धर्मेंद्र प्रधान ने चमड़ा उद्योग कौशल को आगे बढ़ाने के लिए स्केल ऐप पेश किया

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केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्केल (स्किल सर्टिफिकेशन असेसमेंट फॉर लेदर एम्प्लॉइज) ऐप लॉन्च किया है। यह चमड़ा उद्योग के कौशल, सीखने, मूल्यांकन और रोजगार की जरूरतों के लिए वन-स्टॉप समाधान प्रदान करता है। चमड़ा कौशल क्षेत्र परिषद ने चमड़ा उद्योग में प्रशिक्षुओं को कौशल विकास कार्यक्रमों के डिजाइन और प्रशिक्षण के तरीके को बदलने के लिए एंड्रॉइड ऐप स्केल विकसित किया है।

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चमड़ा एसएससी द्वारा विकसित स्केल स्टूडियो ऐप चमड़े के शिल्प में रुचि रखने वाले सभी आयु वर्ग के लोगों को अपने कार्यालय में अत्याधुनिक स्टूडियो से ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम कक्षाओं तक पहुंचने की अनुमति देता है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि चमड़ा क्षेत्र देश में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, जिसमें वर्तमान में 44 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास के सही मिश्रण के साथ इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सीएसआईआर-सीएलआरआई की भूमिका की सराहना की।

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PM Narendra Modi launched world's first Cheetah Rehabilitation Project_90.1

इसरो ने हाइब्रिड मोटर का सफल परीक्षण किया

 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाइब्रिड मोटर का सफल परीक्षण किया है। इससे नए प्रक्षेपण वाहनों (रॉकेट) के लिए नयी प्रणोदन प्रणाली का रास्ता साफ हो सकता है। बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय ने बताया कि 30 केएन हाइब्रिड मोटर का तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रणोदन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में परीक्षण किया गया जो सफल रहा।

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संगठन ने बताया कि इस परीक्षण में इसरो के द्रव प्रणोदल प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) ने सहयोग किया। बयान में कहा गया कि मोटर में हाइड्रॉक्सिल- टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन (एचटीपीबी) को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जबकि तरल ऑक्सीजन को ऑक्सीकारक पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इसरो ने बताया कि ठोस-ठोस या तरल-तरल समिश्रण के विपरीत हाइब्रिड मोटर ठोस ईंधन और तरल ऑक्सीकारक का इस्तेमाल करती है।

 

संगठन ने बयान में कहा कि 30केएन हाइब्रिड मोटर के परीक्षण के दौरान तय 15 सेकेंड तक निरंतर प्रज्ज्वलन और दहन का प्रदर्शन किया। इसरो ने बताया कि एचटीपीबी और तरल ऑक्सीजन हरित है और तरल ऑक्सीजन का प्रबंधन आसान है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • इसरो अध्यक्ष: श्री एस सोमनाथ
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री: जितेंद्र सिंह

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ADB ने भारत के लिए 2022-23 जीडीपी विकास दर का अनुमान घटाकर 7% किया

 

एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 7.2 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया है। एडीबी ने इसके लिए उम्मीद से अधिक महंगाई को जिम्मेदार बताया है। एडीबी ने जारी अपनी फ्लैगशिप एडीओ रिपोर्ट के सप्लीमेंट में कहा है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 13.5% की दर से बढ़ी है।

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एडीबी ने रिपोर्ट में कहा है कि जीडीपी ग्रोथ को एडीओ 2022 के पूर्वानुमान से घटाकर वित्त वर्ष 2022 के लिए 7 प्रतिशत (मार्च 2023 में समाप्त होने वाले वर्ष) और वित्त वर्ष 2023 के लिए 7.2 प्रतिशत (मार्च 2024 में समाप्त होने वाले वर्ष) के रूप में संशोधित किया गया है और इसका कारण कीमतों के दबाव से घरेलू खपत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका एवं वैश्विक मांग में सुस्ती है। इसके साथ ही तेल की ऊंची कीमतों से शुद्ध निर्यात पर दबाव पड़ने की भी संभावना है।

 

चीन से तेज रहेगी भारत की ग्रोथ

 

एडीओ की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान चीन की अर्थव्यवस्था 2022 में पहले के 5 प्रतिशत पूर्वानुमान के बजाय 3.3 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीरो कोविड की रणनीति के कारण लॉकडाउन, संपत्ति क्षेत्र में समस्याएं और कमजोर बाहरी मांग का चीन में आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • एशियाई विकास बैंक मुख्यालय: मंडलुयोंग, फिलीपींस;
  • एशियाई विकास बैंक की स्थापना: 19 दिसंबर 1966;
  • एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष: मासत्सुगु असाकावा (17 जनवरी 2020 से)।

 

भारत में शुरू होगा पहला MotoGP चैंपियनशिप रेस

 

भारत 2023 में ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में अपनी पहली मोटोजीपी विश्व चैंपियनशिप दौड़ की मेजबानी करने के लिए तैयार है। भारत अगले साल ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर पहली मोटो ग्रां प्री विश्व चैम्पियनशिप रेस की मेजबानी करेगा। इसे ‘ग्रां प्री ऑफ भारत’ नाम दिया गया है। मोटो ग्रां प्री के व्यवसायिक अधिकारों के मालिक डोर्ना और नोएडा में बसे रेस प्रोमोटर ‘फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स’ ने अगले 7 वर्षों तक भारत में प्रीमियर दुपहिया रेसिंग प्रतियोगिता की मेजबानी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

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महत्वपूर्ण बिंदु:

 

  • इस प्रतियोगिता में 19 देशों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे जिससे देश में रोजगार के अलावा पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • इसमें कहा गया है कि मोटो ग्रां प्री की योजना ‘मोटो ई’ शुरू करने की भी है जो एशिया में ही पहली नहीं होगी बल्कि कुल ‘शून्य कार्बन उत्सर्जन’ के साथ पहली हरित पहल होगी.
  • बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट मोटो ग्रां प्री रेस की मेजबानी करेगा जहां 2011 से 2013 तक फॉर्मूला वन इंडियन ग्रां प्री आयोजित की गयी थी लेकिन वित्तीय, आयकर और नौकरशाही बाधाओं के कारण इसे बंद कर दिया गया था।

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भारतीय नौसेना ने 32 साल की सेवा के बाद आईएनएस अजय को सेवामुक्त किया

 

32 साल देश की सेवा करने के बाद आईएनएस अजय (INS Ajay) रिटायर हो गया। आईएनएस अजय को सेवामुक्त कर दिया गया। आईएनएस अजय को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी गई। कारगिल युद्ध में आईएनएस अजय ने अहम भूमिका निभाई थी। आईएनएस अजय का विदाई समारोह पारंपरिक तरीके से मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज, नौसैनिक पताका और जहाज के डिमोशनिंग पेनेंट को आखिरी बार सूर्यास्त के समय उतारा गया था, जो जहाज की कमीशन सेवा के अंत का प्रतीक है।

 

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इस समारोह कार्यक्रम में वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान समारोह के मुख्य अतिथि थे। जहाज के पहले कमांडिंग ऑफिसर वाइस एडमिरल एजी थपलियाल एवीएसएम बार (सेवानिवृत्त) विशिष्ट अतिथि थे। नौसेना के इस पोत P34 का नाम आईएनएस अजय नाम दिया गया था। लंबी दूरी के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों जैसे हथियारों से लैस होने के कारण आईएनएस अजय को ‘पनडुब्बी हंटर’ के नाम से भी जाना जाता था।

 

मुख्य बिंदु

 

  • आईएनएस अजय को 24 जनवरी, 1990 को तत्कालीन यूएसएसआर में पोटी, जॉर्जिया में कमीशन किया गया था और फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नेवल एरिया के संचालन नियंत्रण के तहत 23 वें पैट्रोल वेसल स्क्वाड्रन का हिस्सा था।
  • जहाज 32 से अधिक वर्षों से सक्रिय नौसैनिक सेवा में था और अपनी शानदार यात्रा के दौरान, उसने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन तलवार और 2001 में ऑपरेशन पराक्रम सहित कई नौसैनिक अभियानों में भाग लिया।
  • इस समारोह में 400 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया जिनमें फ्लैग ऑफिसर, सेना, आईएएफ और सीजी के वरिष्ठ अधिकारी, कमीशनिंग क्रू के अधिकारी और पुरुष, पिछले कमीशन के चालक दल के साथ-साथ जहाजों के चालक दल और परिवार मौजूद थे।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 IIT के निदेशकों की नियुक्ति को दी मंजूरी

 

भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है, जिनमें दो को दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिन आईआईटी संस्थानों के निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दी है उनमें आईआईटी गोवा, आईआईटी पलक्कड़,आईआईटी तिरुपति, आईआईटी धारवाड़, आईआईटी भुवनेश्वर, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी भिलाई और आईआईटी जम्मू शामिल हैं।

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यहां देखें उनके नाम

 

गौरतलब है कि भारत की राष्ट्रपति देश के सभी आईआईटी संस्थानों की विजिटर हैं। इस नाते यहां निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार भी राष्ट्रपति को हासिल है। राष्ट्रपति ने अपने इन्हीं अधिकारों का प्रयोग करते हुए आईआईटी पलक्कड़ के लिए प्रोफेसर ए शेषाद्री शेखर को निदेशक नियुक्त किया है जबकि आईआईटी तिरुपति के निदेशक पद पर प्रोफेसर केएन सत्यनारायण और आईआईटी धारवाड़ के निदेशक पद पर प्रोफेसर वैंकप्पय्या आर देसाई को नियुक्त किया गया है।

 

वहीं आईआईटी भिलाई के लिए राष्ट्रपति ने प्रोफेसर राजीव प्रकाश को निदेशक नियुक्त किया है। आईआईटी गांधीनगर के नए निदेशक प्रोफेसर रजत मूना होंगे। आईआईटी भुवनेश्वर के नए निदेशक प्रोफेसर श्रीपद कमलाकर हैं। राष्ट्रपति ने आईआईटी गोवा के निदेशक पद पर प्रोफेसर पासुमार्थी सेशु को निदेशक नियुक्त किया है। इसी तरह आईआईटी जम्मू के लिए प्रोफेसर मनोज सिंह गौड़ को निदेशक पद पर नियुक्त किया गया है।

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India's Presidency of AIBD extended for one more year_80.1

National logistics policy 2022: जानिए क्या है ये, कैसे होगा फायदा

हाल ही में सरकार ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022 शुरू की है। इसका उद्देश्य ‘अंतिम छोर तक त्वरित वितरण’ करना है, साथ ही परिवहन से संबंधित चुनौतियों को समाप्त करना है। प्रधानमंत्री ने इस पॉलिसी की शुरुआत करते हुए इसकी सभी खूबियां गिनाईं और अपने संबोधन में कहा कि विकास की तरफ बढ़ते भारत को यह नीति एक नई दिशा देगी।

जानें पॉलिसी से क्या होगा फायदा

इस राष्ट्रीय रसद नीति के लागू होने के बाद कोविड से प्रभावित अर्थ व्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। इससे सामानों की सप्लाई में आने वाली समस्याओं को हल करने में सहायता मिलेगी और साथ ही माल ढुलाई में होने वाली ईंधन की खपत को कम करने की दिशा में भी फायदा होगा। फिलहाल भारत में लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई हेतु ज्यादातर सड़क, उसके बाद जल परिवहन और फिर हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत अपनी जीडीपी का लगभग 13 से 14 प्रतिशत हिस्सा लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई पर खर्च कर देता है जबकि जर्मनी और जापान जैसे देश इसी के लिए 8 से 9 फीसदी ही खर्च करते हैं। इस पॉलिसी के लागू होने से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी तथा इस पर खर्च भी कम हो जाएगा।

क्या है National Logistics Policy?

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति में सिंगल रेफरेंस पॉइंट बनाया गया है जिसका उद्देश्य अगले 10 सालों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत को 10 प्रतिशत तक लाया जाना है, जो अभी जीडीपी का 13-14 प्रतिशत है। फिलहाल माल ढुलाई यानी लॉजिस्टिक्स का ज्यादातर का काम भारत में सड़कों के माध्यम से होता है। इस पॉलिसी के अंतर्गत अब माल ढुलाई का काम रेल ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ शिपिंग और एयर ट्रांसपोर्ट से होगा। इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा तथा दूसरे ईंधन की बचत होगी। पैसे और समय दोनों कम लगेंगे।

इस नीति का महत्त्व क्या है?

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति के शुभारंभ के साथ पीएम गति शक्ति को और बढ़ावा एवं पूरकता मिलेगी। यह नीति इस क्षेत्र को देश में एक एकीकृत, लागत-कुशल, लचीला तथा सतत लॉजिस्टिक परितंत्र बनाने में सहायता करेगी क्योंकि यह नियमों को सुव्यवस्थित करने व आपूर्ति-पक्ष की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ क्षेत्र के सभी बुनियादों को कवर करती है। यह नीति भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार, आर्थिक विकास एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का एक प्रयास है।

RBI ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने हेतु तीन नए डिजिटल भुगतान पहल की शुरुआत की

 

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) गर्वनर शक्तिकांत दास ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने हेतु तीन नए डिजिटल भुगतान पहल की शुरुआत की है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2022 में आरबीआई गर्वनर ने यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड, यूपीआई लाइट और भारत बिलपे क्रॉस-बॉर्डर बिल पेमेंट सोल्यूशंस सेवा को लॉन्च किया है। ऐसा  माना जा रहा है कि इन सेवाओं के शुरू होने के बाद तीस करोड़ और नए लोग डिजिटल पेमेंट के इस सिस्टम के साथ जुड़ सकेंगे। शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई ग्राहकों की सुरक्षा के ध्यान में रखते हुए फिनटेक कंपनियों के इंनोवेशन को सभी प्रकार से सपोर्ट करने के लिए तैयार है।

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रुपे क्रेडिट कार्ड के साथ यूपीआई लिंक का लाभ

रुपे क्रेडिट कार्ड के साथ यूपीआई लिंक से कस्टमर्स और मर्चेंट दोनों को लाभ होगा। क्यूआर कोड के माध्यम से कस्टमर्स क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकेंगे। रुपे क्रेडिट कार्ड वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (वीपीए) यानी यूपीआई आईडी से जुड़ा होगा। इस प्रकार सीधे एवं सुरक्षित भुगतान लेनदेन किया जा सकेगा। सबसे पहले पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक के ग्राहक BHIM ऐप के साथ UPI पर RuPay क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकेंगे।

 

UPI Lite क्या है ?

छोटे वैल्यू का ट्रांजैक्शन बेहद सरल एवं आसान तरीके से यूपीआई लाइट के जरिए किया जा सकेगा। भारत में 50 प्रतिशत से ज्यादा 200 रुपये से कम वैल्यू वाले यूपीआई भुगतान किया जाता है। BHIM App पर यूपीआई लाइट के जुड़ जाने के बाद उपयोगकर्ता निकट- ऑफलाइन मोड में छोटे मूल्य के लेनदेन कर सकेंगे। ये यूपीआई प्लेटफॉर्म पर एक दिन में एक अरब लेनदेन को हासिल करने में मदद करेगा। UPI लाइट भुगतान लेनदेन की ऊपरी सीमा 200 रुपये होगी जबकि डिवाइस पर वॉलेट के लिए UPI लाइट शेष राशि की कुल सीमा किसी भी समय 2,000 रुपये होगी।

भारत बिलपे क्रॉस-बार्डर बिल पेमेंट क्या है ?

आरबीआई गर्वनर ने इस वर्ष अप्रैल में मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करते हुए कहा था कि विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपने वतन में रह रहे परिवार के सदस्यों के बिल के भुगतान करने में आसानी के लिए बिल पेमेंट सिस्टम की शुरुआत की जाएगी। विदेशों में तीन करोड़ से ज्यादा भारतीय रह रहे हैं। भारत बिलपे क्रॉस-बार्डर बिल पेमेंट फैसिलिटी के शुरू होने के बाद गैर-प्रवासी भारतीय देश में परिवार के सदस्यों के बिजली से लेकर पानी का बिल और स्कूल फीस का भुगतान कर सकेंगे।

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RBI Removes Central Bank of India from PCA Framework_80.1

रेटिंग एजेंसी क्रेडिट सुईस ने ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट जारी की

 

रेटिंग एजेंसी क्रेडिट सुईस ने ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार भारत में आय से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करने पर पता चला कि कोरोना काल में देश आर्थिक असमानता काफी बढ़ गई थी। 2020 में यह दर अपने चरम 82.3 फीसदी पर पहुंच गई थी और 2021 तक बरकरार थी। बता दें कोरोना महामारी ने दुनियाभर में तबाही मचाई। इस दौरान लॉकडाउन की वजह से उद्योग-धंधे चौपट हो गए और करोड़ों लोगों की नौकरी चली गई। इस वजह से देश में आर्थिक असमानता बढ़ गई थी। क्रेडिट सुइस के मुताबिक 2021 में भारत में 7.96 लाख करोड़पति थे, जिनकी संख्या 2026 तक 105 फीसदी बढ़कर 16.32 लाख हो जाएगी।

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क्रेडिट सुइस के ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2022 के मुताबिक मौजूदा समय से लेकर 2026 तक भारत में करोड़पतियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। वहीं चीन में करोड़पतियों की संख्या मौजूदा लेवल से 97 प्रतिशत ज्यादा होगी। दुनिया के सबसे बड़े अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका में 13 फीसदी करोड़पति बढ़ जायेंगे। वहीं पूरी दुनिया में करोड़पतियों की संख्या 2021 के 2.50 करोड़ से बढ़कर 8.70 करोड़ हो जाएगी।

 

अमेरिका में सबसे ज्यादा करोड़पति होंगे। दूसरे स्थान पर चीन है। लेकिन अमेरिका और चीन के बीच फासला बहुत ज्यादा है। दुनिया के कुल करोड़पतियों में भारत की हिस्सेदारी मात्र 1 फीसदी के करीब है। वहीं कुल करोड़पतियों में अमेरिका की हिस्सेदारी 39 फीसदी है।

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भारत में मंदी की संभावना नहीं: एसएंडपी

 

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने कहा कि अमेरिका और यूरो क्षेत्र भले ही मंदी की ओर बढ़ रहे हों लेकिन भारत पर इसका असर पड़ने की आशंका नहीं है। उसने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई नहीं है। पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है वहीं आपकी कंपनियां भी अच्छा बहीखाता कायम रखने में सफल रही हैं।

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ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि देखा जाए तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से कभी भी पूरी तरह से जुड़ा नहीं था और इसलिए यह वैश्विक बाजारों से तुलनात्मक रूप से स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में मंदी आती है तो बहुत कुछ वैश्विक कोष के प्रवाह पर भी निर्भर करेगा।

 

मंदी का भारत पर असर नहीं

 

अमेरिका और यूरो क्षेत्र भले ही मंदी की तरफ बढ़ रहे हों, लेकिन भारत पर इसका असर पड़ने की आशंका नहीं है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने यह बात कही। उसने कहा कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई नहीं है। एसएंडपी ग्लोबल में मुख्य अर्थशास्त्री एवं प्रबंध निदेशक पॉल एफ ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी व्यापक घरेलू मांग की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था से बहुत ज्यादा अलग है।

 

हालांकि, भारत ऊर्जा का शुद्ध आयात करता है। आपके पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है। वहीं, आपकी कंपनियां भी अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि देखा जाए तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से कभी भी पूरी तरह से जुड़ा नहीं था। इसलिए यह वैश्विक बाजारों से तुलनात्मक रूप से स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में मंदी आती है, तो बहुत कुछ वैश्विक फंड के प्रवाह पर भी निर्भर करेगा।

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