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भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी 2026: यूपीआई लॉन्च और मुक्त व्यापार समझौते की नई शुरुआत

भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय संबंध फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत कर दिया।

यह उन्नयन फिनटेक, रक्षा और हरित ऊर्जा सहित 16 महत्वपूर्ण समझौतों द्वारा समर्थित है, जिससे भारत इज़राइल का प्रमुख डिजिटल अवसंरचना साझेदार बनकर उभरा है।

यूपीआई एकीकरण: एनपीसीआई इंटरनेशनल और MASAV समझौता

डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सबसे बड़ा कदम इज़राइल में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत है।

  • एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने इज़राइल की केंद्रीय भुगतान संस्था MASAV के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • इससे भारतीय पर्यटक और पेशेवर इज़राइल में सीधे UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।
  • साथ ही, कम लागत वाले सीमापार प्रेषण (remittance) कॉरिडोर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
  • इज़राइल अब सिंगापुर, यूएई, फ्रांस और श्रीलंका जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अपनाया है।

3.62 अरब डॉलर का व्यापार समझौता (FTA)

  • आर्थिक सहयोग को औपचारिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
  • एफटीए वार्ता का पहला व्यापक दौर 26 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 3.62 अरब डॉलर रहा।
  • एक महत्वपूर्ण श्रम गतिशीलता समझौते के तहत अगले पाँच वर्षों में 50,000 अतिरिक्त भारतीय श्रमिकों को इज़राइल में कार्य करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे उसके विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

फिनटेक से आगे: एआई, परमाणु और अंतरिक्ष सहयोग

  • यह साझेदारी अब उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुकी है, जो आने वाले दशक की दिशा तय करेंगे।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर संयुक्त घोषणाएँ।
  • असैन्य परमाणु ऊर्जा और समुद्री विरासत संरक्षण में सहयोग का नया ढांचा।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियों के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने हेतु रणनीतिक साझेदारी।

यह विशेष रणनीतिक साझेदारी न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों को गहरा करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर डिजिटल सहयोग और नवाचार के नए मानक भी स्थापित करेगी।

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