भारत में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित थोक मुद्रास्फीति सितंबर तक लगातार छठे महीने नकारात्मक क्षेत्र में बनी रही। भारत सरकार की ओर से सोमवार को इसके आधिकारिक आंकड़े जारी कर दिए गए।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में थोक मुद्रास्फीति अगस्त के (-) 0.52 प्रतिशत के मुकाबले (-) 0.26 प्रतिशत और जुलाई के पिछले महीने (-) 1.23 प्रतिशत पर आ गई। माना जा रहा कि रासायनिक उत्पादों, खनिज तेल, कपड़ा, बुनियादी धातुओं और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण ये स्थिति बनी है।
दरअसल सरकार मासिक आधार पर हर महीने की 14 तारीख पर थोक मूल्यों के सूचकांक जारी करती है। इस बार 14 तारीख को शनिवार और 15 को रविवार था, ऐसे में सोमवार को इसे जारी किया गया।
अक्टूबर 2022 में कुल मिलाकर थोक मुद्रास्फीति 8.39 प्रतिशत थी और तब से इसमें गिरावट आई है। विशेष रूप से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति पिछले साल सितंबर तक लगातार 18 महीनों तक दोहरे अंक में रही थी।
थोक मुद्रास्फीति में वस्तुओं की कीमत थोक विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के स्तर पर आंकी जाती है। इसमें सबसे अधिक भारांश विनिर्मित उत्पादों के हैं। वहीं खुदरा महंगाई खुदरा दुकानदारों के स्तर आंकी जाती है।
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