जानें कौन हैं भारतीय-अमेरिकी नील मोहन, जो बने यूट्यूब के नए सीईओ

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भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक नील मोहन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब के नए सीईओ होंगे। मोहन सुसान वोजिकी की जगह लेंगे। सुसान वोजिकी नौ साल बाद अपने पद से हट रहीं हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। नील मोहन अभी यूट्यूब के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर हैं। लंबे वक्त से वह सुसान वोजिकी के सहयोगी रहे हैं।

 

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नील मोहन भी अब भारतीय मूल के उन सीईओ की सूची में शामिल हो चुके हैं, जो दुनियाभर की दिग्गज कंपनियों को संभाल रहे हैं। मसलन माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई जैसे चेहरे शामिल हैं।

 

नील मोहन के बारे में

भारतीय मूल के नील मोहन यूट्यूब के नए सीईओ और वाइस प्रेसिडेंट हैं। साल 2008 में नील यूट्यूब के साथ जुड़े थे। साल 2013 में कंपनी ने उन्हें 544 करोड़ रुपए का बोनस दिया था। यूट्यूब की मूल कंपनी अल्फाबेट की सीईओ सुंदर पिचाई (Sunder Pichai) भी भारतवंशी है। उन्होंने साल 2015 में चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर की जिम्मेदारी मिली। उनके काम को देखते हुए उन्हें शुरुआत से ही वोज्स्की का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। उनके भीतर लीडरशिप क्वालिटी से वोज्स्की प्रभावित थी।

नील मोहन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। नील मोहन ने अपने करियर की शुरुआत ग्लोरफाइड टेक्निकल सपोर्ट से की थी। उस वक्त उनकी सालाना आय 60,000 डॉलर थी। ग्लोरफाइड टेक्निकल सपोर्ट के बाद उन्होंने डबल क्लिक को ज्वाइन किया था, जिसे 2008 में गूगल ने खरीद लिया था। उन्होंने एसेंचर में सीनियर एनालिस्ट के पद पर काम किया है। इसके अलावा उन्होंने डबलक्लिक इंक में 3 सालों तक कीम किया। इसके बाद उन्होंने करीब ढाई साल वाइस प्रेसिडेंट बिजनेस ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाली। उनके पास माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) में काम का भी अनुभव है। साल 2008 में गूगल ने डबलक्लिक का अधिग्रहण कर लिया, जिसके बाद नील गूगल में शामिल हो गए।

 

सुसान वोजिकी ने क्यों दिया इस्तीफा?

 

सुसान वोजिकी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने परिवार, हेल्थ और पर्सनल लाइफ पर फोकस करने के लिए यूट्यूब पर अपने सफर को विराम दे दिया। साल 2014 में उन्होंने यूट्यूब के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • YouTube संस्थापक: जावेद करीम, चाड हर्ले, स्टीव चेन;
  • YouTube स्थापित: 14 फरवरी 2005, सैन मेटो, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका;
  • YouTube  मुख्यालय: सैन ब्रूनो, कैलिफ़ोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका;
  • YouTube  मूल संगठन: Google।

 

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वैश्विक पर्यटन लचीलापन दिवस: 17 फरवरी

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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पर्यटन की स्थिरता को भविष्य में प्रमाणित करने के प्रयास में 17 फरवरी 2023 को पहली बार वैश्विक पर्यटन लचीलापन दिवस घोषित करने के लिए जमैका से एक प्रस्ताव अपनाया है। सालाना दिन को चिह्नित करने के कदम को 90 से अधिक देशों ने समर्थन दिया था। यूएनजीए सभी को स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार और शिक्षा, गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से स्थायी पर्यटन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 17 फरवरी को एक दिन के रूप में मनाने के लिए आमंत्रित करता है। पहला वैश्विक पर्यटन लचीलापन सम्मेलन 15 फरवरी को जमैका में आयोजित किया जाएगा, जिसका समापन वैश्विक पर्यटन लचीलापन दिवस पर होगा।

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पर्यटन में लचीलापन क्या है?

 

एक पारिस्थितिक या पर्यावरणीय आपदा के बाद स्थिरता में सुधार करने का एक तरीका और पर्यटन प्रेरित तनाव से संभावित वसूली के रूप में सतत विकास का विकल्प प्रदान करता है।

कई विकासशील देशों के लिए, जिनमें सबसे कम विकसित देश, छोटे द्वीप विकासशील राज्य, अफ्रीका के देश और मध्यम आय वाले देश शामिल हैं, पर्यटन आय, विदेशी मुद्रा आय, कर राजस्व और रोजगार का एक प्रमुख स्रोत है। क्योंकि पर्यटन लोगों को प्रकृति से जोड़ता है, टिकाऊ पर्यटन में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और संरक्षण को बढ़ावा देने की अनूठी क्षमता है।

इकोटूरिज्म सहित सतत पर्यटन, एक क्रॉस-कटिंग गतिविधि है जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, गरीबी को कम करने, सभी के लिए पूर्ण और उत्पादक रोजगार और अच्छे काम का निर्माण करके सतत विकास के तीन आयामों और सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि में योगदान कर सकती है।

यह अधिक टिकाऊ खपत और उत्पादन पैटर्न में परिवर्तन को तेज करने और महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने, जीवन की गुणवत्ता में सुधार और महिलाओं और युवाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में भी भूमिका निभा सकता है। लोगों और स्थानीय समुदायों और छोटे किसानों और परिवार के किसानों सहित ग्रामीण आबादी के लिए ग्रामीण विकास और बेहतर रहने की स्थिति को बढ़ावा देना।

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भारत-अमेरिका अभ्यास तरकश, जानें सबकुछ

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संयुक्त अभ्यास तारकश का छठा संस्करण हाल ही में चेन्नई में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और यूएस स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स (SOF) द्वारा संपन्न हुआ। यह अभ्यास का छठा संस्करण है जो 16 जनवरी से शुरू हुआ और 14 फरवरी को समाप्त हुआ। यह राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और यूएस स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स (SOF) द्वारा एक संयुक्त अभ्यास है।

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इस अभ्यास में पहली बार “रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) आतंक प्रतिक्रिया” को शामिल किया गया है। इस अभ्यास में आतंकवादियों द्वारा रासायनिक और जैविक हमलों से निपटने के लिए एक अभ्यास भी शामिल किया गया था। रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में रासायनिक और जैविक हमलों को अभ्यास का हिस्सा बनाया गया है।

 

पिछले साल, रूस ने यूक्रेन पर पश्चिमी देशों से सहायता प्राप्त करने और खार्किव में रासायनिक हमला करने का आरोप लगाया था। इस अभ्यास का उद्देश्य आतंकवादियों को बेअसर करना, बंधकों को सुरक्षित छुड़ाना और आतंकवादियों द्वारा ले जाए जा रहे रासायनिक हथियारों को निष्क्रिय करना है।

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दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए जाएंगे 12 चीते

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दक्षिण अफ्रीका से 8 फरवरी को 12 चीतों को लाया जाएगा। इसकी जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी है।महत्वाकांक्षी चीता पुन: परिचय कार्यक्रम (Cheetah reintroduction programme) के तहत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर, 2022 को अपने 72 वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों के पहले बैच जिसमें पांच मादा और तीन नर थे- को एक बाड़े में छोड़ा था।

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मुख्य बिंदु

  • 1952 में भारत में चीता विलुप्त हो गए थे। प्रोजेक्ट चीता, जिसे भारत में चीता की शुरूआत के लिए कार्य योजना भी कहा जाता है, देश में बड़ी चीता को फिर से पेश करने के लिए शुरू की गई थी।
  • इसे प्राप्त करने के लिए, भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दक्षिण अफ्रीका अगले 8 से 10 साल तक हर साल 12 चीते भेजेगा।
  • यह परियोजना वानिकी विभाग, दक्षिण अफ्रीकी संगठनों, राष्ट्रीय जैव विविधता संस्थान, लुप्तप्राय वन्यजीव ट्रस्ट आदि द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
  • बता दें कि भारत और दक्षिण अफ्रीका ने जनवरी में अफ्रीकी देश से चीतों के परिवहन और कूनो में उन्हें फिर से लाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
  • दुनिया के 7,000 चीतों में से अधिकांश दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना में रहते हैं। नामीबिया में चीतों की दुनिया की सबसे बड़ी आबादी है।
  • चीता एकमात्र बड़ा मांसाहारी है जो भारत से पूरी तरह से समाप्त हो गया है। जिसका मुख्य कारण अत्यधिक शिकार करना और निवास स्थान की कमी होना है।

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सुभाष चंद्रन को ‘समुद्रशिला’ के लिए केरल के अकबर कक्कट्टिल पुरस्कार से सम्मानित किया गया

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लेखक सुभाष चंद्रन के उपन्यास समुद्रशिला को कोझिकोड के लघु कथाकार और उपन्यासकार की स्मृति में एक ट्रस्ट द्वारा स्थापित अकबर कक्कट्टिल पुरस्कार के लिए चुना गया है। उपन्यास का चयन पिछले पांच वर्षों में प्रकाशित साहित्यिक कृतियों में से तीन सदस्यीय जूरी द्वारा किया गया था।

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सुभाष चंद्रन: पुरस्कार प्राप्त हुए

 

  • केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2001: घाटिकारंगल निलयकुन्ना समयम (कहानी)
  • केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2011: मनुष्यु ओरु अमुखम (उपन्यास)
  • ओडक्कुझल पुरस्कार, 2011: मनुष्यु ओरु अमुखम
  • केंद्र साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2014: मनुष्यु ओरु अमुखम
  • वायलार पुरस्कार, 2015: मनुष्यु ओरु अमुखम
  • पद्मराजन पुरस्कार, 2019: समुद्रशिला
  • सर्वश्रेष्ठ उपन्यास के लिए ओ वी विजयन पुरस्कार, 2020: समुद्रशिला

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रक्षा मंत्री ने ‘आईडेक्स इन्वेस्टर हब’ की शुरुआत की, 200 करोड़ रूपये से ज्यादा निवेश की प्रतिबद्धता

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आईडेक्स इन्वेस्टर हब’ (आईआईएच) का उद्घाटन किया जिसके तहत भारतीय निवेशक 200 करोड़ रुपये से अधिक लगाने की घोषणा कर चुके हैं। राजनाथ सिंह ने यहां एयरो इंडिया 2023 के तहत आयोजित वार्षिक रक्षा नवोन्मेष समारोह ‘मंथन’ के दौरान ‘साइबर सुरक्षा’ पर ‘डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंजिस (डिस्क 9)’ के नौवें संस्करण की भी शुरुआत की। ‘इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सिलेंस’ (आईडेक्स) रक्षा उत्पादन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना है जिसमें रक्षा नवोन्मेष में शामिल स्टार्ट-अप और अन्य ऐसी इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाता है।

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‘आईडेक्स इन्वेस्टर हब’ का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना तथा निवेशकों के सामने अवसरों एवं नवाचारों का एकीकृत नजरिया पेश करना है। रक्षा उत्‍कृष्‍टता के लिए नवाचार (आईडीएक्‍स) रक्षा उत्‍पादन विभाग की अग्रणी पहल है, जिसका उद्देश्‍य रक्षा नवाचार में लगे स्‍टार्ट-अप और ऐसी अन्‍य संस्‍थाओं को प्रोत्‍साहित करना है। आईडीईएक्स इन्वेस्टर हब’ का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में निवेश में तेजी लाना और निवेशकों को अवसरों और नवाचारों के बारे में एक एकीकृत दृष्टिकोण देना है।

 

मुख्य बिंदु

 

  • डिस्क 9 गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) प्रभाग के साथ आईडीईएक्स का पहला सहयोग है।
  • इन चुनौतियों को सेवाओं, डीपीएससीओ और गृह मंत्रालय से क्यूरेट किया गया है, जो हमारे रक्षा उद्योग के बीच आईडीईएक्स के गहरे प्रभाव और दिलचस्पी को दिखाता है।
  • डिस्क 6, आईडेक्स प्राइम के पहले तीन संस्करणों तथा ओपन चैलेंज 5 और 6 के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। मिशन डेफस्पेस के अंतर्गत चुनौतियों के चरण-1 के विजेता की घोषणा की गई और उन्हें सम्मानित किया गया।
  • इनोवेटरों ने आईडीईएक्स-डीआईओ द्वारा समर्थित स्टार्टअप की एक प्रदर्शनी में ऑटोनोमस सिस्टम, एडवांस सेंसर, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उद्योग 4.0 के क्षेत्र में भविष्य के प्रौद्योगिकी विकास का प्रदर्शन किया।
  • आईडेक्स इनवेस्टर हब का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में निवेश में तेजी लाना तथा निवेशकों को अवसरों और नवाचारों का एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करना है। रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) ने मंथन में प्रमुख निवेशकों के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए।
  • एक्सिस बैंक के साथ एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। डीआईओ ने रक्षा क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए इसरो, इनस्पेस और आईएसपीए के साथ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
  • भविष्य में स्टार्टअप चुनौतियों को संभावित रूप से लॉन्च करने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इनोवेट 4 डिफेंस इंटर्नशिप (आई4डी) का चौथा संस्करण भी लॉन्च किया गया था, इसमें पूरे देश के विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
  • रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा अनुसंधान, डिजाइन, विकास और मैन्युफैक्चरिंग इको-सिस्टम के लिए भारतीय सेना के 110 प्रॉब्लम स्टेटमेंट का संग्रह भी जारी किया है।
  • प्रॉब्लम स्टेटमेंट आयुद्ध, निगरानी और अग्नि नियंत्रण प्रणालियों से लेकर आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉक चेन, मेटावर्स, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर, गोलाबारुद का स्मार्टिजेसन जैसे शीर्ष डोमेन तक विभिन्न डोमेन में भारतीय सेना की तकनीकी चुनौतियों और आवश्यकताओं को उजागर करते हैं।
  • इसके अतिरिक्त इनमें नई टेक्नोलॉजी को शामिल करना, वर्तमान प्रणालियों का उन्नयन करना तथा महत्वपूर्ण घटकों का स्वदेशीकरण भी शामिल है।
  • यह संग्रह स्वदेशी समाधानों के साथ-साथ भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्रीत प्रयासों को सक्षम बनाएगा, जिससे एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा।
  • उद्योग और शिक्षाविदों को भारतीय सेना द्वारा आईडीईएक्स, टेक्नोलॉजी विकास कोष (टीडीएफ) और सेना प्रौद्योगिकी बोर्ड(एटीबी) सहित विभिन्न अनुसंधान और विकास मार्गों के माध्यम से सहायता दी जाएगी।

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International Day of Persons with Disabilities 2022: 3 December_90.1

Aero India: HAL को स्वदेशी रूप से विकसित ‘ब्लैक बॉक्स’ के लिए DGCA की मंजूरी मिली

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एयरो इंडिया में, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अपने स्वदेशी रूप से विकसित कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से भारतीय तकनीकी मानक आदेश (आईटीएसओ) प्राधिकरण प्राप्त हुआ है। सीवीआर और एफडीआर को ‘ब्लैक बॉक्स’ के नाम से जाना जाता है। हालांकि, एक विमान दुर्घटना के बाद उनकी रिकवरी में मदद करने के लिए इन रिकॉर्डर को नारंगी रंग में रंगा जाता है। CVR और FDR का उपयोग क्रैश प्रूफ मेमोरी में महत्वपूर्ण उड़ान मापदंडों और ऑडियो वातावरण को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है जो बाद में विमान की घटना या दुर्घटना की जांच के लिए उपयोग किया जाता है।

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क्या है ब्लैक बॉक्स?

फ्लाइट के साथ हुई दुर्घटना का पता लगाने के लिए ब्लैक बॉक्स का उपयोग किया जाता है। ये असल में हवाई जहाज की उड़ान के दौरान उड़ान की सारी गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। इसी वजह से इसे फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (FDR) भी कहते हैं। सुरक्षित रखने के लिए इसे सबसे मजबूत धातु टाइटेनियम से बनाया जाता है। साथ ही भीतर की तरफ इस तरह से सुरक्षित दीवारें बनी होती हैं कि कभी किसी दुर्घटना के होने पर भी ब्लैक बॉक्स सेफ रहे। ब्लैक बॉक्स को बनाने की कोशिश 1950 के शुरुआत दशक में होने लगी थी। तब विमानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ने के साथ ही दुर्घटनाएं भी बढ़ने लगी थीं। साल 1954 में एरोनॉटिकल रिसर्चर डेविड वॉरेन ने इसका आविष्कार किया।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के संस्थापक: वालचंद हीराचंद;
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड मुख्यालय: भारत;
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की स्थापना: 23 दिसंबर 1940, बेंगलुरु।

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पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना के तहत चार तीर्थस्थलों का चयन किया

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पर्यटन मंत्रालय ने ‘स्वदेश दर्शन’ और ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान (PRASHAD)’ की अपनी योजनाओं के तहत विकास के लिए चार तीर्थ केंद्रों की पहचान की है। वे देश में पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों आदि को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।

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पर्यटन मंत्रालय ने स्थायी और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 (SD2.0) के रूप में नया रूप दिया है। SD2.0 के तहत, मंत्रालय ने विकास के लिए गंतव्य के रूप में ‘हम्पी’ और ‘मैसूर’ की पहचान की है।

 

कर्नाटक में पर्यटन मंत्रालय द्वारा चिन्हित तीर्थयात्री केंद्र

 

(i) मां चामुंडेश्वरी देवी मंदिर, मैसूर, कर्नाटक का विकास

(ii) श्री माधव वन, कुंजारुगिरी, उडुपी जिला

(iii) पापनाश मंदिर, बीदर जिला

(iv) श्री रेणुका यल्लम्मा मंदिर, सौदत्ती, बेलगावी जिला

 

‘प्रसाद’ (PRASHAD) योजना के बारे में

 

पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में चिह्नित तीर्थ स्थलों के समग्र विकास के उद्देश्य से ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन पर राष्ट्रीय मिशन (PRASAD)’ शुरू किया गया था। अक्तूबर 2017 में योजना का नाम बदलकर ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान’ (PRASHAD) राष्ट्रीय मिशन कर दिया गया। आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की हृदय (HRIDAY) योजना के बंद होने के बाद विरासत स्थलों के विकास को प्रसाद (PRASHAD) योजना में शामिल किया गया। यह योजना धार्मिक पर्यटन अनुभव को समृद्ध करने के लिए पूरे भारत में तीर्थ स्थलों को विकसित करने और पहचान करने पर केंद्रित है।

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केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने इफको में नैनो यूरिया प्लांट का उद्घाटन किया

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केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने उत्तर प्रदेश के आंवला और फूलपुर में इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको – आईएफएफसीओ) के नैनो यूरिया तरल (लिक्विड) संयंत्रों का उद्घाटन किया।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ मांडविया ने कहा कि आज का दिन इसलिए एक महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि नैनो यूरिया संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया आने वाले समय में किसानों की प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही उनकी आय में वृद्धि करेगा। इस तरह यह हमारे किसान के भविष्य को बदल देगा।

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मुख्य बिंदु

 

  • डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि यह पल्यूशन को कम करने वाला है और कीमत में भी सस्ता है। उन्होंने कहा है कि एक बोरी यूरिया को एक बोतल नैनो यूरिया रिप्लेस करती है। इसका मतलब यह है कि अब किसान को एक बोरी खरीद कर ट्रांसपोर्ट का पैसा नहीं देना पड़ेगा। बल्कि एक बोतल में ही एक बोरी का काम हो जाएगा।
  • उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में किसान व्यापक तौर पर नैनो यूरिया का इस्तेमाल करेंगे। इससे आने वाले दिनों में किसान मिट्टी को बचाएंगे और अपना उत्पादन भी बढ़ाएंगे।
  • केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा है कि नैनो यूरिया का देश में उत्पादन और प्रचार-प्रसार भी तेजी से बढ़ रहा है। इफको ने सबके से पहले गुजरात के कलोन में 2 लाख बोतल का उत्पादन प्रतिदिन हो सके इतना बड़ा प्लांट स्थापित किया है, जिसका उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
  • इसके बाद आंवला और इफको फूलपुर में 2 लाख बोतल प्रतिदिन उत्पादन की क्षमता वाले प्लांट का उद्घाटन मेरे द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा है कि किसानों के लिए इफको का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
  • किसानों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने हमेशा किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समृद्धि के लिए काम किया है और उन्होंने प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक और वैकल्पिक उर्वरकों पर भी जोर दिया है।
  • उन्होंने कोविड के दौरान प्रधानमन्त्री की भूमिका की भी सराहना की, क्योंकि उस समय उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं और यूरिया का एक बैग 4000 रुपये के स्तर को छू गया था, परन्तु प्रधानमन्त्री ने यह सुनिश्चित किया कि उर्वरकों के दाम न बढ़े।
  • डॉ. मांडविया ने यह भी कहा कि यह एक वैकल्पिक उर्वरक है। हम वर्षों से उत्पादकता बढ़ाने के लिए यूरिया और डीएपी का इस्तेमाल करते रहे हैं। जब हम सामान्य यूरिया का उपयोग करते हैं तो केवल 35% नाइट्रोजन (यूरिया का ही) उपज द्वारा प्रयोग किया जाता है और अप्रयुक्त यूरिया मिट्टी पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

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निगरानी अभियान हेतु सौर ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन का एयरो इंडिया में प्रदर्शन

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ड्रोन क्षेत्र की स्टार्टअप कंपनी गरुड़ एयरोस्पेस ने सौर ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन “सूरज” का यहां एयरो इंडिया 2023 में अनावरण किया। इसे खास तौर पर निगरानी अभियानों के लिये डिजाइन किया गया है। प्रधानमंत्री के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख डॉ. सतीश रेड्डी ने इसका अनावरण किया।

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कंपनी के अनुसार, सूरज एक आईएसआर (खुफिया, निगरानी, टोही) अत्यधिक ऊंचाई वाला ड्रोन है, जिसे विशेष रूप से निगरानी अभियानों के लिए तैयार किया गया है, जो “आला कमान को वास्तविक समय के हालात की जानकारी प्रदान करता है और जमीन पर तैनात जवानों की सुरक्षा में मदद करता है।” कंपनी ने कहा कि ड्रोन के अद्वितीय जे-आकार के पंख सौर ऊर्जा से चलने वाले सेल से युक्त हैं जो इसके प्राथमिक ईंधन स्रोत के रूप में काम करते हैं, जबकि एक सहायक बैटरी अतिरिक्त प्रणोदन या आवश्यकतानुसार गति कम करने का काम करती है।

 

ड्रोन में हाई रेजोल्यूशन कैमरे के साथ ही थर्मल इमेजनरी और लिडार सेंसर भी लगे हैं और इसकी अधिकतम क्षमता 10 किलोग्राम है। स्टार्ट-अप ने कहा कि यह अत्याधुनिक तकनीक वास्तविक समय में फोटो और वीडियो को लेकर प्रसारित करेगी। यह ड्रोन 12 घंटों तक उड़ान भर सकता है और 3000 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है।

 

एयरो इंडिया के 14वें संस्करण

 

एयरो इंडिया के 14वें संस्करण (Aero India 2023) में तकरबीन 98 देश शामिल हुए हैं। यह शो डिजाइन नेतृत्व में भारत की प्रगति, यूएवी क्षेत्र में वृद्धि, रक्षा अंतरिक्ष और भविष्य की प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित कर रहा है। इस प्रदर्शन में 98 देशों 100 से ज्यादा डिफेंस कंपनियां हिस्सा ले रहीं हैं। बता दें कि 700 से ज्यादा कंपनियां भारत की ही हैं। इस संस्करण में जेटपैक सूट भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसकी खासियत है कि यह ऐसा सूट है जिसे पहनकर इंसान जेट बन जाता है। गैस टर्बाइन इंजन से चलने वाले इस सूट को पहनर जवान 10 से 15 मीटर हवा में उड़ सकेंगे।

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