भारत कंटेनर शिपिंग लाइन भारत के ट्रेड गेम को कैसे बदल सकती है?

भारत ने अपने कंटेनर ट्रेड पर फिर से कंट्रोल पाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने भारत कंटेनर शिपिंग लाइन बनाने के लिए एक एग्रीमेंट साइन किया है। यह एक नई नेशनल शिपिंग कंपनी होगी जिसका मकसद भारत के लॉजिस्टिक्स और समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करना है। यूनियन बजट 2026-27 के साथ घोषित यह पहल शिपिंग, बंदरगाहों, रेलवे और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग को एक ही विजन के तहत जोड़ती है। चूंकि कंटेनर वाला कार्गो भारत के विदेशी व्यापार की रीढ़ है, इसलिए इस कदम से आत्मनिर्भरता बढ़ने, लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और ग्लोबल कॉम्पिटिशन में सुधार होने की उम्मीद है।

भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (BCSL) के बारे में

भारत कंटेनर शिपिंग लाइन एक नई सरकारी समर्थन वाली शिपिंग कंपनी है, जिसका उद्देश्य भारत के कंटेनर व्यापार को भारतीय नियंत्रण में सुदृढ़ करना है। इसका लक्ष्य विदेशी शिपिंग लाइनों पर निर्भरता कम करना और निर्यातकों व आयातकों के लिए कंटेनरों की सुनिश्चित उपलब्धता प्रदान करना है। यह पहल भारत के बंदरगाह और रेल अवसंरचना से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, जिससे देशभर में माल की निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी। चूंकि कंटेनरीकृत कार्गो भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मूल्य का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, इसलिए BCSL को व्यापार लचीलापन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति माना जा रहा है।

समझौते पर हस्ताक्षर किसने किए

इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की लॉजिस्टिक्स और पोर्ट संस्थाओं—शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, जेएनपीए, चेन्नई पोर्ट प्राधिकरण, वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन—के बीच हस्ताक्षर किए गए। यह हस्ताक्षर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में हुए। उनकी मौजूदगी बंदरगाह, शिपिंग, रेलवे और लॉजिस्टिक्स के बीच मजबूत समन्वय को दर्शाती है, जो पीएम गति शक्ति और सागरमाला कार्यक्रमों के प्रमुख स्तंभ हैं।

बजट 2026-27 से संबंध

BCSL की पहल केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ₹10,000 करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम से जुड़ी हुई है। इसका उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। अगले एक दशक में भारत लगभग 10 लाख टीईयू वार्षिक घरेलू निर्माण क्षमता का लक्ष्य रखता है। यह एकीकरण सुनिश्चित करता है कि कंटेनर केवल भारतीय शिपिंग लाइनों द्वारा ढोए ही नहीं जाएं, बल्कि उनका निर्माण भी देश में हो, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिले और आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों में कमी आए।

पोर्ट विस्तार और वित्तीय समर्थन

BCSL के साथ-साथ, वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण में आउटर हार्बर परियोजना के वित्तपोषण के लिए एक अलग त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित किया गया। इस समझौते में वीओसीपीए, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन शामिल हैं, जिसके तहत ₹15,000 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के माध्यम से बंदरगाह क्षमता का विस्तार करना है। यह पहल सागरमाला और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बढ़ते कार्गो वॉल्यूम को संभालने के लिए भारत की बंदरगाह अवसंरचना को और मजबूत बनाएगी।

भारत कंटेनर शिपिंग लाइन का महत्व

भारत कंटेनर शिपिंग लाइन से भारत के समुद्री व्यापार में बहुगुणक प्रभाव उत्पन्न होने की उम्मीद है। कंटेनर शिपिंग पर भारतीय नियंत्रण सुनिश्चित कर यह पहल वैश्विक व्यवधानों के समय निर्यात को सुरक्षित रखने, मालभाड़े में उतार-चढ़ाव को कम करने और वैश्विक समुद्री मार्गों में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने में सहायक होगी। यह पहल जहाज निर्माण, जहाज पुनर्चक्रण और समुद्री वित्त से जुड़े पूर्व प्रयासों का भी पूरक है। सामूहिक रूप से, ये कदम दीर्घकालिक लॉजिस्टिक्स संप्रभुता और वैश्विक व्यापार लचीलेपन की दिशा में भारत के स्पष्ट बदलाव को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट को स्वच्छता पखवाड़ा 2025 में साल का सबसे स्वच्छ पोर्ट चुना गया

भारत के स्वच्छता और सतत विकास अभियान के तहत पारादीप पोर्ट प्राधिकरण ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वच्छता पखवाड़ा पुरस्कार 2025 में प्रथम पुरस्कार जीता है और देश का सबसे स्वच्छ प्रदर्शन करने वाला प्रमुख बंदरगाह बनकर उभरा है। यह पुरस्कार बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है, जो स्वच्छता, हरित पहलों और सामुदायिक सहभागिता में उल्लेखनीय प्रयासों को मान्यता देता है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि बंदरगाह अब केवल व्यापार के प्रवेश द्वार नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन और समावेशी विकास के सक्रिय साझेदार बन चुके हैं।

वर्ष 2025 का सबसे स्वच्छ बंदरगाह

पारादीप पोर्ट प्राधिकरण ने स्वच्छता पखवाड़ा पुरस्कार 2025 में प्रथम पुरस्कार जीतकर भारत का सबसे स्वच्छ प्रदर्शन करने वाला प्रमुख बंदरगाह बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह सम्मान केवल एक बार की सफाई मुहिम के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण प्रबंधन और समावेशी सहभागिता में निरंतर किए गए प्रयासों का परिणाम है। बंदरगाह ने बुनियादी ढांचे की स्वच्छता के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन, हरित पहल और श्रमिक कल्याण को जोड़ते हुए समग्र दृष्टिकोण अपनाया।

स्वच्छता पखवाड़ा पुरस्कार 2025: समारोह

यह पुरस्कार 3 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार (आईएएस) उपस्थित रहे। पारादीप पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष पी. एल. हरनाध ने यह सम्मान बंदरगाह के समस्त कर्मियों की ओर से ग्रहण किया।

स्वच्छता पखवाड़ा क्या है?

स्वच्छता पखवाड़ा, स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य व्यवहार परिवर्तन, प्रभावी कचरा प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। इस पुरस्कार के तहत बंदरगाहों का मूल्यांकन नागरिक भागीदारी, हरित प्रथाओं और सफाई मित्रों के कल्याण जैसे मानकों पर किया जाता है।

जन भागीदारी: स्वच्छता का केंद्र

‘जन भागीदारी’ के तहत पारादीप पोर्ट ने स्कूलों, मंदिरों, समुद्र तटों, तालाबों और बंदरगाह परिसरों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाए। साइक्लोथॉन, स्वच्छता रन, रैलियाँ, स्वच्छता रथ, मानव श्रृंखला और “एक दिन एक घंटा एक साथ” अभियान ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता साझा नागरिक जिम्मेदारी है।

‘एक पेड़ माँ के नाम’: हरित प्रतिबद्धता

‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के अंतर्गत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर उपेक्षित क्षेत्रों को हरित स्थलों में बदला गया। विशेष रूप से, एक पेड़ माँ के नाम 2.0 के तहत पारादीप सी बीच पर 40,000 पौधे लगाए गए, जिससे जलवायु कार्रवाई, तटीय संरक्षण और दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता को बल मिला।

सफाई मित्र सुरक्षा: गरिमा और कल्याण

‘सफाई मित्र सुरक्षा’ स्तंभ के अंतर्गत स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान पर विशेष ध्यान दिया गया। चिकित्सा जांच, सम्मान समारोह और विशेष फेलिसिटेशन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे समावेशी स्वच्छता का उदाहरण प्रस्तुत हुआ।

नवाचार, जागरूकता और वेस्ट-टू-वेल्थ

पारादीप पोर्ट ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ अभियान, स्ट्रीट थिएटर, रैलियाँ और कपड़े के थैलों का वितरण किया। स्क्रैप-टू-स्ट्रक्चर और वेस्ट-टू-वेल्थ प्रदर्शनियों के माध्यम से सतत पुन: उपयोग को बढ़ावा मिला। रक्तदान शिविर, स्वच्छता-थीम कला प्रतियोगिताएँ और स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत नवीनीकरण गतिविधियों ने स्वच्छता को बंदरगाह संस्कृति का हिस्सा बनाया।

मणिपुर में नई सरकार बनने की तैयारी, सत्ताधारी पार्टी ने इस नेता को CM पद के लिए चुना

कई महीनों की राजनीतिक अनिश्चितता के बाद मणिपुर में नई सरकार का गठन होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने युमनाम खेमचंद सिंह को अपने विधायक दल का नेता चुन लिया है, जिससे उनके राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब राज्य में राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी को समाप्त होने वाला है। लंबे समय तक चले जातीय तनाव और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर केंद्र के शासन में था। खेमचंद सिंह का नेतृत्व संभालना राज्य के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिससे राजनीतिक स्थिरता बहाल होने और सामान्य स्थिति की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

मणिपुर के नए मुख्यमंत्री कौन हैं?

युमनाम खेमचंद सिंह 62 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता हैं और सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में एन. बीरेन सिंह के साथ की थी और वर्ष 2013 में भाजपा में शामिल हुए। एक अनुशासित संगठनकर्ता और पूर्व ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे खेमचंद सिंह मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) भी रह चुके हैं और बाद में कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। समय के साथ, विशेषकर राज्य में लंबे समय से चले आ रहे संकट के दौरान, वे पूर्व नेतृत्व के प्रमुख आंतरिक आलोचकों में गिने जाने लगे।

युमनाम खेमचंद सिंह की सरकार का गठन

खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुने जाने का निर्णय नई दिल्ली में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वयं बीरेन सिंह ने की। 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन समाप्त होने से पहले केंद्र सरकार राज्य में शीघ्र लोकप्रिय सरकार स्थापित करना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, नई मंत्रिपरिषद में संघर्ष से प्रभावित विभिन्न समुदायों को व्यापक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। खेमचंद सिंह को आरएसएस समर्थित और संगठनात्मक रूप से मजबूत नेता माना जाता है, जिससे संवेदनशील दौर में शासन और सुलह की प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मणिपुर राजनीतिक संकट में कैसे फंसा

मणिपुर का मौजूदा राजनीतिक संकट मई 2023 में भड़की मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा से जुड़ा है। इसके बाद केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं बिगड़ी, बल्कि घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच भौगोलिक और राजनीतिक विभाजन भी गहरा गया। बड़े पैमाने पर विस्थापन, राहत शिविरों और आपसी अविश्वास ने शासन व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर कर दिया। समय के साथ मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह शांति बहाल करने में असफल माने जाने लगे, यहां तक कि अपनी ही पार्टी के भीतर भी।

आंतरिक विरोध और बीरेन सिंह का इस्तीफा

हिंसा जारी रहने के साथ बीरेन सिंह पर विपक्ष और भाजपा विधायकों दोनों का दबाव बढ़ता गया। अक्टूबर 2024 तक 19 भाजपा विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चेताया कि मुख्यमंत्री राजनीतिक रूप से बोझ बन चुके हैं। स्थिति तब और बिगड़ गई जब नेशनल पीपुल्स पार्टी ने सामान्य स्थिति बहाल न होने का हवाला देते हुए समर्थन वापस ले लिया। संभावित अविश्वास प्रस्ताव और आंतरिक विद्रोह के बीच बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन का रास्ता साफ हुआ।

राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया

फरवरी 2025 में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया और विधानसभा को निलंबित अवस्था में रखा गया। केंद्र ने इसे हिंसा पर नियंत्रण, सुरक्षा प्रबंधन और राजनीतिक अराजकता रोकने के लिए अस्थायी स्थिरीकरण उपाय के रूप में देखा। हालांकि कानून-व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ, लेकिन राजनीतिक वैधता कमजोर रही। विधायक हाशिए पर रहे और जनता में असंतोष बढ़ा क्योंकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की शासन में भूमिका सीमित हो गई थी।

रक्षा विभाग में नए निदेशक की नियुक्ति को एसीसी की मंजूरी

वरिष्ठ नौकरशाही नियुक्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) 2007 बैच की अधिकारी एम. अनिता को रक्षा विभाग में निदेशक पद पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना के तहत की गई है, जो रक्षा जैसे रणनीतिक मंत्रालयों में अनुभवी सिविल सेवकों की तैनाती की सरकार की नीति को दर्शाती है।

नियुक्ति का विवरण

एम. अनिता की नियुक्ति सिविल सेवा बोर्ड (CSB) की औपचारिक सिफारिश के बाद की गई है। वह वर्तमान में जहाँ निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं, वहीं से पार्श्व स्थानांतरण (लैटरल शिफ्ट) के आधार पर रक्षा विभाग में पदभार ग्रहण करेंगी। उनकी नई तैनाती उस तिथि से प्रभावी होगी, जिस दिन वह पदभार संभालेंगी।

कार्यकाल और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना

आदेश के अनुसार, एम. अनिता रक्षा विभाग में 26 सितंबर 2026 तक कार्य करेंगी। यह अवधि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना (Central Staffing Scheme) के तहत निदेशक स्तर पर उनकी पाँच वर्षीय प्रतिनियुक्ति के शेष कार्यकाल के बराबर है, या अगले आदेश तक—जो भी पहले हो। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना का उद्देश्य प्रमुख मंत्रालयों में विविध प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना (Central Staffing Scheme) के बारे में

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना (CSS) कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा संचालित एक तंत्र है, जिसके तहत अखिल भारतीय सेवाओं (AIS) और समूह ‘A’ सेवाओं के अधिकारियों को भारत सरकार के वरिष्ठ पदों पर प्रतिनियुक्त किया जाता है।

  • इसकी शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी।
  • इसका उद्देश्य राज्यों से आए अनुभवी अधिकारियों के माध्यम से नीति निर्माण को सुदृढ़ करना है।
  • यह योजना केंद्र और राज्यों के बीच द्विपक्षीय आवागमन को बढ़ावा देती है और अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर की नीति-निर्माण का अनुभव प्रदान करती है।
  • इसके अंतर्गत अवर सचिव से लेकर सचिव स्तर तक के पद शामिल होते हैं।
  • पात्र अधिकारियों में IAS, IPS, IFoS और चयनित समूह ‘A’ सेवाएँ शामिल हैं, जिनके पास न्यूनतम 9 वर्ष की सेवा हो।
  • चयन DoPT द्वारा तैयार की गई वार्षिक ऑफर लिस्ट के माध्यम से किया जाता है।
  • प्रतिनियुक्ति का कार्यकाल सामान्यतः 3 से 5 वर्ष का होता है, जिसके बाद अधिकारी अपने मूल कैडर में लौटते हैं।
  • महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान भी है।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

  • नियुक्त अधिकारी: एम. अनिता
  • सेवा: भारतीय राजस्व सेवा (आयकर), 2007 बैच
  • पद: निदेशक, रक्षा विभाग
  • स्वीकृति प्राधिकारी: मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC)
  • कार्यकाल की वैधता: 26 सितंबर 2026 तक

13वां भारत-किर्गिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास खंजर-XIII असम में

भारत और किर्गिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास खंजर का 13वां संस्करण 4 से 17 फरवरी 2026 तक असम के मिसामारी में आयोजित किया जाने वाला है। इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत शहरी युद्ध और आतंकवाद विरोधी परिदृश्यों में संयुक्त अभियानों पर ध्यान केंद्रित करते हुए दोनों देशों के विशेष बलों के बीच समन्यवय को बढ़ाना है। संयुक्त अभ्यास खंजर-XIII द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा और भारत और किर्गिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही सैन्य साझेदारी को और गहरा करेगा।

अभ्यास खंजर (Exercise KHANJAR) क्या है?

अभ्यास खंजर भारत और किर्गिज़स्तान के बीच होने वाला वार्षिक संयुक्त विशेष बल सैन्य अभ्यास है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और समझ को मजबूत करना है। समय के साथ यह अभ्यास विशेष अभियानों, विशेषकर आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों और उच्च जोखिम वाले युद्ध क्षेत्रों में सर्वोत्तम तरीकों को साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। इस अभ्यास का आयोजन बारी-बारी से दोनों देशों में किया जाता है, जो रक्षा साझेदारी में समानता और आपसी विश्वास का प्रतीक है।

2026 में खंजर-XIII कहाँ और कब आयोजित होगा?

अभ्यास खंजर का 13वाँ संस्करण, खंजर-XIII, 4 फरवरी से 17 फरवरी 2026 तक असम के मिसामारी में आयोजित किया जाएगा। मिसामारी पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ यथार्थपरक युद्ध अभ्यास के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। असम में इस अभ्यास का आयोजन भारत के पूर्वी क्षेत्र पर रणनीतिक फोकस और विविध परिचालन वातावरणों में अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों की मेजबानी की क्षमता को भी दर्शाता है।

कौन-कौन सी सेनाएँ भाग लेंगी?

इस अभ्यास में भारत की विशिष्ट पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) और किर्गिज़स्तान की स्कॉर्पियन ब्रिगेड भाग लेंगी। ये दोनों इकाइयाँ उच्च जोखिम वाले अभियानों और त्वरित प्रतिक्रिया मिशनों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। इनकी संयुक्त भागीदारी से सामरिक स्तर पर गहन समन्वय विकसित होता है, जिससे भविष्य में बहुराष्ट्रीय या संयुक्त राष्ट्र के अधीन अभियानों में प्रभावी सहयोग संभव हो सकेगा।

मुख्य प्रशिक्षण क्षेत्र

अभ्यास खंजर-XIII का मुख्य फोकस शहरी युद्ध, आतंकवाद-रोधी अभियान और संयुक्त राष्ट्र के अधीन विशेष बल रणनीतियों पर रहेगा। सैनिक स्नाइपिंग, कक्षीय हस्तक्षेप (रूम इंटरवेंशन), इमारतों की सफाई, पर्वतीय युद्ध कौशल और विशेष आतंकवाद-रोधी अभ्यास जैसे उन्नत कौशलों का अभ्यास करेंगे। ये गतिविधियाँ वास्तविक परिस्थितियों का अनुकरण करती हैं, जिससे सैनिक आतंकवाद, उग्रवाद और असममित युद्ध जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।

इस अभ्यास का महत्व

भारत और किर्गिज़स्तान के बीच मैत्रीपूर्ण और रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें रक्षा सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है। संयुक्त सैन्य अभ्यासों के अलावा भारत किर्गिज़ सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है, आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाता है और बिश्केक स्थित किर्गिज़-इंडिया माउंटेन बायो-मेडिकल रिसर्च सेंटर में अनुसंधान सहयोग भी करता है। अभ्यास खंजर आपसी विश्वास को मजबूत करता है, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देता है और आतंकवाद, उग्रवाद तथा मादक पदार्थों की तस्करी जैसी साझा चिंताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

असम सरकार दरांग राजा की विरासत को संरक्षित करेगी

असम सरकार ने 02 फरवरी 2026 को कोच वंश के दरांग राजाओं की विरासत के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए ₹50 करोड़ की अनुदान राशि देने की घोषणा की। यह घोषणा दरांग जिले में आयोजित महाबीर चिलाराय दिवस समारोह के दौरान की गई। यह कदम असम की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा करने, स्वदेशी शासकों के योगदान को सम्मान देने और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन तथा सांस्कृतिक गौरव के केंद्र के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कोच वंश की विरासत संरक्षण हेतु असम सरकार की अनुदान घोषणा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दरांग राज्य की कोच वंशीय विरासत के संरक्षण के लिए ₹50 करोड़ की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। इस परियोजना के तहत कोच वंश से जुड़े शाही स्थलों, स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहरों के पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दरांग जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) को कार्य तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि पुनर्स्थापन कार्य में कोच वंश के ऐतिहासिक महत्व तथा असम के राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में उसके योगदान को सही रूप में दर्शाया जाना चाहिए।

दरांग के राजा और कोच वंश कौन थे

दरांग राज्य पर शासन करने वाला कोच वंश मध्यकालीन असम के सबसे शक्तिशाली राजवंशों में से एक था। प्राचीन कामरूप में पाल वंश के पतन के बाद कोच समुदाय का उदय हुआ। इस राज्य की स्थापना बिस्वा सिंघा ने की थी और महाराज नरनारायण के शासनकाल में यह अपने शिखर पर पहुँचा। कोच वंश ने असम की राजनीतिक सीमाओं, सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

असम के इतिहास में महावीर चिलाराय की भूमिका

महावीर चिलाराय, महाराज नरनारायण के भ्राता, असम के महानतम सैन्य नायकों में गिने जाते हैं। युद्धभूमि में उनकी तीव्र और बिजली की गति जैसी आक्रमण शैली के कारण उन्हें “चिलाराय” की उपाधि मिली। उन्होंने थल और नौसैनिक बलों से युक्त एक सशक्त व सुव्यवस्थित सेना का निर्माण किया। उनके अभियानों के माध्यम से कोच साम्राज्य का प्रभाव अहोम, कचारी, जयंतिया, त्रिपुरा और सिलहट क्षेत्रों तक फैल गया। ऐतिहासिक गोहाइन कमल अली सड़क उनकी रणनीतिक दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।

कोच शासकों के सांस्कृतिक और धार्मिक योगदान

महाराज नरनारायण और चिलाराय के शासनकाल में असम में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन का पुनर्जागरण हुआ। कामाख्या और हयग्रीव माधव जैसे प्रमुख मंदिरों के पुनर्निर्माण से धार्मिक परंपराओं को नया जीवन मिला। इन प्रयासों ने असम की आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ किया और यह सिद्ध किया कि कोच वंश केवल राजनीतिक शासक ही नहीं, बल्कि संस्कृति के संरक्षक भी थे, जिन्होंने पीढ़ियों तक असमिया पहचान को आकार दिया।

अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दरांग राज्य के महाराज कृष्णनारायण की प्रतिमा का अनावरण किया तथा मंगलदोई और गोलाघाट में चिलाराय भवनों का उद्घाटन किया। साथ ही, अमिंगांव में ऑल असम कोच राजबोंगशी संमिलनी के लिए भूमि आवंटन और कार्यालय भवन के निर्माण की घोषणा भी की गई। ये कदम राज्य की स्वदेशी विरासत के संरक्षण और समुदाय की पहचान को सशक्त करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

निवेदिता दुबे विमानपत्तन प्राधिकरण बोर्ड की पहली महिला सदस्य बनीं

निवेदिता दुबे ने 30 जनवरी से एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) में सदस्य (मानव संसाधन) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इस नियुक्ति के साथ ही वह एएआई बोर्ड के इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला बन गई हैं। तीन दशकों से अधिक के अनुभव वाली एक अनुभवी विमानन पेशेवर के रूप में, उनका यह पदभार संभालना भारत के हवाई अड्डा पारिस्थितिकी तंत्र में समावेशी नेतृत्व और सशक्त मानव संसाधन प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की पहली महिला निदेशक 

निवेदिता दुबे की निदेशक (मानव संसाधन) के रूप में नियुक्ति एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। पहली बार किसी महिला ने एएआई बोर्ड में मानव संसाधन का दायित्व संभाला है। यह कदम संगठन में समावेशी नेतृत्व और आधुनिक प्रशासनिक सोच को दर्शाता है। सदस्य (एचआर) के रूप में वह कार्मिक नीतियों, औद्योगिक संबंधों और वाणिज्यिक प्रबंधन से जुड़े कार्यों की देखरेख करेंगी, जिससे भारत के तेजी से विस्तार कर रहे विमानन ढांचे को समर्थन देने वाली कार्यशक्ति को सुदृढ़ करने में उनकी अहम भूमिका होगी।

करियर यात्रा और पेशेवर अनुभव

निवेदिता दुबे ने वर्ष 1995 में एएआई में एयरपोर्ट मैनेजर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली सहित प्रमुख हवाई अड्डों पर संचालन से जुड़े दायित्व संभाले। समय के साथ उन्होंने हवाई अड्डा संचालन, मानव संसाधन प्रबंधन और आर्थिक विनियमन के क्षेत्रों में व्यापक अनुभव अर्जित किया। वर्ष 2023 में वह पूर्वी क्षेत्र की पहली महिला क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक बनीं, जहां उन्होंने 12 हवाई अड्डों का प्रबंधन किया। तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने आपात स्थितियों, बड़े कार्यबल और जटिल परिचालन चुनौतियों को सफलतापूर्वक संभाला है, जिससे वह भारत के विमानन क्षेत्र की एक सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरी हैं।

प्रमुख योगदान और नेतृत्व उपलब्धियाँ

क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक के रूप में निवेदिता दुबे ने कई महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण परियोजनाओं का नेतृत्व किया, जिनमें पटना और पूर्णिया हवाई अड्डों पर नए टर्मिनल भवनों का निर्माण शामिल है। औद्योगिक संबंधों, स्टाफ कल्याण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता के लिए उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है। विशेष रूप से, उन्होंने श्रम संबंधों का ऐसा कुशल प्रबंधन किया कि औद्योगिक अशांति के कारण एक भी कार्य-घंटे की हानि नहीं हुई। इसके अलावा, उन्होंने कर्मचारी कल्याण प्रणालियों को मजबूत किया, ट्रेड यूनियन जनमत संग्रह आयोजित कराए और संगठन भर में नेतृत्व विकास एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का सफल संचालन किया।

निवेदिता दुबे की शिक्षा और प्रशिक्षण

निवेदिता दुबे ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान की पढ़ाई की और इसके बाद मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MONIRBA) से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। वह आईसीएओ (ICAO) से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पेशेवर हैं और एक प्रमाणित प्रशिक्षक भी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इंडियन एविएशन अकादमी में फैकल्टी के रूप में सेवाएं दी हैं, जहां उन्होंने भावी विमानन पेशेवरों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ अपने संचालन और मानव संसाधन प्रबंधन के अनुभव को अगली पीढ़ी के साथ साझा किया।

आंध्र प्रदेश में ‘Pilloo AI’ का शुभारंभ

आंध्र प्रदेश ने छोटे व्यवसायों के लिए एक अभिनव डिजिटल उपकरण पेश किया है। 2 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिल्लो AI (Pilloo AI) नामक वॉयस-आधारित बिलिंग और अकाउंटिंग ऐप लॉन्च किया। यह ऐप उपयोगकर्ताओं को अपनी मातृभाषा में बोलकर इनवॉइस, लेन-देन और रिपोर्ट प्रबंधित करने की सुविधा देता है, जिससे अकाउंटिंग विशेषज्ञता की आवश्यकता नहीं रहती। यह पहल व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक के उपयोग की राज्य की सोच के अनुरूप है।

पिल्लो AI क्या है?

  • पिल्लो AI एक AI-संचालित वॉयस-आधारित अकाउंटिंग एजेंट है, जिसे व्यवसायों के वित्तीय प्रबंधन को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • उपयोगकर्ता केवल बोलकर इनवॉइस बना सकते हैं, बिक्री व भुगतान दर्ज कर सकते हैं, बैलेंस शीट तैयार कर सकते हैं और देय-प्राप्य का ट्रैक रख सकते हैं।
  • यह ऐप खासतौर पर सूक्ष्म व लघु उद्यमों, दुकानदारों और पहली बार उद्यम शुरू करने वालों के लिए उपयोगी है, जिन्हें औपचारिक अकाउंटिंग का ज्ञान नहीं होता।

ऐप की प्रमुख विशेषताएँ

  • पाँच भारतीय भाषाओं का समर्थन, जिससे व्यापक पहुँच संभव।
  • दैनिक लेन-देन दर्ज करना, स्पष्ट वित्तीय रिपोर्ट बनाना और बिल व बैंक स्टेटमेंट अपलोड कर डेटा एंट्री का स्वचालन।
  • AI-आधारित डेटा एक्सट्रैक्शन से खरीद और बैंक एंट्री तुरंत प्रोसेस होती हैं।
  • इससे मैनुअल मेहनत, त्रुटियाँ और बहीखाता रखने में लगने वाला समय काफी कम होता है।

MSMEs और उद्यमियों के लिए लाभ

  • पिल्लो AI औपचारिक अकाउंटिंग की बाधाएँ कम करता है।
  • पेशेवर अकाउंटेंट या महंगे सॉफ्टवेयर की जरूरत घटती है।
  • छोटे व्यापारी, स्टार्टअप और स्वरोज़गार करने वाले लोग सटीक वित्तीय रिकॉर्ड रख पाते हैं।
  • इससे वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और ऋण व सरकारी योजनाओं तक पहुँच बेहतर होती है।
  • यह पहल MSMEs के डिजिटलीकरण के राष्ट्रीय प्रयासों को भी समर्थन देती है।

लॉन्च पर मुख्यमंत्री का संदेश

अमरावती स्थित आंध्र प्रदेश सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि ऐसे उपकरण व्यवसायों का समय बचाते हैं और पारदर्शिता बढ़ाते हैं। उन्होंने वॉयस कमांड से पहला इनवॉइस बनाकर ऐप का प्रदर्शन भी किया, जिससे यह दिखाया गया कि AI किस तरह प्राकृतिक भाषा को वास्तविक व्यावसायिक कार्यों में बदल सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ ने सीमा पार डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने हेतु अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत और यूरोपीय संघ ने कागज़ रहित वैश्विक व्यापार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 27 जनवरी 2026 को, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और यूरोपीय आयोग के DG CONNECT ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों और सीलों के सुरक्षित सीमा-पार उपयोग को सक्षम बनाएगा। इस कदम से भारतीय निर्यातक और EU के व्यवसाय डिजिटल रूप से अनुबंध और दस्तावेज़ों पर कानूनी मान्यता के साथ हस्ताक्षर कर सकेंगे, जिससे समय, लागत और अनुपालन बाधाओं में कमी आएगी और भारत–EU डिजिटल भरोसा और सहयोग मजबूत होगा।

समझौते पर किसने हस्ताक्षर किए?

यह समझौता इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और यूरोपीय आयोग के Directorate-General for Communication Networks, Content and Technology (DG CONNECT) के बीच किया गया। इसे औपचारिक रूप से MeitY के सचिव और DG CONNECT के महानिदेशक ने हस्ताक्षरित किया, जो दोनों पक्षों की उच्च-स्तरीय संस्थागत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रशासनिक समझौता किस बारे में है?

यह समझौता उन्नत इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों, इलेक्ट्रॉनिक सीलों और पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (PKI) प्रणालियों पर सहयोग के लिए एक ढांचा स्थापित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और EU के डिजिटल ट्रस्ट सिस्टम्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करना है, जबकि यह उनके संबंधित कानूनी ढांचों के अनुरूप पूरी तरह संगत रहेगा। भारत में इसका कार्यान्वयन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत प्रमाणपत्र प्राधिकरण नियंत्रक (CCA) के माध्यम से किया जाएगा।

यह क्रॉस-बॉर्डर व्यापार में कैसे मदद करेगा?

  • इस ढांचे के तहत, भारत और EU अपने मान्यता प्राप्त सेवा प्रदाताओं की भरोसेमंद सूचियों (trusted lists) को लिंक करेंगे।
  • इससे किसी भी क्षेत्र में जारी किए गए इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों और सीलों (signatures & seals) को आसानी से वैध (validate) किया जा सकेगा।
  • परिणामस्वरूप, भारतीय निर्यातक और EU के खरीदार डिजिटल रूप से अनुबंध, चालान और अनुपालन दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर सकेंगे, बिना कागजी कार्यवाही या कूरियर देरी के।
  • यह लेनदेन समय को काफी घटाता है, लागत कम करता है और क्रॉस-बॉर्डर व्यापार में कानूनी निश्चितता बढ़ाता है।

यह MSMEs के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह समझौता विशेष रूप से MSMEs के लिए लाभकारी है, जिन्हें अक्सर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उच्च अनुपालन लागत और प्रक्रियागत देरी का सामना करना पड़ता है।
  • भरोसेमंद डिजिटल हस्ताक्षरों की सुविधा के माध्यम से छोटे निर्यातक दस्तावेज़ीकरण तेज़ी से और अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा कर सकते हैं।
  • यह भारत के व्यापक लक्ष्य का समर्थन करता है—MSMEs को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना और उन्हें वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से यूरोप, तक बेहतर पहुँच प्रदान करना।

DG CONNECT के बारे में

संगठन का अवलोकन

  • नाम: संचार नेटवर्क, सामग्री और प्रौद्योगिकी के लिए महानिदेशालय (डीजी कनेक्ट)
  • संस्था: यूरोपीय आयोग (European Commission)
  • केंद्रित क्षेत्र: यूरोप का डिजिटल वर्तमान और भविष्य

मुख्य मिशन

  • यूरोप की डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देना और मजबूत करना
  • लोकतंत्र, सुरक्षा, प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी स्वायत्तता का समर्थन करना
  • रणनीतिक डिजिटल तकनीकों में यूरोप की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना

डिजिटल नीति और नवाचार की जिम्मेदारियाँ

  • डिजिटल और अत्याधुनिक तकनीकों का समर्थन और नियमन करना
  • यूरोप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में वैश्विक नेता के रूप में बढ़ावा देना
  • डेटा की आर्थिक और सामाजिक संभावनाओं को उजागर करना
  • डिजिटल अवसंरचना और कनेक्टिविटी को सशक्त बनाना
  • डिजिटल कौशल और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना

NSO ने माइग्रेशन डेटा को अपडेट करने के लिए देशव्यापी माइग्रेशन सर्वे की घोषणा की

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई 2026 से जून 2027 तक देशव्यापी प्रवासन सर्वेक्षण की घोषणा की है। तेज़ शहरीकरण, श्रम गतिशीलता और राज्यों में मौसमी प्रवासन बढ़ने के कारण सरकार का उद्देश्य अद्यतन और व्यापक प्रवासन डेटा तैयार करना है। इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष भविष्य में शहरी योजना, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नीतिगत निर्णयों में मार्गदर्शन करेंगे, जिससे यह सर्वेक्षण वर्तमान मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक बन जाता है।

NSO प्रवासन सर्वेक्षण क्या है?

  • इस प्रस्तावित सर्वेक्षण का उद्देश्य भारत भर में प्रवासन के पैटर्न पर ताज़ा और विस्तृत डेटा एकत्र करना है।
  • यह ग्रामीण-शहरी प्रवासन, राज्य-राज्य के बीच आंदोलन, मौसमी और लौटकर प्रवासन, तथा प्रवासन के पीछे के कारणों की जानकारी एकत्र करेगा।
  • सामान्य श्रम सर्वेक्षणों के विपरीत, यह समर्पित पहल जनसंख्या की गतिशीलता का समग्र चित्र प्रस्तुत करेगी, जिसमें प्रवासन के सामाजिक, आर्थिक और रोजगार-संबंधी आयाम शामिल होंगे।

सर्वेक्षण द्वारा कवर किए जाने वाले मुख्य क्षेत्र:

  • प्रवासन की मात्रा और प्रकार पर ध्यान केंद्रित करना, जैसे कौन प्रवास करता है, कहाँ जाता है और क्यों।
  • प्रवासी मजदूरों की रोजगार प्रोफ़ाइल का अध्ययन करना, जिससे यह समझने में मदद मिले कि प्रवासन और नौकरी के अवसर कैसे जुड़े हैं।
  • अस्थायी, चक्रीय और मौसमी प्रवासन पर विशेष ध्यान देना, जो अक्सर कम रिपोर्ट किया जाता है लेकिन भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नीति निर्माण के लिए डेटा का महत्व

  • सरकार के अनुसार, इस सर्वेक्षण से प्राप्त डेटा प्रमाण-आधारित नीति निर्माण में मदद करेगा।
  • यह शहरी बुनियादी ढांचे, आवास, परिवहन प्रणाली, रोजगार सृजन, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा में बेहतर हस्तक्षेप योजना बनाने में योजनाकारों की सहायता करेगा।
  • जैसे-जैसे शहरों पर दबाव बढ़ रहा है और श्रम गतिशीलता बढ़ रही है, सटीक प्रवासन डेटा क्षेत्रीय विकास और कल्याण योजना के लिए आवश्यक है।

पहले किए गए सर्वेक्षणों से प्रवासन की जानकारी

  • प्रवास सर्वेक्षण नई बात नहीं है। नवीनतम डेटा पीरियोडिक लेबर फ़ोर्स सर्वे (PLFS) 2020–21 और मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे 2020–21 से आया था।
  • PLFS 2020–21 के अनुसार, भारत में कुल प्रवासन दर 28.9% थी, जो देश में आंतरिक प्रवासन की व्यापकता को दर्शाती है।
  • महामारी के बाद की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अब इन आंकड़ों को अपडेट करने की आवश्यकता है।

भारत में प्रवासन में लिंग आधारित अंतर

  • पहले के डेटा ने प्रवासन में स्पष्ट लिंग अंतर दिखाया।
  • पुरुषों में प्रवासन दर 10.7% थी, जबकि महिलाओं में यह 47.9% थी।
  • महिलाओं में विवाह प्रमुख कारण था, जो महिला प्रवासन का 86.8% हिस्सा बनता है।
  • इसके विपरीत, पुरुषों में रोजगार और बेहतर नौकरी के अवसर प्रमुख प्रेरक थे, जिनकी दर 22.8% थी।
  • आगामी सर्वेक्षण से यह आकलन करने की उम्मीद है कि क्या ये प्रवृत्तियाँ बदल रही हैं।

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