स्पेन ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर देशव्यापी प्रतिबंध की घोषणा की है। इस फैसले के साथ स्पेन ऐसा कदम उठाने वाला यूरोप का पहला देश और ऑस्ट्रेलिया के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है। इस निर्णय की घोषणा स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट के दौरान अपने संबोधन में की। यह प्रतिबंध लगभग एक सप्ताह के भीतर लागू होने की संभावना है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल युग में सोशल मीडिया के नियमन को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं को दर्शाता है।
हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है। जहाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म सीखने और संवाद के नए अवसर प्रदान करते हैं, वहीं इससे जुड़ी कई गंभीर समस्याएँ भी सामने आई हैं, जैसे—ऑनलाइन लत, साइबर बुलिंग, हानिकारक कंटेंट का संपर्क और डेटा गोपनीयता से जुड़े जोखिम।
दुनिया भर की सरकारें अब यह बहस कर रही हैं कि डिजिटल स्पेस में बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। स्पेन का यह निर्णय कई देशों में चल रही इसी तरह की चर्चाओं की कड़ी है और दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा लागू किए गए समान प्रतिबंध के बाद आया है।
वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने मौजूदा ऑनलाइन माहौल को “डिजिटल वाइल्ड वेस्ट” बताया। उन्होंने कहा कि नाबालिगों को अनियंत्रित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से बचाने के लिए सख़्त नियमों की आवश्यकता है।
नई नीति के तहत:
स्पेन ऐसा करने वाला दुनिया का दूसरा देश है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था।
ऑस्ट्रेलिया के फैसले के बाद कई टेक कंपनियों ने चिंता जताई थी। मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) ने बताया कि उसने 5.5 लाख से अधिक नाबालिग अकाउंट्स हटाए हैं। मेटा का तर्क था कि पूर्ण प्रतिबंध की बजाय उद्योग-नेतृत्व वाले सुरक्षा मानक अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
स्पेन के फैसले का महत्व
स्पेन का यह कदम वैश्विक स्तर पर इन मुद्दों पर बहस को और तेज़ कर सकता है:
एक प्रमुख यूरोपीय देश होने के नाते, स्पेन का यह निर्णय अन्य यूरोपीय संघ (EU) देशों को भी समान कानून या सख़्त डिजिटल नियमों पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
यह प्रतिबंध सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बेहतर आयु-सत्यापन प्रणालियाँ और कंटेंट नियंत्रण लागू करने का दबाव बढ़ाएगा। साथ ही, यह बच्चों और परिवारों के डिजिटल तकनीक से जुड़ने के तरीकों को भी प्रभावित कर सकता है।
समर्थकों का मानना है कि इससे:
हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इसके कार्यान्वयन, निगरानी और बच्चों की डिजिटल शिक्षा तक पहुँच को लेकर व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
स्पेन यूरोपीय संघ का सदस्य है और वैश्विक स्तर पर शासन, सामाजिक नीति और डिजिटल नियमन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाता है।
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