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जनवरी 2026 में बेरोजगारी दर मामूली बढ़कर पांच प्रतिशत पर: सर्वेक्षण

भारत की बेरोज़गारी दर जनवरी 2026 में बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में दी गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण श्रम बाज़ारों में मौसमी कमजोरी और फसल कटाई के बाद आने वाली मंदी को माना जा रहा है। हालांकि बेरोज़गारी दर में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन श्रम बल भागीदारी दर में भी कमी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस अवधि में कम लोग सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहे थे। यह आंकड़े करंट वीकली स्टेटस (CWS) पद्धति के आधार पर तैयार किए गए हैं।

जनवरी 2026 में शहरी बेरोज़गारी 7% – NSO के आंकड़े

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार:

  • शहरी बेरोज़गारी दर: 7% (दिसंबर में 6.7% से बढ़कर)
  • ग्रामीण बेरोज़गारी दर: 4.2% (तीन महीनों का उच्चतम स्तर)
  • कुल बेरोज़गारी दर: 5%

शहरी बेरोज़गारी में वृद्धि शहरों के रोजगार बाज़ार में हल्के दबाव का संकेत देती है, जबकि ग्रामीण बेरोज़गारी में बढ़ोतरी कृषि फसल कटाई के बाद होने वाले मौसमी बदलावों को दर्शाती है।

भारत की बेरोज़गारी दर क्यों बढ़ी?

जनवरी में बेरोज़गारी दर बढ़ने के प्रमुख कारण हैं:

  • फसल कटाई के बाद मंदी: कटाई के बाद कृषि गतिविधियों में कमी
  • मौसमी ग्रामीण कारण: अस्थायी कृषि नौकरियों में कमी
  • श्रम बल भागीदारी में नरमी: कुछ लोगों का अस्थायी रूप से नौकरी की तलाश छोड़ना

ग्रामीण रोजगार आमतौर पर फसल चक्र पर निर्भर करता है। कृषि के व्यस्त मौसम के बाद श्रम की मांग घट जाती है, जिससे अल्पकालिक रूप से बेरोज़गारी दर बढ़ सकती है।

करंट वीकली स्टेटस (CWS) को समझना

बेरोज़गारी दर का आकलन करंट वीकली स्टेटस (CWS) पद्धति के तहत किया जाता है।

CWS के अनुसार:

  • यदि किसी व्यक्ति ने पिछले सात दिनों में कम से कम एक घंटा काम किया है, तो उसे रोज़गार प्राप्त (Employed) माना जाता है।
  • यदि उसने एक भी घंटा काम नहीं किया, लेकिन वह काम करने के लिए उपलब्ध था या काम की तलाश कर रहा था, तो उसे बेरोज़गार (Unemployed) माना जाता है।

यह पद्धति अल्पकालिक रोजगार में होने वाले उतार-चढ़ाव को दर्शाती है और मासिक श्रम बाज़ार रुझानों को समझने में सहायक है।

5% बेरोज़गारी का अर्थ क्या है?

5% की बेरोज़गारी दर वैश्विक मानकों की तुलना में अभी भी मध्यम स्तर पर है, लेकिन इसमें हुई वृद्धि सावधानी का संकेत देती है।

मुख्य प्रभाव:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में अल्पकालिक रोजगार में कमी
  • शहरी रोजगार बाज़ार में हल्की नरमी
  • रोजगार सृजन उपायों को जारी रखने की आवश्यकता

हालांकि, मौसमी रुझान अक्सर आने वाले महीनों में बदल जाते हैं, जब कृषि और निर्माण गतिविधियाँ फिर से तेज़ हो जाती हैं।

PLFS और श्रम बाज़ार निगरानी

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) वर्ष 2017 में शुरू किया गया था और इसने पहले की पंचवर्षीय सर्वेक्षण प्रणाली का स्थान लिया।
  • यह सर्वेक्षण भारत में रोजगार और बेरोज़गारी से संबंधित नियमित आंकड़े प्रदान करता है।
  • शहरी आंकड़े मासिक रूप से जारी किए जाते हैं।
  • ग्रामीण और शहरी संयुक्त आंकड़े तिमाही आधार पर जारी होते हैं।
  • करंट वीकली स्टेटस पद्धति नीति निर्माताओं को श्रम बाज़ार की अल्पकालिक स्थिति का आकलन करने और लक्षित नीतियाँ बनाने में मदद करती है।

 

 

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