भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान समर बनर्जी का निधन

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भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी समर बनर्जी का हाल ही में निधन हो गया। 92 साल के इस दिग्गज फुटबॉलर को कोरोना से संक्रमित होने के बाद इस दिगग्ज को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भारतीय फुटबॉल टीम अब तक सिर्फ तीन बार ओलिंपिक में जगह बना सकी है। बनर्जी के नेतृत्व वाली 1956 की भारतीय टीम ने ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। तब भारतीय टीम कांस्य पदक के लिए हुए प्लेऑफ में बुल्गारिया से 0-3 से हारकर चौथे स्थान पर रही थी। उस युग को भारतीय फुटबॉल का स्वर्णिम युग माना जाता है।

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बनर्जी ने कोलकाता के मशहूर फुटबॉल क्लब मोहन बगान को उसका पहला डूरंड कप (1953), रोवर्स कप (1955) सहित कई ट्रॉफियां जीतने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर दो बार (1953 व 1955) और कोच (1962) के रूप में एक बार संतोष ट्रॉफी भी जीती। वह भारतीय फुटबॉल टीम के चयनकर्ता भी रहे।

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अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलंपियाड में भारत तीसरे स्थान पर

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भारत ने खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी (आईओएए) पर आयोजित 15वें अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड की पदक तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया है। छात्रों के तीन स्वर्ण और दो रजत पदक जीतने के साथ भारत सिंगापुर के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा। खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी (आईओएए) पर 15वां अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड 14 से 21 अगस्त 2022 तक जॉर्जिया के कुटैसी में आयोजित किया गया।

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मुख्य बिंदु

  • टीम के साथ दो लीडर्स भी थे- प्रो. सरिता विग (भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम), प्रो. अजीत मोहन श्रीवास्तव (भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर) और दो वैज्ञानिक पर्यवेक्षक थे- डॉ. श्रीहर्ष तेंदुलकर (टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई) और श्री तेजस शाह (फादर एग्नेल मल्टीपर्पज स्कूल एंड जूनियर कॉलेज, नवी मुंबई)। 
  • डॉ. तेंदुलकर खुद 2002 और 2003 (ओवरऑल टॉपर) में अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। इस साल आईओएए में 37 मुख्य और 6 अतिथि टीमों से 209 स्टूडेंट्स शामिल हुए। 
  • इसके अलावा, 6 देशों के 24 छात्रों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया। इस साल की प्रतियोगिता पहले यूक्रेन के कीव में आयोजित होने वाली थी, लेकिन यूक्रेन में युद्ध के कारण मार्च 2022 में इसे जॉर्जिया के कुटैसी में स्थानांतरित कर दिया गया।
  • पदक तालिका में ईरान की आधिकारिक टीम को 5 स्वर्ण, अतिथि टीम को 4 स्वर्ण और 1 रजत पदक मिले। इसके बाद सिंगापुर के साथ भारत संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा। 
  • इस आईओएए में कुल मिलाकर 28 स्वर्ण, 38 रजत और 55 कांस्य पदक प्रदान किए गए। राघव गोयल ने सबसे चुनौतीपूर्ण सैद्धांतिक प्रश्न के सर्वश्रेष्ठ समाधान के लिए विशेष पुरस्कार जीता।

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जानें कौन है अन्ना मणि, जिन्हें गूगल ने दिया सम्मान

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गूगल ने भारत की प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी और मौसम विज्ञानी अन्ना मणि की 104वीं जयंती के अवसर पर एक खास डूडल बनाया है। गूगल ने इस डूडल के जरिए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। गूगल ने अपने होम पेज पर अन्ना मणि के रंग बिरंगा और सांकेतिक चित्र के माध्यम से अन्ना मणि को सम्मान दिया है। ‘भारत की मौसम महिला’ के नाम से प्रसिद्ध अन्ना मणि का मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में योगदान काफी ज्यादा है।

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कौन है अन्ना मणि?

  • अन्ना मणि का जन्म 23 अगस्त 1918 को केरल में हुआ था। उन्होंने एक भौतिक विज्ञानी और मौसम विज्ञानी के रूप में अपनी पहचान बनाई। 
  • आज उन्हीं के बदौलत भारतीय एजेंसियों के लिए देश की मौसम की स्थिति का सटीक अनुमान लगाना संभव हो पाया है।
  • मणि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के शुरुआती पैरोकार थे। 1950 के दशक में, उन्होंने सौर विकिरण निगरानी स्टेशनों का एक नेटवर्क स्थापित किया और स्थायी ऊर्जा माप पर कई पत्र प्रकाशित किए।
  • अन्ना मणि ने प्रेसीडेंसी कालेज मद्रास से भौतिकी और रसायन विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई की। 
  • उन्होंने एक वर्ष के लिए डब्ल्यूसीसी में पढ़ाया और भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु में स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त की।
  • अन्ना मणि ने पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1942 और 1945 के बीच पांच पत्र प्रकाशित किए और उन्होंने लंदन में इंपीरियल कालेज में स्नातक कार्यक्रम का अध्ययन किया।
  • वह 1948 में भारत लौट आईं और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लिए काम करना शुरू कर दिया, जहां उन्होंने देश को अपने मौसम उपकरणों के डिजाइन और निर्माण में मदद की।

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65वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की मेजबानी कनाडा करेगा

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कनाडा के हैलिफैक्स में 20 से 26 अगस्त तक 65 वां राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। सम्मेलन का थीम ‘ इंक्लूसिव, एक्सेसिबल ,अकॉउंटेबल एंड स्ट्रांग पार्लियामेंट, द कार्नर स्टोन ऑफ डेमोक्रेसी एंड एसेंशियल फ़ॉर डेवलोपमेन्ट’ है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर 08 कार्यशालाएं आयोजित हो रही हैं। 


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भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। इस शिष्टमंडल में उनके अलावा सांसद और सीपीए कार्यकारी समिति के सदस्य अनुराग शर्मा, संतोष कुशवाहा,सुनीता दुग्गल, नीरज शेखर, अनुभव मोहंती, डॉ कनिमोझी एनवीएन सोमू के अलावा लोकसभा महासचिव उत्प्पल कुमार सिंह शामिल हो रहे हैं।


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बिहार के मिथिला मखाना को मिला जीआई टैग

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केंद्र सरकार ने मिथिला मखाना को जीआई टैग प्रदान किया है। इससे उत्‍पादकों को मखाना उत्‍पाद का अधिकतम मूल्य मिलेगा। इस फैसले से बिहार के मिथिला क्षेत्र के पांच लाख से अधिक किसानों को फायदा होगा। इस बारे में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट में कहा है कि मिथिला मखाना के जीआई टैग के साथ पंजीकृत होने से किसानों को लाभ मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ जाएगी। 

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बता दें कि किसी उत्पाद को जीआई टैग मिलने पर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इसी तरह की सामग्री को उसी नाम से नहीं बेच सकती। इस टैग की मान्‍यता दस वर्षों के लिए है और बाद में इसका नवीनीकरण किया जा सकता है।बिहार मखाना का प्रमुख उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत हिस्सा है। बिहार का मखाना पूरे भारत के अलावा चीन, जापान और थाईलैंड में बहुत लोकप्रिय है।

 जीआई टैग क्या होता है?

 

जीआई टैग यानि जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (Geographic Indication tag) ये एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी उत्पाद को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है। ऐसा उत्पाद जिसकी विशेषता या फिर प्रतिष्ठा मुख्य रूप से प्रकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है।

जीआई टैग कौन देता है?

वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री प्रमोशन एंड इंटरनल ट्रेड की ओर से जीआई टैग दिया जाता है। किसी उत्पाद के लिए के लिए जीआई टैग हासिल करने के लिए चेन्नई स्थित जीआई डेटाबेस में अप्लाई करना पड़ता है। ये इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट के अधीन है, जो पूरे देश में सिर्फ चेन्नई में ही होता है।

जीआई टैग का महत्व

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जीआई टैग को एक ट्रेडमार्क के रूप में देखा जाता है। इससे टूरिज्म एवं निर्यात को बढ़ावा मिलता है, साथ ही स्थानीय आमदनी भी बढ़ती है। इसके अतिरिक्त भारत में अधिकता वाले उत्पादों को पहचान कर उनका भारत के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात और प्रचार प्रसार करने में आसानी होती है।

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Border dispute agreement struck between Arunachal Pradesh and Assam_80.1

नासा आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी

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नासा 2024 में आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी कर रही है। चंद्रमा पर वैज्ञानिकों को उतारने के लिए नासा का मिशन अब आखिरी चरण में है और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 13 संभावित लैंडिंग साइटों की पहचान की है, जहां पर नासा अपने वैज्ञानिकों को उतारने की योजना बना रहा है। इन क्षेत्रों का चयन वैज्ञानिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है।

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नासा की रिपोर्ट के मुताबिक, नासा ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 13 संभावित क्षेत्र की पहचान की है और इस प्रत्येक क्षेत्र में आर्टेमिस III के लिए कई संभावित लैंडिंग साइट हैं, जो कि चंद्रमा की सतह पर चालक दल को लाने के लिए आर्टेमिस मिशनों में से पहला होगा। नासा के इस मिशन में पहली बार महिला स्पेस यात्री भी शामिल हैं। इससे पहले साल 1969 से 1972 के बीच नासा ने कई अपोलो मिशन चांद पर भेजे थे।

नासा ने जिन लैंडिंग क्षेत्र के नामों की घोषणा की है, उनके नाम फॉस्टिनी रिम ए, शेकलटन के पास चोटी, कनेक्टिंग रिज, कनेक्टिंग रिज एक्सटेंशन, डे गेर्लाचे रिम 1, डे गेर्लाचे रिम 2, डे गेर्लाचे-कोचर मासिफ, हॉवर्थ, मालापर्ट मासिफ, लाइबनिट्ज बीटा पठार, नोबेल रिम 1, नोबेल रिम 2 और अमुंडसेन रिमो हैं। 

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Pope Francis appoints three women to advisory committee for bishops_80.1

भारत में भूजल की मुख्य समस्या क्या है?

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जल मानव की रोजमर्रा की आवश्यकताओं में से एक है इसीलिए यह जरूरी है कि समाज अपने जल संसाधनों का उचित प्रबंधन एवं उसका समान वितरण सुनिश्चित करे। जल की विभिन्न कार्यों में उपयोगिता सर्वविदित है, जो कि चर्चा का विषय नहीं है, असली मुद्दा इसकी उपलब्धता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल की प्रगति के बावजूद, भारत के भूजल संकट के कारण लगभग 50% ग्रामीण परिवारों के पास अभी भी नल का पानी नहीं है।

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अभी तक देश की सरकारें जल संरक्षण तथा उसके दुरुपयोग को रोकने के लिये कोई गंभीर प्रयास नहीं कर सकी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि स्थिति में यदि सुधार नहीं किया जाता तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ते जनसंख्या और शहरीकरण के विस्फोट की वजह से सबसे ज्यादा असर भूजल पर पड़ा है। इसके अंधाधुंध दोहन से आज भूजल संकट में है।

भारत कृषि प्रधान देश

भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन जल संरक्षण के क्षेत्र में भारत काफी ज्यादा पिछड़ा हुआ है। खेती के लिए अपनी पानी की जरूरतों को पूरा करने के भारत भूजल पर ही निर्भर है।

भारत में जल की स्थिति

भारत में जल उपलब्धता व उपयोग के कुछ तथ्यों पर विचार करें तो भारत में वैश्विक ताज़े जल स्रोत का मात्र 4 प्रतिशत मौजूद है जिससे वैश्विक जनसंख्या के 18 प्रतिशत (भारतीय आबादी) हिस्से को जल उपलब्ध कराना होता है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वर्ष 2010 में देश में मौजूद कुल ताज़े जल स्रोतों में से 78 प्रतिशत का उपयोग सिंचाई के लिये किया जा रहा था जो वर्ष 2050 तक भी लगभग 68 प्रतिशत के स्तर पर बना रहेगा। 

भारत में सिंचित क्षेत्र

भारत के लगभग 198 मिलियन हेक्टेयर फसल क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा ही सिंचित हैं। सिंचाई के लिये सर्वप्रमुख स्रोत के रूप में भूमिगत जल (63 प्रतिशत) का उपयोग किया किया जाता है, जबकि नहर (24 प्रतिशत), जलकुंड/टैंक (2 प्रतिशत) एवं अन्य स्रोत (11 प्रतिशत) भी इसमें अंशदान करते हैं। इस प्रकार, भारतीय कृषि में सिंचाई का वास्तविक बोझ भूमिगत जल पर है जो किसानों के निजी निवेश से संचालित है।

भारत में भूजल की मुख्य समस्या

 

भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण नदियों के प्रवाह में कमी, भूजल संसाधनों के स्तर में कमी एवं तटीय क्षेत्रों के जलभृतों में लवण जल का अवांछित प्रवेश हो रहा है। कुछ आवाह क्षेत्रों में नहरों से अत्यधिक सिंचाई के परिणामस्वरूप जल ग्रसनता एवं लवणता की समस्या पैदा हो चुकी है।

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सरकार ने रक्षा बलों को मेक इन इंडिया के माध्यम से आपातकालीन हथियार खरीदने की अनुमति दी

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सरकार ने डिफेंस फोर्सेज को एक बड़ा बढ़ावा देने के लिए उन्हें आपातकालीन खरीद मार्ग के माध्यम से अपनी परिचालन आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हथियार प्रणाली खरीदने की अनुमति दी है। रक्षा मंत्रालय की एक बैठक में इसे मंजूरी दी गई है और जिसके अनुसार हथियार प्रणालियों की खरीद केवल मेक इन इंडिया रूट के माध्यम से ही की जा सकती है।

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इस बैठक की अध्यक्षता खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। डिफेंस फोर्सेज अब इन शक्तियों का उपयोग फास्ट-ट्रैक रूट के तहत महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों को खरीदने के लिए करने जा रहे हैं, जिसका अर्थ है कि डिलीवरी तीन महीने से एक साल के भीतर की जाएगी।डिफेंस फोर्सेज ने अतीत में इन अधिग्रहणों के माध्यम से अपनी तैयारियों को मजबूत किया है जब उन्हें आपातकालीन शक्तियां प्रदान की गई थीं।

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एस जयशंकर ने पराग्वे में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पराग्वे में महात्मा गांधी की एक आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने ऐतिहासिक ‘कासा डी ला इंडिपेंडेंशिया’ की यात्रा की, जहां से दो सदी से भी अधिक समय पहले दक्षिण अमेरिकी देश की आजादी का आंदोलन शुरू हुआ था। जयशंकर दक्षिण अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के मकसद से अपनी छह दिवसीय यात्रा के पहले चरण पर ब्राजील पहुंचे। 

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दक्षिण अमेरिका की पहली आधिकारिक यात्रा पर आए जयशंकर पराग्वे और अर्जेंटीना की यात्रा भी कर रहे हैं। इससे पहले, जयशंकर ने नयी दिल्ली में लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के राजदूतों से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया था। विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य महामारी के बाद सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशना है। 

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पंजाब और हरियाणा ने भगत सिंह के नाम पर चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नाम रखने पर सहमति व्यक्त की

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चंडीगढ़ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर रखे जाने पर पंजाब और हरियाणा सहमत हो गए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ इस विषय पर बैठक की। इसमें दोनों राज्यों के बीच नाम को लेकर सहमति बन गई।

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गौरतलब है कि इस हवाई अड्डे के नाम को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ था, क्योंकि इसके निर्माण में केंद्र सरकार के अतिरिक्त पंजाब और हरियाणा की भी हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार इस हवाई अड्डे का नाम चंडीगढ़ एयरपोर्ट ही प्रचारित करती रही है, जबकि पंजाब सरकार इसे मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट बताती रही।

मुख्य बिंदु

  • साल 2007 में भगत सिंह के जन्म शताब्दी समारोह पर पंजाब सरकार की ओर से चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नामकरण शहीद-ए-आजम भगत सिंह करने की घोषणा की गई थी। 
  • वहीं, हरियाणा सरकार इस हवाई अड्डे का नाम मंगलसेन पर रखना चाहती थी। इस नाम पर पंजाब और हरियाणा के बीच कभी सहमति नहीं बन सकी। 
  • अब दोनों राज्यों के बीच शहीद भगत सिंह के नाम पर सहमति बन जाने के बाद यह प्रस्ताव जल्दी ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। 
  • केंद्र सरकार देश के 13 हवाई अड्डों का नामकरण करने का एलान कर चुकी है, जिनमें कुछ राज्यों ने अपने क्षेत्र के हवाई अड्डों के लिए नाम भी प्रस्तावित कर केंद्र सरकार को भेजे हैं। 
  • अब पंजाब और हरियाणा की तरफ से भी चंडीगढ़ के हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह पर रखने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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