लैरी पेज दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, जेफ बेजोस को पीछे छोड़ा

गूगल के सह-संस्थापक और Alphabet Inc. के प्रमुख शेयरधारक लैरी पेज ने आधिकारिक रूप से जेफ बेज़ोस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के तीसरे सबसे धनवान व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है। यह बड़ी वृद्धि Alphabet द्वारा Gemini 3 AI मॉडल की घोषणा और कंपनी के शानदार तिमाही प्रदर्शन के बाद देखने को मिली।

लैरी पेज की संपत्ति में अचानक उछाल क्यों आया?

Alphabet के मजबूत तीसरी तिमाही के नतीजों और Gemini 3 AI मॉडल के लॉन्च के बाद कंपनी के शेयरों में शुरुआती ट्रेडिंग में लगभग 6% की बढ़त हुई। बाद में यह बढ़त 3.3% पर स्थिर हुई, लेकिन इससे लैरी पेज की कुल संपत्ति में 7.6 बिलियन डॉलर की वृद्धि हो गई।

  • लैरी पेज के पास Alphabet में 3.2% हिस्सेदारी है

  • 21 नवंबर 2025 तक उनकी रियल-टाइम संपत्ति: 246.11 बिलियन डॉलर

  • गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन (2.9% हिस्सेदारी) की संपत्ति भी 7 बिलियन डॉलर बढ़कर 228.20 बिलियन डॉलर हो गई

इस बढ़त के साथ, पेज ने अमेज़न के संस्थापक जेफ बेज़ोस (233.6 बिलियन डॉलर) को पीछे छोड़ दिया और फोर्ब्स रियल-टाइम बिलियनेयर्स सूची में तीसरा स्थान हासिल कर लिया।

Gemini 3 क्या है और ये क्यों महत्वपूर्ण है?

Gemini 3, गूगल का नवीनतम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल है, जिसे उन्नत AI तर्क क्षमता (advanced reasoning) में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। Alphabet के अनुसार, यह पहला AI सिस्टम है जिसने पीएचडी-स्तरीय अकादमिक तर्क क्षमता हासिल की है—जो इसके पुराने संस्करण से 74% बेहतर है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • Google Cloud सेवाओं के साथ गहरा इंटीग्रेशन

  • एंटरप्राइज-स्तरीय AI डिप्लॉयमेंट में बेहतर प्रदर्शन

  • AI और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र में गूगल की बढ़ती पकड़ को मजबूती

इस मॉडल की घोषणा से निवेशकों का विश्वास बढ़ा और Alphabet के शेयरों में उछाल आया।

Alphabet का वित्तीय प्रदर्शन: निवेशकों में बढ़ा विश्वास

Gemini 3 लॉन्च तब हुआ जब Alphabet ने पहली बार 100 बिलियन डॉलर से अधिक की तिमाही आय दर्ज की और इन प्रमुख उपलब्धियों को हासिल किया:

  • राजस्व में 16% सालाना वृद्धि

  • Google Cloud की आय 15.2 बिलियन डॉलर, 34% सालाना वृद्धि

  • Berkshire Hathaway ने Alphabet में 4.3 बिलियन डॉलर का निवेश किया—जो वॉरेन बफेट द्वारा हाई-ग्रोथ टेक में दुर्लभ निवेश है

ये सभी संकेत Alphabet की AI और क्लाउड रणनीति पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं, जिससे शेयरधारकों और कंपनी के संस्थापकों की संपत्ति में वृद्धि हुई।

21 नवंबर 2025 तक दुनिया के शीर्ष 5 अरबपतियों की सूची

  1. एलन मस्क – 466.2 बिलियन डॉलर

  2. लैरी एलिसन – 276.5 बिलियन डॉलर

  3. लैरी पेज – 246.1 बिलियन डॉलर

  4. जेफ बेज़ोस – 233.6 बिलियन डॉलर

  5. सर्गेई ब्रिन – 228.2 बिलियन डॉलर

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी स्थिर तथ्य

  • Gemini 3 AI मॉडल रिलीज़: नवंबर 2025

  • लैरी पेज की Alphabet में हिस्सेदारी: 3.2%

  • Alphabet का Q3 2025 राजस्व: 100 बिलियन डॉलर से अधिक

  • Google Cloud Q3 राजस्व: 15.2 बिलियन डॉलर (34% वृद्धि)

  • Gemini 3 क्षमता: पीएचडी-स्तरीय तर्क शक्ति, 74% सुधार

  • Alphabet स्टॉक उछाल: घोषणा के बाद 6% तक

2025 में भारत की वृद्धि 7% रहने और 2026 में 6.4% तक धीमी होने का मूडीज़ का पूर्वानुमान

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 2025 में 7% रहने का अनुमान लगाया है, जिसके बाद 2026 में यह हल्की गिरावट के साथ 6.4% पर आने की संभावना है। इन अनुमानों के साथ भारत अगले दो वर्षों तक दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचा निवेश और व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता के चलते यह वृद्धि गति बरकरार रहने की उम्मीद है, भले ही वैश्विक अनिश्चितताएँ मौजूद हों।

भारत की आर्थिक गति के प्रमुख कारक

1. मजबूत घरेलू मांग

निजी उपभोग भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बना हुआ है। बढ़ती आय, विस्तृत होता मध्य वर्ग और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती मांग—खुदरा, सेवाओं, आवास और परिवहन सहित कई क्षेत्रों में खर्च को बढ़ावा दे रहे हैं।

2. बुनियादी ढांचा निवेश

सरकार द्वारा बढ़ा हुआ पूंजीगत व्यय सड़कों, रेलवे और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में तेजी ला रहा है। उच्च सार्वजनिक निवेश लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

3. निर्यात में विविधता

भारत पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़ते हुए नए क्षेत्रों में निर्यात का विस्तार कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों ने निर्यात को मजबूत किया है, जिससे वैश्विक जोखिमों के बीच आर्थिक लचीलापन बढ़ा है।

4. स्थिर व्यापक आर्थिक संकेतक

भारत ने नियंत्रित मुद्रास्फीति, प्रबंधनीय राजकोषीय घाटा, स्थिर मुद्रा और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखा है। ये कारक नीति लचीलेपन और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाते हैं।

2026 में वृद्धि धीमी क्यों होगी

मजबूत बुनियाद के बावजूद, 2026 में विकास दर घटकर 6.4% होने की संभावना है, कारण:

  • 2025 की उच्च वृद्धि के कारण बेस इफेक्ट

  • वैश्विक व्यापार में कमजोरी और फाइनेंशियल टाइटनिंग

  • विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश की सतर्क प्रवृत्ति

  • संरचनात्मक चुनौतियाँ—कौशल अंतराल, नियामक देरी, भूमि उपलब्धता आदि

यह गिरावट स्वाभाविक आर्थिक चक्र का हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि अर्थव्यवस्था रिकवरी-चालित वृद्धि से निवेश-चालित वृद्धि की ओर बढ़ रही है।

महत्वपूर्ण स्थिर तथ्य 

  • भारत की अनुमानित GDP वृद्धि (2025): 7.0%

  • भारत की अनुमानित GDP वृद्धि (2026): 6.4%

  • मुख्य वृद्धि प्रेरक: घरेलू उपभोग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर व्यय, मैक्रो-स्थिरता

  • वृद्धि जोखिम: वैश्विक मंदी, निवेश बाधाएँ, बेस इफेक्ट

  • वैश्विक स्थिति: 2025–26 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल

सरकार GDP 2026 के लिए नेशनल अकाउंट्स की नई सीरीज़ जारी करेगी

भारत सरकार 27 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय खातों की नई श्रृंखला जारी करेगी, जिसका आधार वर्ष 2022–23 होगा। यह निर्णय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा लिया गया है। यह कदम राष्ट्रीय आर्थिक आँकड़ों को अधिक सटीक, प्रासंगिक और समयानुकूल बनाने के लिए उठाया गया है। नई श्रृंखला नीतिनिर्माण, आर्थिक योजना और शोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

आधार वर्ष क्यों बदला जा रहा है?

राष्ट्रीय खाते—जिनसे GDP, GVA और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतक निकाले जाते हैं—को समय-समय पर संशोधित किया जाता है ताकि वे अर्थव्यवस्था की वास्तविक संरचना को सही दर्शा सकें। आधार वर्ष बदलने के प्रमुख कारण:

  • अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलावों का परिलक्षण

  • नए और अद्यतन डाटा स्रोतों का समावेश

  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उन्नत पद्धतियों को अपनाना

  • उपभोग पैटर्न, उत्पादन प्रवृत्तियों और निवेश संरचना में बदलावों का समायोजन

पिछला बड़ा संशोधन 2015 में हुआ था जब आधार वर्ष 2004–05 से बदलकर 2011–12 किया गया था। नई श्रृंखला कोविड-19 के बाद की अर्थव्यवस्था, डिजिटल सेक्टर, और सेवाक्षेत्र की उभरती भूमिका को बेहतर दर्शाएगी।

सलाहकार समिति और पद्धति

नई श्रृंखला तैयार करने के लिए राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी सलाहकार समिति (ACNAS) गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष प्रो. बी.एन. गोल्डर हैं।

समिति के प्रमुख उद्देश्य:

  • अधिक सटीकता हेतु नए डेटा स्रोतों की सिफारिश

  • संकलन विधियों में आवश्यक परिवर्तन सुझाना

  • अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे SNA 2008) से सामंजस्य सुनिश्चित करना

  • राष्ट्रीय खातों को नीति और शोध के लिए अधिक उपयोगी बनाना

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चर्चा पत्र

नई श्रृंखला को समझाने के लिए MoSPI चर्चा पत्र जारी कर रहा है।

पहला चर्चा पत्र

  • उत्पादन और आय आधारित अनुमानों पर केंद्रित

  • GDP और GVA की नाममात्र एवं वास्तविक गणना में प्रस्तावित बदलावों की व्याख्या

आगामी चर्चा पत्र

  • व्यय आधारित अनुमानों पर केंद्रित होगा

  • उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय और शुद्ध निर्यात के नए उपचार की जानकारी देगा

इनका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को नई श्रृंखला की संरचना समझाना है।

नई श्रृंखला से अपेक्षित लाभ

  • अद्यतन डाटा के कारण GDP के अधिक सटीक अनुमान

  • डिजिटल सेवाओं, गिग इकॉनमी जैसे उभरते क्षेत्रों का बेहतर परिलक्षण

  • असंगठित और अनौपचारिक क्षेत्रों का सुधारित मापन

  • नीति निर्माण एवं आर्थिक पूर्वानुमान के लिए अधिक विश्वसनीय आधार

महत्वपूर्ण स्थिर तथ्य 

  • नया आधार वर्ष: 2022–23

  • जारी करने की तिथि: 27 फरवरी 2026

  • पूर्व आधार वर्ष: 2011–12 (2015 में लागू)

  • मंत्रालय: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI)

  • सलाहकार समिति अध्यक्ष: प्रो. बी.एन. गोल्डर

बिहार कैबिनेट 2025: राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण प्रमुख पोर्टफोलियो की घोषणा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने रिकॉर्ड 10वें कार्यकाल की शपथ लेने के बाद नई गठबंधन सरकार के मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया है। एनडीए गठबंधन के तहत बनी इस नई कैबिनेट में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी सहयोगी के रूप में उभरी है और उसे सबसे अधिक मंत्री पद भी मिले हैं। एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत भाजपा के सम्राट चौधरी को बिहार का गृह मंत्री नियुक्त किया गया है — यह वह सशक्त विभाग है जो परंपरागत रूप से मुख्यमंत्री के पास ही रहता था।

मुख्य मंत्रिपरिषद नियुक्तियाँ और विभाग 

बिहार के नवनियुक्त मंत्रिपरिषद में विभागों का बंटवारा इस प्रकार किया गया है—

  • गृह विभाग: सम्राट चौधरी

  • भूमि व राजस्व; खान एवं भूविज्ञान: विजय कुमार सिन्हा

  • स्वास्थ्य व विधि: मंगल पांडे

  • उद्योग: दिलीप जायसवाल

  • सड़क निर्माण; नगर विकास एवं आवास: नितिन नवीन

  • कृषि: रामकृपाल यादव

  • पर्यटन; कला, संस्कृति एवं युवा: अरुण शंकर प्रसाद

  • सूचना एवं जनसंपर्क; खेल: श्रेयसी सिंह

  • श्रम संसाधन: संजय टाइगर

  • पशु एवं मत्स्य संसाधन: सुरेंद्र मेहता

  • आपदा प्रबंधन: नारायण प्रसाद

  • अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण: लखेंद्र पासवान

  • पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण: रमा निपत

  • सहकारिता; पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन: प्रमोद चंद्र बंशी

गठबंधन की संरचना और शक्ति संतुलन

नवगठित NDA-नेतृत्व वाली बिहार कैबिनेट में कुल 26 मंत्री शामिल हैं, जिनमें विभिन्न सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

  • भाजपा: सबसे बड़ा दल, 89 सीटों के साथ

  • जदयू: 8 मंत्री

  • लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास): 2 मंत्री

  • हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM): 1 मंत्री

  • राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM): 1 मंत्री

सहयोगी दलों को मिले विभाग

  • LJP(R): गन्ना उद्योग तथा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण

  • HAM: लघु जल संसाधन विभाग

  • RLM: पंचायती राज विभाग

यह बंटवारा भाजपा की प्रमुख भूमिका को दर्शाता है, साथ ही छोटे NDA घटक दलों को भी संतुलित हिस्सेदारी प्रदान करता है।

सम्राट चौधरी की नियुक्ति का महत्व

बिहार के गृह विभाग की कमान सम्राट चौधरी को सौंपना—जो भाजपा के प्रमुख चेहरे और तेजतर्रार नेता माने जाते हैं—एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला है।

  • यह पहली बार है जब नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार में गृह विभाग भाजपा नेता के पास गया है

  • निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भाजपा अब प्रशासनिक ढांचे में अपनी भूमिका को और सशक्त करना चाहती है।

  • यह नियुक्ति इस बात का संकेत भी है कि भाजपा शासन-प्रक्रिया में अधिक प्रत्यक्ष और प्रभावी भागीदारी स्थापित कर रही है, जबकि जदयू मुख्यमंत्री पद के साथ अपना केंद्रीय स्थान बनाए हुए है।

TCS + TPG = भारत की अगली बड़ी AI और डेटा सेंटर क्रांति

भारत में प्रौद्योगिकी अवसंरचना के भविष्य को नई दिशा देते हुए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने निजी इक्विटी फर्म TPG के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक संयुक्त उद्यम की घोषणा की है। यह साझेदारी देश में एआई-केंद्रित और ‘सॉवरेन’ (राष्ट्रीय नियंत्रण वाले) डेटा सेंटर स्थापित करेगी। लगभग ₹18,000 करोड़ के संयुक्त निवेश के साथ, यह पहल TCS को दुनिया की सबसे बड़ी AI-चालित टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ कंपनी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

संयुक्त उद्यम: HyperVault AI Data Centre Ltd.

  • HyperVault AI Data Centre Ltd. को TCS की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है।

  • इसका उद्देश्य ऐसे अत्याधुनिक डेटा सेंटर विकसित करना और संचालित करना है जो AI और non-AI दोनों तरह के वर्कलोड को संभाल सकें।

  • ये डेटा सेंटर विशेष रूप से तैयार की गई आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करेंगे, जैसे:

    • लिक्विड-कूल्ड सिस्टम

    • हाई-डेंसिटी रैक

    • ऊर्जा-कुशल डिज़ाइन

    • भारत के प्रमुख क्लाउड ज़ोन के साथ मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी

निवेश संरचना

  • TCS और TPG 51:49 के इक्विटी अनुपात में निवेश करेंगे।

  • TPG की अंतिम हिस्सेदारी 27.5% से 49% के बीच रहेगी, यह अंतिम समझौतों पर निर्भर करेगा।

  • पहली बार, TCS ने अपने किसी उद्यम में बाहरी निजी इक्विटी निवेश और ऋण को स्वीकार किया है — जो इस परियोजना की रणनीतिक महत्ता दर्शाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

1. AI अवसंरचना की विस्फोटक मांग

भारत की मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.5 GW है, जो 2030 तक बढ़कर 10 GW से अधिक होने का अनुमान है।
AI स्टार्टअप्स, क्लाउड सेवाओं और वैश्विक हाइपरस्केलर्स की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए HyperVault जैसे गीगावॉट-स्तरीय डेटा सेंटर आवश्यक हैं।

2. सॉवरेन डेटा सेंटर

  • ये केंद्र भारत की डेटा संप्रभुता (डेटा का देश में सुरक्षित रहना) को मजबूत करेंगे।

  • यह डीपीडीपी नियमों तथा राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा लक्ष्यों के अनुरूप है।

3. पहले के सफल सहयोग

  • TCS और TPG की यह तीसरी साझेदारी है।

  • इससे पहले साझेदारी Tata Motors की EV इकाई और Tata Technologies में हुई थी।

  • यह भारत में प्राइवेट-इक्विटी और बड़े उद्योग समूहों के बीच मजबूत होती साझेदारी को दर्शाता है।

आर्थिक और तकनीकी महत्व

यह पहल निम्नलिखित क्षेत्रों में बड़ा योगदान देगी:

  • उच्च-कौशल वाले रोजगार का सृजन

  • भारत की वैश्विक AI डेटा अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

  • विदेशी डेटा स्टोरेज सेवाओं पर निर्भरता में कमी

  • राष्ट्रीय डिजिटल संप्रभुता को मजबूती

बाज़ार पर प्रभाव

  • 2019 से अब तक भारत के डेटा सेंटर बाजार में करीब $94 बिलियन का निवेश हुआ है।

  • यह नया संयुक्त उद्यम इस प्रवाह को और गति देगा और आने वाले वर्षों में टेक अवसंरचना और इनोवेशन इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत आधार बनाएगा।

मुख्य बिंदु एक नज़र में

  • TCS–TPG संयुक्त उद्यम: HyperVault AI Data Centre Ltd.

  • कुल निवेश: लगभग ₹18,000 करोड़

  • उद्देश्य: AI और सॉवरेन डेटा सेंटर स्थापित करना

  • हिस्सेदारी: TCS – 51%, TPG – अधिकतम 49%

  • भारत की वर्तमान डेटा सेंटर क्षमता: 1.5 GW → लक्ष्य 2030 तक 10 GW

  • 2019 से निवेश: $94 बिलियन

  • TCS द्वारा पहली बार बाहरी निजी इक्विटी की भागीदारी

गूगल ने ताइवान में बड़ा AI हार्डवेयर इंजीनियरिंग सेंटर खोला

टेक साझेदारी को और मज़बूत करते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका और ताइवान के बीच सहयोग का एक बड़ा संकेत सामने आया है। गूगल ने ताइपे, ताइवान में अपना नया एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हार्डवेयर इंजीनियरिंग सेंटर खोला है। यह केंद्र अमेरिका के बाहर गूगल की सबसे बड़ी ऐसी सुविधा है, जो ताइवान की बढ़ती वैश्विक भूमिका—एआई नवाचार और सुरक्षित प्रौद्योगिकी विकास के प्रमुख केंद्र—को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चीन और ताइवान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, जिससे ताइवान की स्थिति विश्व-स्तरीय टेक सप्लाई चेन में एक विश्वसनीय और रणनीतिक भागीदार के रूप में और मज़बूत होती है।

गूगल ने ताइपे में खोला अपना सबसे बड़ा विदेशी एआई सेंटर

अमेरिका और ताइवान के बीच रणनीतिक तकनीकी साझेदारी को मज़बूती देने वाले एक महत्वपूर्ण कदम में, गूगल ने ताइपे, ताइवान में अपना नया एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर हार्डवेयर इंजीनियरिंग सेंटर खोला है। यह अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे बड़ा ऐसा केंद्र है और ताइवान की बढ़ती भूमिका—एक वैश्विक एआई नवाचार और सुरक्षित तकनीकी विकास हब—में सीधा निवेश है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब चीन-ताइवान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक टेक सप्लाई चेन में ताइवान की विश्वसनीय स्थिति और मजबूत होती है।

अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे बड़ा एआई सेंटर

नई इंजीनियरिंग सुविधा एआई-विशेष चिप्स—जैसे गूगल की अपनी TPU (Tensor Processing Unit) प्रोसेसर श्रृंखला—को सर्वर हार्डवेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर में एकीकृत करने पर काम करेगी। इसका उद्देश्य क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एआई सर्वर आर्किटेक्चर का निर्माण, परीक्षण और उन्नयन करना है।

गूगल क्लाउड अधिकारियों के अनुसार, यह ताइवान सुविधा सैकड़ों इंजीनियरों को रोजगार देगी—जो 2020 के बाद टीम के आकार में लगभग तीन गुना वृद्धि है। यह गूगल के मौजूदा ताइवान संचालन को भी पूरक करती है, जिनमें शामिल हैं:

  • 2013 से कार्यरत एक डेटा सेंटर

  • दो हार्डवेयर सेंटर जो उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स विकसित करते हैं

  • अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश

रणनीतिक समय: अमेरिका–ताइवान टेक गठबंधन

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस केंद्र के उद्घाटन को ताइवान की वैश्विक तकनीकी क्षमता में विश्वास का प्रतीक बताया, विशेषकर एआई सप्लाई चेन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए।

उन्होंने कहा:
“ताइवान न सिर्फ वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन का अहम हिस्सा है, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद एआई के निर्माण का प्रमुख केंद्र भी है।”

अमेरिकन इंस्टीट्यूट इन ताइवान (अमेरिका के वास्तविक दूतावास) के निदेशक रेमंड ग्रीन ने इस केंद्र को “अमेरिका-ताइवान आर्थिक संबंधों के स्वर्ण युग” का प्रतीक बताते हुए ताइवान की रणनीतिक स्वायत्तता और नवाचार क्षमता के प्रति वाशिंगटन के समर्थन को दोहराया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और भू-राजनीति

यह कदम कई रणनीतिक मायनों में महत्वपूर्ण है:

1. तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करना

एआई सिस्टम की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच, ताइवान ने चीनी एआई प्लेटफॉर्म जैसे DeepSeek के उपयोग के प्रति सावधानी बरती है। गूगल का यह निवेश ताइवान को एक सुरक्षित और लोकतांत्रिक तकनीकी हब के रूप में और स्थापित करता है।

2. भू-राजनीतिक संदेश

चीन द्वारा ताइवान पर दावा जारी रखने के बीच, यह अमेरिकी नेतृत्व वाला निवेश पश्चिमी देशों द्वारा ताइवान के लोकतांत्रिक शासन और टेक क्षमता के प्रति मजबूत समर्थन का संकेत देता है।

3. एआई इकोसिस्टम का निर्माण

यह परियोजना सिर्फ कार्यालय नहीं है—यह उन्नत आरएंडडी, रोजगार सृजन और वैश्विक सप्लाई चेन की मजबूती के साथ एक संपूर्ण एआई नवाचार इकोसिस्टम में निवेश है।

स्थिर तथ्य 

  • उद्घाटन तिथि: 20 नवंबर 2025

  • स्थान: ताइपे, ताइवान

  • कंपनी: गूगल (Alphabet Inc.)

  • मुख्य फोकस: एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हार्डवेयर — TPU प्रोसेसर इंटीग्रेशन, सर्वर विकास

New Labour Codes: भारत में चार नए लेबर कोड लागू

सरकार ने 21 नवंबर 2025 को बड़ा फैसला लेते हुए देश में चार लेबर कोड तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए। इन कोड्स के लागू होने के साथ ही 29 पुराने श्रम कानून खत्म हो गए हैं और उनकी जगह अब एकृकीत और सरल ढांचा काम करेगा। लागू किए गए चार कोड हैं-

  • वेज कोड, 2019 (वेतन संहिता)
  • इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 (औद्योगिक संबंध संहिता)
  • सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 (सामाजिक सुरक्षा संहिता)
  • ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता)

यह सुधार एक भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने, अनुपालन को आसान बनाने, और संगठित, असंगठित, गिग, प्लेटफ़ॉर्म, प्रवासी, MSME, निर्यात तथा खतरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर माना जा रहा है।

चार श्रम संहिताओं को समझना

1. वेज कोड, 2019 

  • सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करती है, केवल अनुसूचित उद्योगों के लिए नहीं।

  • वेतन के समय पर भुगतान को अनिवार्य बनाती है।

  • पूरे देश में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (National Floor Wage) की व्यवस्था करती है, जिससे राज्यों में वेतन असमानता कम हो सके।

2. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 

  • विवादों के त्वरित निपटान के लिए ट्रिब्यूनल व्यवस्था को मजबूत करती है।

  • नियोक्ता–कर्मचारी संबंधों को अधिक सुचारु बनाती है।

  • उद्योगों में स्थिरता और निवेश आकर्षण को बढ़ावा देती है।

3. सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 

सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाकर इसमें शामिल करती है:

  • गिग वर्कर्स

  • प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स

  • स्वरोजगार (Self-employed)

  • प्रवासी श्रमिक

यह संहिता PF, ESIC, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करती है, जिससे श्रमिक कहीं भी जाकर इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

4. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 

  • विभिन्न उद्योगों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा मानक निर्धारित करती है।

  • कई श्रेणियों के श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य बनाती है।

  • कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वच्छता और कार्य स्थितियों में समग्र सुधार लाती है।

ये चारों श्रम संहिताएँ मिलकर भारत के श्रम ढांचे को सरल, आधुनिक और अधिक श्रमिक-हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं।

पहले बनाम बाद में: श्रम सुधार 

सुधारों से पहले

  • नियुक्ति पत्र देने की कोई अनिवार्यता नहीं

  • न्यूनतम वेतन केवल चुनिंदा उद्योगों तक सीमित

  • ESIC कवरेज सीमित

  • महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति नहीं

  • अनेक लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता

  • अनिवार्य स्वास्थ्य जांच नहीं

  • बिखरे हुए और पुराने श्रम कानून

सुधारों के बाद

  • सभी श्रमिकों के लिए नियुक्ति पत्र अनिवार्य

  • हर श्रमिक के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी

  • ESIC पूरे भारत में उपलब्ध, छोटे/खतरनाक इकाइयों में भी

  • महिलाओं को सभी क्षेत्रों व नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति (सुरक्षा प्रबंध सहित)

  • एकल रजिस्ट्रेशन, एकल रिटर्न, एकल लाइसेंस

  • 40 वर्ष से ऊपर के श्रमिकों के लिए हर साल मुफ्त स्वास्थ्य जांच

  • आधुनिक, सरल और वैश्विक मानकों के अनुरूप श्रम ढांचा

विभिन्न श्रमिक श्रेणियों के प्रमुख लाभ

1. निश्चित अवधि के कर्मचारी (Fixed-Term Employees – FTE)

  • स्थायी कर्मचारियों जैसे सभी लाभ

  • एक वर्ष बाद ग्रेच्युटी का अधिकार

  • अधिक आय स्थिरता और संरक्षण

  • लंबे समय तक अनुबंध श्रम के अत्यधिक उपयोग में कमी

2. गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स

  • पहली बार कानूनी मान्यता

  • एग्रीगेटर्स को सामाजिक सुरक्षा फंड में योगदान देना होगा

  • आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर से पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित

3. कांट्रैक्ट वर्कर्स

  • स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी

  • सालाना मुफ्त स्वास्थ्य जांच

  • FTE के रूप में एक वर्ष कार्य करने पर ग्रेच्युटी

4. महिला श्रमिक

  • समान काम के लिए समान वेतन

  • सभी क्षेत्रों में कार्य और नाइट शिफ्ट की अनुमति

  • शिकायत निवारण समितियों में अनिवार्य प्रतिनिधित्व

  • परिवार की परिभाषा में सास–ससुर शामिल

5. युवा श्रमिक

  • न्यूनतम वेतन की गारंटी

  • नियुक्ति पत्र अनिवार्य

  • छुट्टी के दौरान वेतन सुनिश्चित

  • शोषण से सुरक्षा

6. MSME क्षेत्र के श्रमिक

  • पूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवरेज

  • ओवरटाइम पर दोगुना वेतन

  • मानक कार्य घंटे और भुगतान अवकाश

  • बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता

7. बीड़ी और सिगार उद्योग के श्रमिक

  • न्यूनतम वेतन की गारंटी

  • सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे कार्य

  • ओवरटाइम पर दो गुना वेतन

  • 30 दिन कार्य के बाद बोनस का अधिकार

8. बागान (Plantation) श्रमिक

  • OSH और सामाजिक सुरक्षा कोड के दायरे में शामिल

  • अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण व सुरक्षा उपकरण

  • परिवारों के लिए ESI चिकित्सा सुविधाएँ

  • आश्रित बच्चों के लिए शिक्षा सहायता

9. ऑडियो-विज़ुअल एवं डिजिटल मीडिया श्रमिक

  • नियुक्ति पत्र अनिवार्य

  • समय पर वेतन भुगतान

  • ओवरटाइम पर दो गुना वेतन

  • स्टंट कलाकारों व मीडिया वर्कर्स के लिए बेहतर सुरक्षा

10. खनन (Mine) श्रमिक

  • यात्रा दुर्घटनाएँ (कुछ शर्तों के साथ) सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत

  • राष्ट्रीय स्तर के मानकीकृत सुरक्षा मानक

  • वार्षिक मुफ्त स्वास्थ्य जांच

  • कार्य घंटों की सीमा तय

11. खतरनाक (Hazardous) उद्योगों के श्रमिक

  • अनिवार्य सुरक्षा समितियाँ

  • राष्ट्रीय सुरक्षा मानक

  • महिलाओं के लिए समान अवसर

  • रसायनों के सुरक्षित उपयोग के लिए सशक्त प्रोटोकॉल

12. वस्त्र (Textile) उद्योग के श्रमिक

  • प्रवासी श्रमिकों को समान वेतन और पीडीएस पोर्टेबिलिटी

  • ओवरटाइम पर दोगुना वेतन

  • दावा दाखिल करने की समय-सीमा 3 वर्ष तक बढ़ाई गई

13. आईटी एवं ITES (सूचना प्रौद्योगिकी) क्षेत्र के श्रमिक

  • हर महीने की 7 तारीख तक वेतन का अनिवार्य भुगतान

  • समान कार्य के लिए समान वेतन

  • महिलाओं को सुरक्षा प्रावधानों के साथ नाइट शिफ्ट की अनुमति

  • विवादों का तेज समाधान

14. डॉक (बंदरगाह) श्रमिक

  • औपचारिक मान्यता और कानूनी संरक्षण

  • भविष्य निधि (PF), बीमा और पेंशन सुविधाएँ

  • वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

  • सुरक्षित शौचालय एवं चिकित्सा सुविधाएँ

15. निर्यात (Export) क्षेत्र के श्रमिक

  • FTE (Fixed-Term Employment) वाले श्रमिकों को PF, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा

  • 180 दिन पूरे होने पर वार्षिक अवकाश

  • वेतन से किसी भी प्रकार की अनाधिकृत कटौती प्रतिबंधित

  • महिलाओं की नाइट-शिफ्ट के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल

अन्य प्रणालीगत सुधार

  • वेतन और नौकरी भूमिकाओं में लैंगिक निष्पक्षता (ट्रांसजेंडर श्रमिक भी शामिल)

  • मार्गदर्शन-आधारित अनुपालन को बढ़ावा देने वाला Inspector-cum-Facilitator मॉडल

  • सिंगल रजिस्ट्रेशन, सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न

  • राष्ट्रीय OSH बोर्ड जो सुरक्षा मानकों का सामंजस्य करेगा

  • औद्योगिक ट्रिब्यूनल के माध्यम से विवादों का बेहतर और तेज समाधान

राष्ट्रीय प्रभाव और महत्व

  • सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64%

  • अधिक सुरक्षित और सशक्त श्रमिक वर्ग

  • रोजगार और उत्पादकता में वृद्धि

  • भारत की श्रम-शासन प्रणाली की वैश्विक छवि में सुधार

  • आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप आधुनिक, सरल और पारदर्शी श्रम ढांचा

World Television Day 2025: क्यों मनाया जाता है ‘विश्व टेलीविजन दिवस’?

विश्व टेलीविजन दिवस हर वर्ष 21 नवंबर को मनाया जाता है। विश्व टेलीविजन दिवस, विश्व स्तर पर लोगों को जोड़ने, शिक्षित करने, सूचना देने तथा संस्कृतियों और सीमाओं के पार सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देने की इसकी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, हमारे जीवन में टेलीविजन की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करने का दिन है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त यह दिवस इस बात पर ज़ोर देता है कि टेलीविज़न आज भी जनमत निर्माण, सांस्कृतिक समझ बढ़ाने और वैश्विक विकास को प्रोत्साहित करने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है। डिजिटल युग की तेज़ रफ्तार और सूचना की अधिकता के बीच, विश्व टेलीविज़न दिवस हमें याद दिलाता है कि टेलीविज़न अब भी दुनिया भर में विश्वसनीय सूचना स्रोत और लोगों को जोड़ने वाली एकीकृत सांस्कृतिक शक्ति के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

विश्व टेलीविज़न दिवस का इतिहास 

विश्व टेलीविज़न दिवस की स्थापना दिसंबर 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। यह निर्णय उसी वर्ष आयोजित प्रथम वर्ल्ड टेलीविज़न फ़ोरम की सफलता के बाद लिया गया, जिसमें प्रमुख मीडिया अधिकारियों, पत्रकारों और विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस फ़ोरम में टेलीविज़न की बढ़ती भूमिका—निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करने, जनमत तैयार करने और वैश्विक संवाद को बढ़ावा देने—पर विस्तार से चर्चा की गई। संयुक्त राष्ट्र ने 21 नवंबर को विश्व टेलीविज़न दिवस के रूप में घोषित किया ताकि इस माध्यम के सामाजिक विकास, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान–प्रदान में महत्वपूर्ण योगदान को सम्मान दिया जा सके।

World Television Day 2025 का थीम 

हालाँकि 2025 के लिए आधिकारिक थीम अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन पिछले वर्षों के थीम यह दर्शाते हैं कि आज के जुड़ते हुए विश्व में टेलीविजन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। पिछले थीम में शामिल रहे हैं—

  • “टेलीविज़न एक विश्वसनीय साथी”

  • “सूचना, सशक्तिकरण और कनेक्टिविटी”

उम्मीद की जा रही है कि 2025 का थीम डिजिटल दुष्प्रचार, शांति-निर्माण में टीवी की भूमिका और स्ट्रीमिंग युग में मीडिया साक्षरता जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा। थीम आमतौर पर प्रसारकों और मीडिया पेशेवरों को प्रेरित करता है कि वे विचार करें कि टेलीविजन कैसे सत्य, समावेशन और वैश्विक संवाद का माध्यम बन सकता है।

World Television Day का महत्व 

टेलीविज़न सिर्फ मनोरंजन नहीं है—यह एक ऐसा माध्यम है जो भाषा, सीमाओं और संस्कृतियों से परे जाकर दुनिया को जोड़ता है। विश्व टेलीविज़न दिवस पर दुनिया इन पहलुओं का उत्सव मनाती है—

  • जनता को शिक्षित करने और मीडिया साक्षरता को बढ़ावा देने में टीवी की भूमिका

  • जलवायु परिवर्तन, मानवाधिकार, गरीबी और जनस्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने की क्षमता

  • विविध कहानियों, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामाजिक भागीदारी के लिए मंच

  • शांति, लोकतंत्र और जागरूक नागरिकता के निर्माण में योगदान

डिजिटल युग में भी, जब दुनिया बिना फ़िल्टर वाले सोशल मीडिया से भरी हुई है, टेलीविज़न आज भी एक विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है।

भारत में टेलीविज़न का सफर: एक संक्षिप्त इतिहास 

टेलीविज़न की शुरुआत (1959)

भारत में टेलीविज़न का आगमन 1959 में हुआ, जब ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के तहत प्रयोगात्मक प्रसारण शुरू किया गया। शुरुआत में यह स्कूलों और किसानों को शिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसने जमीनी स्तर पर सीखने और विकास में टीवी की क्षमता को उजागर किया।

रंगीन प्रसारण का दौर (1982)

1982 में दिल्ली एशियाई खेलों के दौरान भारत में रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई। इस तकनीकी बदलाव ने टीवी को अधिक घरों तक पहुँचाया और इसे शहरी भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया।

उपग्रह क्रांति और मीडिया विस्तार (1990 का दशक)

1990 के दशक में सैटेलाइट टीवी की क्रांति ने भारतीय टेलीविज़न को बदल दिया। इस दौरान समाचार, मनोरंजन और क्षेत्रीय भाषाओं में कई चैनल उभरकर आए। इसने आज के व्यापक, बहुभाषी मीडिया लैंडस्केप की नींव रखी, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े टीवी बाज़ारों में शामिल हो गया।

टेलीविज़न पर प्रेरणादायी उद्धरण 

  • “टेलीविज़न आँखों के लिए च्यूइंग गम की तरह है।” – फ्रैंक लॉयड राइट

  • “मेरा मानना है कि अच्छी पत्रकारिता और अच्छा टेलीविज़न हमारी दुनिया को बेहतर बना सकते हैं।” – क्रिस्टियन अमनपुर

  • “टेलीविज़न एक ‘मीडियम’ है क्योंकि इसमें अच्छी चीज़ें बहुत कम देखने को मिलती हैं।” – फ्रेड एलन

  • “टेलीविज़न लाखों लोगों को एक ही समय में एक ही मज़ाक सुनने की अनुमति देता है—और फिर भी वे अकेले महसूस करते हैं।” – टी. एस. एलियट

ये उद्धरण इस माध्यम के जादू और सीमाओं—दोनों—को दर्शाते हैं।

स्थिर तथ्य 

  • मनाया जाता है: हर वर्ष 21 नवंबर

  • स्थापना: संयुक्त राष्ट्र महासभा, 1996

  • पहली बार मनाया गया: 1996 (World Television Forum के बाद)

  • उद्देश्य: संचार, शिक्षा और संस्कृति पर टीवी के प्रभाव को मान्यता देना

  • भारत में टीवी की शुरुआत: 1959 (AIR के तहत)

  • भारत में रंगीन प्रसारण की शुरुआत: 1982 (एशियाई खेल)

  • प्रमुख वृद्धि: 1990 के दशक में सैटेलाइट टीवी बूम

जानें दुनिया के किस देश से बनी हैं सबसे ज्यादा मिस यूनिवर्स?

मिस यूनिवर्स दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिताओं में से एक है, जहाँ अनेक देशों की प्रतिभाशाली महिलाएँ वैश्विक ताज के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। कुछ देशों ने यह खिताब कई बार जीता है, क्योंकि वहाँ की उम्मीदवारें गहन तैयारी, आत्मविश्वास और लंबे पेजेंट इतिहास के साथ मंच पर उतरती हैं। यह जानना कि किन देशों ने मिस यूनिवर्स का खिताब सबसे ज्यादा बार जीता है, हमें उनकी सफलता, लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में उनके प्रभाव को समझने में मदद करता है।

मिस यूनिवर्स 2025 अवलोकन 

मेक्सिको की फातिमा बॉश ने मिस यूनिवर्स 2025 का खिताब अपने नाम किया है। भारत की मनिका विश्वकर्मा इस प्रतियोगिता में टॉप 10 में तो जगह नहीं बना पाईं लेकिन वह काफी चर्चा में रहीं। इस साल की 74वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता थाईलैंड के नॉन्थाबुरी के पाक क्रेट स्थित इम्पैक्ट चैलेंजर हॉल में आयोजित हुई जिसमें साल 2024 की मिस यूनिवर्स विक्टोरिया केजर थेलविग ने मिस यूनिवर्स 2025 की विनर फातिमा को ताज पहनाया।

सबसे अधिक मिस यूनिवर्स खिताब वाला देश

मिस यूनिवर्स खिताब सबसे अधिक बार जीतने वाला देश संयुक्त राज्य अमेरिका है, जिसने कुल नौ ताज अपने नाम किए हैं। अमेरिका ने 1952 से लेकर 2025 तक कई दशकों में यह उपलब्धि हासिल की है। मजबूत तैयारी, उत्कृष्ट संवाद कौशल और आत्मविश्वास से भरी प्रतिभागियों के कारण अमेरिका विश्व मंच पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करता रहा है। इन बार-बार की गई सफलताओं से यह साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में अमेरिका की गहरी परंपरा और प्रभावशाली उपस्थिति है, जो उसे मिस यूनिवर्स इतिहास में शीर्ष स्थान दिलाती है।

टॉप-10 देश जिनके पास सबसे अधिक मिस यूनिवर्स खिताब 

कई देशों ने मिस यूनिवर्स का खिताब कई बार जीता है। इन विजेताओं ने न केवल अपने राष्ट्र का गौरव बढ़ाया, बल्कि दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित भी किया। नीचे वे शीर्ष 10 देश दिए गए हैं, जिनके पास सबसे अधिक मिस यूनिवर्स खिताब हैं:

Rank Country  No. of Miss Universe Titles
1. United States 9
2. Venezuela 7
3. Puerto Rico 5
4. Philippines 4
5. India 3
6. Mexico 3
7. South Africa 3
8. Sweden 3
9. Brazil 2
10. Japan 2

Ashes 2025-26 शेड्यूल: पूरे मैच, तारीखें और जगहें

एशेज़ 2025–26 क्रिकेट की सबसे पुरानी और तीखी प्रतिद्वंद्विता का एक और यादगार अध्याय लेकर आ रही है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जब पाँच प्रतिष्ठित टेस्ट स्थलों पर भिड़ने की तैयारी कर रहे हैं, दुनिया-भर के प्रशंसक दो महीनों तक चलने वाली रोमांचक रेड-बॉल क्रिकेट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। यह सीरीज़ नवंबर 2025 के अंत में शुरू होकर जनवरी 2026 की शुरुआत तक चलेगी, जिसमें लगातार उच्च-स्तरीय मुकाबले देखने को मिलेंगे। नीचे एशेज़ 2025–26 का पूरा कार्यक्रम—तारीखें, स्थल और मैच समय—दिया गया है, जिससे प्रशंसक हर पल की जानकारी रख सकें।

Test Dates Venue Teams Match Time Toss Time
1st Test 21–25 Nov 2025 Perth Stadium, Perth Australia vs England 7:50 AM (your time) 10:20 AM local (Perth) / 1:20 PM AEDT
2nd Test 4–8 Dec 2025 The Gabba, Brisbane Australia vs England 9:30 AM (your time) Announced Soon
3rd Test 17–21 Dec 2025 Adelaide Oval, Adelaide Australia vs England 5:00 AM (your time) Announced Soon
4th Test 26–30 Dec 2025 MCG, Melbourne Australia vs England 5:00 AM (your time) Announced Soon
5th Test 4–8 Jan 2026 SCG, Sydney Australia vs England 5:00 AM (your time) Announced Soon

Ashes 2025–26: कार्यक्रम और मैच कैलेंडर 

  • पहला टेस्ट मैच: 21–25 नवंबर 2025
  • स्थान: पर्थ स्टेडियम, पर्थ
  • टीमें: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड
  • समय: सुबह 7:50 बजे (आपके स्थानीय समय अनुसार)

टॉस का समय:

  • पर्थ में पहला गेंद शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:20 बजे डाली जाएगी।
  • यह समय सिडनी और मेलबर्न में दोपहर 1:20 बजे AEDT होगा।

पर्थ स्टेडियम, पर्थ के बारे में 

पर्थ स्टेडियम—जिसे ऑप्टस स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है—ऑस्ट्रेलिया के सबसे आधुनिक और शानदार क्रिकेट स्थलों में से एक है। जनवरी 2018 में खोला गया यह स्टेडियम अपने विश्व-स्तरीय सुविधाओं और रोमांचकारी मैच माहौल के कारण खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों का पसंदीदा बन गया है।

सुंदर स्वान नदी के किनारे स्थित यह विशाल एरीना 60,000 से अधिक दर्शकों की क्षमता रखता है, जिससे यह देश के सबसे बड़े खेल परिसरों में शामिल है। पर्थ की तेज़ और उछालभरी पिचें दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं, जो अक्सर तेज़ गेंदबाजों को भरपूर मदद देती हैं। कठोर सतह, अतिरिक्त कैरी और तीखी बाउंस इसे विदेशी बल्लेबाज़ों के लिए चुनौतीपूर्ण बनाती है, खासकर श्रृंखला की शुरुआत में।

स्टेडियम की लाइटिंग और देखने के कोण विश्व-स्तर के माने जाते हैं, जो दिन और रात दोनों तरह के टेस्ट मैचों में बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। अत्याधुनिक डिजाइन, आरामदायक सीटें, उन्नत LED लाइटिंग और उत्कृष्ट दर्शक सुविधाएँ इसे और भी खास बनाती हैं।

नवंबर के दौरान पर्थ का मौसम आम तौर पर गर्म, शुष्क और धूपदार रहता है, जिससे पिच और कड़ी होती है और तेज़ गेंदबाज़ों को और भी फायदा मिलता है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाज़ी कुछ आसान हो जाती है, लेकिन शुरुआती ओवर अनुभवी बल्लेबाज़ों के लिए भी कठिन साबित होते हैं।

समग्र रूप से, पर्थ स्टेडियम अपनी गति-अनुकूल परिस्थितियों, रोमांचक माहौल और ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ी की पहचान के साथ एशेज़ श्रृंखला का तीखा और ऊर्जावान आगाज़ करता है।

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