चंद्रशेखर आज़ाद की 95वीं पुण्यतिथि: वह क्रांतिकारी जिसने आत्मसमर्पण से बेहतर शहादत को चुना

भारत ने 27 फरवरी 2025 को चंद्रशेखर आज़ाद का 95वां शहीदी दिवस मनाया, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे निडर क्रांतिकारियों में से एक थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे निर्भीक सेनानियों में गिने जाने वाले आज़ाद को देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई और विभिन्न दलों के राजनीतिक नेताओं ने उनके साहस और बलिदान को नमन किया। आज़ाद ने प्रण लिया था कि वे कभी भी अंग्रेजों के हाथ जीवित नहीं पकड़े जाएंगे, और उन्होंने 1931 में अपने अंतिम क्षण तक इस वचन को निभाया। उनका जीवन अडिग देशभक्ति, त्याग और क्रांतिकारी जज़्बे का प्रतीक है, जो आज भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायी विरासत के रूप में स्मरण किया जाता है।

चंद्रशेखर आज़ाद कौन थे?

  • चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा (वर्तमान मध्य प्रदेश) में चंद्रशेखर तिवारी के रूप में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख और निर्भीक क्रांतिकारी नेताओं में से एक बने।
  • सिर्फ 15 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के समय उन्होंने अपना नाम “आज़ाद”, पिता का नाम “स्वतंत्र” और पता “जेल” बताया। इसी साहसिक घोषणा ने उन्हें जीवनभर के लिए “आज़ाद” बना दिया।

प्रारंभिक प्रेरणा: जलियांवाला बाग से असहयोग आंदोलन तक

  • जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने युवा आज़ाद को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महात्मा गांधीi के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920–22) में भाग लिया।
  • लेकिन 1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद आंदोलन स्थगित होने से वे निराश हुए और अहिंसात्मक मार्ग के बजाय क्रांतिकारी रास्ता अपनाया। इसके बाद वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े, जिसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।

काकोरी कांड और क्रांतिकारी नेतृत्व

  • 1925 का काकोरी ट्रेन षड्यंत्र आज़ाद की प्रमुख क्रांतिकारी कार्रवाइयों में से एक था, जिसमें HRA के सदस्यों ने सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को लूटा। अधिकांश क्रांतिकारी गिरफ्तार हो गए, लेकिन आज़ाद पुलिस से बच निकले।
  • वे वर्षों तक भूमिगत रहे और भेष बदलकर काम करते रहे, जिसके कारण उन्हें “क्विक सिल्वर” कहा जाता था। बाद में उन्होंने संगठन को पुनर्गठित कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) बनाया।

सांडर्स की हत्या और अन्य क्रांतिकारी कदम

  • 1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए आज़ाद ने भगत सिंह और शिवराम राजगुरु के साथ मिलकर ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • यह कार्रवाई साइमन कमीशन के विरोध के दौरान हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय की मृत्यु के प्रतिशोध स्वरूप की गई थी।
  • आज़ाद ने 1929 में वायसराय लॉर्ड इरविन की ट्रेन पर बम हमले के प्रयास में भी भाग लिया। उनकी संगठन क्षमता और रणनीतिक कौशल ने ब्रिटिश दमन के बावजूद क्रांतिकारी गतिविधियों को जीवित रखा।

अल्फ्रेड पार्क में अंतिम संघर्ष

27 फरवरी 1931 को आज़ाद इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में एक साथी क्रांतिकारी से मिलने पहुंचे। किसी विश्वासघात के कारण वे ब्रिटिश पुलिस से घिर गए।

भीषण मुठभेड़ में उन्होंने दो अधिकारियों को घायल किया और अपने साथी को भागने का अवसर दिया। अंत में, अपने संकल्प के अनुसार कि वे जीवित पकड़े नहीं जाएंगे, उन्होंने अपनी अंतिम गोली स्वयं को मार ली। उस समय उनकी आयु मात्र 24 वर्ष थी। बाद में इस पार्क का नाम उनके सम्मान में आज़ाद पार्क रखा गया।

चंद्रशेखर आज़ाद की विरासत

चंद्रशेखर आज़ाद की विरासत आज भी प्रेरणा देती है।

उनके प्रमुख योगदान:

  • HSRA के तहत क्रांतिकारी आंदोलन का पुनर्गठन
  • काकोरी कांड में भागीदारी
  • लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध
  • औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध निर्भीक प्रतिरोध का प्रतीक

उन्हें कई फिल्मों में भी दर्शाया गया है, जैसे शहीद, भगत सिंह की कहानी और रंग दे बसंती, जिन्होंने लोकप्रिय संस्कृति में उनकी स्मृति को जीवित रखा है।

प्रश्न

Q. चंद्रशेखर आज़ाद किस साल शहीद हुए थे?

A. 1928
B. 1929
C. 1930
D. 1931

जानें वृंदावन में फूलों की होली कब खेली जाएगी, कारण और महत्व

वृंदावन, नंदगांव और बरसाना की अनोखी होली देशभर में प्रसिद्ध है। देश-विदेश के लोग यहां लठमार, लड्डू मार और फूल वाली होली मनाने के लिए आते हैं। लड्डू मार होली के साथ ही मथुरा-वृंदावन में 9 दिनों तक चलने वाली होली की शुरुआत हो जाती है और यह रंगों वाली होली के अगले दिन तक चलती है। भगवान कृष्ण और राधा रानी के मंदिर में धूमधाम से भक्त होली का पर्व मनाते हैं। इस बार लड्डू मार होली 25 फरवरी, बुधवार के दिन मनाई गई। वहीं, 28 फरवरी, शनिवार को फूलों वाली होली मनाई जाएगी।

होली के दीवाने वृंदावन और बरसाना की होली का इंतज़ार पूरे साल करते हैं, और जब बात बांके बिहारी मंदिर में मनाई जाने वाली फूलों की होली की आती है, तो जो सुख और आनंद फूलों की होली खेलने में मिलता है।

वृंदावन में फूलों वाली होली कब खेली जाएगी?

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में इस साल फूलों की होली 28 फ़रवरी 2026, शनिवार के दिन खेली जाएगी। इस दिन मंदिर में फूलों की बारिश करके होली उत्सव मनाया जाएगा है, जिसकी छटा बेहद मनमोहक होगा। ब्रज में माना जाता है कि कृष्ण और राधा ने वृंदावन की कुंज-गलियों में प्रेमपूर्वक फूलों से होली खेली थी। फूलों की नरम पंखुड़ियों में प्रेम, कोमलता और सौहार्द का संदेश छिपा होता है। इसी प्रेममयी वातावरण को बनाए रखने के लिए आज भी बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं।

ब्रज की होली 2026

ब्रज क्षेत्र में होली का त्योहार पूरे 40 दिनों तक मनाया जाता है, बसंत पंचमी से ही होली पर्व की शुरुआत हो जाती है, जिसके बाद होली तक रंग खेलने की परंपरा चली आ रही है। फूलों वाली होली के अलावा यहां की लड्डूमार होली, लठमार होली और हुरंगा होली भी बेहद प्रसिद्ध हैं।

  • लड्डूमार होली: लड्डूमार होली 25 फ़रवरी 2026, बुधवार को बरसाना स्थित राधा रानी मंदिर के अंदर खेली गई। इस दिन भक्त एक-दूसरे पर लड्डू फेंककर होली उत्सव मनाते हैं।
  • लठमार होली: लठमार होली 26 फ़रवरी 2026, गुरुवार को बरसाना में खेली गई। इस अनोखी परंपरा में विवाहित महिलाएं अपने पतियों व अन्य पुरुषों को लाठी से मारती हैं।
  • छड़ी-मार होली: छड़ी-मार होली इस साल 1 मार्च 2026, रविवार को गोकुल में मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं पुरुषों को छड़ी से मारकर पारंपरिक उत्सव मनाती हैं।

फूलों वाली होली की शुरुआत कैसे हुई

यह विशेष होली वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, बरसाना, नंदगांव और विभिन्न वैष्णव मंदिरों में मनाई जाती है। यह परंपरा मंदिर-उपासना में एक सौम्य और भक्तिपूर्ण रूप में विकसित हुई, जहां रंगों के स्थान पर पुष्प-वर्षा की जाती है। फूल को वैष्णव उपासना में प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना गया है। देवताओं पर पुष्प-वर्षा करना दिव्य आनंद का संकेत होता है। ऐसी मान्यता है कि वसंत ऋतु में वृंदावन के कुंजों में राधा-कृष्ण पुष्पों के बीच क्रीड़ा करते थे। भक्त इसी आनंद का अनुभव करने के लिए फूलों वाली होली मनाते हैं।

लड्डू मार होली क्यों मनाई जाती है 

मान्यता है की श्रीकृष्ण और उनके सखा नंदगांव से बरसाना आते थे। वे राधा रानी और सखियों से हंसी-मजाक किया करते थे। सखियां भी उन्हें प्रेमपूर्वक चिढ़ाती थीं। इसी प्रेमपूर्ण वातावरण में मिठाइयों का आदान-प्रदान होता था और इसी भाव से लड्डू मार होली की परंपरा विकसित हुई। माना जाता है कि लड्डू मिठास का प्रतीक और दिव्य प्रेम की मधुरता का संकेत है। यह दर्शाता है कि राधा-कृष्ण की लीला में जो भी नोक-झोंक है वह अंततः प्रेम से भरा हुआ है।

Holi 2026: 3 या 4 मार्च, जानें किस दिन है होली, 3 मार्च, नोट कर लें सही समय और शुभ मुहूर्त

Holi 2026 Kab Hai: होली का पर्व (Holi 2026) हर साल की चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। होलिका दहन के बाद अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है। होली का पर्व खुशियों और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस साल होली की तारीख को लेकर थोड़ी भ्रम बना हुआ है। दरअसल, पूर्णिमा तिथि दो दिन और चंद्रग्रहण लगने के कारण होलिका दहन और रंगोत्सव की तारीख को लेकर थोड़ी भ्रम है। जानें होली का पर्व इस साल कब मनाया जाएगा।

होलिका दहन कब है? 

पंचांग की गणना के अनुसार, होलिका दहन (Holika Dahan 2026) 2 मार्च को करना शास्त्र सम्मत है। बता दें कि 2 मार्च को शाम में पूर्णिमा तिथि लग जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम में 5 बजकर 56 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और अगले दिन 5 बजकर 8 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। 2 मार्च को भद्रा मुख मध्यरात्रि 2 बजकर 38 मिनट से सुबह में 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। ऐसे में 2 मार्च को ही होलिका दहन (Holika Dahan 2026) करना शुभ रहेगा। बता दें कि होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। 3 मार्च को शाम में 5 बजकर 8 मिनट तक पूर्णिमा तिथि तो रहेगी लेकिन इस समय चंद्रग्रहण भी होगा। दोपहर में 3 बजकर 20 मिनट से चंद्र ग्रहण आरंभ हो जाएगा और शाम में 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। उससे पहले ही पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी।

होली 2026 की तारीख

होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। उस समय में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होती है। पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे से शुरू होकर 4 मार्च को शाम 04:48 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च को है। इसलिए इस साल होली का त्योहार 4 मार्च बुधवार को मनाना शास्त्र सम्मत है। रंगोत्सव होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

होली का महत्व

होली ( Holi 2026) का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन अपने भक्त प्रहलाद को भगवान विष्णु ने बचाया था। प्रहलाद भगवान विष्णु को बहुत बड़ा भक्त था। प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप असुर राज था। वह प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकता है लेकिन, भक्त प्रहलाद ने कभी भी भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका (Holika) से भक्त प्रहलाद को जलती आग में लेकर बैठने के लिए कहा। क्योंकि, होलिका को आग में नहीं जलने का वरदान था। लेकिन, जब होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठी तो वह खुद ही जलकर भस्म हो गई। इसलिए होलिका दहन (Holika Dahan 2026) मनाया जाता है वहीं, होलिका का अंत और प्रहलाद की जीत के बाद लोगों ने एक दूसरे को रंग लगाकर उत्सव मनाया था। इसलिए होलिका दहन के अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है।

Holi 2026: जानें इस बार कब होगा होलिका दहन

Holi 2026: रंगों के उत्सव होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन को लेकर जनमानस में संशय की स्थिति है कि 2 मार्च को हो या 3 मार्च को। शास्त्रीय प्रमाणों एवं ग्रहण नियम के सूक्ष्म विचार के आधार पर निर्णय स्पष्ट किया गया है।

होलिका दहन 2026 (Holika Dahan 2026) कब है 

होलिका दहन 3 मार्च 2026 को है और इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। लेकिन ग्रहण के कारण होलिका दहन की तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि चंद्र ग्रहण शाम 06:47 बजे खत्म हो जाएगा। ऐसे में होलिका दहन शाम 6 बजकर 47 मिनट के बाद किया जा सकेगा। बता दें होलिका दहन का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2026 

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (Holika Dahan 2026 Muhurat) 3 मार्च 2026 की शाम 06 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में होलिका पूजा शुभ साबित होगी। बता दें होलिका दहन का पावन पर्व फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल ये पूर्णिमा 2 मार्च 2026 की शाम 5 बजकर 55 मिनट से लेकर 3 मार्च की शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।

होली 2026 (Holi 2026 Date) कब है

इस साल रंग वाली होली यानी धुलेंडी 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग अनुसार रंग वाली होली चैत्र कृष्ण पक्ष की पहली तारीख को मनाई जाती है।

क्यों मनाई जाती है होली? 

होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और उनके असुर पिता हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) की गोद में बिठाकर अग्नि में डाल दिया।

लेकिन, भगवान की कृपा से भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह पर्व संदेश देता है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है, जबकि सत्य की सदैव जीत होती है।

हरियाणा में पीएम श्री मॉडल पर ‘सीएम श्री स्कूल’ शुरू किए जाएंगे

हरियाणा सरकार ने केंद्र की पीएम श्री स्कूल योजना की तर्ज पर राज्य में सीएम श्री स्कूल शुरू करने की घोषणा की है। यह घोषणा राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान की। नए स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पैटर्न पर आधारित होंगे और राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने का लक्ष्य रखेंगे।

सीएम श्री स्कूल की प्रमुख विशेषताएँ

  • पीएम श्री स्कूल मॉडल पर आधारित
  • CBSE पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली का पालन
  • आधुनिक अधोसंरचना और स्मार्ट कक्षाएँ
  • कौशल-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर
  • राज्य संचालित विद्यालयों के शैक्षणिक मानकों को सुदृढ़ करना

यह पहल हरियाणा में एकरूप शैक्षणिक मानक स्थापित करने और बेहतर शिक्षण परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आरटीई अधिनियम के तहत 25% आरक्षण

शिक्षा मंत्री ने बताया कि निजी विद्यालयों में प्रवेश स्तर की कक्षाओं में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह (DG) के लिए आरक्षित हैं। यह प्रावधान बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत लागू है।

पिछले शैक्षणिक सत्र में:

  • 14,127 आवेदन प्राप्त हुए
  • 11,803 छात्रों को निजी विद्यालयों में प्रवेश आवंटित किया गया

यह नीति सामाजिक समावेशन और समान शैक्षणिक अवसर सुनिश्चित करने में सहायक है।

पीएम श्री स्कूल क्या हैं?

पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना का उद्देश्य चयनित सरकारी विद्यालयों को मॉडल संस्थानों में परिवर्तित करना है, जिनमें:

  • आधुनिक बुनियादी ढाँचा
  • स्मार्ट क्लासरूम
  • अनुभवात्मक शिक्षा
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम

हरियाणा द्वारा सीएम श्री स्कूल शुरू करना इसी मॉडल को राज्य स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम है।

संभावित प्रभाव

सीएम श्री स्कूलों की शुरुआत से:

  • शैक्षणिक अधोसंरचना में सुधार
  • CBSE पैटर्न के अनुरूप पाठ्यक्रम का मानकीकरण
  • सीखने के परिणामों में वृद्धि
  • RTE प्रावधानों के माध्यम से समावेशी शिक्षा को बढ़ावा

गुणवत्ता सुधार और समावेशी प्रवेश नीति का यह संयुक्त प्रयास हरियाणा के स्कूल शिक्षा तंत्र को नई दिशा दे सकता है।

भारत और नेपाल ने वन एवं वन्यजीव सहयोग बढ़ाने के लिए नए समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

भारत और नेपाल ने 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वनों, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता साझा पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और अंतर-सीमावर्ती (Transboundary) वन्यजीव गलियारों की बहाली को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और नेपाल के वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागैन उपस्थित रहे, जिससे भारत-नेपाल पर्यावरणीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ा।

भारत-नेपाल वन एवं वन्यजीव सहयोग MoU

यह समझौता भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और नेपाल के वन और पर्यावरण मंत्रालय के बीच हस्ताक्षरित हुआ।

समझौते के मुख्य बिंदु:

  • वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा।
  • वन्यजीव गलियारों की बहाली।
  • तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।
  • सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का साझा करना।

यह MoU साझा पारिस्थितिक तंत्रों और सीमापार वन्यजीव आवासों के समन्वित प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

समझौते में परिदृश्य-स्तर (Landscape-Level) पर जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों के निर्माण पर जोर दिया गया है।

समझौते के तहत चिन्हित प्रमुख प्रजातियाँ:

  • हाथी
  • गंगेटिक डॉल्फिन
  • गैंडा
  • हिम तेंदुआ
  • बाघ
  • गिद्ध

इसके अतिरिक्त, संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन को मजबूत करना, वन्यजीव गलियारों की पुनर्बहाली, वन एवं वन्यजीव अपराध पर नियंत्रण, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों का क्षमता निर्माण तथा जैव विविधता हॉटस्पॉट में स्मार्ट ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना भी शामिल है।

जैव विविधता संरक्षण में भारत-नेपाल सहयोग का महत्व

भारत और नेपाल दोनों समृद्ध जैव विविधता और विस्तृत संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क साझा करते हैं। कई वन्यजीव आवास और नदी तंत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हैं। बाघ, हाथी और गैंडा जैसी प्रजातियाँ दोनों देशों के बीच प्रवास करती हैं।

ऐसे अंतर-सीमावर्ती पारिस्थितिक तंत्रों के कारण संयुक्त संरक्षण रणनीतियाँ अत्यंत आवश्यक हैं। यह MoU एकीकृत संरक्षण परिदृश्य विकसित करने और साझा प्रजातियों व आवासों की समन्वित सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

जलवायु परिवर्तन और अंतर-सीमावर्ती वन्यजीव गलियारे

यह समझौता दोनों देशों के बीच जलवायु परिवर्तन सहयोग को भी सुदृढ़ करता है। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, वन और नदी प्रणालियाँ जलवायु परिवर्तन से गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।

अंतर-सीमावर्ती वन्यजीव गलियारों की बहाली से आवासीय संपर्क (Habitat Connectivity) बेहतर होगा और प्रजातियों को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद मिलेगी। समन्वित जलवायु कार्रवाई और पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन रणनीतियाँ क्षेत्रीय लचीलापन बढ़ाने में सहायक होंगी।

वन्यजीव अपराध पर नियंत्रण और प्रवर्तन सुदृढ़ीकरण

इस MoU का एक प्रमुख उद्देश्य वन एवं वन्यजीव अपराध से निपटना है। अवैध शिकार, लकड़ी की तस्करी और वन्यजीव उत्पादों की अवैध तस्करी क्षेत्र में गंभीर चुनौतियाँ हैं।

समझौता प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, खुफिया जानकारी साझा करने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने को प्रोत्साहित करता है। इससे जैव विविधता की सुरक्षा और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।

भारत ने लॉन्च किया ‘ज़ीरो प्राइज़’: वास्तविक प्रदूषण कमी पर मिलेगा बड़ा इनाम

भारत ने पहली बार परिणाम-आधारित पर्यावरण पुरस्कार ज़ीरो प्राइज़ (Zero Prize) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य वायु, जल और भूमि प्रदूषण में प्रमाणित कमी लाने वाली पहलों को सम्मानित करना है। नई दिल्ली में लॉन्च किए गए इस पुरस्कार के लिए कुल ₹5 करोड़ का कोष निर्धारित किया गया है, जिसमें तीन श्रेणियों में प्रत्येक को ₹1 करोड़ प्रदान किए जाएंगे। पारंपरिक पुरस्कारों से अलग, ज़ीरो प्राइज़ में वित्तीय प्रोत्साहन को स्वतंत्र रूप से सत्यापित पर्यावरणीय परिणामों से सीधे जोड़ा गया है। यह पहल भारत में जलवायु जवाबदेही और मापनीय पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और नवाचारपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ज़ीरो प्राइज़ क्या है और यह प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत का ज़ीरो प्राइज़ (Zero Prize) देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का परिणाम-आधारित (Results-Based) पर्यावरण पुरस्कार है, जिसका उद्देश्य वास्तविक और मापनीय प्रदूषण में कमी लाने वाली पहलों को पुरस्कृत करना है। यह पहल नीति और शासन स्कूल (School of Policy and Governance) द्वारा संचालित की जा रही है और इसे परोपकारी फंडिंग, कॉर्पोरेट CSR साझेदारी तथा अन्य संस्थागत सहयोग से समर्थन प्राप्त है।

इस पुरस्कार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल सैद्धांतिक विचारों को नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से सत्यापित और जमीन पर लागू परिणामों को ही मान्यता दी जाएगी। आवेदकों को निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में पर्यावरणीय सुधार का वास्तविक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यह प्रदर्शन-आधारित फंडिंग मॉडल सुनिश्चित करता है कि धनराशि उन्हीं समाधानों को मिले जो वास्तव में वायु, जल और भूमि प्रदूषण को कम करते हैं।

₹5 करोड़ का कोष: राशि का वितरण कैसे होगा?

ज़ीरो प्राइज़ के लिए कुल ₹5 करोड़ का कोष निर्धारित है, जिसमें तीन प्रमुख श्रेणियों में प्रत्येक को ₹1 करोड़ प्रदान किया जाएगा:

  • वायु प्रदूषण में कमी
  • जल प्रदूषण में कमी
  • भूमि प्रदूषण में कमी

प्रत्येक चयनित परियोजना को पहले एक प्रलेखित (Documented) आधार रेखा स्थापित करनी होगी और फिर 12 माह की चुनौती अवधि में मापनीय कमी दिखानी होगी। प्रगति का दावा नहीं, बल्कि स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन के माध्यम से प्रमाण अनिवार्य होगा।

प्रदूषण में कमी का मापन कैसे होगा?

ज़ीरो प्राइज़ के अंतर्गत सख्त वैज्ञानिक और नियामक मानकों के अनुसार सत्यापन किया जाएगा:

  • वायु प्रदूषण: पार्टिकुलेट मैटर (PM) के संपर्क में कमी का आकलन स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम से किया जाएगा, साथ ही मौसमीय परिवर्तनों के अनुसार समायोजन किया जाएगा।
  • जल प्रदूषण: जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) और पोषक तत्वों के स्तर को डिस्चार्ज पॉइंट पर मापा जाएगा। निगरानी Central Pollution Control Board (CPCB) के अनुरूप प्रोटोकॉल के अनुसार होगी।
  • भूमि प्रदूषण: कचरा रिसाव और अनुचित निपटान को ट्रेस करने योग्य वज़न-आधारित ऑडिट और तृतीय-पक्ष सत्यापन से प्रमाणित किया जाएगा।

यह ढांचा सुनिश्चित करता है कि प्रदूषण में कमी मापनीय, विश्वसनीय और पारदर्शी हो।

कौन आवेदन कर सकता है?

ज़ीरो प्राइज़ के लिए भारत में निम्न प्रतिभागी आवेदन कर सकते हैं:

  • स्टार्ट-अप
  • गैर-सरकारी संगठन (NGO)
  • कॉर्पोरेट संस्थाएँ
  • नगर निकाय
  • शोध संस्थान
  • व्यक्तिगत नवोन्मेषक

हालांकि, केवल वे प्रतिभागी पात्र होंगे जो शहरी या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वास्तविक पायलट परियोजना लागू कर रहे हों। केवल प्रारंभिक विचार, बिना मापनीय क्रियान्वयन के, पात्र नहीं होंगे।

राष्ट्रीय मिशनों के साथ सामंजस्य

ज़ीरो प्राइज़ भारत के प्रमुख पर्यावरणीय अभियानों के अनुरूप है, जैसे:

  • नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP)
  • नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा
  • स्वच्छ भारत मिशन 2.0

वित्तीय प्रोत्साहन को सत्यापित परिणामों से जोड़कर यह पहल स्वच्छ शहरों और बेहतर पर्यावरणीय शासन की दिशा में तेजी लाती है।

नेतृत्व के वक्तव्य

ज़ीरो प्राइज़ के सह-संस्थापक और डाबर इंडिया लिमिटेड के उपाध्यक्ष साकेत बर्मन ने कहा कि यह पुरस्कार उन सिद्ध नवाचारों को बढ़ावा देगा जो भारत की वायु, जल और भूमि को मापनीय रूप से स्वच्छ बना सकें। उन्होंने बोर्डरूम चर्चाओं से आगे बढ़कर जमीनी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

वहीं, रुचिर पंजाबी, अध्यक्ष, स्कूल ऑफ पॉलिसी एंड गवर्नेंस ने इसे नवोन्मेषकों और शोधकर्ताओं को प्रदूषण के खिलाफ ठोस और जवाबदेह समाधान विकसित करने हेतु प्रेरित करने वाला उत्प्रेरक बताया।

संक्षिप्त अवलोकन

  • ज़ीरो प्राइज़ भारत का पहला प्रदर्शन-आधारित पर्यावरण पुरस्कार है।
  • कुल कोष ₹5 करोड़; वायु, जल और भूमि प्रदूषण श्रेणियों में प्रत्येक को ₹1 करोड़।
  • 12 माह में वैज्ञानिक रूप से सत्यापित कमी अनिवार्य।
  • CPCB-अनुरूप मॉनिटरिंग और तृतीय-पक्ष सत्यापन आवश्यक।
  • SPG द्वारा संचालित और CSR/परोपकारी फंडिंग से समर्थित।

यह पहल नीति और जमीनी प्रभाव के बीच सेतु का कार्य करते हुए भारत में पर्यावरणीय जवाबदेही के एक नए मॉडल की शुरुआत करती है।

 

NBEMS ने हेल्थकेयर लाइवस्ट्रीम में AI के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) ने यूट्यूब पर “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर” विषय पर आयोजित लाइव स्ट्रीम में सर्वाधिक दर्शकों की संख्या दर्ज कर गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड्स (Guinness World Records) में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह रिकॉर्ड देशभर के पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनरों के लिए आयोजित एआई आधारित राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से स्थापित हुआ। यह पहल पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की गई और पूरे भारत में रिकॉर्ड स्तर की भागीदारी देखी गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए इसे चिकित्सा शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण और स्वास्थ्य प्रशिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

NBEMS ने एआई इन हेल्थकेयर में बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

NBEMS ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर” विषय पर आयोजित लाइव स्ट्रीम के लिए आधिकारिक रूप से Guinness World Records से मान्यता प्राप्त की।

प्रमुख बिंदु

  • संगठन: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS)
  • रिकॉर्ड: एआई इन हेल्थकेयर पाठ के लाइव स्ट्रीम में सर्वाधिक दर्शक
  • प्लेटफॉर्म: YouTube
  • दर्शक वर्ग: देशभर के पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर

यह उपलब्धि स्वास्थ्य शिक्षा में एआई के प्रति व्यापक भागीदारी और रुचि को दर्शाती है।

एआई इन हेल्थकेयर प्रशिक्षण कार्यक्रम क्या था?

यह “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर” कार्यक्रम:

  • पूरे देश में ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया
  • विशेष रूप से पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनरों के लिए तैयार किया गया
  • क्लीनिकल प्रैक्टिस में एआई के उपयोग पर केंद्रित था
  • दक्षता-आधारित (Competency-Based) चिकित्सा शिक्षा का हिस्सा था

इस लाइव स्ट्रीम का उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों में डिजिटल तत्परता को मजबूत करना था।

इस गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का महत्व

NBEMS द्वारा प्राप्त यह विश्व रिकॉर्ड दर्शाता है:

  • एआई आधारित प्रशिक्षण की बड़े पैमाने पर स्वीकार्यता
  • डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा का विस्तार
  • तकनीक-संचालित चिकित्सा शिक्षा को मजबूती
  • चिकित्सा शिक्षा में भारत की नवाचार क्षमता की वैश्विक पहचान

यह पहल क्लीनिकल सिस्टम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते एकीकरण को भी रेखांकित करती है।

NBEMS नेतृत्व का वक्तव्य

NBEMS के अध्यक्ष Dr. Abhijat Sheth ने कहा कि:

  • यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत की डिजिटल नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।
  • NBEMS दक्षता-आधारित शिक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।
  • भविष्य की पहलें स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित रहेंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि एआई इन हेल्थकेयर कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

NBEMS के बारे में

राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS):

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है।
  • स्नातकोत्तर और पोस्ट-डॉक्टोरल चिकित्सा परीक्षाएँ आयोजित करता है।
  • गुणवत्ता युक्त चिकित्सा शिक्षा मानकों को बढ़ावा देता है।
  • संरचित और दक्षता-आधारित प्रशिक्षण प्रणाली पर केंद्रित है।

भारत, बांग्लादेश समेत 40 देश सऊदी अरब के पोल्ट्री बैन से प्रभावित

सऊदी अरब ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 40 देशों से पोल्ट्री और अंडों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें बांग्लादेश और भारत भी शामिल हैं। यह निर्णय सऊदी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (SFDA) द्वारा वैश्विक महामारी संबंधी अपडेट और एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) की चिंताओं के मद्देनज़र लिया गया। इसके अतिरिक्त 16 अन्य देशों के कुछ विशेष क्षेत्रों पर आंशिक प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। हालांकि, स्वीकृत सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले हीट-ट्रीटेड (उष्मा-प्रसंस्कृत) पोल्ट्री उत्पादों को इस आयात प्रतिबंध से छूट दी गई है।

सऊदी अरब का पोल्ट्री आयात प्रतिबंध: क्या हुआ?

सऊदी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (SFDA) ने 40 देशों से पोल्ट्री आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • यह प्रतिबंध पोल्ट्री मांस और टेबल अंडों पर लागू है।
  • एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के जोखिम आकलन के आधार पर निर्णय लिया गया।
  • वैश्विक रोग निगरानी रिपोर्ट से जुड़ा हुआ है।
  • सऊदी प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा निगरानी के सतत प्रयासों का हिस्सा है।

किन देशों पर पूर्ण प्रतिबंध?

पूर्ण प्रतिबंध 40 देशों पर लागू किया गया है।

प्रमुख देश:

  • बांग्लादेश
  • भारत
  • चीन
  • यूनाइटेड किंगडम
  • जर्मनी
  • साउथ कोरिया
  • इजिप्ट
  • जापान
  • इंडोनेशिया
  • वियतनाम

अन्य देश:

अफगानिस्तान, अज़रबैजान, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्गारिया, कैमरून, कंबोडिया, कोट डी आइवर, जिबूती, घाना, हांगकांग, ईरान, इराक, कजाकिस्तान, लाओस, लीबिया, मेक्सिको, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, नाइजर, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, फिलिस्तीन, सर्बिया, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, ताइवान और मोंटेनेग्रो।

यह प्रतिबंध पोल्ट्री मांस और टेबल अंडों दोनों पर लागू है।

16 देशों में आंशिक प्रतिबंध

सऊदी अरब ने 16 देशों के कुछ विशेष क्षेत्रों में आंशिक प्रतिबंध भी लगाए हैं।

आंशिक प्रतिबंध वाले देश:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • यूनाइटेड स्टेट्स
  • इटली
  • बेल्जियम
  • पोलैंड
  • फ्रांस
  • कनाडा
  • मलेशिया
  • फिलीपींस
  • ऑस्ट्रिया
  • डेनमार्क
  • रोमानिया
  • जिम्बाब्वे
  • भूटान
  • टोगो
  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो

ये प्रतिबंध केवल उन राज्यों या क्षेत्रों पर लागू हैं जहाँ बीमारी के प्रकोप की पुष्टि हुई है।

प्रतिबंध क्यों लगाया गया?

पोल्ट्री आयात प्रतिबंध के मुख्य कारण हैं:

  • उच्च रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI) के प्रकोप
  • न्यूकैसल रोग की चिंताएँ
  • अंतरराष्ट्रीय पशु-चिकित्सा जोखिम रिपोर्ट
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय

कुछ प्रतिबंध 2004 से लागू हैं, जबकि अन्य को नवीनतम स्वास्थ्य आकलनों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।

क्या कुछ उत्पादों को अनुमति है?

हाँ, कुछ उत्पाद सख्त शर्तों के तहत अनुमति प्राप्त हैं।

छूट प्राप्त उत्पाद:

  • हीट-ट्रीटेड (उष्मा-प्रसंस्कृत) पोल्ट्री
  • प्रोसेस्ड पोल्ट्री उत्पाद

शर्तें:

  • आधिकारिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य
  • एवियन इन्फ्लुएंजा और न्यूकैसल वायरस को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी
  • स्वीकृत और प्रमाणित इकाइयों से उत्पादन

अर्थात, सही तरीके से प्रसंस्कृत और प्रमाणित उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते।

एवियन इन्फ्लुएंजा और आयात प्रतिबंध

एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) एक वायरल रोग है जो पोल्ट्री और जंगली पक्षियों को प्रभावित करता है। उच्च रोगजनक स्ट्रेन तेजी से फैल सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री व्यापार को प्रभावित करते हैं।

इसी कारण देश संक्रमित उत्पादों के प्रवेश को रोकने और घरेलू कृषि एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आयात प्रतिबंध लागू करते हैं। खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण महामारी संबंधी आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय पशु-चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर समय-समय पर अपनी नीतियों को अद्यतन करते रहते हैं।

PM Modi के इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स, बने दुनिया के पहले नेता

पीएम नरेंद्र मोदी के इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन, यानी 10 करोड़ फॉलोअर्स हो गए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे दुनिया के पहले लीडर और पॉलिटिशियन बन गए हैं। यह उपलब्धि भारत के बढ़ते डिजिटल प्रभाव और प्रधानमंत्री की मजबूत वैश्विक सोशल मीडिया उपस्थिति को दर्शाती है। Instagram आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में से एक है, जिसके अरबों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। वर्तमान समय में फॉलोअर्स की संख्या केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि डिजिटल सहभागिता, प्रभाव और वैश्विक पहुंच का भी महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।

2026 में टॉप 10 सबसे ज़्यादा फ़ॉलो किए जाने वाले इंस्टाग्राम अकाउंट

Rank Account Followers (Approx.)
1 इंस्टाग्राम 700 Million
2 क्रिस्टियानो रोनाल्डो 671 Million
3 लियोनेल मेसी 511 Million
4 सेलेना गोमेज़ 415 Million
5 काइली जेनर 391 Million
6 ड्वेन जॉनसन 390 Million
7 एरियाना ग्रांडे 372 Million
8 किम कर्दाशियन 353 Million
9 बेयोंस 307 Million
10 क्लोई कार्दशियन 299 Million

खास बातें

  • इंस्टाग्राम का ऑफिशियल अकाउंट दुनिया भर में पहले नंबर पर है।
  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले इंसान हैं।
  • PM मोदी 100M फॉलोअर्स पार करने वाले पहले वर्ल्ड लीडर बने।
  • विराट कोहली सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले इंडियन सेलिब्रिटी बने हुए हैं।

MCQs (एग्जाम-ओरिएंटेड)

Q1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 में कितने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स हो जाएंगे?
(a) 80 मिलियन
(b) 90 मिलियन
(c) 100 मिलियन
(d) 120 मिलियन
(e) 150 मिलियन

S. Ans. (c)
Sol. PM मोदी के 2026 में 100 मिलियन फॉलोअर्स हो जाएंगे।

Q2. 2026 में इंस्टाग्राम पर सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले व्यक्ति कौन हैं?
(a) लियोनेल मेस्सी
(b) क्रिस्टियानो रोनाल्डो
(c) सेलेना गोमेज़
(d) ड्वेन जॉनसन
(e) विराट कोहली

S. Ans. (b)
Sol. क्रिस्टियानो रोनाल्डो लगभग 671 मिलियन फॉलोअर्स के साथ सबसे आगे हैं।

Q3. 2026 में दुनिया भर में किस अकाउंट के सबसे ज़्यादा फॉलोअर्स हैं? (a) क्रिस्टियानो रोनाल्डो
(b) इंस्टाग्राम ऑफिशियल
(c) लियोनेल मेस्सी
(d) सेलेना गोमेज़
(e) काइली जेनर

S. Ans. (b)
Sol. ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट लगभग 700 मिलियन फॉलोअर्स के साथ पहले नंबर पर है।

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