भारत के इस्पात उद्योग ने अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक को खो दिया है। जतिंदर मेहरा, जो एस्सार समूह के मेटल्स एंड माइनिंग डिवीजन के वाइस चेयरमैन और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के पूर्व प्रमुख रहे थे, का 25 फरवरी 2026 को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। छह दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने बड़े औद्योगिक परियोजनाओं, परिचालन उत्कृष्टता और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से भारत की इस्पात विकास गाथा को नई दिशा दी। उनके योगदान ने देश के इस्पात क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जतिंदर मेहरा – भारत की इस्पात विकास गाथा के स्तंभ
जतिंदर मेहरा को भारत के इस्पात और धातु क्षेत्र का एक मजबूत स्तंभ माना जाता था। अपने निधन के समय वे Essar Group के मेटल्स एंड माइनिंग डिवीजन में वाइस चेयरमैन के पद पर कार्यरत थे।
उनके करियर की प्रमुख विशेषताएँ:
- इस्पात उद्योग में 60 से अधिक वर्षों का अनुभव
- गहन तकनीकी ज्ञान और प्रभावी परिचालन नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध
- क्षमता विस्तार और एकीकृत इस्पात परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका
- परिवर्तनकारी औद्योगिक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए पहचान
उनके दूरदर्शी नेतृत्व और रणनीतिक सोच ने भारत के आधुनिक इस्पात विनिर्माण परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जतिंदर मेहरा की एस्सार समूह में भूमिका और प्रमुख इस्पात परियोजनाएँ
एस्सार ग्रुप में जतिंदर मेहरा ने कंपनी के इस्पात कारोबार के विस्तार और सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कई बड़े और एकीकृत औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को नई दिशा मिली।
उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:
- गुजरात के हजीरा स्थित हजीरा स्टील प्लांट का विस्तार
- ओडिशा के पारादीप में पारादीप स्टील परियोजना का विकास
- एस्सार की मेटल्स और माइनिंग रणनीति को मजबूत करना
- बड़े पैमाने पर एकीकृत औद्योगिक सुविधाओं का नेतृत्व
एस्सार ग्रुप ने अपने बयान में उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया, जिनका योगदान कंपनी की विकास यात्रा में स्थायी रूप से दर्ज रहेगा।
जतिंदर मेहरा का एस्सार से परे नेतृत्व – पूर्व RINL प्रमुख
एस्सार ग्रुप में अपनी भूमिका से पहले, जतिंदर मेहरा ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के प्रमुख के रूप में भी सेवा दी। आरआईएनएल, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट की कॉरपोरेट इकाई है।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने:
- सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात इकाइयों को मजबूत किया
- क्षमता निर्माण और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया
- परिचालन दक्षता और नवाचार को प्रोत्साहित किया
सार्वजनिक और निजी—दोनों क्षेत्रों में उनके व्यापक अनुभव ने उन्हें भारत की इस्पात नीति और औद्योगिक जगत में एक सम्मानित और प्रभावशाली आवाज बनाया।
भारत के इस्पात उद्योग में जतिंदर मेहरा की विरासत
जतिंदर मेहरा का करियर भारत के तीव्र औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ विकसित हुआ। स्वतंत्रता के बाद इस्पात उद्योग की प्रारंभिक नींव से लेकर आधुनिक एकीकृत संयंत्रों तक, उन्होंने विकास के महत्वपूर्ण चरणों को न केवल देखा बल्कि उन्हें आकार भी दिया।
उनकी विरासत में शामिल हैं:
- इस्पात उत्पादन में तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देना
- अवसंरचना-आधारित औद्योगिक विकास को समर्थन
- इंजीनियरों और प्रबंधकों की नई पीढ़ियों का मार्गदर्शन
- भारत को वैश्विक स्तर पर प्रमुख इस्पात उत्पादक देश बनाने में योगदान
आज भारत विश्व के शीर्ष इस्पात उत्पादक देशों में शामिल है, और इस उपलब्धि की नींव रखने में जतिंदर मेहरा जैसे दूरदर्शी नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


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