वाराणसी ने मेगा वृक्षारोपण अभियान से बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

वाराणसी ने एक घंटे के अंदर 2,51,446 पौधे लगाकर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। यह मेगा प्लांटेशन ड्राइव सुजाबाद डोमरी इलाके में चलाया गया और इसने चीन के 2018 के 1,53,981 पौधे लगाने के रिकॉर्ड को सफलतापूर्वक तोड़ दिया। इस रिकॉर्ड को ड्रोन मॉनिटरिंग और डिजिटल काउंटिंग सिस्टम के ज़रिए ऑफिशियली वेरिफाई किया गया, जो भारत के शहरी पेड़ लगाने की कोशिशों में एक बड़ा मील का पत्थर है।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: वाराणसी ने चीन का प्लांटेशन रिकॉर्ड कैसे तोड़ा

यह प्लांटेशन ड्राइव लगभग 350 बीघा ज़मीन पर हुई, जिसे अर्बन फ़ॉरेस्ट के तौर पर डेवलप किया गया था।

  • ठीक एक घंटे में 2,51,446 पौधे लगाए गए और चीन की पिछली 2018 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स एंट्री को तोड़ दिया।
  • ड्रोन सर्विलांस और डिजिटल काउंटिंग सिस्टम से वेरिफ़िकेशन के बाद गिनीज़ एडजुडिकेटर ऋषिनाथ ने रिकॉर्ड को कन्फ़र्म किया।
  • सर्टिफ़िकेट मेयर अशोक कुमार तिवारी और म्युनिसिपल कमिश्नर हिमांशु नागपाल को दिया गया।
  • इस इवेंट को वाराणसी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के साथ-साथ कई सरकारी डिपार्टमेंट और सोशल ऑर्गनाइज़ेशन ने कोऑर्डिनेट किया था।

इस अचीवमेंट ने वाराणसी को बड़े पैमाने पर प्लांटेशन ड्राइव में एक नए ग्लोबल बेंचमार्क के तौर पर जगह दिलाई है।

सुजाबाद डोमरी अर्बन फॉरेस्ट मियावाकी टेक्निक से बनाया गया

सुजाबाद डोमरी में प्लांटेशन साइट को अर्बन फॉरेस्ट में बदल दिया गया है।

  • मियावाकी टेक्निक का इस्तेमाल किया गया, यह एक जापानी तरीका है जो घने और तेज़ी से बढ़ने वाले जंगलों को बढ़ावा देता है।
  • अधिकारियों को उम्मीद है कि यह इलाका 2-3 साल में घने हरे-भरे कवर में बदल जाएगा।
  • कुल 27 देसी किस्में लगाई गईं, जिनमें शीशम, अर्जुन, सागौन, बांस, आम, अमरूद, पपीता, अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय शामिल हैं।
  • जंगल के इलाके को 60 सेक्टर में बांटा गया है, हर सेक्टर का नाम काशी के मशहूर घाटों जैसे दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, केदार और ललिता के नाम पर रखा गया है।

हर सेक्टर में 4,000 से ज़्यादा पौधे लगाए गए, जिससे साइट पर पौधे एक जैसे फैले हुए हैं।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ड्राइव में बड़े पैमाने पर भागीदारी

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्लांटेशन इवेंट में इन लोगों ने हिस्सा लिया,

  • इंडियन आर्मी के जवान
  • NDRF और CRPF की टीमें
  • सिविल डिफेंस और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी
  • फॉरेस्ट और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट
  • नमामि गंगे और DUDA की टीमें
  • हज़ारों स्टूडेंट्स, NCC कैडेट्स और NSS वॉलंटियर्स

इस बड़े पैमाने पर कोऑर्डिनेशन से तय समय में 2.51 लाख पौधे लगाने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

2.51 लाख पौधों के लिए सिंचाई और बचाव का प्लान

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स पहल के तहत लगाए गए पौधों का लंबे समय तक बचाव पक्का करने के लिए:

  • 10.8 km का पाइपलाइन नेटवर्क लगाया गया है।
  • इस सिस्टम को 10 बोरवेल से सपोर्ट मिलता है।
  • करीब 360 रेन गन सिंचाई सिस्टम लगाए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से नगर निगम को एक प्राइवेट एजेंसी के साथ एग्रीमेंट के ज़रिए रेवेन्यू भी मिलने की उम्मीद है, और तीसरे साल से कमाई शुरू होने का अनुमान है।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में 4 बड़ी महिला कल्याण योजनाओं की शुरुआत की

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में “सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली” कार्यक्रम में दिल्ली सरकार की चार महिला-केंद्रित कल्याण योजनाओं को लॉन्च किया। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं की आवाजाही, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में पिंक नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड और राशन कार्ड धारक परिवारों को होली व दिवाली पर प्रतिवर्ष दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की योजना शामिल रही।

पिंक नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड

यह कार्ड महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में सहज और एकीकृत यात्रा सुविधा प्रदान करेगा। इसके माध्यम से बसों सहित अन्य परिवहन सेवाओं में कैशलेस और डिजिटल टिकटिंग को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा और स्वतंत्र आवागमन को मजबूत करेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि एकीकृत परिवहन व्यवस्था महिलाओं की आत्मनिर्भरता को बढ़ाती है और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करती है।

मुफ्त एलपीजी सिलेंडर योजना

इस योजना के तहत दिल्ली के राशन कार्ड धारक परिवारों को हर वर्ष होली और दिवाली पर दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर प्रदान किए जाएंगे। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर घरेलू खर्च का बोझ कम करना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

दिल्ली लखपति बिटिया योजना

इस योजना के अंतर्गत बालिका के नाम पर किश्तों में ₹56,000 जमा किए जाएंगे, जो 21 वर्ष की आयु तक ब्याज सहित ₹1 लाख से अधिक हो सकते हैं। पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय ₹1.20 लाख तक, पिछले तीन वर्षों से दिल्ली में निवास, दिल्ली में जन्मी बालिका तथा अधिकतम दो जीवित बेटियों की सीमा निर्धारित है। उच्च शिक्षा या व्यावसायिक डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी करने पर राशि आधार-लिंक्ड बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। यह योजना बेटियों की शिक्षा और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास है।

मेरी पूंजी मेरा अधिकार

यह योजना लंबित वित्तीय देयों के निपटान और नागरिकों के आर्थिक अधिकारों की पारदर्शी सुनिश्चितता पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य सरकारी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और जवाबदेही को मजबूत करना है।

“सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली” कार्यक्रम महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की व्यापक दृष्टि को दर्शाता है। इन चार योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की गतिशीलता, सुरक्षा, आर्थिक राहत और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

लगातार दूसरे वर्ष मैंगलुरु हवाईअड्डे ने जीता 2025 एएसक्यू सर्वश्रेष्ठ आगमन सेवा पुरस्कार

मैंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी उत्कृष्टता साबित करते हुए वर्ष 2025 का एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी (ASQ) अवॉर्ड – बेस्ट एयरपोर्ट एट अराइवल्स (ग्लोबली) जीत लिया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल वर्ल्ड द्वारा प्रदान किया गया। लगातार दूसरे वर्ष (2024 और 2025) यह उपलब्धि हासिल कर हवाईअड्डे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वर्ष 2025 में इस श्रेणी में दुनिया भर से केवल छह हवाईअड्डों का चयन हुआ। यह पुरस्कार पूरी तरह रियल-टाइम यात्री फीडबैक पर आधारित है, जिसमें इमिग्रेशन, बैगेज डिलीवरी, स्वच्छता, संकेत व्यवस्था, वातावरण और समग्र आराम जैसे मानकों का मूल्यांकन किया जाता है।

ASQ अवॉर्ड की विशेषता

एएसक्यू अवॉर्ड्स को विमानन उद्योग में ग्राहक संतुष्टि का सबसे विश्वसनीय मानक माना जाता है। यह आंतरिक मूल्यांकन पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से कराए गए यात्री सर्वेक्षणों पर आधारित होता है। वर्ष 2025 में विभिन्न श्रेणियों में विश्वभर के 100 हवाईअड्डों को सम्मानित किया गया। “बेस्ट एयरपोर्ट एट अराइवल्स” पुरस्कार सेवा गुणवत्ता में निरंतर उत्कृष्टता को दर्शाता है।

अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड की भूमिका

अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) द्वारा प्रबंधित मैंगलुरु हवाईअड्डे में डिजिटल पहलों, प्रक्रिया अनुकूलन और यात्री-केंद्रित बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय से आगमन प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया गया। यह उपलब्धि AAHL के भारत में संचालित हवाईअड्डों के वैश्विक मानकों को और सुदृढ़ करती है।

एएसक्यू अवॉर्ड्स और एयरपोर्ट एक्सपीरियंस समिट 2026

एएसक्यू अवॉर्ड्स का आयोजन प्रतिवर्ष एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल वर्ल्ड द्वारा किया जाता है। वर्ष 2026 में इन पुरस्कारों का औपचारिक वितरण इस्तांबुल, तुर्किये में आयोजित होने वाले “एयरपोर्ट एक्सपीरियंस समिट” (31 अगस्त से 4 सितंबर 2026) के दौरान 2 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इस वर्ष विश्वभर में कुल 195 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे, जो हवाईअड्डा संचालन में वैश्विक उत्कृष्टता को दर्शाते हैं।

FPI ने फरवरी में भारतीय शेयरों में लगाए ₹22615 करोड़

फरवरी 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश प्रवाह है। यह उछाल लगातार तीन महीनों की भारी बिकवाली के बाद आया है और अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बेहतर कॉर्पोरेट आय परिणामों तथा सुधरे हुए बाजार मूल्यांकन के कारण विदेशी निवेशकों के नए सिरे से बढ़े विश्वास को दर्शाता है। वर्ष 2025 की शुरुआत विदेशी निवेश के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही थी, ऐसे में फरवरी का यह मजबूत निवेश प्रवाह बाजार की धारणा में संभावित सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।

फरवरी 2026 में FPI निवेश: ₹22,615 करोड़ की बड़ी बढ़त

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का प्रवाह ₹22,615 करोड़ रहा, जो सितंबर 2024 के बाद का सबसे मजबूत मासिक निवेश है। यह उछाल लगातार भारी निकासी के बाद आया है। इससे पहले जनवरी 2026 में ₹35,962 करोड़, दिसंबर 2025 में ₹22,611 करोड़ और नवंबर 2025 में ₹3,765 करोड़ की निकासी हुई थी। वर्ष 2025 में फरवरी से पहले तक एफपीआई कुल ₹1.66 लाख करोड़ (लगभग 18.9 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाल चुके थे, ऐसे में फरवरी का यह निवेश एक महत्वपूर्ण वापसी दर्शाता है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और आय वृद्धि का प्रभाव

फरवरी 2026 में एफपीआई निवेश का प्रमुख कारण अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रहा, जिससे टैरिफ को लेकर अनिश्चितता कम हुई और निवेशकों का विश्वास बढ़ा। इसके साथ ही Q3FY26 में 14.7% की मजबूत कॉर्पोरेट आय वृद्धि ने बाजार धारणा को और सशक्त किया। पहले की ऊंची वैल्यूएशन में सुधार आने से भारतीय शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक बने। विश्लेषकों के अनुसार बेहतर व्यापार दृश्यता और स्थिर मैक्रो आर्थिक आधार ने विदेशी निवेशकों की वापसी को समर्थन दिया।

क्षेत्रवार रुझान: वित्तीय क्षेत्र में खरीदारी, आईटी में निकासी

फरवरी के निवेश में स्पष्ट सेक्टोरल ट्रेंड दिखाई दिया। वित्तीय सेवाओं में मजबूत खरीदारी और कैपिटल गुड्स में निवेश बढ़ा, जबकि आईटी क्षेत्र से ₹10,956 करोड़ की निकासी हुई। एआई आधारित बदलावों और वैश्विक टेक क्षेत्र की अनिश्चितताओं ने आईटी में बिकवाली को बढ़ावा दिया। यह संकेत देता है कि एफपीआई घरेलू विकास से जुड़े क्षेत्रों की ओर अपना पोर्टफोलियो स्थानांतरित कर रहे हैं।

रुपये की स्थिरता और FY27 का दृष्टिकोण

रुपया 91 प्रति डॉलर से नीचे स्थिर रहने से मुद्रा जोखिम को लेकर विदेशी निवेशकों को भरोसा मिला है। आगे चौथी तिमाही के नतीजे और वित्त वर्ष 2027 में अनुमानित 15% आय वृद्धि बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। जीडीपी वृद्धि की संभावनाएं भी स्थिर दिखाई दे रही हैं।

वैश्विक कारक: मध्य-पूर्व तनाव और कच्चा तेल

मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा की है। कच्चे तेल की कीमतें और मुद्रा उतार-चढ़ाव प्रमुख निगरानी बिंदु बने हुए हैं। यदि तेल की कीमतों में तेज वृद्धि होती है, तो यह महंगाई और राजकोषीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य के एफपीआई प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

पृष्ठभूमि: 2025-26 में एफपीआई रुझान

एफपीआई भारत के पूंजी बाजार में तरलता और मूल्यांकन को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में मुद्रा अस्थिरता, अमेरिकी टैरिफ चिंताओं और ऊंची वैल्यूएशन के कारण भारी बिकवाली देखने को मिली थी। ऐसे में फरवरी 2026 का ₹22,615 करोड़ का निवेश भारतीय बाजारों में विश्वास की वापसी और मजबूती का संकेत है।

माइक्रोन ने गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर क्लीन रूम खोला

भारत ने अपने सेमीकंडक्टर मिशन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि Micron Technology ने गुजरात के Sanand में अपनी ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) इकाई में परिचालन शुरू कर दिया है। 500,000 वर्ग फुट का रेज़्ड-फ्लोर क्लीन रूम इस संयंत्र की प्रमुख विशेषता है, जो दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा है। इसका उद्घाटन Narendra Modi ने किया। यह भारत की पहली उन्नत मेमोरी ATMP साइट है। कंपनी ने अपना पहला DRAM मॉड्यूल Dell Technologies को भेजा, जिससे भारत का उच्च-स्तरीय सेमीकंडक्टर असेंबली में प्रवेश हुआ।

माइक्रोन गुजरात सेमीकंडक्टर प्लांट: ऐतिहासिक शुरुआत

  • भारत की पहली उन्नत मेमोरी ATMP इकाई का शुभारंभ
  • कुल निवेश (फेज-1 और फेज-2) – 2.7 अरब डॉलर
  • पहला DRAM मॉड्यूल Dell Technologies को निर्यात
  • वैश्विक ग्राहक: Asus और Qualcomm
  • भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण विस्तार में बड़ा कदम

दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर क्लीन रूम

  • 500,000 वर्ग फुट का रेज़्ड-फ्लोर क्लीन रूम
  • क्लास 1000 मानक (प्रति घन मीटर 1,000 से अधिक कण नहीं)
  • प्रति घंटे 120 बार वायु परिसंचरण
  • Sanand की मिट्टी और जलवायु के अनुरूप विशेष इंजीनियरिंग
  • अति-पतले ICs और गोल्ड बॉन्डिंग वायर की सुरक्षा

यह अत्याधुनिक अवसंरचना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में मजबूत स्थान प्रदान करती है।

DRAM और NAND उत्पादन

यह संयंत्र DRAM (Dynamic Random Access Memory) और NAND फ्लैश मेमोरी की असेंबली और परीक्षण करता है।

  • DRAM – पीसी, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर में उपयोग
  • NAND – SSD और स्टोरेज उपकरणों में उपयोग
  • प्रक्रिया: वेफर थिनिंग, डाइसिंग, चिप असेंबली, परीक्षण और अंतिम पैकेजिंग
  • 2027 तक लगभग 1 अरब ICs प्रतिवर्ष उत्पादन का लक्ष्य
  • “वेफर-इन से फिनिश्ड-प्रोडक्ट-आउट” तक पूरी प्रक्रिया भारत में

कार्यबल और तकनीकी एकीकरण

  • 1,300 कर्मचारी, जिनमें लगभग आधे नए इंजीनियरिंग स्नातक
  • प्रशिक्षण मलेशिया और सिंगापुर स्थित माइक्रोन इकाइयों में
  • AI-आधारित फैक्ट्री इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन
  • वैश्विक उत्पादकता मानकों के अनुरूप संचालन
  • निर्यात के साथ-साथ घरेलू मांग की पूर्ति

यह परियोजना भारत के सेमीकंडक्टर प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र और औद्योगिक क्षमताओं को सुदृढ़ करती है।

पृष्ठभूमि: भारत का सेमीकंडक्टर अभियान

  • भारत आयात निर्भरता कम करने और घरेलू चिप इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सेमीकंडक्टर मिशन को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है।
  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) और अवसंरचना समर्थन के माध्यम से वैश्विक कंपनियों को आकर्षित किया गया है।
  • गुजरात एक उभरते सेमीकंडक्टर हब के रूप में सामने आया है। माइक्रोन की ATMP इकाई का शुभारंभ भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।

GST कलेक्‍शन फरवरी में 8.1% बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक

फरवरी 2026 में भारत का सकल जीएसटी संग्रह ₹1.83 लाख करोड़ रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष (YoY) 8.1% की वृद्धि दर्शाता है। 1 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधि और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में बेहतर अनुपालन को दर्शाती है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 28 फरवरी तक कुल सकल जीएसटी राजस्व ₹20.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो 8.3% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

फरवरी 2026 जीएसटी संग्रह: प्रमुख आंकड़े

  • सकल जीएसटी राजस्व – ₹1.83 लाख करोड़
  • वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि – 8.1%
  • कुल रिफंड – ₹22,595 करोड़ (10.2% YoY वृद्धि)
  • शुद्ध जीएसटी राजस्व – ₹1.61 लाख करोड़

रिफंड समायोजन के बाद सरकार को ₹1.61 लाख करोड़ का शुद्ध राजस्व प्राप्त हुआ।

FY26 में ₹20 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी के अंत तक कुल सकल जीएसटी संग्रह ₹20.27 लाख करोड़ रहा, जो 8.3% की वृद्धि दर्शाता है।

यह उपलब्धि संकेत देती है:

  • मजबूत कर अनुपालन
  • स्थिर उपभोक्ता मांग
  • औपचारिक क्षेत्र की निरंतर वृद्धि
  • डिजिटल कर रिपोर्टिंग में सुधार

वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले ₹20 लाख करोड़ का आंकड़ा पार करना भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

घरेलू बनाम आयात जीएसटी रुझान

फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार:

  • सकल घरेलू राजस्व – ₹1.36 लाख करोड़ (5.3% YoY वृद्धि)
  • सकल आयात राजस्व – ₹47,837 करोड़ (17.2% YoY वृद्धि)

आयात राजस्व में 17.2% की तेज वृद्धि बढ़ते व्यापार और कर योग्य आयात में इजाफे का संकेत देती है, जबकि घरेलू जीएसटी वृद्धि 5.3% रही, जो संतुलित आंतरिक खपत को दर्शाती है। फरवरी के कुल जीएसटी संग्रह में आयात घटक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

रिफंड वृद्धि और शुद्ध राजस्व

फरवरी में कुल जीएसटी रिफंड ₹22,595 करोड़ रहा, जो 10.2% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।

उच्च रिफंड सामान्यतः संकेत देते हैं:

  • मजबूत निर्यात गतिविधि
  • बेहतर रिफंड प्रसंस्करण
  • व्यवसायों में बेहतर अनुपालन

रिफंड के बाद भी ₹1.61 लाख करोड़ का शुद्ध संग्रह मजबूत राजस्व स्थिति को दर्शाता है।

भारत की जीएसटी प्रणाली: एक संक्षिप्त परिचय

  • वस्तु एवं सेवा कर परिषद (Goods and Services Tax Council) के मार्गदर्शन में संचालित जीएसटी प्रणाली जुलाई 2017 में लागू की गई थी।
  • इसने कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर एकल कर व्यवस्था स्थापित की।
  • जीएसटी राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच साझा किया जाता है और यह सरकारी वित्त का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

दीपक गुप्ता ने GAIL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला

दीपक गुप्ता ने आधिकारिक रूप से GAIL (India) Limited के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने Sandeep Kumar Gupta का स्थान लिया, जो 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हुए। 28 फरवरी 2029 तक के कार्यकाल के साथ, गुप्ता ऐसे महत्वपूर्ण समय में नेतृत्व संभाल रहे हैं जब भारत का ऊर्जा क्षेत्र तीव्र विस्तार और बदलाव के दौर से गुजर रहा है। प्राकृतिक गैस ट्रांसमिशन, एलएनजी अवसंरचना और परियोजना प्रबंधन में दशकों का अनुभव रखने वाले गुप्ता अब देश की सबसे बड़ी गैस ट्रांसमिशन और मार्केटिंग कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं।

दीपक गुप्ता बने GAIL इंडिया के चेयरमैन (2026)

  • 1 मार्च 2026 को CMD पदभार ग्रहण
  • संदीप कुमार गुप्ता का स्थान लिया
  • फरवरी 2022 से GAIL में निदेशक (प्रोजेक्ट्स) के रूप में कार्यरत
  • कार्यकाल: 28 फरवरी 2029 तक
  • GAIL भारत की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस ट्रांसमिशन और मार्केटिंग कंपनी

यह नेतृत्व परिवर्तन भारत की ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनुभव और प्रमुख उपलब्धियाँ

  • दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियर
  • Engineers India Limited में 32 वर्षों का अनुभव
  • कोंकण LNG के दाभोल ब्रेकवाटर प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया
  • डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पहल का नेतृत्व
  • वैश्विक खरीद, परियोजना निष्पादन और अवसंरचना विस्तार में विशेषज्ञता
  • गैस पाइपलाइन, पेट्रोकेमिकल, LNG और सीमा-पार ऊर्जा परियोजनाओं में अनुभव

प्रमुख परियोजनाएँ

  • नाइजीरिया में डांगोटे रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स
  • बठिंडा में HMEL का पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट
  • पाटा में GAIL की पेट्रोकेमिकल विस्तार योजना
  • मंगोलिया की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजना

उन्होंने परियोजना प्रबंधन और डिजिटलीकरण पर तकनीकी शोध-पत्र भी प्रकाशित किए हैं।

GAIL की पृष्ठभूमि और भूमिका

1984 में स्थापित GAIL, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत एक महारत्न PSU है।
यह भारत के सबसे बड़े गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है।

कंपनी के कार्यक्षेत्र:

  • गैस ट्रांसमिशन
  • गैस मार्केटिंग
  • LNG ट्रेडिंग
  • पेट्रोकेमिकल्स
  • सिटी गैस वितरण

GAIL भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 2030 तक 15% तक बढ़ाने के लक्ष्य में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

दीपक गुप्ता का नेतृत्व भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और गैस अवसंरचना विस्तार को नई दिशा दे सकता है।

जल्द पूरा होगा खुर्दा रोड-बलांगीर रेल प्रोजेक्ट

ओडिशा की बहुप्रतीक्षित खुर्दा रोड–बलांगीर रेल लाइन (301 किमी) स्वतंत्रता से पहले परिकल्पित परियोजना थी, जो अब लगभग पूर्णता की ओर है और अगले वर्ष की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है। ₹5,000 करोड़ की यह परियोजना खुर्दा, नयागढ़, बौध, सोनपुर और बलांगीर—इन पाँच जिलों से होकर गुजरती है। इसे केवल कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा, वन्यजीव गलियारों और इको-फ्रेंडली निर्माण के कारण एक इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना का क्रियान्वयन East Coast Railway द्वारा किया जा रहा है।

301 किमी की कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार

  • पाँच जिलों को जोड़ती है: खुर्दा, नयागढ़, बौध, सोनपुर और बलांगीर
  • नयागढ़, सोनपुर और बौध को पहली बार रेल संपर्क
  • ₹5,000 करोड़ का निवेश
  • 226 किमी खंड पहले से चालू
  • प्रतिदिन लगभग 5,000 यात्री सेवा का लाभ ले रहे हैं

सतकोसिया टाइगर रिजर्व के पास इंजीनियरिंग उपलब्धि

दसपल्ला (नयागढ़) से पुरुणाकटक (बौध) के बीच 75 किमी का अहम खंड Satkosia Tiger Reserve और बैसिपल्ली वन्यजीव अभयारण्य के निकट से गुजरता है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए:

  • 12.76 किमी लंबी सात सुरंगें
  • 12 वन्यजीव/हाथी अंडरपास
  • 6 ओवरपास
  • वन विभाग की सलाह से हाथी गलियारे

ओडिशा में हर वर्ष औसतन 85 हाथियों की मृत्यु दर्ज होती है, इसलिए इस परियोजना में सुरक्षित वन्यजीव मार्ग को प्राथमिकता दी गई है।

4.77 किमी लंबा वायाडक्ट: भारतीय रेलवे में दूसरा सबसे लंबा

इस रेल लाइन की सबसे उल्लेखनीय संरचना 4.77 किमी लंबा वायाडक्ट है, जिसकी ऊँचाई 26 मीटर तक है। चालू होने पर यह Bogibeel Bridge के बाद भारतीय रेलवे का दूसरा सबसे लंबा वायाडक्ट होगा।
यह संरचना वन्यजीव अंडरपास के रूप में भी कार्य करेगी, जिससे हाथी और अन्य जीव निर्बाध आवागमन कर सकेंगे।

पर्यावरण-अनुकूल निर्माण

  • बड़े तटबंधों की जगह ऊँचे वायाडक्ट
  • लगभग दो लाख पेड़ संरक्षित
  • मिट्टी खुदाई में कमी
  • सुरंगों की छतों को भविष्य में चरागाह के रूप में विकसित करने की योजना

अधिकारियों के अनुसार, हाथी “इकोसिस्टम इंजीनियर” हैं और उनका संरक्षण जैव विविधता के लिए आवश्यक है।

चरणबद्ध प्रगति और क्षेत्रीय विकास

  • नयागढ़: 2017 में रेल संपर्क
  • सोनपुर: 2024 में जुड़ा
  • बौध: 2025 में जुड़ा

कई निवासियों के लिए यह स्वतंत्रता के बाद पहली बार रेल सुविधा तक पहुंच है। यह लाइन पश्चिमी ओडिशा में व्यापार, आवागमन और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देगी।

स्वतंत्रता-पूर्व सपना अब साकार

यह परियोजना स्वतंत्रता से पहले परिकल्पित थी, लेकिन दुर्गम भूभाग, वन अनुमति और वित्तीय बाधाओं के कारण दशकों तक लंबित रही। पहाड़ी और वन क्षेत्रों में सुरंग, ऊँची संरचनाएँ और वन्यजीव-संवेदनशील डिज़ाइन अपनाकर इसे पूरा किया गया।

अगले वर्ष शेष खंड के पूरा होने के साथ भारत की सबसे पुरानी लंबित रेल अवसंरचना परियोजनाओं में से एक का समापन हो जाएगा।

भारत ने बोत्सवाना से 9 चीतों का कुनो नेशनल पार्क में स्वागत किया

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोत्सवाना से नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा। इस आगमन के साथ भारत में कुल चीता संख्या 48 हो गई है, जिसमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। यह उपलब्धि Project Cheetah के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सभी चीतों को स्वास्थ्य निगरानी और अनुकूलन (acclimatization) के बाद चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

भूपेंद्र यादव ने कूनो में बोत्सवाना के चीतों का स्वागत किया

  • 9 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।
  • यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत बोत्सवाना से लाए गए।
  • भारत में अब कुल 48 चीते (28 भारत में जन्मे शावक सहित)।
  • पहले क्वारंटीन, फिर खुले परिदृश्य में चरणबद्ध रिहाई।
  • 1952 में विलुप्ति के बाद चीतों की पुनर्वापसी हेतु यह पहल।
  • लक्ष्य: भारत में टिकाऊ, मुक्त विचरण करने वाली चीता आबादी का निर्माण।

बोत्सवाना से भारत तक: चीतों की यात्रा

  • दिसंबर 2024: बोत्सवाना से औपचारिक बातचीत शुरू।
  • सितंबर 2025: भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने परिचालन योजना के लिए दौरा किया।
  • चीतों को घांजी (Ghanzi) क्षेत्र से पकड़ा गया और गाबोरोन ले जाया गया।
  • मोकोलोडी नेचर रिजर्व में क्वारंटीन के बाद स्थानांतरण।
  • 27 फरवरी 2026: भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान से भारत लाया गया।
  • ग्वालियर से हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचाया गया।
  • पूरा स्थानांतरण अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव मानकों के अनुसार किया गया।

प्रोजेक्ट चीता: बढ़ती संरक्षण सफलता

Project Cheetah का उद्देश्य अफ्रीका के बाहर एक सुरक्षित चीता आबादी स्थापित करना है।

  • दीर्घकालिक प्रजाति संरक्षण के लिए अतिरिक्त आवास का निर्माण।
  • बोत्सवाना के साथ वैश्विक संरक्षण सहयोग।
  • वैज्ञानिक निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और प्रजनन प्रबंधन।
  • 28 भारत में जन्मे शावक—सकारात्मक संकेत।
  • पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता की पुनर्स्थापना की दिशा में बड़ा कदम।

पृष्ठभूमि: प्रोजेक्ट चीता क्यों महत्वपूर्ण?

1952 में शिकार और आवास हानि के कारण भारत में चीते विलुप्त घोषित किए गए थे।
2022 में Project Cheetah के तहत अफ्रीकी चीतों को कूनो में पुनः बसाया गया।

इस परियोजना में शामिल हैं:

  • घासभूमि आवास की तैयारी
  • शिकार आधार (prey base) में वृद्धि
  • पशु चिकित्सा देखभाल
  • सैटेलाइट निगरानी

वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक निगरानी के साथ भारत अब पारंपरिक अफ्रीकी क्षेत्र से बाहर स्थिर चीता आबादी स्थापित कर वैश्विक संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

PM मोदी ने साणंद में माइक्रोन की सेमीकंडक्टर एटीएमपी इकाई का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) फैसिलिटी का उद्घाटन किया। यह शुभारंभ भारत के सेमीकंडक्टर सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और वाणिज्यिक उत्पादन की आधिकारिक शुरुआत का संकेत देता है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की सॉफ्टवेयर शक्ति से हार्डवेयर नेतृत्व की ओर निर्णायक बदलाव बताया।

Micron ATMP Sanand: भारत सेमीकंडक्टर मिशन में बड़ी उपलब्धि

Micron Technology की Sanand स्थित ATMP सुविधा भारत के सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर निवेशों में से एक मानी जा रही है। ATMP का अर्थ है असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग—ये चिप निर्माण की वे महत्वपूर्ण अंतिम प्रक्रियाएँ हैं, जिनके माध्यम से सेमीकंडक्टर को वैश्विक बाजार में भेजने से पहले तैयार, परखा और प्रमाणित किया जाता है। यह संयंत्र भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रमुख पड़ाव:

  • जून 2023: एमओयू पर हस्ताक्षर
  • सितंबर 2023: भूमि पूजन (ग्राउंडब्रेकिंग)
  • फरवरी 2024: पायलट मशीन स्थापना
  • फरवरी 2026: वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ

यह तेज़ क्रियान्वयन सरकार के भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सक्रिय प्रयासों को दर्शाता है।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला

  • उद्घाटन से भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के उद्देश्यों को मजबूती मिली है, जिसका लक्ष्य देश में पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।
  • प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर एआई क्रांति के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार 20वीं सदी में तेल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को संचालित किया, उसी प्रकार 21वीं सदी में माइक्रोचिप्स दुनिया को दिशा देंगे।
  • भारत ने सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जबकि उत्तर प्रदेश, असम, ओडिशा और पंजाब में अतिरिक्त इकाइयाँ स्थापित किए जाने की संभावना है।
  • Micron Technology की Sanand स्थित ATMP इकाई D-RAM और NAND मेमोरी समाधान का उत्पादन करती है, जो एआई अनुप्रयोगों, डेटा सेंटर और मोबाइल उपकरणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारत-अमेरिका टेक साझेदारी और Pax Silica समझौता

  • प्रधानमंत्री ने चिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों के क्षेत्र में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच मजबूत सहयोग को रेखांकित किया।
  • हाल ही में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान, दोनों देशों ने “Pax Silica” समझौते के तहत सहयोग को आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना है।
  • Micron Technology की Sanand स्थित ATMP सुविधा इस रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, जो वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Sanand और Dholera: उभरते सेमीकंडक्टर क्लस्टर

गुजरात तेजी से सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है।
Sanand, जो पहले ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए प्रसिद्ध था, अब उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का केंद्र बन रहा है।

सरकार द्वारा:

  • भूमि आवंटन और अनुमतियों की प्रक्रिया सरल
  • बिजली-पानी जैसी उपयोगिता संरचना मजबूत
  • कौशल विकास केंद्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • रासायनिक एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग से चिप निर्माण को समर्थन

Sanand और धोलेरा पश्चिम भारत के प्रमुख सेमीकंडक्टर क्लस्टर के रूप में स्थापित हो रहे हैं।

सिर्फ फैक्ट्री नहीं, पूरा इकोसिस्टम

यह परियोजना केवल एक विनिर्माण इकाई नहीं है, बल्कि एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव है, जिसमें शामिल हैं:

  • मशीन निर्माता
  • चिप डिजाइन इंजीनियर
  • अनुसंधान संस्थान
  • लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
  • कुशल तकनीशियन

उत्पादन बढ़ने के साथ घरेलू स्तर पर सामग्री, कंपोनेंट और तकनीकी सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी।

AI क्रांति और भारत का हार्डवेयर विस्तार

  • प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर पहल को व्यापक एआई क्रांति से जोड़ते हुए कहा कि भारत, जो लंबे समय से सॉफ्टवेयर सेवाओं के लिए जाना जाता रहा है, अब हार्डवेयर क्षमताओं के निर्माण पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
  • देश का उभरता हुआ घरेलू बाजार, पहली बार गैजेट उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और विस्तारित डिजिटल अवसंरचना से मजबूत मांग समर्थन मिल रहा है।
  • Micron Technology की Sanand स्थित ATMP इकाई का शुभारंभ इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक उत्पादन और ठोस परिणामों की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।

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