भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 725.727 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचे

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 725.727 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक ही सप्ताह में भंडार में 8.663 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets – FCA) में मजबूत वृद्धि रही। यह रिकॉर्ड स्तर भारत की बाह्य क्षेत्र (External Sector) की स्थिति को मजबूत करता है और रुपये की स्थिरता को लेकर विश्वास बढ़ाता है।

आरबीआई के आंकड़ों का महत्व

ताज़ा आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत व्यापक आर्थिक प्रबंधन (Macroeconomic Management) का संकेत देता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से—

  • आयात भुगतान क्षमता मजबूत होती है
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से सुरक्षा मिलती है
  • रुपये पर दबाव कम होता है
  • निवेशकों का विश्वास बढ़ता है

यह उपलब्धि भारत की वित्तीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक स्थिति में मजबूती को दर्शाती है।

इंडिया फॉरेक्स रिज़र्व रिकॉर्ड लेवल पर: RBI डेटा की जानकारी

ताज़ा आंकड़े इंडिया फॉरेक्स रिज़र्व में तेज़ बढ़ोतरी दिखाते हैं जो मज़बूत मैक्रोइकॉनॉमिक मैनेजमेंट को दिखाता है।

नीचे डिटेल में बताया गया है।

घटक नवीनतम मूल्य (अरब डॉलर) साप्ताहिक वृद्धि (अरब डॉलर)
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) 573.603 +3.550
स्वर्ण भंडार 128.466 +4.990
विशेष आहरण अधिकार (SDRs) 18.924 +0.103
कुल विदेशी मुद्रा भंडार 725.727 +8.663

भारत के फॉरेक्स रिज़र्व में बढ़ोतरी वैल्यूएशन में बढ़ोतरी और मज़बूत बाहरी इनफ्लो, दोनों को दिखाती है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA): फॉरेक्स रिज़र्व का सबसे बड़ा हिस्सा

भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां(FCA) सबसे बड़ा घटक है, जो वर्तमान में 573.603 अरब डॉलर पर है।

FCA में शामिल प्रमुख मुद्राएँ—

  • अमेरिकी डॉलर
  • यूरो
  • जापानी येन
  • ब्रिटिश पाउंड

इन परिसंपत्तियों का मूल्य अमेरिकी डॉलर में व्यक्त किया जाता है। वैश्विक स्तर पर विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण, बिना नए पूंजी प्रवाह के भी कुल विदेशी मुद्रा भंडार के मूल्य में बदलाव आ सकता है।

RBI द्वारा FCA में लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत के बाहरी सुरक्षा कवच (External Buffers) मजबूत हो रहे हैं और तरलता प्रबंधन बेहतर हुआ है।

स्वर्ण भंडार में तेज वृद्धि: आर्थिक स्थिरता को मजबूती

भारत के स्वर्ण भंडार में 4.990 अरब डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे यह 128.466 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

स्वर्ण भंडार महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  • यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षा कवच (Hedge) का कार्य करता है।
  • निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है।
  • मुद्रा की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • स्वर्ण भंडार में यह वृद्धि भारत के रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

एसडीआर (SDRs) की भूमिका

भारत के Special Drawing Rights (SDRs) में 103 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई और यह 18.924 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

SDR एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति है, जिसे International Monetary Fund (IMF) द्वारा बनाया गया है।

SDR देशों की मदद करते हैं—

  • आधिकारिक भंडार को पूरक (Supplement) करने में
  • भुगतान संतुलन (Balance of Payments) की आवश्यकताओं को प्रबंधित करने में
  • वैश्विक संकट के दौरान तरलता बनाए रखने में

हालांकि FCA और स्वर्ण भंडार की तुलना में SDR का आकार छोटा है, फिर भी यह भारत को अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन प्रदान करता है।

कौन थे मुकुल रॉय?, बंगाल की राजनीति के चाणक्य ने ली अंतिम सांस

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का 73 वर्ष की आयु में कोलकाता में निधन हो गया। उनका निधन साल्ट लेक स्थित Apollo Hospital में तड़के लगभग 1:30 बजे हृदयाघात (मैसिव कार्डियक अरेस्ट) के कारण हुआ। उनके पुत्र सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की। मुकुल रॉय लंबे समय से डिमेंशिया और पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूर थे। करीब चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में मुकुल रॉय ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तीनों दलों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

कौन थे मुकुल रॉय? ‘बंगाल की राजनीति के चाणक्य’

17 अप्रैल 1954 को जन्मे मुकुल रॉय अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्हें उनकी रणनीतिक राजनीतिक समझ के कारण “बंगाल की राजनीति का चाणक्य” कहा जाता था।

मुख्य तथ्य:

  • ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी
  • टीएमसी के शुरुआती वर्षों में दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे
  • दो बार राज्यसभा सदस्य निर्वाचित
  • कृष्णानगर उत्तर से विधायक (MLA)

उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई।

राजनीतिक सफर: टीएमसी के शिल्पकार से रेल मंत्री तक

मुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन कई महत्वपूर्ण मोड़ों से गुजरा।

प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका, जिससे 34 वर्षों का वाम मोर्चा शासन समाप्त हुआ।
  • 2009–2011 तक जहाजरानी राज्य मंत्री
  • मार्च से सितंबर 2012 तक 32वें केंद्रीय रेल मंत्री, तत्कालीन प्रधानमंत्री Manmohan Singh के कार्यकाल में

उन्होंने रेल किराया वृद्धि विवाद के बाद Dinesh Trivedi का स्थान लिया। यद्यपि उनका कार्यकाल संक्षिप्त रहा, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।

राजनीतिक बदलाव और विवाद

मुकुल रॉय के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए।

समयरेखा:

  • 2015 में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाए गए
  • 2017 में Bharatiya Janata Party (भाजपा) में शामिल
  • 2020 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने
  • 11 जून 2021 को पुनः टीएमसी में वापसी

वे नारदा स्टिंग मामले में भी चर्चा में रहे। जनवरी 2026 में Supreme Court of India ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य ठहराया गया था।

स्वास्थ्य समस्याएँ और निधन का कारण

23 फरवरी 2026 को उनका निधन हृदयाघात से हुआ।

हाल के स्वास्थ्य मुद्दे:

  • 2023 में डिमेंशिया और पार्किंसन रोग का निदान
  • 2023 में हाइड्रोसेफेलस के लिए ब्रेन सर्जरी
  • जुलाई 2024 में सिर में चोट और रक्त के थक्के की सर्जरी
  • मधुमेह और उम्र संबंधी अन्य बीमारियाँ
  • स्वास्थ्य गिरने के कारण वे 2022 से सक्रिय राजनीति से दूर थे।

संपत्ति और पारिवारिक जानकारी

हालिया चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹50.85 लाख थी।

परिवार:

  • पिता: हरि देव कौशल (सेवानिवृत्त एसीपी, दिल्ली)
  • माता: अनुप कौशल (शिक्षिका)
  • भाई: राहुल देव (अभिनेता)
  • पूर्व पत्नी: शिल्पा देव
  • पुत्र: सुभ्रांशु रॉय

मुकुल रॉय का निधन पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द एटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में 21 फरवरी 2026 को कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया। उन्होंने इस पुस्तक को भारत रत्न Atal Bihari Vajpayee के प्रति एक उपयुक्त श्रद्धांजलि बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रकाशन केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भारत के महानतम राजनेताओं में से एक के जीवन, नेतृत्व और अमर विरासत का उत्सव है, जिनके आदर्श आज भी राष्ट्र को प्रेरित करते हैं। ये किताब पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल द्वारा लिखी गई है, जिसका विमोचन उपराष्‍ट्रपति सी. पी. राधाकृष्‍णन ने किया है।

नई दिल्ली में पुस्तक विमोचन: अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि

नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को उजागर करती है। उपराष्ट्रपति ने इसे वाजपेयी जी की लोकतांत्रिक विरासत का उत्सव बताया और कहा कि यह पुस्तक उनके नेतृत्व, दूरदर्शिता और राष्ट्रसेवा को रेखांकित करती है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह पुस्तक वाजपेयी जी के जीवन के व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों आयामों को समग्र रूप से प्रस्तुत करती है।

अटल बिहारी वाजपेयी: सांसद से प्रधानमंत्री तक

  • पुस्तक विमोचन समारोह में उपराष्ट्रपति ने वाजपेयी जी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को भी याद किया।
  • उन्होंने कहा कि उन्हें वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान लोकसभा सदस्य के रूप में सेवा करने का अवसर मिला था।
  • उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी की सांसद से प्रधानमंत्री तक की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और परिपक्वता का प्रतीक है।
  • पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि वाजपेयी जी ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में संवाद, सहमति निर्माण और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा।

पोखरण परमाणु परीक्षण और दिल्ली मेट्रो: नेतृत्व के ऐतिहासिक क्षण

उपराष्ट्रपति ने वाजपेयी जी के नेतृत्व के कुछ निर्णायक क्षणों का विशेष उल्लेख किया।

मुख्य उपलब्धियाँ:

  • 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त किया।
  • दूरदर्शी बुनियादी ढांचा विकास, जिसमें Delhi Metro परियोजना की शुरुआत शामिल है।
  • विकासोन्मुखी शासन पर विशेष जोर।
  • उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी ने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व में शक्ति और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं।

मार्गदर्शक सिद्धांत: संवाद, लोकतंत्र और विकास

पुस्तक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ वाजपेयी जी के नेतृत्व के तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित करती है—

  • टकराव के स्थान पर संवाद
  • लोकतंत्र को सर्वोच्च मूल्य मानना
  • विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जटिल राजनीतिक और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी वाजपेयी जी ने इन सिद्धांतों को दृढ़ता से निभाया और राष्ट्र को स्थिर, सशक्त और प्रगतिशील दिशा प्रदान की।

 

AI इम्पैक्ट समिट 2026 संपन्न: 89 देशों ने नई दिल्ली घोषणा का समर्थन किया

AI इम्पैक्ट समिट 2026 (AI Impact Summit 2026) का समापन 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में “नई दिल्ली घोषणा ऑन AI इम्पैक्ट” को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणा का समर्थन विश्वभर के 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने किया। यह शिखर सम्मेलन वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन और सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। भारत ने “AI for All” का आह्वान किया, जो समानता, पहुंच और साझा वैश्विक प्रगति के सिद्धांतों पर आधारित है। नई दिल्ली घोषणा में सात प्रमुख कार्य स्तंभों (Seven Pillars of Action) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है और साथ ही नए वैश्विक प्लेटफॉर्म की शुरुआत का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता के लिए सहयोगात्मक, विश्वसनीय, सुदृढ़ और प्रभावी बनी रहे।

ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट 2026 और नई दिल्ली घोषणा

AI इम्पैक्ट समिट 2026 का मुख्य उद्देश्य जिम्मेदार और समावेशी AI विकास के लिए एक साझा वैश्विक ढांचा तैयार करना था। इस शिखर सम्मेलन में अपनाई गई “नई दिल्ली घोषणा” कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संतुलित, सुरक्षित और मानव-केंद्रित उपयोग पर जोर देती है।

संस्कृत सिद्धांत “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” (सभी के कल्याण और सभी के सुख के लिए) से प्रेरित यह घोषणा इस बात पर बल देती है कि AI के लाभ समान रूप से सभी देशों और समाजों तक पहुंचने चाहिए।

प्रमुख बिंदु

  • 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा समर्थन
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहु-हितधारक भागीदारी पर जोर
  • राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान
  • विश्वसनीय, सुलभ और ऊर्जा-कुशल AI प्रणालियों पर ध्यान

यह घोषणा स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी (Non-binding) है, लेकिन यह वैश्विक AI शासन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में उभरकर सामने आई है।

AI इम्पैक्ट समिट 2026 के सात पिलर (चक्र)

नई दिल्ली डिक्लेरेशन सात पिलर के आस-पास बना है, जो ग्लोबल AI कोऑपरेशन की रीढ़ हैं।

स्तंभ फोकस क्षेत्र
AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण AI अवसंरचना तक किफायती और समान पहुंच सुनिश्चित करना
आर्थिक वृद्धि एवं सामाजिक विकास विकास और विस्तार के लिए “अच्छा AI” (Good AI) को बढ़ावा देना
सुरक्षित और विश्वसनीय AI सुरक्षा, पारदर्शिता और मानक (Benchmarks) स्थापित करना
विज्ञान के लिए AI वैश्विक शोध सहयोग को प्रोत्साहन देना
सामाजिक सशक्तिकरण हेतु पहुंच समावेशी AI अपनाने को बढ़ावा देना
मानव पूंजी विकास कौशल विकास और AI साक्षरता को मजबूत करना
लचीली और कुशल AI प्रणालियां ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ AI अवसंरचना विकसित करना

ये पिलर्स यह पक्का करेंगे कि AI इम्पैक्ट समिट 2026 चर्चा से आगे बढ़कर स्ट्रक्चर्ड ग्लोबल एक्शन की ओर बढ़े।

AI इम्पैक्ट समिट 2026 में घोषित प्रमुख वैश्विक पहलें

नई दिल्ली घोषणा के तहत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कई महत्वपूर्ण वैश्विक सहयोगात्मक पहलों की घोषणा की गई, जो “AI for All” ढांचे को मजबूत करती हैं।

1. लोकतांत्रिक AI प्रसार के लिए चार्टर 

  • आधारभूत AI उपकरणों तक किफायती पहुंच को बढ़ावा
  • स्थानीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन
  • लचीली और सुदृढ़ AI अवसंरचना को मजबूत करना

2. ग्लोबल AI इम्पैक्ट कॉमन्स 

  • स्केलेबल AI उपयोग मामलों को साझा करने का मंच
  • विभिन्न देशों में AI समाधानों की पुनरावृत्ति (Replication) को प्रोत्साहन
  • आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति को समर्थन

3. ट्रस्टेड AI कॉमन्स 

  • उपकरणों, मानकों (Benchmarks) और सर्वोत्तम प्रथाओं का भंडार
  • सुरक्षित और विश्वसनीय AI जीवनचक्र को प्रोत्साहन

4. AI फॉर साइंस संस्थानों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

  • वैश्विक शोध संस्थानों को जोड़ना
  • AI-आधारित वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देना

5. AI वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्लेबुक

  • कौशल विकास और पुनःकौशल (Reskilling) पहलों को समर्थन
  • AI साक्षरता और व्यावसायिक सुधारों को प्रोत्साहन

6. लचीले और कुशल AI पर मार्गदर्शक सिद्धांत

  • ऊर्जा-कुशल AI प्रणालियों पर विशेष ध्यान
  • AI अवसंरचना लचीलापन प्लेबुक द्वारा समर्थित

ये सभी पहलें AI इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रस्तुत “AI for All” दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती हैं, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समावेशी, सुरक्षित और मानव-केंद्रित बनाना है।

आर्थिक वृद्धि और सामाजिक कल्याण के लिए AI

नई दिल्ली घोषणा का एक प्रमुख फोकस आर्थिक परिवर्तन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर है। समिट में इस बात पर जोर दिया गया कि ओपन-सोर्स पारिस्थितिकी तंत्र और सुलभ AI उपकरण शासन, विज्ञान तथा सार्वजनिक सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

प्रमुख प्राथमिकताएं:

  • विभिन्न क्षेत्रों में AI अपनाने का विस्तार
  • ओपन-सोर्स AI फ्रेमवर्क को बढ़ावा
  • ऊर्जा-कुशल AI अवसंरचना सुनिश्चित करना
  • उद्योग-नेतृत्व वाले स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों को प्रोत्साहन

AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सतत वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक (Key Driver) बताया।

वैश्विक AI शासन और सहयोग को सुदृढ़ करना

नई दिल्ली घोषणा वैश्विक AI शासन में स्वैच्छिक सहयोग को मजबूत करती है। सहभागी देशों ने सहमति व्यक्त की कि वे—

  • गैर-बाध्यकारी (Non-binding) AI सिद्धांतों को बढ़ावा देंगे
  • बहुपक्षीय साझेदारियों को आगे बढ़ाएंगे
  • समिट की प्रतिबद्धताओं को क्रियान्वित करेंगे
  • लचीले और समावेशी AI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेंगे

एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU) और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) जैसे संगठनों की भागीदारी ने इस पहल पर मजबूत वैश्विक सहमति को दर्शाया।

पीएम मोदी ने इस कॉरिडोर पर भारत के पहले नमो भारत आरआरटीएस का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी 2026 को मेरठ में भारत की पहली नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का उद्घाटन किया और दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को जनता को समर्पित किया। यह परियोजना भारत में पहली बार ऐसी व्यवस्था लेकर आई है, जहां रैपिड रेल और मेट्रो सेवा एक ही स्टेशन तथा एक ही ट्रैक से संचालित हो रही है। प्रधानमंत्री ने इस पहल को उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने, यात्रा समय कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत की पहली RRTS और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन

दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर भारत की पहली परिचालन क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट प्रणाली (RRTS) है। 22 फरवरी 2026 को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया। इसी प्लेटफॉर्म से मेरठ मेट्रो सेवा की भी शुरुआत की गई।

प्रमुख विशेषताएं

  • पहली बार नमो भारत और मेट्रो रेल एक ही ट्रैक और स्टेशन से संचालित
  • इंट्रा-सिटी (शहर के भीतर) और इंटर-सिटी (शहरों के बीच) यात्रा के लिए एकीकृत परिवहन मॉडल
  • दिल्ली और मेरठ के बीच तीव्र कनेक्टिविटी
  • एक ही प्लेटफॉर्म से शहर के भीतर या दिल्ली तक सीधी यात्रा

यह परियोजना यात्रियों को शहर के भीतर यात्रा के लिए मेट्रो और क्षेत्रीय हाई-स्पीड यात्रा के लिए नमो भारत ट्रेन का विकल्प प्रदान करती है।

NCR कनेक्टिविटी और “ट्विन सिटीज” विजन को बढ़ावा

यह एकीकृत कॉरिडोर मेरठ और दिल्ली को सहज रूप से जोड़कर “ट्विन सिटीज” अवधारणा को मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार—

  • बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब लोगों को दिल्ली में किराए पर घर लेने की आवश्यकता कम होगी।
  • यात्रा तेज, सुगम और सुविधाजनक बनेगी।
  • कम यात्रा समय से आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

प्रमुख एकीकरण केंद्र

  • सराय काले खां
  • आनंद विहार
  • गाजियाबाद
  • मेरठ

यह कॉरिडोर भारतीय रेलवे, मेट्रो और बस टर्मिनलों से जुड़कर मल्टी-मॉडल परिवहन को सहज बनाता है।

बुनियादी ढांचा विकास और रोजगार वृद्धि

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और रैपिड रेल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार और औद्योगिक विकास को गति दे रही हैं।
  • उन्होंने उल्लेख किया कि 2014 से पहले जहां मेट्रो सेवाएं केवल 5 शहरों में थीं, वहीं आज 25 से अधिक शहरों में विस्तार हो चुका है, जिससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन गया है।

नमो भारत संचालन में महिला सशक्तिकरण

नमो भारत RRTS की एक विशेष उपलब्धि महिलाओं की भागीदारी है।

  • अधिकांश ट्रेन ऑपरेटर महिलाएं हैं।
  • स्टेशन कंट्रोल स्टाफ में भी महिलाओं की संख्या अधिक है।

प्रधानमंत्री ने इसे अवसंरचना और परिवहन क्षेत्र में “नारी शक्ति” का प्रतीक बताया।

स्थैतिक तथ्य (Static Points)

  • परियोजना: नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS)
  • कॉरिडोर: दिल्ली–मेरठ
  • लॉन्च तिथि: 22 फरवरी 2026
  • उद्घाटनकर्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • पहली बार: मेट्रो और रैपिड रेल एक ही स्टेशन और ट्रैक पर
  • मुख्य एकीकरण हब: सराय काले खां, आनंद विहार, गाजियाबाद, मेरठ
  • राज्य: उत्तर प्रदेश

भारत-ब्राज़ील ने किए 10 बड़े समझौते: ग्लोबल साउथ में उभरता नया शक्ति

भारत और ब्राज़ील ने व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण खनिज जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दस महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के साथ विस्तृत वार्ता की। दोनों नेताओं ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। यह कदम वर्ष 2006 में स्थापित सामरिक साझेदारी (Strategic Partnership) के बाद से लगातार मजबूत हो रहे संबंधों को और सुदृढ़ करता है।

भारत–ब्राज़ील समझौते 2026: क्या तय हुआ?

भारत और ब्राज़ील के बीच 2026 में हुए दस समझौते कई रणनीतिक क्षेत्रों को कवर करते हैं और भारत–ब्राज़ील सामरिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की, जो भारत–ब्राज़ील संबंधों की साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और जन-से-जन संपर्क की भावना को दर्शाता है।

10 प्रमुख समझौतों के मुख्य क्षेत्र

इन समझौतों में कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया—

प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ
  • डिजिटल सहयोग और प्रौद्योगिकी
  • स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और उद्यमिता
  • पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान
  • जनसंचार
  • रक्षा सहयोग

क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच लचीली (resilient) सप्लाई चेन विकसित करने की रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

20 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य: रणनीतिक आर्थिक पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राज़ील को लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बताया और कहा कि द्विपक्षीय व्यापार आपसी विश्वास को दर्शाता है।

वर्तमान दिशा:

  • अगले पांच वर्षों में 20 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य
  • ऊर्जा, कृषि, रक्षा और प्रौद्योगिकी में विस्तार
  • निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी

यह पहल ग्लोबल साउथ सहयोग और व्यापारिक साझेदारियों के विविधीकरण की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सहयोग

दोनों देश ब्राज़ील में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य है—

  • भारत के डिजिटल गवर्नेंस अनुभव को साझा करना
  • वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहचान प्रणालियों को बढ़ावा देना
  • ग्लोबल साउथ में तकनीकी सहयोग को मजबूत करना

दोनों नेताओं ने माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स और नवाचार में सहयोग न केवल उनके देशों बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी लाभकारी होगा।

साझा दृष्टिकोण: बहुध्रुवीय विश्व और संयुक्त राष्ट्र सुधार

भारत और ब्राज़ील ने समावेशी और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

साझा रुख:

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में त्वरित सुधार
  • आतंकवाद के खिलाफ सशक्त वैश्विक कार्रवाई
  • जलवायु कार्रवाई और सतत विकास
  • ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना

दोनों देश ब्रिक्स, जी20, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आईबीएसए संवाद मंच और G-4 जैसे मंचों पर करीबी समन्वय बनाए रखते हैं। उनका सहयोग संयुक्त राष्ट्र, WTO और UNESCO जैसे बहुपक्षीय मंचों तक विस्तारित है।

रक्षा और रणनीतिक समन्वय

  • प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा सहयोग को बढ़ते विश्वास और रणनीतिक तालमेल का उदाहरण बताया। इस क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग साझेदारी शामिल हैं।
  • रक्षा संबंधों की मजबूती ऊर्जा सहयोग, नवीकरणीय पहलों और रेयर अर्थ सामग्री सहयोग को भी पूरक करती है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी और सुदृढ़ होती है।

विंटर ओलंपिक्स 2026 – पूरी मेडल टेबल और हाइलाइट्स

शीतकालीन ओलंपिक 2026, जिन्हें आधिकारिक रूप से 2026 Winter Olympics (XXV ओलंपिक विंटर गेम्स) कहा जाता है, 6 से 22 फरवरी 2026 तक इटली के मिलान और कॉर्टिना डी’अम्पेज़ो में आयोजित किए गए। इन खेलों में 92 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों (NOCs) के लगभग 2,900 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस वैश्विक आयोजन में 8 खेलों और 16 विधाओं के अंतर्गत कुल 116 पदक स्पर्धाएं आयोजित की गईं, जिसने इसे शीतकालीन खेल इतिहास के सबसे व्यापक और प्रतिस्पर्धी संस्करणों में से एक बना दिया।

मेडल स्टैंडिंग में टॉप 10 देश: विंटर ओलंपिक्स 2026

Rank Country Gold Silver Bronze Total
1 Norway 18 12 11 41
2 United States 12 12 9 33
3 Netherlands 10 7 3 20
4 Italy 10 6 14 30
5 Germany 8 10 8 26
6 France 8 9 6 23
7 Sweden 8 6 4 18
8 Switzerland 6 9 8 23
9 Austria 5 8 5 18
10 Japan 5 7 12 24

2026 शीतकालीन ओलंपिक खेलों की प्रमुख झलकियां

नॉर्वे – निर्विवाद अग्रणी

Norway ने एक बार फिर शीतकालीन खेलों में अपनी बादशाहत साबित करते हुए पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। नॉर्वे ने कुल 41 पदक जीते, जिनमें 18 स्वर्ण पदक शामिल थे। देश ने विशेष रूप से क्रॉस-कंट्री स्कीइंग, बायथलॉन और नॉर्डिक कंबाइंड स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे उसकी पारंपरिक ताकत और उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रणाली का प्रदर्शन हुआ।

यूनाइटेड स्टेट्स – शानदार ऑल-राउंड परफॉर्मेंस

यूनाइटेड स्टेट्स ने स्नोबोर्डिंग, अल्पाइन स्कीइंग और आइस हॉकी में अपनी ताकत दिखाते हुए 33 मेडल के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।

नीदरलैंड्स – स्पीड स्केटिंग का पावरहाउस

नीदरलैंड्स ने स्पीड स्केटिंग में अपनी पारंपरिक श्रेष्ठता को बरकरार रखते हुए शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने कुल 10 स्वर्ण पदक जीते और समग्र पदक तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया। स्पीड स्केटिंग में उनकी तकनीकी दक्षता और वर्षों की मजबूत खेल संरचना एक बार फिर दिखाई दी।

इटली – मेजबान देश की शानदार सफलता

मेजबान देश इटली ने घरेलू समर्थन का पूरा लाभ उठाते हुए प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इटली ने कुल 30 पदक जीते, जिनमें 10 स्वर्ण पदक शामिल थे। विशेष रूप से 14 कांस्य पदकों के साथ उनका कांस्य पदक आंकड़ा सबसे अधिक में से एक रहा, जिसने मेजबान राष्ट्र के रूप में उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाया।

अन्य उल्लेखनीय प्रदर्शन

  • जर्मनी ने 26 पदकों के साथ मजबूत प्रदर्शन किया।
  • कनाडा ने कुल 21 पदक अपने नाम किए।
  • चीन ने 15 पदक हासिल किए।
  • दक्षिण कोरिया ने 10 पदक जीते।
  • ऑस्ट्रेलिया ने 6 पदक अर्जित किए।
  • ग्रेट ब्रिटेन ने 5 पदक हासिल किए।

पहली या दुर्लभ स्वर्ण पदक जीतने वाले देश

कई देशों ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर अपने शीतकालीन ओलंपिक सफर में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की—

  • स्पेन – 1 स्वर्ण
  • ब्राज़िल– 1 स्वर्ण
  • कजाकिस्तान– 1 स्वर्ण

इन उपलब्धियों ने उनके शीतकालीन ओलंपिक इतिहास में नए अध्याय जोड़े और वैश्विक खेल मंच पर उनकी बढ़ती उपस्थिति को दर्शाया।

रजत पदक विजेता (बिना स्वर्ण के)

कुछ देशों ने स्वर्ण पदक भले ही न जीते हों, लेकिन रजत पदकों के माध्यम से उल्लेखनीय प्रदर्शन किया—

  • पोलैंड– 3 रजत पदक
  • न्यूज़ीलैंड – 2 रजत पदक
  • फिनलैंड – 1 रजत पदक

बिना पदक वाले देश

  • कई सहभागी देश, जिनमें भारत, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, पुर्तगाल आदि शामिल हैं, इस संस्करण में पदक हासिल नहीं कर सके।
  • हालांकि, शीतकालीन ओलंपिक में भागीदारी स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान करती है, बल्कि विश्वभर में शीतकालीन खेलों के विकास और लोकप्रियता को भी बढ़ावा देती है।

BAFTA Awards 2026: देखें पूरी बाफ्टा अवार्ड्स विनर्स की लिस्ट

79वें ब्रिटिश अकादमी फिल्म अवॉर्ड्स (BAFTA 2026) का आयोजन 22 फरवरी को लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में British Academy of Film and Television Arts द्वारा किया गया। इस भव्य समारोह की मेजबानी प्रसिद्ध अभिनेता Alan Cumming ने की। इस अवॉर्ड में भारतीय फिल्म ‘बूंग’ ने चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म कैटेगरी में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड जीता। इसके अलावा इस बार बाफ्टा में ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ और ‘सिनर्स’ का दबदबा रहा। लियोनार्डो डिकैप्रियो की एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ सर्वश्रेष्ठ फिल्म समेत छह पुरस्कार जीते। वहीं अमेरिकन फिल्म ‘सिनर्स’ और हॉरर कहानी ‘फ्रैंकस्टीन’ ने तीन-तीन पुरस्कार जीते। जेसी बकले ने ‘हैमनेट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। जबकि रॉबर्ट आरामयो ने ब्रिटिश इंडी फिल्म ‘आई स्वियर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अपने नाम किया।

यहां देखें पूरी लिस्ट

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म – बैटल आफ्टर अनदर
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – पॉल थॉमस एंडरसन (वन बैटल आफ्टर अनदर)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – जेसी बकले (हैमनेट)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – रॉबर्ट आरामयो (आई स्वियर)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री – वुन्मी मोसाकु (सिनर्स)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता –
  • आउटस्टैंडिंग ब्रिटिश फिल्म- हैमनेट
  • बेस्ट चिंड्रेंस एंड फैमिली फिल्म – बूंग
  • गैर अंग्रेजी भाषा की फिल्म – सेंटिमेंटल वैल्यूज
  • बेस्ट स्क्रीनप्ले – सिनर्स
  • बेस्ट एनिमेटेड फिल्म – जूट्रोपोलिस 2
  • बेस्ट डॉक्यूमेंट्री – मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन
  • बेस्ट सिनेमैटोग्राफी – वन बैटल आफ्टर अनदर
  • बेस्ट एडिटिंग – वन बैटल आफ्टर अनदर
  • स्पेशल विजुअल इफेक्ट्स – अवतार: फायर एंड ऐश
  • ब्रिटिश शॉर्ट फिल्म – दिस इज एंडोमेट्रियोसिस
  • राइजिंग स्टार – रॉबर्ट अरामायो (सिनर्स)

BAFTA के बारे में

  • ब्रिटिश अकादमी फिल्म अवॉर्ड्स (BAFTA) एक वार्षिक पुरस्कार समारोह है, जो ब्रिटिश और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में उत्कृष्टता को सम्मानित करता है।
  • यह पुरस्कार British Academy of Film and Television Arts (BAFTA) द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
  • इन पुरस्कारों का पहला आयोजन 29 मई 1949 को यूनाइटेड किंगडम में किया गया था।
  • वर्ष 2013 से इनका आधिकारिक नाम “EE ब्रिटिश अकादमी फिल्म अवॉर्ड्स” रखा गया है।
  • इस समारोह का प्रसारण 1956 से BBC द्वारा किया जा रहा है, जिससे यह विश्वभर में दर्शकों तक पहुंचता है।

विश्व शांति और समझदारी दिवस 2026

विश्व शांति और समझ दिवस 2026 (World Peace and Understanding Day 2026), हर साल 23 फरवरी को मनाया जाता है, जो वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए संवाद, आपसी सम्मान और अंतर-सांस्कृतिक समझ पर जोर देता है, जो रोटरी इंटरनेशनल के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। उसी ऐतिहासिक बैठक ने आगे चलकर रोटरी इंटरनेशनल की स्थापना की नींव रखी, जो आज विश्व के सबसे बड़े मानवीय सेवा नेटवर्क में से एक है।

यह दिवस “वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग मंथ” (World Understanding Month) के दौरान मनाया जाता है और वैश्विक शांति, नैतिक नेतृत्व तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है। यह समाज को याद दिलाता है कि स्थायी शांति केवल तभी संभव है जब न्याय, संवाद, सहानुभूति और सामूहिक प्रयास को प्राथमिकता दी जाए। देशों और समुदायों के बीच सहयोग तथा पारस्परिक समझ ही विश्व में दीर्घकालिक शांति की आधारशिला है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1905 में रोटरी की स्थापना

विश्व शांति और समझ दिवस, 1905 में शिकागो में Paul P. Harris द्वारा स्थापित रोटरी की वर्षगांठ का प्रतीक है।

प्रमुख मील के पत्थर

  • 1905: शिकागो में पहली रोटरी बैठक
  • अमेरिका के विभिन्न शहरों में विस्तार
  • इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ रोटरी क्लब्स का गठन
  • आगे चलकर Rotary International के रूप में विकास

एक छोटे पेशेवर समूह से शुरू होकर रोटरी आज 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों में कार्यरत एक वैश्विक मानवीय आंदोलन बन चुका है।

विश्व शांति और समझ दिवस 2026 की विशेषताएं

विश्व शांति और समझ दिवस 2026, रोटरी की शांति निर्माण और विकास के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • 1905 में रोटरी की स्थापना का स्मरण
  • प्रतिवर्ष 23 फरवरी को आयोजन
  • “वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग मंथ” के दौरान मनाया जाना
  • नैतिक नेतृत्व और मानवीय सेवा पर जोर
  • संवाद और अंतर-सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा

रोटरी ने अपने प्रारंभिक वर्षों से ही United Nations के साथ सहयोग किया है और वैश्विक विकास व शांति पहलों में योगदान दिया है।

प्रत्येक वर्ष रोटरी लगभग 75 विद्वानों का चयन “रोटरी पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन” स्नातकोत्तर कार्यक्रम के तहत करता है, जिससे शांति निर्माण के अकादमिक और व्यावहारिक प्रयासों को सशक्त किया जाता है।

फोकस के क्षेत्र: रोटरी वैश्विक शांति को कैसे बढ़ावा देता है

विश्व शांति और समझ दिवस 2026, रोटरी के उन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित करता है जो सतत शांति में योगदान देते हैं—

  • रोग निवारण और उपचार
  • स्वच्छ जल और स्वच्छता पहल
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य
  • बुनियादी शिक्षा और साक्षरता
  • आर्थिक विकास
  • संघर्ष समाधान और शांति अध्ययन

गरीबी, असमानता और संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं को संबोधित कर रोटरी अस्थिरता के मूल कारणों पर काम करता है।

विश्व शांति और समझ दिवस 2026 का महत्व

यह दिवस इस बात पर बल देता है कि शांति निष्क्रिय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके लिए सक्रिय सहयोग आवश्यक है।

इसका व्यापक महत्व—

  • ध्रुवीकरण कम करने हेतु अंतर-सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहन
  • न्याय और जिम्मेदारी पर आधारित नेतृत्व को बढ़ावा
  • समुदायों के बीच आपसी सम्मान को मजबूत करना
  • व्यक्तिगत कल्याण को सामाजिक स्थिरता से जोड़ना
  • समावेशी और न्यायपूर्ण समाजों का समर्थन

यह दिवस रेखांकित करता है कि संवाद, सहानुभूति और सेवा जैसे दैनिक कार्य वैश्विक सद्भाव में प्रत्यक्ष योगदान देते हैं।

वैश्विक सहयोग और नैतिक नेतृत्व

नैतिक नेतृत्व विश्व शांति और समझ दिवस 2026 का मूल तत्व है। रोटरी का मार्गदर्शक सिद्धांत “Service Above Self” जिम्मेदार शासन और नागरिक भागीदारी को सुदृढ़ करता है।

यह दिवस बढ़ावा देता है—

  • राजनीतिक विभाजनों से परे अंतरराष्ट्रीय सहयोग
  • सतत विकास के लिए साझेदारी
  • वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु सामूहिक प्रयास

साझेदारी और शांति शिक्षा पहलों के माध्यम से रोटरी सीमाओं के पार समझ और सहयोग को निरंतर मजबूत करता रहा है।

व्यापार सूचकांकों का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 किया गया

भारत सरकार ने भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2012-13 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। यह घोषणा 20 फरवरी 2026 को की गई। इस संशोधन का उद्देश्य व्यापार आंकड़ों की प्रासंगिकता, विश्वसनीयता और विश्लेषणात्मक उपयोगिता को बेहतर बनाना है, ताकि नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत को अधिक सटीक जानकारी मिल सके। यह संशोधन वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) द्वारा किया गया, क्योंकि पिछले दशक में अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पैटर्न में बड़े संरचनात्मक बदलाव हुए हैं।

आधार वर्ष क्यों बदला गया?

  • भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2022-23 इसलिए संशोधित किया गया है ताकि यह भारत के वर्तमान बाह्य व्यापार ढांचे को सही रूप से प्रतिबिंबित कर सके।
  • वर्ष 2012-13 के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव हुए हैं। इनमें वस्तुओं की संरचना (Commodity Composition) में परिवर्तन, निर्यात का विविधीकरण (Export Diversification) तथा नए व्यापारिक साझेदारों का उदय शामिल है।
  • सरकार के अनुसार, आधार वर्ष को अद्यतन करने से सूचकांक समकालीन व्यापक आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित करते हैं।
  • यह संशोधन भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के प्रोफेसर नचिकेता चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया।

संशोधित ट्रेड इंडेक्स में क्या बदलाव हुए?

नई 2022-23 श्रृंखला में कई सुधार शामिल किए गए हैं—

  • प्रमुख वस्तु (Principal Commodity – PC) स्तर पर अद्यतन कवरेज
  • 2022-23 के व्यापार मूल्यों के आधार पर संशोधित वेटिंग संरचना
  • उभरती और घटती व्यापार वस्तुओं का बेहतर प्रतिनिधित्व
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार वर्गीकरण के साथ सामंजस्य
  • निर्यात और आयात में नवीनतम मूल्य हिस्सेदारी के अनुसार पुनर्गणित वेट

इससे सूचकांक भारत की वर्तमान व्यापार टोकरी को अधिक सटीक रूप से दर्शाते हैं।

नई श्रृंखला में विस्तृत कवरेज

संशोधित आधार वर्ष के तहत निम्नलिखित विस्तृत सूचकांक शामिल किए गए हैं—

  • मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक सूचकांक
  • प्रमुख वस्तु (PC) वर्गीकरण आधारित सूचकांक
  • मानक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वर्गीकरण (SITC) आधारित सूचकांक
  • व्यापक आर्थिक श्रेणियाँ (BEC) आधारित सूचकांक
  • शीर्ष 20 निर्यात और आयात साझेदार देशों के द्विपक्षीय एवं क्षेत्रवार सूचकांक
  • व्यापार की शर्तें (Terms of Trade) — सकल, शुद्ध और आय शर्तें

यह व्यापक संरचना व्यापार नीति मूल्यांकन और आर्थिक पूर्वानुमान के लिए विश्लेषण क्षमता को मजबूत बनाती है।

Terms of Trade (व्यापार की शर्तें) क्या हैं?

संशोधन के बाद भारत में Terms of Trade के विश्लेषण को और सशक्त बनाया गया है—

  • सकल व्यापार शर्तें (Gross Terms of Trade): निर्यात मात्रा सूचकांक ÷ आयात मात्रा सूचकांक
  • शुद्ध व्यापार शर्तें (Net Terms of Trade): निर्यात मूल्य सूचकांक ÷ आयात मूल्य सूचकांक
  • आय व्यापार शर्तें (Income Terms of Trade): शुद्ध व्यापार शर्तें × निर्यात मात्रा

इन संकेतकों से यह आकलन किया जाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की क्रय शक्ति बढ़ रही है या घट रही है।

अर्थशास्त्र में आधार वर्ष संशोधन का महत्व

  • आधार वर्ष बदलना एक मानक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिससे आर्थिक संकेतक सटीक और अद्यतन बने रहते हैं।
  • समय के साथ व्यापार पैटर्न बदलते हैं, इसलिए पुराना आधार वर्ष वर्तमान वास्तविकताओं को सही ढंग से नहीं दर्शा पाता।
  • अब 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाने से नीति-निर्माताओं को निर्यात-आयात प्रदर्शन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर अधिक यथार्थवादी और समकालीन दृष्टिकोण मिलेगा।

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