भारत ने चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹1 ट्रिलियन फंड की योजना बनाई

भारत घरेलू सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण को मजबूत करने और वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्र बनने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए लगभग ₹1 ट्रिलियन (करीब 11 अरब डॉलर) के नए फंड की तैयारी कर रहा है। यह प्रस्तावित फंड चिप डिजाइन, निर्माण उपकरण और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के विकास को समर्थन देगा। यह पहल सरकार के पहले से लागू 2021 के $10 अरब सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन कार्यक्रम का विस्तार मानी जा रही है।

भारत की ₹1 ट्रिलियन सेमीकंडक्टर फंड योजना

  • भारत सरकार एक बड़ा ₹1 ट्रिलियन सेमीकंडक्टर फंड शुरू करने की योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करना और घरेलू चिप निर्माण परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
  • इस फंड के माध्यम से चिप डिजाइन, निर्माण उपकरण और सप्लाई चेन विकास के लिए सब्सिडी प्रदान की जा सकती है। यह कदम भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनाना और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करना लक्ष्य है।

वैश्विक सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्धा और भारत का प्रयास

भारत का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर के देश सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारी निवेश कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने चिप्स और विज्ञान अधिनियम के तहत लगभग 52 अरब डॉलर का प्रोत्साहन पैकेज शुरू किया है। वहीं चीन ने भी सेमीकंडक्टर कंपनियों में बड़े निवेश फंड के माध्यम से भारी पूंजी लगाई है।
भारत की यह नई फंड योजना देश को इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति दिलाने और दीर्घकालिक तकनीकी व आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और 2021 प्रोत्साहन योजना

प्रस्तावित ₹1 ट्रिलियन फंड भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 2021 में शुरू किए गए $10 अरब के सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन कार्यक्रम का विस्तार होगा।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजनाओं की लागत का 50% तक वित्तीय समर्थन देने की नीति अपनाई थी। इस पहल ने भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की नींव रखने और बड़े निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत में प्रमुख सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ

इस प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत कई बड़ी परियोजनाएँ पहले ही घोषित की जा चुकी हैं—

  • माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा गुजरात में सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा की स्थापना
  • टाटा समूह द्वारा गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट का निर्माण
  • टाटा समूह द्वारा चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग यूनिट का विकास
  • फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप द्वारा सेमीकंडक्टर टेस्टिंग और असेंबली सुविधा की योजना

इन परियोजनाओं से भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने और भविष्य में और अधिक निवेश आकर्षित करने की उम्मीद है।

नीति आयोग ने दूसरी वार्षिक “फिसकल हेल्थ इंडेक्स” रिपोर्ट जारी की

NITI Aayog ने फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 (Fiscal Health Index 2026 का दूसरा वार्षिक संस्करण जारी किया है। यह रिपोर्ट भारतीय राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन और वित्तीय स्थिरता का आकलन करने के लिए तैयार की गई है। इसे नई दिल्ली में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और सीईओ निधि छिब्बर ने लॉन्च किया। फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 एक डेटा-आधारित ढांचा प्रदान करता है, जो यह मूल्यांकन करता है कि राज्य अपनी वित्तीय व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से संचालित करते हैं।

फिसकल हेल्थ इंडेक्स का उद्देश्य

फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 का उद्देश्य भारतीय राज्यों की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली का व्यापक मूल्यांकन करना है। यह सूचकांक राज्यों की वित्तीय नीतियों की ताकत और कमजोरियों की पहचान करता है तथा बजट योजना और व्यय प्रबंधन में सुधार के लिए प्रोत्साहित करता है। वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक वित्त पर दबाव बढ़ रहा है, इसलिए राज्यों में मजबूत राजकोषीय शासन बनाए रखना भारत में मैक्रो-आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक माना जाता है।

फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 में विस्तारित दायरा

फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 ने पिछले संस्करण की तुलना में अपने दायरे का विस्तार किया है। पहले संस्करण में 18 बड़े राज्यों का आकलन किया गया था, जबकि नए संस्करण में 10 उत्तर-पूर्वी (NE) और हिमालयी राज्यों को भी शामिल किया गया है। हालांकि निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित करने के लिए इन राज्यों का मूल्यांकन और रैंकिंग बड़े राज्यों से अलग की गई है, क्योंकि उनकी आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं।

फिसकल हेल्थ इंडेक्स के पाँच प्रमुख स्तंभ

यह सूचकांक राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन पाँच प्रमुख स्तंभों के आधार पर करता है—

  • व्यय की गुणवत्ता (Quality of Expenditure) – यह देखता है कि राज्य सार्वजनिक धन का उपयोग कितनी दक्षता से करते हैं।
  • राजस्व संकलन (Revenue Mobilisation) – राज्यों की कर और अन्य स्रोतों से राजस्व जुटाने की क्षमता को मापता है।
  • राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence) – यह मूल्यांकन करता है कि राज्य घाटे और खर्च को कितनी जिम्मेदारी से प्रबंधित करते हैं।
  • ऋण सूचकांक (Debt Index) – राज्य सरकारों के कर्ज के स्तर और संरचना को दर्शाता है।
  • ऋण स्थिरता (Debt Sustainability) – यह देखता है कि राज्य अपने कर्ज को समय के साथ कितना प्रभावी ढंग से प्रबंधित और चुका सकते हैं।

प्रमुख राज्यों के लिए फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 की मुख्य बातें

फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 राज्यों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत करता है—उपलब्धि हासिल करने वाले, अग्रणी, बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले और आकांक्षी राज्य।

इस रैंकिंग में ओडिशा शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा और उसने पिछले वर्ष की तुलना में अपने स्कोर में सुधार किया।

गोवा और झारखंड भी अचीवर श्रेणी में शामिल रहे, जो मजबूत राजकोषीय अनुशासन और प्रभावी वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।

फ्रंट-रनर और परफॉर्मर राज्य

फ्रंट-रनर श्रेणी में निम्नलिखित राज्य शामिल हैं—

  • गुजरात
  • महाराष्ट्र
  • छत्तीसगढ
  • तेलंगाना
  • उत्तर प्रदेश
  • कर्नाटक

इन राज्यों का राजकोषीय प्रदर्शन स्थिर है, हालांकि उनका स्कोर Achiever राज्यों से थोड़ा कम है।

परफॉर्मर श्रेणी में शामिल राज्य हैं—

  • मध्य प्रदेश
  • हरयाणा
  • बिहार
  • तमिलनाडु
  • राजस्थान

इन राज्यों की वित्तीय संरचना अपेक्षाकृत संतुलित है, लेकिन इन्हें मध्यम घाटे और सीमित राजकोषीय लचीलापन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

राजकोषीय दबाव का सामना कर रहे Aspirational राज्य

Aspirational श्रेणी में निम्नलिखित राज्य शामिल हैं—

  • पश्चिम बंगाल
  • केरल
  • आंध्र प्रदेश
  • पंजाब

इन राज्यों को उच्च राजकोषीय घाटे, बढ़ते ऋण स्तर और अपेक्षाकृत कम विकास व्यय के कारण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य चुनौतियाँ:

  • राजकोषीय घाटा अक्सर FRBM सीमा से अधिक
  • ऋण स्तर लगभग 35–45% GSDP
  • राजस्व प्राप्तियों का 50–60% अनिवार्य खर्चों में जाना
  • उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों की रैंकिंग

उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश पहले स्थान पर रहा, इसके बाद उत्तराखंड और त्रिपुरा रहे। इन राज्यों ने व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाने और ऋण प्रबंधन जैसे संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन किया।

NE और हिमालयी राज्यों में Performer श्रेणी

Performer समूह में शामिल राज्य हैं—

  • असम
  • मेघालय
  • मिजोरम
  • सिक्किम
  • त्रिपुरा

इन राज्यों का प्रदर्शन मध्यम स्तर का है और विभिन्न संकेतकों में मिश्रित परिणाम देखने को मिले।

NE और हिमालयी Aspirational राज्य

Aspirational श्रेणी में—

  • हिमाचल प्रदेश
  • मणिपुर
  • नगालैंड

इन राज्यों को कमजोर राजस्व जुटाने और अधिक व्यय प्रतिबद्धताओं के कारण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है।

भारत में राज्य वित्त का महत्व

भारत की वित्तीय व्यवस्था में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि वे स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं के लिए जिम्मेदार हैं। राज्यों का वित्तीय प्रदर्शन देश की समग्र आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करता है। वर्तमान में भारतीय राज्यों का हिस्सा देश के कुल सरकारी ऋण का लगभग एक-तिहाई है। इसलिए उनकी वित्तीय प्रबंधन क्षमता सार्वजनिक वित्त को टिकाऊ बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 को मंजूरी दी

छत्तीसगढ़ की राज्य मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकना है। यह निर्णय रायपुर में आयोजित कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने की। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य ऐसे धर्मांतरणों पर रोक लगाना है जो बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या अनुचित प्रभाव के माध्यम से कराए जाते हैं। अब इस धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 को छत्तीसगढ़ विधान सभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2026 का उद्देश्य

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण को रोकना और साथ ही लोगों के अपने धर्म का पालन करने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना है। यह कानून उन मामलों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है, जहाँ लोगों पर दबाव डालकर या उन्हें गुमराह करके धर्म परिवर्तन कराया जाता है। राज्य सरकार का मानना है कि यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो, न कि दबाव या भ्रामक तरीकों से।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 में ऐसे धर्मांतरणों को अवैध माना गया है जो अनैतिक या अवैध तरीकों से कराए जाते हैं। प्रस्तावित कानून के अनुसार निम्न परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन को प्रतिबंधित किया जाएगा—

  • बल या दबाव (Force or Coercion)
  • प्रलोभन या आर्थिक लाभ का लालच (Inducements)
  • धोखाधड़ी या गलत जानकारी (Fraud or Misrepresentation)
  • अनुचित प्रभाव या मानसिक दबाव (Undue Influence)

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की मंजूरी

इस विधेयक को मंजूरी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दी गई। यह निर्णय धार्मिक धर्मांतरण से जुड़े नियमों के संबंध में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण नीति पहल माना जा रहा है। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस विधेयक को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश किया जाएगा। यदि विधानसभा इसे पारित कर देती है, तो यह राज्य के कानूनी ढाँचे का हिस्सा बन जाएगा।

भारतीय संविधान और धर्म की स्वतंत्रता

भारत का संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 के तहत नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। इन प्रावधानों के अनुसार हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार करने की स्वतंत्रता है। हालांकि, संविधान सरकार को लोक व्यवस्था, नैतिकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में धर्म से संबंधित गतिविधियों को विनियमित करने का अधिकार भी देता है।

शैलेश कुमार ने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स 2026 में गोल्ड जीता

भारतीय पैरा एथलीट शैलेश कुमार ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। यह प्रतियोगिता नई दिल्ली में आयोजित हुई थी। शैलेश ने पुरुषों की हाई जंप T63 श्रेणी में 1.84 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 1.91 मीटर से कम था, फिर भी उन्होंने इस प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया क्योंकि इससे उनके नए प्रतिस्पर्धी सत्र की अच्छी शुरुआत हुई है।

चोट से उबरने के बाद सीजन की शुरुआत

शैलेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप जीतने के बाद से उनके बाएं घुटने में दर्द बना हुआ था। इसी कारण उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया ताकि वे सुरक्षित तरीके से फिर से प्रतियोगिताओं में वापसी कर सकें। उनका लक्ष्य शुरुआत में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करना नहीं बल्कि धीरे-धीरे अपनी फिटनेस और फॉर्म हासिल करना था।

एशियाई पैरा खेलों पर मुख्य लक्ष्य

इस सत्र में शैलेश कुमार का मुख्य लक्ष्य एशियाई पैरा खेल है, जिसे भारतीय पैरा खिलाड़ियों के लिए खेल कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है। उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम को इसी प्रतियोगिता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रदर्शन में सुधार के लिए वे अपने टेक-ऑफ तकनीक पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि तकनीकी सुधार से वे अपने 1.91 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड को पार कर सकते हैं।

प्रतियोगिता में कड़ी चुनौती का अभाव

स्वर्ण पदक जीतने के बाद शैलेश ने कहा कि प्रतियोगिता में उतनी कड़ी चुनौती नहीं थी क्योंकि मरियप्पन थंगावेलु इसमें भाग नहीं ले सके। तीन बार के पैरालंपिक पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलु फिटनेस समस्याओं के कारण प्रतियोगिता से हट गए थे। दोनों खिलाड़ी बेंगलुरु में साथ प्रशिक्षण लेते हैं। शैलेश के अनुसार मजबूत प्रतिद्वंद्वी के साथ प्रतिस्पर्धा करने से खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है और प्रतियोगिता का स्तर भी ऊँचा होता है।

वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भागीदारी

नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में इस वर्ष 200 से अधिक भारतीय खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिससे यह देश में आयोजित सबसे बड़े पैरा एथलेटिक्स आयोजनों में से एक बन गया। यह प्रतियोगिता उन खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो पैरा खेलों की आधिकारिक श्रेणियों में क्लासिफिकेशन प्राप्त करना चाहते हैं। इसके अलावा इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी रही, जिसमें रूस के 26 एथलीट शामिल हुए।

दिल्ली ने हाईवे प्रदूषण से लड़ने हेतु भारत का पहला माइक्रोएल्गी एयर टावर लगाया

नई दिल्ली में प्योरएयर टॉवर (PureAir Tower) नामक भारत का पहला माइक्रोएल्गी आधारित एयर प्यूरीफिकेशन टॉवर तैनात किया गया है। इसे एरोसिटी राजमार्ग कॉरिडोर (Aerocity Highway Corridor) के सड़क डिवाइडर पर लगाया गया है। यह एक नवीन बायोटेक्नोलॉजी आधारित समाधान है जिसका उद्देश्य शहरी वायु प्रदूषण को कम करना है। इस परियोजना के तहत पारंपरिक सड़क ढांचे को एक सक्रिय वायु शुद्धिकरण प्रणाली में बदल दिया गया है। यह पायलट परियोजना राजधानी के व्यस्त ट्रैफिक कॉरिडोर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए शुरू की गई है।

माइक्रोएल्गी एयर टॉवर कैसे काम करता है

पारंपरिक स्मॉग टावरों की तरह यांत्रिक फिल्टर का उपयोग करने के बजाय यह तकनीक फोटोसिंथेटिक माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) का उपयोग करती है, जो आसपास की हवा से प्रदूषकों को सीधे अवशोषित करती है। यह प्रणाली कार्बन डाइऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को सड़क स्तर पर पकड़ती है। इसके बाद प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के माध्यम से ये प्रदूषक ऑक्सीजन और एल्गल बायोमास में परिवर्तित हो जाते हैं। माइक्रोएल्गी एयर टॉवर बहुत कम ऊर्जा का उपयोग करता है और इसमें कोई द्वितीयक फिल्टर कचरा भी उत्पन्न नहीं होता, जिससे यह एक पर्यावरण-अनुकूल वायु शुद्धिकरण समाधान बन जाता है।

परियोजना से जुड़ी कंपनियाँ

दिल्ली में स्थापित यह माइक्रोएल्गी एयर टॉवर कई संस्थाओं के सहयोग से विकसित किया गया है। इस परियोजना को सी पी अरोड़ा प्राइवेट लिमिटेड ने कार्बेलिम ​​प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर कार्यान्वित किया है। कार्बेलिम एक क्लाइमेट-टेक स्टार्ट-अप है, जिसे आईआईटी मद्रास में इनक्यूबेट किया गया है और इसे आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज़ इनक्यूबेशन सेंटर का समर्थन प्राप्त है।

रोड डिवाइडर से कार्बन सिंक तक

PureAir Tower माइक्रोएल्गी प्रणाली साधारण सड़क डिवाइडर को एक सक्रिय पर्यावरणीय समाधान में बदल देती है। प्रत्येक टॉवर की वायु शुद्धिकरण क्षमता लगभग 15 परिपक्व पेड़ों के बराबर मानी जाती है और यह गुजरने वाले वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को लगातार कम करता है। इस परियोजना में आगे BioDivider पैनलों को भी स्थापित करने की योजना है, जिससे सड़क डिवाइडरों को निरंतर हरित कॉरिडोर में बदला जा सके।

भारत महिला हॉकी टीम ने हॉकी विश्व कप 2026 के लिए क्वालीफाई किया

भारत की महिला हॉकी टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। यह क्वालिफिकेशन हैदराबाद में हॉकी वर्ल्ड कप क्वालिफायर के सेमीफाइनल से भी पहले हुआ है। यह क्वालिफिकेशन तब पक्का हुआ जब भारत ने पूल B के मैच में वेल्स के खिलाफ 4-1 से शानदार जीत हासिल की। इस मैच में नवनीत कौर ने शानदार हैट्रिक लगाई, जबकि साक्षी राणा ने शुरुआती गोल कर भारत को बढ़त दिलाई। यह मुकाबला जीएमसी बालयोगी हॉकी स्टेडियम, हैदराबाद में खेला गया। टूर्नामेंट के परिणामों के आधार पर भारत की महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम ने पहले ही महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए अपना क्वालीफिकेशन सुनिश्चित कर लिया।

महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर 2026 का प्रारूप

हैदराबाद में आयोजित महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर्स 2026 एक संरचित प्रारूप का पालन करते हैं, जिसमें आठ टीमों को दो पूलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक पूल में टीमें राउंड-रॉबिन प्रारूप में एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करती हैं। इसके बाद शीर्ष टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करती हैं।

पूल A

  • इंग्लैंड
  • दक्षिण कोरिया
  • इटली
  • ऑस्ट्रिया

पूल B

  • भारत
  • स्कॉटलैंड
  • उरुग्वे
  • वेल्स

ग्रुप स्टेज के बाद हर पूल से टॉप दो टीमें सेमीफ़ाइनल में पहुँचती हैं।

क्वालिफ़िकेशन नियमों के अनुसार, दो फ़ाइनलिस्ट और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली टीम अपने आप FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में जगह पक्की कर लेती है।

भारत की महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम का शानदार प्रदर्शन

हैदराबाद में आयोजित महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में मजबूत आक्रमण और अनुशासित रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन किया। वेल्स महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम के खिलाफ जीत ने भारत की बेहतरीन फॉर्म को उजागर किया।

भारत बनाम वेल्स मैच के प्रमुख मुख्य बिंदु:

  • साक्षी राणा ने 7वें मिनट में गोल कर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई।
  • नवनीत कौर ने 29वें, 34वें और 55वें मिनट में गोल कर हैट्रिक पूरी की।
  • भारत बेहतर गोल अंतर के साथ पूल-B में शीर्ष स्थान पर रहा।

इस शानदार प्रदर्शन से भारत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई और Women’s Hockey World Cup 2026 के लिए क्वालीफाई करने की संभावनाएँ मजबूत कर लीं।

सेमीफाइनल से पहले ही भारत का विश्व कप के लिए क्वालीफाई करना

भारत का महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए जल्दी क्वालीफाई करना दो अलग-अलग क्वालीफायर टूर्नामेंटों की प्रणाली से जुड़ा है। कुल सात क्वालीफिकेशन स्थान दो आयोजनों—हैदराबाद (भारत) और Santiago—से उपलब्ध हैं।

चिली में आयोजित क्वालीफायर से पहले ही निम्नलिखित टीमों ने विश्व कप में स्थान सुरक्षित कर लिया था:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • चिली
  • आयरलैंड

हैदराबाद क्वालीफायर में फाइनलिस्ट और कांस्य पदक विजेता टीमों को सीधे विश्व कप में स्थान मिलता है। अंतिम स्थान दोनों टूर्नामेंटों में चौथे स्थान पर रहने वाली सबसे ऊँची विश्व रैंकिंग वाली टीम को दिया जाता है।

चूंकि जापान की महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम (विश्व रैंक 15) चिली प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रही और भारत (विश्व रैंक 9) की रैंकिंग उससे बेहतर है, इसलिए गणितीय रूप से भारत अगले मैच हारने पर भी जापान से नीचे नहीं जा सकता। इसी कारण भारत ने सेमीफाइनल से पहले ही महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया।

गुजरात ने AQI और झील के स्वास्थ्य पर नज़र रखने हेतु ‘लेक एंड एयर वॉच’ पहल शुरू की

भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी दिशा में गुजरात सरकार ने सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘लेक एंड एयर वॉच’ पहल की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम गुजरात अर्बन डेवलपमेंट मिशन के अंतर्गत लागू किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य शहरों में झीलों की स्थिति तथा वायु गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी करना है। राज्य के शहरी विकास एवं शहरी आवास विभाग द्वारा शुरू की गई यह पहल भारत के ‘विकसित भारत’ मिशन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

‘लेक एंड एयर वॉच’ पहल और इसका उद्देश्य

गुजरात में शुरू की गई Lake and Air Watch पहल का उद्देश्य तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय समस्याओं से निपटना है। राज्य के अधिकारियों ने देखा है कि बढ़ती शहरी आबादी के कारण झीलों के पानी की गुणवत्ता में गिरावट आई है, भूजल रिचार्ज कम हुआ है और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए यह परियोजना विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वित निगरानी प्रणाली विकसित करेगी। इस समन्वय से प्रशासन को पर्यावरणीय समस्याओं की जल्दी पहचान करने और समय पर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

शहरों में रियल-टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी

इस पहल का एक महत्वपूर्ण भाग शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की स्थापना है। ये स्टेशन लगातार प्रदूषण के स्तर को मापेंगे और रीयल-टाइम Air Quality Index की जानकारी प्रदान करेंगे। यह प्रणाली राज्य के 17 नगर निगमों और 152 नगरपालिका क्षेत्रों में स्थापित की जाएगी, जिससे शहरों और कस्बों में व्यापक निगरानी सुनिश्चित होगी। यदि AQI सुरक्षित सीमा से अधिक हो जाता है, तो प्रणाली स्वतः अलर्ट जारी करेगी, ताकि प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सके।

झीलों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए सैटेलाइट तकनीक

इस पहल की एक और प्रमुख विशेषता शहरी झीलों की निगरानी के लिए सैटेलाइट तकनीक का उपयोग है। सैटेलाइट चित्रों की सहायता से अधिकारी झीलों के क्षेत्र का विश्लेषण, प्रदूषण स्तर का पता लगाना, कचरे के जमाव की पहचान और शैवाल (algae) की वृद्धि की निगरानी कर सकेंगे। इन पर्यावरणीय संकेतकों के विश्लेषण से झीलों के समग्र स्वास्थ्य का आकलन किया जा सकेगा और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु अलर्ट जारी किए जा सकेंगे। यह प्रणाली जल प्रदूषण, गाद जमाव (siltation) और पानी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक होगी।

बजट और गुजरात शहरी विकास मिशन की भूमिका

इस पहल को लगभग ₹10 करोड़ के अनुमानित बजट के साथ लागू किया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी गुजरात शहरी विकास मिशन (GUDM) की होगी। इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ सतत शहरी विकास (Sustainable Urban Development) को भी बढ़ावा देना चाहती है।

World Kidney Day 2026: जानें इतिहास, महत्व और इस साल की थीम

विश्व किडनी दिवस (World Kidney Day) प्रत्येक वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। यह दिवस Chronic Kidney Disease (क्रॉनिक किडनी रोग) के बढ़ते वैश्विक बोझ और इसके जल्दी पता लगाने व रोकथाम की आवश्यकता की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करता है। यह अंतरराष्ट्रीय जागरूकता दिवस इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि किडनी से जुड़ी बीमारियाँ अक्सर शुरुआती चरण में बिना लक्षण के रहती हैं, लेकिन बाद में गंभीर रूप ले सकती हैं। विश्व किडनी दिवस 2026 की थीम “Kidney Health for All: Caring for People, Protecting the Planet” रखी गई है, जो किडनी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कारकों जैसे प्रदूषण, अत्यधिक गर्मी और असुरक्षित पानी के बीच संबंध पर भी जोर देती है।

विश्व किडनी दिवस और इसके मकसद को समझना

विश्व किडनी दिवस 2026 एक वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता पहल है, जिसका उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और दुनिया भर में क्रॉनिक किडनी रोग के बढ़ते बोझ को कम करना है। यह अभियान अंतर्राष्ट्रीय नेफ्रोलॉजी सोसायटी और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन्स द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया था, ताकि लोगों को किडनी रोगों के बारे में शिक्षित किया जा सके और उन्हें बचाव के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।

किडनी से जुड़ी बीमारियाँ अक्सर शुरुआती चरणों में बिना स्पष्ट लक्षणों के धीरे-धीरे बढ़ती हैं, इसलिए CKD का जल्दी पता लगना बेहद महत्वपूर्ण है। जागरूकता अभियानों, स्वास्थ्य जांच शिविरों और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से विश्व किडनी दिवस लोगों को जोखिम कारकों को समझने और किडनी की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

विश्व किडनी दिवस की तारीख और वैश्विक पालन

विश्व किडनी दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है, जिससे यह एक व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य जागरूकता दिवस बन गया है। वर्ष 2026 में विश्व किडनी दिवस 12 मार्च को मनाया गया, जिसके अवसर पर दुनिया भर में स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा स्क्रीनिंग कैंप, जागरूकता सेमिनार और निवारक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम आयोजित किए गए। अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों ने भी जनचर्चा और शैक्षिक अभियानों के माध्यम से किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी की। इन पहलों का उद्देश्य लोगों को किडनी रोगों की रोकथाम, नियमित स्वास्थ्य जांच और लक्षण या जोखिम कारक दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व के बारे में जागरूक करना है।

विश्व किडनी दिवस 2026 की थीम

विश्व किडनी दिवस 2026 की थीम “Kidney Health for All: Caring for People, Protecting the Planet” किडनी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच बढ़ते संबंध को उजागर करती है। आज यह माना जा रहा है कि वायु प्रदूषण, अत्यधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और असुरक्षित जल स्रोत जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियाँ किडनी रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। विशेष रूप से उन्नत किडनी रोग के उपचार, जैसे Dialysis, में बड़ी मात्रा में पानी, ऊर्जा और प्लास्टिक सामग्री का उपयोग होता है। इसलिए इस थीम के माध्यम से सतत (सस्टेनेबल) किडनी देखभाल प्रणालियों, पर्यावरण-अनुकूल चिकित्सा तकनीकों और ऐसी नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है जो मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पृथ्वी की भी रक्षा करें।

क्रोनिक किडनी रोग: एक शांत लेकिन बढ़ता हुआ वैश्विक स्वास्थ्य खतरा

क्रोनिक किडनी रोग आज एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रही है और अनुमानतः दुनिया भर में हर दस में से एक व्यक्ति इससे प्रभावित है। यह स्थिति धीरे-धीरे विकसित होती है, जब किडनियाँ शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को प्रभावी ढंग से फिल्टर करने की अपनी क्षमता खोने लगती हैं। यदि समय पर उपचार न किया जाए तो CKD हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मेटाबोलिक असंतुलन और किडनी फेलियर जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। रोग के उन्नत चरणों में मरीजों को जीवित रहने के लिए Dialysis या Kidney Transplant की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए जल्दी पहचान और रोकथाम अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

किडनी रोग के प्रमुख कारण और जोखिम कारक

किडनी रोग किसी एक कारण से नहीं होता, बल्कि यह चिकित्सीय स्थितियों और जीवनशैली की आदतों के मिश्रण के कारण विकसित होता है। कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ समय के साथ Chronic Kidney Disease होने का जोखिम बढ़ा देती हैं। प्रमुख कारण और जोखिम कारकों में शामिल हैं—

  • Diabetes और अनियंत्रित ब्लड शुगर स्तर
  • Hypertension (उच्च रक्तचाप)
  • किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास
  • मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली की आदतें
  • बार-बार होने वाले संक्रमण जो किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं
  • दर्द निवारक दवाओं या अन्य दवाओं का अत्यधिक उपयोग
  • पर्याप्त पानी न पीना और मेटाबोलिक विकार

इन जोखिम कारकों को समझना लोगों को रोकथाम संबंधी आदतें अपनाने और लंबे समय तक किडनी के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद करता है।

पर्यावरणीय कारक जो किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाते हैं

हाल के शोध बताते हैं कि पर्यावरणीय बदलाव भी दुनिया भर में किडनी रोग के बढ़ते मामलों में योगदान दे रहे हैं। बढ़ता तापमान, अत्यधिक गर्मी की लहरें, डिहाइड्रेशन और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर संवेदनशील आबादी में।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन उष्णकटिबंधीय संक्रमणों के प्रसार को भी बढ़ा रहा है, जो किडनी के कार्य को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, उपचार प्रक्रियाएँ जैसे हीमोडायलिसिस में बड़ी मात्रा में पानी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ता है।

स्वस्थ किडनी के लिए रोकथाम के उपाय

किडनी रोग से बचाव के लिए सरल लेकिन नियमित जीवनशैली की आदतें अपनाना आवश्यक है। चिकित्सा विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह देते हैं ताकि CKD का जोखिम कम किया जा सके।

महत्वपूर्ण रोकथाम उपायों में शामिल हैं—

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेटेड रखना
  • नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच करना
  • स्वस्थ वजन बनाए रखना और संतुलित आहार लेना
  • नमक और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना
  • बिना आवश्यकता दर्द निवारक दवाओं का उपयोग न करना
  • नियमित व्यायाम करना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना

मशहूर तमिल फिल्ममेकर थक्काली श्रीनिवासन का 72 साल की उम्र में निधन

तमिल फिल्म उद्योग के वरिष्ठ फिल्म निर्माता थक्काली श्रीनिवासन का 10 मार्च 2026 को बेंगलुरु में निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन के साथ ही तमिल सिनेमा में कई दशकों तक फैले एक रचनात्मक सफर का अंत हो गया। श्रीनिवासन अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाने जाते थे और उन्होंने फिल्म उद्योग में निर्माता, निर्देशक, संगीतकार और अभिनेता के रूप में काम किया।

प्रारंभिक करियर और तमिल सिनेमा में प्रवेश

थक्काली श्रीनिवासन ने फिल्म उद्योग में अपने करियर की शुरुआत मुख्य रूप से एक फिल्म निर्माता के रूप में की। उनकी शुरुआती फिल्म इवरगल वरुणगला थुंगल थी, जिसने कोलीवुड में उनके सफर की शुरुआत की। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो मनोरंजन के साथ रोचक कहानियों का मिश्रण प्रस्तुत करती थीं। अलग-अलग शैलियों के साथ प्रयोग करने और अनोखी कहानियों को पहचानने की उनकी क्षमता ने उन्हें तमिल फिल्म उद्योग में धीरे-धीरे एक मजबूत पहचान दिलाई।

थक्काली श्रीनिवासन द्वारा निर्मित प्रमुख फिल्में

अपने करियर के दौरान श्रीनिवासन ने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया, जिन्हें दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उनकी कुछ प्रमुख फिल्में हैं—

  • इवरगल वरुणगला थुंगल
  • मनसुकुल मथाप्पु
  • नालया मनिथन
  • जेनमा नटचतिरम
  • अथिसिया मनिथन
  • विटनेस

इनमें से कई फिल्मों में विज्ञान-कथा, हॉरर और सस्पेंस के तत्वों का अनूठा मिश्रण देखने को मिला।

निर्देशक के रूप में योगदान

फिल्म निर्माण के अलावा थक्काली श्रीनिवासन ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्हें विशेष रूप से रहस्य और हॉरर विषयों पर आधारित फिल्मों में रुचि थी। उनकी सबसे चर्चित निर्देशित फिल्मों में से एक जेनमा नटचतिरम थी। यह फिल्म अपने हॉरर विषय और रोमांचक कहानी के कारण काफी चर्चा में रही। दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म प्रसिद्ध हॉलीवुड हॉरर फिल्म The Omen से प्रेरित थी। इस फिल्म का निर्देशन करने के साथ-साथ उन्होंने इसका संगीत भी स्वयं तैयार किया, जिससे उनकी बहुमुखी प्रतिभा उजागर हुई।

तमिल सिनेमा पर प्रभाव

हालाँकि थक्काली श्रीनिवासन हमेशा मुख्यधारा की सुर्खियों में नहीं रहे, लेकिन तमिल सिनेमा में शैलीगत प्रयोगों को आगे बढ़ाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। उनकी फिल्मों ने यह दिखाया कि तमिल सिनेमा अंतरराष्ट्रीय कहानियों और विषयों को अपनाकर भी सफल हो सकता है।

मुख्य तथ्य

  • नाम: थक्काली श्रीनिवासन
  • पेशा: फिल्म निर्माता, निर्देशक, संगीतकार, अभिनेता
  • आयु: 72 वर्ष
  • निधन तिथि: 10 मार्च 2026
  • निधन स्थान: बेंगलुरु
  • प्रमुख फिल्में:जेनमा नटचतिरम, नालया मनिथन, अथिसिया मनिथन, विटनेस

भारत के टॉप 10 सबसे अमीर व्यक्ति 2026: भारत का अरबपति क्लब बढ़ा

वर्ष 2026 में भारत का अरबपति क्लब एक नए मील के पत्थर पर पहुँच गया है। फोर्ब्स की फोर्ब्स वर्ल्ड की अरबपतियों की सूची के अनुसार अब भारत में 229 अरबपति हो गए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 205 थी। शेयर बाजार के मजबूत प्रदर्शन और कई नई कंपनियों की लिस्टिंग के कारण कई उद्यमियों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों 2026 की सूची के अनुसार भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गई है, जबकि 2025 में यह लगभग 941 अरब डॉलर थी।

2026 में भारत के सबसे अमीर व्यक्ति: मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी वर्ष 2026 में भी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। वह एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति भी हैं। पिछले वर्ष के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में वृद्धि होने से उनकी संपत्ति में बढ़ोतरी हुई और उनकी शीर्ष स्थिति और मजबूत हुई। वर्तमान में उनकी कुल संपत्ति लगभग 100 अरब डॉलर के आसपास बताई जाती है।

2026 में दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति: गौतम अडानी

गौतम अडानी इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। वह अडानी समूह के अध्यक्ष हैं। भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्रों में विस्तार के कारण उनकी संपत्ति में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी ने मिलकर इस वर्ष अपनी संयुक्त संपत्ति में लगभग 14.7 अरब डॉलर की वृद्धि की है।

सावित्री जिंदल: भारत की सबसे अमीर महिला

भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों 2026 की सूची में सावित्री जिंदल, जो ओपी जिंदल समूह की चेयरपर्सन हैं, तीसरे स्थान पर हैं। वह भारत की सबसे अमीर महिला बनी हुई हैं और देश के प्रमुख अरबपतियों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। यह सूची भारत के अरबपति समुदाय में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है। फोर्ब्स के अनुसार अब भारत में 20 महिला अरबपति हैं, जिनमें सावित्री जिंदल इस समूह का नेतृत्व कर रही हैं।

लक्ष्मी मित्तल की बड़ी छलांग

भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों 2026 की सूची में एक प्रमुख चर्चा लक्ष्मी मित्तल के उभार की रही, जो वैश्विक इस्पात उद्योग के प्रमुख उद्योगपति हैं। उनकी संपत्ति में बड़ी वृद्धि आर्सेलर मित्तल, लक्ज़मबर्ग स्थित इस्पात कंपनी, के शेयर मूल्य में तेज बढ़ोतरी के कारण हुई, जिसका नेतृत्व वे करते हैं। इस वृद्धि के साथ वे 2026 में शीर्ष 10 भारतीय अरबपतियों में सबसे अधिक संपत्ति वृद्धि हासिल करने वाले अरबपति बन गए।

इसके साथ ही उदय कोटक, जो कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक हैं, ने भी भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों 2026 की सूची में अपनी जगह बनाई। उनकी संपत्ति में वृद्धि बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन और विस्तार के कारण हुई है।

भारत के टॉप 10 सबसे अमीर लोगों की 2026 की लिस्ट

रैंक नाम कुल संपत्ति (USD) कंपनी / संपत्ति का स्रोत
1 मुकेश अंबानी $99.7 बिलियन रिलायंस इंडस्ट्रीज
2 गौतम अडानी $63.8 बिलियन अडानी ग्रुप
3 सावित्री जिंदल $39.1 बिलियन ओपी जिंदल ग्रुप
4 लक्ष्मी मित्तल $31 बिलियन आर्सेलरमित्तल
5 शिव नादर $30.9 बिलियन एचसीएल टेक्नोलॉजीज
6 साइरस पूनावाला $27 बिलियन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया
7 दिलीप सांघवी $25.6 बिलियन सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज
8 कुमार मंगलम बिड़ला $21.1 बिलियन आदित्य बिड़ला ग्रुप
9 राधाकिशन दमानी $15.7 बिलियन डीमार्ट
10 उदय कोटक $14.4 बिलियन कोटक महिंद्रा बैंक

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