प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मुख्य सचिवों का 5वां राष्ट्रीय सम्मेलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन का संचालन किया। तीन दिवसीय सम्मेलन 26 दिसंबर, 2025 को आरंभ हुआ। इसका उद्देश्य केंद्र-राज्य साझेदारी को नियमित और व्यवस्थित संवाद के जरिए मज़बूत करना है। इसका प्रमुख ध्यान दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास और सहकारी संघवाद पर है।

मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन

  • मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक मंच है।
  • इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ केंद्रीय अधिकारियों को एक साथ लाया जाता है।
  • यह मंच नीति कार्यान्वयन, शासन सुधारों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि राजनीतिक बहसों पर।
  • यह सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के विचार का समर्थन करता है।

थीम: विकसित भारत के लिए मानव पूंजी

  • पांचवें सम्मेलन का विषय “विकसित भारत के लिए मानव पूंजी” है।
  • यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि भारत का विकास स्वस्थ, कुशल, शिक्षित और सशक्त नागरिकों पर निर्भर करता है।
  • इसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और समावेशी विकास मॉडल का निर्माण करना है।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

मानव पूंजी विषय के अंतर्गत, चर्चा पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रही।

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, जो आजीवन सीखने की नींव रखती है
  • स्कूली शिक्षा, गुणवत्ता और सीखने के परिणामों पर केंद्रित।
  • रोजगार क्षमता और उत्पादकता में सुधार के लिए कौशल विकास
  • उच्च शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए
  • सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए खेल और पाठ्येतर गतिविधियाँ

इन क्षेत्रों को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेष सेशन और शासन संबंधी प्राथमिकताएँ

सम्मेलन में छह विशेष विषयगत सत्र शामिल थे।

  • एक सत्र में राज्यों में विनियमन में ढील पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसका उद्देश्य अनावश्यक अनुपालन को कम करना और व्यापार करने में आसानी में सुधार करना था।
  • एक अन्य सत्र में शासन में प्रौद्योगिकी की भूमिका का अध्ययन किया गया, जिसमें साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता जैसे जोखिमों के साथ-साथ डिजिटल अवसरों पर चर्चा की गई।
  • एग्रीस्टैक पर एक विशेष चर्चा में किसानों के लिए स्मार्ट आपूर्ति श्रृंखलाओं और बेहतर बाजार संबंधों की संभावनाओं का पता लगाया गया।
  • पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘एक राज्य, एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल’ के विचार पर चर्चा की गई।
  • आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी पर आयोजित सत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के बाद के भविष्य के लिए रणनीतियों पर भी जोर दिया गया, जिसमें सुरक्षा से ध्यान हटाकर विकास पर केंद्रित किया गया।

सम्मेलन का महत्व

  • यह सम्मेलन नीति क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को मजबूत करता है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रीय योजनाएं राज्य-स्तरीय वास्तविकताओं के अनुरूप हों।
  • इससे राज्यों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीखने में मदद मिलती है।
  • मानव पूंजी पर ध्यान केंद्रित करने से शासन सीधे तौर पर जन-केंद्रित विकास से जुड़ जाता है।

की प्वाइंट्स

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में
  • इसका आयोजन नई दिल्ली में 26 दिसंबर, 2025 से शुरू होगा।
  • थीम: विकसित भारत के लिए मानव पूंजी
  • शिक्षा, कौशल विकास, खेल और शासन सुधारों पर ध्यान केंद्रित करें
  • केंद्र-राज्य साझेदारी और सहकारी संघवाद को मजबूत करता है

आधारित प्रश्न

प्रश्न: मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन की थीम क्या था?

A. आत्मनिर्भर भारत
B. सहकारी संघवाद
C. विकसित भारत के लिए मानव पूंजी
D. डिजिटल इंडिया

मन की बात 129वां एपिसोड: पीएम मोदी द्वारा 2025 का आखिरी एपिसोड

‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड में, जो 28 दिसंबर 2025 को प्रसारित हुआ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में भारत की उपलब्धियों पर व्यापक चर्चा की और आने वाले वर्ष के लिए देश की आकांक्षाओं, जिम्मेदारियों तथा सामूहिक संकल्प को रेखांकित किया। वर्ष 2025 का अंतिम ‘मन की बात’ होने के कारण यह संबोधन राष्ट्रीय सुरक्षा, युवा भागीदारी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, स्वास्थ्य, पर्यावरण और जमीनी स्तर की सफलता की कहानियों का समन्वय था, जिसने ‘विकसित भारत’ के विज़न को मजबूती दी।

2025: राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक प्रभाव का वर्ष

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि 2025 ऐसा वर्ष रहा जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा, खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भारत ने अपनी मजबूत वैश्विक छाप छोड़ी।
  • उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारत के अडिग रुख और मां भारती से नागरिकों के गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बनकर उभरा।
  • इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष भी पूरे हुए, जिन्हें #VandeMataram150 हैशटैग के माध्यम से व्यापक जनभागीदारी के साथ उत्साहपूर्वक मनाया गया।

ऐतिहासिक खेल उपलब्धियाँ

प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 को भारतीय खेलों का स्वर्णिम वर्ष बताया और कई ऐतिहासिक जीतों को रेखांकित किया—

  • पुरुष क्रिकेट टीम द्वारा ICC चैंपियंस ट्रॉफी जीतना
  • महिला क्रिकेट टीम द्वारा पहली बार विश्व कप जीतना
  • भारतीय महिलाओं द्वारा वूमेन्स ब्लाइंड T20 विश्व कप जीतना
  • एशिया कप T20 और पैरा-स्पोर्ट्स विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और समावेशी खेल पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती हैं।

विज्ञान, अंतरिक्ष और पर्यावरण में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

  • विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की प्रगति भी वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धियों में रही। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुँचने वाले पहले भारतीय बने, जो भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
  • पर्यावरण के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि भारत में चीतों की संख्या 30 से अधिक हो गई है, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वर्षभर की प्रमुख प्राथमिकताएँ रहीं।

संस्कृति, आस्था और विरासत

प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि 2025 में आस्था, संस्कृति और विरासत एक साथ देखने को मिली—

  • वर्ष की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया
  • वर्ष के अंत में अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह ने पूरे देश को गौरवान्वित किया
  • स्वदेशी के प्रति बढ़ता उत्साह, जहाँ लोग सचेत रूप से भारतीयों द्वारा निर्मित उत्पादों को चुन रहे हैं
  • उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास को और मजबूत किया।

युवा शक्ति और विकसित भारत

  • युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री ने ऐसे मंचों पर विस्तार से बात की, जो युवाओं को अपने विचार और नवाचार साझा करने का अवसर देते हैं।
  • उन्होंने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ का उल्लेख किया, जिसका दूसरा संस्करण राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के आसपास, स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आयोजित होगा। इसमें युवा नवाचार, स्टार्टअप, कृषि और फिटनेस जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे।
  • स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 का भी विशेष उल्लेख किया गया। अब तक 6,000 से अधिक संस्थानों के 13 लाख से ज्यादा छात्र इसमें भाग ले चुके हैं और ट्रैफिक प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल धोखाधड़ी, ग्रामीण बैंकिंग और कृषि जैसी वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए हैं।

आधुनिकता और सांस्कृतिक जड़ों का समन्वय

प्रधानमंत्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि भले ही तकनीक तेज़ी से जीवन को बदल रही हो, लेकिन संस्कृति से जुड़े रहना उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कुछ प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए—

  • ‘गीतांजलि IISc’: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में शुरू हुई यह संगीत पहल आगे चलकर एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुई।
  • ‘कन्नड़ पाठशाले’, दुबई: भारतीय प्रवासी बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास।
  • काशी तमिल संगमम् जैसी पहलों के माध्यम से तमिल भाषा के प्रति बढ़ती रुचि, जहाँ वाराणसी में हिंदी भाषी बच्चे भी तमिल सीख रहे हैं।
  • इन उदाहरणों ने भारत की विविधता में एकता की सांस्कृतिक शक्ति को उजागर किया।

जमीनी बदलाव के नायक और सौर ऊर्जा

  • प्रधानमंत्री ने मणिपुर के मॉइरांगथेम सेठ की कहानी साझा की, जिन्होंने सौर ऊर्जा का उपयोग कर दूरदराज़ क्षेत्रों में बिजली की कमी को दूर किया। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, आजीविका, महिलाओं, मछुआरों और कारीगरों को लाभ मिला।
  • उन्होंने इसे पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जोड़ा, जिसके तहत परिवारों को रूफटॉप सोलर लगाने के लिए ₹75,000–₹80,000 की सहायता दी जाती है। यह भारत की नवीकरणीय ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम है।

विरासत, अनसुने नायक और स्वतंत्रता संग्राम

  • प्रधानमंत्री मोदी ने जहनपोरा, बारामूला (जम्मू-कश्मीर) में हुए पुरातात्विक खोजों का उल्लेख किया, जहाँ प्राचीन बौद्ध स्तूपों से कश्मीर की 2,000 वर्ष पुरानी विरासत सामने आई।
  • उन्होंने ओडिशा की पार्वती गिरी को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी जन्म शताब्दी जनवरी 2026 में मनाई जाएगी। एक स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेविका के रूप में उन्होंने भारत की आज़ादी और सामाजिक उत्थान में अनसुने नायकों के योगदान का प्रतीक प्रस्तुत किया।

स्वास्थ्य परामर्श: एंटीबायोटिक प्रतिरोध

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के प्रति चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि इससे निमोनिया और यूटीआई (मूत्र मार्ग संक्रमण) जैसी बीमारियों का इलाज और कठिन होता जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि एंटीबायोटिक दवाएँ केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही लें, और इस बात पर ज़ोर दिया—
“दवाओं को मार्गदर्शन चाहिए, एंटीबायोटिक को डॉक्टर चाहिए।”

पारंपरिक कला, जीआई टैग और महिला सशक्तिकरण

  • अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे पारंपरिक कलाएँ आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं—
  • नरसापुरम लेस (आंध्र प्रदेश) को जीआई टैग मिला, जिससे 250 गांवों की लगभग 1 लाख महिलाओं को समर्थन मिला।
  • मार्गरेट रामथार्सीएम (मणिपुर) और चोखोने क्रिचेना (सेनापति जिला) जैसी उद्यमी हस्तशिल्प और पुष्प-उत्पादन को स्थायी आजीविका में बदल रही हैं।
  • इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक दृष्टि के समन्वय से स्थानीय विकास को नई गति मिल सकती है।

त्योहार, पर्यटन और भारत की विविधता

प्रधानमंत्री ने लोगों से भारत की विविधता को त्योहारों और पर्यटन के माध्यम से जानने का आग्रह किया। उन्होंने कच्छ रण उत्सव का उल्लेख किया, जो 23 नवंबर से 20 फरवरी तक चलता है और इस सत्र में अब तक 2 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर चुका है।

 

IIT पटना ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सुपरकंप्यूटर लॉन्च किया

IIT पटना ने बिहार के पहले ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन किया है। यह राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे क्षेत्र में अनुसंधान क्षमताएँ सुदृढ़ होंगी और छात्र, शिक्षक तथा शोधकर्ता जटिल वैज्ञानिक एवं तकनीकी चुनौतियों से निपट सकेंगे।

परम रुद्र सुपरकंप्यूटर के बारे में

  • परम रुद्र बिहार में किसी भी शैक्षणिक संस्थान या सरकारी कार्यालय में स्थापित पहला सुपरकंप्यूटर है।
  • इसका औपचारिक उद्घाटन अमितेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव, MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) द्वारा किया गया।
  • यह प्रणाली विशाल डेटा प्रोसेसिंग, जटिल सिमुलेशन और उन्नत मॉडलिंग की सुविधा देती है, जो सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों के कारण पहले कठिन थी।

सुपरकंप्यूटर की प्रमुख विशेषताएँ

भारत के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) का हिस्सा

कंप्यूट क्षमता: देशभर में 37 सुपरकंप्यूटरों के साथ कुल 39 पेटाफ्लॉप्स में योगदान; शीघ्र ही 10 और प्रणालियाँ जुड़ने पर यह क्षमता 100 पेटाफ्लॉप्स से अधिक होने की उम्मीद

स्वदेशी तकनीक:

  • HPC प्रोसेसर
  • सर्वर
  • कूलिंग सिस्टम
  • इंटरकनेक्ट्स

सॉफ्टवेयर स्टैक और स्टोरेज

जिन क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन अनुसंधान को समर्थन

  • कम्प्यूटेशनल एस्ट्रोबायोलॉजी और एस्ट्रोकेमिस्ट्री
  • रिएक्शन डायनेमिक्स
  • कम्प्यूटेशनल मैटेरियल डिज़ाइन और मॉलिक्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स
  • कम्प्यूटेशनल फ्लूड मैकेनिक्स
  • कम्प्यूटेशनल नैनो-बायो इंटरफेसेज़
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस
  • क्वांटम कंप्यूटिंग

परम रुद्र सुपरकंप्यूटर का महत्व

  • बिहार और आसपास के क्षेत्रों में शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ावा
  • IIT पटना के 10 विभागों के लगभग 60 फैकल्टी सदस्यों और 400 छात्रों को लाभ
  • उन्नत सिमुलेशन, डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक प्रयोग संभव होंगे
  • सुपरकंप्यूटिंग में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): भारत में अनुसंधान और नवाचार को समर्थन देने हेतु सुपरकंप्यूटरों की स्थापना के लिए शुरू किया गया मिशन
  • परम रुद्र: NSM के तहत स्वदेशी रूप से विकसित ‘परम’ सुपरकंप्यूटर श्रृंखला का हिस्सा
  • IIT पटना: बिहार का प्रमुख संस्थान, जो अब विश्वस्तरीय सुपरकंप्यूटिंग सुविधा से लैस है

मुख्य बिंदु (Takeaways)

  • सुपरकंप्यूटर: परम रुद्र
  • स्थान: IIT पटना, बिहार
  • अभियान: राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM)
  • उद्घाटन: अमितेश कुमार सिन्हा (MeitY)
  • लाभार्थी: 60 फैकल्टी, 400 छात्र
  • समर्थित क्षेत्र: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री, मैटेरियल साइंस आदि

जोहो के सहयोग से विकसित भारत का पहला स्वदेशी एमआरआई स्कैनर

जोहो समर्थित भारतीय स्टार्टअप VoxelGrids ने भारत का पहला स्वदेशी एमआरआई (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) स्कैनर विकसित किया है। यह उपलब्धि भारत की आयातित डायग्नोस्टिक उपकरणों पर निर्भरता को कम करती है और देश के स्वास्थ्य अवसंरचना को सशक्त बनाती है।

स्वदेशी एमआरआई स्कैनर के बारे में

  • VoxelGrids ने सफलतापूर्वक 1.5 टेस्ला एमआरआई स्कैनर डिज़ाइन और निर्मित किया है।
  • यह स्कैनर नागपुर के पास चंद्रपुर कैंसर केयर फाउंडेशन में स्थापित किया गया है।
  • यह परियोजना VoxelGrids के संस्थापक अर्जुन अरुणाचलम के नेतृत्व में 12 वर्षों के सतत प्रयास का परिणाम है।
  • अब तक भारत एमआरआई मशीनों के लिए लगभग पूरी तरह Siemens और GE Healthcare जैसी विदेशी कंपनियों पर निर्भर था।

स्वदेशी एमआरआई स्कैनर की प्रमुख विशेषताएँ

  • चुंबकीय क्षेत्र की क्षमता: 1.5 टेस्ला (क्लिनिकल डायग्नोस्टिक्स का मानक)
  • पूरी तरह स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण
  • पारंपरिक एमआरआई के विपरीत लिक्विड हीलियम की आवश्यकता नहीं
  • आयातित एमआरआई की तुलना में लगभग 40% कम लागत
  • विदेशी मॉडलों की नकल नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचारों से युक्त

इस विकास का महत्व

  • आयातित मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरणों पर निर्भरता में कमी
  • एमआरआई जाँच की लागत कम, जिससे सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ
  • आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती
  • भारत के मेडटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम में नवाचार को प्रोत्साहन
  • टियर-2 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत डायग्नोस्टिक्स की बेहतर उपलब्धता

पृष्ठभूमि व स्थैतिक जानकारी

  • एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging):
  • एक गैर-आक्रामक (नॉन-इनवेसिव) डायग्नोस्टिक तकनीक
  • मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग
  • कैंसर, मस्तिष्क विकार, रीढ़ की चोट और सॉफ्ट टिश्यू समस्याओं की पहचान में व्यापक उपयोग

वोक्सेल ग्रिड्स

  • जोहो समर्थित भारतीय मेडटेक स्टार्टअप
  • देश में उन्नत मेडिकल इमेजिंग तकनीक विकसित करने पर केंद्रित

मेक इन इंडिया और हेल्थकेयर

  • मेडिकल डिवाइसेज़ एक प्राथमिकता क्षेत्र
  • स्वदेशी निर्माण से लागत और आयात दोनों में कमी

त्वरित तथ्य

  • स्टार्टअप: VoxelGrids
  • संस्थापक: अर्जुन अरुणाचलम
  • समर्थन: Zoho
  • एमआरआई क्षमता: 1.5 टेस्ला
  • विशेषता: लिक्विड हीलियम मुक्त, ~40% सस्ता
  • स्थापना स्थल: चंद्रपुर (नागपुर के पास)
  • महत्व: मेक इन इंडिया, किफायती स्वास्थ्य सेवा

भारतीय रेलवे 2030 तक 48 शहरों में ट्रेनों की शुरुआती क्षमता को दोगुना करेगा

भारत सरकार ने घोषणा की है कि भारतीय रेलवे वर्ष 2030 तक देश के 48 प्रमुख शहरों में मूल (ऑरिजिनेटिंग) ट्रेनों की क्षमता दोगुनी करने की योजना बना रहा है। इस पहल का उद्देश्य व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर भीड़ को कम करना और रेल यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करना है। यह घोषणा रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण और तेजी से विकसित हो रहे शहरी एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की सरकार की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाती है।

विस्तार योजना का उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरी केंद्रों से शुरू होने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाना है, जिससे—

  • मौजूदा टर्मिनलों पर भीड़ कम हो
  • समयपालन (पंक्चुअलिटी) और सेवा की विश्वसनीयता में सुधार हो
  • यात्रियों की सुविधा और आराम बढ़े
  • रेल आधारित परिवहन की दीर्घकालिक वृद्धि को समर्थन मिले

मूल ट्रेनों की क्षमता दोगुनी करके भारतीय रेलवे 2030 और उसके बाद की बढ़ती मांग के अनुरूप अपने बुनियादी ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करना चाहता है।

प्रस्तावित प्रमुख अवसंरचना उन्नयन

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यापक अवसंरचनात्मक उपायों की योजना बनाई गई है—

  • मौजूदा टर्मिनलों पर नए प्लेटफॉर्म का निर्माण
  • ट्रेनों की पार्किंग और रखरखाव के लिए स्टेबलिंग लाइनों और पिट लाइनों का विस्तार
  • शंटिंग और मेंटेनेंस सुविधाओं का उन्नयन
  • प्रमुख शहरों के भीतर और आसपास नए टर्मिनल स्टेशनों की पहचान और विकास
  • इन उपायों से ट्रेन संचालन का बेहतर वितरण होगा और पुराने स्टेशनों पर दबाव कम होगा।

मुख्य बिंदु

  • भारतीय रेलवे 2030 तक 48 शहरों में मूल ट्रेनों की क्षमता दोगुनी करेगा।
  • इस पहल का उद्देश्य भीड़ कम करना और यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
  • नए प्लेटफॉर्म, विस्तारित स्टेबलिंग लाइनें और नए टर्मिनल प्रमुख उपाय हैं।
  • क्षमता वृद्धि को सिग्नलिंग और मल्टी-ट्रैकिंग कार्यों के साथ समन्वित किया जाएगा।
  • योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि यात्रियों को शीघ्र लाभ मिल सके।
  • यह पहल दीर्घकालिक संपर्क, दक्षता और आर्थिक विकास को समर्थन देती है।

ओडिशा के बरगढ़ में दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एयर थिएटर ‘धनु यात्रा’ शुरू

दुनिया के सबसे बड़े खुले रंगमंच धनु यात्रा का उद्घाटन ओडिशा के बरगढ़ में किया गया। यह 11 दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव पूरे शहर को पौराणिक नगरी मथुरा में परिवर्तित कर देता है। भक्ति, परंपरा और नाट्य कला के अद्भुत संगम के रूप में मनाई जाने वाली धनु यात्रा ओडिशा सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों दर्शकों को आकर्षित करती है।

धनु यात्रा के बारे में

  • अवधि: 11 दिन
  • विषय: भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की पौराणिक लीलाओं का मंचन—जन्म से लेकर मामा कंस के वध तक
  • विशेषता: बरगढ़ का पूरा शहर मथुरा नगरी में बदल जाता है, जहाँ गलियाँ, महल और आँगन जीवंत रंगमंच बन जाते हैं
  • प्रमुख स्थलों में रंगमहल और नंदराज का दरबार शामिल हैं
  • पारंपरिक रंगमंच से अलग, धनु यात्रा कलाकारों और दर्शकों के बीच की सीमा को मिटा देती है, जिससे एक जीवंत और सहभागितापूर्ण कथा-अनुभव बनता है

बरगढ़ का पौराणिक मथुरा में रूपांतरण

  • धनु यात्रा के दौरान बरगढ़ शहर को प्रतीकात्मक रूप से प्राचीन मथुरा नगरी में बदल दिया जाता है।
  • सड़कें, महल, नदी तट और आँगन नाट्य मंच बन जाते हैं
  • रंगमहल, नंदराज का दरबार और सार्वजनिक स्थानों पर श्रीकृष्ण की जीवन गाथा के प्रसंग क्रमवार प्रस्तुत किए जाते हैं
  • दर्शक स्वयं को कथा के बीच पाते हैं, जिससे वास्तविक जीवन और पौराणिक कथा के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है

महत्व

  • सांस्कृतिक विरासत: भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं को पारंपरिक, सामुदायिक शैली में संरक्षित और प्रचारित करता है
  • सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय लोग स्वयं विभिन्न भूमिकाएँ निभाते हैं और आयोजन में सक्रिय सहयोग करते हैं
  • पर्यटन और अर्थव्यवस्था: हजारों पर्यटकों के आगमन से स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
  • राष्ट्रीय मान्यता: केंद्र सरकार ने धनु यात्रा को राष्ट्रीय महोत्सव का दर्जा प्रदान किया है

मुख्य बिंदु

  • धनु यात्रा दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एयर थिएटर मानी जाती है
  • यह हर वर्ष ओडिशा के बरगढ़ में 11 दिनों तक आयोजित होती है
  • इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की लीलाओं का मंचन होता है
  • पूरा शहर पौराणिक मथुरा में परिवर्तित हो जाता है
  • धनु यात्रा को राष्ट्रीय महोत्सव का दर्जा प्राप्त है

पीवी सिंधु बीडब्ल्यूएफ एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन चुनी गईं

भारत की बैडमिंटन आइकन पुसर्ला वेंकट सिंधु (पीवी सिंधु) ने कोर्ट के बाहर भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन पीवी सिंधु को बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन के रूप में 2026–2029 कार्यकाल के लिए चुना गया है। यह नियुक्ति वैश्विक खेल प्रशासन में उनके नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भूमिका और जिम्मेदारियाँ

एथलीट्स कमीशन की अध्यक्ष बनने के साथ ही पीवी सिंधु BWF काउंसिल की भी सदस्य होंगी। इससे बैडमिंटन खिलाड़ियों की आवाज़ सीधे खेल की वैश्विक सर्वोच्च निर्णय प्रक्रिया में शामिल होगी। इस भूमिका में वे—

  • दुनिया भर के बैडमिंटन खिलाड़ियों के हितों और चिंताओं का प्रतिनिधित्व करेंगी
  • नीतिगत निर्माण और शासन संबंधी निर्णयों में योगदान देंगी
  • खेल की निष्पक्षता, ईमानदारी और खिलाड़ियों के कल्याण की पैरवी करेंगी

सिंधु की प्रतिक्रिया

नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए सिंधु ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया। उन्होंने पिछली अध्यक्ष ग्रेसिया पोली के योगदान की भी सराहना की। सिंधु ने कहा कि वे BWF के साथ मिलकर ऐसे सार्थक और दीर्घकालिक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनसे हर स्तर के खिलाड़ियों को वास्तविक लाभ मिले।

पृष्ठभूमि: एथलीट्स कमीशन से जुड़ाव

पीवी सिंधु 2017 से BWF एथलीट्स कमीशन से जुड़ी हुई हैं और 2020 से BWF इंटीग्रिटी एम्बेसडर के रूप में भी कार्य कर रही हैं। खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व और खेल की ईमानदारी से जुड़े मामलों में उनके लंबे अनुभव ने उन्हें इस पद के लिए एक स्वाभाविक विकल्प बनाया।

अन्य प्रमुख नियुक्तियाँ

  • नीदरलैंड्स की डेबोरा जिल को उपाध्यक्ष (डिप्टी चेयर) नियुक्त किया गया
  • अन्य सदस्यों में ओलंपिक चैंपियन आन से-यंग, मिस्र की दोहा हनी और चीन की जिया यीफान शामिल हैं
  • पैरा-बैडमिंटन में हांगकांग (चीन) के चान हो यूएन डेनियल पूर्णकालिक अध्यक्ष बने
  • भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी अबू हुबैदा भी कमीशन का हिस्सा हैं

पीवी सिंधु की खेल विरासत

पीवी सिंधु भारत की अब तक की सबसे सफल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ—

  • रियो ओलंपिक 2016 में रजत पदक
  • टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक
  • विश्व चैंपियनशिप में कई पदक, जिनमें स्वर्ण भी शामिल
  • वे 2026 बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप (क़िंगदाओ, चीन) में भारत का नेतृत्व भी करेंगी

मुख्य बिंदु

  • पीवी सिंधु BWF एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन (2026–2029) चुनी गईं
  • वे BWF काउंसिल की भी सदस्य होंगी
  • 2017 से कमीशन से जुड़ी हैं
  • पिछली अध्यक्ष: ग्रेसिया पोली
  • यह नियुक्ति वैश्विक खेल प्रशासन में भारत की भूमिका को मजबूत करती है

सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने विशाल सांता क्लॉज़ बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने ओडिशा के पुरी स्थित नीलाद्रि बीच पर सांता क्लॉज की एक विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली रेत और सेब से बनी विशाल मूर्ति का निर्माण किया है। यह कलाकृति क्रिसमस की भावना को दर्शाने के साथ-साथ शांति और सद्भाव का संदेश भी देती है।

विश्व का सबसे बड़ा सांता क्लॉज

  • इस कृति का शीर्षक “विश्व की सबसे बड़ी सेब और रेत से बनी सांता क्लॉज इंस्टॉलेशन” रखा गया है।
  • इसका अनावरण 26 दिसंबर 2025 को किया गया।
  • इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई है।
  • सुदर्शन पटनायक ने इस अनोखी और उत्सवपूर्ण कृति का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।

मूर्ति की प्रमुख विशेषताएँ

  • 1.5 टन सेब और रेत का उपयोग
  • आकार: 60 फीट लंबी, 45 फीट चौड़ी और 22 फीट ऊँची
  • रेत कला और फलों का अनूठा संयोजन
  • विश्व भर में शांति और सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से तैयार

इस कलाकृति का महत्व

  • पुरी में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
  • रचनात्मक सार्वजनिक कला के माध्यम से क्रिसमस की भावना का प्रसार
  • एकता और सद्भावना का वैश्विक संदेश
  • भारत की नवोन्मेषी और पर्यावरण–अनुकूल कला प्रतिभा का प्रदर्शन

सुदर्शन पटनायक के बारे में

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रेत कलाकार
  • सामाजिक मुद्दों और वैश्विक घटनाओं पर आधारित कलाकृतियों के लिए जाने जाते हैं
  • जलवायु परिवर्तन, मानवीय विषयों और पर्यावरणीय मुद्दों पर कई रिकॉर्ड तोड़ रचनाएँ बना चुके हैं

पृष्ठभूमि

  • पुरी का नीलाद्रि बीच रेत कला प्रदर्शनियों और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है
  • भारत में क्रिसमस का पर्व व्यापक रूप से मनाया जाता है, जहाँ चर्च, बाज़ार, सजावट और कैरोल्स से उत्सवपूर्ण माहौल बनता है

मुख्य बिंदु

  • सुदर्शन पटनायक ने विश्व की सबसे बड़ी सेब और रेत से बनी सांता क्लॉज मूर्ति बनाई
  • स्थान: नीलाद्रि बीच, पुरी (ओडिशा)
  • 1.5 टन सेब का उपयोग
  • आकार: 60 × 45 × 22 फीट
  • वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया से मान्यता
  • क्रिसमस पर शांति और सद्भाव का वैश्विक संदेश

आपराधिक जांच ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए NATGRID को NPR से जोड़ा जाएगा

भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से जोड़ा है, ताकि खुफिया जानकारी एकत्र करने की क्षमता को मजबूत किया जा सके और आपराधिक जांच की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। इस एकीकरण से कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को सत्यापित जनसांख्यिकीय तथा परिवार-आधारित आंकड़ों तक पहुंच मिलेगी, जिससे संदिग्धों, उनके नेटवर्क और उनकी गतिविधियों/आवागमन के पैटर्न की पहचान करना आसान होगा।

राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID)

उद्देश्य

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमलों (2008) के बाद खुफिया समन्वय में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए विकसित एक रियल-टाइम खुफिया और डेटा एक्सेस प्लेटफॉर्म।
  • कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को महत्वपूर्ण सूचनाओं तक त्वरित पहुंच उपलब्ध कराना।

प्रशासन

  • गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत कार्य करता है।
  • अधिकृत एजेंसियों के बीच सुरक्षित सूचना-साझाकरण की रीढ़ (secure backbone) के रूप में कार्य करता है।

एकीकृत डेटा स्रोत

  • 20 से अधिक श्रेणियों के नागरिक और वाणिज्यिक डेटाबेस को समेकित करता है।
  • इसमें बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन, दूरसंचार रिकॉर्ड, पासपोर्ट एवं आव्रजन डेटा, कर पहचानकर्ता, वाहन पंजीकरण, पुलिस FIR (CCTNS) और अन्य ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • मांग पर, भूमिका-आधारित (role-based) पहुंच प्रदान की जाती है; डेटा स्थायी रूप से संग्रहीत नहीं किया जाता।

पहुंच रखने वाली एजेंसियां

  • प्रारंभ में: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)।
  • बाद में: प्रवर्तन निदेशालय (ED), वित्तीय खुफिया इकाई (FIU), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI)।
  • नवीन सुधार: राज्य स्तर पर पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के अधिकारियों को भी पहुंच प्रदान की गई।

गांडीव (Gandiva) विश्लेषणात्मक बैकबोन

  • बहु-स्रोत डेटा फ्यूजन और एंटिटी रेज़ोल्यूशन के लिए उन्नत एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस टूल।
  • टेलीकॉम KYC, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और अन्य फोटो-आधारित पहचान प्रणालियों का उपयोग कर चेहरे की पहचान करता है।
  • असंबंधित दिखने वाले डेटा बिंदुओं को जोड़कर संदिग्धों की पहचान और ट्रैकिंग को तेज करता है।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

उद्देश्य

  • भारत के सामान्य निवासियों का एक व्यापक डेटाबेस, जिसे परिवार-आधारित आधार पर संधारित किया जाता है।
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के निर्माण की दिशा में पहला कदम।

इतिहास

  • पहली बार 2010 में संकलित किया गया।
  • 2015 में घर-घर जाकर गणना के माध्यम से अद्यतन किया गया, जिसमें लगभग 119 करोड़ निवासियों को कवर किया गया।

कानूनी आधार

  • भारत के नागरिकता अधिनियम के अंतर्गत।

मुख्य बिंदु

  • NATGRID का गठन 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद किया गया।
  • यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • 20 से अधिक नागरिक और वाणिज्यिक डेटाबेस को एकीकृत करता है।
  • गांडीव एक उन्नत एनालिटिक्स टूल है, जो चेहरे की पहचान और एंटिटी रेज़ोल्यूशन सक्षम करता है।
  • NPR निवासियों का परिवार-आधारित डेटाबेस है, जिसे पहली बार 2010 में तैयार किया गया।
  • NATGRID को NPR से जोड़ने से नेटवर्क विश्लेषण और आतंकवाद-रोधी जांच की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

BIS ने अगरबत्तियों के लिए पहला भारतीय मानक जारी किया

उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अगरबत्तियों (अगारबत्ती) के लिए भारत का पहला मानक अधिसूचित किया है। यह नया मानक IS 19412:2025 है, जिसे राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर घोषित किया गया। इस मानक में कच्चे माल, जलने की क्षमता, सुगंध की गुणवत्ता और रासायनिक सुरक्षा से जुड़े व्यापक नियम तय किए गए हैं, साथ ही कई हानिकारक रसायनों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा अगरबत्ती उत्पादक और निर्यातक देश है और यह सुरक्षित घरेलू उत्पादों तथा नैतिक विनिर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

IS 19412:2025 क्या है?

  • IS 19412:2025 अगरबत्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया पहला भारतीय मानक है।
  • यह बाजार में बिकने वाली अगरबत्तियों को मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और गुणवत्ता में एकरूप बनाने हेतु एक संरचित नियामक ढांचा प्रदान करता है।

यह मानक चार मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है—

  • कच्चे माल की गुणवत्ता
  • जलने की विशेषताएँ और राख का व्यवहार
  • सुगंध का प्रदर्शन और स्थिरता
  • रासायनिक सुरक्षा और विषाक्तता नियंत्रण

इस पहल के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक और सुगंधित उपयोग के लिए व्यापक रूप से प्रयुक्त अगरबत्तियाँ पहली बार औपचारिक गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आई हैं।

हानिकारक रसायनों पर प्रतिबंध

नए मानक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन खतरनाक रसायनों पर प्रतिबंध है जो मानव स्वास्थ्य, घर के भीतर वायु गुणवत्ता और पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

प्रतिबंधित कीटनाशक रसायन

मानक के तहत निम्नलिखित कीटनाशक रसायनों के उपयोग पर रोक लगाई गई है—

  • एलेथ्रिन (Alethrin)
  • पर्मेथ्रिन (Permethrin)
  • सायपरमेथ्रिन (Cypermethrin)
  • डेल्टामेथ्रिन (Deltamethrin)
  • फिप्रोनिल (Fipronil)

ये रसायन तंत्रिका तंत्र को नुकसान और श्वसन संबंधी जोखिमों से जुड़े माने जाते हैं तथा कई देशों में प्रतिबंधित या नियंत्रित हैं।

प्रतिबंधित कृत्रिम सुगंध रसायन

कुछ कृत्रिम सुगंध मध्यवर्ती रसायनों पर भी रोक लगाई गई है, जैसे—

  • बेंज़िल सायनाइड (Benzyl cyanide)
  • एथाइल एक्रिलेट (Ethyl acrylate)
  • डाइफिनाइलएमीन (Diphenylamine)

इन रसायनों के दहन से बंद स्थानों में विषाक्त, एलर्जिक और पर्यावरणीय प्रभाव पड़ सकते हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 पर घोषणा

  • IS 19412:2025 की घोषणा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर की।
  • यह कदम उपभोक्ता सशक्तिकरण के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है, जिससे रोज़मर्रा के घरेलू उत्पाद वैज्ञानिक रूप से तय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।

यह मानक क्यों महत्वपूर्ण है?

अगरबत्तियाँ देशभर में करोड़ों घरों, मंदिरों और कार्यस्थलों पर प्रतिदिन जलाई जाती हैं। अब तक इस क्षेत्र में समान राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अभाव था, जबकि लंबे समय तक धुएँ और रसायनों के संपर्क से स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।

नया BIS मानक—

  • उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य, विशेषकर श्वसन स्वास्थ्य की रक्षा करेगा
  • घर के भीतर वायु गुणवत्ता में सुधार करेगा
  • पर्यावरण अनुकूल और नैतिक विनिर्माण को बढ़ावा देगा
  • पर्यावरण प्रदूषण को कम करेगा
  • भारतीय अगरबत्ती उत्पादों पर उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाएगा

मुख्य बिंदु

  • BIS ने अगरबत्तियों के लिए भारत का पहला मानक IS 19412:2025 अधिसूचित किया
  • घोषणा राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 पर की गई
  • एलेथ्रिन, पर्मेथ्रिन, सायपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध
  • बेंज़िल सायनाइड और एथाइल एक्रिलेट जैसे कृत्रिम सुगंध रसायनों पर रोक
  • उद्देश्य: उपभोक्ता सुरक्षा, बेहतर इनडोर एयर क्वालिटी और पर्यावरण संरक्षण
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा अगरबत्ती उत्पादक और निर्यातक देश है

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