भारत ने विश्व धरोहर समिति की 46वीं ऐतिहासिक बैठक की मेजबानी की

about - Part 717_3.1

भारत ने 21 से 31 जुलाई, 2024 तक पहली बार विश्व धरोहर समिति की बैठक के 46वें सत्र की मेजबानी की। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम 1977 में आरंभ हुए विश्व धरोहर सम्मेलन के साथ भारत की दीर्घकालिक सहभागिता की दिशा में एक उपलब्धि साबित हुआ है। चार कार्यकालों तक विश्व धरोहर समिति में भारत की सक्रिय भागीदारी, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण के प्रति उसके समर्पण को रेखांकित करती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन

विश्व धरोहर समिति की बैठक के 46वें सत्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 21 जुलाई 2024 को विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया। “विकास भी, विरासत भी” के अपने विजन के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन सत्र में यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र को 1 मिलियन डॉलर के अनुदान की घोषणा की। यह योगदान क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता और संरक्षण के प्रयासों में सहायता देगा, जिससे विशेष रूप से ग्‍लोबल साउथ के देशों को लाभ होगा।

‘विरासत पर गर्व’ का संकल्प

केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने अपनी ब्रीफिंग में कहा कि बीते 10 वर्षों में भारत ने आधुनिक विकास के नए आयाम छूए हैं, साथ ही ‘विरासत पर गर्व’ का संकल्प भी लिया है। उन्होंने देश भर में चल रही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, अयोध्या में राम मंदिर और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के आधुनिक परिसर के निर्माण जैसी कई धरोहर संरक्षण परियोजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के प्रयासों से पिछले दशक में 13 विश्व धरोहर संपत्तियों को सफलतापूर्वक सूचीबद्ध किया गया है, जिससे भारत सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थलों के संबंध में दुनिया में छठे स्थान पर आ गया है।

भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संपदा समझौता

केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने द्विपक्षीय बैठकों की चर्चा करते हुए बताया कि भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संपत्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सांस्कृतिक संपत्ति में अवैध व्यापार से निपटने की प्रतिबद्धता को बल मिला। इसके अतिरिक्त, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने क्षमता निर्माण और मूर्त धरोहर पर शोध के लिए आईसीसीआरओएम के साथ समझौता किया।

46वें विश्व विरासत कांग्रेस सत्र की विशेषता

केंद्रीय मंत्री ने विश्व धरोहर समिति की 46वीं बैठक के दौरान लगाई गई महत्‍वपूर्ण प्रदर्शनी का विशेष उल्लेख किया, जिसमें 25 प्रत्यावर्तित ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया, जो सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के प्रति भारत के समर्पण को दर्शाता है।

वैश्विक विरासत संरक्षण में योगदान

वैश्विक धरोहर के संरक्षण में भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए शेखावत ने कंबोडिया के अंगकोर वात, वियतनाम के चाम मंदिरों और म्यांमार के बागान के स्तूपों में भारत के धरोहर संरक्षण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नए शामिल किए गए मोईदाम सहित 43 विश्व धरोहर स्थलों की उल्लेखनीय सूची के साथ, धरोहर संरक्षण के संबंध में भारत वैश्विक स्‍तर पर अग्रणी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 56 संपत्तियों की विशाल संभावित सूची भारत के सांस्कृतिक स्पेक्ट्रम का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है।

भारत का विशिष्ट योगदान

संस्कृति के वैश्विक महत्व को बढ़ाने में भारत के विशिष्ट योगदान पर बल देते हुए केंद्रीय मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि जी-20 की भारत की अध्यक्षता के तहत, नेताओं के नई दिल्ली घोषणापत्र 2023 (एनडीएलडी) ने 2030 के बाद के विकास के प्रारूप में संस्कृति को एक स्वतंत्र लक्ष्य के रूप में समर्थन दिया, जो वैश्विक विकास रणनीति में व्‍यापक बदलाव को दर्शाता है।

ऐतिहासिक निर्णय

यह ऐतिहासिक निर्णय संस्कृति की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है, आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है, हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाता है और असु‍रक्षित धरोहर की रक्षा करता है। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि काशी संस्कृति पथ और एनडीएलडी 2023, संस्कृति लक्ष्य की अपनी आकर्षक अभिव्यक्ति के साथ दुनिया का पहला और एकमात्र दस्तावेज है, जो वैश्विक संस्कृति क्षेत्र के विमर्श को दिशा देता है।

संरक्षण पर व्यापक चर्चा के साथ बैठक संपन्न हुई

विश्व धरोहर समिति की बैठक का 46वां सत्र संरक्षण, अंतर्राष्ट्रीय सहायता तथा विभिन्न देशों और संगठनों के साथ द्विपक्षीय बैठकों पर व्यापक चर्चा के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन ने भारत की समृद्ध धरोहर को प्रदर्शित किया और भविष्य में वैश्विक धरोहर के संरक्षण के प्रयासों के लिए मंच तैयार किया।

वर्ल्ड वाइड वेब दिवस 2024: जानें इतिहास और महत्व

about - Part 717_5.1

हर साल 1 अगस्त को दुनियाभर में वर्ल्ड वाइड वेब दिवस (World Wide Web Day in Hindi) मनाया जाता है। यह दिवस हमारे जीवन में वेब की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे वर्ल्ड वाइड वेब ने कैसे दुनिया को जोड़ने और जानकारी साझा करने का तरीका बदल दिया।

क्या है वर्ल्ड वाइड वेब?

वर्ल्ड वाइड वेब (WWW), जिसे वेब के नाम से भी जाना जाता है, इंटरनेट पर जानकारी का एक विशाल संग्रह है। दूसरे शब्दों में कहे तो वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) ऑनलाइन पेजों का एक नेटवर्क है, जो हाइपरलिंक्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इन पेजों का समूह मिलकर वेबसाइट बनाता है। वेब पेज को देखने के लिए, ब्राउज़र के सर्च बॉक्स में यूआरएल (Uniform Resource Locator) डालना पड़ता है। इसके बाद, हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (HTTP) का उपयोग करके उस पेज को एक्सेस किया जाता है और यह सारी प्रक्रिया वर्ल्ड वाइड वेब के जरिये ही पूरी होती है।

वर्ल्ड वाइड वेब डे का इतिहास

वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) की शुरुआत 1989 में ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली द्वारा की गई थी। उन्होंने यह तब किया जब वह स्विट्जरलैंड में एक सॉफ्टवेयर कंपनी CERN में काम कर रहे थे। उनका उद्देश्य संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच आसानी से जानकारी साझा करने के लिए एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराना था।

21 साल की उम्र में, बर्नर्स ली ने खुद के लिए एक छोटा सा कंप्यूटर सेट तैयार किया। इसी दौरान, उन्हें वर्ल्ड वाइड वेब का विचार आया। इसके बाद उन्होंने एक प्रोग्राम तैयार किया जो कंप्यूटर की सभी फाइलों को आपस में जोड़ता था। इसके बाद, बर्नर्स ली ने सोचा कि क्यों न एक ऐसा प्रोग्राम बनाया जाए जो सिर्फ एक कंप्यूटर तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे विश्व के कंप्यूटरों को जोड़ दे। टिम बर्नर्स ली को अपने इस उद्देश्य को पूरा करने में सफलता मिली और उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से एक वैश्विक सूचना तंत्र तैयार किया। इस तरह इन्टरनेट पर WWW के उपयोग की शुरुआत हुई। ली के इस योगदान को मान्यता और सम्मान देने के लिए हर वर्ष 1 अगस्त को वर्ल्ड वाइड वेब दिवस मनाया जाने लगा।

वर्ल्ड वाइड वेब डे का महत्व

वर्ल्ड वाइड वेब दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि यह दिन हमें वेब के हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार करने का मौका देता है। यह दिवस टिम बर्नर्स-ली समेत उन सभी लोगों की प्रतिभा की सराहना करने का भी अवसर देता है जिन्होंने इसका विकास किया। इसके अलावा यह दिन हमें वेब के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ने और जानकारी साझा करने की ताकत की याद दिलाता है।

राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस 2024: 1 अगस्त

about - Part 717_7.1

हर साल 1 अगस्त को राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस (National Climbing Day) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को माउंटेन क्लाइम्बिंग के लिए मोटिवेट करना है और इस एडवेंचर के बारे में बताना है। पर्वतारोहण महज एक एडवेंचर एक्टिविटी नहीं, बल्कि यह फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है। इसके अलावा इससे टीमवर्क, पेशेंस, डिटरमीनेशन जैसे गुण भी विकसित होते हैं।

राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस का महत्‍व

पर्वतारोहण के एक या दो नहीं, बल्कि कई सारे फायदे हैं। इसे करने से पहले कुछ तैयारियां करनी होती है, जिसमें एक्सरसाइज सबसे पहली चीज है, जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है। क्लाइम्बिंग के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे लोगों में टीमवर्क की समझ बढ़ती है, अपनी मानसिक क्षमता और साहस के बारे में पता चलता है। इस दिन को मनाने का मुख्‍य उद्देश्‍य है लोगों में पर्वतारोहण के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी फैलाना है।

कैसे हुई थी शुरुआत राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस की?

नेशनल माउंटेन क्लाइम्बिंग डे की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी। यह दिन भारत के पर्वतारोहण संगठन भारतीय पर्वतारोहण संघ द्वारा प्रस्तावित किया गया था। यह दिन ग्रैंड टेटन की पहली सफल चढ़ाई की याद में मनाया जाता है, जो 1 अगस्त 1898 को पूरी हुई थी। ग्रैंड टेटन व्योमिंग की टेटन रेंज की सबसे ऊंची चोटी है और इस चढ़ाई को एक टीम ने पूरा किया था। इस टीम में कुल सात पर्वतारोही थे, जिसे नथानिएल नैट लैंगफोर्ड ने लीड किया था। उनके अलावा इस टीम में टीएम बैनन, जेपी क्रैमर, जॉन शिवे, फ्रैंक स्पाल्डिंग, विलियम ओवेन और फ्रैंकलिन स्पाल्डिंग शामिल थे।

यह दिवस कैसे मनाया जाता है?

पर्वतारोहण से जुड़े इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। पर्वतारोहियों को सम्मानित किया जाता है। उनके सफर और उसमें आने वाले चैलेंजेस के बारे में बात की जाती है।

झारखंड को मिला नया राज्यपाल: संतोष कुमार गंगवार

about - Part 717_9.1

पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने 31 जुलाई को झारखंड के 12वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। 76 वर्षीय श्री गंगवार ने सी.पी. राधाकृष्णन का स्थान लिया, जिन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने श्री गंगवार को पद की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए लोग

रांची में शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मुख्य सचिव एल खियांग्ते, अन्य मंत्री और कई गणमान्य लोग मौजूद थे। श्री गंगवार ने झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपनी नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की धरती पर आकर उन्हें बहुत खुशी हुई। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह राज्य देश में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा और अपने समृद्ध संसाधनों के साथ विकास के अपने खुद के मानक बनाएगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड तरक्की करेगा।”

संतोष कुमार गंगवार के बारे में

  • श्री गंगवार की चुनावी यात्रा 1984 में शुरू हुई जब वह पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की पत्नी, कांग्रेस उम्मीदवार आबिदा बेगम से हार गए, जिसके बाद उन्होंने 1989 में फिर से लोकसभा चुनाव लड़ा और पहली बार सांसद बने।
  • वह 1989 से 2019 तक लोकसभा चुनावों में विजयी रहे, 2009 को छोड़कर, जब कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन ने उन्हें हराया था।
  • बरेली लोकसभा सीट से आठ बार भाजपा सांसद रहे श्री गंगवार अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकारों में मंत्री रह चुके हैं।
  • हालांकि उन्हें लोकसभा चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी।

राज्यपाल की नियुक्ति

किसी राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाएगी। अनुच्छेद 156. राज्यपाल की पदावधि :

  • राज्यपाल राष्ट्रपति की इच्छा पर्यन्त पद धारण करेगा। राज्यपाल राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित रूप में अपना पद त्याग सकता है।
  • इस अनुच्छेद के पूर्वगामी प्रावधानों के अधीन, राज्यपाल अपने पद ग्रहण करने की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा।
  • बशर्ते कि राज्यपाल अपने कार्यकाल की समाप्ति के बावजूद तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता।

about - Part 717_10.1

यूपी विधानसभा ने धर्मांतरण विरोधी संशोधित विधेयक पारित किया

about - Part 717_12.1

उत्तर प्रदेश विधानसभा ने 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित किया, जिसमें जबरन धर्म परिवर्तन के लिए सज़ा बढ़ाई गई है। किसी महिला को धोखा देकर या उसका धर्म परिवर्तन करके उससे शादी करने की सज़ा 10 साल और 50,000 रुपये के जुर्माने के साथ थी। नए विधेयक में सज़ा को बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दिया गया है।

यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने 29 जुलाई को सदन में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया। प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला, नाबालिग या किसी अन्य व्यक्ति को धर्म परिवर्तन कराने के इरादे से धमकाता है, हमला करता है, शादी करता है, शादी का वादा करता है, साजिश रचता है या तस्करी करता है, तो यह अपराध सबसे गंभीर अपराधों में से एक माना जाएगा। अगर कोई व्यक्ति इस अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसे 20 साल या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

सरकार की विफलता

आज़ाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर ने कहा, “सरकार लोगों की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। वे भोजन, आश्रय और आवास, अच्छा स्वास्थ्य, अच्छी शिक्षा प्रदान करने में असमर्थ हैं, लेकिन वे ऐसे मुद्दों पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं क्योंकि यह उनके अनुकूल है,” उन्होंने कहा, “हमारे लिए रोज़गार और मूल्य वृद्धि मुद्दे हैं। इसलिए हम इस पर काम कर रहे हैं।”

about - Part 717_10.1

 

वेनेजुएला के निकोलस मादुरो तीसरी बार राष्ट्रपति बने

about - Part 717_15.1

वेनेजुएला की राष्ट्रीय चुनाव परिषद (CNE) ने 29 जुलाई को घोषणा की कि निकोलस मादुरो ने एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है और वह 2025 से 2031 तक देश पर शासन करेंगे। उल्लेखनीय है कि निकोलस मादुरो का वेनेजुएला के राष्ट्रपति के रूप में यह तीसरा मौका होगा।

निकोलस मादुरो के बारे में

उनका जन्म 23 नवंबर 1962 को हुआ था, वे वेनेजुएला के राजनीतिज्ञ हैं और 2013 से वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं। एक बस चालक के रूप में अपने कार्य जीवन की शुरुआत करने वाले मादुरो 2000 में नेशनल असेंबली के लिए चुने जाने से पहले एक ट्रेड यूनियन नेता बन गए थे।

  • राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के कार्यकाल में उन्हें कई पदों पर नियुक्त किया गया, 2005 से 2006 तक वे नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, 2006 से 2013 तक विदेश मंत्री और 2012 से 2013 तक चावेज़ के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहे।
  • 5 मार्च 2013 को चावेज़ की मृत्यु की घोषणा के बाद, मादुरो ने राष्ट्रपति पद संभाला।

एक मजबूत और अपरिवर्तनीय प्रवृत्ति

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 80 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर मतों की गिनती हो जाने के बाद मादुरो की जीत का बुलेटिन जारी किया गया। एमोरोसो ने इस बात पर जोर दिया कि यह “एक मजबूत और अपरिवर्तनीय प्रवृत्ति” है और मतदान करने के पात्र मतदाताओं में से 59 प्रतिशत ने मतदान किया। सीएनई के अनुसार, कुल मिलाकर मादुरो को 5,150,092 वैध मत मिले, जो गिने गए मतों का 51.2 प्रतिशत है।

विपक्षी उम्मीदवार

यूनिटरी प्लेटफ़ॉर्म गठबंधन के विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज उरुतिया को 4,445,978 वोट मिले, जो कि 44.2 प्रतिशत वोट थे। मादुरो नौ राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के खिलाफ़ चुनाव लड़ रहे थे। सभी उम्मीदवारों में से, सेवानिवृत्त राजनयिक एडमंडो गोंजालेज को मादुरो के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा गया था। 10 राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों में से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को चुनने के लिए 21.6 मिलियन से अधिक वेनेजुएला के लोगों ने मतदान किया।

about - Part 717_10.1

पारले 12वें साल भी बना रहा भारत का सबसे पसंदीदा FMCG ब्रांड

about - Part 717_18.1

पारले प्रोडक्ट्स के स्वामित्व वाला बिस्किट ब्रांड पारले भारत का शीर्ष FMCG ब्रांड बना हुआ है। ब्रांड फुटप्रिंट के नवीनतम संस्करण के अनुसार, कैंटर वर्ल्ड पैनल की भारत में सबसे अधिक चुने जाने वाले उपभोक्ता ब्रांडों की वार्षिक रैंकिंग। वास्तव में, शीर्ष 10 ब्रांडों में से सात घरेलू कंपनियों के स्वामित्व में हैं।

7.98 बिलियन CRP के साथ पारले

करीब 445 ब्रांड्स में से, 7.98 बिलियन सीआरपी के साथ पारले बारह साल पहले अपने ब्रांड फुटप्रिंट की शुरुआत के बाद से टॉप पर है, उसके बाद ब्रिटानिया है जिसकी सीआरपी 7.93 बिलियन है। इन दोनों ब्रांड्स में 6% और 16% की बढ़ोतरी हुई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का शैम्पू ब्रांड क्लिनिक प्लस शीर्ष पांच ब्रांडों में एकमात्र गैर-खाद्य अपवाद था, हालांकि यह 5% घटकर 4.14 बिलियन रह गया।

उपभोक्ता की पसंद

कैंटर में विश्व पैनल प्रभाग के प्रबंध निदेशक (दक्षिण एशिया) के रामकृष्णन ने कहा, “उपभोक्ता की पसंद, बाजार की विभिन्न स्थितियों में किसी भी ब्रांड के लिए एक बहुत ही विश्वसनीय शक्ति परीक्षण है और ब्रांड फुटप्रिंट एक दशक से भी अधिक समय से इसे मापने के लिए एक व्यापक रूप से प्रशंसित रैंकिंग प्रणाली रही है। जैसा कि हम पिछले कुछ वर्षों में देख रहे हैं, उपभोक्ता खरीदारी के लिए अधिक यात्राएं कर रहे हैं और इससे उनके पास विकल्प और बदले में उनकी पसंद बढ़ रही है। यह सीआरपी में निरंतर वृद्धि में परिलक्षित होता है।”

पांच रुपये का पैक पारले-जी मूल्य

करीब दो साल पहले, पारले प्रोडक्ट्स, जो पारले जी, मोनाको और मेलोडी जैसे ब्रांड्स की खुदरा बिक्री करती है, ने सालाना 2 बिलियन डॉलर का राजस्व पार किया और इस आंकड़े को छूने वाली भारत की पहली पैकेज्ड फूड कंपनी बन गई। पांच रुपये प्रति पैकेट पारले-जी की कीमत मंदी के बावजूद बढ़ी है, खास तौर पर महंगाई के समय में जब उपभोक्ता खर्च में कटौती कर रहे हैं और छोटे पैक का विकल्प चुन रहे हैं।

अपने उपभोक्ता का अनुसरण करें

पारले प्रोडक्ट्स के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा, “अपने उपभोक्ता का अनुसरण करें। यदि आप अपने उपभोक्ताओं की इच्छाओं के प्रति सच्चे रहते हैं, उन्हें समझते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात, उन्हें बढ़िया मूल्य प्रदान करके प्रसन्न करते हैं, तो वे आपके साथ बने रहेंगे। हम ऐसा करना जारी रखना चाहते हैं। उपभोक्ताओं के लिए प्रासंगिक बने रहने के लिए, आपको उपभोक्ता की बदलती गतिशीलता को समझने और समय रहते उन परिवर्तनों के अनुकूल ढलने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी बात रखनी होगी।”

ब्रिटानिया 628 मिलियन के साथ रैंकिंग का नेतृत्व करता है

रिपोर्ट में घर से बाहर की खपत का भी अध्ययन किया गया और दस में से नौ ब्रांड सभी स्नैकिंग उत्पाद हैं। 628 मिलियन सीआरपी के साथ ब्रिटानिया रैंकिंग में सबसे आगे है, उसके बाद हल्दीराम, कैडबरी, बालाजी और पारले हैं। थम्स अप घर से बाहर सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला पेय पदार्थ ब्रांड था। जबकि सीआरपी में वृद्धि जारी है, यह पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है, हालांकि कुल मिलाकर, पिछले पांच वर्षों में सीआरपी में लगभग 33% की वृद्धि हुई है।

about - Part 717_10.1

भारतीय टेनिस के दिग्गज रोहन बोपन्ना ने पेरिस 2024 ओलंपिक से बाहर होने के बाद संन्यास लिया

about - Part 717_21.1

भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक रोहन बोपन्ना ने पेरिस 2024 ओलंपिक से बाहर होने के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने से संन्यास लेने की घोषणा की है। यह भारतीय टेनिस के लिए एक युग का अंत है, क्योंकि बोपन्ना दो दशकों से अधिक समय से देश के लिए एक दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं।

अंतिम ओलंपिक प्रदर्शन

बोपन्ना का ओलंपिक सफर पुरुष युगल के पहले दौर में समाप्त हो गया, जहां उन्होंने एन. श्रीराम बालाजी के साथ जोड़ी बनाई। भारतीय जोड़ी का सामना फ्रांस की मजबूत जोड़ी गेल मोनफिल्स और एडौर्ड रोजर-वेसलिन से हुआ, जहां उन्हें अंततः 7-5, 6-2 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि नतीजा वैसा नहीं रहा जिसकी बोपन्ना को उम्मीद थी, लेकिन यह भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले उनके शानदार करियर के लिए एक मार्मिक अंत है।

एक शानदार कैरियर: हाइलाइट्स और उपलब्धियां

हाल की जीत

बोपन्ना ने राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का निर्णय कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बाद लिया है:

  1. एशियाई खेल 2022: बोपन्ना ने हांग्जो एशियाई खेलों में मिश्रित युगल स्पर्धा में रुतुजा भोसले के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत ने उनके पहले से ही प्रभावशाली संग्रह में एक और प्रतिष्ठित उपलब्धि जोड़ दी।
  2. डेविस कप विदाई: सितंबर 2023 में, बोपन्ना ने अपने 21 साल के डेविस कप करियर का उच्च स्तर पर समापन किया, उन्होंने विश्व ग्रुप II मैच में मोरक्को पर भारत की जीत में योगदान दिया।
  3. ऐतिहासिक ग्रैंड स्लैम जीत: 2024 की शुरुआत में, बोपन्ना ने टेनिस इतिहास की किताबों में अपना नाम दर्ज करा लिया। 43 साल और नौ महीने की उम्र में, वह टेनिस के ओपन एरा में ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति बन गए। यह उल्लेखनीय उपलब्धि तब हासिल हुई जब वह और उनके साथी मैथ्यू एबडेन ऑस्ट्रेलियन ओपन में पुरुष युगल स्पर्धा में विजयी हुए।

करियर ग्रैंड स्लैम सफलताएं

बोपन्ना की ग्रैंड स्लैम सफलता उनकी हालिया ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत से भी आगे तक फैली हुई है:

  • फ्रेंच ओपन 2017: बोपन्ना ने मिश्रित युगल स्पर्धा में अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया।
  • फ्रेंच ओपन 2024: अपनी निरंतर क्षमता का प्रदर्शन करते हुए, बोपन्ना और एबडेन पुरुष युगल प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुँच गए।

बोपन्ना के संन्यास के साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का उनका सफर खत्म हो गया है, लेकिन टेनिस प्रशंसकों को यह जानकर खुशी होगी कि वह एटीपी सर्किट में प्रतिस्पर्धा जारी रखने की योजना बना रहे हैं। इस फैसले से उन्हें राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से पीछे हटते हुए अपने पेशेवर करियर को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।

about - Part 717_10.1

11 सार्वजनिक बैंकों ने न्यूनतम शेष राशि न रखने पर 2,331 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

about - Part 717_24.1

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को छोड़कर ग्यारह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2024 में बचत बैंकों में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने में विफल रहने के लिए खाताधारकों से 2,331 करोड़ रुपये वसूले हैं। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन बैंकों ने पिछले तीन वर्षों में न्यूनतम शेष राशि न बनाए रखने के लिए खाताधारकों से 5,614 करोड़ रुपये वसूले हैं।

बैंकों ने सबसे ज़्यादा राशि एकत्र की

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने अपने ग्राहकों से सबसे ज़्यादा 633.4 करोड़ रुपये एकत्र किए, उसके बाद बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने 386.51 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक ने 369.16 करोड़ रुपये एकत्र किए, वित्त मंत्रालय ने संसद में उठाए गए एक सवाल के जवाब में कहा। अगर निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा लगाए गए शुल्कों को ध्यान में रखा जाए तो न्यूनतम शेष राशि का जुर्माना ज़्यादा होगा। सभी निजी बैंक अपने खातों में न्यूनतम शेष राशि रखने में विफल रहने पर खाताधारकों से भारी राशि वसूल रहे हैं।

नकद जमा करना

दिशानिर्देशों के अनुसार, बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) के अंतर्गत खाताधारकों को कुछ बुनियादी न्यूनतम सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं, जिसमें न्यूनतम शेष राशि की कोई आवश्यकता नहीं है। इनमें बैंक शाखा के साथ-साथ एटीएम/सीडीएम में नकद जमा करना और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक चैनल के माध्यम से या केंद्र/राज्य सरकार की एजेंसियों और विभागों द्वारा निकाले गए चेक के जमा/संग्रह के माध्यम से धन की प्राप्ति/जमा करना शामिल है। एक महीने में जमा की जाने वाली राशि की संख्या और मूल्य की कोई सीमा नहीं है।

एक महीने में कम से कम चार निकासी

बीएसबीडीए के तहत, एक महीने में एटीएम निकासी सहित कम से कम चार निकासी की अनुमति है। अन्य सभी प्रकार के बैंक खातों के लिए, बैंक अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार, निःशुल्क कोई भी मूल्यवर्धित सेवा प्रदान करने के लिए सक्षम हैं।

दंडात्मक शुल्क लगाने के संबंध में दिशा-निर्देश

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2014 और 2015 में जारी अपने परिपत्रों के माध्यम से बचत बैंक खातों में न्यूनतम शेष राशि न रखने पर दंडात्मक शुल्क लगाने और बैंकों में ग्राहक सेवा के संबंध में दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। बैंकों को बचत खाते में न्यूनतम शेष राशि न रखने के संबंध में दंडात्मक शुल्क तय करने की अनुमति दी गई है, जो उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार है, जबकि यह सुनिश्चित किया गया है कि दंडात्मक शुल्क वास्तविक शेष राशि और खाता खोलने के समय सहमति के अनुसार न्यूनतम शेष राशि के बीच के अंतर की राशि पर लगाया जाने वाला एक निश्चित प्रतिशत होना चाहिए।

न्यूनतम शेष राशि न बनाए रखने की स्थिति में

न्यूनतम शेष राशि न बनाए रखने की स्थिति में, बैंक को ग्राहक को दंडात्मक शुल्क के बारे में सूचित करना चाहिए जो नोटिस की तारीख से एक महीने के भीतर शेष राशि की भरपाई न करने पर लागू होगा। दिशानिर्देशों के अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि न्यूनतम शेष राशि न बनाए रखने पर शुल्क लगने के कारण बचत खाते में शेष राशि ऋणात्मक न हो जाए।

ACC के अगले अध्यक्ष बनने को तैयार पीसीबी चेयरमैन नकवी

about - Part 717_26.1

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के निवर्तमान अध्यक्ष मोहसिन नकवी एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) की ‘रोटेशन’ नीति के अंतर्गत इस साल के अंत में इसके अगले अध्यक्ष बनने को तैयार हैं। हाल में एसीसी की बैठक में अध्यक्ष पद के मामले पर चर्चा की गई थी जिसमें नकवी अगले प्रमुख बनने की दौड़ में हैं।

रोटेशन नीति का क्रियान्वयन

यह परिवर्तन ACC की स्थापित रोटेशन नीति का पालन करता है, जो संगठन के शीर्ष पर विभिन्न सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।

हाल ही में हुई चर्चाएँ

  • हाल ही में हुई ACC की बैठक में अध्यक्ष पद का मामला एक मुख्य विषय था।
  • इस पद के लिए नकवी की उम्मीदवारी पर चर्चा की गई और इस पर सकारात्मक विचार किया गया।

पुष्टि प्रक्रिया

एक सूत्र ने कहा कि जब एसीसी इस साल के अंत में बैठक करेगी तो यह पुष्टि करेगी कि नकवी दो साल के कार्यकाल के लिए अगले अध्यक्ष होंगे।

जय शाह अभी एसीसी अध्यक्ष

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) सचिव जय शाह अभी एसीसी अध्यक्ष हैं और उन्हें इस साल जनवरी में लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए एक साल का विस्तार मिला था। सूत्र के अनुसार जब जय शाह पद से हटेंगे तो पीसीबी प्रमुख कार्यभार संभालेंगे।

एशिया कप 2025 के मेजबानी

एसीसी ने हाल में एशिया कप 2025 के मेजबानी अधिकार भारत को दिए थे जिसमें यह टूर्नामेंट टी-20 प्रारूप में खेला जाएगा जबकि 2027 चरण वनडे प्रारूप में बांग्लादेश में खेला जाएगा।

Recent Posts

द हिंदू रिव्यू मार्च 2026
Most Important Questions and Answer PDF
QR Code
Scan Me