भारत में वर्ष 2023 में लगभग 24,700 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं, जिससे यह उन देशों में शामिल हो गया है जहाँ मातृ मृत्यु दर का बोझ अधिक है। यह आंकड़े प्रतिष्ठित जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन से सामने आए हैं, जिसे स्वास्थ्य मेट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान (IHME) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। अध्ययन के अनुसार भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 116 आंका गया है। वैश्विक स्तर पर भी मातृ मृत्यु एक गंभीर चिंता बनी हुई है, जिसमें नाइजीरिया, इथियोपिया और पाकिस्तान जैसे देश इस बोझ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) का अर्थ है प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर मातृ मृत्यु की संख्या, जो किसी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सूचक है। भारत के नवीनतम सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2021–23 के अनुसार देश का MMR 88 प्रति 1 लाख जीवित जन्म है, जो पिछले दशकों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाता है और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दिखाता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में MMR का अनुमान 116 बताया गया है, जो विभिन्न डेटा स्रोतों और पद्धतियों के कारण अंतर को दर्शाता है। फिर भी India ने 1990 के बाद से MMR में लगभग 86% की कमी हासिल की है, जो वैश्विक औसत 48% की गिरावट की तुलना में काफी अधिक है।
The Lancet में प्रकाशित तथा स्वास्थ्य मेट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार भारत उन देशों में शामिल है जहाँ मातृ मृत्यु का बोझ अधिक है।
प्रमुख आंकड़े (2023)
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि विशेष रूप से विकासशील देशों में मातृ मृत्यु अभी भी एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।
‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ (जीबीडी) 2023 शोध में 204 देशों और क्षेत्रों में 2023 तक मातृ मृत्यु दर के रुझानों का सबसे ताजा वैश्विक आकलन दिया गया है।
मुख्य वैश्विक तथ्य:
हालांकि, यह प्रगति अभी भी पर्याप्त नहीं है, क्योंकि 104 देश अभी तक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) को प्राप्त नहीं कर पाए हैं। SDG का लक्ष्य 2030 तक MMR को 70 प्रति 1 लाख जीवित जन्म से नीचे लाना है।
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