैं।
  • नई योजना के तहत 700 से अधिक ईंट भट्टों को स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल तकनीकों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी।

इंडो-गंगेटिक प्लेन्स में क्षेत्रीय पहल

  • यह कार्यक्रम क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम (Regional Air Quality Management Program) का हिस्सा है, जो इंडो-गंगेटिक मैदान और हिमालयी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित है।
  • इंडो-गंगेटिक क्षेत्र विश्व के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक माना जाता है, इसलिए इस पहल का प्रभाव पड़ोसी राज्यों तक भी पहुंचेगा।

परियोजना अवधि और वित्तीय संरचना

  • यह कार्यक्रम कुल 10 वर्षों तक चलेगा, जिसमें 2 वर्ष की ग्रेस अवधि शामिल है।
  • इसे ऊर्जा क्षेत्र प्रबंधन सहायता कार्यक्रम (ESMAP) से तकनीकी और वित्तीय सहायता भी मिलेगी, जो एक वैश्विक बहु-दाता पहल है।

Uniqlo ने Jasprit Bumrah को भारत का ब्रांड एंबेसडर बनाया

यूनिक्लो (Uniqlo) ने भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) को भारत के लिए अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। यह साझेदारी 16 मार्च 2026 को घोषित की गई, जो अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और भारतीय क्रिकेट स्टार के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग है।

यूनिक्लो और जसप्रीत बुमराह की साझेदारी

Uniqlo और जसप्रीत बुमराह के बीच यह साझेदारी भारत में ब्रांड के विस्तार और मार्केटिंग रणनीति का एक अहम कदम है। बुमराह आधुनिक क्रिकेट के सबसे सफल तेज गेंदबाजों में से एक हैं और उनकी लोकप्रियता व विश्वसनीयता ब्रांड को मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेगी।

लाइफवियर (LifeWear) फिलॉसफी पर आधारित अभियान

यह नया अभियान Uniqlo की LifeWear फिलॉसफी पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य ऐसे कपड़े डिजाइन करना है जो रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाएं। LifeWear में आराम, टिकाऊपन और सरल लेकिन आकर्षक डिजाइन पर जोर दिया जाता है।

डिजिटल और रिटेल प्लेटफॉर्म पर लॉन्च

जसप्रीत बुमराह को शामिल करते हुए यह प्रचार अभियान भारत में विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर शुरू किया गया है। इसमें डिजिटल विज्ञापन, सोशल मीडिया प्रमोशन और Uniqlo स्टोर्स पर आउटडोर डिस्प्ले शामिल हैं। इस अभियान का उद्देश्य भारत में ब्रांड की पहचान को मजबूत करना और खासकर युवा वर्ग से जुड़ना है, जो फैशन और खेल दोनों में रुचि रखते हैं।

गुजरात सरकार का बड़ा कदम: पशुधन बचाने के लिए FMD टीकाकरण अभियान लॉन्च

गुजरात सरकार ने पशुधन की सुरक्षा और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए राज्यव्यापी फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) टीकाकरण अभियान शुरू किया है। यह अभियान 1 मार्च से 15 अप्रैल तक पूरे राज्य में चलाया जा रहा है। इसे राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में प्रमुख पशु रोगों को समाप्त करना है।

गुजरात में FMD टीकाकरण अभियान

यह अभियान पशुधन में तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी को रोकने के लिए बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों जैसे पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। राज्यभर में पशु चिकित्सा टीमें गांवों और डेयरी फार्मों में जाकर टीकाकरण और स्वास्थ्य निगरानी कर रही हैं।

फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) क्या है?

फुट एंड माउथ डिजीज (Foot and Mouth Disease) एक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से खुर वाले पशुओं (cloven-hoofed animals) को प्रभावित करता है। यह बीमारी तेजी से फैलती है और पशुओं में बुखार, मुंह में छाले, अत्यधिक लार आना और भूख में कमी जैसे लक्षण पैदा करती है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव दूध उत्पादन में भारी कमी के रूप में देखा जाता है, जिससे डेयरी किसानों को नुकसान होता है।

NADCP की भूमिका

NADCP एक केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य FMD और ब्रुसेलोसिस जैसे रोगों को नियंत्रित और समाप्त करना है। इसके तहत देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं।

INAPH पोर्टल के माध्यम से निगरानी

इस अभियान में पशुधन की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। पशुओं की पहचान ईयर टैगिंग के जरिए की जाती है और उनकी जानकारी INAPH Portal पर अपलोड की जाती है। यह प्रणाली टीकाकरण की प्रगति पर नजर रखने और पशुओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बनाए रखने में मदद करती है।

अरुण मामेन फिर बने ATMA के अध्यक्ष

ऑटोमोटिव टायर निर्माता संघ (ATMA) ने घोषणा की है कि अरुण मामेन को दोबारा चेयरमैन चुना गया है। अरुण मामेन MRF Ltd के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। यह घोषणा 16 मार्च 2026 को की गई, जो भारत के ऑटोमोबाइल टायर क्षेत्र में नेतृत्व के निरंतरता को दर्शाती है।

अरुण मामेन का पुनर्निर्वाचन

  • ATMA के चेयरमैन के रूप में अरुण मामेन का पुनर्निर्वाचन संगठन में नेतृत्व की निरंतरता को दर्शाता है।
  • टायर उद्योग में उनके लंबे अनुभव और नीतिगत चर्चाओं में सक्रिय भूमिका के कारण उनसे 2026 में उद्योग से जुड़ी चुनौतियों—जैसे कच्चे माल की लागत, तकनीकी परिवर्तन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा—से निपटने की उम्मीद है।

ATMA नेतृत्व 2026: उपाध्यक्ष की नियुक्ति

  • ATMA ने राजर्षि मोइत्रा को नया वाइस चेयरमैन नियुक्त किया है।
  • वह ब्रिजस्टोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
  • उनकी नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि ATMA घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को नेतृत्व में शामिल करने की रणनीति अपना रहा है।

संजय चटर्जी बने डायरेक्टर जनरल

  • ATMA के नेतृत्व ढांचे में एक और बदलाव के तहत संजय चटर्जी को डायरेक्टर जनरल बनाया गया है।
  • वह पहले असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल थे और अब संगठन के कार्यकारी संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • वह राजीव बुधराजा का स्थान लेंगे, जो 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होंगे।

ATMA के बारे में

ऑटोमोटिव टायर निर्माता संघ (ATMA) की स्थापना 1975 में हुई थी। यह भारत के टायर निर्माताओं का प्रमुख उद्योग संगठन है, जो नीतिगत वकालत, उद्योग समन्वय और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत ने जैव विविधता संधि को अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की

भारत ने जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) को अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7) प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट जैव विविधता संरक्षण और सतत पर्यावरणीय शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह रिपोर्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 26 फरवरी 2026 को वैश्विक समय-सीमा (28 फरवरी 2026) से पहले जमा की गई।

सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (CBD)

यह रिपोर्ट CBD के तीन मुख्य उद्देश्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करती है:

  • जैव विविधता का संरक्षण
  • प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग
  • आनुवंशिक संसाधनों से लाभ का न्यायसंगत वितरण

यह रिपोर्ट पुष्टि करती है कि भारत ने CBD के अनुच्छेद 26 के तहत अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पालन किया है, जिसके अनुसार सदस्य देशों को समय-समय पर राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है।

वैश्विक जैव विविधता ढांचे के अनुरूप

  • भारत की 2026 की जैव विविधता रिपोर्ट 142 राष्ट्रीय संकेतकों (indicators) पर आधारित है, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को मापते हैं।
  • ये संकेतक 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBTs) से जुड़े हैं।
  • रिपोर्ट कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना है।

राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सभी 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
  • यह भारत की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बीच मजबूत तालमेल को दर्शाता है।
  • साथ ही, बुनियादी ढांचा, कृषि, वानिकी और तटीय पारिस्थितिकी जैसे क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण को शामिल किया गया है।

जैव विविधता संरक्षण में प्रगति

रिपोर्ट में वन और पारिस्थितिकी प्रबंधन में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किए गए हैं:

  • दर्ज वन क्षेत्र: 7,75,377 वर्ग किमी (23.59%)
  • वन आवरण: 5,20,365 वर्ग किमी (15.83%)
  • कुल वन एवं वृक्ष आवरण: 8,27,356.95 वर्ग किमी (25.17%)
  • रामसर आर्द्रभूमि: 2014 में 26 से बढ़कर 2026 में 98

यह प्रगति दीर्घकालिक पर्यावरणीय योजना और मजबूत शासन को दर्शाती है।

वन्यजीव संरक्षण उपलब्धियां

रिपोर्ट में संरक्षित क्षेत्रों और प्रजाति संरक्षण कार्यक्रमों में उल्लेखनीय उपलब्धियां बताई गई हैं:

संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क:

  • 58 टाइगर रिजर्व
  • 33 एलीफेंट रिजर्व
  • 18 बायोस्फीयर रिजर्व
  • 106 राष्ट्रीय उद्यान
  • 574 वन्यजीव अभयारण्य

मुख्य वन्यजीव आंकड़े:

  • 3,682 बाघ (विश्व के 70% से अधिक)
  • 4,014 एक सींग वाले गैंडे
  • 22,446 जंगली हाथी
  • 891 एशियाई शेर
  • 718 हिम तेंदुए (पहली राष्ट्रीय गणना)
  • 6,327 नदी डॉल्फिन (प्रोजेक्ट डॉल्फिन)

जैव विविधता सम्मेलन (CBD) के बारे में

  • जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) एक वैश्विक पर्यावरणीय संधि है, जिसे 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) में अपनाया गया था।
  • इसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, संसाधनों का सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से लाभ का समान वितरण सुनिश्चित करना है।
  • सदस्य देशों को अपनी प्रगति और नीतियों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए नियमित रूप से राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है।

भारत में बेरोजगारी दर फरवरी 2026 में 4.9% पर आई

फरवरी 2026 में भारत की बेरोजगारी दर मामूली रूप से घटकर 4.9 प्रतिशत हो गई। यह आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार हैं। जनवरी 2026 में यह दर 5 प्रतिशत थी, जिससे यह हल्का सुधार दर्शाता है।

भारत में बेरोजगारी दर: फरवरी 2026

  • PLFS के अनुसार, फरवरी 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में बेरोजगारी दर घटकर 4.9 प्रतिशत हो गई।
  • यह जनवरी में दर्ज वृद्धि के बाद हल्की रिकवरी का संकेत देता है।
  • हालांकि सुधार सीमित है, लेकिन श्रम बाजार में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थिरता देखी गई।

शहरी बेरोजगारी दर में सुधार

  • फरवरी 2026 में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में कमी देखी गई।
  • PLFS के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में शहरी बेरोजगारी दर घटकर 6.6 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी 2026 में 6.7 प्रतिशत थी।
  • यह शहरों में रोजगार के अवसरों में हल्की वृद्धि को दर्शाता है।

ग्रामीण बेरोजगारी दर स्थिर

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर फरवरी 2026 में स्थिर रही।
  • यह दर 4.2 प्रतिशत पर बनी रही, जिससे यह संकेत मिलता है कि ग्रामीण रोजगार की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

महिला बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट

PLFS के नए आंकड़ों में महिला बेरोजगारी दर में स्पष्ट सुधार देखा गया। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में बेरोजगारी दर जनवरी 2026 के 5.6 प्रतिशत से घटकर फरवरी में 5.1 प्रतिशत हो गई।

  • शहरी महिला बेरोजगारी दर: 9.8% → 8.7%
  • ग्रामीण महिला बेरोजगारी दर: 4.3% → 4.0%

यह दर्शाता है कि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों में सुधार हुआ है।

श्रम बल भागीदारी दर (LFPR)

  • श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) वह प्रतिशत है जो काम कर रहे या काम की तलाश में लगे लोगों को दर्शाता है।
  • फरवरी 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए LFPR 55.9 प्रतिशत पर स्थिर रहा।

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