रानी वेलु नाचियार की जयंती

रानी वेलु नाचियार तमिलनाडु की एक साहसी और दूरदर्शी शासिका थीं, जिन्होंने 1857 के विद्रोह से बहुत पहले ही ब्रिटिश विस्तार के खिलाफ संघर्ष किया। वर्ष 1730 में जन्मी रानी वेलु नाचियार प्रतिरोध, वीरता और महिला नेतृत्व की प्रतीक बनीं। 3 जनवरी को उनकी जयंती पर उन्हें शिवगंगई राज्य को पुनः प्राप्त करने और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध निडर संघर्ष के लिए स्मरण किया जाता है।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

  • 1730 में जन्म, रामनाथपुरम के शाही परिवार में
  • रामनाड (रामनाथपुरम) राज्य के शासक की पुत्री
  • मार्शल आर्ट, घुड़सवारी और हथियारों का प्रशिक्षण
  • उच्च शिक्षित, कई भाषाओं में निपुण
  • शिवगंगई राज्य के शासक से विवाह

उनकी राजसी परवरिश और शिक्षा ने उन्हें उस दौर में नेतृत्व और कूटनीति के लिए तैयार किया, जब राजनीतिक परिस्थितियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं।

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष

  • पति की मृत्यु के बाद राज्य खो दिया
  • ईस्ट इंडिया कंपनी ने शिवगंगई पर नियंत्रण बढ़ाया
  • मैसूर के हैदर अली से सहयोग प्राप्त किया
  • गोपाल नायकर के साथ मिलकर सैन्य रणनीतियाँ बनाई
  • ब्रिटिश सेनाओं को पराजित कर राज्य पुनः प्राप्त किया

वे ब्रिटिशों के विरुद्ध सक्रिय युद्ध करने वाली पहली भारतीय रानी बनीं, जिसने उनकी रणनीतिक कुशलता को उजागर किया।

नवोन्मेषी युद्ध नीति और नेतृत्व

  • महिला सैनिकों सहित सेना का गठन
  • ब्रिटिशों के खिलाफ अपरंपरागत युद्ध रणनीतियाँ अपनाईं
  • शत्रु को कमजोर करने के लिए साहसी अभियानों का समर्थन
  • युद्ध में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहन
  • समावेशी और प्रगतिशील सैन्य नेतृत्व का प्रदर्शन

प्रशासन और शासन व्यवस्था

  • संप्रभुता और क्षेत्रीय स्वायत्तता की रक्षा पर जोर
  • सत्ता पुनः प्राप्ति के बाद स्थानीय प्रशासन को सुदृढ़ किया
  • शिवगंगई राज्य में स्थिरता और जनकल्याण सुनिश्चित किया
  • जनता में एकता और निष्ठा को बढ़ावा दिया
  • कूटनीति और सैन्य शक्ति के बीच संतुलन बनाए रखा
  • उनका शासन साहस, सुशासन और जन-केंद्रित नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण था।

विरासत और ऐतिहासिक महत्व

  • तमिल समाज में “वीरमंगई” (साहसी महिला) के नाम से प्रसिद्ध
  • भारत में औपनिवेशिक विरोध की शुरुआती प्रतीकों में से एक
  • भावी स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों को प्रेरणा
  • महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत के रूप में स्मरणीय
  • इतिहास, साहित्य और जनस्मृति में सम्मानित

रानी वेलु नाचियार आज भी प्रतिरोध, साहस और राष्ट्रीय गौरव की एक अमिट प्रतीक बनी हुई हैं।

Tiger Deaths in india 2025: भारत में 166 बाघ की हुई मौत

भारत, जहाँ दुनिया की सबसे बड़ी बाघ आबादी पाई जाती है, ने 2025 में बाघों की मौतों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार वर्ष के दौरान 166 बाघों की मृत्यु हुई। यह स्थिति बताती है कि कुल बाघ संख्या बढ़ने के बावजूद आवास पर दबाव, क्षेत्रीय संघर्ष और संरक्षण प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

खबर में क्यों?

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत में 166 बाघों की मौत दर्ज की गईं, जो 2024 की तुलना में 40 अधिक हैं। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज होने से बढ़ती बाघ आबादी के कारण स्थान की कमी और क्षेत्रीय संघर्ष पर चिंता बढ़ी है।

2025 के लिए बाघ मृत्यु आँकड़े

  • NTCA के अनुसार, 2025 में कुल 166 बाघों की मृत्यु हुई।
  • इनमें 31 शावक (कब्स) शामिल थे।
  • 2024 में 126 मौतों की तुलना में यह उल्लेखनीय वृद्धि है, जो आबादी बढ़ने के साथ आवासीय दबाव को दर्शाती है।

सबसे अधिक बाघ मौतें दर्ज करने वाले राज्य

  • मध्य प्रदेश: 55 (भारत का “टाइगर स्टेट”)
  • महाराष्ट्र: 38
  • केरल: 13
  • असम: 12

अधिक बाघ आबादी वाले राज्यों में प्रतिस्पर्धा और निगरानी की तीव्रता के कारण मौतों की संख्या भी अधिक दर्ज होती है।

मुख्य कारण: क्षेत्रीय संघर्ष 

  • विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मौतें आवास संतृप्ति के कारण होने वाले क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़ी हैं।
  • बाघों की संख्या बढ़ने के बावजूद वन क्षेत्र और कॉरिडोर सीमित हैं।
  • नए और विस्थापित बाघ क्षेत्र तलाशते समय स्थायी वयस्क बाघों से भिड़ते हैं, जिससे घातक संघर्ष होते हैं—खासतौर पर घनी आबादी वाले अभयारण्यों में।

बाघ आबादी में वृद्धि और स्थान की कमी

  • भारत में बाघों की संख्या 2018 में 2,967 से बढ़कर 2022 में 3,682 हो गई—लगभग 6% वार्षिक वृद्धि।
  • मध्य प्रदेश में यह संख्या 2014 में 308 से बढ़कर 2022 में 785 हो गई।
  • तेज़ वृद्धि ने सीमित वन परिदृश्यों में क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है।

प्राकृतिक मौतें और शिकार (Poaching) के मामले

  • मध्य प्रदेश में 2025 की 55 मौतों में से 38 से अधिक को प्राकृतिक कारणों (विशेषकर शावक/युवा बाघ) से जोड़ा गया।
  • लगभग 10 मामले शिकार से जुड़े पाए गए, जिनमें विद्युत-झटका (electrocution) और अन्य गैर-लक्षित हत्याएँ शामिल हैं।
  • नियम के अनुसार, हर बाघ मृत्यु को शिकार माना जाता है, जब तक जाँच में अन्यथा सिद्ध न हो।

NTCA और राज्य प्रवर्तन की भूमिका

  • NTCA बाघ मृत्यु जाँच के लिए कड़े मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) निर्धारित करता है।
  • मध्य प्रदेश ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स तैनात की है।
  • संगठित शिकार नेटवर्क से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई और अभियोजन किया जा रहा है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ भी शामिल हैं।

पृष्ठभूमि: भारत में बाघ संरक्षण

  • भारत में दुनिया के लगभग 75% बाघ पाए जाते हैं।
  • अखिल भारतीय बाघ गणना हर चार वर्ष में की जाती है।
  • संरक्षण प्रयासों से संख्या बढ़ी है, लेकिन आवास विखंडन और मानव-प्रधान परिदृश्य प्राकृतिक कॉरिडोर को सीमित करते हैं।

NTCA के बारे में

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत वैधानिक निकाय।
  • 2006 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्थापित।

अंतर्राष्ट्रीय मन-शरीर कल्याण दिवस 2026

अंतरराष्ट्रीय मन–शरीर कल्याण दिवस (International Mind–Body Wellness Day) हमें यह याद दिलाता है कि अच्छा स्वास्थ्य केवल शरीर या केवल मन तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों के संतुलित और समन्वित रूप से काम करने से ही संपूर्ण स्वास्थ्य संभव होता है। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव, नींद की कमी और अस्वस्थ जीवनशैली हमारी समग्र सेहत को प्रभावित कर रही है। यह दिवस लोगों को संतुलित जीवन, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सरल जीवनशैली बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करता है, ताकि लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सके।

खबर में क्यों?

अंतरराष्ट्रीय मन–शरीर कल्याण दिवस हर वर्ष 3 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के गहरे संबंध के प्रति जागरूकता बढ़ाना और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना है।

अंतरराष्ट्रीय मन–शरीर कल्याण दिवस क्या है?

  • प्रतिवर्ष 3 जनवरी को मनाया जाता है।
  • इस विचार पर केंद्रित है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
  • प्राचीन कल्याण परंपराओं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से प्रेरित।
  • माइंडफुलनेस, शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ आहार और भावनात्मक संतुलन को प्रोत्साहित करता है।
  • जीवन की गुणवत्ता और समग्र स्वास्थ्य सुधारने वाली दीर्घकालिक आदतें अपनाने पर ज़ोर देता है।

मन–शरीर स्वास्थ्य क्यों महत्वपूर्ण है?

  • आधुनिक जीवनशैली के कारण तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ रहे हैं।
  • मानसिक तनाव से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कमजोर प्रतिरक्षा जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
  • शारीरिक बीमारियाँ भी मूड, नींद और मानसिक स्पष्टता को प्रभावित करती हैं।
  • संतुलन बनाए रखने से लाइफस्टाइल रोगों का खतरा कम होता है और दैनिक कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर का आधार बनता है और इसके विपरीत भी यही सच है।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य कैसे जुड़े हैं?

  • मस्तिष्क और शरीर नर्वस सिस्टम और हार्मोनल सिस्टम के माध्यम से संवाद करते हैं।
  • तनाव से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो प्रतिरक्षा और पाचन को प्रभावित करता है।
  • खराब नींद और पोषण मानसिक स्वास्थ्य को और बिगाड़ते हैं।
  • नियमित व्यायाम और अच्छी सेहत से मूड और एकाग्रता बेहतर होती है।
  • यही संबंध समग्र (होलिस्टिक) और निवारक स्वास्थ्य देखभाल की नींव है।

निवारक स्वास्थ्य जाँच (Preventive Health Tests) की भूमिका

  • लक्षण दिखने से पहले ही स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान में मदद करती हैं।
  • विटामिन की कमी, थायरॉइड समस्याएँ या एनीमिया जैसी स्थितियों का पता लगाती हैं।
  • शारीरिक रोगों को केवल मानसिक बीमारी समझ लेने की गलत पहचान से बचाव करती हैं।
  • समय पर इलाज और जीवनशैली सुधार में सहायक होती हैं।
  • दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम और इलाज की लागत को कम करती हैं।

मन–शरीर कल्याण के लिए प्रमुख स्वास्थ्य जाँच

  • मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग: तनाव, चिंता और अवसाद का आकलन।
  • रक्त जाँच: CBC, विटामिन B12, विटामिन D, थायरॉइड प्रोफाइल।
  • मेटाबॉलिक जाँच: ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, रक्तचाप।
  • जीवनशैली आकलन: नींद की गुणवत्ता, तनाव स्तर और शारीरिक गतिविधि।
  • ये सभी जाँच मिलकर समग्र स्वास्थ्य की पूरी तस्वीर देती हैं।

किन लोगों को ये जाँच करानी चाहिए?

  • लंबे समय से तनाव, थकान या मूड में बदलाव महसूस करने वाले लोग।
  • जिनके परिवार में दीर्घकालिक या मानसिक बीमारियों का इतिहास है।
  • बैठे रहने वाली जीवनशैली वाले कार्यरत पेशेवर।
  • वृद्ध व्यक्ति और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग।
  • वे सभी लोग जो निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल अपनाना चाहते हैं।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को सर्विस के लिए मंज़ूरी मिली: जानें पहला रूट

भारतीय रेलवे लंबी दूरी की रेल यात्रा में एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के सफल ट्रायल और प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) के साथ यह अगली पीढ़ी की ट्रेन रात भर की यात्राओं के लिए तैयार है। उच्च गति, आधुनिक सुविधाएँ और किफायती किराया इसे यात्री सुविधा और रेल तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि बनाते हैं।

खबर में क्यों?

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने अपने सभी ट्रायल, परीक्षण और सुरक्षा प्रमाणन सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि गुवाहाटी–कोलकाता (हावड़ा) मार्ग को इसकी पहली परिचालन रूट के रूप में चुना गया है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के बारे में

  • वंदे भारत स्लीपर, लोकप्रिय वंदे भारत एक्सप्रेस का स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी का संस्करण है।
  • चेयर कार संस्करण के विपरीत, इसे 1,000 किमी से अधिक की यात्राओं के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इसमें स्लीपर बर्थ की सुविधा दी गई है, जिससे यह रात की यात्रा के लिए उपयुक्त बनती है।
  • यह ट्रेन गति, सुरक्षा और यात्री सुविधा पर विशेष जोर देती है।

पहला रूट: गुवाहाटी–कोलकाता कॉरिडोर

  • गुवाहाटी–कोलकाता (हावड़ा) मार्ग को अधिक यात्री मांग और लंबी यात्रा अवधि के कारण चुना गया है।
  • इस रूट पर हवाई किराया अक्सर ₹6,000 से ₹10,000 तक होता है।
  • वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इससे कहीं किफायती विकल्प प्रदान करती है।
  • इससे मध्यम वर्ग और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए प्रीमियम रेल यात्रा सुलभ होगी।

किफायती किराया संरचना

प्रस्तावित किराए यात्रियों की जेब को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं—

  • 3AC: लगभग ₹2,300
  • 2AC: लगभग ₹3,000
  • फर्स्ट AC: लगभग ₹3,600

ये किराए इसे हवाई यात्रा की तुलना में कम खर्चीला, लेकिन पारंपरिक ट्रेनों से काफी अधिक आरामदायक बनाते हैं।

उच्च गति ट्रायल और प्रमाणन

  • अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल कोटा–नागदा सेक्शन पर रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) की निगरानी में किया गया।
  • ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की।
  • ब्रेकिंग सिस्टम, राइड स्टेबिलिटी, वाइब्रेशन कंट्रोल, आपात प्रतिक्रिया और समग्र सुरक्षा की गहन जांच की गई।
  • सभी मानक संतोषजनक पाए गए, जिसके बाद इसे आधिकारिक मंजूरी मिली।

मुख्य विशेषताएँ और तकनीक

16 कोच की इस ट्रेन में विश्वस्तरीय सुविधाएँ हैं—

  • आरामदायक स्लीपर बर्थ
  • उन्नत सस्पेंशन सिस्टम
  • ऑटोमैटिक दरवाजे
  • आधुनिक शौचालय

डिजिटल पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम

सीसीटीवी निगरानी

सुरक्षा सुविधाओं में शामिल हैं—

  • कवच (KAVACH) ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम
  • क्रैशवर्थी कपलर
  • अग्नि पहचान और दमन प्रणाली
  • रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग

भारत में वंदे भारत ट्रेनें

  • वंदे भारत श्रृंखला मेक इन इंडिया पहल के तहत रेल तकनीक में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
  • 2019 में पहली वंदे भारत एक्सप्रेस के बाद से इन ट्रेनों ने सेमी-हाई-स्पीड रेल यात्रा को नई पहचान दी है।
  • स्लीपर संस्करण इस सफलता को लंबी दूरी और रात्रिकालीन यात्रा तक विस्तार देता है।

भविष्य की विस्तार योजनाएँ

  • रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष के अंत तक लगभग 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें रेल नेटवर्क में शामिल की जाएंगी।
  • अगले वर्ष इनका विस्तार और तेज होने की संभावना है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में लंबी दूरी के मार्गों को आधुनिक रेल तकनीक का लाभ मिलेगा।

तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 1 फरवरी से लागू होगा

सरकार ने तंबाकू और पान मसाला उत्पादों के कराधान में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। 1 फरवरी से एक नई कर व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत मौजूदा क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) को हटाकर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और एक नया उपकर लगाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य तथाकथित सिन गुड्स पर अधिक कर लगाकर राजस्व बढ़ाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को मजबूती देना है।

खबर में क्यों?

केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से अधिसूचना जारी कर बताया है कि 1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Health and National Security Cess) लगाया जाएगा। ये नए कर मौजूदा क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेंगे।

सरकार ने क्या अधिसूचित किया है?

सरकार ने कर प्रणाली में दो प्रमुख बदलाव किए हैं—

  • तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
  • पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर
  • ये दोनों कर GST के अतिरिक्त लगाए जाएंगे और संसदीय मंजूरी के बाद 1 फरवरी से प्रभावी होंगे।

तंबाकू और पान मसाला पर नई कर दरें

1 फरवरी से कर संरचना इस प्रकार होगी—

  • पान मसाला, सिगरेट, तंबाकू एवं समान उत्पाद: 40% GST
  • बीड़ी: 18% GST

GST के अलावा—

  • पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर
  • तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा।
  • क्षतिपूर्ति उपकर का स्थानापन्न

नए उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेंगे, जो पहले GST के तहत सिन गुड्स पर लगाया जाता था। क्षतिपूर्ति उपकर का उद्देश्य राज्यों को GST लागू होने के बाद हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करना था। अब तंबाकू और पान मसाला पर कराधान एक नए तंत्र के तहत किया जाएगा।

कानूनी और संसदीय पृष्ठभूमि

दिसंबर में संसद ने दो विधेयकों को मंजूरी दी, जिनके तहत—

  • पान मसाला के निर्माण पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया जा सकेगा।
  • तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जा सकेगा।
  • इन्हीं विधेयकों के आधार पर 1 फरवरी से नई कर व्यवस्था लागू की जा रही है।

भारत में सिन गुड्स पर कराधान: पृष्ठभूमि

तंबाकू, शराब और पान मसाला जैसे सिन गुड्स पर भारत में भारी कर लगाए जाते हैं ताकि—

  • स्वास्थ्य जोखिमों के कारण इनके उपभोग को हतोत्साहित किया जा सके।
  • सरकार के लिए अधिक राजस्व जुटाया जा सके।
  • सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी लागतों की भरपाई की जा सके।
  • GST व्यवस्था के तहत भी इन उत्पादों पर उच्च दरें और उपकर/उत्पाद शुल्क लगाया जाता रहा है।

गिनी में सैन्य तख्तापलट करवाने वाले नेता ममाडी डौमबौया ने जीता राष्ट्रपति चुनाव

पश्चिम अफ्रीका के देश गिनी में राजनीतिक स्थिति ने एक निर्णायक मोड़ लिया है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से देश का नेतृत्व कर रहे सैन्य नेता ममाडी डौमबौया राष्ट्रपति चुनाव जीतकर सत्ता में आ गए हैं। प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा चुनाव बहिष्कार किए जाने के बीच हुए इस चुनाव के परिणामों ने लोकतांत्रिक संक्रमण और नागरिक शासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

खबर में क्यों?

गिनी के जुंटा प्रमुख ममाडी डौमबौया ने दिसंबर 2025 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की। चुनाव लड़ने का उनका फैसला नागरिक शासन बहाल करने के पहले किए गए वादे से पीछे हटने के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव को अनुचित बताते हुए इसका बहिष्कार किया।

गिनी में राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि

  • सितंबर 2021 में ममाडी डौमबौया ने सैन्य तख्तापलट कर गिनी के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को सत्ता से हटा दिया।
  • तख्तापलट के बाद संविधान निलंबित कर दिया गया और नागरिक शासन की ओर संक्रमण का आश्वासन दिया गया।
  • इस अवधि में राजनीतिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाया गया, विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया गया और कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार या निर्वासन में भेज दिया गया।

चुनाव प्रक्रिया और परिणाम

  • राष्ट्रपति चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे।
  • नए संवैधानिक प्रावधानों के तहत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया।
  • गिनी के चुनाव आयोग के अनुसार, ममादी डूम्बूया को 86.72% वोट मिले, जिससे उन्हें दूसरे दौर की आवश्यकता के बिना ही जीत मिल गई।
  • आधिकारिक तौर पर मतदान प्रतिशत 80.95% बताया गया, हालांकि विपक्षी समूहों ने इस आंकड़े पर सवाल उठाए।

नए संविधान की भूमिका

  • सितंबर 2025 में गिनी में जनमत संग्रह के माध्यम से नया संविधान अपनाया गया।
  • इस संविधान ने सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा के सदस्यों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी, जिससे डौमबौया की उम्मीदवारी का रास्ता साफ हुआ।
  • राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया गया, जिसे एक बार नवीनीकृत किया जा सकता है।
  • यह संवैधानिक बदलाव विपक्ष के लिए सबसे बड़ा विवाद का विषय बन गया।

पश्चिम अफ्रीका में सैन्य तख्तापलट

  • हाल के वर्षों में पश्चिम अफ्रीका में माली, बुर्किना फासो और नाइजर जैसे देशों में सैन्य तख्तापलट देखने को मिले हैं।
  • ऐसे संक्रमण अक्सर लोकतंत्र बहाल करने के वादों के साथ शुरू होते हैं, लेकिन जब सैन्य नेता चुनावों के जरिए सत्ता बनाए रखते हैं तो आलोचना तेज हो जाती है।
  • गिनी का मामला क्षेत्र में स्थिरता और लोकतांत्रिक शासन के बीच संतुलन की व्यापक चुनौती को दर्शाता है।

केंद्र सरकार ने केरल, पटना और मेघालय हाई कोर्ट के लिए नए चीफ जस्टिस नियुक्त किए

केंद्र सरकार ने भारत के तीन उच्च न्यायालयों से जुड़े महत्वपूर्ण न्यायिक नियुक्ति और स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर केरल, पटना और मेघालय उच्च न्यायालयों के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की अधिसूचना जारी की गई है, जिससे उच्च न्यायपालिका में नेतृत्व की निरंतरता और सुचारु कार्यप्रणाली सुनिश्चित होगी।

खबर में क्यों?

केंद्र सरकार ने केरल, पटना और मेघालय उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण को अधिसूचित किया है। ये निर्णय दिसंबर 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुरूप लिए गए हैं।

नियुक्तियों का संवैधानिक आधार

  • इन नियुक्तियों और स्थानांतरणों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 222 और अनुच्छेद 217 के तहत किया गया है।
  • अनुच्छेद 222: राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण करने की शक्ति देता है।
  • अनुच्छेद 217: उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं, की नियुक्ति से संबंधित प्रावधान करता है।

केरल उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश

  • न्यायमूर्ति सौमेन सेन, जो वर्तमान में मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं, को स्थानांतरित कर केरल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
  • वे 9 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन मधुकर जमदार के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।

पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति

  • न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू, जो इस समय ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, को पटना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
  • उनकी नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी, जिससे बिहार में न्यायिक नेतृत्व को मजबूती मिलेगी।

मेघालय उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश

  • न्यायमूर्ति सौमेन सेन के स्थानांतरण के बाद, न्यायमूर्ति रेवती प्रशांत मोहिते डेरे, जो बॉम्बे उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, को मेघालय उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
  • इससे पूर्वोत्तर राज्य में न्यायिक प्रशासन की निरंतरता बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका

  • ये सिफारिशें 18 दिसंबर 2025 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में की गई थीं।
  • कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना तथा योग्यता आधारित नियुक्तियाँ और स्थानांतरण सुनिश्चित करना है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया

  • अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश और राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद की जाती है।
  • मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामलों में, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी परामर्श किया जाता है।

परामर्श प्रक्रिया (Consultation Process)

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश भारत के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों वाले कॉलेजियम द्वारा की जाती है।
  • प्रस्ताव की शुरुआत संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा अपने दो वरिष्ठ सहयोगियों से परामर्श के बाद की जाती है।
  • इसके बाद प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा जाता है, जो राज्यपाल के माध्यम से इसे केंद्रीय कानून मंत्री को अग्रेषित करते हैं।
  • नीति के अनुसार, किसी राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश आमतौर पर उसी राज्य के बाहर से नियुक्त किया जाता है।
  • अंतिम निर्णय कॉलेजियम द्वारा लिया जाता है।

गुजरात में ऊर्जा अवसंरचना पर साइबर हमलों से निपटने के लिए समिति का गठन

डिजिटल तकनीकों जैसे स्मार्ट मीटर, स्मार्ट ग्रिड और स्वचालित नियंत्रण प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ बिजली क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना साइबर खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई है। इस जोखिम को पहचानते हुए गुजरात सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य ने तैयारियों की समीक्षा, प्रणालियों में सुधार और महत्वपूर्ण बिजली अवसंरचना की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष समितियों का गठन किया है।

खबर में क्यों?

गुजरात सरकार ने स्मार्ट ग्रिड, SCADA प्रणालियों और डिजिटल बिजली आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े बढ़ते साइबर जोखिमों को देखते हुए राज्य की ऊर्जा अवसंरचना को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए 11 सदस्यीय कोर कमेटी और 19 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया है।

निर्णय के बारे में

  • यह पहल गुजरात के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (EPD) द्वारा की गई है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा करना है।
  • यह फैसला 24×7 बिजली आपूर्ति प्रणालियों पर साइबर खतरों को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।
  • बिजली क्षेत्र में बढ़ती डिजिटलाइजेशन से साइबर जोखिमों का खतरा भी बढ़ा है।

गठित प्रमुख समितियाँ

कोर कमेटी

  • 11 सदस्य शामिल
  • ऊर्जा क्षेत्र में समग्र साइबर सुरक्षा रणनीति की समीक्षा
  • नीतियों, तैयारियों और सिस्टम की मजबूती का आकलन
  • दीर्घकालिक सुधारों और रूपरेखाओं का सुझाव

टास्क फोर्स

  • 19 सदस्य शामिल
  • परिचालन और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान
  • साइबर सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन में सहायता
  • प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और समन्वय गतिविधियों में सहयोग

मुख्य जिम्मेदारियाँ

कोर कमेटी और टास्क फोर्स—

  • ऊर्जा क्षेत्र में आईटी और साइबर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगी।
  • साइबर घटनाओं से निपटने की तैयारियों का आकलन करेंगी।
  • साइबर सुरक्षा नीति में सुधार के सुझाव देंगी।
  • मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करेंगी।
  • साइबर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगी।

क्षमता निर्माण पर फोकस

  • साइबर ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • अधिकारियों और संस्थानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
  • शैक्षणिक संस्थानों और साइबर विशेषज्ञों के साथ साझेदारी विकसित की जाएगी।
  • राज्य और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

आंठवा पे कमीशन गठित करने वाला सबसे पहला राज्य बना असम

असम ने सरकारी वेतन सुधारों के क्षेत्र में पहल करते हुए देश का पहला राज्य बनने का गौरव हासिल किया है, जिसने अपनी 8वीं राज्य वेतन आयोग (8th State Pay Commission) का गठन किया है। यह सक्रिय निर्णय 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 1 जनवरी 2026 को समाप्त होने से पहले लिया गया है। इस कदम ने राज्य कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य राज्यों का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोग का समय से पहले गठन असम सरकार की वेतन संशोधन प्रक्रिया को तेज करने की मंशा को दर्शाता है।

खबर में क्यों?

असम ने अपनी 8वीं राज्य वेतन आयोग का गठन किया है और ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इस निर्णय की घोषणा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने की। यह फैसला 7वें वेतन आयोग के 1 जनवरी 2026 को समाप्त होने से पहले लिया गया है।

8वीं राज्य वेतन आयोग के बारे में

वेतन आयोग सरकार द्वारा निम्नलिखित की समीक्षा और सिफारिश के लिए गठित किया जाता है—

  • सरकारी कर्मचारियों के वेतन
  • भत्ते और सेवा लाभ
  • सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन

असम का 8वां राज्य वेतन आयोग वर्तमान 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था का स्थान लेगा और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई तथा राज्य की वित्तीय क्षमता के आधार पर नए वेतन ढांचे की सिफारिश करेगा।

घोषणा और नेतृत्व

  • आयोग के गठन की घोषणा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने की।
  • पूर्व असम मुख्य सचिव सुभाष दास को 8वें राज्य वेतन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इस कदम के साथ असम ने अन्य राज्यों और यहाँ तक कि केंद्र सरकार से भी बढ़त बना ली है, जहाँ 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है।

राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्व

असम का यह प्रारंभिक कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  • इससे राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को शीघ्र स्पष्टता मिलेगी।
  • अन्य राज्यों की तुलना में सिफारिशें जल्दी प्रस्तुत होने की संभावना बढ़ेगी।
  • यदि सरकार शीघ्र स्वीकृति देती है, तो संशोधित वेतन और पेंशन सामान्य से पहले लागू हो सकते हैं।
  • हालाँकि, विशेषज्ञों के अनुसार वेतन आयोग को आमतौर पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने में लगभग 18 महीने का समय लगता है।

पृष्ठभूमि: भारत में वेतन आयोग

  • वेतन आयोग केंद्र और राज्यों द्वारा समय-समय पर गठित किए जाते हैं।
  • वर्तमान में 7वां वेतन आयोग लागू है, जिसका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 को समाप्त होगा।
  • वेतन आयोग की सिफारिशें स्वतः लागू नहीं होतीं, इसके लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।
  • वेतन संशोधन अक्सर पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू किए जाते हैं और बकाया राशि बाद में दी जाती है।

आगे क्या?

सामान्य प्रक्रिया के अनुसार—

  • 8वां राज्य वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट देने में लगभग 18 महीने ले सकता है।
  • यद्यपि 1 जनवरी 2026 को संदर्भ तिथि माना जाएगा, वास्तविक क्रियान्वयन 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकता है।
  • असम की यह शुरुआती पहल उसके कर्मचारियों को अन्य राज्यों की तुलना में संभावित लाभ दिला सकती है।

गगनयान और आर्टेमिस-II: 2026 के ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष मिशन

वर्ष 2026 वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दो महत्वपूर्ण मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों की तैयारी कर रहे हैं। जहाँ भारत का गगनयान मिशन स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणालियों का परीक्षण करेगा, वहीं नासा का आर्टेमिस-II मिशन पाँच दशकों से अधिक समय बाद मनुष्यों को चंद्रमा से आगे ले जाएगा और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की दिशा तय करेगा।

खबर में क्यों?

  • भारत का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) वर्ष 2026 में होने वाले ऐतिहासिक मिशनों की तैयारी कर रहे हैं।
    ISRO का मानव रहित गगनयान-G1 मिशन और NASA का आर्टेमिस-II मिशन भविष्य के मानव अंतरिक्ष और गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए तकनीकी आधार तैयार करेंगे।

गगनयान मिशन: भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम

गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता विकसित करना है, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष में भेजना और वापस लाना शामिल है।

  • पहला मानव रहित कक्षीय परीक्षण मिशन G1, अस्थायी रूप से मार्च 2026 में प्रस्तावित है।
  • इसे LVM3 (गगनयान-Mk3) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए ह्यूमन-रेटेड बनाया गया है।

व्योममित्रा की भूमिका और मिशन के उद्देश्य

  • व्योममित्रा नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट G1 मिशन में शामिल होगा।
  • यह अंतरिक्ष यात्रियों के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं का अनुकरण करेगा।
  • मिशन में जीवन समर्थन प्रणाली, क्रू मॉड्यूल की सुरक्षा, संचार प्रणाली, पुनःप्रवेश प्रक्रिया और समुद्र में रिकवरी तंत्र का परीक्षण किया जाएगा।
  • सफलता की स्थिति में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता है।

नासा का आर्टेमिस-II मिशन

  • आर्टेमिस-II मिशन 5 फरवरी 2026 से पहले नहीं निर्धारित है।
  • इसमें चार अंतरिक्ष यात्री होंगे, जो ओरियन अंतरिक्ष यान में यात्रा करेंगे, जिसे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा।
  • यह 1972 में अपोलो-17 के बाद पहला मानव मिशन होगा जो निम्न पृथ्वी कक्षा से आगे जाएगा, और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण की वापसी को चिह्नित करेगा।

आर्टेमिस-II के प्रमुख लक्ष्य

  • लगभग 10 दिनों का चंद्रमा के चारों ओर उड़ान मिशन।
  • अंतरिक्ष यान चंद्रमा से 5,000 समुद्री मील से अधिक दूरी तक जाएगा, जो अब तक की सबसे दूर मानव यात्रा होगी।
  • डीप-स्पेस नेविगेशन, विकिरण सुरक्षा, दीर्घकालिक जीवन समर्थन प्रणालियों और मिशन संचालन का परीक्षण।
  • यह भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों और मंगल अभियानों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए महत्व

  • गगनयान और आर्टेमिस-II, मिलकर एक बहुध्रुवीय (Multipolar) अंतरिक्ष युग की शुरुआत का संकेत देते हैं।
  • भारत निम्न पृथ्वी कक्षा में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जबकि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण का नेतृत्व कर रहा है।
  • वर्ष 2026 में विकसित होने वाली तकनीकें भविष्य में अंतरिक्ष स्टेशन, निजी मिशन, चंद्र आधार और अंतरग्रहीय यात्रा को प्रभावित करेंगी।

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