वित्तीय प्रणाली में ग्राहक संरक्षण को मजबूत करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शिकायत निवारण (Grievance Redressal) से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संशोधित मानदंडों के तहत, बैंकों और पात्र गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को आंशिक रूप से निपटाई गई या अस्वीकार की गई शिकायतों को स्वतः आंतरिक लोकपाल (Internal Ombudsman – IO) के पास भेजना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य तेज़ समाधान, अधिक जवाबदेही और सभी विनियमित संस्थाओं में शिकायतों के समान एवं पारदर्शी निपटान को सुनिश्चित करना है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निर्देश दिया है कि बैंक और कुछ NBFCs, आंशिक रूप से निस्तारित या खारिज की गई शिकायतों को स्वतः आंतरिक लोकपाल (IO) को अग्रेषित करें तथा शिकायत प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय ग्राहकों को अनिवार्य रूप से सूचित करें।
1. स्वचालित शिकायत प्रबंधन प्रणाली (CMS)
2. समीक्षा और निपटान की समय-सीमा
समयबद्ध शिकायत निवारण के लिए RBI ने स्पष्ट समय-सीमाएँ तय की हैं—
3. शिकायतों का वर्गीकरण
बैंकों को CMS के तहत शिकायतों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करना होगा—
केवल आंशिक रूप से निस्तारित या अस्वीकृत शिकायतें ही IO के पास जाएँगी। RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक ही शाखा या इकाई शिकायत को बंद नहीं कर सकती, चाहे वह निस्तारित हो या अस्वीकृत—यह हितों के टकराव से बचाव और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। ग्राहकों को प्रभावित न करने वाले आंतरिक कॉर्पोरेट धोखाधड़ी से जुड़े मामलों को IO के दायरे से बाहर रखा गया है।
4. बोर्ड स्तर पर निगरानी को मजबूत करना
5. बैंकों और NBFCs पर लागूता
6. आंतरिक लोकपाल प्रणाली के बारे में
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