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भारत में ‘झंडों का शहर’ कौन सा है? 99% लोग नहीं जानते सही जवाब – जानें पूरा सच

क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘झंडों का शहर’ कहा जाता है?

इसका सही जवाब है — Mysuru (मैसूर), कर्नाटक

यह शहर न केवल अपने भव्य महलों और शाही विरासत के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी अपनी खास पहचान के कारण भी पूरे देश में जाना जाता है।

क्यों कहा जाता है मैसूर को ‘झंडों का शहर’?

मैसूर को यह नाम यूं ही नहीं मिला, इसके पीछे कई मजबूत कारण हैं:

  1. यहां खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से उच्च गुणवत्ता का कपड़ा तैयार किया जाता है
  2. राष्ट्रीय ध्वज के लिए आवश्यक विशेष खादी और बुनाई तकनीक यहीं विकसित हुई
  3. झंडा निर्माण के लिए जरूरी मानक (BIS) को पूरा करने वाला कपड़ा बड़े पैमाने पर यहीं से आता है

यही वजह है कि मैसूर को भारत में झंडा निर्माण का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

शाही परंपरा और दशहरा उत्सव से जुड़ी पहचान

मैसूर का प्रसिद्ध दशहरा उत्सव इसकी पहचान को और भी खास बनाता है।

  • पूरे शहर को हजारों झंडों से सजाया जाता है
  • Mysore Palace से निकलने वाली शाही सवारी में विभिन्न झंडों का प्रदर्शन होता है
  • इसमें ऐतिहासिक रूप से मैसूर साम्राज्य के झंडे भी शामिल होते हैं

यह भव्य दृश्य ही इस शहर को “झंडों का शहर” बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

स्वतंत्रता आंदोलन और झंडा सत्याग्रह

मैसूर का योगदान केवल संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण रहा है।

  1. यहां के लोगों ने झंडा सत्याग्रह में सक्रिय भाग लिया
  2. ब्रिटिश शासन के विरोध में तिरंगा फहराया गया
  3. इस आंदोलन ने शहर को राष्ट्रवाद का प्रतीक बना दिया

यही ऐतिहासिक जुड़ाव इस शहर की पहचान को और मजबूत करता है।

झंडा निर्माण में मैसूर की खास भूमिका

पहले भारत में राष्ट्रीय ध्वज केवल खादी कपड़े से बनाना अनिवार्य था।

  1. झंडा बनाने के लिए विशेष थ्रेड काउंट और मजबूती (Tensile Strength) जरूरी होती है
  2. यह तकनीक लंबे समय तक मैसूर के कारीगरों की विशेषज्ञता रही

आज भी Karnataka Khadi Gramodyoga Samyukta Sangha को तिरंगा बनाने का आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त है।

मैसूर क्यों है खास?

  1. झंडा निर्माण का ऐतिहासिक केंद्र
  2. दशहरा उत्सव में झंडों की भव्यता
  3. स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
  4. सांस्कृतिक और शाही विरासत

इन सभी कारणों से मैसूर को भारत का ‘झंडों का शहर’ कहा जाता है।

मैसूर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की देशभक्ति, संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है।

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