भारत के गणतंत्र दिवस समारोह (26 जनवरी 2026) में कूटनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व देखने को मिल सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो सकते हैं। यूरोपीय संघ द्वारा भारत के निमंत्रण को स्वीकार किया जाना ऐसे समय में भारत–EU रणनीतिक साझेदारी के बढ़ते महत्व को दर्शाता है, जब वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
संभावित मुख्य अतिथि कौन होंगे?
संभावित मुख्य अतिथियों में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा शामिल हैं। इन दोनों नेताओं की संयुक्त उपस्थिति यूरोपीय संघ की पहचान को एक एकीकृत राजनीतिक और आर्थिक ब्लॉक के रूप में दर्शाती है, न कि अलग-अलग सदस्य देशों के समूह के रूप में। उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय ग्रीन डील और कम्पटीटिवनेस कम्पास जैसी प्रमुख पहलों का नेतृत्व करने के लिए जानी जाती हैं, जिनका उद्देश्य अमेरिका और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यूरोपीय संघ की आर्थिक मजबूती बढ़ाना है। वहीं, 2024 में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष बने एंतोनियो कोस्टा EU शिखर सम्मेलनों के समन्वय और सदस्य देशों के बीच कूटनीतिक सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में उनका अनुभव यूरोपीय संघ के नेतृत्व को अतिरिक्त राजनीतिक गहराई प्रदान करता है।
भारत–EU शिखर सम्मेलन से संबंध
EU नेताओं की यह यात्रा भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से भी जुड़ी हो सकती है, जिसे अस्थायी रूप से 27 जनवरी 2026 के लिए प्रस्तावित माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि यह शिखर सम्मेलन आयोजित होता है, तो यह ऐसे समय में होगा जब भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ताएँ वर्षों के ठहराव के बाद फिर से शुरू हुई हैं।
नई वार्ताओं में बाजार पहुंच, सेवाएं, निवेश और आपूर्ति-श्रृंखला की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दिसंबर 2025 में भारत आए EU के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोश शेफचोविच ने इन वार्ताओं को तेज करने की दिशा में अहम भूमिका निभाई थी। गणतंत्र दिवस पर शीर्ष EU नेतृत्व की मौजूदगी दोनों पक्षों पर समझौते को आगे बढ़ाने का राजनीतिक दबाव बना सकती है।
भारत–EU FTA क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रस्तावित भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता दोनों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के लिए, यह दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा और कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे नियमों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। स्टील और एल्युमिनियम जैसे निर्यात पर लगने वाले कार्बन कर को सहयोग और साझा मानकों के जरिए कम किया जा सकता है।
यूरोपीय संघ के लिए, भारत के साथ मजबूत व्यापार संबंध चीन पर निर्भरता कम करने, आपूर्ति-श्रंखलाओं में विविधता लाने और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने में सहायक होंगे। यह समझौता हरित प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण—जैसे हाइड्रोजन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ विनिर्माण—को भी बढ़ावा देगा, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करेगा।
यात्रा का रणनीतिक महत्व
गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेताओं को सामूहिक रूप से मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना भारत की इस मान्यता को दर्शाता है कि EU एक बहुध्रुवीय विश्व में उसका प्रमुख रणनीतिक साझेदार है। वैश्विक अनिश्चितता, व्यापार विखंडन और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत–EU सहयोग नियम-आधारित व्यापार, सतत विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


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