अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपना वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास फ्रीडम शील्ड (Freedom Shield) शुरू कर दिया है। यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण संभावित अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। कुछ सैन्य उपकरणों की पुनः तैनाती को लेकर अटकलों के बावजूद, दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास निर्धारित योजना के अनुसार ही जारी रहेगा।
‘फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास क्या है?
फ्रीडम शील्ड एक बड़ा वार्षिक रक्षा अभ्यास है, जिसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाएँ संयुक्त रूप से आयोजित करती हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों सहयोगी देशों के बीच समन्वय को मजबूत करना और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की क्षमता को बढ़ाना है।
इस अभ्यास में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- कमांड-पोस्ट सिमुलेशन
- फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास
- संयुक्त सैन्य समन्वय गतिविधियाँ
यह अभ्यास सोमवार से शुरू हुआ है और 19 मार्च तक जारी रहेगा।
दक्षिण कोरिया और अमेरिकी सैनिकों की भागीदारी
इस अभ्यास में लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक भाग ले रहे हैं। हालांकि, यूएस फोर्सेज कोरिया ने इसमें शामिल अमेरिकी सैनिकों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है। यह अभ्यास दोनों देशों की रक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और हर वर्ष आयोजित किया जाता है।
अमेरिकी सैन्य उपकरणों की आवाजाही की रिपोर्ट
हाल ही में मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि दक्षिण कोरिया में मौजूद कुछ अमेरिकी सैन्य उपकरणों को मध्य पूर्व में संभावित अभियानों के समर्थन के लिए स्थानांतरित किया जा सकता है।
योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, बड़े अमेरिकी सैन्य परिवहन विमान जैसे:
- लॉकहीड C-5 गैलेक्सी
- बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III
सियोल के पास स्थित Osan Air Base पर उतरे और कुछ दिनों बाद वहां से रवाना हो गए। इस गतिविधि के बाद सैन्य संसाधनों के संभावित स्थानांतरण को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली की भूमिका
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ MIM-104 पैट्रियट मिसाइल प्रणाली इकाइयों को दक्षिण कोरिया में अन्य अमेरिकी ठिकानों से ओसान एयर बेस पर स्थानांतरित किया गया।
पैट्रियट प्रणाली वायु रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि यह:
- आने वाले खतरों का पता लगा सकती है
- दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन को ट्रैक कर सकती है
- क्रूज़ मिसाइल और सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकती है
यह प्रणाली मुख्य रूप से उत्तरी कोरिया से संभावित खतरों का सामना करने के लिए दक्षिण कोरिया की मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा है।
मध्य पूर्व में पहले भी अस्थायी तैनाती
- पिछले वर्ष जून में दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना की दो पैट्रियट मिसाइल बैटरियों को ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर चल रहे अभियानों के दौरान अस्थायी रूप से मध्य पूर्व भेजा गया था। बाद में ये प्रणाली अक्टूबर में वापस दक्षिण कोरिया लौट आई थी।
- इसी वजह से हाल की विमान गतिविधियों ने फिर से संभावित पुनः तैनाती को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारों की प्रतिक्रिया
- दोनों देशों की सरकारों ने सैन्य उपकरणों की आवाजाही के बारे में विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया है।
- दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देश लगातार संपर्क में हैं ताकि सुरक्षा में किसी प्रकार की कमी न आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रीडम शील्ड अभ्यास सामान्य रूप से जारी है, भले ही मध्य पूर्व की स्थिति बदलती रहे।
अभ्यास के पैमाने में बदलाव
- इस वर्ष के अभ्यास में 22 फील्ड ट्रेनिंग ड्रिल शामिल हैं, जबकि पिछले संस्करण में 51 ड्रिल आयोजित किए गए थे।
- यह कमी दक्षिण कोरिया के वर्तमान राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के प्रशासन के दौरान की गई है, जो पूर्व नेता यून सुक योल के महाभियोग के बाद पद पर आए हैं।
- इस कदम को उत्तर कोरिया के साथ संबंधों को स्थिर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया और परमाणु योजना
- उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने हाल ही में सत्तारूढ़ कोरिया की श्रमिक पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक की। इसमें उन्होंने देश के परमाणु हथियार कार्यक्रम को मजबूत करने और मिसाइल वितरण प्रणालियों को उन्नत करने का संकल्प व्यक्त किया।
- साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी “शत्रुतापूर्ण नीति” बदलता है, तो अमेरिका के साथ बेहतर संबंध संभव हो सकते हैं।
भविष्य में कूटनीति की संभावना
- किम जोंग उन पहले भी डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपनी बैठकों के बारे में सकारात्मक टिप्पणी कर चुके हैं। ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं की तीन बार मुलाकात हुई थी।
- दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का मानना है कि इस महीने ट्रंप की संभावित China यात्रा उत्तर कोरिया से जुड़े नए कूटनीतिक संवाद का अवसर प्रदान कर सकती है।
- हालांकि, किम जोंग उन ने हाल ही में दक्षिण कोरिया को “सबसे शत्रुतापूर्ण इकाई” बताते हुए उसके प्रति कड़ा रुख भी बनाए रखा है।


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