भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अनुग्रह नारायण दास ने रक्षा लेखा महानियंत्रक (CGDA) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वे वर्ष 1991 बैच के भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं और उनके पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय दक्षता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में रक्षा व्यय प्रबंधन और लेखा प्रणाली को और बेहतर बनाया जाएगा।
कौन है अनुग्रह नारायण दास
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनुग्रह नारायण दास का शैक्षणिक और प्रशिक्षण रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है:
- उत्कल विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त
- यूनिवर्सिटी ऑफ ल्युब्लियाना (ICPE) में अध्ययन
- भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु (IIM Bangalore) से प्रशिक्षण
- ड्यूक यूनिवर्सिटी से उन्नत प्रशिक्षण
- प्रमुख पद और प्रशासनिक अनुभव
अपने लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं:
- निदेशक – जल संसाधन मंत्रालय
- अतिरिक्त वित्तीय सलाहकार एवं संयुक्त सचिव – रक्षा मंत्रालय
- प्रधान एकीकृत वित्तीय सलाहकार – सेना मुख्यालय
- विशेष CGDA – CGDA मुख्यालय
उनका अनुभव खरीद नीति, लेखा परीक्षा, बजट प्रबंधन और व्यय निगरानी जैसे अहम क्षेत्रों में रहा है।
CGDA का पद क्यों है महत्वपूर्ण?
रक्षा लेखा महानियंत्रक (CGDA) रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद होता है, जो देश के बड़े वित्तीय ढांचे को संभालता है।
मुख्य जिम्मेदारियां:
- रक्षा खातों और भुगतान का प्रबंधन
- रक्षा व्यय का ऑडिट करना
- वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना
- रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में सहयोग देना
- बजट आवंटन और उपयोग पर सलाह देना
यह पद देश के सबसे बड़े सरकारी खर्च वाले क्षेत्र में जवाबदेही बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।


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