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पोंगल 2026: तारीख, शुभ अनुष्ठान, परंपराएं और महत्व

पोंगल दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण फसल त्योहारों में से एक है। पोंगल 2026 गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा, जो चार दिवसीय पोंगल पर्व का मुख्य दिन होता है। यह त्योहार सूर्य देव, प्रकृति और किसानों के प्रति सफल फसल के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने को समर्पित है। इसे मुख्य रूप से तमिलनाडु में तथा दुनिया भर के तमिल समुदायों द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

क्यों चर्चा में है?

पोंगल 2026 को 15 जनवरी को मनाया जा रहा है, जो पारंपरिक चार दिवसीय पोंगल उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस कारण यह पूरे तमिलनाडु और तमिल-भाषी क्षेत्रों में विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है।

पोंगल क्या है?

  • पोंगल एक प्राचीन फसल धन्यवाद उत्सव है, जिसे तमिल माह ‘थाई’ में मनाया जाता है।
  • यह शीत अयनांत (Winter Solstice) के अंत और सूर्य के उत्तरायण गमन की शुरुआत का प्रतीक है।
  • यह मकर संक्रांति, उत्तरायण और लोहड़ी जैसे अन्य फसल पर्वों के समान समय पर मनाया जाता है, हालांकि क्षेत्रीय परंपराएँ भिन्न होती हैं।
  • थाई पोंगल विशेष रूप से सूर्य देव को समर्पित होता है, जो कृषि और मानव जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा, ऊष्मा और जीवन प्रदान करते हैं।

पोंगल 2026: चार दिवसीय उत्सव का विवरण

पोंगल चार दिनों तक मनाया जाता है, और हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है।

  • भोगी पोंगल (14 जनवरी): स्वच्छता और नवीनीकरण का प्रतीक। इस दिन पुराने सामान को त्यागा जाता है और अलाव जलाए जाते हैं।
  • थाई पोंगल (15 जनवरी): मुख्य पर्व, जो सूर्य देव को समर्पित होता है।
  • मट्टू पोंगल (16 जनवरी): कृषि में पशुओं, विशेषकर बैलों और गायों के योगदान के सम्मान में मनाया जाता है।
  • काणुम पोंगल (17 जनवरी): सामाजिक उत्सव का दिन, जिसे परिवार और समुदाय के साथ मेल-जोल और भ्रमण में बिताया जाता है।

पोंगल 2026 की रस्में और परंपराएँ

  • पोंगल का सबसे प्रमुख अनुष्ठान पोंगल व्यंजन बनाना है, जो नई फसल के चावल, दूध और गुड़ से तैयार किया जाता है।
  • इसे खुले में नए मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है, और जब दूध उफनता है तो इसे “पोंगल ऊथुम” कहा जाता है, जो समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक है।
  • घरों को चावल के आटे से बने रंग-बिरंगे कोलम से सजाया जाता है, दरवाजों पर आम के पत्ते लगाए जाते हैं, और लोग वेष्टि व साड़ी जैसे पारंपरिक परिधान पहनते हैं, जो सांस्कृतिक गौरव और पवित्रता को दर्शाते हैं।

पोंगल का महत्व

  • थाई पोंगल प्रकृति, किसानों, पशुओं और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।
  • यह भारत की कृषि आधारित परंपराओं को सुदृढ़ करता है और मानव व पर्यावरण के गहरे संबंध को उजागर करता है।
  • यह त्योहार साझेदारी, सामुदायिक एकता और प्राकृतिक संसाधनों के सम्मान जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है।

सांस्कृतिक उत्सव के रूप में पोंगल

  • पोंगल भारत के सबसे प्राचीन और निरंतर मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है, जिसका उल्लेख प्राचीन तमिल साहित्य में मिलता है।
  • अन्य धार्मिक त्योहारों के विपरीत, पोंगल मुख्य रूप से ऋतु और कृषि आधारित है, जो मंदिरों की बजाय प्राकृतिक चक्रों पर केंद्रित है।
  • यह भारतीय परंपराओं में निहित सतत जीवनशैली और पर्यावरणीय चेतना को प्रतिबिंबित करता है।
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