Categories: Ranks & Reports

श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी 37 प्रतिशत हुई

सरकार ने जानकारी दी है कि देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर पहले के मुकाबले बढ़ी है। केंद्र सरकार ने कहा कि देश के श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 4.2 प्रतिशत बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, महिला श्रम बल भागीदारी दर 2018-19 में बढ़कर 24.5 प्रतिशत हो गई थी जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में महिला श्रम बल भागीदारी दर 30 प्रतिशत थी जो 2020-21 में बढ़कर 32.5 प्रतिशत हो गई। यह दर 2021-22 में 32.8 प्रतिशत थी जो 2022-23 में बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई। मंत्रालय ने कहा कि 09 अक्टूबर, 2023 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण रिपोर्ट 2022-23 से पता चलता है कि देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर 2023 में 4.2 प्रतिशत बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है।

महिला सशक्‍तिकरण सुनिश्चित

महिला श्रम बल भागीदारी दर में यह महत्वपूर्ण उछाल महिलाओं के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक विकास के उद्देश्य से की गई नीतिगत पहलों से महिला सशक्‍तिकरण सुनिश्चित करने के सरकार के निर्णायक कार्यक्रम का परिणाम है। सरकार की पहल महिलाओं के जीवनचक्र तक फैली हुई है, जिसमें लड़कियों की शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता सुविधा और कार्यस्थल में सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पहल शामिल हैं। इन क्षेत्रों में नीतियां और कानून सरकार के ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण क्या है ?

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अप्रैल 2017 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य, ‘वर्तमान साप्ताहिक स्थिति’ (सीडब्लूएस ) में केवल शहरी क्षेत्रों के लिये तीन माह के अल्‍पकालिक अंतराल पर प्रमुख रोज़गार और श्रमिक-जनसंख्या अनुपात, श्रम बल भागीदारी दर, बेरोज़गारी दर का अनुमान लगाना, प्रतिवर्ष ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में सामान्य स्थिति (पीएस+एसएस) और सीडब्लूएस दोनों में रोज़गार एवं बेरोज़गारी संकेतकों का अनुमान लगाना हैं।

 

महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी सीधे रूप से आर्थिक विकास से संबंधित है। जब महिला आबादी के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से का उपयोग कम हो जाता है तो इसके परिणामस्वरूप संभावित उत्पादकता और आर्थिक उत्पादन का नुकसान होता है। श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि होने से उच्च सकल घरेलू उत्पाद और समग्र आर्थिक समृद्धि में योगदान हो सकता है।

 

गरीबी रेखा से बाहर निकलने में मदद

महिला सशक्‍तिकरण सुनिश्चित करने के सरकार के निर्णायक कार्यक्रम से महिलाओं को आय-अर्जित करने के अवसरों तक पहुँच प्रदान करने से यह उनके परिवारों को गरीबी रेखा से बाहर निकलने में मदद कर सकती है जिससे जीवन स्तर बेहतर हो सकता है तथा परिवारों की स्थिति में सुधार हो सकता है।

 

Find More Ranks and Reports Here

 

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

पायलट फेज के बाद SEBI ने लॉन्च किया PaRRVA सिस्टम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी' (PaRRVA) को…

8 hours ago

कैबिनेट का अहम निर्णय: महाराष्ट्र में AI नीति 2026 लागू

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र राज्य कैबिनेट ने महत्वाकांक्षी 'महाराष्ट्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति…

8 hours ago

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: हर आरोपी को त्वरित सुनवाई का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को एक केस की सुनवाई के दौरान मौलिक अधिकारों…

8 hours ago

अब नहीं खोएंगे PF के पैसे, EPFO का नया प्लेटफॉर्म करेगा मदद

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) 'E-PRAAPTI' नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा…

9 hours ago

आपदा पीड़ितों को राहत: RBI ने लागू किए नए लोन पुनर्गठन नियम

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आपदा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए लोन रीस्ट्रक्चरिंग के लिए संशोधित दिशानिर्देश पेश…

10 hours ago

समुद्री साझेदारी मजबूत: भारत और श्रीलंका ने किया DIVEX 2026 अभ्यास

भारत और श्रीलंका ने 21 से 28 अप्रैल तक कोलंबो में द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास 'IN–SLN…

10 hours ago