रिवाइंड 2025: इस साल के सबसे बड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ऑपरेशन

वर्ष 2025 में दुनिया भर में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ऑपरेशन शुरू किए गए, जिनका उद्देश्य आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, मानवीय संकट, नागरिकों की निकासी, आपदा राहत और क्षेत्रीय संघर्षों से निपटना था। भारत सहित प्रमुख वैश्विक शक्तियों ने नागरिकों की सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्राकृतिक आपदाओं का जवाब देने और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए ये अभियान चलाए। ये ऑपरेशन बदलती सुरक्षा चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

2025 के प्रमुख ऑपरेशन

I. भारत-केंद्रित ऑपरेशन (राष्ट्रीय एवं मानवीय)

1. ऑपरेशन सिंदूर

पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थित नौ आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए गए। इसका उद्देश्य सैन्य टकराव को बढ़ाए बिना निरोधक क्षमता को पुनः स्थापित करना था, इसलिए पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया।

2. ऑपरेशन शिवा 2025

यह ऑपरेशन श्री अमरनाथ यात्रा की सुरक्षित और शांतिपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जम्मू-कश्मीर में शुरू किया गया। इसमें 8,500 से अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती की गई, साथ ही उन्नत निगरानी प्रणालियाँ, काउंटर-ड्रोन ग्रिड, चिकित्सा सुविधाएँ और आपदा प्रतिक्रिया टीमें शामिल रहीं। यह अभियान बढ़ते आतंकी खतरों के बीच धार्मिक यात्राओं की सुरक्षा पर भारत के फोकस को दर्शाता है।

3. ऑपरेशन अभ्यास

गृह मंत्रालय के तहत आयोजित यह एक राष्ट्रीय स्तर का नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल था। बेंगलुरु सहित कई शहरों में आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन तैयारी, बचाव कार्य, अग्नि सुरक्षा, निकासी और जन-जागरूकता को मजबूत करना था, खासकर आतंकी घटनाओं के बाद बढ़े सुरक्षा अलर्ट के संदर्भ में।

4. ऑपरेशन सर्द हवा

सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा गणतंत्र दिवस से पहले शुरू किया गया यह ऑपरेशन राजस्थान में भारत–पाक सीमा पर घने कोहरे के दौरान घुसपैठ रोकने के लिए था। इसमें उन्नत निगरानी उपकरण, ऊँट गश्त, ड्रोन और अतिरिक्त बल तैनात किए गए, जिससे चौबीसों घंटे सतर्कता बनी रही।

5. ऑपरेशन सिंधु

ईरान–इज़राइल संघर्ष के बीच ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए ऑपरेशन सिंधु चलाया गया। भारतीय दूतावासों ने आर्मेनिया के रास्ते सड़क और हवाई निकासी की व्यवस्था की। यह अभियान विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के प्रति भारत की कूटनीतिक तत्परता को दर्शाता है।

6. ऑपरेशन ब्रह्मा

म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत मानवीय सहायता प्रदान की। इसमें राहत सामग्री की हवाई आपूर्ति, नौसैनिक सहयोग, खोज एवं बचाव दल और फील्ड अस्पताल शामिल थे। यह मिशन भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत एक प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश की भूमिका को दर्शाता है।

7. ऑपरेशन हॉक 2025

CBI के नेतृत्व में चलाए गए इस ऑपरेशन का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करना था, जो ऑनलाइन बाल यौन शोषण में संलिप्त थे। अमेरिका के सहयोग से संचालित इस अभियान में Discord जैसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने वाले नेटवर्क को तोड़ा गया, जिससे वैश्विक साइबर अपराध रोकथाम में भारत की भूमिका मजबूत हुई।

II. अंतर्राष्ट्रीय / वैश्विक ऑपरेशन

1. ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक (अमेरिका–जॉर्डन)

सीरिया में ISIS के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए यह संयुक्त सैन्य ऑपरेशन किया गया, जब एक हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसमें 70 से अधिक ISIS ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए गए। इसका उद्देश्य ISIS की संरचना को कमजोर करना और शक्ति के माध्यम से प्रतिरोध की नीति को दोहराना था।

2. ऑपरेशन मिडनाइट हैमर (संयुक्त राज्य अमेरिका)

अमेरिका ने ईरान की फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान स्थित परमाणु सुविधाओं पर हमला करने के लिए यह ऑपरेशन चलाया। इसका लक्ष्य स्टेल्थ बॉम्बर्स और क्रूज़ मिसाइलों के माध्यम से, बिना तत्काल युद्ध भड़काए, ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित करना था।

3. ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 (ईरान)

ईरान ने अपने परमाणु और सैन्य ठिकानों पर इज़राइली हमलों के जवाब में इज़राइल के शहरों पर मिसाइल अभियान चलाया। इसमें डिकॉय सैचुरेशन और AI-सहायता प्राप्त मिसाइल मार्ग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया गया, जिसने आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चुनौती दी।

4. ऑपरेशन राइजिंग लायन (इज़राइल)

इज़राइल ने ईरान के नतांज़ परमाणु संवर्धन केंद्र सहित परमाणु अवसंरचना को निशाना बनाते हुए यह ऑपरेशन शुरू किया। इज़राइल ने इसे राष्ट्रीय अस्तित्व के लिए आवश्यक बताया, जबकि अमेरिका ने इससे दूरी बनाए रखी—जो मध्य पूर्व में एक बड़ा भू-राजनीतिक संकेत था।

5. ऑपरेशन डेविल हंट (बांग्लादेश)

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमलों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समर्थकों के खिलाफ यह अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य राजनीतिक अशांति के बीच कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक स्थिरता बहाल करना था।

6. ऑपरेशन सागर बंधु (भारत–श्रीलंका)

चक्रवात दित्वाह के बाद श्रीलंका को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए भारत ने यह अभियान चलाया। भारतीय नौसेना के जहाज़ों ने राहत सामग्री, भोजन और चिकित्सा सहायता पहुँचाई। इस ऑपरेशन ने हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय एकजुटता और मानवीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत किया।

कैबिनेट ने 6-लेन नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को दी मंज़ूरी

भारत सरकार ने महाराष्ट्र में परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट को जोड़ने वाले 6-लेन, ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर को स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना यात्रा दक्षता, लॉजिस्टिक्स, सड़क सुरक्षा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है और राष्ट्रीय अवसंरचना विज़न के अनुरूप है।

खबरों में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने महाराष्ट्र में 374 किमी लंबे नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट कॉरिडोर के निर्माण को मंज़ूरी दी है। परियोजना की कुल लागत ₹19,142 करोड़ है और इसे BOT (टोल) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार हो सके।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • 374 किमी लंबा, 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर

  • बिल्ड–ऑपरेट–ट्रांसफर (BOT) टोल मोड के अंतर्गत विकसित, जिससे निजी भागीदारी सुनिश्चित होगी

  • उच्च गति और निर्बाध यातायात के लिए डिज़ाइन, जिससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और भीड़ घटेगी

  • यात्री और मालवाहक—दोनों प्रकार के वाहनों के लिए बेहतर प्रवाह

कनेक्टिविटी और रणनीतिक महत्व

  • नासिक, अहिल्यानगर, सोलापुर और अक्कलकोट जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा

  • दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे, आगरा–मुंबई कॉरिडोर, समृद्धि महामार्ग तथा कुर्नूल–चेन्नई पोर्ट की ओर जाने वाले कॉरिडोर से संपर्क

  • पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक कनेक्टिविटी, जिससे राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा

लॉजिस्टिक्स और यात्रा दक्षता के लाभ

  • यात्रा समय में लगभग 17 घंटे (करीब 45%) की कमी

  • दूरी में 201 किमी की कमी

  • माल ढुलाई के लिए लॉजिस्टिक्स दक्षता में बड़ा सुधार

  • विशेष रूप से NICDC के तहत औद्योगिक नोड्स के लिए माल परिवहन की दक्षता में बड़ा सुधार

आर्थिक और क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव

  • परियोजना  से नासिक, अहिल्यानगर, धाराशिव और सोलापुर जिलों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

  • बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार और कृषि को लाभ मिलेगा

  • प्रस्तावित पुणे–नासिक एक्सप्रेसवे को समर्थन, जिसे NICDC ने एक प्रमुख आवश्यकता के रूप में पहचाना है

मुख्य तथ्य एक नज़र में

पहलू विवरण
खबरों में क्यों? कैबिनेट ने नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को मंज़ूरी दी
परियोजना की लंबाई 374 किमी
कुल लागत ₹19,142 करोड़
निष्पादन मॉडल BOT (टोल)
राज्य महाराष्ट्र
प्रमुख उद्देश्य तेज़ यात्रा, बेहतर लॉजिस्टिक्स, सुरक्षित सड़कें
राष्ट्रीय पहल PM गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान

प्रश्न

Q. कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट कॉरिडोर को किस मोड में विकसित किया जाएगा?

A. EPC मोड
B. BOT (एन्युटी) मोड
C. BOT (टोल) मोड
D. HAM मोड

DRDO ने लगातार सैल्वो लॉन्च के साथ ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने अपनी स्वदेशी मिसाइल क्षमताओं को सशक्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक ही लॉन्चर से दो ‘प्रलय’ मिसाइलों का त्वरित क्रम में (सैल्वो लॉन्च) सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण ने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और परिचालन तत्परता को प्रमाणित किया, जो इसे भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

खबरों में क्यों?

DRDO ने 31 दिसंबर 2025 को ओडिशा तट से दो स्वदेशी प्रलय मिसाइलों का सैल्वो लॉन्च सफलतापूर्वक किया। यह यूज़र इवैल्यूएशन ट्रायल था, जिसमें मिसाइल की सटीकता, भरोसेमंद प्रदर्शन और तैनाती की तैयारी की पुष्टि हुई।

मिसाइल परीक्षण के प्रमुख विवरण

  • एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलें त्वरित क्रम में लॉन्च की गईं।

  • परीक्षण 31 दिसंबर 2025, सुबह लगभग 10:30 बजे, ओडिशा तट के पास किया गया।

  • यह परीक्षण यूज़र इवैल्यूएशन ट्रायल का हिस्सा था।

  • दोनों मिसाइलों ने निर्धारित पथ का अनुसरण किया और सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

  • इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर के ट्रैकिंग सेंसर और ऑनबोर्ड टेलीमेट्री प्रणालियों ने टर्मिनल प्रदर्शन की सफलता की पुष्टि की।

प्रलय मिसाइल की तकनीकी विशेषताएँ

  • सॉलिड प्रोपेलेंट आधारित क्वाज़ी-बैलिस्टिक मिसाइल

  • अत्याधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम

  • अत्यंत उच्च सटीकता और प्रिसिजन

  • विभिन्न प्रकार के वॉरहेड ले जाने की क्षमता

  • अलग-अलग लक्ष्यों के विरुद्ध लचीला और प्रभावी डिजाइन

ये विशेषताएँ प्रलय को भारत की मिसाइल प्रणाली में एक विश्वसनीय और बहुउपयोगी हथियार बनाती हैं।

विकास और औद्योगिक सहयोग

  • मिसाइल का विकास रिसर्च सेंटर इमारत (हैदराबाद) द्वारा किया गया जिसमें कई DRDO प्रयोगशालाओं ने सहयोग दिया।
  • भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) सहित भारतीय उद्योगों ने उत्पादन और एकीकरण में अहम भूमिका निभाई।
  • परीक्षण के दौरान भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, वैज्ञानिकों और उद्योग साझेदारों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रलय मिसाइल के बारे में

  • प्रलय एक स्वदेशी रूप से विकसित क्वाज़ी-बैलिस्टिक मिसाइल है।

  • यह उच्च सटीकता वाले प्रहार के लिए डिज़ाइन की गई है।

  • यह मिसाइल आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम से लैस है और विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है, जिससे यह आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप है।

परीक्षण का रणनीतिक महत्व

  • सैल्वो लॉन्च क्षमता से युद्धक्षेत्र में प्रभावशीलता बढ़ती है।

  • मिसाइल प्रणाली की विश्वसनीयता और तैनाती योग्यता सिद्ध होती है।

  • स्वदेशी मिसाइल विकास कार्यक्रम को मजबूती।

  • भारतीय सशस्त्र बलों में इसे शीघ्र शामिल किए जाने का संकेत।

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता के लिए DRDO, सशस्त्र बलों और उद्योग साझेदारों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य तथ्य एक नज़र में

पहलू विवरण
खबरों में क्यों? प्रलय मिसाइल का सफल सैल्वो लॉन्च
मिसाइल का प्रकार सॉलिड प्रोपेलेंट क्वाज़ी-बैलिस्टिक
लॉन्च का स्थान ओडिशा तट
विशेष क्षमता एक ही लॉन्चर से बैक-टू-बैक लॉन्च
विकासकर्ता DRDO एवं भारतीय उद्योग साझेदार

प्रश्न

Q1. DRDO द्वारा परीक्षण की गई ‘प्रलय’ मिसाइल को सबसे उपयुक्त रूप से कैसे वर्णित किया जा सकता है?

A. तरल ईंधन वाली क्रूज़ मिसाइल
B. अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल
C. सॉलिड प्रोपेलेंट क्वाज़ी-बैलिस्टिक मिसाइल
D. सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल

डिजिटल क्रांति की नई उपलब्धि: भारत में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 100 करोड़ के पार

नवंबर 2025 में भारत ने डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की, जब देश में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 1 बिलियन (100 करोड़) को पार कर गई। यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश में इंटरनेट पहुंच के तेजी से विस्तार और डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली दीर्घकालिक नीतियों की सफलता को दर्शाती है।

खबरों में क्यों?

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 के अंत तक भारत में 100.37 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स दर्ज किए गए। यह पहली बार है जब देश ने 1 बिलियन सब्सक्राइबर का आंकड़ा पार किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल और कनेक्टेड समाजों में शामिल हो गया है।

पिछले एक दशक में वृद्धि

पिछले दस वर्षों में भारत की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में असाधारण वृद्धि देखने को मिली है:

  • नवंबर 2015: 131.49 मिलियन (13.15 करोड़) ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स
  • नवंबर 2025: 100.37 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स

यह वृद्धि एक दशक में छह गुना से अधिक है, जो भारत के तेज़ रफ्तार डिजिटल विस्तार को रेखांकित करती है।

वृद्धि के प्रमुख कारण

इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई संरचनात्मक और नीतिगत कारक रहे हैं:

  • किफायती मोबाइल डेटा और प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम बाजार
  • 4G और 5G नेटवर्क का व्यापक विस्तार
  • ऑप्टिकल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर रोलआउट
  • डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी पहल
  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच

इन सभी कारणों ने मिलकर इंटरनेट को अधिक सुलभ, सस्ता और समावेशी बनाया है।

100 करोड़ का आंकड़ा क्यों है महत्वपूर्ण?

100 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का संकेत है:

  • यह गहरे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को दर्शाता है

  • डिजिटल गवर्नेंस और सेवा वितरण को मज़बूत करता है

  • डिजिटल भुगतान के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है

  • ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और ई-कॉमर्स को सक्षम बनाता है

  • स्टार्टअप्स, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को समर्थन देता है

आज ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बन चुकी है।

मुख्य तथ्य एक नज़र में

पहलू विवरण
खबरों में क्यों? नवंबर 2025 में भारत ने 100 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार किया
वर्तमान सब्सक्राइबर्स 100.37 करोड़ (नवंबर 2025)
2015 में सब्सक्राइबर्स 13.15 करोड़
वृद्धि की प्रवृत्ति 10 वर्षों में छह गुना से अधिक वृद्धि
प्रमुख कारण सस्ता डेटा, 4G/5G, डिजिटल इंडिया, फाइबर विस्तार

गूगल ने दी यूज़र्स को प्राइमरी Gmail एड्रेस बदलने की अनुमति

गूगल ने Gmail यूज़र्स के लिए एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित फीचर रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस अपडेट से यूज़र्स अब अपने प्राइमरी @gmail.com ईमेल एड्रेस को बदल सकते हैं, वो भी नया Google अकाउंट बनाए या मौजूदा डेटा खोए बिना। ईमेल, फोटो, चैट और सब्सक्रिप्शन सभी सुरक्षित रहेंगे, और पुराना ईमेल आईडी एलियास में बदल जाएगा। इस बदलाव से उन यूज़र्स को मदद मिलेगी जो प्रोफेशनल या अपडेटेड ईमेल एड्रेस चाहते हैं, लेकिन डेटा माइग्रेशन के झंझट से बचना चाहते हैं।

खबरों में क्यों?

गूगल ने धीरे-धीरे इस नए फीचर की शुरुआत कर दी है, जो यूज़र्स को उनका प्राइमरी Gmail एड्रेस बदलने की सुविधा देता है। सबसे खास बात यह है कि सारे मौजूदा अकाउंट डेटा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पुराना ईमेल आईडी एलियास के रूप में सुरक्षित रहेगा।

नए Gmail फीचर के बारे में

अब Google अकाउंट होल्डर्स अपने मौजूदा @gmail.com एड्रेस को नए Gmail ID से बदल सकते हैं। इसका मतलब है कि:

  • नया Google अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है

  • ईमेल, फोटो, मैसेज या फाइल्स को कोई नुक्सान नहीं

  • सभी Google सेवाओं तक पहुंच बनी रहेगी

पुराना Gmail एड्रेस एलियास के रूप में काम करेगा, जिससे पुराने ईमेल मिस नहीं होंगे

डेटा कैसे सुरक्षित रहता है?

गूगल के सपोर्ट डॉक्यूमेंटेशन के अनुसार:

  • सभी सेव किए गए डेटा जैसे ईमेल, गूगल फोटोज, ड्राइव फाइल्स, मैसेज और कॉन्टेक्ट्स सुरक्षित रहेंगे

  • लॉगिन क्रेडेंशियल्स और लिंक्ड सेवाएँ सक्रिय रहेंगी

  • सब्सक्रिप्शन, ऐप डेटा और पेमेंट डिटेल्स पर कोई असर नहीं

  • इसका मतलब है कि यूज़र्स बिना किसी रुकावट के आसानी से नया ईमेल एड्रेस इस्तेमाल कर सकते हैं

उपलब्धता और रोलआउट का स्टेटस

  • यह फीचर धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है

  • फिलहाल केवल कुछ भाषाओं में Google सपोर्ट पेज पर दिखाई दे रहा है

  • सभी यूज़र्स को अभी तुरंत यह विकल्प नहीं दिख सकता है

  • गूगल ने सलाह दी है कि धीरे-धीरे यह सुविधा सभी खातों तक पहुँच जाएगी

अपडेट का महत्व

  • यूज़र्स को डिजिटल पहचान पर अधिक नियंत्रण देता है

  • प्रोफेशनल और पुराने यूज़र्स को पुराना ईमेल अपडेट करने में मदद करता है

  • डेटा ट्रांसफर के जोखिम को खत्म करता है

  • यूजर्स के लिए अकाउंट प्रबंधन को अधिक सुविधाजनक और लचीला बनाता है

मुख्य तथ्य एक नज़र में

पहलू विवरण
खबरों में क्यों? गूगल अब प्राइमरी Gmail पता बदलने की अनुमति देता है
मुख्य बदलाव @gmail.com ID बदलें बिना डेटा खोए
डेटा प्रभाव ईमेल, फोटो, मैसेज सुरक्षित
पुराना ईमेल एलियास में बदल जाएगा
रोलआउट धीरे-धीरे, सभी यूज़र्स के लिए अभी उपलब्ध नहीं
कंपनी Google

प्रश्न:

प्राइमरी ईमेल बदलने के बाद पुराने Gmail एड्रेस का क्या होता है?

A. इसे स्थायी रूप से हटा दिया जाता है
B. यह निष्क्रिय हो जाता है
C. यह एलियास में बदल जाता है
D. इसे किसी अन्य अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है

वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे के CEO पद से दिया इस्तीफ़ा

दुनिया भर में “ओरेकल ऑफ ओमाहा” के नाम से प्रसिद्ध महान निवेशक वॉरेन बफेट ने लगभग छह दशकों तक नेतृत्व करने के बाद बर्कशायर हैथवे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह निर्णय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे लंबे और प्रभावशाली नेतृत्व कालों में से एक के समापन का संकेत है, जिसने आधुनिक निवेश दर्शन को नई दिशा दी।

चर्चा में क्यों है?

95 वर्ष की उम्र में वॉरेन बफेट ने 1965 से बर्कशायर हैथवे का नेतृत्व करने के बाद CEO पद छोड़ दिया है। उन्होंने कार्यकारी जिम्मेदारी ग्रेग एबेल को सौंपी है, जबकि वे कंपनी के चेयरमैन बने रहेंगे। इससे नेतृत्व में निरंतरता और निवेश दर्शन की स्थिरता सुनिश्चित होगी।

बर्कशायर हैथवे के साथ वॉरेन बफेट का सफर

  • बर्कशायर हैथवे मूल रूप से न्यू इंग्लैंड स्थित एक संघर्षरत वस्त्र निर्माण कंपनी थी।

  • 1965 में वॉरेन बफेट ने कंपनी का नियंत्रण संभाला, शुरुआत में वस्त्र व्यवसाय को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया।

  • समय के साथ उन्होंने पूंजी को बीमा और निवेश क्षेत्रों में स्थानांतरित किया। यहीं से एक विविधीकृत व्यावसायिक साम्राज्य की नींव पड़ी।

  • बफेट की दीर्घकालिक और मूल्य-आधारित निवेश रणनीति बर्कशायर की पहचान बन गई।

बफेट के नेतृत्व में बर्कशायर हैथवे

  • बफेट के नेतृत्व में कंपनी एक वैश्विक समूह  में बदल गई। आज बर्कशायर हैथवे का मूल्य 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।

  • कंपनी में पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियाँ और शेयर निवेशों का संतुलित मिश्रण है।

  • बफेट ने विकेंद्रीकृत प्रबंधन को बढ़ावा दिया, जहाँ प्रबंधकों को स्वतंत्रता मिली, लेकिन पूंजी आवंटन में सख्त अनुशासन बना रहा।

  • उनके वार्षिक शेयरधारक पत्र और ओमाहा की बैठकें दुनिया भर के निवेशकों के लिए मार्गदर्शक बन गईं।

प्रमुख निवेश और व्यवसाय

  • बर्कशायर हैथवे के पास एप्पल, कोका-कोला, अमेरिकन एक्सप्रेस और बैंक ऑफ अमेरिका जैसी दिग्गज कंपनियों में बड़े निवेश हैं।

  • इसके अलावा, कंपनी BNSF रेलवे, GEICO, बर्कशायर हैथवे एनर्जी और कई विनिर्माण व खुदरा कंपनियों की पूर्ण मालिक है।

  • यह विविधीकृत संरचना कंपनी को आर्थिक उतार-चढ़ाव में भी मजबूत बनाए रखती है।

नेतृत्व परिवर्तन: ग्रेग एबेल की भूमिका

  • वर्तमान में नॉन-इंश्योरेंस व्यवसायों के वाइस चेयरमैन ग्रेग एबेल 1 जनवरी 2026 से बर्कशायर हैथवे के नए CEO बनेंगे।

  • उन्होंने कंपनी के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा व्यवसाय के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है।

  • उनकी नियुक्ति निरंतरता का प्रतीक है, क्योंकि वे रणनीतिक निर्णयों में लंबे समय से शामिल रहे हैं और बफेट का पूरा विश्वास प्राप्त है।

महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में

पहलू विवरण
चर्चा में क्यों? वॉरेन बफेट ने लगभग छह दशकों बाद CEO पद छोड़ा
वॉरेन बफेट कौन हैं? “ओरेकल ऑफ ओमाहा” के नाम से प्रसिद्ध महान निवेशक
संबंधित कंपनी बर्कशायर हैथवे
नए CEO ग्रेग एबेल
बफेट की नई भूमिका बोर्ड के चेयरमैन
कंपनी का मूल्य 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक

प्रश्न

बर्कशायर हैथवे के CEO के रूप में वॉरेन बफेट का स्थान कौन लेगा?

A) चार्ली मंगर
B) अजीत जैन
C) ग्रेग एबेल
D) बिल गेट्स

रिवाइंड 2025: वर्ष 2025 में भारत और विश्व की UNESCO प्रविष्टियाँ

वर्ष 2025 भारत और विश्व के लिए UNESCO मान्यताओं के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष UNESCO के विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत कई नई प्रविष्टियाँ जोड़ी गईं। ये प्रविष्टियाँ विश्व धरोहर स्थल, अस्थायी सूची, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर, क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क तथा वैश्विक जियोपार्क्स तक फैली हुई हैं। सामूहिक रूप से ये इस वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाती हैं कि अब केवल स्मारकों ही नहीं, बल्कि जीवंत परंपराओं, दस्तावेजी विरासत, भूवैज्ञानिक धरोहर और रचनात्मक शहरों को भी मान्यता दी जा रही है।

2025 की श्रेणीवार प्रविष्टियाँ

1. UNESCO विश्व धरोहर सूची (2025)

भारत

  • भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य
  • 47वें विश्व धरोहर समिति सत्र (पेरिस) में सूचीबद्ध
  • 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच मराठाओं द्वारा निर्मित 12 किलों का समूह
  • इसमें जिंजी किला (तमिलनाडु) तथा महाराष्ट्र के रायगढ़, प्रतापगढ़, शिवनेरी, सिंधुदुर्ग जैसे किले शामिल हैं
  • सैन्य अभियंत्रण, रणनीतिक भू-दृश्य उपयोग और ऐतिहासिक महत्व के लिए मान्यता

वैश्विक (भारत के बाहर)

  • खमेर रूज नरसंहार स्थल (कंबोडिया)
  • तुओल स्लेंग कारागार (S-21)
  • M-13 कारागार
  • चोएंग एक किलिंग फील्ड्स

कंबोडिया से पहली आधुनिक संघर्ष-संबंधित धरोहर, जो स्मृति संरक्षण और शांति शिक्षा को बढ़ावा देती है।

2. UNESCO अस्थायी सूची में प्रविष्टियाँ (2025)

भारत की नई प्रविष्टियाँ (सितंबर 2025 में घोषित)

  • भारत ने प्राकृतिक धरोहर श्रेणी के अंतर्गत 7 नए स्थलों को जोड़ा
  • कुल अस्थायी सूची अब 69 स्थलों तक पहुँच गई

नए जोड़े गए प्राकृतिक स्थल

  • दक्कन ट्रैप्स – पंचगनी और महाबलेश्वर (महाराष्ट्र)
  • सेंट मैरी द्वीप बेसाल्ट स्तंभ (कर्नाटक)
  • मेघालयन युग की गुफाएँ (मेघालय)
  • नागा हिल ओफियोलाइट (नागालैंड)
  • एर्रा मट्टी दिब्बालु / लाल रेत के टीले (आंध्र प्रदेश)
  • तिरुमला पहाड़ियाँ (आंध्र प्रदेश)
  • वरकला क्लिफ (केरल)

ये प्रविष्टियाँ भू-धरोहर, जलवायु इतिहास और पारिस्थितिक संरक्षण पर भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाती हैं।

3. UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) – 2025

भारत

  • दीपावली (दीवाली)
  • 2025 में सूचीबद्ध
  • प्रकाश, सौहार्द और सामुदायिक जीवन का प्रतीक जीवंत परंपरा के रूप में मान्यता
  • भारत सहित विश्वभर में भारतीय प्रवासी समुदायों द्वारा मनाया जाने वाला पर्व
  • इस प्रविष्टियों से UNESCO की जीवित विरासत रूपरेखा में भारत की उपस्थिति और सुदृढ़ हुई।

4. UNESCO मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (2025)

भारत की नई प्रविष्टियाँ

  • भगवद्गीता की पांडुलिपियाँ
  • भरत मुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र

महत्व

  • भारत की कुल प्रविष्टियाँ बढ़कर 14 हो गईं
  • भारत की दार्शनिक, आध्यात्मिक और कलात्मक बौद्धिक विरासत को मान्यता
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए दस्तावेजी धरोहर संरक्षण पर बल दिया गया

5. UNESCO क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क (UCCN) – 2025

भारत

  • लखनऊ – गैस्ट्रोनॉमी का शहर
  • अवधी व्यंजन परंपरा और गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिए मान्यता
  • हैदराबाद के बाद भारत का दूसरा गैस्ट्रोनॉमी शहर

वैश्विक प्रमुख बिंदु (2025)

  • विश्वभर में 58 नए शहर जोड़े गए
  • पहली बार वास्तुकला को रचनात्मक क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया
  • नेटवर्क का विस्तार होकर 100+ देशों के 408 शहरों तक पहुँचा

6. UNESCO वैश्विक जियोपार्क (2025)

वैश्विक अपडेट

  • 16 नए UNESCO वैश्विक जियोपार्क जोड़े गए
  • जियोपार्क की कुल संख्या अब 50 देशों में 229 हो गई
  • ज्वालामुखीय क्षेत्र, जीवाश्म स्थल, पर्वतीय प्रणालियाँ और प्राचीन भू-दृश्य शामिल किए गए

भारत

  • फिलहाल कोई वैश्विक जियोपार्क नहीं, लेकिन एर्रा मट्टी दिब्बालु और दक्कन ट्रैप्स जैसे स्थल भविष्य में प्रबल संभावनाएँ दर्शाते हैं।

रिवाइंड 2025: इस साल संसद ने पास किए ये बड़े कानून

2025 का साल भारत के कानूनों के इतिहास में एक नया अध्याय साबित हुआ। इस साल संसद ने वित्त, कराधान, डिजिटल नियमावली, सामाजिक कल्याण, ऊर्जा, खेल प्रशासन और अल्पसंख्यक मामलों जैसे कई क्षेत्रों में परिवर्तनकारी कानून पास किए। इन कानूनों का मकसद संस्थाओं को आधुनिक बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना, नियमन को मजबूत करना और शासन को विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप ढालना है। नीचे 2025 में पारित मुख्य कानूनों की बिल-वाइज समीक्षा प्रस्तुत है।

वर्ष 2025 के महत्वपूर्ण अधिनियम

1. बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2025

(सबका बीमा, सबकी रक्षा अधिनियम)

  • यह अधिनियम भारत के बीमा क्षेत्र में व्यापक सुधार लेकर आया है।
  • FDI सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया गया है, जिससे पूर्ण विदेशी स्वामित्व की अनुमति मिलती है।

  • उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत किया गया है, पॉलिसीधारकों के सटीक डेटा को अनिवार्य किया गया है और गोपनीयता सुरक्षा बढ़ाई गई है।

  • दावा अस्वीकृति में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।

  • डिजिटल बीमा को बढ़ावा, बीमाकर्ताओं के लिए प्रवेश बाधाओं में कमी और IRDAI को सख्त दंडात्मक शक्तियाँ दी गई हैं।

  • यह अधिनियम “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य का समर्थन करता है।

2. वित्त अधिनियम, 2025

  • वित्त अधिनियम, 2025 को केंद्रीय बजट 2025-26 को वैधानिक आधार प्रदान करता है।
  • एक प्रमुख निर्णय के तहत ऑनलाइन विज्ञापनों पर लगने वाला 6% डिजिटल कर समाप्त कर दिया गया है, जिससे कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी।

  • इसमें ₹50.65 लाख करोड़ के कुल व्यय, GDP के 4.4% तक कम किए गए राजकोषीय घाटे और पूंजीगत व्यय, रक्षा तथा रोजगार के लिए अधिक आवंटन का प्रावधान है।

  • संसद से पारित होने के बाद यह अधिनियम बजट अनुमोदन प्रक्रिया को पूर्ण करता है।

3. आयकर अधिनियम, 2025

  • छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को प्रतिस्थापित करते हुए यह नया कानून प्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल और आधुनिक बनाता है।
  • स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग, अप्रचलित प्रावधानों की समाप्ति और मुकदमेबाजी में कमी इसका मुख्य उद्देश्य है।

  • कर दरें बढ़ाए बिना अनुपालन बोझ कम किया गया है।

  • व्यापक जन-परामर्श के आधार पर तैयार यह अधिनियम करदाताओं और व्यवसायों को अधिक कर-निश्चितता प्रदान करता है।

  • इससे स्वैच्छिक अनुपालन, पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास में वृद्धि की उम्मीद है।

4.VB-G RAM G अधिनियम, 2025

(विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी)

  • यह अधिनियम MGNREGA का स्थान लेते हुए ग्रामीण रोजगार की नई संरचना प्रस्तुत करता है।
  • प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई है, जो पहले 100 दिन थी।

  • सतत आजीविका, परिसंपत्ति निर्माण और विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय पर विशेष जोर है।

  • सरकार इसे विकसित भारत 2047 के अनुरूप आधुनिकीकरण बताती है, हालांकि आलोचक अधिकार-आधारित गारंटी के कमजोर होने की आशंका जताते हैं।

5. ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025

  • यह अधिनियम भारत में ऑनलाइन गेमिंग के लिए पहला राष्ट्रीय नियामक ढांचा स्थापित करता है।
  • ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सामाजिक खेलों को बढ़ावा दिया गया है।

  • ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

  • एक केंद्रीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण नियमन और क्षेत्र के विकास की निगरानी करेगा।

  • लत, वित्तीय नुकसान, धोखाधड़ी और दुरुपयोग जैसी चिंताओं को दूर करने के लिए कड़े दंड प्रावधान किए गए हैं।

6. केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम, 2025 और स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025

  • ये अधिनियम तंबाकू और पान मसाला पर लगने वाले GST क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेते हैं, जिसे 2026 तक समाप्त किया जाना है।
  • नए उत्पाद शुल्क और समर्पित उपकर के माध्यम से हानिकारक वस्तुओं पर उच्च कराधान बनाए रखा गया है।

  • इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा और महामारी-काल के ऋणों के भुगतान में किया जाएगा।

  • यह सुधार वित्तीय निरंतरता सुनिश्चित करता है और हानिकारक उपभोग को हतोत्साहित करता है।

7. विद्युत (संशोधन) अधिनियम, 2025

  • यह अधिनियम विद्युत क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर इसे आधुनिक बनाता है।
  • एक ही क्षेत्र में एक से अधिक वितरण लाइसेंसधारकों की अनुमति दी गई है।

  • लागत-आधारित टैरिफ को अनिवार्य किया गया है और उद्योगों पर क्रॉस-सब्सिडी का बोझ कम किया गया है।

  • किसानों और कम आय वाले उपभोक्ताओं के लिए रियायती दरें सुरक्षित रखी गई हैं।

  • विनियामक आयोगों को सशक्त किया गया है, साझा अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा एकीकरण को बढ़ावा दिया गया है।

8. राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025

  • खेल प्रशासन में यह एक ऐतिहासिक सुधार है।
  • BCCI को RTE अधिनियम के तहत लाया गया है और उसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में मान्यता दी गई है।

  • राष्ट्रीय खेल बोर्ड और खेल न्यायाधिकरण की स्थापना की गई है।

  • खिलाड़ियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व, पदावधि सीमा और पारदर्शी चुनाव अनिवार्य किए गए हैं।

  • यह कानून भारतीय खेल प्रशासन को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाते हुए ओलंपिक लक्ष्यों और खिलाड़ियों के कल्याण को समर्थन देता है।

9. वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025

  • यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करता है।
  • औपनिवेशिक काल के मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को निरस्त किया गया है।

  • वक्फ अधिनियम, 1995 में पारदर्शिता, ऑडिट, डिजिटलीकरण और बेहतर शासन के लिए संशोधन किए गए हैं।

  • बोर्डों में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों की भागीदारी, उच्च न्यायालय में अपील और महिलाओं के विरासत अधिकारों की सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं।

  • जहां इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना है, वहीं इस पर व्यापक बहस भी हुई है।

10. SHANTI अधिनियम, 2025

(Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India)

  • SHANTI अधिनियम भारत के परमाणु शासन ढांचे को मजबूत करता है।
  • परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है।

  • सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ किया गया है और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों को मान्यता दी गई है।

  • परमाणु दायित्व को पर्यावरणीय क्षति तक विस्तारित किया गया है और सीमित निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है।

  • यह अधिनियम 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य के साथ स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को समर्थन देता है, साथ ही सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देता है।

नया साल, नए नियम: 2026 में प्रमुख वित्तीय और नीतिगत बदलाव

2026 की शुरुआत भारत के लिए एक बड़े विनियामक बदलाव की शुरुआत है। 1 जनवरी से बैंकिंग, क्रेडिट स्कोर, वेतन, किसान और घरेलू खर्चों से जुड़े नए नियम लागू होंगे। इन बदलावों का मकसद पारदर्शिता, अनुपालन और वित्तीय दक्षता बढ़ाना है, जो सीधे तौर पर आम लोगों और परिवारों के रोज़मर्रा के आर्थिक फैसलों को प्रभावित करेंगे।

बैंकिंग और क्रेडिट नियम: तेज़ और कड़ा सिस्टम

  • सबसे अहम बदलावों में से एक क्रेडिट रिपोर्टिंग है।
  • अब क्रेडिट ब्यूरो ग्राहक के क्रेडिट डेटा को हर हफ्ते अपडेट करेंगे, पहले यह हर 15 दिन में होता था।
  • इसका मतलब है कि लोन की अदायगी, डिफॉल्ट या क्रेडिट व्यवहार में सुधार तेजी से क्रेडिट स्कोर में दिखेगा, जिससे लोन मंजूरी और ब्याज दरें जल्दी प्रभावित होंगी।
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और HDFC बैंक जैसे बैंकों ने भी उधारी दरें कम कर दी हैं, जिससे कर्ज लेना आसान होगा।

PAN–Aadhaar लिंकिंग और डिजिटल अनुपालन

  • 2026 से PAN–Aadhaar लिंकिंग अधिकांश बैंकिंग और सरकारी सेवाओं के लिए अनिवार्य हो जाएगा।
  • अनुपालन न करने पर बैंक अकाउंट पर रोक या सेवाओं से वंचित होने का खतरा है।
  • साथ ही, डिजिटल भुगतान पर भी कड़ी निगरानी होगी। बैंकों द्वारा UPI लेन-देन की जांच बढ़ेगी, और WhatsApp, Telegram जैसी ऐप्स में SIM वेरिफिकेशन नियम कड़े होंगे, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी और वित्तीय दुरुपयोग रोका जा सके।

वेतन, पे कमीशन और मजदूरी

  • 1 जनवरी, 2026 सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
  • 8वें वेतन आयोग के लागू होने की संभावना है, जो 31 दिसंबर, 2025 को 7वें वेतन आयोग के अंत के बाद लागू होगा।
  • इससे केंद्रीय और राज्य सरकार के विभिन्न सेवाओं में वेतनमान संशोधित हो सकते हैं।
    महंगाई भत्ता में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो महंगाई के खिलाफ राहत प्रदान करेगी।
  • कई राज्य दैनिक मजदूरी और पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी में संशोधन कर सकते हैं।

किसानों के लिए नए अनुपालन नियम

  • किसानों को नए दस्तावेज़ीकरण नियमों का पालन करना होगा।
  • उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में PM-किसान की किश्तें पाने के लिए यूनिक फार्मर आईडी अनिवार्य होगी।
  • इसके बिना भुगतान में देरी या रोक लग सकती है।
  • फसल बीमा कवरेज भी बढ़ रहा है।
  • PM किसान फसल बीमा योजना के तहत जंगली जानवरों से हुए नुकसान की भरपाई होगी, बशर्ते कि नुकसान 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट किया जाए, जिससे किसानों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी।

ईंधन कीमतें और घरेलू बजट

  • 1 जनवरी, 2026 से LPG, व्यावसायिक गैस और विमान ईंधन की कीमतों में संशोधन से घरेलू खर्च बढ़ सकते हैं।
  • इन बदलावों का असर खाना पकाने, परिवहन और हवाई यात्रा की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
  • कुल मिलाकर, परिवारों को बजट ध्यान से बनाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये विनियामक बदलाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं।

दुनिया भर में नया साल: सबसे पहले कौन मनाता है और सबसे आखिर में कौन?

दुनिया भर में नया साल अलग-अलग समय पर मनाया जाता है। इसका कारण पृथ्वी का घूर्णन और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा है। जब कुछ देश नए साल में प्रवेश कर चुके होते हैं, तब कई देशों में अभी आधी रात आने में घंटे बाकी होते हैं। यही समय का अंतर नए साल के जश्न को एक लगातार चलने वाला वैश्विक उत्सव बना देता है, जो लगभग 25 घंटे तक पूरी दुनिया में चलता रहता है।

नया साल अलग-अलग समय पर क्यों मनाया जाता है

  • पृथ्वी 24 घंटे में एक बार घूमती है, लेकिन समय क्षेत्रों के कारण अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय समय अलग होता है।

  • प्रशांत महासागर में स्थित अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा यह तय करती है कि नया कैलेंडर दिन कहाँ से शुरू होगा और कहाँ समाप्त होगा।

  • देशों को अपने समय क्षेत्र चुनने की स्वतंत्रता होती है, इसी वजह से दुनिया भर में नए साल का समय अलग-अलग होता है।

सबसे पहले नया साल मनाने वाला देश

दुनिया में सबसे पहले नया साल मनाने वाला आबाद स्थान किरितिमाती द्वीप है, जो किरिबाती गणराज्य का हिस्सा है।

  • वर्ष 1995 में किरिबाती ने पूरे देश को एक ही तारीख के अंतर्गत लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पूर्व की ओर स्थानांतरित किया।

  • इस फैसले से उसके कुछ द्वीप, जो पहले सबसे आख़िर में नया साल मनाते थे, अब सबसे पहले मनाने वालों में शामिल हो गए।

  • परिणामस्वरूप किरिबाती, अमेरिका के कई हिस्सों से लगभग एक पूरा दिन पहले नए साल में प्रवेश करता है।

किरिबाती के बाद जल्दी नया साल मनाने वाले अन्य स्थान हैं:

  • समोआ

  • टोंगा

  • टोकेलाउ

  • न्यूज़ीलैंड (ऑकलैंड दुनिया का पहला प्रमुख शहर है)

किरिबाती के बाद नया साल मनाने वाले देश

किरिबाती के बाद प्रशांत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देश क्रमशः नए साल का स्वागत करते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • फिजी, मार्शल द्वीपसमूह, नाउरू

  • ऑस्ट्रेलिया

  • जापान, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया

  • चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश

नए साल की गिनती में भारत की स्थिति

भारत में नया साल रात 12:00 बजे (भारतीय मानक समय) पर मनाया जाता है, जो 31 दिसंबर को 3:30 बजे समन्वित सार्वभौमिक समय के बराबर होता है।

  • भारत न तो सबसे पहले है और न ही सबसे आख़िर में

  • यह पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के बाद आता है

  • लेकिन यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका से पहले नए साल में प्रवेश करता है

सबसे आख़िर में नया साल मनाने वाले देश

दुनिया में सबसे अंत में नया साल मनाने वाले आबाद क्षेत्र हैं:

  • अमेरिकन समोआ

  • नियू

  • कुक द्वीपसमूह

ये सभी क्षेत्र दक्षिण प्रशांत महासागर में अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पूर्व में स्थित हैं। जब यहाँ नया साल आता है, तब तक दुनिया के अधिकांश हिस्सों में नया साल शुरू हुए लगभग एक पूरा दिन हो चुका होता है।

रोचक तथ्य

समय क्षेत्रों के अंतर के कारण:

  • जब किरिबाती में नया साल मनाया जा रहा होता है, तब दुनिया के कुछ हिस्सों में अभी भी 30 दिसंबर होता है।

  • पूरी दुनिया में नए साल का परिवर्तन पूरा होने में लगभग 25 घंटे लगते हैं।

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