भारत और नेपाल ने वन एवं वन्यजीव सहयोग बढ़ाने के लिए नए समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

भारत और नेपाल ने 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वनों, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता साझा पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और अंतर-सीमावर्ती (Transboundary) वन्यजीव गलियारों की बहाली को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और नेपाल के वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागैन उपस्थित रहे, जिससे भारत-नेपाल पर्यावरणीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ा।

भारत-नेपाल वन एवं वन्यजीव सहयोग MoU

यह समझौता भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और नेपाल के वन और पर्यावरण मंत्रालय के बीच हस्ताक्षरित हुआ।

समझौते के मुख्य बिंदु:

  • वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा।
  • वन्यजीव गलियारों की बहाली।
  • तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।
  • सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का साझा करना।

यह MoU साझा पारिस्थितिक तंत्रों और सीमापार वन्यजीव आवासों के समन्वित प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

समझौते में परिदृश्य-स्तर (Landscape-Level) पर जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों के निर्माण पर जोर दिया गया है।

समझौते के तहत चिन्हित प्रमुख प्रजातियाँ:

  • हाथी
  • गंगेटिक डॉल्फिन
  • गैंडा
  • हिम तेंदुआ
  • बाघ
  • गिद्ध

इसके अतिरिक्त, संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन को मजबूत करना, वन्यजीव गलियारों की पुनर्बहाली, वन एवं वन्यजीव अपराध पर नियंत्रण, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों का क्षमता निर्माण तथा जैव विविधता हॉटस्पॉट में स्मार्ट ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना भी शामिल है।

जैव विविधता संरक्षण में भारत-नेपाल सहयोग का महत्व

भारत और नेपाल दोनों समृद्ध जैव विविधता और विस्तृत संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क साझा करते हैं। कई वन्यजीव आवास और नदी तंत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हैं। बाघ, हाथी और गैंडा जैसी प्रजातियाँ दोनों देशों के बीच प्रवास करती हैं।

ऐसे अंतर-सीमावर्ती पारिस्थितिक तंत्रों के कारण संयुक्त संरक्षण रणनीतियाँ अत्यंत आवश्यक हैं। यह MoU एकीकृत संरक्षण परिदृश्य विकसित करने और साझा प्रजातियों व आवासों की समन्वित सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

जलवायु परिवर्तन और अंतर-सीमावर्ती वन्यजीव गलियारे

यह समझौता दोनों देशों के बीच जलवायु परिवर्तन सहयोग को भी सुदृढ़ करता है। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, वन और नदी प्रणालियाँ जलवायु परिवर्तन से गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।

अंतर-सीमावर्ती वन्यजीव गलियारों की बहाली से आवासीय संपर्क (Habitat Connectivity) बेहतर होगा और प्रजातियों को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद मिलेगी। समन्वित जलवायु कार्रवाई और पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन रणनीतियाँ क्षेत्रीय लचीलापन बढ़ाने में सहायक होंगी।

वन्यजीव अपराध पर नियंत्रण और प्रवर्तन सुदृढ़ीकरण

इस MoU का एक प्रमुख उद्देश्य वन एवं वन्यजीव अपराध से निपटना है। अवैध शिकार, लकड़ी की तस्करी और वन्यजीव उत्पादों की अवैध तस्करी क्षेत्र में गंभीर चुनौतियाँ हैं।

समझौता प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, खुफिया जानकारी साझा करने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने को प्रोत्साहित करता है। इससे जैव विविधता की सुरक्षा और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।

भारत ने लॉन्च किया ‘ज़ीरो प्राइज़’: वास्तविक प्रदूषण कमी पर मिलेगा बड़ा इनाम

भारत ने पहली बार परिणाम-आधारित पर्यावरण पुरस्कार ज़ीरो प्राइज़ (Zero Prize) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य वायु, जल और भूमि प्रदूषण में प्रमाणित कमी लाने वाली पहलों को सम्मानित करना है। नई दिल्ली में लॉन्च किए गए इस पुरस्कार के लिए कुल ₹5 करोड़ का कोष निर्धारित किया गया है, जिसमें तीन श्रेणियों में प्रत्येक को ₹1 करोड़ प्रदान किए जाएंगे। पारंपरिक पुरस्कारों से अलग, ज़ीरो प्राइज़ में वित्तीय प्रोत्साहन को स्वतंत्र रूप से सत्यापित पर्यावरणीय परिणामों से सीधे जोड़ा गया है। यह पहल भारत में जलवायु जवाबदेही और मापनीय पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और नवाचारपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ज़ीरो प्राइज़ क्या है और यह प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत का ज़ीरो प्राइज़ (Zero Prize) देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का परिणाम-आधारित (Results-Based) पर्यावरण पुरस्कार है, जिसका उद्देश्य वास्तविक और मापनीय प्रदूषण में कमी लाने वाली पहलों को पुरस्कृत करना है। यह पहल नीति और शासन स्कूल (School of Policy and Governance) द्वारा संचालित की जा रही है और इसे परोपकारी फंडिंग, कॉर्पोरेट CSR साझेदारी तथा अन्य संस्थागत सहयोग से समर्थन प्राप्त है।

इस पुरस्कार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल सैद्धांतिक विचारों को नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से सत्यापित और जमीन पर लागू परिणामों को ही मान्यता दी जाएगी। आवेदकों को निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में पर्यावरणीय सुधार का वास्तविक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यह प्रदर्शन-आधारित फंडिंग मॉडल सुनिश्चित करता है कि धनराशि उन्हीं समाधानों को मिले जो वास्तव में वायु, जल और भूमि प्रदूषण को कम करते हैं।

₹5 करोड़ का कोष: राशि का वितरण कैसे होगा?

ज़ीरो प्राइज़ के लिए कुल ₹5 करोड़ का कोष निर्धारित है, जिसमें तीन प्रमुख श्रेणियों में प्रत्येक को ₹1 करोड़ प्रदान किया जाएगा:

  • वायु प्रदूषण में कमी
  • जल प्रदूषण में कमी
  • भूमि प्रदूषण में कमी

प्रत्येक चयनित परियोजना को पहले एक प्रलेखित (Documented) आधार रेखा स्थापित करनी होगी और फिर 12 माह की चुनौती अवधि में मापनीय कमी दिखानी होगी। प्रगति का दावा नहीं, बल्कि स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन के माध्यम से प्रमाण अनिवार्य होगा।

प्रदूषण में कमी का मापन कैसे होगा?

ज़ीरो प्राइज़ के अंतर्गत सख्त वैज्ञानिक और नियामक मानकों के अनुसार सत्यापन किया जाएगा:

  • वायु प्रदूषण: पार्टिकुलेट मैटर (PM) के संपर्क में कमी का आकलन स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम से किया जाएगा, साथ ही मौसमीय परिवर्तनों के अनुसार समायोजन किया जाएगा।
  • जल प्रदूषण: जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) और पोषक तत्वों के स्तर को डिस्चार्ज पॉइंट पर मापा जाएगा। निगरानी Central Pollution Control Board (CPCB) के अनुरूप प्रोटोकॉल के अनुसार होगी।
  • भूमि प्रदूषण: कचरा रिसाव और अनुचित निपटान को ट्रेस करने योग्य वज़न-आधारित ऑडिट और तृतीय-पक्ष सत्यापन से प्रमाणित किया जाएगा।

यह ढांचा सुनिश्चित करता है कि प्रदूषण में कमी मापनीय, विश्वसनीय और पारदर्शी हो।

कौन आवेदन कर सकता है?

ज़ीरो प्राइज़ के लिए भारत में निम्न प्रतिभागी आवेदन कर सकते हैं:

  • स्टार्ट-अप
  • गैर-सरकारी संगठन (NGO)
  • कॉर्पोरेट संस्थाएँ
  • नगर निकाय
  • शोध संस्थान
  • व्यक्तिगत नवोन्मेषक

हालांकि, केवल वे प्रतिभागी पात्र होंगे जो शहरी या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वास्तविक पायलट परियोजना लागू कर रहे हों। केवल प्रारंभिक विचार, बिना मापनीय क्रियान्वयन के, पात्र नहीं होंगे।

राष्ट्रीय मिशनों के साथ सामंजस्य

ज़ीरो प्राइज़ भारत के प्रमुख पर्यावरणीय अभियानों के अनुरूप है, जैसे:

  • नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP)
  • नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा
  • स्वच्छ भारत मिशन 2.0

वित्तीय प्रोत्साहन को सत्यापित परिणामों से जोड़कर यह पहल स्वच्छ शहरों और बेहतर पर्यावरणीय शासन की दिशा में तेजी लाती है।

नेतृत्व के वक्तव्य

ज़ीरो प्राइज़ के सह-संस्थापक और डाबर इंडिया लिमिटेड के उपाध्यक्ष साकेत बर्मन ने कहा कि यह पुरस्कार उन सिद्ध नवाचारों को बढ़ावा देगा जो भारत की वायु, जल और भूमि को मापनीय रूप से स्वच्छ बना सकें। उन्होंने बोर्डरूम चर्चाओं से आगे बढ़कर जमीनी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

वहीं, रुचिर पंजाबी, अध्यक्ष, स्कूल ऑफ पॉलिसी एंड गवर्नेंस ने इसे नवोन्मेषकों और शोधकर्ताओं को प्रदूषण के खिलाफ ठोस और जवाबदेह समाधान विकसित करने हेतु प्रेरित करने वाला उत्प्रेरक बताया।

संक्षिप्त अवलोकन

  • ज़ीरो प्राइज़ भारत का पहला प्रदर्शन-आधारित पर्यावरण पुरस्कार है।
  • कुल कोष ₹5 करोड़; वायु, जल और भूमि प्रदूषण श्रेणियों में प्रत्येक को ₹1 करोड़।
  • 12 माह में वैज्ञानिक रूप से सत्यापित कमी अनिवार्य।
  • CPCB-अनुरूप मॉनिटरिंग और तृतीय-पक्ष सत्यापन आवश्यक।
  • SPG द्वारा संचालित और CSR/परोपकारी फंडिंग से समर्थित।

यह पहल नीति और जमीनी प्रभाव के बीच सेतु का कार्य करते हुए भारत में पर्यावरणीय जवाबदेही के एक नए मॉडल की शुरुआत करती है।

 

NBEMS ने हेल्थकेयर लाइवस्ट्रीम में AI के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) ने यूट्यूब पर “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर” विषय पर आयोजित लाइव स्ट्रीम में सर्वाधिक दर्शकों की संख्या दर्ज कर गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड्स (Guinness World Records) में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह रिकॉर्ड देशभर के पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनरों के लिए आयोजित एआई आधारित राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से स्थापित हुआ। यह पहल पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की गई और पूरे भारत में रिकॉर्ड स्तर की भागीदारी देखी गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए इसे चिकित्सा शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण और स्वास्थ्य प्रशिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

NBEMS ने एआई इन हेल्थकेयर में बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

NBEMS ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर” विषय पर आयोजित लाइव स्ट्रीम के लिए आधिकारिक रूप से Guinness World Records से मान्यता प्राप्त की।

प्रमुख बिंदु

  • संगठन: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS)
  • रिकॉर्ड: एआई इन हेल्थकेयर पाठ के लाइव स्ट्रीम में सर्वाधिक दर्शक
  • प्लेटफॉर्म: YouTube
  • दर्शक वर्ग: देशभर के पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर

यह उपलब्धि स्वास्थ्य शिक्षा में एआई के प्रति व्यापक भागीदारी और रुचि को दर्शाती है।

एआई इन हेल्थकेयर प्रशिक्षण कार्यक्रम क्या था?

यह “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर” कार्यक्रम:

  • पूरे देश में ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया
  • विशेष रूप से पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनरों के लिए तैयार किया गया
  • क्लीनिकल प्रैक्टिस में एआई के उपयोग पर केंद्रित था
  • दक्षता-आधारित (Competency-Based) चिकित्सा शिक्षा का हिस्सा था

इस लाइव स्ट्रीम का उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों में डिजिटल तत्परता को मजबूत करना था।

इस गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का महत्व

NBEMS द्वारा प्राप्त यह विश्व रिकॉर्ड दर्शाता है:

  • एआई आधारित प्रशिक्षण की बड़े पैमाने पर स्वीकार्यता
  • डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा का विस्तार
  • तकनीक-संचालित चिकित्सा शिक्षा को मजबूती
  • चिकित्सा शिक्षा में भारत की नवाचार क्षमता की वैश्विक पहचान

यह पहल क्लीनिकल सिस्टम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते एकीकरण को भी रेखांकित करती है।

NBEMS नेतृत्व का वक्तव्य

NBEMS के अध्यक्ष Dr. Abhijat Sheth ने कहा कि:

  • यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत की डिजिटल नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।
  • NBEMS दक्षता-आधारित शिक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।
  • भविष्य की पहलें स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित रहेंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि एआई इन हेल्थकेयर कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

NBEMS के बारे में

राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS):

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है।
  • स्नातकोत्तर और पोस्ट-डॉक्टोरल चिकित्सा परीक्षाएँ आयोजित करता है।
  • गुणवत्ता युक्त चिकित्सा शिक्षा मानकों को बढ़ावा देता है।
  • संरचित और दक्षता-आधारित प्रशिक्षण प्रणाली पर केंद्रित है।

भारत, बांग्लादेश समेत 40 देश सऊदी अरब के पोल्ट्री बैन से प्रभावित

सऊदी अरब ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 40 देशों से पोल्ट्री और अंडों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें बांग्लादेश और भारत भी शामिल हैं। यह निर्णय सऊदी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (SFDA) द्वारा वैश्विक महामारी संबंधी अपडेट और एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) की चिंताओं के मद्देनज़र लिया गया। इसके अतिरिक्त 16 अन्य देशों के कुछ विशेष क्षेत्रों पर आंशिक प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। हालांकि, स्वीकृत सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले हीट-ट्रीटेड (उष्मा-प्रसंस्कृत) पोल्ट्री उत्पादों को इस आयात प्रतिबंध से छूट दी गई है।

सऊदी अरब का पोल्ट्री आयात प्रतिबंध: क्या हुआ?

सऊदी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (SFDA) ने 40 देशों से पोल्ट्री आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • यह प्रतिबंध पोल्ट्री मांस और टेबल अंडों पर लागू है।
  • एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के जोखिम आकलन के आधार पर निर्णय लिया गया।
  • वैश्विक रोग निगरानी रिपोर्ट से जुड़ा हुआ है।
  • सऊदी प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा निगरानी के सतत प्रयासों का हिस्सा है।

किन देशों पर पूर्ण प्रतिबंध?

पूर्ण प्रतिबंध 40 देशों पर लागू किया गया है।

प्रमुख देश:

  • बांग्लादेश
  • भारत
  • चीन
  • यूनाइटेड किंगडम
  • जर्मनी
  • साउथ कोरिया
  • इजिप्ट
  • जापान
  • इंडोनेशिया
  • वियतनाम

अन्य देश:

अफगानिस्तान, अज़रबैजान, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्गारिया, कैमरून, कंबोडिया, कोट डी आइवर, जिबूती, घाना, हांगकांग, ईरान, इराक, कजाकिस्तान, लाओस, लीबिया, मेक्सिको, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, नाइजर, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, फिलिस्तीन, सर्बिया, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, ताइवान और मोंटेनेग्रो।

यह प्रतिबंध पोल्ट्री मांस और टेबल अंडों दोनों पर लागू है।

16 देशों में आंशिक प्रतिबंध

सऊदी अरब ने 16 देशों के कुछ विशेष क्षेत्रों में आंशिक प्रतिबंध भी लगाए हैं।

आंशिक प्रतिबंध वाले देश:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • यूनाइटेड स्टेट्स
  • इटली
  • बेल्जियम
  • पोलैंड
  • फ्रांस
  • कनाडा
  • मलेशिया
  • फिलीपींस
  • ऑस्ट्रिया
  • डेनमार्क
  • रोमानिया
  • जिम्बाब्वे
  • भूटान
  • टोगो
  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो

ये प्रतिबंध केवल उन राज्यों या क्षेत्रों पर लागू हैं जहाँ बीमारी के प्रकोप की पुष्टि हुई है।

प्रतिबंध क्यों लगाया गया?

पोल्ट्री आयात प्रतिबंध के मुख्य कारण हैं:

  • उच्च रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI) के प्रकोप
  • न्यूकैसल रोग की चिंताएँ
  • अंतरराष्ट्रीय पशु-चिकित्सा जोखिम रिपोर्ट
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय

कुछ प्रतिबंध 2004 से लागू हैं, जबकि अन्य को नवीनतम स्वास्थ्य आकलनों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।

क्या कुछ उत्पादों को अनुमति है?

हाँ, कुछ उत्पाद सख्त शर्तों के तहत अनुमति प्राप्त हैं।

छूट प्राप्त उत्पाद:

  • हीट-ट्रीटेड (उष्मा-प्रसंस्कृत) पोल्ट्री
  • प्रोसेस्ड पोल्ट्री उत्पाद

शर्तें:

  • आधिकारिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य
  • एवियन इन्फ्लुएंजा और न्यूकैसल वायरस को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी
  • स्वीकृत और प्रमाणित इकाइयों से उत्पादन

अर्थात, सही तरीके से प्रसंस्कृत और प्रमाणित उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते।

एवियन इन्फ्लुएंजा और आयात प्रतिबंध

एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) एक वायरल रोग है जो पोल्ट्री और जंगली पक्षियों को प्रभावित करता है। उच्च रोगजनक स्ट्रेन तेजी से फैल सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री व्यापार को प्रभावित करते हैं।

इसी कारण देश संक्रमित उत्पादों के प्रवेश को रोकने और घरेलू कृषि एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आयात प्रतिबंध लागू करते हैं। खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण महामारी संबंधी आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय पशु-चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर समय-समय पर अपनी नीतियों को अद्यतन करते रहते हैं।

PM Modi के इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स, बने दुनिया के पहले नेता

पीएम नरेंद्र मोदी के इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन, यानी 10 करोड़ फॉलोअर्स हो गए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे दुनिया के पहले लीडर और पॉलिटिशियन बन गए हैं। यह उपलब्धि भारत के बढ़ते डिजिटल प्रभाव और प्रधानमंत्री की मजबूत वैश्विक सोशल मीडिया उपस्थिति को दर्शाती है। Instagram आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में से एक है, जिसके अरबों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। वर्तमान समय में फॉलोअर्स की संख्या केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि डिजिटल सहभागिता, प्रभाव और वैश्विक पहुंच का भी महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।

2026 में टॉप 10 सबसे ज़्यादा फ़ॉलो किए जाने वाले इंस्टाग्राम अकाउंट

Rank Account Followers (Approx.)
1 इंस्टाग्राम 700 Million
2 क्रिस्टियानो रोनाल्डो 671 Million
3 लियोनेल मेसी 511 Million
4 सेलेना गोमेज़ 415 Million
5 काइली जेनर 391 Million
6 ड्वेन जॉनसन 390 Million
7 एरियाना ग्रांडे 372 Million
8 किम कर्दाशियन 353 Million
9 बेयोंस 307 Million
10 क्लोई कार्दशियन 299 Million

खास बातें

  • इंस्टाग्राम का ऑफिशियल अकाउंट दुनिया भर में पहले नंबर पर है।
  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले इंसान हैं।
  • PM मोदी 100M फॉलोअर्स पार करने वाले पहले वर्ल्ड लीडर बने।
  • विराट कोहली सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले इंडियन सेलिब्रिटी बने हुए हैं।

MCQs (एग्जाम-ओरिएंटेड)

Q1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 में कितने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स हो जाएंगे?
(a) 80 मिलियन
(b) 90 मिलियन
(c) 100 मिलियन
(d) 120 मिलियन
(e) 150 मिलियन

S. Ans. (c)
Sol. PM मोदी के 2026 में 100 मिलियन फॉलोअर्स हो जाएंगे।

Q2. 2026 में इंस्टाग्राम पर सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले व्यक्ति कौन हैं?
(a) लियोनेल मेस्सी
(b) क्रिस्टियानो रोनाल्डो
(c) सेलेना गोमेज़
(d) ड्वेन जॉनसन
(e) विराट कोहली

S. Ans. (b)
Sol. क्रिस्टियानो रोनाल्डो लगभग 671 मिलियन फॉलोअर्स के साथ सबसे आगे हैं।

Q3. 2026 में दुनिया भर में किस अकाउंट के सबसे ज़्यादा फॉलोअर्स हैं? (a) क्रिस्टियानो रोनाल्डो
(b) इंस्टाग्राम ऑफिशियल
(c) लियोनेल मेस्सी
(d) सेलेना गोमेज़
(e) काइली जेनर

S. Ans. (b)
Sol. ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट लगभग 700 मिलियन फॉलोअर्स के साथ पहले नंबर पर है।

दक्षिण मध्य रेलवे ने डोरस्टेप फ्रेट बुकिंग के लिए स्मार्ट ‘रेल पार्सल ऐप’ लॉन्च किया

दक्षिण मध्य रेलवे ने डिजिटल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सिकंदराबाद के रेल निलयम में नई पीढ़ी की ‘रेल पार्सल ऐप’ लॉन्च की। इस ऐप का उद्देश्य पारंपरिक पार्सल बुकिंग प्रणाली को एक सहज और आधुनिक डिजिटल फ्रेट अनुभव में बदलना है। ऐप का उद्घाटन महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने किया। यह ऐप डोरस्टेप पिकअप, रियल-टाइम ट्रैकिंग और सुरक्षित डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएँ प्रदान करेगी। इस पहल के माध्यम से साउथ सेंट्रल रेलवे ने पार्सल कार्यालय को सीधे ग्राहकों के स्मार्टफोन तक पहुँचा दिया है, जिससे लंबी कतारों की आवश्यकता समाप्त होगी और माल ढुलाई की प्रक्रिया अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनेगी।

दक्षिण मध्य रेलवे की रेल पार्सल ऐप

रेल पार्सल ऐप का शुभारंभ साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल उपलब्धि है। यह नई पीढ़ी का प्लेटफॉर्म एक डिजिटल फ्रेट ई-मार्केटप्लेस के रूप में कार्य करता है, जो ग्राहकों को पूर्ण पारदर्शिता और सुविधा के साथ ऑनलाइन पार्सल बुकिंग की सुविधा प्रदान करता है।

पारंपरिक पार्सल प्रणाली के विपरीत, जिसमें रेलवे पार्सल कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाना आवश्यक होता था, SCR रेल पार्सल ऐप एक एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराती है। अब ग्राहक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से शिपमेंट शेड्यूल कर सकते हैं, डोरस्टेप पिकअप की व्यवस्था कर सकते हैं, पार्सल की रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकते हैं तथा डिलीवरी से संबंधित स्वचालित अपडेट प्राप्त कर सकते हैं।

यह पहल भारतीय रेल के माल ढुलाई क्षेत्र में व्यापक डिजिटल परिवर्तन के लक्ष्य के अनुरूप है, जिससे लॉजिस्टिक्स सेवाएँ अधिक कुशल, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बन सकें।

सहज डोरस्टेप बुकिंग के लिए रेल पार्सल ऐप की प्रमुख विशेषताएँ

South Central Railway की रेल पार्सल ऐप को तकनीक-आधारित समाधानों के माध्यम से रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • डोरस्टेप पिकअप और डिलीवरी सेवा
  • रियल-टाइम पार्सल ट्रैकिंग
  • स्वचालित एसएमएस और ऐप नोटिफिकेशन
  • सुरक्षित डिजिटल भुगतान विकल्प
  • पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बुकिंग इंटरफेस

इन सुविधाओं के एकीकरण से साउथ सेंट्रल रेलवे ग्राहक सुविधा बढ़ाने और परिचालन दक्षता सुधारने की दिशा में अग्रसर है। यह ऐप मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करती है और माल ढुलाई प्रबंधन को अधिक सुव्यवस्थित बनाती है।

सात शहरों में पायलट परियोजना के रूप में शुरुआत

वर्तमान में SCR रेल पार्सल ऐप को पायलट परियोजना के रूप में सात प्रमुख स्थानों पर लागू किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • हैदराबाद
  • विजयवाड़ा
  • बेंगलुरु
  • तथा साउथ सेंट्रल रेलवे क्षेत्र के चार अन्य प्रमुख फ्रेट हब

यह चरणबद्ध कार्यान्वयन SCR को परिचालन दक्षता, ग्राहक प्रतिक्रिया और अवसंरचना की तैयारी का परीक्षण करने में मदद करेगा, ताकि भविष्य में इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया जा सके। पायलट चरण संभावित चुनौतियों की पहचान और डिजिटल फ्रेट इकोसिस्टम को बड़े पैमाने पर सुचारु रूप से संचालित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलोर के साथ रणनीतिक समझौता

एक समानांतर रणनीतिक पहल के तहत, साउथ सेंट्रल रेलवे ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु (IIM Bangalore) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अंतर्गत भारत के फ्रेट लॉजिस्टिक्स बाजार का व्यापक अध्ययन किया जाएगा।

इस सहयोग के उद्देश्य हैं:

  • रेल लॉजिस्टिक्स में अवसंरचना की कमियों का आकलन
  • आधुनिकीकरण के अवसरों की पहचान
  • कार्गो प्रबंधन प्रणालियों की दक्षता में सुधार
  • राष्ट्रीय माल परिवहन क्षेत्र में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाना

यह साझेदारी दर्शाती है कि SCR अपनी माल ढुलाई विस्तार रणनीति को डेटा-आधारित अनुसंधान और विशेषज्ञ सुझावों पर आधारित बनाना चाहता है।

2030 तक 3,000 मिलियन टन कार्गो लक्ष्य की दिशा में कदम

रेल पार्सल ऐप का शुभारंभ केवल एक डिजिटल पहल नहीं है, बल्कि यह 2030 तक 3,000 मिलियन टन कार्गो लोडिंग के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

भारतीय रेल भारत की माल परिवहन प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पार्सल सेवाओं के डिजिटलीकरण और सहज बुकिंग सुविधा के माध्यम से SCR छोटे और मध्यम स्तर के ग्राहकों को आकर्षित करना चाहता है।

बेहतर लॉजिस्टिक्स दक्षता से:

  • टर्नअराउंड समय कम होगा
  • परिचालन बाधाएँ घटेंगी
  • रेल फ्रेट की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी
  • सतत (सस्टेनेबल) परिवहन लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा

इस प्रकार, SCR रेल पार्सल ऐप केवल ग्राहक सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि माल ढुलाई क्षेत्र में एक व्यापक और दूरगामी सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

TRAI ने 2026 में 29वां स्थापना दिवस मनाया

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 20 फरवरी 2026 को अपना 29वाँ स्थापना दिवस मनाया। वर्ष 1997 में स्थापित इस संस्था के इस विशेष अवसर पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के नेता, शिक्षाविद और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ एकत्र हुए, जहाँ भारत के डिजिटल संचार क्षेत्र से जुड़े उभरते मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। यह आयोजन भारत के दूरसंचार और प्रसारण पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में TRAI के महत्वपूर्ण योगदान पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में दो प्रमुख विषयों पर उच्चस्तरीय चर्चा हुई— “हर घर तक टीवी: समावेशन के लिए नीति, प्रौद्योगिकी और व्यवसायिक रणनीतियाँ” तथा “नेटवर्क स्लाइसिंग और नेट न्यूट्रैलिटी”।

TRAI दिवस 2026 की प्रमुख झलकियाँ

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के 29वें स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी द्वारा, प्राधिकरण के सदस्यों के साथ दीप प्रज्वलन कर की गई।

चर्चा के मुख्य विषय:

  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में टेलीविजन की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना
  • प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने हेतु बाजार-आधारित नियामक ढांचा
  • नेटवर्क स्लाइसिंग और नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत
  • एआई, 5G और आगामी 6G तकनीकों की भूमिका
  • नियामकीय लचीलापन (Regulatory Agility) और पारदर्शिता का महत्व
  • डिजिटल अवसंरचना की मजबूती और स्पेक्ट्रम दक्षता

कार्यक्रम में भारत के डिजिटल संचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ और समावेशी बनाने के लिए नीतिगत सुधारों और तकनीकी नवाचार पर विशेष जोर दिया गया।

तकनीकी सत्र 1: हर घर तक टेलीविजन

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के स्थापना दिवस के तहत आयोजित इस सत्र में टेलीविजन की पहुँच बढ़ाने और डिजिटल विभाजन (Digital Divide) को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। चर्चा के मुख्य बिंदु थे:

  • अंतिम छोर (Last-mile) कनेक्टिविटी को मजबूत करना
  • सेवाओं की वहनीयता (Affordability) और गुणवत्ता सुनिश्चित करना
  • टिकाऊ व्यवसाय मॉडल विकसित करना
  • दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में प्रसारण की पहुँच बढ़ाना

इस सत्र में यह रेखांकित किया गया कि प्रसारण माध्यम आज भी समावेशी संचार का एक महत्वपूर्ण साधन है।

तकनीकी सत्र 2: नेटवर्क स्लाइसिंग और नेट न्यूट्रैलिटी

दूसरे सत्र में उन्नत दूरसंचार नेटवर्क से जुड़े नियामकीय और तकनीकी पहलुओं पर विचार किया गया। मुख्य चर्चा बिंदु शामिल थे:

  • नेटवर्क स्लाइसिंग के नियामकीय और तकनीकी आयाम
  • खुला और गैर-भेदभावपूर्ण इंटरनेट बनाए रखना
  • नवाचार और उपभोक्ता अधिकारों के बीच संतुलन
  • उन्नत दूरसंचार नेटवर्क में सेवा विभेदीकरण (Service Differentiation)

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के अनुरूप नियमन ऐसा होना चाहिए जो नवाचार को प्रोत्साहित करे और साथ ही समान एवं न्यायसंगत डिजिटल पहुँच सुनिश्चित करे।

TRAI दिवस 2026 का महत्व

TRAI दिवस 2026 ने प्राधिकरण की निम्नलिखित प्रतिबद्धताओं को दोहराया:

  • समावेशी डिजिटल विकास
  • उपभोक्ता संरक्षण
  • निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा
  • पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित नियमन
  • भविष्य के लिए तैयार दूरसंचार और प्रसारण पारिस्थितिकी तंत्र

यह आयोजन भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल संचार क्षेत्र में संतुलित, नवाचारी और उत्तरदायी नियमन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

एक युग का अंत: स्टील के दिग्गज जतिंदर मेहरा का 86 साल की उम्र में निधन

भारत के इस्पात उद्योग ने अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक को खो दिया है। जतिंदर मेहरा, जो एस्सार समूह के मेटल्स एंड माइनिंग डिवीजन के वाइस चेयरमैन और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के पूर्व प्रमुख रहे थे, का 25 फरवरी 2026 को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। छह दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने बड़े औद्योगिक परियोजनाओं, परिचालन उत्कृष्टता और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से भारत की इस्पात विकास गाथा को नई दिशा दी। उनके योगदान ने देश के इस्पात क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जतिंदर मेहरा – भारत की इस्पात विकास गाथा के स्तंभ

जतिंदर मेहरा को भारत के इस्पात और धातु क्षेत्र का एक मजबूत स्तंभ माना जाता था। अपने निधन के समय वे Essar Group के मेटल्स एंड माइनिंग डिवीजन में वाइस चेयरमैन के पद पर कार्यरत थे।

उनके करियर की प्रमुख विशेषताएँ:

  • इस्पात उद्योग में 60 से अधिक वर्षों का अनुभव
  • गहन तकनीकी ज्ञान और प्रभावी परिचालन नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध
  • क्षमता विस्तार और एकीकृत इस्पात परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका
  • परिवर्तनकारी औद्योगिक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए पहचान

उनके दूरदर्शी नेतृत्व और रणनीतिक सोच ने भारत के आधुनिक इस्पात विनिर्माण परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जतिंदर मेहरा की एस्सार समूह में भूमिका और प्रमुख इस्पात परियोजनाएँ

एस्सार ग्रुप में जतिंदर मेहरा ने कंपनी के इस्पात कारोबार के विस्तार और सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कई बड़े और एकीकृत औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को नई दिशा मिली।

उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:

  • गुजरात के हजीरा स्थित हजीरा स्टील प्लांट का विस्तार
  • ओडिशा के पारादीप में पारादीप स्टील परियोजना का विकास
  • एस्सार की मेटल्स और माइनिंग रणनीति को मजबूत करना
  • बड़े पैमाने पर एकीकृत औद्योगिक सुविधाओं का नेतृत्व

एस्सार ग्रुप ने अपने बयान में उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया, जिनका योगदान कंपनी की विकास यात्रा में स्थायी रूप से दर्ज रहेगा।

जतिंदर मेहरा का एस्सार से परे नेतृत्व – पूर्व RINL प्रमुख

एस्सार ग्रुप में अपनी भूमिका से पहले, जतिंदर मेहरा ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के प्रमुख के रूप में भी सेवा दी। आरआईएनएल, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट की कॉरपोरेट इकाई है।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने:

  • सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात इकाइयों को मजबूत किया
  • क्षमता निर्माण और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया
  • परिचालन दक्षता और नवाचार को प्रोत्साहित किया

सार्वजनिक और निजी—दोनों क्षेत्रों में उनके व्यापक अनुभव ने उन्हें भारत की इस्पात नीति और औद्योगिक जगत में एक सम्मानित और प्रभावशाली आवाज बनाया।

भारत के इस्पात उद्योग में जतिंदर मेहरा की विरासत

जतिंदर मेहरा का करियर भारत के तीव्र औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ विकसित हुआ। स्वतंत्रता के बाद इस्पात उद्योग की प्रारंभिक नींव से लेकर आधुनिक एकीकृत संयंत्रों तक, उन्होंने विकास के महत्वपूर्ण चरणों को न केवल देखा बल्कि उन्हें आकार भी दिया।

उनकी विरासत में शामिल हैं:

  • इस्पात उत्पादन में तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देना
  • अवसंरचना-आधारित औद्योगिक विकास को समर्थन
  • इंजीनियरों और प्रबंधकों की नई पीढ़ियों का मार्गदर्शन
  • भारत को वैश्विक स्तर पर प्रमुख इस्पात उत्पादक देश बनाने में योगदान

आज भारत विश्व के शीर्ष इस्पात उत्पादक देशों में शामिल है, और इस उपलब्धि की नींव रखने में जतिंदर मेहरा जैसे दूरदर्शी नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

 

संघर्ष की एक सदी: CPI के वरिष्ठ नेता आर. नल्लाकन्नु का 101 वर्ष की आयु में निधन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के वरिष्ठ नेता आर. नल्लाकन्नु का 25 फरवरी 2026 को चेन्नई में 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे आयु संबंधी बीमारियों के कारण 1 फरवरी से राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उनके निधन के साथ ही तमिलनाडु ने अपने अंतिम शतायु और प्रभावशाली कम्युनिस्ट नेताओं में से एक को खो दिया। लगभग आठ दशकों तक नल्लाकन्नु ईमानदारी, त्याग और शोषितों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के प्रतीक बने रहे।

आर. नल्लाकन्नु – संघर्ष को समर्पित एक जीवन

आर. नल्लाकन्नु, जिन्हें स्नेहपूर्वक कॉमरेड आरएनके कहा जाता था, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के वरिष्ठ और सम्मानित नेता थे। उनका जन्म 26 दिसंबर 1925 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन (Thoothukudi) जिले के श्रीवैगुंडम के निकट पेरुम्पथु गाँव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने गरीबी और शोषण को करीब से देखा। मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित होकर वे 1946 में, जब भारत अभी ब्रिटिश शासन के अधीन था, CPI में शामिल हुए। उनके लिए राजनीति कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का साधन नहीं रही, बल्कि शोषित और वंचित वर्गों को संगठित करने का आजीवन मिशन थी।

गिरफ्तारी, जेल और नेल्लै साजिश मामला

उनकी सक्रियता के कारण उन्हें सत्ता के विरोध का सामना करना पड़ा। 1948 में नेल्लै साजिश मामले में उन्हें गिरफ्तार कर सात वर्ष की सजा हुई। जेल के दौरान उन्होंने अमानवीय यातनाएँ झेलीं। एक घटना में एक पुलिसकर्मी ने उनकी मूंछ सिगरेट से जला दी, जिसके बाद उन्होंने जीवनभर मूंछ नहीं रखी। कठिनाइयों के बावजूद उनका संकल्प और मजबूत हुआ, और जेल का समय उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक अध्याय बन गया।

किसानों और पर्यावरण के प्रबल समर्थक

आर. नल्लाकन्नु का जीवन जमीनी आंदोलनों से गहराई से जुड़ा रहा। उनके प्रमुख संघर्ष क्षेत्रों में शामिल थे:

  • किसानों के अधिकार और कृषि सुधार
  • कृषि मजदूरों का कल्याण
  • तमिलनाडु में अवैध रेत खनन का विरोध
  • पर्यावरण संरक्षण, विशेषकर कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना पर चिंताएँ

लगभग 25 वर्षों तक उन्होंने किसान संगठनों का नेतृत्व किया और तमिलनाडु भर में मजबूत जनाधार तैयार किया। वृद्धावस्था तक वे सक्रिय रहे।

CPI और तमिलनाडु की राजनीति में नेतृत्व

उन्होंने 13 वर्षों तक CPI के राज्य सचिव के रूप में कार्य किया और पार्टी को तमिलनाडु की राजनीति में मजबूत आधार प्रदान किया। उनके नेतृत्व में:

  • मजदूरों और किसानों के बीच CPI का प्रभाव बढ़ा
  • प्रगतिशील राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन मजबूत हुए
  • सामाजिक न्याय और श्रमिक अधिकार प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने

2023 में CPM के वरिष्ठ नेता एन. शंकरैया के निधन के बाद, नल्लाकन्नु राज्य के अंतिम शतायु कम्युनिस्ट नेता थे।

व्यक्तिगत ईमानदारी और सादगी

आर. नल्लाकन्नु की सबसे बड़ी पहचान उनकी निष्कलंक ईमानदारी थी।

  • 80वें जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा भेंट की गई कार और ₹1 करोड़ की राशि उन्होंने लौटा दी।
  • 2022 में ‘थगैसाल तमिझर’ पुरस्कार के तहत मिले ₹15 लाख उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए और अपनी ओर से ₹5,000 अतिरिक्त जोड़े।

सार्वजनिक जीवन में दशकों बिताने के बावजूद उन्होंने सादा जीवन जिया और सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्मान प्राप्त किया।

पुरस्कार और सम्मान

उनके योगदान को व्यापक रूप से मान्यता मिली। उन्हें प्राप्त प्रमुख सम्मान:

  • अंबेडकर पुरस्कार (2008)
  • ‘थगैसाल तमिझर’ पुरस्कार (2023)

ये सम्मान सामाजिक न्याय, कृषि सुधार और प्रगतिशील राजनीति के प्रति उनके आजीवन समर्पण का प्रतीक थे।

भारत और स्वीडन ने SITAC रूपरेखा के तहत एआई साझेदारी को और मजबूत किया

भारत और स्वीडन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इंडियाएआई मिशन और व्यापार स्वीडन ने भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 (India AI Impact Summit 2026) के दौरान एक आशय-पत्र (Statement of Intent – SoI) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य एआई क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना तथा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को सशक्त बनाना है।

स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट (SoI) क्या है?

स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट (Statement of Intent – SoI) एक औपचारिक रूपरेखा (Framework) है, जो दो देशों के बीच सहयोग को संरचित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए तैयार की जाती है।

इस समझौते के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:

  • एआई समाधान (AI Solutions) का विकास
  • एआई तकनीकों का विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोग
  • उद्योगों में एआई का व्यापक कार्यान्वयन (Deployment)
  • वास्तविक औद्योगिक और सामाजिक परिणामों पर विशेष ध्यान

यह समझौता दर्शाता है कि दोनों देश नवाचार, आर्थिक विकास और सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करना चाहते हैं, साथ ही एआई से जुड़े संभावित जोखिमों को जिम्मेदारीपूर्वक संबोधित करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

SITAC कार्यक्रम का शुभारंभ

इस समझौते की एक प्रमुख उपलब्धि स्वीडन–भारत टेक्नोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर (SITAC) की शुरुआत है। यह पहल इंडियाएआई मिशन और व्यापार स्वीडन के सहयोग से शुरू की गई है।

SITAC एक प्रमुख (Flagship) मंच के रूप में कार्य करेगा, जो निम्नलिखित के बीच संरचित सहयोग को बढ़ावा देगा:

  • सरकारी एजेंसियाँ
  • उद्योग हितधारक
  • स्टार्टअप्स
  • शैक्षणिक एवं शोध संस्थान

इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के एआई इकोसिस्टम को जोड़ना तथा व्यापार और नवाचार के नए अवसरों का सृजन करना है।

SITAC के अंतर्गत प्रमुख पहलें

SITAC ढांचे के तहत निम्नलिखित गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी:

  • सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन
  • भारतीय और स्वीडिश एआई इकोसिस्टम के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम
  • नवाचार केंद्रों और उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) का भ्रमण
  • कंपनियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद
  • संयुक्त नवाचार मंचों और निवेश गलियारों की पहचान
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एआई के व्यापक उपयोग को बढ़ावा

आधिकारिक वक्तव्य

कविता भाटिया, सीओओ, इंडियाएआई मिशन ने कहा कि भारत और स्वीडन एक मूल्य-आधारित और विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भविष्य के सह-निर्माता (Co-architects) हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश जिम्मेदार और भरोसेमंद एआई विकास के लिए साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

वहीं, सोफिया होगमैन, स्वीडन की ट्रेड एंड इन्वेस्ट कमिश्नर टू इंडिया ने कहा कि यह आशय-पत्र (SoI) साझा रणनीतिक दृष्टि को ठोस और व्यावहारिक परिणामों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।

यह साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सहयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के अनुरूप है:

  • IndiaAI Mission का उद्देश्य कम्प्यूटिंग संसाधनों (Compute), डेटा और प्रतिभा (Talent) तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करके एक सशक्त राष्ट्रीय एआई इकोसिस्टम का निर्माण करना है, जिससे देश में नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।
  • वहीं स्वीडन औद्योगिक नवाचार, उन्नत अनुसंधान और जिम्मेदार एआई कार्यान्वयन (Responsible AI Implementation) में अपनी मजबूत विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

यह साझेदारी उद्यमों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को व्यापक, समावेशी और स्केलेबल एआई समाधान विकसित करने में सहायता प्रदान करेगी, जिससे आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और सतत विकास को गति मिलेगी।

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