IPL 2025: रोहित शर्मा 300 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने

भारतीय प्रीमियर लीग (IPL) के सबसे सफल और चर्चित बल्लेबाज़ों में से एक रोहित शर्मा ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। IPL 2025 एलिमिनेटर मैच के दौरान, मुंबई इंडियंस (MI) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच न्यू चंडीगढ़ में हुए मुकाबले में उन्होंने अपना 300वां छक्का जड़कर यह मुकाम हासिल किया।

T20 क्रिकेट में पावर-हिटिंग का नया मील का पत्थर

इस उपलब्धि के साथ, रोहित शर्मा IPL इतिहास में 300 छक्के मारने वाले पहले भारतीय और कुल मिलाकर दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले केवल क्रिस गेल ने यह कारनामा किया है, जो अभी भी IPL के छक्कों के राजा हैं।

रोहित का 300वां छक्का उनकी पहचान के अनुसार एक शानदार, ऊंचा और दमदार शॉट था — शुद्ध क्लास और ताकत का संगम।

IPL में सबसे ज़्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी

खिलाड़ी छक्के खेले गए मैच
क्रिस गेल 357 142
रोहित शर्मा 300* 251+
विराट कोहली 291 250+
एमएस धोनी 264 250+
एबी डिविलियर्स 251 184

भारतीय T20 बल्लेबाज़ी का प्रतीक

रोहित शर्मा की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय T20 क्रिकेट की बदलती सोच और शैली का प्रतीक है। एक समय था जब भारतीय बल्लेबाज़ों को संयमित शैली के लिए जाना जाता था, लेकिन अब वे दुनिया के सबसे आक्रामक और नवाचारी T20 खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।

रोहित शर्मा ने 2008 में एक युवा प्रतिभा के रूप में IPL में कदम रखा था, और 2025 तक वह एक T20 लीजेंड बन चुके हैं।

क्यों खास है यह मील का पत्थर?

  • रोहित ने यह रिकॉर्ड 251 से अधिक मैचों में बनाया, जिसमें उन्होंने अपनी लगातार परफॉर्मेंस और फिटनेस से सभी को प्रभावित किया।

  • उनका यह छक्का एक “करो या मरो” मुकाबले में आया, जिससे उनकी टीम मुंबई इंडियंस को बढ़त मिली।

  • इससे यह साबित होता है कि रोहित शर्मा सिर्फ एक तकनीकी बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि T20 में गेम चेंजर भी हैं।

सेरेना विलियम्स को 2025 के लिए प्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियस स्पोर्ट्स अवार्ड से सम्मानित किया गया

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एथलीटों में से एक, सेरेना विलियम्स को स्पेन का प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानप्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियस अवार्ड फॉर स्पोर्ट्स 2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार खेल, कला, साहित्य और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में वैश्विक उत्कृष्टता और योगदान को मान्यता देता है।

क्यों है यह सम्मान विशेष?

43 वर्षीय अमेरिकी टेनिस दिग्गज अब उन चुनिंदा वैश्विक हस्तियों की सूची में शामिल हो गई हैं जिन्हें यह स्पेन का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार प्राप्त हुआ है। आयोजकों ने सेरेना को न सिर्फ कोर्ट पर उनके दबदबे के लिए, बल्कि लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और समान अवसरों के लिए उनके प्रयासों के लिए भी सराहा।

सेरेना विलियम्स: उपलब्धियों से भरा करियर

  • 73 सिंगल्स टाइटल, जिनमें 23 ग्रैंड स्लैम विजेता

  • 2022 में टेनिस से संन्यास की घोषणा

  • 2025 में मिला यह सम्मान, उनकी विरासत की ताकत का प्रतीक

प्रमुख उपलब्धियां

1. 1999 – पहला ग्रैंड स्लैम (यूएस ओपन)
17 वर्ष की उम्र में यूएस ओपन जीतकर सेरेना ने विश्व टेनिस में धमाकेदार एंट्री ली।

2. 2012 – ओलंपिक गोल्ड (सिंगल्स)
लंदन ओलंपिक में, मारिया शारापोवा को 6-0, 6-1 से हराकर सेरेना ने पहला ओलंपिक सिंगल्स गोल्ड जीता।

3. 2017 – 23वां ग्रैंड स्लैम (ऑस्ट्रेलियन ओपन)
बिना एक भी सेट हारे, उन्होंने गर्भवती होने के बावजूद यह रिकॉर्ड जीत हासिल की।
सबसे उम्रदराज ग्रैंड स्लैम विजेता बनीं।

कोर्ट से परे: समानता और सशक्तिकरण की आवाज़

सेरेना सिर्फ खिलाड़ी नहीं, एक आंदोलन की प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने अपने मंच का उपयोग करके इन मुद्दों पर आवाज़ उठाई:

  • खेलों में समान वेतन

  • महिलाओं और अल्पसंख्यकों को नेतृत्व में अवसर

  • काली महिलाओं के लिए प्रसवकालीन स्वास्थ्य देखभाल

उन्होंने Serena Ventures नाम से एक वेंचर कैपिटल फर्म शुरू की, जो कम प्रतिनिधित्व वाले स्टार्टअप्स में निवेश करती है।

पुरस्कार का विवरण:

  • नकद राशि: €50,000 (लगभग ₹50 लाख)

  • स्थान: ओवीएदो, स्पेन

  • आयोजक: प्रिंसेस लियोनोर

  • पूर्व विजेता:

    • लिंडसे वॉन (स्कीयर)

    • IOC रिफ्यूजी ओलंपिक टीम

    • न्यूजीलैंड ऑल ब्लैक्स (रग्बी टीम)

एक प्रेरणादायक विरासत

कॉम्पटन (कैलिफोर्निया) से शुरुआत कर, सेरेना ने एक ऐसी राह तय की है जो आज दुनियाभर के खिलाड़ियों, महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
यह पुरस्कार न केवल उनके खेल कौशल का सम्मान है, बल्कि एक वैश्विक सामाजिक परिवर्तनकर्ता के रूप में भी उन्हें अमर करता है।

कश्मीर की पहली चेरी कार्गो ट्रेन कटरा से मुंबई तक

अब पहली बार कश्मीर घाटी से ताज़ी चेरी ट्रेन के ज़रिए कटरा (जम्मू) से मुंबई भेजी जा रही है। यह नई सुविधा उन छोटे किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है, जो पहले हवाई मार्ग से फल भेजने में सक्षम नहीं थे।

इस ट्रेन सेवा की खासियत क्या है?

जम्मू रेलवे डिवीजन ने एक विशेष सेवा शुरू की है, जिसमें VP इंडेंट (पूर्ण पार्सल वैन बुकिंग) के तहत 24 टन ताज़ी चेरी रेफ्रिजेरेटेड वैन में भेजी जा रही है। यह वैन एक मालगाड़ी के साथ जोड़ी गई है। कटरा से मुंबई की यात्रा में लगभग 30 घंटे लगेंगे।

चेरी उत्पादकों के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण?

अब तक कश्मीर के चेरी उत्पादकों को मुंबई जैसे शहरों में फल भेजने के लिए महंगा हवाई परिवहन इस्तेमाल करना पड़ता था। यह छोटे किसानों के लिए संभव नहीं था, और बहुत से फल बर्बाद हो जाते थे क्योंकि चेरी जल्दी खराब हो जाती है।

अब इस ट्रेन सेवा से गांदरबल के किसान मंजूर भट जैसे लोग उम्मीद से भरे हैं। उन्होंने कहा, “हवाई परिवहन बहुत महंगा था। अब हम ज़्यादा चेरी उगाकर बड़े बाज़ारों में भेज सकेंगे।”

कश्मीर में चेरी की कटाई का समय

  • मई से जून तक होता है चेरी का मौसम

  • हर साल कश्मीर में 12,000 से 14,000 मीट्रिक टन चेरी का उत्पादन होता है

  • यह ट्रेन सेवा कटाई के चरम समय पर शुरू की गई है, जिससे किसानों को तुरंत राहत मिलेगी

कश्मीर की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

ऑल कश्मीर फ्रूट ग्रोअर्स यूनियन के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने इसे एक “बड़ी सफलता” बताया। उन्होंने कहा कि रेल परिवहन किसानों को सस्ता और व्यवहारिक विकल्प देता है, और अब वे पश्चिम एक्सप्रेस (अमृतसर से) जैसी ट्रेनों में भी पार्सल वैन जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

समस्या जो हल करने की ज़रूरत है

रेलवे पूरे 25 टन वैन का पूरा किराया अग्रिम रूप से मांगती है, भले ही किसान के पास कम चेरी हो।
चूंकि चेरी की कटाई हर दिन अलग-अलग होती है, यह नियम किसानों के लिए मुश्किल खड़ा करता है। रेलवे के साथ इस पर बातचीत चल रही है

कश्मीरी फलों के लिए उज्ज्वल भविष्य

अगर यह चेरी ट्रेन सेवा सफल रही, तो:

  • और भी फलों की ट्रेनें चलाई जाएंगी

  • चेरी के साथ सेब, खुबानी, और नाशपाती जैसे फल भी बड़े शहरों और मुंबई पोर्ट से निर्यात के लिए भेजे जा सकेंगे

  • इससे कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी

नीरज चोपड़ा ऑडी इंडिया के ब्रांड एंबेसडर बने

भारत के प्रतिष्ठित भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा अब आधिकारिक रूप से ऑडी इंडिया के ब्रांड एम्बेसडर बन गए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी दो शक्तिशाली नामों को एक मंच पर लाती है — एक विश्व स्तरीय एथलीट और एक वैश्विक लक्ज़री ऑटोमोबाइल ब्रांड — जिनकी पहचान है: प्रदर्शन, सटीकता और उत्कृष्टता की निरंतर खोज।

उत्कृष्टता की साझी पहचान का उत्सव

नीरज चोपड़ा, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की, अपनी विस्फोटक शक्ति और अडिग संकल्प के लिए जाने जाते हैं।
उनकी ऑडी इंडिया के साथ यह नई साझेदारी, दोनों की साझा मूल्यों को दर्शाती है:

  • विश्व स्तरीय प्रदर्शन

  • अत्याधुनिक नवाचार

  • प्रतिष्ठित उपस्थिति

  • दूरदर्शी महत्वाकांक्षा

नीरज चोपड़ा की ऐतिहासिक उपलब्धियां

नीरज की एथलेटिक यात्रा ऐतिहासिक मील के पत्थरों और सफलता से भरी रही है:

  • ओलंपिक 2021 में स्वर्ण पदक

  • एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक

  • पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक

  • दोहा डायमंड लीग में 90 मीटर के पार भाला फेंक कर भारतीय एथलेटिक्स में इतिहास रच दिया

JSW स्पोर्ट्स ने निभाई अहम भूमिका

यह साझेदारी JSW Sports के माध्यम से संभव हुई, जो नीरज चोपड़ा का स्पोर्ट्स मैनेजमेंट करती है। करण यादव, JSW Sports के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी (CCO) ने इसे भारतीय खेल और कॉर्पोरेट ब्रांडिंग के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

ऑडी इंडिया की दूरदर्शी सोच

नीरज चोपड़ा को ब्रांड एम्बेसडर बनाना ऑडी इंडिया की नवीन ब्रांड रणनीति का प्रतीक है। यह उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें कंपनी आधुनिक भारत के प्रतीकों के साथ जुड़ना चाहती है — महत्वाकांक्षी, नवोन्मेषी और प्रदर्शन-केंद्रित

यह साझेदारी सिर्फ पारंपरिक मार्केटिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें साझा अभियान, इवेंट्स और डिजिटल कहानियाँ शामिल हो सकती हैं, जो ऑडी की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और नीरज की प्रेरणादायक यात्रा को उजागर करेंगी।

ओयूएटी, भुवनेश्वर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ शुरू किया गया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को ”विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA)” की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक की मदद से भारतीय कृषि में बदलाव लाना है। इसे ओडिशा के साक्षीगोपाल, पुरी में और बाद में ICAR-CIFA केंद्र, भुवनेश्वर में लॉन्च किया गया।

VKSA अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस अभियान का लक्ष्य है कि भारत को “विश्व का अन्न भंडार (Food Basket of the World)” बनाया जाए। इसके लिए वैज्ञानिकों को किसानों से सीधा जोड़ा जाएगा ताकि वे उन्हें उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी दे सकें। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “लैब से लैंड” विजन और “विकसित भारत” की सोच का समर्थन करता है।

यह अभियान कैसे चलेगा?

29 मई से 12 जून 2025 तक:

  • वैज्ञानिक देश के 700 से अधिक जिलों में जाएंगे

  • वे लगभग 1.5 करोड़ किसानों से मिलेंगे

  • किसानों को नई कृषि तकनीकों के बारे में सिखाएंगे

  • ज़मीनी फीडबैक इकट्ठा करेंगे

यह भारत में पहली बार है जब इतना बड़ा अभियान किसानों के लिए चलाया जा रहा है।

सरकार का समर्थन

मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार इस अभियान के लिए पूरी मदद देगी।

  • कृषि अनुसंधान के लिए पैसों की कोई कमी नहीं होगी

  • उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि गांवों में जाना देश के अन्नदाताओं की सेवा है

किसानों और वैज्ञानिकों के लिए संदेश

  • किसानों से अपील की गई कि वे वैज्ञानिकों से बात करें,

  • नई तकनीकों और उन्नत बीजों का उपयोग करें

  • इससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी

  • उन्होंने ICAR वैज्ञानिकों का आभार जताया जिन्होंने बेहतर बीज विकसित किए हैं

मत्स्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान

भुवनेश्वर स्थित ICAR-CIFA में मंत्री चौहान ने मत्स्य पालन क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डाला:

  • कहा कि मत्स्य पालन से किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा बढ़ सकती है

  • उन्होंने ‘CIFA Argu VAX-I’ नामक नई मछली वैक्सीन लॉन्च की

  • यह मछलियों को बीमारियों से बचाएगी और मत्स्य पालकों को नुकसान से बचाएगी

कृषि में भारत की प्रगति

मंत्री ने बताया कि इस साल भारत ने 3,539.59 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन किया है, जो कि पिछले साल से 216.61 लाख टन अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत अब अपने 145 करोड़ नागरिकों का पेट भर सकता है।

पुरी से अभियान की प्रतीकात्मक शुरुआत

  • अभियान की शुरुआत पुरी, भगवान जगन्नाथ की पवित्र भूमि से हुई

  • मंत्री ने कहा कि इस शुरुआत से अभियान को आध्यात्मिक ऊर्जा मिली

  • उन्होंने जगन्नाथ मंदिर में दर्शन, तिरंगा यात्रा में भाग, और वृक्षारोपण कर स्थिरता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया

निष्कर्ष:
विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA) भारतीय किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक कदम है। इसका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को सम्मानजनक, लाभकारी और टिकाऊ बनाना है।

अगले पांच वर्षों में वैश्विक तापमान 1.5°C को पार कर जाने की संभावना

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने जलवायु परिवर्तन को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2029 के बीच वैश्विक तापमान के 1.5ºC की सीमा को पार करने की 70% संभावना है।

1.5ºC की सीमा क्या है?

पेरिस जलवायु समझौते (2015) में विश्व नेताओं ने यह तय किया था कि औद्योगिक क्रांति (1850-1900) से पहले के स्तर की तुलना में पृथ्वी के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़ने देने का प्रयास किया जाएगा।
अगर यह सीमा पार होती है तो इसके परिणाम होंगे:

  • भीषण गर्मी की लहरें

  • भयंकर बाढ़ और सूखा

  • समुद्र का बढ़ता जल स्तर

  • पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र को गहरा नुकसान

यह रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?

WMO की रिपोर्ट “ग्लोबल एनुअल टू डिकेडल क्लाइमेट अपडेट (2025-2029)” के अनुसार:

  • 2025 से 2029 के बीच औसत वैश्विक तापमान 1.2ºC से 1.9ºC के बीच हो सकता है।

  • 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा, लेकिन 2025 से 2029 के बीच किसी एक साल के और गर्म होने की 80% संभावना है।

  • ये आँकड़े वर्तमान जलवायु प्रवृत्तियों पर आधारित हैं।

देशों की धीमी जलवायु कार्रवाई

  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु समूह के 195 में से 180 देश अभी तक अपने नए जलवायु कार्ययोजनाएं (NDCs) 2031-2035 के लिए नहीं दे पाए हैं।

  • ये योजनाएं ग्रीनहाउस गैसों को कम करने और तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।

  • COP30 नामक अगला बड़ा जलवायु सम्मेलन जल्द ही होने वाला है — सभी देशों से अपेक्षा है कि वे तेजी से कार्य करें।

संभावित भविष्य के प्रभाव

अगर पृथ्वी इसी तरह गर्म होती रही, तो:

  • हीटवेव, बाढ़ और सूखा और ज़्यादा गंभीर होंगे

  • बर्फ की चादरें और ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे

  • समुद्र का स्तर और तेजी से बढ़ेगा

  • समुद्रों का तापमान बढ़ेगा

  • भारत जैसे देशों में वायु प्रदूषण और खराब हो सकता है

  • यहां तक कि 2030 से पहले किसी एक वर्ष में तापमान 2ºC तक पहुँच सकता है (1% संभावना), जो बेहद गंभीर स्थिति होगी।

आर्कटिक और मानसून में बदलाव

  • आर्कटिक क्षेत्र बाकी दुनिया की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है

  • 2025-2029 के बीच सर्दियों में आर्कटिक का तापमान हाल की औसत तुलना में 2.4ºC ज्यादा हो सकता है, जिससे Barents Sea और Bering Sea में समुद्री बर्फ तेजी से पिघलेगी।

  • दक्षिण एशिया, जिसमें भारत भी शामिल है, में 2029 तक औसतन अधिक बारिश की संभावना जताई गई है।

  • हालांकि, हर मानसून का मौसम ऐसा नहीं हो सकता।

जलवायु निगरानी क्यों जरूरी है?

WMO की डिप्टी सेक्रेटरी जनरल को बैरेट (Ko Barrett) ने कहा कि: “यह रिपोर्ट किसी सकारात्मक संकेत को नहीं दर्शाती, और यह आर्थिक, प्राकृतिक और दैनिक जीवन पर भारी प्रभाव डाल सकती है।”

उन्होंने कहा कि:

  • जलवायु की लगातार निगरानी

  • सटीक मौसम भविष्यवाणी

  • और सूचित निर्णय लेने की क्षमता
    बहुत जरूरी है ताकि हम आने वाले खतरों से समय रहते निपट सकें।

निष्कर्ष:
जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की गंभीर चुनौती है। इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।

अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती: 31 मई 2025

हर वर्ष 31 मई को अहिल्याबाई होलकर जयंती मनाई जाती है, जो भारत की महानतम महिला शासकों में से एक को श्रद्धांजलि देने का दिन है। वर्ष 2025 में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी 300वीं जयंती है। यह दिन पूरे देश में, विशेषकर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में, गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाएगा, जहाँ उन्हें उनके न्यायप्रिय शासन और जनकल्याण कार्यों के लिए अत्यंत आदर के साथ स्मरण किया जाता है।

अहिल्याबाई होलकर कौन थीं?

अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चोंडी गाँव में एक मराठी हिंदू परिवार में हुआ था। वे 18वीं शताब्दी में इंदौर की रानी बनीं, जब उनके ससुर मल्हारराव होलकर का निधन हो गया।

अपने पति खांडेराव होलकर, पुत्र मालेराव और ससुर के निधन के बाद भी उन्होंने साहस और विवेक से शासन संभाला। उनके देवर तुकोजीराव होलकर ने उन्हें सैन्य मामलों में सहयोग दिया।

अहिल्याबाई होलकर के कार्य और योगदान

अहिल्याबाई को जनहितकारी शासन, धार्मिक स्थलों के निर्माण और जनसेवा के लिए जाना जाता है। उनके कुछ प्रमुख कार्य:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी का पुनर्निर्माण

  • दशाश्वमेध घाट, बनारस का विकास

  • गौरी सोमनाथ मंदिर, चोला में निर्माण

  • इंदौर का व्यापक विकास: व्यापार, शिक्षा और आधारभूत सेवाओं को बढ़ावा दिया

अहिल्याबाई होलकर जयंती कैसे मनाई जाती है?

यह जयंती विशेष रूप से इंदौर, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मनाई जाती है। इसमें आयोजित होते हैं:

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम

  • जनसभाएँ व भाषण

  • श्रद्धांजलि समारोह

  • उनके न्याय, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधारों को याद किया जाता है।

उनके नाम पर सम्मान

  • 1996 में एक डाक टिकट जारी किया गया

  • इंदौर हवाई अड्डा का नाम: देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा

  • विश्वविद्यालय और संस्थान भी उनके नाम पर हैं

2025 में विशेष आयोजन – 300वीं जयंती

300वीं जयंती के अवसर पर: महाराष्ट्र सरकार ने ₹681 करोड़ की लागत से “पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर स्मारक स्थल” परियोजना की घोषणा की है। यह स्मारक स्थल उनकी विरासत और प्रेरणा को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

अहिल्याबाई होलकर आज भी नारी शक्ति, न्याय और जनसेवा की प्रतीक हैं। उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा भी है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2025: थीम, इतिहास और महत्व

विश्व तंबाकू निषेध दिवस हर साल 31 मई को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में इस वैश्विक पहल का उद्देश्य तंबाकू के उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह वैश्विक स्तर पर तंबाकू की खपत को कम करने के लिए व्यापक उपायों को भी बढ़ावा देता है। यह दिन व्यक्तियों, समुदायों और सरकारों को तंबाकू मुक्त दुनिया की दिशा में कदम उठाने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2025 की थीम है ‘उज्ज्वल उत्पाद. काले इरादे. अपील को उजागर करना’, जो आकर्षक स्वाद और पैकेजिंग में आने वाले तंबाकू उत्पादों के छिपे खतरों को सामने लाने पर केंद्रित है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस क्यों मनाया जाता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा शुरू किया गया यह अभियान हर साल 31 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है:

  • तंबाकू के उपयोग से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना

  • लोगों को तंबाकू और धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित करना

  • सरकारों को तंबाकू नियंत्रण कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए सहयोग देना

  • युवाओं और कमजोर समुदायों को तंबाकू उद्योग की चालों से बचाना

WHO के अनुसार, हर साल 8 मिलियन (80 लाख) से अधिक लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से मर जाते हैं — यह दुनिया में रोकी जा सकने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2025: तिथि और विषय

  • तारीख: 31 मई 2025

  • विषय: “’उज्ज्वल उत्पाद. काले इरादे. अपील को उजागर करना’
    यह विषय तंबाकू कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही धोखाधड़ीपूर्ण मार्केटिंग रणनीतियों को उजागर करता है, जो विशेष रूप से युवाओं को लुभाने के लिए बनाए जाते हैं। यह नीति-निर्माताओं और आम जनता से कड़े नियम और पारदर्शिता की मांग करता है।

इतिहास

विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत 1987 में WHO द्वारा की गई थी। पहली बार इसे 1988 में आधिकारिक रूप से मनाया गया, जब लोगों को 24 घंटे तक तंबाकू से दूर रहने का आग्रह किया गया।

हर साल यह दिवस अलग-अलग विषयों पर ध्यान केंद्रित करता है, जैसे:

  • युवा और तंबाकू विज्ञापन

  • तंबाकू खेती का पर्यावरणीय प्रभाव

  • भ्रामक तंबाकू पैकेजिंग

  • सेकंड-हैंड धुएं का खतरा

वैश्विक तंबाकू संकट

तंबाकू के उपयोग से जुड़ी बीमारियाँ:

  • फेफड़ों का कैंसर

  • हृदय रोग

  • स्ट्रोक

  • श्वसन रोग

WHO का अनुमान है:

13 से 15 वर्ष के लगभग 3.7 करोड़ बच्चे दुनिया भर में किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। यह भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा है।

इस दिवस का महत्व

  • जनस्वास्थ्य जागरूकता

  • नीति-निर्माण में समर्थन

  • युवाओं को शिक्षित करना

  • तंबाकू छोड़ने वालों को समर्थन देना

सरकार, नागरिक समाज, डॉक्टर और आम जनता मिलकर तंबाकू उद्योग के विरुद्ध एकजुट होते हैं। इस दिन पर कार्यशालाएं, सेमिनार, रैलियां, और सोशल मीडिया अभियानों का आयोजन होता है।

निकोटीन छोड़ने की कठिनाई और समाधान

निकोटीन एक तीव्र रूप से नशे की लत लगाने वाला पदार्थ है। तंबाकू छोड़ते समय व्यक्ति को:

  • चिड़चिड़ापन

  • बेचैनी

  • मानसिक असहजता

का सामना करना पड़ता है।

ऐसे प्राकृतिक आहार जो तंबाकू छोड़ने में सहायक हैं

1. हल्दी और अदरक – प्राकृतिक उपचारक

  • सूजन कम करें

  • फेफड़ों को शुद्ध करें

  • निकोटीन को शरीर से बाहर निकालने में मदद करें

2. मेवे और बीज – तनाव कम करें

  • सूरजमुखी के बीज, बादाम, अखरोट

  • मानसिक स्थिरता और शांति प्रदान करें

  • निकोटीन की लालसा को घटाएं

3. पानी और हर्बल चाय – विषहरण के सहायक

  • शरीर को हाइड्रेट रखें

  • विषैले तत्वों को बाहर निकालें

  • कैमोमाइल, पुदीना और अदरक की चाय से मन शांत करें

4. खट्टे फल – स्वाद में बाधा डालें

  • संतरा, नींबू, मौसंबी

  • सिगरेट का स्वाद खराब करें

  • शरीर में विटामिन C की पूर्ति करें और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं

5. मुलेठी – एक स्वस्थ विकल्प

  • चबाने से हाथ-मुंह की आदत पूरी होती है

  • गले को राहत देता है

  • मीठा स्वाद देता है, बिना नुकसान के

 

उल्लास के तहत गोवा पूर्ण साक्षर घोषित

गोवा के 39वें राज्यत्व दिवस के शुभ अवसर पर, मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने गोवा को ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (Nav Bharat Saaksharta Karyakram) के अंतर्गत पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया। इस उपलब्धि के साथ गोवा, भारत का दूसरा राज्य बन गया है जिसने राष्ट्रीय रूप से निर्धारित 95% साक्षरता मानक को पार कर लिया है, और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान फिर से साबित की है।

राष्ट्रीय साक्षरता मानक को पार करने वाला राज्य

यह महत्वपूर्ण घोषणा पणजी स्थित दीनानाथ मंगेशकर कला मंदिर में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान की गई, जिसमें उपस्थित थे:

  • राज्य के मंत्रीगण

  • गोवा के मुख्य सचिव

  • श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी, संयुक्त सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय

  • अन्य गणमान्य व्यक्ति और राज्य के नागरिक

पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 के अनुसार, गोवा की साक्षरता दर 93.60% थी, जो पहले ही देश में सर्वोच्च में से एक थी। लेकिन राज्य के आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार यह आंकड़ा पार कर पूर्ण साक्षरता हासिल कर ली गई है।

संपूर्ण सरकारी सहभागिता: सहयोग का आदर्श मॉडल

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे था Whole-of-Government Approach, जिसमें अनेक विभागों ने मिलकर कार्य किया, जैसे:

  • पंचायत निदेशालय

  • नगर प्रशासन निदेशालय

  • समाज कल्याण निदेशालय

  • योजना एवं सांख्यिकी निदेशालय

  • महिला एवं बाल विकास निदेशालय

इन विभागों ने अशिक्षित नागरिकों की पहचान कर उन्हें साक्षरता कार्यक्रमों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

सामुदायिक सहभागिता: ‘जन-जन साक्षर’ की भावना का उदाहरण

गोवा की साक्षरता यात्रा में समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही:

  • स्वयंपूर्ण मित्रों ने जनजागरूकता अभियान चलाए, शिक्षार्थियों को प्रमाणपत्र दिलवाए, और उन्हें औपचारिक शिक्षा से जोड़ा।

  • समाज कल्याण विभाग के फील्ड वर्कर्स ने अशिक्षितों की पहचान और नामांकन में विशेष योगदान दिया।

यह स्वयंसेवी आधारित मॉडल, ULLAS योजना की जन-जन साक्षर भावना को जीवंत करता है और यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर सहभागिता से कैसे स्थायी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

गोवा की शिक्षा टीम को बधाई

इस उपलब्धि के पीछे था:

  • गोवा शिक्षा विभाग

  • राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT)

  • स्थानीय प्रशासन

  • स्कूल प्रमुख

  • हजारों स्वयंसेवक

इन सभी की प्रतिबद्धता इस बात को रेखांकित करती है कि जनकेंद्रित और समन्वित प्रयासों से राष्ट्रीय साक्षरता लक्ष्यों को पाया जा सकता है।

ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम

ULLAS योजना, जिसे 2022 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया, भारत को 2030 तक पूर्ण साक्षर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही केंद्रीय प्रायोजित योजना है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है।

इस योजना के 5 प्रमुख घटक हैं:

  1. मूलभूत साक्षरता और गणना कौशल

  2. जीवन उपयोगी महत्वपूर्ण कौशल

  3. मूलभूत शिक्षा

  4. व्यावसायिक कौशल

  5. निरंतर शिक्षा

यह कार्यक्रम मुख्य रूप से 15 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को लक्षित करता है, जिन्होंने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है।

ULLAS योजना का राष्ट्रीय प्रभाव

  • 2.40 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 41 लाख स्वयंसेवी शिक्षक ULLAS मोबाइल ऐप पर पंजीकृत हैं।

  • 1.77 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने FLNAT (Foundational Literacy and Numeracy Assessment Test) में भाग लिया है।

गोवा की सफलता: सुशासन और जनभागीदारी का प्रकाश स्तंभ

गोवा की यह ऐतिहासिक उपलब्धि दर्शाती है कि यदि मजबूत प्रशासन, जनभागीदारी, और नवोन्मेषी क्रियान्वयन साथ आएं, तो कोई भी सामाजिक लक्ष्य असंभव नहीं है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने 15 नर्सों को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 15 नर्सों को वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए। राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार की शुरूआत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उत्कृष्ट नर्सिंग कर्मियों द्वारा की गई सराहनीय सेवाओं को सम्मानित करने के लिए की थी।

भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ को सम्मान

इस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित रहे। इन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति सरकार की स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान को मान्यता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार के बारे में

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित यह पुरस्कार पंजीकृत नर्सों, दाइयों (मिडवाइव्स), सहायक नर्स-दाई (ANM) और लेडी हेल्थ विजिटर्स (LHV) को प्रदान किया जाता है, जो सार्वजनिक व स्वैच्छिक क्षेत्रों में सेवाएं दे रही हैं।

यह पुरस्कार उन पेशेवरों को सम्मानित करता है जिन्होंने रोगी देखभाल, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक कल्याण में असाधारण समर्पण दिखाया है।

प्रत्येक पुरस्कार में शामिल हैं:

  • प्रशस्ति पत्र

  • ₹1,00,000 की नकद राशि

  • पदक, जो देश की कृतज्ञता का प्रतीक है

राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2025 विजेता

इस वर्ष, देश के विभिन्न राज्यों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी 15 नर्सों को यह सम्मान मिला। इनका विविध सामाजिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की व्यापकता को दर्शाता है।

श्रेणी नाम राज्य
ANM श्रीमती रेबा रानी सरकार अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
ANM श्रीमती वलीवेति शुभावती आंध्र प्रदेश
ANM श्रीमती सरोज फकीरभाई पटेल दादरा नगर हवेली व दमन दीव
ANM श्रीमती रज़िया बेगम पी. बी. लक्षद्वीप
ANM श्रीमती सुजाता अशोक बगुल महाराष्ट्र
LHV श्रीमती बीना पाणी डेका असम
नर्स श्रीमती कीजुम सोरा कारगा अरुणाचल प्रदेश
नर्स सुश्री डिंपल अरोड़ा दिल्ली
नर्स मेजर जनरल शीना पी. डी. दिल्ली
नर्स डॉ. बानु एम. आर. कर्नाटक
नर्स श्रीमती लैमपोकपम रंजीता देवी मणिपुर
नर्स श्रीमती वी. लाल्हमांगईही मिजोरम
नर्स श्रीमती एल. एस. मणिमोझी पुडुचेरी
नर्स श्रीमती अलमेलु मंगयरकरासी के. तमिलनाडु
नर्स श्रीमती डोली बिस्वास पश्चिम बंगाल

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार नर्सिंग और मिडवाइफरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठा रही है।

प्रमुख पहलें:

  • राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग अधिनियम – नर्सिंग शिक्षा के आधुनिकीकरण और नियमन के लिए ऐतिहासिक सुधार

  • 157 नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना – ये कॉलेज मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के साथ स्थापित किए जा रहे हैं ताकि भविष्य के लिए दक्ष नर्सिंग बल तैयार हो सके

यह नीतिगत सुधार नर्सों को न केवल सशक्त करते हैं बल्कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने में सहायक हैं।

फ्लोरेंस नाइटिंगेल की प्रेरणा को समर्पित

यह पुरस्कार आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की सेवा भावना, संवेदनशीलता और साहस को समर्पित हैं। 2025 के विजेता इन मूल्यों को जीवन के कठिन हालातों में भी जीवंत बनाए रखते हैं।

इनका सम्मान सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि समाज से यह आह्वान है कि वह इस महत्वपूर्ण और समर्पित पेशे को उचित सम्मान और सहयोग दे। भारत की हर नर्स को सलाम, जो निस्वार्थ सेवा के माध्यम से देश का स्वास्थ्य संभाल रही है।

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