2023 की पहली तिमाही में भारतीय जीडीपी 12-13% बढ़ने की उम्मीद: ICRA

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आईसीआरए (ICRA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दोहरे अंकों में 13 प्रतिशत पर बढ़ने की उम्मीद है। एक तरफ जहां पूरी दुनियां मंदी की आशंका से जूझ रही हैं ऐसे में यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत की खबर है।

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वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में मूल मूल्य पर ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 12.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहले 3.9 फीसदी था। आईसीआरए को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में सेक्टोरल ग्रोथ सर्विस सेक्टर (प्लस 17-19 प्रतिशत) और वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में प्लस5.5 प्रतिशत होगी, इसके बाद उद्योग (प्लस 9-11 प्रतिशत (प्लस 1.3 प्रतिशत) होगा।

आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने एक विज्ञप्ति में कहा, “वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में भारत के जीडीपी विस्तार होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में भारत कोविड-19 की दूसरी लहर से निपटने के साथ-साथ व्यापक टीकाकरण अभियान को संचालित करने में भी कामयाब रहा है।

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भारत में 2025 तक होंगे 1.8 लाख किमी. राजमार्ग, 1.2 लाख किमी. रेलवे लाइन

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देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2025 तक 1.8 लाख किलोमीटर पर पहुंच जाएगी। वहीं इस दौरान रेलवे लाइन 1.2 लाख किलोमीटर हो जाएगी। यह अनुमान बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज इंडिया की एक रिपोर्ट में लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में जितने राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन 2025 में खत्म होने जा रहे दशक के दौरान बनाई जाएंगी, वह 1950 से 2015 के बीच किए गए संचयी निर्माण से कहीं अधिक होगा।

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मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 तक राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 1.8 लाख किलोमीटर तक पहुंचने का अनुमान है, वहीं रेलवे लाइन निर्माण 1.2 लाख किलोमीटर तक होने की उम्मीद है।
  • वर्ष 1950 से 2015 के बीच देश में केवल 4,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हुआ जिसे मिलाकर 2015 में कुल लंबाई 77,000 किलोमीटर तक पहुंची। 
  • हालांकि, इनके 2025 तक 1.8 लाख किलोमीटर को पार कर जाने की उम्मीद है यानी दस वर्षों की अवधि में राजमार्गों की कुल लंबाई दोगुना से अधिक होने का अनुमान है।
  • रिपोर्ट में रेलवे नेटवर्क के बारे में कहा गया कि 1950 तक देश में केवल 10,000 किलोमीटर की रेलवे लाइन बिछी थी जो 2015 में 63,000 किलोमीटर तक पहुंच गई और 2025 तक इसके 1.2 लाख किलोमीटर तक पहुंच जाने का अनुमान है।
  • इसमें बताया गया कि 1995 में देश में बंदरगाह क्षमता महज 777 एमटीपीए थी जो 2015 में बढ़कर 1,911 एमटीपीए हो गई और 2025 तक इसके दोगुने से भी अधिक 3,000 एमटीपीए होने की उम्मीद है।

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जर्मनी में हाइड्रोजन ट्रेन की पहली रेल सेवा शुरू

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जर्मन अधिकारियों ने हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री ट्रेनों का दुनिया का पहला बेड़ा लॉन्च किया, जो 15 डीजल ट्रेनों की जगह ले रहा है, जो पहले लोअर सैक्सोनी राज्य में गैर-विद्युतीकृत पटरियों पर संचालित होती थीं। सप्लाई चेन की दिक्कतों के बावजूद जर्मनी ने हरित रेल सेवा की ओर बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम से मिली 14 ट्रेनों के साथ जर्मन राज्य लोअर सैक्सनी में यह सेवा शुरू की गई है। हैंबर्ग के पास कुक्सहाफेन से ब्रेमरहाफेन, ब्रेमरफोएर्डे और बुक्सटेहुडे तक 100 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर सिर्फ हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का सफर शुरू किया गया है।

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हाइड्रोजन ट्रेन रेल क्षेत्र को कार्बनुक्त करने की दिशा में बहुत बड़ी संभावनायें ले कर आया है। इसके जरिये जलवायु को प्रदूषित करने वाली डीजल इंजनों से छुटकारा पाया जा सकता है। जर्मनी में अब भी 20 फीसदी यात्रायें डीजल इंजनों के जरिये होती हैं। परिवहन का शून्य उत्सर्जन वाला तरीका कही जा रहीं हाइड्रोजन ट्रेन वातारण में मौजूद ऑक्सीजन को छत पर लगे फ्यूल सेल के जरिये हाइड्रोजन के साथ मिलाती हैं। इसके नतीजे में पैदा हुई बिजली ट्रेन खींचती है।

ईंधन के रूप में हाइड्रोजन पर सिर्फ रेल सवा की ही नजर नहीं है। सड़क पर चलने वाली गाड़ियों से लेकर, विमान और स्टील  या केमिकल जैसे भारी उद्योग भी कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिये हाइड्रोजन की तरफ देख रहे हैं। जर्मनी ने 2020 में सात अरब यूरो की महत्वाकांछी योजना का एलान किया था जिससे कि एक दशक के भीतर देश हाइड्रोजन तकनीक में अगुवा बन जायेगा।

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एंजेला मर्केल ने शरणार्थियों के स्वागत के प्रयास के लिए जीता यूनेस्को शांति पुरस्कार

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पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को शरणार्थियों का स्वागत करने के उनके प्रयासों के लिए 2022 के यूनेस्को शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जूरी के अध्यक्ष और 2018 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुकवेगे ने कहा, जूरी के सभी सदस्य 2015 में सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और इरिट्रिया से 1.2 मिलियन से अधिक शरणार्थियों का स्वागत करने के उनके साहसी निर्णय से प्रभावित हुए थे। यह वह विरासत है जिसे उन्होंने छोड़ दिया है।

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सम्मान का नाम आइवरी कोस्ट के पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर रखा गया है। आधिकारिक तौर पर फेलिक्स हौफौएट-बोगेन-यूनेस्को शांति पुरस्कार कहा जाता है। यह 1989 से प्रत्येक वर्ष उन व्यक्तियों, संगठनों या संस्थानों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने शांति को बढ़ावा देने, शोध करने या सुरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। चांसलर के रूप में चार बार सेवा देने के बाद पिछले साल राजनीति छोड़ चुकीं मर्केल को यह पुरस्कार कब दिया जाएगा, यह अभी तय नहीं हुआ है।

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • यूनेस्को की स्थापना: 16 नवंबर 1945;
  • यूनेस्को मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस;
  • यूनेस्को के सदस्य: 193 देश;
  • यूनेस्को प्रमुख: ऑड्रे अज़ोले।

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सिडबी और टाटा पावर के टीपीआरएमजी ने हरित उद्यमियों का समर्थन करने के लिए सहयोग किया

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देश भर में 1,000 हरित ऊर्जा व्यवसाय बनाने के लिए, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) और TP Renewable Microgrid Ltd (TPRMG), टाटा पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, ने मिलकर हरित ऊर्जा व्यवसाय कार्यक्रम शुरू किया है। यह परियोजना देश भर में स्थायी व्यापार मॉडल को बढ़ावा देगी, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण उद्यमियों का सशक्तिकरण होगा।

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सिडबी और टीपीआरएमजी: प्रमुख बिंदु

सिडबी ग्रामीण उद्यमियों की फर्मों को शुरू करने या विकसित करने के लिए वित्तपोषण (ऋण) की सुविधा के लिए अपनी प्रयास योजना या भागीदार बैंकों के माध्यम से क्रेडिट कनेक्शन का भी समर्थन करेगा।

टीपीआरएमजी इन ग्रामीण उद्यमों को उच्च गुणवत्ता, उचित मूल्य, भरोसेमंद और हरित ऊर्जा (सौर, पवन और बायोगैस) की आपूर्ति करने के लिए अपने वर्तमान माइक्रोग्रिड नेटवर्क के साथ-साथ नए क्षेत्रों में योग्य उद्यमियों की पहचान करेगा।

टीपीआरएमजी ग्रामीण फर्मों को ऊर्जा उपयोग और संरक्षण को अधिकतम करने के लिए हरित ऊर्जा विकल्प और तकनीकी जानकारी भी प्रदान करेगा। इस संबंध के पीछे प्रेरक तत्व सिडबी का एम्पावरिंग एमएसएमई अभियान और टाटा पावर का “सस्टेनेबल इज एटेनेबल” कार्यक्रम है।

टीपीआरएमजी के बारे में:

टीपीआरएमजी के माध्यम से, टाटा पावर दुनिया के सबसे बड़े माइक्रोग्रिड कार्यक्रमों में से एक का प्रबंधन करता है और एक ऊर्जा भंडारण प्रणाली के साथ एक ऑफ-ग्रिड सौर उत्पादन सुविधा चलाता है जो देश के ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली प्रदान करता है। निकट भविष्य में, व्यवसाय 10,000 माइक्रोग्रिड तैनात करने का इरादा रखता है। 200 से अधिक माइक्रोग्रिड स्थापित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश और बिहार में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, ओडिशा में एक पायलट माइक्रोग्रिड कार्यक्रम का परीक्षण किया जा रहा है।

सिडबी और टीपीआरएमजी: महत्वपूर्ण तथ्य

  • सीईओ और एमडी, टाटा पावर: प्रवीर सिन्हा
  • सीएमडी सिडबी: शिवसुब्रमण्यम रामनन

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पाम तेल की खेती को बढ़ावा देने हेतु गोदरेज एग्रोवेट का तीन पूर्वोत्तर राज्यों के साथ समझौता

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कृषि कारोबार कंपनी गोदरेज एग्रोवेट ने पाम तेल की खेती को बढ़ावा देने के लिए असम, मणिपुर और त्रिपुरा सरकार के साथ समझौता किया है। कंपनी ने पूर्वोत्तर के इन तीन राज्यों में पाम तेल के विकास और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल ऑयल पाम मिशन के तहत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये हैं। भारत पाम तेल का शुद्ध आयातक देश है।

मुख्य बिंदु

  • गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक ने कहा कि यह समझौता उत्पादन के सतत विकास के माध्यम से भारत के तेल मिशन में मुख्य स्रोत बनने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
  • समझौते के मुताबिक, कंपनी को क्षेत्र में पाम तेल की खेती के विकास और संवर्धन के लिए इन तीन राज्यों में भूमि आवंटित की जाएगी।
  • गोदरेज एग्रोवेट वर्तमान में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओड़िशा, गोवा, महाराष्ट्र और मिजोरम में पाम तेल की खेती कर रही है।
  • गौरतलब है कि सरकार ने अगस्त 2021 में 11,040 करोड़ रुपये के नियोजित खर्च के साथ राष्ट्रीय खाद्य तेल ऑयल पाम मिशन शुरू किया था।
  • इस मिशन के अंतर्गत, सरकार ने उत्तर पूर्व क्षेत्र और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्यान देते हुए 2025-26 तक पाम तेल की खेती के तहत क्षेत्र को 10 लाख हेक्टेयर और 2029-30 तक 16.7 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की परिकल्पना की है।

ओणम महोत्सव 2022: जाने इसका इतिहास और महत्व

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ओणम का त्‍योहार (Onam Festival 2022) दक्षिण भारत में खासकर केरल में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। ओणम को खासतौर पर खेतों में फसल की अच्छी उपज के लिए मनाया जाता है। ओणम को मनाने के पीछे एक पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि केरल में महाबली नाम का एक असुर राजा था। उसके आदर सत्कार में ही ओणम त्योहार मनाया जाता है।

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ओणम पर्व का खेती और किसानों से गहरा संबंध है। किसान अपने फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं। फसल पकने की खुशी लोगों के मन में एक नई उम्मीद और विश्वास जगाती है। ओणम मुख्यत: केरल, तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के राज्यों में मनाया जाता है। मलयालम सौर कैलेंडर के आधार पर ओणम चिंगम माह में मनाते हैं। इस साल ओणम का त्योहार 08 सितंबर दिन गुरुवार को मनाया जाएगा।

क्यों मनाते हैं ओणम का त्योहार?

ओणम का त्योहार भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि के दोबारा पृथ्वी पर आने के उत्सव में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि राजा बलि हर साल ओणम के समय पाताल लोक से पृथ्वी पर आते हैं। पाताल से पृथ्वी लोक की यात्रा के उपलक्ष्य में ओणम का त्योहार मनाते हैं। वामन अवतार के समय भगवान विष्णु ने दान में तीन पग भूमि लेकर अपने भक्त बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया था। ऐसी मान्यता है कि ओणम के दिन राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने के लिए पृथ्वी पर आते हैं और उनके घरों में जाते हैं। इसके उपलक्ष्य में लोग अपने घरों की सजावट करते हैं और अपने राजा के आगमन की तैयारी करते हैं।

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भारत ने स्वदेशी VL-SRSAM का सफल टेस्ट किया

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने  ओडिशा के तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर से वर्टिकल लान्च शार्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (VL-SRSAM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। एक ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण क्षमता के प्रदर्शन के लिए एक उच्च गति वाले मानव रहित हवाई लक्ष्य के खिलाफ भारतीय नौसेना के जहाज से उड़ान परीक्षण किया गया था। 

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स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) सीकर से लैस मिसाइलों ने उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदा। परीक्षण लान्च के दौरान, उड़ान पथ और वाहन प्रदर्शन मापदंडों की निगरानी उड़ान डेटा का उपयोग करके की गई थी, जिसे रडार, इलेक्ट्रो-आप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (ईओटीएस) जैसे विभिन्न रेंज उपकरणों द्वारा कैप्चर किया गया था।

रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) सीकर से लैस मिसाइलों ने उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य को रोक दिया। VL-SRSAM प्रणाली को डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। लान्च की निगरानी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा की गई थी। 

वीएल-एसआरएसएएम के सफल उड़ान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीएल-एसआरएसएएम के सफल उड़ान परीक्षण पर डीआरडीओ, भारतीय नौसेना और संबंधित टीमों की सराहना की और कहा कि मिसाइल भारतीय नौसेना के लिए एक बल गुणक साबित होगा है। जो हवाई खतरों के खिलाफ भारतीय नौसेना के जहाजों की रक्षा क्षमता को और बढ़ाएगा।

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GST संग्रह बढ़ने के बावजूद राज्यों की राजस्व वृद्धि घटकर 7-9 प्रतिशत रहेगी

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माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अच्छा रहने और संचयी वृद्धि में मददगार होने के बावजूद राज्यों की राजस्व वृद्धि चालू वित्त वर्ष में घटकर सात से नौ प्रतिशत रह सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट में यह कहा गया। यह रिपोर्ट सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 90 प्रतिशत योगदान देने वाले 17 राज्यों के आकलन के बाद तैयार की गई। 

मुख्य बिंदु

  • इसमें बताया गया कि 2020-21 में महामारी के प्रकोप के दौरान राजस्व वृद्धि कम थी और उसकी तुलना में 2021-22 में यह 25 प्रतिशत के बेहतर स्तर पर रही।
  • क्रिसिल ने रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में कर संग्रह अच्छा रहने से राजस्व वृद्धि को बल मिलेगा। राज्यों को मिलने वाले राजस्व में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी जीएसटी संग्रह और केंद्र से हस्तांतरण को मिलाकर होती है और इसके दहाई अंक में बढ़ने का अनुमान है।
  • पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाले कर संग्रह की सपाट या निम्न एवं एकल अंक की वृद्धि (8 से 9 फीसदी) और 15वें वित्त आयोग (13-15 फीसदी) की अनुदान अनुशंसा वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कारक होंगे।
  • एजेंसी ने कहा कि केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष में और बढ़ सकती है। वहीं ईंधन कर संग्रह लगभग अपरिवर्तित रहने का अनुमान है क्योंकि बिक्री में 25 प्रतिशत की वृद्धि का लाभ करों में कटौती की वजह से नहीं मिल पाएगा।

यूरोप में 500 साल का सबसे बड़ा सूखा

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जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया में दिखने लगा है। खासकर यूरोप में अब इसका सबसे बुरा प्रभाव दिख रहा है। यह पूरा महाद्वीप 500 साल के अपने सबसे बुरे सूखे की तरफ बढ़ रहा है। यहां तक कि आमतौर पर बारिश से भीगा रहने वाला इंग्लैंड तक सूखे से गुजर रहा है। यहां सरकार ने इतिहास में पहली बार आधिकारिक तौर पर सूखे से गुजरने का घोषणा किया। इससे पहले फ्रांस और स्पेन के नेताओं ने भी कहा कि उनका देश अब तक की सबसे खतरनाक सूखे की स्थिति से गुजर रहा है। 

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रिपोर्ट्स की मानें तो यूरोप में पिछले दो महीने से खास बारिश नहीं हुई, जिसके कारण आगे भी स्थिति के सुधरने की कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही। इतना ही नहीं अमेरिका के कई राज्य भी पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इनमें कैलिफोर्निया से लेकर हवाई जैसे राज्य भी शामिल हैं। ब्रिटेन और यूरोप के जलस्रोतों में पानी की कमी का असर अब इन देशों की ऊर्जा उत्पादन क्षमता पर भी दिखने लगा है। हाइड्रोपावर क्षेत्र में इस वक्त ऊर्जा उत्पादन 20 फीसदी तक नीचे गिरा है।  उधर परमाणु संयंत्रों से भी ऊर्जा उत्पादन काफी कम हो गया है, क्योंकि इन प्लांट्स को ठंडा रखने के लिए नदी के पानी की जरूरत होती है। 

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