पुडुचेरी: नेवा प्लेटफॉर्म अपनाने वाला देश का 19वां विधानमंडल

विधायी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने 9 जून 2025 को पुडुचेरी विधानसभा के लिए राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) का उद्घाटन किया। इस पहल के साथ पुडुचेरी भारत का 19वां ऐसा विधानमंडल बन गया है जिसने NeVA प्लेटफॉर्म को अपनाया है। यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन के अनुरूप पारदर्शी, पेपरलेस और कुशल शासन को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।

समाचार में क्यों?

पुडुचेरी ने अपने विधायी कामकाज को डिजिटाइज़ करने के लिए आधिकारिक रूप से NeVA डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। यह पहल केंद्र सरकार के ‘एक राष्ट्र, एक एप्लिकेशन’ दृष्टिकोण के अंतर्गत आती है। इसका उद्देश्य शासन को आधुनिक और डिजिटल बनाना, कागज़ के उपयोग को कम करना और लाइवस्ट्रीमिंग के माध्यम से सार्वजनिक पारदर्शिता बढ़ाना है।

NeVA क्या है?

NeVA (राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन) एक मिशन मोड प्रोजेक्ट है जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत आता है। इसका उद्देश्य देश के सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं को एक एकीकृत डिजिटल मंच पर लाना है।

लक्ष्य:

  • कागज़ रहित, कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित विधायी वातावरण तैयार करना।

उद्देश्य और लाभ

  • कागज़ के उपयोग को समाप्त करना — प्रतिवर्ष 3–5 टन कागज़ की बचत।

  • विधायी कार्यवाही तक रीयल-टाइम पहुंच सुनिश्चित करना।

  • जनता की ज़वाबदेही बढ़ाने हेतु कार्यवाही का लाइव प्रसारण।

  • “Go Green” शासन के तहत पर्यावरणीय स्थिरता को समर्थन देना।

  • सभी विधानसभाओं में केंद्रीकृत डेटा और दस्तावेज़ प्रबंधन की सुविधा।

पुडुचेरी की NeVA अपनाने की पहल

उद्घाटन डॉ. एल. मुरुगन द्वारा निम्न प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति में किया गया:

  • उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन

  • मुख्यमंत्री एन. रंगासामी

  • विधानसभा अध्यक्ष आर. सेल्वम

पुडुचेरी भारत का 19वां विधानमंडल बन गया है जिसने NeVA को अपनाया है।

यह परियोजना संपूर्ण रूप से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है।

उद्घाटन के प्रमुख बिंदु

डॉ. एल. मुरुगन ने NeVA को भारत में व्यापक सुधारों का हिस्सा बताया, जैसे:

  • एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड

  • एक राष्ट्र, एक चुनाव (प्रस्तावित)

भारत की डिजिटल उपलब्धियों को रेखांकित किया:

  • डिजिटल लेनदेन में विश्व में दूसरा स्थान

  • आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा आयात में कमी

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं में सुधार

कार्यान्वयन योजना

  • विधायकों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

  • जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।

  • इससे नागरिकों की भागीदारी, पर्यावरण-अनुकूल शासन और विधायी कार्यों में दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

LIC के सीईओ, एमडी पद के लिए आर दुरईस्वामी के नाम की सिफारिश

भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), के लिए एक महत्वपूर्ण विकास के तहत फाइनेंशियल सर्विसेज इंस्टीट्यूशंस ब्यूरो (FSIB) ने वरिष्ठ कार्यकारी आर दुरईस्वामी को LIC के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए अनुशंसित किया है। LIC में 38 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले आर दुरईस्वामी संचालन, विपणन, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं। अंतिम निर्णय अब मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) द्वारा लिया जाएगा।

समाचार में क्यों?

11 जून 2025 को FSIB ने LIC के CEO एवं MD पद के लिए चार वरिष्ठ अधिकारियों का साक्षात्कार लिया। प्रदर्शन, अनुभव और पात्रता के आधार पर आर दुरईस्वामी को इस पद के लिए अनुशंसित किया गया। यह पद LIC में नेतृत्व पुनर्गठन के चलते रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।

आर दुरईस्वामी कौन हैं?

  • वर्तमान में LIC में प्रबंध निदेशक (MD) के पद पर कार्यरत हैं।

  • LIC में 38 वर्षों से अधिक सेवा दे चुके हैं।

  • अनेक क्षेत्रों में कार्यानुभव:

    • संचालन (Operations)

    • विपणन और बिक्री (Marketing & Sales)

    • तकनीकी कार्यान्वयन (Technology Implementation)

    • शैक्षणिक और प्रशिक्षण भूमिकाएं (Academic and Training Roles)

FSIB के बारे में

  • फाइनेंशियल सर्विसेज इंस्टीट्यूशंस ब्यूरो (FSIB) सरकार की शीर्ष संस्था है जो सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय कंपनियों के लिए वरिष्ठ नेतृत्व की तलाश करती है।

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs), बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के शीर्ष पदों के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों की सिफारिश करता है।

  • यह पूर्व संस्था बैंक्स बोर्ड ब्यूरो (BBB) का उत्तराधिकारी है।

LIC के CEO और MD की भूमिका और महत्व

  • भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी का नेतृत्व करते हैं, जिसकी संपत्ति प्रबंधन (AUM) ₹45 लाख करोड़ से अधिक है।

  • देश और विदेश में LIC के विस्तार की निगरानी करते हैं।

  • डिजिटल परिवर्तन, ग्राहक अधिग्रहण और बाज़ार में विश्वास बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

  • IPO के बाद से LIC पर सार्वजनिक और सरकारी निगरानी बढ़ गई है।

चयन प्रक्रिया

  • 11 जून 2025 को FSIB द्वारा 4 उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया गया।

  • मूल्यांकन के मानदंड:

    • पूर्व प्रदर्शन

    • नेतृत्व क्षमता

    • LIC के भविष्य के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण

    • बीमा और वित्तीय क्षेत्रों में व्यापक अनुभव

शेयर बाजार में साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए SEBI लाएगा UPI वेरिफिकेशन टूल

निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाने और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक नई पहल “SEBI Check” की घोषणा की है। यह टूल निवेशकों को SEBI-पंजीकृत मध्यस्थों (intermediaries) द्वारा उपयोग किए जा रहे UPI भुगतान हैंडल की पुष्टि करने की सुविधा देगा, ताकि लेन-देन से पहले सत्यापन किया जा सके। यह सुविधा जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है और इससे पूंजी बाजार में वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा और पारदर्शिता काफी हद तक बढ़ेगी। इसके अलावा, SEBI ने 1 अक्टूबर 2025 से सभी पंजीकृत मध्यस्थों के लिए नया UPI भुगतान तंत्र अनिवार्य कर दिया है।

समाचार में क्यों?

SEBI ने 11 जून 2025 को SEBI Check टूल की घोषणा की, जो UPI आईडी सत्यापन के लिए उपयोग किया जाएगा। यह कदम उन धोखाधड़ी गतिविधियों के जवाब में आया है, जिनमें नकली वित्तीय मध्यस्थ बनकर अवैध UPI हैंडल के माध्यम से निवेशकों से धन एकत्र किया जा रहा था। नया UPI-आधारित भुगतान सिस्टम 1 अक्टूबर 2025 से सभी SEBI-पंजीकृत संस्थाओं पर अनिवार्य होगा।

“SEBI Check” क्या है?

एक डिजिटल सत्यापन उपकरण, जो निवेशकों को यह जांचने की सुविधा देता है कि वे जिस UPI ID पर भुगतान कर रहे हैं, वह वैध है या नहीं। इसमें दो विकल्प होंगे:

  • QR कोड स्कैन करना

  • या UPI ID को मैन्युअली दर्ज करना

सत्यापन विवरण में शामिल होगा:

  • खाता संख्या

  • IFSC कोड

  • यह पुष्टि कि संबंधित UPI ID वास्तव में SEBI-पंजीकृत मध्यस्थ से जुड़ी है या नहीं।

उद्देश्य और लक्ष्य

  • फर्जीवाड़े और फ़िशिंग हमलों को रोकना।

  • निवेशकों को धन स्थानांतरित करने से पहले लाभार्थी की पहचान की पुष्टि करने का अधिकार देना।

  • पूंजी बाजार में सुरक्षित और नियंत्रित भुगतान चैनल को बढ़ावा देना।

पृष्ठभूमि

  • जनवरी 2025 में SEBI ने इस तंत्र को लेकर एक परामर्श पत्र जारी किया था।

  • अपंजीकृत संस्थाओं द्वारा अवैध धन संग्रह के मामलों में वृद्धि के कारण यह कदम आवश्यक हो गया।

  • फर्जी UPI हैंडल का इस्तेमाल कर खुद को वैध मध्यस्थ बताकर खुदरा निवेशकों को गुमराह किया जा रहा था।

नए UPI तंत्र की मुख्य विशेषताएं

  • सभी SEBI-पंजीकृत मध्यस्थों (जैसे ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड वितरक आदि) पर लागू।

  • केवल सत्यापित UPI हैंडल का उपयोग अनिवार्य।

  • भारतीय प्रतिभूति बाजार में भरोसा और लेन-देन सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

  • खुदरा निवेशकों के लिए डिजिटल भुगतान की विश्वसनीयता में वृद्धि करता है।

कैटरीना कैफ को मालदीव के लिए वैश्विक पर्यटन राजदूत नियुक्त किया गया

रणनीतिक पर्यटन और कूटनीतिक पहल के तहत, बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ़ को मालदीव की ग्लोबल टूरिज़्म एम्बेसडर (वैश्विक पर्यटन राजदूत) नियुक्त किया गया है। यह घोषणा मालदीव मार्केटिंग एंड पब्लिक रिलेशंस कॉर्पोरेशन (MMPRC) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा से कुछ सप्ताह पहले की गई। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से भारतीय और वैश्विक दर्शकों के बीच मालदीव की एक लग्ज़री ट्रैवल डेस्टिनेशन (विलासितापूर्ण यात्रा स्थल) के रूप में पहचान को बढ़ावा देना है, ऐसे समय में जब भारत-मालदीव संबंधों में नई गति देखने को मिल रही है।

समाचार में क्यों?

10 जून 2025 को कैटरीना कैफ़ को आधिकारिक रूप से मालदीव की ग्लोबल ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया गया। यह घोषणा MMPRC (विज़िट मालदीव्स) द्वारा सोशल मीडिया पर की गई। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी मालदीव यात्रा के साथ मेल खाती है और 2024 की शुरुआत में बिगड़े भारत-मालदीव संबंधों की पृष्ठभूमि में आई है। कैफ़ की यह भूमिका मालदीव के पर्यटन अभियानों, विशेषकर नए समर सेल कैंपेन को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

उद्देश्य और लक्ष्य

  • मालदीव को एक लग्ज़री और हाई-एंड ट्रैवल डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ावा देना।

  • कैटरीना कैफ़ की वैश्विक लोकप्रियता का उपयोग कर दक्षिण एशियाई और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुँचना।

  • सेलेब्रिटी ब्रांडिंग के माध्यम से पब्लिक डिप्लोमेसी और द्विपक्षीय सॉफ्ट पावर को मजबूत करना।

  • “विज़िट मालदीव्स समर सेल कैंपेन” को अधिक ध्यान और प्रचार दिलाना।

पृष्ठभूमि

  • जनवरी 2024 में भारत और मालदीव के बीच कूटनीतिक तनाव के कारण दोनों देशों के बीच पर्यटन और जन-संपर्क प्रभावित हुए थे।

  • मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर बहुत अधिक निर्भर करती है, और भारत उसके प्रमुख स्रोत देशों में से एक है।

  • कैटरीना कैफ़, भारत की प्रमुख फिल्मी हस्तियों में से एक हैं, और Kay Beauty की संस्थापक हैं। उनकी वैश्विक पहचान और स्वच्छ छवि उन्हें इस भूमिका के लिए आदर्श बनाती है।

प्रमुख बिंदु

  • कैफ़ का बयान: उन्होंने मालदीव को “विलासिता और प्राकृतिक सौंदर्य की पराकाष्ठा” बताया और इसकी वैश्विक छवि का प्रतिनिधित्व करने को लेकर उत्साह व्यक्त किया।

  • MMPRC का मत: संस्था ने कहा कि कैफ़ ग्लोबल ट्रैवलर्स, विशेष रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों से जुड़ने के लिए एक आदर्श चेहरा हैं।

  • यह साझेदारी “Sunny Side of Life” टूरिज़्म ब्रांड को प्रचारित करने के लिए की गई है।

  • विशेष रेल/एयर ऑफ़र और रिज़ॉर्ट छूट जैसे प्रोत्साहन समर सेल अभियान के हिस्से के रूप में पेश किए जा रहे हैं ताकि कैटरीना की लोकप्रियता का भरपूर लाभ उठाया जा सके।

Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी शुरु, जानें सबकुछ

हर वर्ष ओडिशा के पुरी शहर में एक विशेष उत्सव का आयोजन होता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जाती है। वर्ष 2025 में यह उत्सव 11 जून को स्नान पूर्णिमा से शुरू हुआ है और 5 जुलाई तक चलेगा, जब प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा आयोजित की जाएगी। यह पर्व न केवल भारत से, बल्कि दुनिया भर से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

क्या है स्नान पूर्णिमा?

स्नान पूर्णिमा वह दिन होता है जब भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को मंदिर से बाहर लाकर आम दर्शन के लिए स्नान कराया जाता है। यह विशेष स्नान स्नान मंडप नामक ऊँचे मंच पर होता है और इसमें 108 कलशों से मंदिर के स्वर्ण कुएं से लाया गया पवित्र जल चढ़ाया जाता है। यह रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक होता है।

अनवासर (आराम का काल)

स्नान यात्रा के बाद माना जाता है कि देवता शीत जल के कारण अस्वस्थ हो जाते हैं। उन्हें मंदिर के भीतर विश्राम हेतु ले जाया जाता है और लगभग 15 दिनों तक दर्शन के लिए नहीं लाया जाता। इस विश्राम काल को अनवासर कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि इस समय देवता आरोग्य लाभ कर रहे होते हैं और रथ यात्रा की तैयारी कर रहे होते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 – प्रमुख तिथियाँ और आयोजन

तिथि आयोजन
11 जून स्नान पूर्णिमा (Snana Purnima)
13 – 16 जून अनवासर (देवताओं का विश्राम काल)
26 जून गुंडीचा मंदिर की सफाई (गुंडीचा मार्जन)
27 जून रथ यात्रा (भगवान की सवारी)
1 जुलाई हेरा पंचमी
4 जुलाई बहुड़ा यात्रा (वापसी यात्रा)
5 जुलाई सुना वेश (देवताओं का स्वर्णाभूषण श्रृंगार) व नीलाद्रि विजय (मुख्य मंदिर में वापसी)

रथ यात्रा के दौरान तीनों देवता विशाल लकड़ी के रथों में सवार होकर पुरी की सड़कों पर यात्रा करते हैं। हर रथ की अलग पहचान होती है:

  • भगवान जगन्नाथ का रथ – 18 पहियों वाला

  • भगवान बलभद्र का रथ – 16 पहियों वाला

  • देवी सुभद्रा का रथ – 14 पहियों वाला

इन रथों को हजारों श्रद्धालु रस्सियों से खींचते हैं, जिसे बहुत पुण्यदायक माना जाता है।

सभी के लिए खुला उत्सव

जगन्नाथ रथ यात्रा की खास बात यह है कि इसमें धर्म, जाति, या देश की कोई सीमा नहीं होती। कोई भी व्यक्ति रथ खींचने में भाग ले सकता है। यह उत्सव एकता, भक्ति और आनंद का प्रतीक बन गया है।

लाखों श्रद्धालु करते हैं भागीदारी

रथ यात्रा विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। लाखों लोग पुरी पहुंचते हैं, ताकि रथों की इस भव्य यात्रा को देख सकें। यह यात्रा पुरी की ग्रैंड रोड से होकर गुंडीचा मंदिर तक जाती है, जिसे देवताओं की मामाजी का घर कहा जाता है।

जगन्नाथ रथ यात्रा न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, समावेशिता और अध्यात्म का भी प्रतीक है।

केंद्र सरकार ने पहली बार तय की मनरेगा में खर्च की सीमा

वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में कुल वार्षिक आवंटन का अधिकतम 60% खर्च की सीमा तय कर दी गई है। यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा योजना के नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) को नियंत्रित करने की दृष्टि से लिया गया है, लेकिन इससे योजना की मांग-आधारित प्रकृति प्रभावित हो सकती है, खासकर जब पिछले वर्ष से ₹21,000 करोड़ की लंबित देनदारियां पहले से मौजूद हैं।

समाचार में क्यों?

वित्त मंत्रालय ने पहली बार मनरेगा पर मासिक/त्रैमासिक व्यय नियंत्रण (MEP/QEP) लागू किया है, जिसमें पहली छमाही में खर्च को वार्षिक बजट के 60% तक सीमित किया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शुरुआत में इसका विरोध किया था। उच्च श्रम मांग और लंबित भुगतानों के कारण इस निर्णय से ग्रामीण रोजगार सृजन पर असर पड़ सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

बिंदु विवरण
वार्षिक बजट (2025–26) ₹86,000 करोड़
पहली छमाही व्यय सीमा ₹51,600 करोड़ (60%)
8 जून 2025 तक व्यय ₹24,485 करोड़ (28.47%)
लंबित भुगतान (2024–25 से) ₹21,000 करोड़
लक्ष्यित श्रम बजट 198.86 करोड़ मानव-दिवस
पहली छमाही लक्ष्य 133.45 करोड़ मानव-दिवस (67.11%)
  • शुरुआत: 2006–07 में 200 पिछड़े जिलों में

  • 2007–08 में 130 और जिलों में विस्तार

  • 2008–09 से पूरे भारत में लागू

  • प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन का गारंटीकृत रोजगार

  • कोविड-19 के दौरान अहम भूमिका; 2020–21 में 7.55 करोड़ परिवारों की भागीदारी

  • 2024–25 में भाग लेने वाले परिवार घटकर 5.79 करोड़ हुए

MEP/QEP क्या है?

  • वित्त मंत्रालय द्वारा 2017 में शुरू की गई प्रणाली

  • मंत्रालयों के बजट को मासिक या त्रैमासिक आधार पर बांटकर व्यय नियंत्रण

  • नकदी प्रवाह प्रबंधन और अनावश्यक उधारी से बचाव

  • अब तक मनरेगा को इसकी मांग-आधारित प्रकृति के कारण इससे मुक्त रखा गया था

महत्व और प्रभाव

सकारात्मक पहलू

  • राजकोषीय अनुशासन को बढ़ावा

  • रोजगार सृजन के लिए अग्रिम योजना संभव

  • फंड के अनुचित संचय को रोकेगा

चिंताएं

  • लंबित भुगतान के चलते मजदूरी में देरी या रोजगार में कटौती संभव

  • योजना की मांग-आधारित आत्मा को क्षति

  • कृषि के गैर-मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक असंतोष की आशंका

महाराष्ट्र में अब हर इंफ्रा प्रोजेक्ट को मिलेगा ‘आधार’ जैसा यूनिक आईडी

पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में सभी अवसंरचना विकास परियोजनाओं को एक भू-टैग युक्त 13-अंकीय अल्फान्यूमेरिक यूनिक आईडी (Infra ID) से चिन्हित करना अनिवार्य कर दिया है। यह आईडी प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना की प्राथमिक पहचान के रूप में कार्य करेगी। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल एकरूपता लाना, दोहराव को रोकना और विभिन्न विभागों में परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी को सक्षम बनाना है। Infra ID पोर्टल के माध्यम से यह प्रणाली संचालित होगी, और लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत सभी परियोजनाएं इस पोर्टल पर पंजीकृत हो जाएं।

क्यों है ख़बरों में?

महाराष्ट्र सरकार ने 9 जून 2025 को Infra ID पोर्टल को सक्रिय कर दिया है। परियोजना स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल पहले चरण में विदर्भ क्षेत्र के वर्धा ज़िले में लागू की जाएगी। 1 अक्टूबर 2025 से इसे राज्य के सभी विभागों और ज़िलों में विस्तार दिया जाएगा। वर्ष 2020 से स्वीकृत सभी अवसंरचना परियोजनाओं का पंजीकरण मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

यूनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर आईडी पहल के उद्देश्य

  • महाराष्ट्र की हर अवसंरचना परियोजना को एक डिजिटल पहचान प्रदान करना।

  • विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाना और परियोजनाओं की पुनरावृत्ति से बचाव करना।

  • भू-टैगिंग के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी को सक्षम बनाना।

  • परियोजना डेटा को केंद्रीकृत कर सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देना।

यूनिक आईडी कैसे काम करती है

यह 13-अंकों की अल्फ़ा-न्यूमेरिक (अक्षर और संख्या वाली) पहचान होती है, जिसमें निम्नलिखित घटक शामिल होते हैं:

  • 1 अक्षर का राज्य कोड – जैसे M महाराष्ट्र के लिए

  • 2 अंकों का वर्ष कोड – जैसे 25 (वर्ष 2025 के लिए)

  • 4 अक्षरों का योजना/कार्यक्रम कोड

  • 3 अक्षरों का ज़िला कोड

  • 2 अक्षरों का परिसंपत्ति प्रकार संक्षिप्त रूप

  • 3 अंकों की क्रम संख्या

उदाहरण: M25RURWRDRODW001
(यह कोड किसी ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत वर्धा ज़िले में जल निकासी से जुड़ी संपत्ति को दर्शा सकता है)

यह आईडी परियोजना को प्रशासनिक मंज़ूरी मिलने के बाद अनिवार्य हो जाती है।

पहले चरण में शामिल विभाग

  • लोक निर्माण विभाग

  • ग्रामीण विकास विभाग

  • नगरीय विकास विभाग

  • जल संरक्षण विभाग

  • जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग

  • सिंचाई विभाग

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • सभी परियोजनाओं को MRSAC (महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर) के माध्यम से जियो-टैग किया जाएगा।

  • इन्फ्रा आईडी पोर्टल के ज़रिए आम जनता और विभिन्न विभागों को परियोजना डेटा तक पहुंच मिलेगी।

  • यह प्लेटफॉर्म परियोजना की स्वीकृति से लेकर पूर्णता तक के पूर्ण जीवनचक्र प्रबंधन को मजबूत बनाता है।

कार्यान्वयन समयरेखा

  • जून 2025: Infra ID Portal की शुरुआत।

  • अक्टूबर 2025: सभी ज़िलों/विभागों में विस्तार।

  • मार्च 2026: पिछले 5 वर्षों की स्वीकृत परियोजनाओं का पंजीकरण पूर्ण करने की समयसीमा।

शासन तंत्र 

  • परियोजना की यूनिक आईडी रद्द या संशोधित करने का अधिकार ज़िला कलेक्टर की समिति को होगा।

  • उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए निगरानी उपाय प्रणाली में समाहित किए गए हैं ताकि परियोजनाओं की प्रामाणिकता बनी रहे।

बिंदु विवरण
समाचार में क्यों? महाराष्ट्र सरकार ने सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जियो-टैग युक्त यूनिक आईडी शुरू की
नीति का नाम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए इंफ्रा यूनिक आईडी
कार्यान्वयनकर्ता महाराष्ट्र सरकार
आईडी संरचना 13-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोड (राज्य, वर्ष, योजना, जिला आदि को दर्शाता है)
तकनीकी मंच MRSAC (महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर)
पूर्ण राज्यव्यापी लागू 1 अक्टूबर, 2025 से
लक्ष्य पूर्णता तिथि मार्च 2026
पायलट जिला वर्धा (विदर्भ)

बिक्रम में 2 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट शुरू, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना जिले की बिक्रम लॉक नहर के किनारे 2 मेगावाट की नहर-बैंक सौर परियोजना का उद्घाटन किया। यह परियोजना बिहार सरकार की जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत हरित और सतत ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। खास बात यह है कि यह परियोजना राज्य सरकार पर किसी वित्तीय बोझ के बिना, निजी भागीदारी से विकसित की गई है। आगामी 25 वर्षों तक यह संयंत्र ₹3.10 प्रति यूनिट की दर से बिजली आपूर्ति करेगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण को बल मिलेगा और राज्य में इस प्रकार की अन्य परियोजनाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा।

समाचार में क्यों?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 जून 2025 को पटना जिले की बिक्रम लॉक नहर के किनारे निर्मित 2 मेगावाट की नहर बैंक सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन किया। यह परियोजना राज्य की जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत हरित और सतत ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है। खास बात यह है कि इस परियोजना को राज्य सरकार के खजाने पर कोई भार डाले बिना निजी भागीदारी के माध्यम से विकसित किया गया है।

परियोजना के मुख्य बिंदु:

  • स्थान: बिक्रम लॉक नहर, पटना जिला, बिहार

  • क्षमता: 2 मेगावाट (MW)

  • राज्य पर लागत: ₹0 (निजी कंपनी द्वारा विकसित)

  • बिजली क्रय मूल्य: ₹3.10 प्रति यूनिट, 25 वर्षों के लिए निर्धारित

  • भूमि: जल संसाधन विभाग के स्वामित्व में

  • लाभार्थी: बिक्रम और आस-पास के क्षेत्र के निवासी

उद्देश्य और महत्व:

  • हरित और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना

  • जल-जीवन-हरियाली अभियान का समर्थन करना

  • अप्रयुक्त नहरों और तटबंधों की भूमि का उपयोग सौर परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित करना

  • पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करना

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी में मदद करना

  • ग्रामीण क्षेत्रों को सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना

  • स्थानीय रोजगार और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान:

“हम नहरों, बांधों और तटबंधों की जगहों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर सौर संयंत्र बना रहे हैं। यह केवल ऊर्जा का विषय नहीं है, बल्कि रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक स्थिरता का भी सवाल है। हमारा उद्देश्य सभी को भरोसेमंद, सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल बिजली उपलब्ध कराना है।”

उपस्थित प्रमुख अधिकारी:

  • बिजेंद्र प्रसाद यादव – ऊर्जा एवं योजना मंत्री

  • विजय कुमार चौधरी – जल संसाधन मंत्री

  • अमृत लाल मीणा – मुख्य सचिव

  • डॉ. थियागराजन एस.एम. – जिलाधिकारी, पटना

  • पंकज कुमार पाल – सचिव, ऊर्जा विभाग (परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत की)

सारांश/स्थिर जानकारी विवरण
क्यों खबर में? बिहार CM ने पटना में 2 मेगावाट नहर किनारे सौर संयंत्र का उद्घाटन किया
परियोजना का नाम बिक्रम लॉक नहर सौर ऊर्जा परियोजना
स्थान बिक्रम, पटना जिला, बिहार
उद्घाटनकर्ता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
क्षमता 2 मेगावाट (MW)
टैरिफ ₹3.10 प्रति यूनिट (25 वर्षों का विद्युत खरीद समझौता)
विकासकर्ता निजी फर्म (PPP मॉडल, राज्य पर कोई वित्तीय बोझ नहीं)
सरकारी मिशन जल-जीवन-हरियाली अभियान
मुख्य लाभ हरित ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, ग्रामीण विकास

Axiom-4 अंतरिक्ष मिशन: प्रक्षेपण तिथि, चालक दल के सदस्य और मुख्य विवरण

आगामी ऐक्सिओम मिशन-4 (Axiom-4) केवल एक और अंतरिक्ष उड़ान नहीं है—यह भारत सहित कई देशों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। इस मिशन में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल की भागीदारी भारत के अंतरिक्ष युग में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है। यह मिशन न केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है, बल्कि वैज्ञानिक नवाचार और मानव अंतरिक्ष उड़ान में व्यावसायिक प्रगति का भी प्रतिनिधित्व करता है।

Axiom-4 द्वारा आयोजित यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों की एक विविध टीम को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक ले जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, जन-संपर्क गतिविधियों और अंतरिक्ष वाणिज्य को एक साथ जोड़ना है, जिससे वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अन्वेषण के नए द्वार खुलेंगे।

मिशन का परिचय
Axiom-4 केवल एक और अंतरिक्ष उड़ान नहीं है — यह भारत और कई अन्य देशों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस मिशन में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की भागीदारी भारत की वैश्विक अंतरिक्ष उपस्थिति को दर्शाती है। इस मिशन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, सार्वजनिक शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

मिशन विवरण

विवरण जानकारी
मिशन का नाम Axiom Mission 4 (Ax-4)
प्रक्षेपण तिथि स्थगित (अब तक)
प्रक्षेपण समय सुबह 8:22 (ईटी)
प्रक्षेपण स्थल LC-39A, NASA कैनेडी स्पेस सेंटर
यान स्पेसएक्स ड्रैगन
लॉन्च प्रदाता SpaceX
गंतव्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS)
अवधि लगभग 14 दिन
उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

शुभांशु शुक्ला – पायलट (भारत)

  • भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन

  • गगनयान मिशन के लिए चयनित

  • 2000+ घंटे की उड़ान का अनुभव

  • सु-30 MKI, मिग-21, मिग-29, जगुआर जैसे विमानों का संचालन

  • जन्म: लखनऊ | शिक्षा: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, NDA के पूर्व छात्र

पैगी व्हिटसन – कमांडर (सं.रा. अमेरिका)

  • अमेरिका की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों में से एक

  • NASA की पूर्व अंतरिक्ष यात्री, अब Axiom Space में

  • इस मिशन की सुरक्षा और तकनीकी संचालन की प्रमुख

स्लावोस उज़्नांस्की-विस्निएव्स्की – मिशन स्पेशलिस्ट (पोलैंड)

  • जैव-चिकित्सा एवं अंतरिक्ष सिस्टम इंजीनियर

  • पोलैंड के प्रतिनिधि के रूप में ISS पर जा रहे हैं

टिबोर कपू – मिशन स्पेशलिस्ट (हंगरी)

  • मैकेनिकल इंजीनियर

  • हंगरी के पहले अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल

  • वैज्ञानिक प्रयोगों और संचालन कार्यों की जिम्मेदारी

मिशन के उद्देश्य

वैज्ञानिक अनुसंधान

  • मानव स्वास्थ्य, सूक्ष्म गुरुत्व और जैविक प्रणालियों पर प्रयोग

  • जीवन समर्थन प्रणाली और चिकित्सा अध्ययन

  • दीर्घकालिक मानव मिशनों की तैयारी में योगदान

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • भारत, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के प्रतिनिधियों का संयुक्त मिशन

  • सरकारी सहयोग से संचालित वाणिज्यिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों की मिसाल

शिक्षा और जनसंपर्क

  • छात्रों को प्रेरित करने के लिए लाइव सेशन्स और अंतरिक्ष से प्रयोग

  • वैज्ञानिक सोच और STEM शिक्षा को बढ़ावा

शुभांशु शुक्ला: भारत की नई अंतरिक्ष पहचान

जन्म व पृष्ठभूमि:

  • जन्म: 10 अक्टूबर 1985, लखनऊ

  • शिक्षा: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल

  • परिवार: पत्नी दंत चिकित्सक, एक चार वर्षीय पुत्र

भारतीय वायु सेना में योगदान:

  • 2006 में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन

  • वर्तमान में ग्रुप कैप्टन

  • गगनयान मिशन के लिए अंतिम चार में चयनित

Ax-4 में भूमिका:

  • पायलट के रूप में ड्रैगन यान के संचालन, दिशा-निर्देशन और आपातकालीन नियंत्रण की जिम्मेदारी

Axiom 4: भविष्य की ओर एक कदम

Ax-4 मिशन अंतरिक्ष यात्रा को निजी और सरकारी सहयोग से आगे बढ़ाने का प्रतीक है। भारत, हंगरी और पोलैंड जैसे देशों के लिए यह वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का सुनहरा अवसर है।

संक्षिप्त जानकारी 

  • प्रक्षेपण स्थल: NASA Kennedy Space Center

  • अंतरिक्ष यात्री: भारत, अमेरिका, पोलैंड, हंगरी से

  • मिशन अवधि: 14 दिन

  • उद्देश्य: अनुसंधान, शिक्षा, सहयोग

  • शुभांशु शुक्ला की भागीदारी भारत के लिए ऐतिहासिक

SEBI ने Algo प्लेटफॉर्म ब्रोकर्स के लिए शुरू की सेटलमेंट स्कीम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अनियमित एल्गोरिदम ट्रेडिंग (Algo Trading) प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों का निपटारा करने के लिए एक तीन महीने की सेटलमेंट योजना शुरू की है। यह योजना 16 जून से 16 सितंबर 2025 तक खुली रहेगी और इसका उद्देश्य है – ब्रोकर्स को लंबित मामलों का समाधान करने का अवसर देना, ताकि वे आगे की कानूनी कार्रवाई से बच सकें।

समाचार में क्यों?

10 जून 2025 को SEBI ने यह सेटलमेंट स्कीम उन स्टॉक ब्रोकर्स के लिए शुरू की, जिन पर अनधिकृत एल्गो प्लेटफॉर्म से जुड़ने के आरोप हैं। SEBI ने ज़ेरोधा, 5पैसा और मोटिलाल ओसवाल जैसे 100 से अधिक ब्रोकर्स को शोकॉज नोटिस जारी किए थे। अब इन ब्रोकर्स को कोर्ट, SAT (Securities Appellate Tribunal) या SEBI के सामने लंबित मामलों को निपटाने का मौका दिया गया है।

सेटलमेंट योजना का दायरा

  • आवेदन की समयसीमा: 16 जून से 16 सितंबर 2025

  • पात्रता: वे ब्रोकर्स जिनके खिलाफ SEBI, SAT या कोर्ट में एल्गो प्लेटफॉर्म से जुड़े मामले लंबित हैं।

  • सेटलमेंट राशि: प्रति ब्रोकर्स लगभग ₹1 लाख अनुमानित

  • सहायता: 16 जून को SEBI एक FAQ जारी करेगा जिससे ब्रोकर्स को प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।

पृष्ठभूमि

SEBI की जांच में पाया गया कि कई ब्रोकर्स ने TradeTron जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से API (Application Programming Interface) का उपयोग कर ऑटोमैटिक ट्रेडिंग की सुविधा दी। इन प्लेटफॉर्म्स ने निश्चित मुनाफा देने वाली रणनीतियाँ पेश कीं, जो SEBI के नियमों का उल्लंघन है। इन रणनीतियों ने खुदरा निवेशकों को जोखिम भरे सौदों की ओर आकर्षित किया और पारदर्शिता तथा खुलासे के मानकों का उल्लंघन किया।

SEBI द्वारा नियमन में सख्ती

SEBI ने एल्गो ट्रेडिंग के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • एल्गो प्रदाताओं का पंजीकरण (Empanelment)

  • ब्रोकर्स और स्टॉक एक्सचेंजों की जवाबदेही

  • ऐसे प्लेटफॉर्म से ब्रोकर्स की स्पष्ट दूरी जो अवास्तविक मुनाफे का दावा करते हैं।

उद्देश्य और महत्त्व

  • निवेशक संरक्षण: अवैध एल्गो प्लेटफॉर्म से निवेशकों को बचाना।

  • बाजार की विश्वसनीयता: स्वचालित ट्रेडिंग में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करना।

  • एकमुश्त अवसर: ब्रोकर्स को न्यूनतम दंड के साथ पुराने उल्लंघनों को नियमित करने का अवसर देना।

यह पहल भारतीय पूंजी बाजार में जवाबदेही, पारदर्शिता और निवेशक विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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