रूस ने अपनी नवीनतम परमाणु-चालित पनडुब्बी खाबारोव्स्क (Khabarovsk) को लॉन्च किया है, जिसे परमाणु-सक्षम अंडरवॉटर ड्रोन पोसाइडन (Poseidon) को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पोसाइडन को अक्सर “डूम्सडे ड्रोन” कहा जाता है। इस पनडुब्बी का औपचारिक लॉन्च 1 नवंबर 2025 को रूस के प्रमुख नौसैनिक जहाज निर्माण केंद्र सेवमाश शिपयार्ड, सेवेरोद्विंस्क में किया गया। यह लॉन्च वैश्विक सुरक्षा तनावों के बीच रूस की रणनीतिक नौसैनिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और अपने परमाणु बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
परमाणु पनडुब्बियाँ रूस की न्यूक्लियर ट्रायड का अहम हिस्सा हैं, जिसमें ज़मीनी मिसाइलें, हवाई रणनीतिक बॉम्बर और समुद्री परमाणु प्लेटफॉर्म शामिल होते हैं। इन पनडुब्बियों को उनकी गोपनीयता (स्टेल्थ), लंबी तैनाती क्षमता और सेकेंड-स्ट्राइक क्षमता के लिए जाना जाता है, जिससे बड़े संघर्ष की स्थिति में भी प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
खाबारोव्स्क रूस के नेक्स्ट-जेनरेशन अंडरवॉटर सिस्टम्स प्रोग्राम का हिस्सा है और इसे विशेष रूप से पोसाइडन परमाणु-चालित अंडरवॉटर ड्रोन के विकास से जोड़ा गया है। पोसाइडन को लंबी दूरी और गहरे समुद्र में संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि वह पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चकमा दे सके।
इस पनडुब्बी का शुभारंभ रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉव ने एक औपचारिक समारोह में किया। इस अवसर पर रूसी नौसेना के प्रमुख एलेक्ज़ेंडर मोइसेयेव, वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी और जहाज निर्माण क्षेत्र के अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने इसे रूसी नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उन्नत अंडरवॉटर हथियारों और रोबोटिक प्रणालियों से लैस पनडुब्बियाँ रूस की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगी।
पोसाइडन एक परमाणु-चालित और परमाणु-सशस्त्र अंडरवॉटर ड्रोन है, जो समुद्र के भीतर अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक यात्रा करने में सक्षम माना जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह अत्यधिक गहराई और तेज़ गति से संचालित हो सकता है, जिससे इसका पता लगाना और इसे रोकना बेहद कठिन हो जाता है।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, पोसाइडन का उद्देश्य:
हालाँकि रूसी अधिकारी इसे एक रक्षात्मक प्रतिरोधक प्रणाली बताते हैं, लेकिन इसकी अत्यधिक विनाशकारी क्षमता—विशेषकर तटीय बुनियादी ढाँचे के लिए—ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई है।
खाबारोव्स्क का लॉन्च रूस के परमाणु और नौसैनिक आधुनिकीकरण पर निरंतर फोकस को दर्शाता है। यह उस वैश्विक प्रवृत्ति का भी हिस्सा है, जिसमें प्रमुख शक्तियाँ स्वायत्त (ऑटोनॉमस) और अंडरवॉटर हथियार प्रणालियों जैसी अगली पीढ़ी की सैन्य तकनीकों में निवेश कर रही हैं।
रूस के लिए, ऐसी प्रणालियाँ अन्य परमाणु-सशस्त्र देशों के साथ रणनीतिक समानता (Strategic Parity) बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती हैं। रूसी अधिकारियों का कहना है कि ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं, न कि संघर्ष शुरू करने के लिए।
खाबारोव्स्क जैसी प्रणालियों की तैनाती पर अन्य प्रमुख शक्तियाँ करीबी निगरानी रखेंगी। यह वैश्विक हथियार नियंत्रण चर्चाओं को भी प्रभावित कर सकती है, खासकर परमाणु हथियारों, अंडरवॉटर सिस्टम्स और स्वायत्त सैन्य तकनीकों से जुड़े नियमों के संदर्भ में।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मानवरहित और परमाणु-चालित अंडरवॉटर हथियारों का बढ़ता उपयोग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को और जटिल बनाता है और भविष्य के हथियार नियंत्रण ढाँचों को लेकर नए प्रश्न खड़े करता है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]स्पेन ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर देशव्यापी…
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने फरवरी 2026 में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) के…
वैश्विक खेल प्रशासन के लिए एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने ईरान…
एलन मस्क ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब वे दुनिया के…
भारतीय रेलवे ने भारत की पहली एलएनजी–डीज़ल ड्यूल-फ्यूल DEMU ट्रेन शुरू करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि…
निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में दो दशकों से अधिक समय तक सरकारी वर्चस्व…