सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की आधार वर्ष श्रृंखला में व्यापक संशोधन की घोषणा की है। नई व्यवस्था के तहत GDP और IIP का आधार वर्ष 2022-23 तथा CPI का आधार वर्ष 2024 निर्धारित किया गया है। संशोधित श्रृंखला क्रमशः 12 फरवरी 2026 (CPI), 27 फरवरी 2026 (GDP) और मई 2026 (IIP) में जारी की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य भारत के आधिकारिक सांख्यिकीय आंकड़ों की सटीकता, प्रासंगिकता और अंतरराष्ट्रीय तुलनीयता को बेहतर बनाना है, ताकि बदलती अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की जा सके।
आधार वर्ष संशोधन क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है जिसके आधार पर आर्थिक सूचकांकों की गणना की जाती है। समय के साथ अर्थव्यवस्था में तकनीकी प्रगति, नए उद्योगों का उदय और उपभोग पैटर्न में बदलाव होते हैं। इसलिए समय-समय पर आधार वर्ष का संशोधन आवश्यक होता है, जिससे—
- विभिन्न क्षेत्रों का अद्यतन भार (वेटेज) तय किया जा सके
- नए डेटा स्रोतों को शामिल किया जा सके
- कार्यप्रणाली (मेथडोलॉजी) में सुधार हो
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तुलनीयता सुनिश्चित हो
वर्ष 2026 में घोषित नया GDP आधार वर्ष संशोधन भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले अपडेट के बाद आए संरचनात्मक परिवर्तनों को दर्शाता है।
घोषित नए आधार वर्ष
MoSPI ने निम्नलिखित नए आधार वर्ष प्रस्तावित किए हैं—
- GDP – आधार वर्ष 2022-23
- IIP – आधार वर्ष 2022-23
- CPI – आधार वर्ष 2024
जारी करने की समय-सारणी:
- CPI नई श्रृंखला – 12 फरवरी 2026
- GDP नई श्रृंखला – 27 फरवरी 2026
- IIP नई श्रृंखला – मई 2026
यह चरणबद्ध (phased) कार्यान्वयन अद्यतन सांख्यिकीय ढांचे में सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करेगा।
कार्यप्रणाली में सुधार और डेटा स्रोत
आधार वर्ष संशोधन की प्रक्रिया तकनीकी सलाहकार समितियों और विशेषज्ञ समूहों के मार्गदर्शन में की गई है, जिनमें शिक्षाविद, RBI तथा केंद्र व राज्य सरकारों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
MoSPI ने प्रमुख सर्वेक्षणों के डेटा को शामिल किया है, जैसे—
- आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS)
- घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES)
- असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE)
इसके अतिरिक्त निम्न सुधार किए गए हैं—
- नमूना आकार में वृद्धि
- संशोधित सैम्पलिंग डिज़ाइन
- अद्यतन सर्वे उपकरण
- क्षेत्रवार वेटेज में संशोधन
इन कदमों से भारत की नई GDP श्रृंखला और अन्य सूचकांकों की विश्वसनीयता और सटीकता मजबूत होगी।
सटीकता और पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय
आधिकारिक आंकड़ों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए MoSPI ने कई सुधार लागू किए हैं—
- अंतर्निहित वैलिडेशन प्रणाली वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग
- आधिकारिक वेबसाइट पर Advance Release Calendar (ARC) का प्रकाशन
- डेटा प्रसार के लिए e-Sankhyiki पोर्टल का शुभारंभ
- शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए यूनिट-लेवल सर्वे डेटा की उपलब्धता
- डेटा स्रोत और कार्यप्रणाली स्पष्ट करने हेतु National Meta Data Structure (NMDS) का प्रसार
इन उपायों का उद्देश्य डेटा जारी करने में देरी कम करना और जनविश्वास बढ़ाना है।
सरकार और संसद की भूमिका
इस संबंध में घोषणा लोकसभा में राव इंदरजीत सिंह द्वारा लिखित उत्तर के माध्यम से की गई। यह संशोधन वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय सांख्यिकीय प्रणाली बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह पूरी प्रक्रिया सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन संचालित की जाती है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकीय आंकड़ों के संकलन और प्रकाशन के लिए जिम्मेदार है।


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