सरकार भारत की पहली आतंकवाद विरोधी नीति लाने की तैयारी में

भारत अपनी पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी (एंटी-टेरर) नीति को लागू करने की दिशा में अग्रसर है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह नीति इस समय अंतिम चरण में है और इसके माध्यम से केंद्र व राज्यों को आतंकवाद की रोकथाम, जांच और प्रतिक्रिया के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान किए जाने की उम्मीद है। यह पहल भारत के बदलते सुरक्षा परिदृश्य—जैसे ऑनलाइन कट्टरपंथ, सीमा-पार खतरे और खुफिया व कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता—को दर्शाती है।

नीति के प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • नई नीति में उभरते और गैर-पारंपरिक आतंकवादी खतरों पर विशेष जोर दिया गया है।
  • डिजिटल कट्टरपंथ (Digital Radicalisation): चरमपंथी संगठन सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से, विशेषकर युवाओं को, भर्ती और वैचारिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
  • खुले सीमावर्ती क्षेत्र: विशेष रूप से नेपाल सीमा के दुरुपयोग को रोकना, जिसका इस्तेमाल आतंकी मॉड्यूल आवागमन और लॉजिस्टिक्स के लिए करते रहे हैं।
  • विदेशी फंडिंग से जुड़े धर्मांतरण और कट्टरपंथी नेटवर्क: जो आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए जोखिम पैदा करते हैं।

तैयारी और अंतर-एजेंसी परामर्श

  • नीति को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का एक बड़ा सम्मेलन 26–27 दिसंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है।
  • इसमें केंद्रीय एजेंसियां और राज्य स्तरीय आतंकवाद-रोधी इकाइयां नीति के ढांचे और संचालन पहलुओं पर चर्चा करेंगी।
  • NIA महानिदेशक सदानंद दाते और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) प्रमुख ब्रिघु श्रीनिवासन पहले ही राज्य पुलिस प्रमुखों के साथ बदलते आतंकी रुझानों और प्रतिक्रिया तंत्र पर विचार-विमर्श कर चुके हैं।

नीति को आकार देने वाले केस स्टडी

  • हाल की आतंकी घटनाओं ने नीति की दिशा को प्रभावित किया है।
  • 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला—इसने नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के माध्यम से सुरक्षित डेटा पहुंच को बेहतर बनाने पर चर्चा को तेज किया।
  • 10 नवंबर को लाल किले के पास आत्मघाती हमले के आरोपियों से पूछताछ में ऑनलाइन कट्टरपंथ की भूमिका सामने आई, जिससे साइबर निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता रेखांकित हुई।

पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की आवश्यकता

  • हालांकि भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए कई कानून, एजेंसियां और परिचालन तंत्र मौजूद हैं, लेकिन एक समग्र राष्ट्रीय नीति के अभाव में कई बार प्रतिक्रियाएं बिखरी हुई रही हैं।
  • प्रस्तावित नीति का उद्देश्य खुफिया साझा करना, निवारक रणनीतियां और परिचालन प्रतिक्रिया—इन सभी को एक साझा रणनीतिक दृष्टि के तहत एकीकृत करना है।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति लाने की घोषणा कर चुके हैं, जो दीर्घकालिक और संरचित काउंटर-टेरर योजना की ओर संकेत करती है।

भारत के लिए महत्व

  • भारत की पहली आतंकवाद-रोधी नीति प्रतिक्रियात्मक (Reactive) काउंटर-टेररिज़्म से सक्रिय, खुफिया-आधारित रोकथाम की ओर बदलाव को दर्शाती है।
  • केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को संस्थागत बनाकर यह नीति तैयारी बढ़ाने, प्रतिक्रिया समय घटाने और आतंकवाद से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय दृष्टिकोण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।

मुख्य बिंदु 

  • भारत अपनी पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी नीति जारी करने की तैयारी में है।
  • नीति का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के लिए एकीकृत ढांचा प्रदान करना है।
  • प्रमुख फोकस: डिजिटल कट्टरपंथ, खुली सीमाएं, विदेशी-प्रायोजित नेटवर्क।
  • NIA सम्मेलन (26–27 दिसंबर, नई दिल्ली) में नीति के ढांचे पर चर्चा होगी।
  • NATGRID, NIA, NSG, IB और राज्य पुलिस बलों की अहम भूमिका।
  • प्रशिक्षण, खुफिया साझा करना और निवारक कार्रवाई पर विशेष जोर।

गोदावरी मुहाने पर 10-11 जनवरी को 40वीं एशियाई वॉटरबर्ड जनगणना होगी

40वां एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (AWC) तथा 60वां अंतरराष्ट्रीय वॉटरबर्ड सेंसस (IWC) का आयोजन 10–11 जनवरी 2026 को किया जाएगा। यह जनगणना गोदावरी मुहाना, जिसमें आंध्र प्रदेश का जैव विविधता से समृद्ध कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य भी शामिल है, में संपन्न होगी। यह व्यापक जैव विविधता अभ्यास आर्द्रभूमि संरक्षण, प्रवासी पक्षी निगरानी और वैश्विक पारिस्थितिक अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

यह सेंसस विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गोदावरी मुहाना भारत के उन दुर्लभ स्थलों में से एक है, जहां वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त दो प्रवासी पक्षी—इंडियन स्किमर और ग्रेट नॉट—एक साथ देखे जा सकते हैं, जिससे यह क्षेत्र पक्षी संरक्षण के लिए अत्यंत प्राथमिक परिदृश्य बन जाता है।

आयोजन संस्थान और सहयोग

गोदावरी मुहाने में यह जनगणना संयुक्त रूप से आयोजित की जाएगी—

  • आंध्र प्रदेश वन विभाग
  • बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS)
  • वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII)
  • वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF)

यह बहु-संस्थागत सहयोग वैज्ञानिक सटीकता, वैश्विक स्तर पर तुलनीय आंकड़ों और सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित करता है। स्थानीय पक्षीप्रेमियों और स्वयंसेवकों को भी इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के बारे में

एशियन वॉटरबर्ड सेंसस एक दीर्घकालिक नागरिक विज्ञान एवं वैज्ञानिक निगरानी कार्यक्रम है, जो एशिया भर में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है और वैश्विक अंतरराष्ट्रीय वॉटरबर्ड सेंसस का हिस्सा है।

  • यह हर वर्ष जनवरी में आयोजित होता है।
  • इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों में प्रवासी और स्थानीय जलपक्षियों की संख्या, वितरण और प्रवृत्तियों का आकलन करना है।
  • वर्ष 2026 का संस्करण 40वां एशियन और 60वां अंतरराष्ट्रीय वॉटरबर्ड सेंसस होगा, जो छह दशकों से जारी वैश्विक पारिस्थितिक निगरानी को दर्शाता है।
  • कोरिंगा में यह 10वीं बार आयोजित किया जाएगा, जो इस क्षेत्र के दीर्घकालिक महत्व को दर्शाता है।

प्रमुख प्रजातियां (फोकस स्पीशीज़)

2026 की जनगणना में विशेष रूप से चार प्रवासी जलपक्षी प्रजातियों पर ध्यान दिया जाएगा—

  • इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis)
  • IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered)।
  • पानी की सतह पर निचली लंबी चोंच से भोजन पकड़ने की अनूठी शैली।
  • शांत रेत-टीलों और मुहाना आवासों पर निर्भर।
  • इसकी वैश्विक आबादी का बड़ा हिस्सा भारत में पाया जाता है।

ग्रेट नॉट (Calidris tenuirostris)

  • IUCN के अनुसार संकटग्रस्त।
  • आर्कटिक प्रजनन क्षेत्रों से एशिया और ऑस्ट्रेलिया के तटीय आर्द्रभूमियों तक प्रवास।
  • इंटरटाइडल आवासों के नुकसान के कारण संख्या में तेज गिरावट।

यूरेशियन कर्ल्यू (Numenius arquata)

  • IUCN स्थिति: निकट संकटग्रस्त (Near Threatened)।
  • विश्व का सबसे बड़ा वाडर पक्षी।
  • आर्द्रभूमि क्षरण और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित।

यूरेशियन ऑयस्टरकैचर (Haematopus ostralegus)

  • तटीय क्षेत्रों का आकर्षक पक्षी।
  • शंख-समृद्ध इंटरटाइडल क्षेत्रों पर निर्भर।
  • इसकी संख्या तटीय पारिस्थितिकी की उत्पादकता का संकेतक मानी जाती है।

गोदावरी मुहाने का महत्व

भारत के पूर्वी तट पर स्थित गोदावरी मुहाना मैंग्रोव, कीचड़ वाले मैदान, नालों और रेत-टीलों का जटिल तंत्र है। कोरिंगा मैंग्रोव, सुंदरबन के बाद, भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव पारितंत्र है।

यह क्षेत्र प्रदान करता है—

  • प्रवासी पक्षियों के लिए समृद्ध भोजन क्षेत्र
  • शिकारियों और प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा
  • मछलियों और क्रस्टेशियनों के लिए प्रजनन एवं नर्सरी आवास

वैज्ञानिक और संरक्षण महत्व

जलपक्षी जैव-सूचक (Bio-indicators) माने जाते हैं, अर्थात उनकी संख्या आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य को दर्शाती है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के आंकड़ों का उपयोग—

  • आर्द्रभूमि स्वास्थ्य के आकलन
  • दीर्घकालिक जनसंख्या प्रवृत्तियों की निगरानी
  • प्राथमिक संरक्षण स्थलों की पहचान
  • रामसर स्थलों के प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों में किया जाता है।

भारत के लिए यह डेटा रामसर कन्वेंशन और प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय (CMS) जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को मजबूत करता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 40वां AWC और 60वां IWC: 10–11 जनवरी 2026
  • स्थान: गोदावरी मुहाना, कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य (आंध्र प्रदेश)
  • फोकस प्रजातियां: इंडियन स्किमर (संकटग्रस्त), ग्रेट नॉट (संकटग्रस्त), यूरेशियन कर्ल्यू (निकट संकटग्रस्त), यूरेशियन ऑयस्टरकैचर
  • विशेष महत्व: इंडियन स्किमर और ग्रेट नॉट का सह-अस्तित्व
  • आयोजक: AP वन विभाग, BNHS, WII, WWF
  • महत्व: आर्द्रभूमि संरक्षण, प्रवासी पक्षी निगरानी और जैव विविधता नीति

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 25 साल

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने 25 दिसंबर 2025 को अपने 25 वर्ष पूरे किए। यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजनाओं में से एक है। PMGSY का उद्देश्य असंपर्कित ग्रामीण बस्तियों को हर मौसम में चलने योग्य सड़कों से जोड़ना है, ताकि गांवों का संपर्क बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और आर्थिक अवसरों से मजबूत हो सके।

PMGSY @ 25 : विस्तार और उपलब्धियां

  • योजना की शुरुआत से ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने भौतिक और संस्थागत दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय प्रगति की है।
  • दिसंबर 2025 तक, इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 8,25,114 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 7,87,520 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है। यह लगभग 95 से 96 प्रतिशत भौतिक प्रगति को दर्शाता है।
  • इतने बड़े पैमाने के कारण PMGSY को विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण सड़क योजनाओं में से एक माना जाता है।
  • बजटीय समर्थन लगातार इस योजना के महत्व को मजबूत करता रहा है।
  • वित्त वर्ष 2025–26 के लिए PMGSY को ₹19,000 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो ग्रामीण संपर्क को सुदृढ़ करने और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

पीएमजीएसवाई के अंतर्गत चरणबद्ध प्रगति

योजना की शुरुआत से अब तक,

  • कुल स्वीकृत सड़कें: 8,25,114 किलोमीटर
  • कुल पूर्ण सड़कें: 7,87,520 किलोमीटर (लगभग 95% प्रगति)
  • वित्त वर्ष 2025–26 का बजटीय आवंटन: ₹19,000 करोड़

पीएमजीएसवाई चरण–I (2000)

  • उद्देश्य: पहले से असंपर्कित ग्रामीण बसाहटों को हर मौसम में सड़क संपर्क उपलब्ध कराना।
  • लाभार्थी: देशभर की 1,63,339 ग्रामीण बसाहटें।

पीएमजीएसवाई चरण–II (2013)

  • फोकस: मौजूदा सड़क नेटवर्क का उन्नयन तथा ग्रामीण बाजारों और सेवा केंद्रों से बेहतर संपर्क स्थापित करना, ताकि परिवहन अधिक प्रभावी हो सके।
  • वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) – 2016
  • लक्षित क्षेत्र: 9 राज्यों के 44 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिले।
  • दोहरा उद्देश्य: सुरक्षा बलों की आवाजाही में सुधार तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।

पीएमजीएसवाई चरण–III (2019)

  • लक्ष्य: 1,25,000 किलोमीटर थ्रू रूट्स और प्रमुख ग्रामीण संपर्क सड़कों का निर्माण।
  • उपलब्धियां (दिसंबर 2025 तक):
  • स्वीकृत: 1,22,393 किलोमीटर
  • निर्मित: 1,01,623 किलोमीटर (लगभग 83% प्रगति)
  • परिणाम: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार तक पहुंच और रोजगार के अवसरों में सुधार।

पीएमजीएसवाई चरण–IV (2024–29)

  • उद्देश्य: 62,500 किलोमीटर सड़कों के माध्यम से 25,000 असंपर्कित बसाहटों को जोड़ना।
  • कुल परिव्यय: ₹70,125 करोड़
  • फोकस: विशेष श्रेणी के क्षेत्र — आदिवासी क्षेत्र, आकांक्षी जिले और मरुस्थलीय क्षेत्र।

प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी एवं गुणवत्ता आश्वासन

  • पीएमजीएसवाई की सफलता में उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक निगरानी प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और सड़कों की दीर्घकालिक गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
  • ऑनलाइन प्रबंधन, निगरानी और लेखा प्रणाली (OMMAS): यह प्रणाली भौतिक और वित्तीय प्रगति की रीयल-टाइम निगरानी को संभव बनाती है।
  • गुणवत्ता निरीक्षण: राष्ट्रीय और राज्य गुणवत्ता मॉनिटरों द्वारा किए गए निरीक्षण जियो-टैग किए जाते हैं और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपलोड किए जाते हैं, जिससे फील्ड स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  • ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफॉर्म: यह पांच वर्षीय दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period) के दौरान सड़कों के रखरखाव की व्यवस्थित निगरानी करता है तथा ठेकेदारों के भुगतान को सीधे सड़क के प्रदर्शन और गुणवत्ता परिणामों से जोड़ता है।
  • अनिवार्य जीपीएस-सक्षम वाहन ट्रैकिंग प्रणाली: मई 2022 से पीएमजीएसवाई-III के तहत लागू यह व्यवस्था मशीनरी की तैनाती और निर्माण प्रक्रियाओं की निगरानी कर निरीक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाती है।

तीन-स्तरीय गुणवत्ता निगरानी प्रणाली

एक सशक्त तीन-स्तरीय गुणवत्ता निगरानी प्रणाली के माध्यम से परिसंपत्तियों की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित की जाती है—

  • स्तर-I: कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा फील्ड स्तर पर जांच।
  • स्तर-II: स्वतंत्र राज्य गुणवत्ता मॉनिटरों द्वारा निरीक्षण।
  • स्तर-III: ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटरों के माध्यम से आकस्मिक ऑडिट।

इन सभी आकलनों को OMMAS में एकीकृत किया जाता है, जिससे रीयल-टाइम निगरानी संभव होती है।

प्रमुख बिंदु 

  • पीएमजीएसवाई की शुरुआत: 25 दिसंबर 2000; वर्ष 2025 में 25 वर्ष पूर्ण।
  • स्वीकृत सड़कें: 8.25 लाख किमी; पूर्ण: 7.87 लाख किमी (लगभग 96%)।
  • पीएमजीएसवाई-IV (2024–29): 62,500 किमी सड़कें, ₹70,125 करोड़ का परिव्यय, 25,000 बसाहटों को जोड़ने का लक्ष्य।
  • पीएमजीएसवाई-III: दिसंबर 2025 तक 83% निर्माण प्रगति।
  • प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग: OMMAS, e-MARG, जीपीएस ट्रैकिंग और तीन-स्तरीय गुणवत्ता निगरानी।
  • फोकस: सतत निर्माण सामग्री और जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) प्रौद्योगिकियां।

राष्ट्रपति ने नए संस्करण का शुभारंभ किया, संथाली संवैधानिक भाषाओं में शामिल हुई

राष्ट्रपति भवन में 25 दिसंबर 2025 को आयोजित एक विशेष समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संथाली भाषा में भारत के संविधान का विमोचन किया। यह संविधान ओल चिकि लिपि में प्रकाशित किया गया है, जिससे संथाली भाषी नागरिक अपनी मातृभाषा में देश के सर्वोच्च कानून को पढ़-समझ सकें और उससे जुड़ सकें। यह पहल समावेशी शासन, सांस्कृतिक सम्मान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुलभता के प्रति भारत की संवैधानिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, विशेष रूप से आदिवासी समुदायों के लिए।

संथाली में संविधान का विमोचन

  • राष्ट्रपति मुर्मु ने इसे संथाली समुदाय के लिए गर्व और आनंद का क्षण बताया।
  • उन्होंने कहा कि भाषा पहचान, भागीदारी और संवैधानिक जागरूकता में अहम भूमिका निभाती है।
  • संथाली में संविधान उपलब्ध होने से लाखों आदिवासी नागरिक अब अपने अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों से अधिक गहराई से जुड़ सकेंगे।
  • यह कदम संविधान को केवल कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए सुलभ जीवंत मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करता है।

ओल चिकि लिपि और उसका सांस्कृतिक महत्व

  • संविधान को ओल चिकि लिपि में प्रकाशित किया गया, जो संथाली भाषा की पारंपरिक लिपि है।
  • वर्ष 2025 ओल चिकि लिपि की शताब्दी का वर्ष है, जिससे यह विमोचन और भी प्रतीकात्मक बन गया।
  • राष्ट्रपति ने कानून एवं न्याय मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की और स्वदेशी लिपियों व ज्ञान परंपराओं के संरक्षण-प्रचार पर बल दिया।

संथाली भाषा की पृष्ठभूमि

  • संथाली भारत की प्राचीन जीवित आदिवासी भाषाओं में से एक है।
  • यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में व्यापक रूप से बोली जाती है।
  • इसकी सांस्कृतिक व जनसांख्यिकीय महत्ता को मान्यता देते हुए इसे 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
  • आठवीं अनुसूची में शामिल होने से भाषा के विकास, संरक्षण और प्रशासन-शिक्षा में उपयोग को बढ़ावा मिलता है।

संवैधानिक और राजनीतिक महत्व

  • संथाली में संविधान का प्रकाशन अनुच्छेद 350A और अनुच्छेद 29 की भावना के अनुरूप है, जो भाषाई अल्पसंख्यकों के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करते हैं।
  • यह संवैधानिक साक्षरता को मजबूत करता है, जो भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र का आधार है।

मुख्य तथ्य 

  • संथाली भाषा में संविधान का विमोचन: 25 दिसंबर 2025
  • लिपि: ओल चिकि (शताब्दी वर्ष 2025)
  • विमोचक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
  • स्थान: राष्ट्रपति भवन
  • संथाली का दर्जा: आठवीं अनुसूची (92वां संशोधन अधिनियम, 2003)
  • महत्त्व: आदिवासी अधिकार, भाषा नीति और संवैधानिक साक्षरता के लिए उपयोगी

वीर बाल दिवस 2025: जानें क्या है इसका इतिहास?

वीर बाल दिवस भारत में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिवस है, जो भारतीय इतिहास में बच्चों द्वारा दिखाए गए अद्वितीय साहस और बलिदान की याद दिलाता है। यह दिवस गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों—विशेष रूप से उनके छोटे पुत्रों—के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देता है, जिन्होंने अपने धर्म और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। यह स्मरण भारतीय इतिहास और नैतिक मूल्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वीर बाल दिवस क्या है और कब मनाया जाता है?

  • वीर बाल दिवस प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को पूरे भारत में मनाया जाता है।
  • यह तिथि साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह की शहादत की स्मृति में है।
  • वर्ष 1705 में मुगल शासकों द्वारा धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर उन्हें शहीद किया गया था।
  • भारत सरकार ने 2022 में इस दिवस की औपचारिक घोषणा की, ताकि बच्चों और युवाओं में धर्म (धार्मिकता), साहस और बलिदान के मूल्यों का प्रसार हो।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: गुरु गोबिंद सिंह जी और साहिबज़ादे

गुरु गोबिंद सिंह जी, सिखों के दसवें गुरु, एक महान आध्यात्मिक नेता, योद्धा, कवि और दार्शनिक थे। उन्होंने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की, जिसने समानता, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना को सुदृढ़ किया।

गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्र, जिन्हें सामूहिक रूप से साहिबज़ादे कहा जाता है—

  • साहिबज़ादा अजीत सिंह
  • साहिबज़ादा जुझार सिंह
  • साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह
  • साहिबज़ादा फ़तेह सिंह

18वीं शताब्दी की शुरुआत में पंजाब में सिखों पर मुगल शासन का अत्याचार बढ़ गया, और गुरु गोबिंद सिंह जी तथा उनका परिवार इसके प्रमुख लक्ष्य बने।

बड़े साहिबज़ादों की शहादत

  • 1705 में आनंदपुर साहिब की घेराबंदी के दौरान गुरु जी अपने परिवार से बिछुड़ गए।
  • उनके बड़े पुत्र साहिबज़ादा अजीत सिंह (18 वर्ष) और साहिबज़ादा जुझार सिंह (14 वर्ष) ने चमकौर के युद्ध में मुगल सेना से वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहादत प्राप्त की।
  • उनका बलिदान वीरता, कर्तव्य और अदम्य साहस का प्रतीक है।

छोटे साहिबज़ादों का हृदयविदारक बलिदान

  • इसके बाद सबसे करुण प्रसंग सामने आया। माता गुजरी के साथ साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह (9 वर्ष) और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह (7 वर्ष) को सरहिंद में मुगल सूबेदार वज़ीर ख़ान ने बंदी बना लिया।
  • उन्हें बार-बार इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव डाला गया, परंतु कम आयु होने के बावजूद उन्होंने धर्म त्यागने से इंकार कर दिया।
  • दंडस्वरूप उन्हें दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया; दीवार गिरने के बाद उन्हें शहीद कर दिया गया।
  • अपने पौत्रों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी ने भी प्राण त्याग दिए। यह घटना भारतीय इतिहास के सबसे मार्मिक और प्रेरक अध्यायों में से एक है।

वीर बाल दिवस क्यों घोषित किया गया?

2022 में वीर बाल दिवस की घोषणा का उद्देश्य—

  • भारत के स्वतंत्रता एवं धार्मिक संघर्षों में बच्चों के बलिदान को उजागर करना
  • विद्यार्थियों में निडरता, आस्था और नैतिक दृढ़ता के मूल्य विकसित करना
  • साहिबज़ादों की गाथा को राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बनाना, न कि केवल किसी एक समुदाय तक सीमित रखना
  • इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, गुरुद्वारों और सांस्कृतिक संस्थानों में सेमिनार, कथावाचन, प्रदर्शनी और वाद-विवाद आयोजित किए जाते हैं।

मुख्य बिंदु 

  • वीर बाल दिवस: 26 दिसंबर
  • घोषणा: भारत सरकार, 2022
  • स्मरण: साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह की शहादत
  • संबंध: गुरु गोबिंद सिंह जी और खालसा परंपरा
  • महत्त्व: करंट अफेयर्स, इतिहास और नैतिक शिक्षा के लिए उपयोगी
  • संदेश: साहस, सत्य और आस्था—भय से ऊपर हैं

सरदार उधम सिंह की 126वीं जयंती

सरदार ऊधम सिंह की 126वीं जयंती भारत के औपनिवेशिक काल में न्याय के लिए किए गए निरंतर संघर्ष की गंभीर याद दिलाती है। जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लेने के लिए जीवन समर्पित करने वाले इस महान क्रांतिकारी का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान है। उनका जीवन त्याग, धैर्य और साम्राज्यवादी अत्याचार के विरुद्ध अटूट न्याय-बोध का प्रतीक है।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

सरदार ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर ज़िले के सुनाम में हुआ। अल्पायु में माता–पिता के निधन के बाद वे अमृतसर के सेंट्रल खालसा अनाथालय में पले-बढ़े, जहाँ उन्हें राष्ट्रवादी विचारों और ब्रिटिश शासन की कठोर सच्चाइयों से परिचय मिला। कठिन परिस्थितियों, अनुशासन और क्रांतिकारी सोच ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा और औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध उनके न्यायप्रिय प्रतिरोध को मजबूत किया।

जलियांवाला बाग हत्याकांड के साक्षी

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में हुई भीषण गोलीबारी ऊधम सिंह के जीवन का निर्णायक मोड़ बनी। रेजिनाल्ड डायर के आदेश पर निहत्थे नागरिकों पर गोलियाँ चलीं, जिसमें 400 से अधिक लोग मारे गए और हज़ारों घायल हुए। यह नरसंहार तत्कालीन पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’ड्वायर के प्रशासन में हुआ। ऊधम सिंह इस त्रासदी के साक्षी थे। यह घटना उनके मन में स्थायी रूप से अंकित हो गई और उनके क्रांतिकारी पथ की प्रेरक शक्ति बनी।

क्रांतिकारी गतिविधियों की ओर रुझान

जलियांवाला बाग से गहरे आहत होकर ऊधम सिंह ने ब्रिटिश शासन के अंत के लिए जीवन समर्पित करने का संकल्प लिया। 1924 में वे ग़दर पार्टी से जुड़े—यह संगठन विदेशों में रहकर भारत में औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध आंदोलन को गति देता था। उन्होंने विभिन्न देशों में जाकर क्रांतिकारियों से संपर्क किया। 1927 में हथियार रखने के आरोप में उनकी गिरफ़्तारी हुई और पाँच वर्ष का कारावास हुआ—जिसने उनके संकल्प को और दृढ़ किया।

माइकल ओ’ड्वायर की हत्या

13 मार्च 1940 को, दो दशकों से अधिक प्रतीक्षा के बाद, ऊधम सिंह ने लंदन के कैक्सटन हॉल में सार्वजनिक सभा के दौरान माइकल ओ’ड्वायर की हत्या कर दी। यह एक सुविचारित, प्रतीकात्मक कार्रवाई थी—जलियांवाला बाग के जिम्मेदार व्यक्ति को जवाबदेह ठहराने का प्रयास। अदालत में ऊधम सिंह ने स्पष्ट कहा कि उनका कृत्य व्यक्तिगत द्वेष नहीं, बल्कि न्याय का कार्य है—उनकी निडर गवाही उनके वैचारिक दृढ़ता को दर्शाती है।

मुकदमा, फाँसी और शहादत

हत्या के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर मुकदमा चलाया गया और 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में फाँसी दी गई। उनकी शहादत ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का अमर शहीद बना दिया—वे शहीद-ए-आज़म सरदार ऊधम सिंह के रूप में पूजे गए।

विरासत और राष्ट्रीय सम्मान

स्वतंत्रता के बाद भी ऊधम सिंह की विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रही। 1974 में उनके पार्थिव अवशेष भारत लाए गए—यह राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक था। पंजाब सहित देशभर में उनके नाम पर स्मारक, संग्रहालय और शैक्षणिक संस्थान स्थापित हैं। उनका जीवन विलंबित किंतु दृढ़ न्याय का उदाहरण है—व्यक्तिगत नैतिक दृढ़ता से सत्ता के सबसे शक्तिशाली ढाँचों को चुनौती देने की प्रेरणा।

मुख्य तथ्य 

  • जन्म: 26 दिसंबर 1899, सुनाम (पंजाब)
  • साक्षी: जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)
  • संबद्धता: ग़दर पार्टी
  • हत्या: माइकल ओ’ड्वायर, 13 मार्च 1940 (कैक्सटन हॉल, लंदन)
  • फाँसी: 31 जुलाई 1940 (पेंटनविल जेल, लंदन)
  • उपाधि: शहीद-ए-आज़म सरदार ऊधम सिंह

वैभव सूर्यवंशी 36 गेंदों में शतक लगाकर सबसे युवा लिस्ट-ए शतकवीर बने

भारत की किशोर क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने पुरुषों की लिस्ट-ए क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। महज 14 वर्ष 272 दिन की उम्र में उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के उद्घाटन मैच में JSCA ओवल, रांची में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ बिहार की ओर से 84 गेंदों पर तूफानी 190 रन बनाए। उनकी इस विस्फोटक पारी में 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे, जिसकी बदौलत बिहार ने 574/6 का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास का सर्वोच्च टीम स्कोर है।

मैच प्रदर्शन

वैभव सूर्यवंशी ने रांची के JSCA ओवल ग्राउंड में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी ने एक सामान्य ग्रुप-स्टेज मुकाबले को सुर्खियों में छा जाने वाला मैच बना दिया।

रिकॉर्ड शतक

महज 36 गेंदों में शतक जड़कर वैभव सूर्यवंशी लिस्ट-ए क्रिकेट के सबसे युवा शतकवीर बन गए। यह किसी भारतीय द्वारा बनाया गया दूसरा सबसे तेज़ लिस्ट-ए शतक भी है, जिससे उनका नाम घरेलू क्रिकेट के चुनिंदा दिग्गजों की सूची में दर्ज हो गया।

लंबी पारी

युवा बल्लेबाज़ शतक पर ही नहीं रुके। उन्होंने केवल 84 गेंदों में 190 रन बनाए, जिसमें 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे। कुछ समय के लिए तो वे लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज़ दोहरे शतक के रिकॉर्ड को भी चुनौती देते नज़र आए।

टॉप 5 सबसे कम उम्र के लिस्ट ए सेंचुरी बनाने वाले

  1. वैभव सूर्यवंशी – 14 साल 272 दिन, बिहार बनाम अरुणाचल प्रदेश, 2025
  2. ज़हूर इलाही – 15 साल 209 दिन, पाकिस्तान ऑटोमोबाइल्स बनाम रेलवे, 1986
  3. रियाज़ हसन – 16 साल 9 दिन, बूस्ट बनाम बंद-ए-अमीर, 2018
  4. उस्मान तारिक – 16 साल 91 दिन, इस्लामाबाद बनाम गुजरांवाला, 2000-01
  5. नासिर जमशेद – 16 साल 92 दिन, कराची डॉल्फिन बनाम लाहौर लायंस, 2006

मुख्य बातें

  • वैभव सूर्यवंशी ने 36 गेंदों में शतक बनाया
  • सबसे कम उम्र के लिस्ट ए सेंचुरी बनाने वाले बने
  • मैच विजय हजारे ट्रॉफी में खेला गया
  • अंतिम स्कोर: 84 गेंदों में 190 रन
  • भारत की मजबूत युवा प्रतिभा पाइपलाइन को दिखाता है
  • बिहार क्रिकेट और भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए एक बड़ा बढ़ावा

हरियाणा ने हांसी को अपना 23वां जिला घोषित किया

एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार के तहत, हरियाणा सरकार ने हांसी को आधिकारिक तौर पर एक नया जिला घोषित कर दिया है, जिससे यह राज्य का 23वां जिला बन गया है। यह निर्णय एक आधिकारिक सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी हुआ है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में शासन व्यवस्था में सुधार करना और विकास गतिविधियों में तेजी लाना है।

नए हांसी जिले के बारे में

नई अधिसूचना के साथ, हांसी को पूर्ण जिला दर्जा दिया गया है। नवगठित जिले में दो प्रशासनिक उपखंड शामिल हैं—हांसी और नारनौंद। इस पुनर्गठन से हिसार जिले पर प्रशासनिक बोझ कम होने की उम्मीद है, साथ ही हांसी क्षेत्र को स्वतंत्र जिला स्तरीय प्रशासन प्राप्त होगा।

कानूनी और प्रशासनिक ढांचा

हांसी जिले के गठन की अधिसूचना हरियाणा भूमि राजस्व अधिनियम, 1887 और पंजीकरण अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के तहत जारी की गई थी। संवैधानिक और वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार, इस आदेश को हरियाणा के राज्यपाल द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिससे इसे औपचारिक कानूनी वैधता प्राप्त हुई।

राज्य सरकार की भूमिका

यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में लिया गया। हरियाणा सरकार ने कहा कि नए जिले के गठन से बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण, कानून व्यवस्था में सुधार और संतुलित क्षेत्रीय विकास होगा। यह कदम विकेंद्रीकृत शासन पर सरकार के जोर को भी दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

हांसी पहले हिसार जिले का हिस्सा था। बढ़ती प्रशासनिक और विकासात्मक आवश्यकताओं के कारण, राज्य सरकार ने हिसार जिले का पुनर्गठन करते हुए हांसी को एक अलग जिले के रूप में गठित करने का निर्णय लिया। इस प्रकार का पुनर्गठन एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य शासन की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना और अधिक केंद्रित क्षेत्रीय योजना बनाना है।

नए जिले का दर्जा क्यों मायने रखता है?

एक नया जिला बनाने से सरकारी सेवाएं नागरिकों के करीब पहुंच जाती हैं। जिला स्तरीय कार्यालय कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने, रिकॉर्ड रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हांसी के जिला बनने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होने और स्थानीय जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की उम्मीद है।

स्थानीय निवासियों के लिए लाभ

नए जिले का दर्जा मिलने से क्षेत्र के निवासियों को कई लाभ मिलने की संभावना है। इनमें सरकारी कार्यालयों तक त्वरित पहुंच, विकास परियोजनाओं की बेहतर निगरानी, ​​शिकायत निवारण की बेहतर व्यवस्था और राज्य एवं केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का अधिक प्रभावी कार्यान्वयन शामिल हैं। कुल मिलाकर, इससे प्रशासनिक दक्षता और स्थानीय जवाबदेही में वृद्धि होगी।

स्थिर तथ्य

  • राज्य: हरियाणा
  • नया जिला: हांसी
  • हरियाणा में कुल जिले: 23
  • प्रभावी तिथि: 22 दिसंबर, 2025
  • पूर्व जिला: हिसार
  • शामिल उपखंड : हांसी, नारनौंद

की प्वाइंट्स

  • हांसी को हरियाणा का 23वां जिला घोषित किया गया है।
  • इस जिले का गठन हिसार जिले के पुनर्गठन द्वारा किया गया था।
  • इसमें हांसी और नारनौंद उपखंड शामिल हैं।
  • यह अधिसूचना संबंधित राजस्व और पंजीकरण कानूनों के तहत जारी की गई थी।
  • इस कदम का उद्देश्य प्रशासन में सुधार करना और विकास को गति देना है।

आधारित प्रश्न

प्रश्न: हरियाणा में किस नए जिले को आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया है?

A) हिसार
B) हांसी
C) नारनौंद
D) करनाल

ग्लोबल फूड सिटी रैंकिंग 2025-26: इटली पहले नंबर पर, मुंबई का उत्कृष्ट प्रदर्शन

भोजन आज वैश्विक यात्रा के सबसे बड़े प्रेरकों में से एक है। हाल के यात्रा रुझानों के अनुसार, कई पर्यटक उड़ान बुक करने से पहले ही रेस्तरां जाने की योजना बना लेते हैं। इस बदलाव को दर्शाते हुए, 2025-26 के विश्व के 10 सर्वश्रेष्ठ खाद्य शहरों की सूची उन स्थलों को उजागर करती है जहां भोजन संस्कृति, पहचान और अनुभव को परिभाषित करता है। TasteAtlas द्वारा जारी नवीनतम रैंकिंग में, इतालवी शहर वैश्विक खाद्य परिदृश्य पर हावी हैं, जबकि मुंबई गर्व से विश्व के 5वें सर्वश्रेष्ठ खाद्य शहर के रूप में स्थान प्राप्त करता है, जिससे भारत वैश्विक पाक कला मानचित्र पर अपनी जगह बना लेता है।

विश्व के 10 सर्वश्रेष्ठ खाद्य शहर 2025-26

इस सूची में यूरोपीय शहरों का दबदबा है, जिसमें अकेले इटली ने शीर्ष 10 में छह स्थान हासिल किए हैं।

शीर्ष 10 रैंकिंग

  1. नेपल्स – पिज्जा मार्गेरिटा के लिए प्रसिद्ध
  2. मिलान – रिसोट्टो अल्ला मिलानीज़ के लिए जाना जाता है
  3. बोलोग्ना – टैगलीटेल अल रागू का घर
  4. फ्लोरेंस – प्रतिष्ठित बिस्टेका अल्ला फियोरेंटीना
  5. मुंबई – अपने जीवंत स्ट्रीट फूड के लिए प्रसिद्ध
  6. जेनोआ – पेस्टो आधारित व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध
  7. पेरिस – क्लासिक फ्रेंच व्यंजन
  8. वियना – विएनर श्नीत्ज़ेल के लिए प्रसिद्ध
  9. रोम – कार्बोनारा जैसी क्लासिक पास्ता डिश
  10. लीमा – सेविचे के लिए प्रसिद्ध

मुंबई: भारत का पाक कला का सितारा 5वें स्थान पर

मुंबई की वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान भारतीय स्ट्रीट फूड की ताकत को दर्शाता है। शहर की खान-पान संस्कृति किफायती, विविध और रोजमर्रा की जिंदगी से गहराई से जुड़ी हुई है।

मुंबई के कुछ व्यंजन जिन्हें आपको अवश्य आजमाना चाहिए

  • वड़ा पाव
  • पाव भाजी
  • भेलपुरी
  • रागडा पैटिस
  • मोडक

मुंबई का खान-पान का परिदृश्य प्रवासन, इतिहास और नवाचार को प्रतिबिंबित करता है, जो इसे एक सच्ची वैश्विक खाद्य राजधानी बनाता है।

वैश्विक शीर्ष 100 शहरों में शामिल अन्य भारतीय शहर

विश्व के शीर्ष 100 खाद्य शहरों में भारत के छह शहर शामिल थे।

  • दिल्ली – रैंक 48
  • अमृतसर – रैंक 53
  • हैदराबाद – रैंक 54
  • कोलकाता – रैंक 73
  • चेन्नई – रैंक 93

प्रत्येक शहर अपने अनूठे स्वादों के लिए जाना जाता है, मक्खन से भरपूर पंजाबी व्यंजनों से लेकर मसालेदार दक्षिण भारतीय भोजन तक।

इतालवी शहरों के प्रभुत्व के पीछे का कारण

2025-26 में इतालवी व्यंजन को एक बार फिर विश्व का सर्वश्रेष्ठ व्यंजन घोषित किया गया है। इसके कारणों में शामिल हैं:

  • उच्च गुणवत्ता वाली सामग्रियों से बनी सरल रेसिपी
  • मजबूत क्षेत्रीय खाद्य पहचान
  • पिज्जा, पास्ता और मिठाइयों की वैश्विक लोकप्रियता
  • पीढ़ियों से चली आ रही गहरी जड़ें जमा चुकी खान-पान की परंपराएं
  • इटली की खाद्य संस्कृति में आराम, विरासत और उत्कृष्टता का अनूठा संगम है।

खाद्य पर्यटन: एक बढ़ता हुआ वैश्विक चलन

वैश्विक स्तर पर भोजन से संबंधित यात्रा की प्रमुख जानकारियाँ,

  • लगभग 50% यात्री उड़ान से पहले रेस्तरां बुक कर लेते हैं।
  • हर 5 में से 1 यात्री मुख्य रूप से भोजन के लिए ही पर्यटन स्थलों का चुनाव करता है।
  • पाक कला पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।
  • यह प्रवृत्ति बताती है कि क्यों खाद्य शहरों की रैंकिंग अब विश्व स्तर पर यात्रा संबंधी निर्णयों को प्रभावित करती है।

खाद्य शहरों की रैंकिंग कैसे की जाती है?

ये रैंकिंग TasteAtlas World Food Awards 2025–26 का हिस्सा हैं।

रैंकिंग प्रक्रिया के बारे में मुख्य बिंदु,

  • विश्वभर में 18,828 शहरों का मूल्यांकन किया गया
  • क्षेत्रीय और राष्ट्रीय व्यंजनों की औसत रेटिंग के आधार पर
  • प्रामाणिक स्थानीय भोजन अनुभवों पर ध्यान केंद्रित करें
  • वैश्विक खाद्य प्रेमियों और विशेषज्ञों से प्राप्त रेटिंग के आधार पर रेटिंग
  • यह सूची उन शहरों को सम्मानित करती है जहां भोजन परंपरा और रोजमर्रा की जिंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रमुख जानकारी

2025-26 के शीर्ष 10 खाद्य शहरों की सूची में इतालवी शहरों का दबदबा है।

  • मुंबई दुनिया के 5वें सर्वश्रेष्ठ भोजन शहर के रूप में स्थान पर है।
  • वैश्विक शीर्ष 100 शहरों में छह भारतीय शहर शामिल हैं।
  • टेस्टएटलस वर्ल्ड फूड अवार्ड्स द्वारा जारी रैंकिंग
  • खाद्य पर्यटन वैश्विक यात्रा रुझानों को आकार दे रहा है।

आधारित प्रश्न

प्रश्न: 2025-26 में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खाद्य शहर के रूप में नंबर 1 स्थान पर कौन सा शहर रहेगा?

A. रोम
B. पेरिस
C. नेपल्स
D. बोलोग्ना

आरबीआई ने की बैंकिंग प्रणाली में 2.90 लाख करोड़ रुपये की तरलता निवेष की घोषणा

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकारी बांड खरीदने और डॉलर-रुपये स्वैप नीलामी के माध्यम से ₹2.90 लाख करोड़ के नए तरलता उपायों की घोषणा की है। इसका लक्ष्य बैंकिंग तरलता को सुगम बनाना, रुपये की स्थिरता बनाए रखना और विदेशी मुद्रा बाजार की अस्थिरता को नियंत्रित करना है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में ₹2.90 लाख करोड़ की राशि डालने के लिए नए कदम उठाने की घोषणा की है। 23 दिसंबर, 2025 को की गई इस घोषणा का लक्ष्य वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच तरलता की स्थिति में सुधार करना, बैंकों को मदद करना और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को संतुलित करना है।

आरबीआई ने क्या घोषणा की है?

आरबीआई दो प्रमुख साधनों के माध्यम से तरलता प्रदान करेगा।

  • ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) खरीद
  • आरबीआई भारत सरकार की 2,00,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की ओएमओ खरीद नीलामी आयोजित करेगा।
  • इसे ₹50,000 करोड़ की चार किस्तों में आयोजित किया गया था।

निर्धारित तिथि

  • 29 दिसंबर, 2025
  • 5 जनवरी, 2026
  • 12 जनवरी, 2026
  • 22 जनवरी, 2026

ओएमओ के माध्यम से, आरबीआई बाजार से सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे बैंकों में रुपये की तरलता बढ़ जाती है।

डॉलर/रुपये की खरीद/बिक्री अदला-बदली नीलामी

आरबीआई 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपये (यूएसडी/आईएनआर) खरीद/बिक्री स्वैप नीलामी भी आयोजित करेगा।

  • टेनर: 3 वर्ष
  • नीलामी की तिथि: 13 जनवरी, 2026

इस अदला-बदली में, आरबीआई अभी डॉलर खरीदता है और भविष्य में उन्हें बेचता है, जिससे सिस्टम में रुपये की तरलता और डॉलर की अतिरिक्त तरलता दोनों को प्रबंधित करने में मदद मिलती है।

कुल तरलता इंजेक्शन

  • ओएमओ बॉन्ड खरीद के माध्यम से ₹2,00,000 करोड़ जुटाए गए।
  • डॉलर-रुपये के अदला-बदली के माध्यम से लगभग 90,000 करोड़ रुपये के बराबर का लेनदेन हुआ।
  • कुल तरलता सहायता: ₹2.90 लाख करोड़

ये उपाय महत्वपूर्ण क्यों हैं?

विश्लेषकों के अनुसार, इन कदमों से कई लाभ होंगे।

बैंकिंग प्रणाली का समर्थन करना

  • बैंकों के पास धनराशि की उपलब्धता में सुधार होता है
  • व्यवसायों और उपभोक्ताओं को ऋण प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है

डॉलर की तरलता का प्रबंधन करना

  • बाजार में डॉलर की अतिरिक्त तरलता को कम करता है
  • डॉलर-रुपये के उच्च फॉरवर्ड प्रीमियम को ठीक करने में मदद करता है

विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करना

  • रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ने अक्टूबर 2025 में 11.88 बिलियन डॉलर की बिक्री की थी।
  • हाल के महीनों में कुल डॉलर की बिक्री, खरीदारी से अधिक रही।
  • अदला-बदली प्रक्रियाओं से प्रत्यक्ष डॉलर बिक्री की आवश्यकता कम हो जाती है।

रुपये को स्थिर करना

  • अमेरिकी टैरिफ से संबंधित वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव पड़ा है।
  • तरलता संबंधी उपाय बाजार की अस्थिरता को कम करने में सहायक होते हैं।

आरबीआई द्वारा हाल ही में उठाए गए तरलता संबंधी कदम

  • आरबीआई ने 2025 में पहले ही ₹6.5 लाख करोड़ मूल्य के सरकारी बॉन्ड खरीद लिए हैं।
  • 16 दिसंबर 2025 को 5 अरब डॉलर का डॉलर-रुपये का अदला-बदली लेनदेन किया गया।
  • विभिन्न उपकरणों का उपयोग करके तरलता का सक्रिय रूप से प्रबंधन करना जारी रखता है।
  • आरबीआई ने यह भी कहा है कि वह बाजार की स्थितियों पर बारीकी से नजर रखेगा और व्यवस्थित तरलता सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई करेगा।

पृष्ठभूमि: आरबीआई तरलता क्यों निवेष करता है?

तरलता का तात्पर्य बैंकिंग प्रणाली में धन की उपलब्धता से है। तरलता कम होने पर बैंकों को ऋण देना कठिन हो जाता है, जिससे आर्थिक गतिविधि धीमी हो सकती है। आरबीआई नियमित रूप से पर्याप्त धन प्रवाह, स्थिर ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए मौद्रिक उपायों का उपयोग करता है।

हाल के महीनों में, कुछ कारकों जैसे कि,

  • भारतीय रुपये पर दबाव
  • वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएं
  • आरबीआई के हस्तक्षेप के कारण डॉलर का बहिर्वाह

इन कारणों से केंद्रीय बैंक को तरलता को सहारा देने के लिए सक्रिय कदम उठाने पड़े हैं।

की प्वाइंट्स

  • आरबीआई ने 2.90 लाख करोड़ रुपये के तरलता उपायों की घोषणा की।
  • ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बॉन्ड खरीद के माध्यम से ₹2,00,000 करोड़ जुटाए गए।
  • 3 साल के लिए 10 अरब डॉलर का डॉलर-रुपये का खरीद/बिक्री स्वैप समझौता
  • ओएमओ की नीलामी 29 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच निर्धारित है।
  • अदला-बदली की नीलामी 13 जनवरी, 2026 को निर्धारित है।
  • उद्देश्य: बैंकिंग तरलता में सुधार करना, विदेशी मुद्रा अस्थिरता का प्रबंधन करना और रुपये को स्थिर करना।
  • आरबीआई ने 2025 में अब तक ₹6.5 लाख करोड़ मूल्य के बॉन्ड खरीदे हैं।

आधारित प्रश्न

प्रश्न. आरबीआई द्वारा तरलता प्रदान करने का प्राथमिक उद्देश्य निम्नलिखित है:

ए. मुद्रास्फीति बढ़ाना
बी. तरलता में सुधार करना और बैंकों को समर्थन देना
सी. सरकारी उधार कम करना
डी. कर संग्रह बढ़ाना

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