अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026: गौरव, संस्कृति और प्रगति

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 (Arunachal Pradesh Foundation Day 2026) 20 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन वर्ष 1987 में अरुणाचल प्रदेश के भारत के 24वें राज्य के रूप में गठन की स्मृति में मनाया जाता है। “उगते सूरज की भूमि” (Land of the Rising Sun) के नाम से प्रसिद्ध अरुणाचल प्रदेश भारत का वह पहला क्षेत्र है जहाँ सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुँचती हैं। देश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित यह राज्य भूटान, चीन और म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 राज्य के सामरिक महत्व, सांस्कृतिक विविधता और केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करता है।

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026: तिथि और परिचय

  • तिथि: शुक्रवार, 20 फरवरी 2026
  • यह दिन 1987 में केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की स्मृति में मनाया जाता है।
  • राजधानी: ईटानगर
  • वर्तमान में राज्य में 26 जिले हैं।

इस अवसर पर आधिकारिक समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड और जनसभाएँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें राज्य की विरासत और उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रमुख घटनाएँ

  • 1826: यांडाबू की संधि के बाद प्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध के पश्चात क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में आया।
  • 1914: शिमला समझौते के तहत तिब्बत और नेफा (NEFA) के बीच मैकमोहन रेखा निर्धारित की गई।
  • 1947: स्वतंत्रता के बाद नेफा असम प्रशासन के अधीन आया।
  • 1972: नेफा का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश रखा गया और इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
  • 1987: 55वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 के तहत “अरुणाचल प्रदेश राज्य अधिनियम” के माध्यम से यह भारत का 24वां राज्य बना।

यह परिवर्तन प्रशासनिक विकास और राजनीतिक आकांक्षाओं की लंबी प्रक्रिया का परिणाम था।

स्थापना दिवस का महत्व

  • अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस गर्व और आत्मचिंतन का दिन है।
  • यह स्वशासन के लिए लोगों के संघर्ष और आकांक्षाओं का सम्मान करता है।
  • आधारभूत संरचना, शिक्षा, पर्यटन और संपर्क क्षेत्र में हुई प्रगति का उत्सव मनाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण राज्य भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह विविध जनजातीय समुदायों के बीच एकता को मजबूत करता है।

सांस्कृतिक उत्सव और परंपराएँ

  • इस दिन राज्य की 26 प्रमुख जनजातियों और 100 से अधिक उप-जनजातियों की समृद्ध संस्कृति प्रदर्शित की जाती है।
  • पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत
  • सांस्कृतिक प्रदर्शनी
  • विकास संबंधी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भाषण
  • राज्य के प्रमुख त्योहार जैसे लोसार, सोलुंग, और न्योकुम इसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
  • यह उत्सव अरुणाचल प्रदेश की पहचान को एक सांस्कृतिक रूप से विविध और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य के रूप में सुदृढ़ करता है।

भारत एआई शिखर सम्मेलन 2026 में ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएँ’ लॉन्च

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने “न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स” की घोषणा की। यह पहल अग्रणी वैश्विक एआई कंपनियों और भारत के घरेलू नवोन्मेषकों को एक साथ लाती है, जिसका उद्देश्य समावेशी, बहुभाषी और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को बढ़ावा देना है। इन प्रतिबद्धताओं का लक्ष्य मानव सुरक्षा, समानता और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को एआई विकास के केंद्र में रखना है।

भारत की एआई रणनीति: लोकतंत्रीकरण, विस्तार और संप्रभुता

अश्विनी वैष्णव ने भारत की एआई रणनीति को तीन स्तंभों पर आधारित बताया—

  1. प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण
  2. जनसंख्या स्तर पर तैनाती
  3. एआई प्रणालियों में राष्ट्रीय संप्रभुता

उन्होंने बताया कि भारत एआई स्टैक की सभी पाँच परतों पर काम कर रहा है—

  • एप्लिकेशन
  • मॉडल
  • कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर
  • प्रतिभा विकास
  • ऊर्जा समर्थन

मुख्य ध्यान स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के वास्तविक उपयोग पर है।

न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स क्या हैं?

यह प्रतिबद्धताएँ वैश्विक और भारतीय एआई कंपनियों द्वारा की गई स्वैच्छिक सहयोगात्मक घोषणाएँ हैं।

भाग लेने वाले भारतीय संगठनों में शामिल हैं—

  • Sarvam AI
  • BharatGen
  • Gnani.ai
  • Soket AI

इनके साथ अग्रणी वैश्विक एआई कंपनियाँ भी शामिल हैं, ताकि सांस्कृतिक विविधता और समानता के अनुरूप जिम्मेदार एआई को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रतिबद्धता 1: वास्तविक दुनिया में एआई उपयोग की समझ को बढ़ाना

पहली प्रतिबद्धता का उद्देश्य वास्तविक एआई उपयोग से संबंधित अनाम और समेकित (aggregated) डेटा आधारित अंतर्दृष्टि विकसित करना है।

मुख्य लक्ष्य—

  • एआई का रोजगार और कौशल पर प्रभाव का अध्ययन
  • उत्पादकता में वृद्धि का विश्लेषण
  • डेटा-आधारित नीति निर्माण को समर्थन
  • आर्थिक परिवर्तन के रुझानों का आकलन

इस पहल का उद्देश्य सरकारों को एआई शासन (AI Governance) के लिए सूचित रणनीतियाँ विकसित करने में सहायता देना है।

प्रतिबद्धता 2: बहुभाषी और संदर्भ-संवेदी एआई को मजबूत करना

दूसरी प्रतिबद्धता बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील एआई प्रणालियों पर केंद्रित है।

सहभागी संगठन—

  • कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं में डेटा सेट विकसित करेंगे
  • विभिन्न संस्कृतियों के लिए मूल्यांकन मानक बनाएंगे
  • संदर्भ-आधारित एआई प्रदर्शन में सुधार करेंगे
  • उपकरणों और पद्धतियों में लचीलापन बनाए रखेंगे

यह कदम विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में एआई की पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ भाषाई विविधता अधिक है।

ये एआई प्रतिबद्धताएँ वैश्विक स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण हैं?

न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स का उद्देश्य—

  • एआई विकास को समावेशी बनाना
  • नैतिक और जिम्मेदार एआई को बढ़ावा देना
  • बहुभाषी प्रणालियों में पूर्वाग्रह कम करना
  • विश्वभर में समान एआई पहुंच सुनिश्चित करना

भारत स्वयं को “मनुष्यों के लिए, मनुष्यों द्वारा, मनुष्यों का एआई” के समर्थक नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।

भारत का एआई स्टैक दृष्टिकोण

भारत का एआई स्टैक पाँच एकीकृत परतों को शामिल करता है—

  • नागरिकों के लिए एप्लिकेशन
  • नवाचार के लिए एआई मॉडल
  • विस्तार के लिए कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर
  • स्थिरता के लिए कुशल प्रतिभा
  • लचीलापन के लिए ऊर्जा क्षमता

इन सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण कर भारत बाहरी निर्भरता से बचते हुए समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देना चाहता है।

मुख्य बिंदु

  • कार्यक्रम: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026
  • घोषणा: न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स
  • घोषणा करने वाले: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
  • फोकस क्षेत्र: वास्तविक एआई उपयोग, बहुभाषी एआई मूल्यांकन
  • एआई स्टैक परतें: एप्लिकेशन, मॉडल, कंप्यूट, प्रतिभा, ऊर्जा
  • भारतीय सहभागी कंपनियाँ: Sarvam AI, BharatGen, Gnani.ai, Soket AI

2026 का बिजनेस माइलस्टोन: राजस्व की दौड़ में अमेज़न ने वॉलमार्ट को पीछे छोड़ा

वर्ष 2026 में एक ऐतिहासिक कॉर्पोरेट उपलब्धि दर्ज हुई, जब Amazon ने वार्षिक राजस्व के आधार पर Walmart को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का स्थान हासिल कर लिया। अमेज़न ने वित्त वर्ष 2025 में 717 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जबकि वॉलमार्ट का राजस्व 31 जनवरी 2026 को समाप्त 12 महीनों में 713.2 अरब डॉलर रहा। वॉलमार्ट एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक राजस्व सूची में शीर्ष पर रहा था।

2025 का राजस्व तुलना: Amazon बनाम Walmart

  • Amazon: 717 अरब डॉलर (FY 2025)
  • Walmart: 713.2 अरब डॉलर (31 जनवरी 2026 तक)
  • यह अंतर भले ही मामूली दिखे, लेकिन वैश्विक कॉर्पोरेट परिदृश्य में यह एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।

अमेज़न शीर्ष पर कैसे पहुँचा?

1994 में Jeff Bezos द्वारा एक ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में स्थापित अमेज़न ने समय के साथ कई क्षेत्रों में आक्रामक विस्तार किया।

प्रमुख विकास कारक

  • ई-कॉमर्स का व्यापक विस्तार
  • Amazon Web Services (AWS) की तेज़ वृद्धि
  • एआई-संचालित डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर
  • वैश्विक स्तर पर डिजिटल उपभोक्ता रुझान

पिछले दशक में अमेज़न की राजस्व वृद्धि दर वॉलमार्ट की तुलना में लगभग 10 गुना तेज रही।

AWS और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका

अमेज़न की सफलता में उसके क्लाउड कंप्यूटिंग डिवीजन Amazon Web Services (AWS) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यदि AWS को अलग कर दिया जाए—

  • 2025 में अमेज़न का राजस्व केवल 588 अरब डॉलर होता।

इससे स्पष्ट है कि अमेज़न की बढ़त का मुख्य आधार है—

  • एआई युग में डेटा सेंटर की मांग
  • क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाएँ
  • एंटरप्राइज़ डिजिटल परिवर्तन

वॉलमार्ट क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र में सक्रिय नहीं है, जिससे अमेज़न को रणनीतिक लाभ मिला।

रिटेल मुकाबला: भौतिक बनाम डिजिटल

  • अमेज़न को प्रति माह लगभग 2.7 अरब वेबसाइट और ऐप विज़िट मिलती हैं।
  • वॉलमार्ट के पास विश्वभर में 10,000 से अधिक स्टोर और शॉपिंग क्लब हैं।

रोचक तथ्य:

  • वॉलमार्ट ई-कॉमर्स में तेजी से सुधार कर रहा है।
  • अमेज़न ने 2017 में Whole Foods Market का अधिग्रहण किया, लेकिन भौतिक रिटेल विस्तार में अपेक्षाकृत धीमा रहा।

इससे स्पष्ट होता है कि अमेज़न की राजस्व जीत केवल रिटेल नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी-चालित वृद्धि का परिणाम है।

बाज़ार मूल्य बनाम राजस्व

सबसे अधिक राजस्व होना, सबसे अधिक मूल्यवान कंपनी होने के समान नहीं है।

वर्तमान में—

  • Nvidia लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है।
  • अमेज़न का बाज़ार मूल्य Nvidia से आधे से भी कम है।
  • वॉलमार्ट का मूल्यांकन इससे काफी कम है।

इसलिए राजस्व नेतृत्व कंपनी के पैमाने (scale) को दर्शाता है, न कि अनिवार्य रूप से लाभप्रदता या बाज़ार पूंजीकरण को।

जेफ बेजोस और वैश्विक संपत्ति रैंकिंग

  • Jeff Bezos ने 2017 में Bill Gates को पीछे छोड़कर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान प्राप्त किया था।
  • वर्तमान में वे लगभग 228 अरब डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ वैश्विक सूची में चौथे स्थान पर हैं, जिनकी अधिकांश संपत्ति अमेज़न के शेयरों से जुड़ी है।

IPC ने प्रतिबंध हटाया: रूसी और बेलारूसी खिलाड़ी मिलान-कोर्टिना 2026 में भाग लेंगे

कई वर्षों के प्रतिबंधों के बाद, अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) ने आधिकारिक रूप से मिलान-कोर्टिना 2026 शीतकालीन पैरालंपिक के लिए रूसी खिलाड़ियों पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। अब रूस और बेलारूस के खिलाड़ी अपने राष्ट्रीय ध्वज के तहत प्रतिस्पर्धा करेंगे, और यदि वे पदक जीतते हैं तो उनके राष्ट्रीय गान भी बजाए जाएंगे।

यह 2022 के बाद एक बड़ा बदलाव है, जब यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण रूस पर प्रतिबंध लगाया गया था। तब से रूस और बेलारूस के खिलाड़ी केवल तटस्थ (Neutral) प्रतिभागियों के रूप में बिना राष्ट्रीय प्रतीकों के भाग ले सकते थे।

मिलान-कोर्टिना 2026 के लिए कोटा स्लॉट की पुष्टि

आईपीसी ने एथलीट कोटा वितरण की स्पष्ट घोषणा की है।

रूस के लिए पुष्टि किए गए स्लॉट

  • कुल: 6 खिलाड़ी
  • 2 – पैरा-अल्पाइन स्कीइंग (1 पुरुष, 1 महिला)
  • 2 – पैरा-क्रॉस कंट्री स्कीइंग (1 पुरुष, 1 महिला)
  • 2 – पैरा-स्नोबोर्ड (दोनों पुरुष)

बेलारूस के लिए पुष्टि किए गए स्लॉट

  • कुल: 4 खिलाड़ी
  • सभी क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में (1 पुरुष, 3 महिलाएँ)

अधिकारियों ने पुष्टि की कि इन खिलाड़ियों को अन्य देशों के खिलाड़ियों की तरह ही माना जाएगा, जिसमें ध्वज प्रदर्शन और पदक समारोह में राष्ट्रीय गान शामिल है।

प्रतिबंध क्यों लगाया गया था?

रूस पर लगे प्रतिबंध दो प्रमुख कारणों से जुड़े थे—

  • 2014 सोची ओलंपिक के बाद सामने आया राज्य-प्रायोजित डोपिंग घोटाला।
  • 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष, जिसे ओलंपिक संघर्षविराम (Olympic Truce) के उल्लंघन के रूप में देखा गया।
  • इसके बाद से रूस की भागीदारी कई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में सीमित या तटस्थ रूप में रही।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह निर्णय केवल पैरालंपिक खेलों पर लागू होता है। 2026 शीतकालीन ओलंपिक के लिए प्रतिबंध अलग हैं।

मिलान-कोर्टिना 2026 में नजर रखने योग्य खिलाड़ी

एलेक्सी बुगाएव: तीन बार के पैरालंपिक अल्पाइन स्कीइंग चैंपियन और रूस के सबसे सफल शीतकालीन खिलाड़ियों में से एक।

इवान गोलुबकोव और अनास्तासिया बागियन: दोनों क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं और पदक की संभावनाएँ रखते हैं।

व्लादिमीर सेमिरुन्नी का संघ परिवर्तन

व्लादिमीर सेमिरुनिय ने अलग रास्ता अपनाया—

  • येकातेरिनबर्ग में जन्म
  • 2023 में पोलैंड स्थानांतरित
  • 2025 में आधिकारिक रूप से संघ परिवर्तन
  • अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग संघ द्वारा 14 महीने का प्रतिबंध

हाल ही में उन्होंने मिलान में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीता, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कुछ खिलाड़ियों ने प्रतिबंधों के बीच अलग रणनीति अपनाई।

इस निर्णय का वैश्विक खेलों पर प्रभाव

आईपीसी का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में व्यापक बहस को जन्म देता है—

  • क्या खिलाड़ियों को राजनीतिक संघर्षों से अलग रखा जाना चाहिए?
  • क्या वैश्विक खेल राजनीति से स्वतंत्र रह सकते हैं?
  • अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाएँ निष्पक्षता और जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाएँ?

2026 शीतकालीन पैरालंपिक के लिए यह निर्णय एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

शीतकालीन पैरालंपिक के बारे में

शीतकालीन पैरालंपिक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता है, जो हर चार वर्ष में आयोजित होती है।

मुख्य प्रतियोगिताएँ—

  • अल्पाइन स्कीइंग
  • क्रॉस-कंट्री स्कीइंग
  • स्नोबोर्ड
  • बायथलॉन

2026 संस्करण का आयोजन इटली के मिलान और कॉर्टिना डी’एम्पेज़ो में होगा।

विश्व में भूख से लड़ने के लिए दो लाख टन चावल आपूर्ति करेगा भारत

भारत दुनियाभर में चल रहे मानवीय कार्यों के लिए दो लाख टन टूटे चावल की आपूर्ति करेगा। भूख से लड़ने के मकसद पांच साल के दौरान यह आपूर्ति की जाएगी। इस संबंध में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के बीच करार पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत अवधि को आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है और कीमत भी हर साल आम सहमति से तय की जाएगी। 31 मार्च, 2026 तक के लिए कीमत प्रति क्विंटल 2,800 रुपये तय की गई है।

भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा प्रतिबद्धता

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि डब्ल्यूईएफपी के साथ साझेदारी के जरिये हम भूख से जूझ रहे लोगों को उम्मीद, पोषण और सम्मान दे रहे हैं। यह समझौता भारत की इस प्रतिबद्धता को दिखाता है कि कोई भी भूखा न रहे। भारत कुपोषण और खाने की कमी से लड़ने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा रहेगा। डब्ल्यूएफपी के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा कि भारत के साथ यह समझौता वैश्विक स्तर पर भूख से लड़ने में एक अहम पड़ाव है। भारत का सहयोग डब्ल्यूएफपी को अगले पांच वर्षों में कमज़ोर आबादी तक ज्यादा असरदार तरीके से पौष्टिक खाना पहुंचाने में मदद करेगा।

वैश्विक एकजुटता के समर्थक

स्काउ ने कहा कि एक बड़े खेती-बाड़ी वाले देश और वैश्विक एकजुटता के समर्थक के तौर पर, भारत हमें जीरो हंगर के लक्ष्य को एक्शन में बदलने के लिए प्रेरित करता है। हम इस बदलाव लाने वाली साझेदारी के लिए भारत को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

डब्ल्यूएफपी के साथ सहयोग

दुनिया भर में मानवीय जरूरतों को पूरा करने में डब्ल्यूएफपी के साथ सहयोग को मजबूत करती है और वैश्विक खाद्य प्रणाली में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार योगदानकर्ता के तौर पर भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

वैश्विक कूटनीतिक पहल के बीच भारत ट्रंप के गाज़ा शांति बोर्ड में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल

भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयोजित गाज़ा पुनर्निर्माण और स्थिरीकरण पर केंद्रित प्रथम “बोर्ड ऑफ पीस” बैठक में एक पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया।वॉशिंगटन डीसी में भारत का प्रतिनिधित्व उप मिशन प्रमुख नामग्या सी खम्पा ने किया। इस बैठक में 40 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने भाग लिया।

हालांकि भारत बोर्ड का औपचारिक सदस्य नहीं बना, लेकिन उसकी उपस्थिति गाज़ा संघर्ष और क्षेत्रीय शांति प्रयासों से जुड़े विकसित हो रहे कूटनीतिक प्रयासों में उसकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।

ट्रंप का “गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस” क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड का गठन निम्न उद्देश्यों से किया—

  • गाज़ा के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना
  • एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) को संगठित करना
  • संरचित शांति ढांचा (Structured Peace Framework) को बढ़ावा देना

यह बैठक डोनाल्ड जे. ट्रम्प शांति संस्थान में आयोजित की गई, जिसमें यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के नेता शामिल हुए।

पर्यवेक्षक के रूप में भारत की भूमिका

भारत ने बोर्ड का सदस्य बनने के बजाय पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेने का निर्णय लिया। अन्य पर्यवेक्षक देशों में शामिल थे—

  • जर्मनी
  • इटली
  • नॉर्वे
  • स्विट्ज़रलैंड
  • यूनाइटेड किंगडम

भारत की यह भागीदारी इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर उसकी संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीतिक नीति को दर्शाती है, जिसमें वह औपचारिक पक्षधरता से बचते हुए संवाद में शामिल रहता है।

भारत-पाकिस्तान युद्धविराम पर ट्रंप की टिप्पणी

  • बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्व संघर्ष को व्यापार शुल्क (टैरिफ) की धमकी देकर रुकवाया था।
  • उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश शत्रुता समाप्त नहीं करते, तो वे 200% टैरिफ लगा सकते थे।
  • हालांकि भारत ने आधिकारिक रूप से इस दावे को खारिज किया है। भारत का कहना है कि सैन्य तनाव में कमी दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच प्रत्यक्ष वार्ता के बाद हुई थी।

पाकिस्तान की भागीदारी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif इस बैठक में बोर्ड सदस्य के रूप में शामिल हुए।

ट्रंप ने कार्यक्रम के दौरान शरीफ और पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व की सराहना की।
यह दक्षिण एशिया से जुड़ी भू-राजनीतिक संवेदनशीलताओं को भी उजागर करता है।

वैश्विक भागीदारी और गाज़ा पुनर्निर्माण एजेंडा

40 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने भागीदारी की पुष्टि की। मुख्य एजेंडा बिंदु थे—

  • गाज़ा में युद्धोत्तर पुनर्निर्माण
  • स्थिरीकरण एवं शांति स्थापना तंत्र
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों का संकलन

यह पहल गाज़ा में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए व्यापक शांति योजना का हिस्सा बताई जा रही है।

गाज़ा पर भारत की कूटनीतिक नीति

भारत परंपरागत रूप से समर्थन करता है—

  • दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution)
  • शांतिपूर्ण संवाद
  • मानवीय सहायता

पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेकर भारत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए कूटनीतिक संवाद में सक्रिय सहभागिता दिखाई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिलन-2026 अभ्यास के 13वें संस्करण का उद्घाटन किया

भारत की समुद्री कूटनीति ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अभ्यास MILAN-2026 के 13वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस प्रतिष्ठित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में 74 देशों की भागीदारी रही, जो इसके इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी संस्करण है।

रक्षा मंत्री ने नौसेना प्रमुखों, रक्षा प्रतिनिधियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि MILAN-2026 वैश्विक समुद्री समुदाय के भारत पर एक जिम्मेदार और विश्वसनीय समुद्री साझेदार के रूप में भरोसे का प्रतीक है। इतनी व्यापक भागीदारी भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और उससे आगे बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाती है।

अभ्यास MILAN क्या है?

  • अभ्यास MILAN एक द्विवार्षिक (हर दो वर्ष में आयोजित) बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसकी मेजबानी भारतीय नौसेना करती है।
  • इसकी शुरुआत वर्ष 1995 में एक छोटे क्षेत्रीय पहल के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की मित्र नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना था।
  • समय के साथ यह दुनिया के प्रमुख नौसैनिक अभ्यासों में से एक बन गया है।
  • 2026 का संस्करण पूर्वी नौसेना कमान (Eastern Naval Command) के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में स्थित है।

MILAN-2026: अब तक का सबसे बड़ा संस्करण

13वां संस्करण कई कारणों से विशेष है—

  • 74 देशों की भागीदारी – अब तक का सबसे समावेशी संस्करण।
  • जटिल नौसैनिक अभ्यासों और पेशेवर आदान-प्रदान का विस्तार।
  • उभरती समुद्री चुनौतियों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इतनी अभूतपूर्व भागीदारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भारत की समुद्री दृष्टि और नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है।

अभ्यास MILAN-2026 के उद्देश्य

1. नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) को मजबूत करना

  • इंटरऑपरेबिलिटी का अर्थ है विभिन्न देशों की नौसेनाओं का संयुक्त अभियानों में सहज रूप से साथ काम करने की क्षमता।
  • संयुक्त अभ्यासों, संचार प्रशिक्षण और समन्वित अभियानों के माध्यम से देशों की सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होती है।

2. पेशेवर दक्षता में वृद्धि

MILAN के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं, सामरिक सिद्धांतों और परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान होता है, जिससे भाग लेने वाली सेनाओं के पेशेवर मानकों में सुधार होता है।

3. समुद्री सुरक्षा सहयोग

वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में समुद्री चुनौतियाँ शामिल हैं—

  • समुद्री डकैती
  • अवैध मछली पकड़ना
  • समुद्री आतंकवाद
  • मानव तस्करी
  • प्राकृतिक आपदाएँ एवं मानवीय संकट

MILAN जैसे संयुक्त अभ्यास नौसेनाओं को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों के लिए तैयार करते हैं।

विश्वसनीय समुद्री साझेदार के रूप में भारत

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि MILAN का क्षेत्रीय पहल से वैश्विक मंच तक पहुँचना भारत की सतत और विश्वसनीय समुद्री कूटनीति का प्रमाण है।

भारत की समुद्री नीति निम्न सिद्धांतों पर आधारित है—

  • सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास)
  • नौवहन की स्वतंत्रता
  • अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान, विशेषकर UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन)

MILAN की मेजबानी कर भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक “नेट सुरक्षा प्रदाता” (Net Security Provider) के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करता है।

विशाखापत्तनम का रणनीतिक महत्व

विशाखापत्तनम, जिसे “पूर्वी तट का रत्न” भी कहा जाता है, रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है—

  • बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित
  • पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय
  • प्रमुख नौसैनिक शिपयार्ड और जहाज निर्माण सुविधाएँ

यहाँ MILAN-2026 का आयोजन भारत के पूर्वी समुद्री फोकस और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दर्शाता है।

प्रमुख तथ्य (Key Highlights)

  • अभ्यास का नाम: MILAN-2026
  • संस्करण: 13वां
  • स्थान: Visakhapatnam, आंध्र प्रदेश
  • आयोजक: भारतीय नौसेना (पूर्वी नौसेना कमान)
  • भाग लेने वाले देश: 74
  • प्रकृति: द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास

आंध्र प्रदेश को भारत की सबसे बड़ी ₹8,175 करोड़ की लिथियम बैटरी गीगाफैक्ट्री मिली

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, आंध्र प्रदेश ने वारी एनर्जीज़ द्वारा ₹8,175 करोड़ के निवेश से भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड लिथियम-आयन बैटरी गीगाफैक्ट्री हासिल की है। यह प्रोजेक्ट अनकापल्ली जिले के रामबिल्ली में बनाया जाएगा और इससे लगभग 3,000 सीधी नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। 16 GWh प्रोडक्शन कैपेसिटी के साथ, यह फैसिलिटी भारत के बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और स्ट्रेटेजिक एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करेगी।

Waaree Energies बनाएगी 16 GWh लिथियम-आयन गीगाफैक्ट्री

Waaree Energies एक ग्रीनफील्ड गीगाफैक्ट्री स्थापित करेगी, जिसमें:

  • 16 GWh बैटरी उत्पादन क्षमता होगी
  • बैटरी वैल्यू चेन का एंड-टू-एंड एकीकरण किया जाएगा
  • सेल निर्माण (Cell Manufacturing) और बैटरी पैक असेंबली की सुविधा होगी
  • बड़े पैमाने पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का उत्पादन किया जाएगा

इस परियोजना को आंध्र प्रदेश राज्य निवेश संवर्धन बोर्ड से सैद्धांतिक (in-principle) मंजूरी मिल चुकी है।

स्थान का लाभ: अनाकापल्ली जिले का रामबिल्ली

लिथियम-आयन गीगाफैक्ट्री आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के रैम्बिली में स्थापित की जाएगी। राज्य सरकार इस परियोजना को अपनी इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के तहत एक मील का पत्थर मान रही है।

निवेश बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने की, जिसमें इस परियोजना को मंजूरी दी गई। वहीं, नारा लोकेश ने इस निवेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

यह बैटरी गीगाफैक्ट्री भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

बड़े पैमाने पर लिथियम-आयन बैटरी निर्माण निम्न क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) विस्तार
  • ग्रिड स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा
  • आयातित बैटरी सेल्स पर निर्भरता कम करना

Waaree Energies की 16 GWh क्षमता वाली गीगाफैक्ट्री भारत के स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी और ‘मेक इन इंडिया’ व ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी।

आंध्र प्रदेश की इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी विजन

आंध्र प्रदेश स्वयं को स्वच्छ-प्रौद्योगिकी (क्लीन टेक) निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य की इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के तहत पहले ही बड़े निवेश आकर्षित किए जा चुके हैं, जैसे:

  • नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन
  • सोलर निर्माण
  • ऊर्जा उपकरण निर्माण

Waaree की बैटरी गीगाफैक्ट्री उन्नत ऊर्जा भंडारण निर्माण में बैकवर्ड इंटीग्रेशन का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे संपूर्ण क्लीन-एनर्जी वैल्यू चेन मजबूत होगी।

रोजगार सृजन और आर्थिक प्रभाव

इस परियोजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, साथ ही निम्न क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे:

  • विनिर्माण (Manufacturing)
  • लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन
  • इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवाएं

यह निवेश आंध्र प्रदेश को अगली पीढ़ी के ऊर्जा उद्योगों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करता है।

बैटरी गीगाफैक्ट्री क्या होती है?

गीगाफैक्ट्री एक बड़े पैमाने की विनिर्माण इकाई होती है, जिसे विशाल क्षमता (आमतौर पर गीगावाट-घंटे या GWh में मापी जाती है) में बैटरी सेल और पैक उत्पादन के लिए डिजाइन किया जाता है।

ऐसी इकाइयाँ इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण और ग्रिड आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। गीगाफैक्ट्रियों में निवेश करने वाले देश अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखते हैं।

 

भारत ने Israel के West Bank कदमों के खिलाफ 100+ देशों के साथ कड़ा रुख अपनाया

संयुक्त राष्ट्र में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम के तहत भारत ने उन सौ से अधिक देशों और वैश्विक संगठनों का साथ दिया है जो वेस्ट बैंक में इजरायल के ”एकतरफा” फैसलों की कड़ी निंदा कर रहे हैं। इन देशों का मानना है कि इजरायल के ये कदम वेस्ट बैंक में उसकी ‘अवैध उपस्थिति’ को बढ़ाने और क्षेत्र के विलय की कोशिशों का हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक मिशन द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में इन देशों ने इजरायल की नीतियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

संयुक्त बयान में क्या कहा गया है?

संयुक्त बयान में Israel के “एकतरफा निर्णयों और कदमों” की कड़ी निंदा की गई है और इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया गया है। इसमें ऐसे सभी कदमों को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है और विलय (Annexation) के किसी भी प्रयास का स्पष्ट विरोध दोहराया गया है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने खारिज किया:

  • 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र की जनसांख्यिक संरचना में किसी भी प्रकार का बदलाव।
  • East Jerusalem के चरित्र और दर्जे में परिवर्तन से जुड़ी कार्रवाइयाँ।
  • क्षेत्र में चल रहे शांति प्रयासों को कमजोर करने वाले कदम।

बयान में आगे कहा गया कि ऐसे उपाय:

  • अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं।
  • शांति और स्थिरता को कमजोर करते हैं।
  • वार्ता के माध्यम से समाधान की संभावनाओं को खतरे में डालते हैं।

शुरुआत में 17 फरवरी को जारी इस बयान पर 85 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। भारत प्रारंभ में उनमें शामिल नहीं था, लेकिन बाद में जब हस्ताक्षरकर्ताओं की संख्या 100 से अधिक हो गई, तब भारत ने भी इसमें अपना समर्थन जोड़ा।

वेस्ट बैंक मुद्दा: पृष्ठभूमि

West Bank 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद से इज़राइल के नियंत्रण में है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अधिकांश हिस्सा इस क्षेत्र में इज़राइली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानता है, हालांकि इज़राइल इस व्याख्या से असहमत है।

बयान में निम्नलिखित के समर्थन की भी पुनः पुष्टि की गई:

  • United Nations के संबंधित प्रस्ताव।
  • 1991 की मैड्रिड शांति सम्मेलन रूपरेखा (Madrid terms of reference)।
  • 2002 की अरब शांति पहल (Arab Peace Initiative)।
  • “भूमि के बदले शांति” (Land for Peace) का सिद्धांत।

ये सभी ढांचे इज़राइल के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करते हैं।

इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत की स्थिति

भारत ने ऐतिहासिक रूप से इज़राइल–फिलिस्तीन संघर्ष में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है।

भारत के रुख के प्रमुख पहलू

  • भारत एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन करता है।
  • वह सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इज़राइल और फिलिस्तीन के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का पक्षधर है।
  • स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) को ही एकमात्र व्यवहार्य मार्ग मानता है।
  • उल्लेखनीय रूप से, भारत 1988 में फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश था।

भारत के निर्णय का कूटनीतिक महत्व

संयुक्त बयान में शामिल होने का भारत का निर्णय कई कूटनीतिक संकेत देता है:

1. अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता:
इस बयान पर हस्ताक्षर कर भारत ने संयुक्त राष्ट्र आधारित बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

2. पश्चिम एशिया में संतुलन:
भारत के इज़राइल और अरब देशों, विशेषकर खाड़ी देशों, के साथ मजबूत संबंध हैं, जो ऊर्जा और व्यापार के महत्वपूर्ण साझेदार हैं।

3. रणनीतिक स्वायत्तता:
यह कदम भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें वह वैश्विक सहमति के साथ खड़ा होता है, लेकिन अपने द्विपक्षीय संबंधों को भी संतुलित बनाए रखता है।

कैसे दो इंजीनियरों ने एक विचार से ‘सर्वम एआई’ को शिखर सम्मेलन तक पहुंचाया

भारत मंडपम में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में, एक युवा स्टार्टअप सर्वम AI ने देश का ध्यान खींचा। तीन वर्ष से भी कम समय पहले स्थापित इस बेंगलुरु स्थित कंपनी ने अपने ‘मेड-इन-इंडिया’ लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) और एआई-संचालित हार्डवेयर का प्रदर्शन किया। इनमें आकर्षक ‘Sarvam Kaze’ स्मार्ट चश्मा भी शामिल था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान पहना। हालांकि समिट का वह क्षण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, लेकिन Sarvam AI की सफलता संयोग नहीं थी। यह दो इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत और ठोस तैयारी का परिणाम था, जिन्होंने भारत की भाषाओं, संस्कृति और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी (Sovereign) एआई सिस्टम विकसित करने का दृढ़ संकल्प लिया था।

सर्वम एआई का विजन: भारत के लिए स्वदेशी एआई

Sarvam AI की स्थापना वर्ष 2023 में हुई और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। यह उन 12 संगठनों में शामिल था जिन्हें भारत सरकार ने भारतीय डेटा सेट्स पर आधारित एआई मॉडल विकसित करने के लिए चुना था।

कंपनी का मिशन — “AI for all from India” — निम्न लक्ष्यों पर केंद्रित है:

  • भारतीय भाषाओं पर आधारित जेनरेटिव एआई का निर्माण
  • भारतीय दस्तावेज़ों, पाठ्यपुस्तकों, समाचार पत्रों और स्कैन किए गए अभिलेखों पर मॉडल को प्रशिक्षित करना
  • स्पीच रिकग्निशन, OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) और मल्टीमॉडल एआई सिस्टम विकसित करना

जहां कई वैश्विक एआई सिस्टम मुख्यतः पश्चिमी डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं, वहीं सर्वम एआई ने भारतीय (Indic) भाषाओं और स्थानीय संदर्भों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इस पहल ने उस महत्वपूर्ण कमी को संबोधित किया, जिसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

सर्वम एआई के संस्थापक: मजबूत तकनीकी आधार

Sarvam AI की स्थापना प्रत्युष कुमार और विवेक राघवन ने की, जिन दोनों का शैक्षणिक और पेशेवर अनुभव अत्यंत मजबूत रहा है।

प्रत्युष कुमार

  • आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक
  • इसके बाद ETH ज्यूरिख से पीएचडी
  • IBM रिसर्च और माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में कार्य अनुभव
  • बाद में आईआईटी मद्रास में फैकल्टी के रूप में जुड़े
  • विशेषज्ञता: उन्नत एआई और कंप्यूटिंग सिस्टम

विवेक राघवन

  • आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र
  • कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय से मास्टर्स और पीएचडी
  • अकादमिक क्षेत्र में जाने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) में स्टार्टअप शुरू किए
  • एक स्टार्टअप का अधिग्रहण हुआ, जबकि दूसरे के शुरुआती ग्राहकों में Nvidia शामिल था
  • वर्ष 2007 में भारत लौटकर सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और भाषा प्रौद्योगिकी की दिशा में कार्य शुरू किया

दोनों संस्थापकों की गहरी तकनीकी समझ और भारत-केंद्रित दृष्टिकोण ने सर्वम एआई को एक मजबूत नींव प्रदान की।

भारत की डिजिटल अवसंरचना में भूमिका

विवेक राघवन के अनुभव ने Sarvam AI की दिशा को गहराई से प्रभावित किया।

उन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) में मुख्य उत्पाद प्रबंधक (Chief Product Manager) और बायोमेट्रिक आर्किटेक्ट के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने Aadhaar प्लेटफॉर्म को पहले नामांकन से लेकर एक अरब (बिलियन) उपयोगकर्ताओं तक स्केल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने आगे भी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं:

  • आधार में धोखाधड़ी पहचान (Fraud Detection) के लिए एआई सिस्टम की शुरुआत
  • माल और सेवा कर नेटवर्क (GSTN) को एआई-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन पर परामर्श
  • भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के साथ डिजिटल भुगतान नवाचारों पर कार्य
  • डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर (DEPA) ढांचे में योगदान
  • भारत का सर्वोच्च न्यायालय के लिए एआई अनुवाद प्रणालियों के विकास में भूमिका

उनका AI4Bharat से जुड़ाव भी भारतीय भाषाओं में अंग्रेज़ी-समकक्ष एआई क्षमताएँ विकसित करने के लक्ष्य को और मजबूत करता है।

फंडिंग और तेज़ विस्तार

Sarvam AI ने स्थापना के तुरंत बाद तेज़ी से प्रगति की।

दिसंबर 2023 में कंपनी ने 41 मिलियन डॉलर की सीरीज़-A फंडिंग जुटाई। इस राउंड का नेतृत्व Lightspeed Venture Partners ने किया, जबकि Peak XV Partners और Khosla Ventures ने भी भागीदारी की।

इसके बाद कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ सामने आईं:

  • फरवरी 2024: Microsoft के साथ साझेदारी, वॉयस-आधारित जेनरेटिव एआई टूल्स के विकास के लिए।
  • जून 2024: World Economic Forum द्वारा ‘टेक्नोलॉजी पायनियर्स 2024’ में शामिल किया गया।
  • सितंबर 2024: AI Alliance में शामिल हुआ, जहां Meta और IBM जैसी वैश्विक कंपनियां भी सदस्य हैं।
  • मार्च 2025: Unique Identification Authority of India (UIDAI) के साथ साझेदारी, आधार सेवाओं के लिए एआई-संचालित वॉयस फीडबैक सिस्टम लागू करने हेतु।

2026 की शुरुआत तक कंपनी ने दावा किया कि उसने कुछ विशिष्ट क्षेत्रों, जैसे भारतीय भाषाओं के OCR और दस्तावेज़ लेआउट समझ (Document Layout Understanding) में ChatGPT और Gemini से बेहतर बेंचमार्क परिणाम हासिल किए हैं।

समिट का क्षण: प्रोडक्ट शोकेस

India AI Impact Summit 2026 ने Sarvam AI को अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक मंच प्रदान किया।

चर्चित ‘Sarvam Kaze’ एआई चश्मे के अलावा, कंपनी ने कार्यक्रम से पहले के हफ्तों में 11 एआई प्लेटफॉर्म भी पेश किए।

प्रमुख उत्पाद

सर्वम अक्षर – उच्च-सटीकता वाला दस्तावेज़ डिजिटाइजेशन सिस्टम

सर्वम स्टूडियो – बहुभाषी कंटेंट निर्माण प्लेटफॉर्म

सारस वी3 – स्पीच रिकग्निशन मॉडल

सर्वम विजन – भारतीय लिपियों के लिए विज़ुअल एआई

बुलबुल वी3 – उन्नत स्पीच मॉडल

सर्वम आर्य – भारत-केंद्रित फाउंडेशनल एआई मॉडल

कंपनी के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने एआई को “सिर्फ अंग्रेज़ी तक सीमित न रखने” की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका तर्क था कि विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगकर्ता अनुभव अलग-अलग होते हैं, इसलिए एआई के मानक (Benchmarks) भी सांस्कृतिक और संदर्भगत वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने चाहिए।

भारत के लिए सर्वम एआई क्यों महत्वपूर्ण है?

Sarvam AI भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं में एक व्यापक बदलाव का प्रतीक है।

1. डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty)

भारत विदेशी एआई मॉडलों पर निर्भरता कम कर घरेलू स्तर पर मजबूत फाउंडेशनल एआई क्षमताएँ विकसित करना चाहता है।

2. भाषाई समावेशन (Linguistic Inclusion)

भारत में 22 अनुसूचित भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हैं। ऐसे में एआई सिस्टम को बहुभाषी और गैर-लैटिन लिपियों को प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम होना चाहिए।

3. सार्वजनिक क्षेत्र में एकीकरण (Public Sector Integration)

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) जैसे संस्थानों के साथ तैनाती यह दर्शाती है कि एआई शासन, पारदर्शिता और सेवा वितरण को बेहतर बना सकता है।

मुख्य बिंदु

  • स्थापना: 2023
  • मुख्यालय: बेंगलुरु
  • फोकस: स्वदेशी एआई और भारतीय भाषा मॉडल
  • सीरीज़ A फंडिंग: 41 मिलियन डॉलर (दिसंबर 2023)
  • प्रमुख तैनाती: UIDAI का वॉयस-आधारित एआई सिस्टम (2025)
  • प्रमुख प्रदर्शन: India AI Impact Summit 2026 में प्रोडक्ट शोकेस

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