ईरान–इज़राइल तनाव के बीच चर्चा: क्या ईरान में हैं हिंदू मंदिर?

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग ने पूरी विश्व में उथल-पुथल मचा रखी है। दोनों ओर से लगातार हमले जारी हैं। आसमान से गिरती मिसाइलों ने दोनों तरफ भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तक कई इजरायली और अमेरिकी लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई भी इस युद्ध में मारे जा चुके हैं। युद्ध के चलते ईरान में रहने वाले हिंदुओं की भी बड़ी चर्चा हो रही है। जहां एक ओर यह संघर्ष सुर्खियों में छाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ लोगों के मन में एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठ रहा है। क्या ईरान में हिंदू मंदिर हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब।

बंदर अब्बास का ऐतिहासिक मंदिर

बता दें, ईरान में हिंदू विरासत के सबसे बड़े उदाहरणों में से एक विष्णु मंदिर है। इसे स्थानीय रूप से ‘इबादतगाह-ए-हिंदू” के नाम से भी जाना जाता है। इसका अर्थ होता है हिंदुओं का पूजा स्थल। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1892 में गुजरात के उन हिंदू व्यापारियों ने करवाया था जो व्यापार के उद्देश्य से बंदर अब्बास के बंदरगाह शहर में आकर बस गए थे। इसके वास्तुकला बहुत ज्यादा अनोखी है। इसमें भारतीय मंदिर वास्तुकला एवं ईरानी तत्वों का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।

मंदिर की खासियत: मंदिर का निर्माण मूंगा पत्थर, मोर्टार, मिट्टी और लुई चाक से किया गया है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण के भी कुछ चित्र उकेरे गए हैं। शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का आठवां और पूर्ण अवतार बताया गया है। मंदिर की बनावट पूरी तरह से भारतीय वास्तुकला पर आधारित है। मंदिर का एक केंद्रीय वर्गाकार कक्ष है, जिसके ऊपर गुंबद भी है। मुख्य भवन के गुंबद पर 72 बुर्ज हैं।

चाबहार के बंदरगाह शहर के पास स्थित एक और मंदिर

चाबहार के बंदरगाह शहर के पास एक और जरूरी स्थल स्थित है। यहां एक हिंदू मंदिर है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण भी गुजराती व्यापारियों ने ही करवाया था। इन मंदिरों की स्थापना मुख्य रूप से तटीय व्यापार मार्गों के किनारे की गई थी। यहां भारतीय व्यापारी हमेशा व्यापार के सिलसिले में आया करते थे। ये मंदिर ना केवल पूजा पाठ के स्थलों के रूप में काम करते थे बल्कि विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय हेतु सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में भी अपनी अहम भूमिका निभाते थे।

अन्य शहर में हिंदुओं के पूजा के छोटे स्थान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक मंदिरों के अतिरिक्त तेहरान, जहेदान एवं इस्फहान जैसे शहरों में हिंदुओं के पूजा के छोटे स्थान भी होने की खबर है। इन जगहों पर हिंदू समुदाय के लोग दीवाली जैसे त्योहार मनाने और धार्मिक रस्में पूरी करने के लिए इकट्ठा होते हैं।

ईरान में हिंदू आबादी कम

हालांकि ईरान में हिंदू आबादी कम है लेकिन इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व काफी ज्यादा है। जो मंदिर आज भी बचे हुए हैं वे केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं के इतिहास के प्रतीक हैं।

ईरान में हिंदू मंदिर के मुख्य तथ्य:

  • बंदर अब्बास मंदिर: इसे ‘इबादतगाह-ए-हिंदू’ कहा जाता है, जो भारतीय और ईरानी वास्तुकला का मिश्रण है।
  • स्थान: यह मंदिर बंदर अब्बास की इमाम खोमेनी स्ट्रीट पर स्थित है, जो कभी व्यस्त बंदरगाह क्षेत्र था।
  • संरचना: मंदिर में एक चौकोर कमरा और एक बड़ा गुंबद है, जिसमें भगवान कृष्ण के चित्र भी हैं।
  • वर्तमान स्थिति: अब यहाँ नियमित पूजा नहीं होती, लेकिन यह एक संरक्षित सांस्कृतिक स्थल है।

तेहरान में प्रसिद्ध गुरुद्वारा

ईरान की राजधानी तेहरान में ‘भाई गंगा सिंह सभा’ नाम का एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा भी है। इसका निर्माण वर्ष 1941 में करवाया गया था। ईरान में इसे ‘मस्जिद-ए-हिंडन’ के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक शुक्रवार के दिन यहां लंगर का आयोजन किया जाता है। बता दें कि ईरान में सिखों की संख्या बहुत कम है।

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vikash

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